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21 July का इतिहास : जिन ʼटायरʼ और ʼट्यूबʼ पर आप शान से चलते हैं ना, वो हमें आज ही के दिन मिले थे..पढ़ें आज का इतिहास

Today History: इतिहास के कुछ ऐसे आविष्कार हैं, जिन्होंने ना सिर्फ हमारे जीवन को आसान बनाया, बल्कि हम उसका लुत्फ आज भी उठा रहे हैं. आजकल सड़कों पर जो गाड़ियां सरपत दौड़ती हैं, वो दौड़ती हैं अपने व्हील्स पर और पहियों में लगे होते हैं टायर और ट्यूब, तो आज का इतिहास इसी रोचक जानकारी पर है. दरअसल, आप जिन ट्यूब और टायर पर मस्त होकर सफर करते हैं, उनका आविष्कार आज ही के दिन यानि 21 जुलाई 1888 को ब्रिटेन में हुआ था.

21 जुलाई का दिन सिर्फ इसी बात से खास नहीं है, बल्कि आज ही के दिन 1883 में भारत के पहले सार्वजनिक थियेटर की शुरूआत कोलकाता में हुई थी. 21 जुलाई 1883 को इस थिएटर में ‘दक्ष यज्ञ’ नामक नाटक का मंचन हुआ था. इस नाटक को गिरीश चंद्र घोष ने लिखा था और उन्होंने ही इसमें मुख्य किरदार निभाया था.

21 जुलाई का दिन देश की महिलाओं को गर्व करने का मौका भी देता है. आज ही के दिन हमारे देश को प्रतिभा सिंह पाटिल के रूप में भारत की पहली महिला राष्ट्रपति मिली थीं. 19 दिसंबर 1934 को जन्मीं प्रतिभा देवीसिंह पाटिल 2007-2012 तक देश की 12वीं राष्ट्रपति बनीं, वह देश का यह सर्वोच्च संवैधानिक पद ग्रहण करने वाली पहली महिला थीं. वह 21 जुलाई को राष्ट्रपति चुनाव में विजयी रहीं और 25 जुलाई 2007 को उन्हें राष्ट्रपति के रूप में शपथ दिलाई गई थी. 

वहीं, देश-दुनिया के इतिहास में 21 जुलाई की तारीख पर दर्ज अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं पर नजर डालें, तो इस तरहे हैं... 

21 जुलाई का इतिहास 

1883 : कोलकाता में भारत के पहले सार्वजनिक थियेटर की शुरुआत हुई.

1884 - लॉर्डस के मैदान पर पहला क्रिकेट टेस्ट मैच खेला गया.

1888 : ब्रिटेन के आविष्कारक डनलप ने टायर और टयूब तैयार किए, जिससे परिवहन के साधनों की गति बढ़ी.

1904 : 13 साल तक चले निर्माण कार्य के बाद रूस में 4607 किलोमीटर लम्बी ट्रांस साइबेरियन रेल लाइन का काम पूरा.

1940 : सोवियत संघ ने एस्टोनिया लातविया और लिथुआनिया पर कब्जा किया.

1960 - श्रीलंका (तब सीलोन) में सिरिमावो भंडारनायके विश्व की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं.

1962 : भारत चीन के बीच सीमा पर युद्ध.

1963 : काशी विद्यापीठ को विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया.

1988 : भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह (इनसैट-1सी) का प्रक्षेपण.

2007 : वाशिंगटन में चार दिन के विचार-विमर्श के बाद भारत-अमेरिका परमाणु समझौते का प्रारूप तैयार किया गया.

2007 : प्रतिभा पाटिल भारत की पहली महिला राष्ट्रपति बनीं.

2008 : नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भारतीय मूल के रामबरन यादव को नेपाल का पहला राष्ट्रपति चुना गया.

2013 : बेल्जियम के महाराज अल्बर्ट द्वितीय ने बेटे फिलिप की ताजपोशी के लिए राजगद्दी छोड़ी.

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Chilla Recipe Ideas: अब नाश्ते की टेंशन नहीं, ट्राई करें ये झटपट और आसान चीला आइडियाज

Chilla Recipe Ideas: अगर आप भी सुबह के नाश्ते को लेकर टेंशन में रहते हैं तो आप ये चीला आइडियाज की मदद ले सकते हैं. ये आसानी से बन जाते हैं और इनका टेस्ट भी लाजवाब होता है. ऑफिस या कॉलेज जाने की जल्दी आप इन रेसिपी को जरूर बनाएं.

Chilla Recipe Ideas: चीला एक ऐसी डिश है जिसको आप आसानी से बना सकते हैं. अगर आप कुकिंग में नए हैं हैं तो आप इसे जरूर ट्राई करें. ये एक ऐसी डिश है जो सुबह की भागदौड़ में आप बना सकते हैं. ये हेल्दी और टेस्टी ऑप्शन है. चीला की सबसे खास बात ये है कि इसे कई चीजों से आप बना सकते हैं. तो आइए जानते हैं इस आर्टिकल से कुछ चीला आइडियाज. 

सिंपल बेसन चीला

बेसन चीला एक आसान चीला रेसिपी है. इसमें आप बेसन के घोल में नमक और कुछ मसाले डालकर बना सकते हैं. आप चाहे तो इसमें पसंद कि सब्जियों को भी डाल सकते हैं.

हरी मूंग से बनाएं चीला

आप हरी मूंग से भी चीला बना सकते हैं. मूंग को पानी में भिगो दें. फिर इसे पीस लें. इसमें आप अदरक और नमक को डालकर एक घोल को तैयार करें. इससे आप चीला को बनाएं. ये पोषक तत्व से भरपूर एक बेहतरीन ब्रेकफास्ट ऑप्शन है. 

सूजी चीला

अगर आप कुछ अलग ट्राई करना चाहते हैं तो आप सूजी से चीला बना लें. आप इसमें पसंद की सब्जियों को डालें और इसे नाश्ते में एंजॉय करें. इसको आप चटनी या अचार के साथ सर्व करें. 

लौकी चीला

लौकी की सब्जी खाकर बोर हो चुके हैं तो आप लौकी चीला को जरूर ट्राई करें. ये टेस्टी है और आसानी से तैयार हो जाता है. 

आटा का चीला

आप गेंहू के आटे से भी चीला बना सकते हैं. आप इससे नमकीन और मीठा दोनों तरह की रेसिपी बना सकते हैं. आटा से बना मीठा चीला खाने में बच्चों को भी बहुत पसंद आता है. आप इससे नमकीन चीला भी बना सकते हैं. इसमें आप मनपसंद की सब्जियों को भी डालें.

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20 जुलाई का इतिहास : आज ही के दिन भारत की पहली महिला न्यायाधीश अन्ना चांडी का हुआ निधन..अभिनेता नसीरुद्दीन शाह का जन्म..पढ़ें आज का इतिहास

20 July History: भारत के सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश का आर भानुमति जन्म 20 जुलाई 1955 को हुआ। सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश से पहले, उन्होंने झारखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश और मद्रास उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में कार्य किया हैं। इसके अलावा, आर भानुमति महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, औरंगाबाद की चांसलर के रूप में भी कार्य कर चुकी हैं।

आज के इस लेख में हम आपको 20 जुलाई से जुड़े इतिहास के बारे में बता रहे हैं। जानिए इस दिन से जुड़ी प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं कौन सी है। साथ ही हम ये भी जानेंगे कि 20 जुलाई को किन प्रमुख हस्तियों का जन्म हुआ था और किनकी मृत्यु हुई थी।

356 ई.पू.- महान विजेता सिकंदर का जन्म 356 ईसा पूर्व 20 जुलाई को हुआ था।

1296- अलाउद्दीन खिलजी ने 20 जुलाई 1296 के दिन स्वयं को दिल्ली का सुल्तान घोषित किया।

1761- माधव राव 20 जुलाई 1761 को प्रथम पेशवा बने।

1820: सार्वजनिक कार्यकर्ता गणेश वासुदेव जोशी का जन्म 20 जुलाई 1820 को हुआ।

1905- बंगाल के पहले विभाजन को 20 जुलाई 1905 में भारतीय सचिव ने मंजूरी दी।

1914- आधुनिक हिन्दी साहित्य के शीर्ष निर्माताओं में से एक बालकृष्ण भट्ट का निधन 20 जुलाई 1914 को हुआ।

1919- माउंट एवरेस्‍ट पर सबसे पहले चढ़ने वाले सर एडमंड हिलेरी का जन्‍म 20 जुलाई 1919 में हुआ।

1921- प्रसिद्ध भारतीय शास्त्रीय संगीतकार तथा तबला वादक सामता प्रसाद का जन्म 20 जुलाई 1921 को हुआ।

1922- असम राज्य के प्रथम असहयोगी और असम में कांग्रेस के संस्थापकों में से एक चन्द्रनाथ शर्मा का निधन 20 जुलाई 1922 को हुआ।

1929- हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता राजेंद्र कुमार का जन्म 20 जुलाई 1929 हुआ।

1965- भारत के प्रसिद्ध क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त का निधन 20 जुलाई 1965 को हुआ।

1966- भारत की पहली महिला न्यायाधीश अन्ना चांडी का निधन 20 जुलाई 1966 में हुआ।

1969- अरुणाचल प्रदेश के भूतपूर्व मुख्यमंत्री कलिखो पुल का जन्म 20 जुलाई 1969 को हुआ।

1969-20 जुलाई 1969 को चंद्रमा की सतह पर कदम रखने वाले एस्‍ट्रोनॉट नील आर्मस्ट्रांग पहले मनुष्य बने।

1950- भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध तथा प्रतिभाशाली अभिनेता नसीरुद्दीन शाह का जन्म 20 जुलाई 1950 को हुआ।

1972- प्रसिद्ध पा‌र्श्वगायिका गीता दत्त का निधन 20 जुलाई 1972 को हुआ।

1982- ब्रिटिश सैन्‍य अधिकारी की पुत्री मीरा बेन का निधन 20 जुलाई 1982 को हुआ, जिन्होंने 'भारतीय स्वतंत्रता संग्राम' में महात्मा गांधी के सिद्धांतों से प्रभावित होकर खादी का प्रचार किया।

2016- अयोध्या-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद के मुख्य पैरोकार हाशिम अंसारी का निधन 20 जुलाई 2016 को हुआ।

2013- खुर्शीद आलम खान एक भारतीय राजनीतिज्ञ और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस राजनीतिक दल के वरिष्ठ नेता थे। जिनका निधन 20 जुलाई 2013 को नई दिल्ली, भारत में हुआ। वह 1991 से 1999 तक कर्नाटक के राज्यपाल और 1989 से 1991 तक गोवा के राज्यपाल रहे। इससे पहले, वह भारत सरकार में केंद्रीय विदेश मंत्री थे। वह जामिया मिलिया इस्लामिया से जुड़े थे।

2017- 20 जुलाई 2017 को राम नाथ कोविन्द भारत के 14वें राष्ट्रपति निर्वाचित हुए।

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Lauki Halwa Recipe : बिना किसी झंझट के इस तरह बनाएं हेल्दी लौकी का हलवा

Lauki Halwa Recipe : अगर आप कुछ हेल्दी और स्वादिष्ट हलवा खाना चाहते हैं, तो लौकी का हलवा एक बेस्ट ऑप्शन हैं. ये खाने में हल्का, पौष्टिक और झटपट बनने वाला होता है, जो बच्चों से लेकर बड़े तक सभी को बहुत पसंद आता है.

  

Lauki Halwa Recipe: अगर आप मीठे में कुछ ऐसा खाना चाहते हैं, जो स्वाद में लाजवाब हो, सेहतमंद हो और आसानी से घर पर बन जाए, तो लौकी का हलवा आपके लिए एक बहुत अच्छा ऑप्शन है. ये पचने में हल्की और शरीर को ठंडक देती है. इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन, फाइबर जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए बहुत फायदेमंद है. इसका हलवा खासतौर पर उपवास, त्योहारों या खास मौकों पर बनाया जाता है. तो आइए जानते हैं इसे बनाने की विधि के बारे में. 

लौकी का हलवा बनाने के लिए सामग्री 

लौकी (गार्निश किया हुआ) – 2 कप

दूध – 2 कप

चीनी – स्वादानुसार

घी – 2 चम्मच 

इलायची पाउडर – आधा छोटा चम्मच

काजू, बादाम, पिस्ता (कटे हुए)

किशमिश – 1 चम्मच 

लौकी का हलवा बनाने की विधि

सबसे पहले एक कड़ाही में घी गरम करें, फिर इसमें गार्निश किया हुआ लौकी डालें और 5-7 मिनट तक धीमी आंच पर भून लें. 

जब इसमें कच्ची महक निकल जाए, तो उसमें दूध डालें. 

अब कुछ मिनट के लिए लौकी को दूध में पकने दें जब तक दूध सूख न जाए. 

अब इसमें स्वादानुसार चीनी डालें और हलवे को चलाते रहें. 

इसे अच्छे से धीमी आंच पर पकाएं, फिर इसके ऊपर से इलायची पाउडर डालें और अच्छे से मिलाएं. 

अब इसमें कटे हुए ड्राय फ्रूट्स और किशमिश डालें और अच्छे से चलाकर पकाते रहें, जब्तक हलवा से घी न छोड़ने लगे. 

गैस बंद करके हलवा को सर्व करें और ऊपर से सूखे मेवे को सजाकर गरमा गरम सबको परोसें.

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19 जुलाई का इतिहास : आज ही के दिन 14 निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ..प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के इस फैसले का हुआ विरोध..

History of 19 July : 19 जुलाई 1969 यानी आज से ठीक 52 साल पहले उस वक्त की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी एक ऑर्डिनेंस लेकर आईं। ‘बैंकिंग कम्पनीज आर्डिनेंस’ नाम के इस ऑर्डिनेंस के जरिए देश के 14 बड़े निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया। इस फैसले को इंदिरा गांधी द्वारा लिए गए बड़े फैसलों में गिना जाता है।

दरअसल दूसरे विश्वयुद्ध के बाद यूरोप में बैंकों को सरकार के अधीन करने के विचार ने जन्म लिया। विश्वयुद्ध की वजह से देशों को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा था। इससे इन देशों की आर्थिक हालत कमजोर हो गई थी। संकट से उबरने के लिए कई यूरोपीय देशों ने बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया था।

भारत में भी 1949 में भारतीय रिजर्व बैंक का राष्ट्रीयकरण किया गया। अब तक भारत में जितने भी निजी बैंक थे, वे सभी उद्योगपतियों के हाथों में थे। लोग बैंकों में जाने से कतराते थे। साथ ही बैंकों का कारोबार केवल बड़े शहरों तक ही सीमित था।

इंदिरा का कहना था कि बैंकों को ग्रामीण क्षेत्रों में ले जाना जरूरी है। निजी बैंक देश के सामाजिक विकास में अपनी भागीदारी नहीं निभा रहे हैं। इसलिए बैंकों का राष्ट्रीयकरण जरूरी है। हालांकि इंदिरा का ये फैसला इतना विवादित था कि खुद उनकी ही सरकार के वित्त मंत्री मोरारजी देसाई इसके खिलाफ थे।

राष्ट्रीयकरण के बाद बैंकों की शाखाओं में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई। शहरों से निकलकर बैंक गांवों और कस्बों में खुलने लगे। इससे भारत की ग्रामीण आबादी को बैंकिंग से जुड़ने का मौका मिला। 3 दशक में ही देश में बैंकों की शाखाएं 8 हजार से बढ़कर 60 हजार के आंकड़े को पार कर गईं।

जिन 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया, उनके पास उस वक्त देश की करीब 80 फीसदी जमा पूंजी थी, लेकिन इस पूंजी का निवेश केवल ज्यादा लाभ वाले क्षेत्रों में ही किया जा रहा था। दूसरी ओर आजादी के 10 साल के भीतर ही 300 से भी ज्यादा छोटे-मोटे बैंक कंगाल हो गए थे। इसमें लोगों की करोड़ों की जमा पूंजी भी डूब गई थी। इस वजह से सरकार ने इन बैंकों की कमान अपने हाथ में लेने का फैसला लिया।

इस फैसले के क्रियान्वयन का जिम्मा इंदिरा ने अपने प्रधान सचिव पीएन हक्सर को सौंपा। कहा जाता है कि हक्सर सोवियत संघ की समाजवादी विचारधारा से प्रभावित थे और वहां बैंकों पर सरकार का नियंत्रण था। 1967 में इंदिरा ने कांग्रेस पार्टी में 10 सूत्रीय कार्यक्रम पेश किया।

इस कार्यक्रम में बैंकों पर सरकार का नियंत्रण, राजा-महाराजाओं को मिलने वाली सरकारी मदद और न्यूनतम मजदूरी का निर्धारण मुख्य बिंदु थे। 7 जुलाई 1969 को कांग्रेस के बेंगलुरु अधिवेशन में इंदिरा ने बैंकों के राष्ट्रीयकरण का प्रस्ताव रखा।

इंदिरा के इस फैसले का तत्कालीन वित्त मंत्री मोरारजी देसाई ने विरोध किया। इसके बाद इंदिरा ने मोरारजी देसाई का मंत्रालय बदलने का आदेश दे दिया। इससे नाराज होकर मोरारजी देसाई ने वित्त मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।

19 जुलाई 1969 को इंदिरा ने एक अध्यादेश जारी किया और 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर दिया। इसके बाद अप्रैल 1980 में 6 और बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया।

1941: टॉम एंड जैरी को मिला था अपना नाम

1941 में आज ही के दिन बच्चों के पसंदीदा कार्टून कैरेक्टर टॉम एंड जैरी को अपना नाम मिला था। दरअसल 1940 में “पुस गेट द बूट्स” नाम की एक कार्टून फिल्म में टॉम एंड जैरी पहली बार लोगों के सामने आए थे। ये फिल्म इतनी सफल हुई कि इसे बेस्ट एनिमेटेड फिल्म के लिए ऑस्कर नॉमिनेशन मिला। हालांकि इस फिल्म में दोनों कैरेक्टर का नाम जेस्पर और जिंक्स था।

जब ये मूवी फेमस हुई तो एनिमेटर्स ने दोनों कैरेक्टर को दूसरा नाम देने के बारे में सोचा। टॉम एंड जैरी को बनाने वाले विलियम हैना और जोसेफ बार्बेरा ने दोनों की जोड़ी को बढ़िया नाम देने वाले को 50 डॉलर का इनाम देने की घोषणा की। एनिमेटर जॉन कार ने चूहे-बिल्ली की इस जोड़ी को टॉम एंड जैरी नाम दिया।

विलियम हैना और जोसेफ बार्बेरा।

विलियम और जोसेफ को ये नाम पसंद आया। दोनों ने मिलकर ‘द मिडनाइट स्नैक’ नाम से दूसरी फिल्म बनाई। 19 जुलाई 1941 को ये फिल्म रिलीज हुई। इस फिल्म में पहली बार चूहे और बिल्ली को टॉम एंड जैरी नाम दिया गया।

आज के दिन को इतिहास में इन महत्वपूर्ण घटनाओं की वजह से भी याद किया जाता है...

2010: कोलकाता में एक ट्रेन दुर्घटना में 63 लोगों की मौत हो गई। 1985: स्कूल टीचर क्रिस्टा मैकोलिफ को अंतरिक्ष मिशन के लिए चुना गया। पहली बार किसी टीचर को अंतरिक्ष मिशन के लिए चुना गया था। हालांकि जनवरी 1986 में मिशन पर जाने के दौरान ही चैलेंजर में विस्फोट से क्रिस्टा का निधन हो गया।

1980: मॉस्को में ओलिंपिक की शुरुआत हुई। अफगानिस्तान में सोवियत संघ की सेना के दखल से कई देशों ने इन खेलों का बहिष्कार किया।

1961: ट्रांस वर्ल्ड एयरलाइंस ने फर्स्ट क्लास पैसेंजर्स को फ्लाइट में मूवीज दिखाने की शुरुआत की।

1952: इंग्लैंड के खिलाफ फॉलोऑन खेलते हुए पूरी भारतीय क्रिकेट टीम 82 रन पर आउट हो गई।

1947: बर्मा के प्रधानमंत्री आंग सेन की रंगून में हत्या कर दी गई।

1903: फ्रेंच साइक्लिस्ट मोरिस गेरिन ने 2,428 किलोमीटर लंबा पहला टूर डी फ्रांस जीता।

1827: क्रांतिकारी मंगल पांडे का जन्म उत्तर प्रदेश के फैजाबाद जिले में हुआ।

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Recipe : प्‍याज नहीं, बार‍िश के मौसम में इस रेस‍िपी से बनाएं कॉर्न पकौड़े..शाम‍ की चाय का मजा हो जाएगा दोगुना

Recipe : मानसून में गरमा-गरम कॉर्न पकौड़े मिल जाएं, तो मजा ही आ जाता है। इन्हें बनाना बहुत आसान है और ये शाम के नाश्ते के लिए एकदम परफेक्ट हैं।

सामग्री :

दो कप ताजे या फ्रोजन कॉर्न

बेसन आधा कप

चावल का आटा दो चम्‍मच

प्याज ए‍क बारीक कटा हुआ

हरी मिर्च

अदरक-लहसुन का पेस्ट एक चम्मच

धनिया पत्ती बारीक कटी हुई

हल्दी पाउडर एक चाैथाई

लाल मिर्च पाउडर स्वादानुसार

गरम मसाला आधा चम्मच

जीरा आधा चम्मच

नमक स्वादानुसार

पानी

तेल

विधि :

सबसे पहले अगर आप ताजे भुट्टे का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो उन्हें उबाल लें या स्टीम कर लें।

आधे दानों को दरदरा पीस लें।

बाकी को साबुत रहने दें।

अब एक बड़े कटोरे में पिसे हुए और साबुत भुट्टे के दाने लें।

इसमें बेसन, चावल का आटा, बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च, अदरक-लहसुन का पेस्ट, धनिया पत्ती, हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, गरम मसाला, जीरा और नमक डालें।

सभी को अच्‍छे से म‍िक्‍स कर लें।

अब थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए गाढ़ा बैटर तैयार करें।

ध्‍यान रहे बैटर को बहुत पतला नहीं करना है।

अब एक कड़ाही में तेल गरम करें।

जब तेल गरम हो जाए, तो चम्मच या हाथों की मदद से पकौड़े को गरम तेल में डालें।

पकौड़ों को सुनहरा और क्रिस्पी होने तक तलें।

अब पकौड़ों काे टि‍शू पर न‍िकाल लें।

गरमा-गरम कॉर्न पकौड़ों को आप हरी चटनी, इमली की चटनी या टोमैटो सॉस के साथ परोस सकती हैं।

इसे चाय के साथ भी सर्व क‍िया जा सकता है।

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18 जुलाई का इतिहास : आज भारतीय महिला क्रिकेट खिलाड़ी स्मृति मंधाना का जन्म..अभिनेत्री, मिस वर्ल्ड प्रियंका चोपड़ा का जन्म..जाने आज का इतिहास

18 July History: 18 जुलाई 1947 को भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 लागू किया गया और उसको शाही स्वीकृति दी गई। भारत स्वतंत्रता अधिनियम यूनाइटेड किंगडम की संसद का एक अधिनियम था जिसने ब्रिटिश भारत को भारत और पाकिस्तान के दो नए प्रभुत्वों में विभाजित कर दिया। जिसके बाद 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान अस्तित्व में आया और उसी वर्ष 15 अगस्त 1947 को भारत का पहला स्वतंत्रता दिवस मनाया गया।

आज के इस लेख में हम आपको 18 जुलाई से जुड़े इतिहास के बारे में बता रहे हैं। जानिए इस दिन से जुड़ी प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं कौन सी है। साथ ही हम ये भी जानेंगे कि 18 जुलाई को किन प्रमुख हस्तियों का जन्म हुआ था और किनकी मृत्यु हुई थी।

1857- बंबई विश्वविद्यालय की स्थापना 18 जुलाई 1857 में की गई।

1861- भारत की पहली महिला स्नातक और पहली महिला फ़िजीशियन कादम्बिनी गांगुली का जन्म 18 जुलाई 1861 को हुआ।

1918- नोबेल पुरस्कार से सम्मानित दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला का जन्म 18 जुलाई 1918 को हुआ।

1935- सरस्वती कांची मठ के 69वें शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती का जन्म 18 जुलाई 1935 को हुआ।

1946- भारत के प्रसिद्ध साहित्यकार राजेश जोशी का जन्म 18 जुलाई 1946 को हुआ।

1947- भारतीय संसद ने 18 जुलाई 1947 में विवश होकर इस देश के स्वाधीनता के क़ानून को पारित किया।

1948- भारतीय सेना के वीर अमर शहीद पीरू सिंह का 18 जुलाई 1948 को निधन हुआ।

1955- पहली बार परमाणु ऊर्जा से उत्पादित बिजली को 18 जुलाई 1955 में व्यावसायिक रूप से बेचा गया।

1980- पूर्ण रूप से भारत निर्मित उपग्रह 'रोहिणी-1' पृथ्वी की कक्षा में 18 जुलाई 1980 को स्थापित हुआ।

1982- भारतीय बॉलीवुड-हॉलीवुड अभिनेत्री, एवं मिस वर्ल्ड 2000 प्रियंका चोपड़ा का जन्म 18 जुलाई 1982 को हुआ।

1996- भारतीय महिला क्रिकेट खिलाड़ी स्मृति मंधाना का जन्म 18 जुलाई 1996 को हुआ।

1998- भारत के प्रसिद्ध क्रांतिकारी अब्दुल हमीद कैसर का निधन 18 जुलाई 1998 को हुआ।

1999- विश्व के विमानन इतिहास में सर्वाधिक घंटे तक विमान उड़ाने का रिकॉर्ड बनाने वाले एडलोग का निधन 18 जुलाई 1999 को हुआ।

2002- डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को 18 जुलाई 2002 में देश के 12वें राष्ट्रपति के रूप में चुना गया।

2002- सड़कों के सुधार पर विस्तार के लिए, एशियाई विकास बैंक ने 18 जुलाई 2002 में छत्तीसगढ़ को 20 करोड़ डॉलर की सहायता मंजूर की।

2003- वाई. वेणुगोपाल रेड्डी 18 जुलाई 2003 को रिजर्व बैंक के नये गर्वनर बने।

2005- मनमोहन-बुश वार्ता के बाद अमेरिकी प्रशासन ने 18 जुलाई 2005 में भारत को परमाणु ऊर्जा और उच्च प्रौद्योगिकी विषयक आपूर्ति पर लगाये गए प्रतिबंधों को हटाने का फैसला किया।

2007- भारत, पाकिस्तान और मैक्सिको में हरित क्रान्ति के जनक कहे जाने वाले विश्व प्रसिद्ध अमेरिकी कृषि वैज्ञानिक नार्मन बोरलॉग को 18 जुलाई 2007 में क्रांग्रेसनल गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया।

2008- भारतीय मूल के सलमान रुश्दी ने 18 जुलाई 2008 में प्रमोशन टूर के दौरान 57 मिनट में एक हज़ार पुस्तकों पर हस्ताक्षर करने का रिकॉर्ड बनाया।

2012- बॉलीवुड फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता राजेश खन्ना का निधन 18 जुलाई 2012 को हुआ।

2016- हिन्दी फ़िल्मों की प्रसिद्ध पार्श्व गायिका मुबारक बेगम का निधन 18 जुलाई 2016 को हुआ।

2017- भारतीय कवि, संस्मरणकार, कहानीकार, उपन्यासकार तथा सहृदय समीक्षक अजित शंकर चौधरी का निधन 18 जुलाई 2017 को हुआ।

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Tasty Lauki Dal Recipe : ना बोरिंग, ना फीकी.! लौकी-दाल में छुपा है छत्तीसगढ़ी जायके का सीक्रेट

Tasty Lauki Dal Recipe: लौकी को सेहत के लिए फायदेमंद तो माना ही जाता है, लेकिन जब इसे दाल के साथ पकाया जाए तो इसका स्वाद और भी खास हो जाता है. छत्तीसगढ़ में पारंपरिक तौर पर बनने वाली लौकी दाल न केवल पौष्टिक होती है बल्कि इसका स्वाद भी बेहद मनभावन होता है. खास तौर पर सावन के महीने में व्रत या हल्का भोजन करने वालों के लिए यह रेसिपी एक बेहतरीन विकल्प है. आइए जानते हैं इसे घर पर कैसे बनाया जाता है.

लौकी और दाल की तैयारी

बिलासपुर जिले में रहने वाली रसोई में काम कर रही महिला भाग्यवती ने बताया कि सबसे पहले लौकी को अच्छे से छीलकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें. फिर दाल (अरहर या मूंग दाल) को साफ़ पानी से धोकर एक बर्तन में अलग रख लें. इसके बाद प्याज, लहसुन और हरी मिर्च को बारीक काट लें जिससे आगे की प्रक्रिया आसान हो.

मसाले का तड़का लगाना

कुकर में थोड़ा सा तेल डालें और उसे गर्म करें. तेल गरम होने के बाद उसमें सरसों के दाने, जीरा और कटे हुए लहसुन डालें. इसे हल्का सा ढककर कुछ सेकंड के लिए भूनें जब तक कि लहसुन सुनहरा न हो जाए.

प्याज और लौकी की भुनाई

अब कटे हुए प्याज और हरी मिर्च को मसाले में डाल दें और इसे हल्का सुनहरा होने तक भूनें. इसके बाद कटे हुए लौकी के टुकड़े डालें और उसे धीमी आंच पर तब तक भूनें जब तक उसका पानी पूरी तरह सूख न जाए.

टमाटर और मसाले डालना

जब लौकी का पानी सूख जाए, तब उसमें कटे हुए टमाटर और स्वाद अनुसार नमक डालें. इसे थोड़ी देर के लिए ढककर पकाएं ताकि टमाटर अच्छी तरह गल जाए. इसके बाद हल्दी, लाल मिर्च पाउडर और धनिया पाउडर डालकर अच्छी तरह मिलाएं.

दाल मिलाकर कुकर में पकाना

अब इसमें धोकर रखी गई दाल डाल दें और कुछ देर तक मसालों के साथ भूनें. इसके बाद आवश्यकता अनुसार पानी डालें और कुकर का ढक्कन लगाकर 5 सिटी आने तक पकाएं.

तैयार है सेहतमंद और स्वादिष्ट लौकी दाल

5 सिटी के बाद गैस बंद कर दें और कुकर का प्रेशर उतरने के बाद ढक्कन खोलें. अब आपकी स्वादिष्ट, पौष्टिक और छत्तीसगढ़ी अंदाज में बनी लौकी दाल परोसने के लिए तैयार है. इसे रोटी या चावल दोनों के साथ खाया जा सकता है.

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17 जुलाई का इतिहास : अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की स्थापना..हिन्दी, भोजपुरी अभिनेता रवि किशन का जन्म

History of 17 July : दुनिया के 120 से अधिक देशों में हर साल 17 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय न्याय दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की प्रासंगिकता पर विचार-विमर्श किया जाता है। सनद रहे 18 जुलाई, 1998 को अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की स्थापना की गई थी। यह अदालत गंभीर अपराधों के मामलों की सुनवाई करता है। पहली जुलाई 2002 से इस अदालत ने अपना कामकाज शुरू किया। हालांकि भारत अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की स्थापना के लिए रोम में हुई संधि से अलग है।

1945 में संयुक्त राष्ट्रसंघ के बनने के बाद से ही इस अदालत की स्थापना की कोशिश हो रही थी। 9 दिसंबर, 1948 को संयुक्त राष्ट्रसंघ ने इस बारे में पहली बार एक संकल्प पत्र सामने रखा। इसमें कहा गया कि इतिहास में नरसंहार जैसी क्रूर घटनाओं ने मानवता का बहुत नुकसान किया है। मानव जाति को इस तरह के जघन्य संकट से मुक्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है। इस संकल्प में नरसंहार को अंतरराष्ट्रीय अपराध माना गया। अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय का मुख्यालय हेग में है।

महत्वपूर्ण घटनाचक्र

1489ःनिजाम खान को सिकंदर शाह लोदी द्वितीय के नाम से दिल्ली का सुल्तान घोषित किया गया।

1712ः इंग्लैंड, पुर्तगाल और फ्रांस ने युद्धविराम संधि पर हस्ताक्षर किए।

1850ःहार्वर्ड वेधशाला ने तारे का पहला फोटोग्राफ लिया।

1893ःइंग्लैंड के आर्थर श्रेव्सबरी टेस्ट क्रिकेट में 1000 रन बनाने वाले पहले क्रिकेटर बने।

1919ःयूरोपीय देश फिनलैंड में संविधान को स्वीकृति प्रदान की गई।

1929ःसोवियत संघ ने चीन के साथ कूटनीतिक संबंध समाप्त किए।

1943ःब्रिटेन की रॉयल एयर फोर्स (आरएएफ) ने जर्मनी के पीनमुंदे रॉकेट बेस पर हमला किया।

1948ःभारत में महिलाओं को भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय पुलिस सेवा समेत सभी सार्वजनिक सेवाओं में भर्ती होने की पात्रता मिली।

1950ःपंजाब के पठानकोट शहर के पास भारत की पहली यात्री विमान दुर्घटना।

1987ःईरान और फ्रांस के बीच राजनयिक संबंध टूटे।

1994ःधूमकेतू शुमेकर लेवी-9 का पहला टुकड़ा बृहस्पति से टकराया।

1995ः फोर्ब्स पत्रिका ने माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स को दुनिया का सबसे अमीर आदमी घोषित किया।

2002ःरूस की स्वेतलाना फीफाप्रोवा ने पोल वाल्ट स्पर्द्धा में नया यूरोपीय रिकार्ड कायम किया।

2003ःउत्तर पूर्व कांगो के दुनिया शहर में जातीय हिंसा में 54 लोग मारे गए।

2006ः कैप कनैवरल (फ्लोरिडा) के स्पेस सेंटर में अपनी 13 दिन की अंतरिक्ष यात्रा पूरी कर डिस्कवरी अंतरिक्ष यान पृथ्वी पर सकुशल उतरा।

2008ः अफगानिस्तान में नाटो सेनाओं ने पाकिस्तान में छुपे आतंकियों पर मिसाइलों व हेलीकॉप्टरों से हमला किया।

2014ः मलेशियन एयरलाइंस की फ्लाइट को रूस समर्थक अलगाववादियों ने मिसाइल के जरिए गिरा दिया। हमले में फ्लाइट में सभी 283 यात्रियों की मौत।

जन्म

1943ः परमवीर चक्र सम्मानित भारतीय सैनिक फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों।

1969ः हिन्दी और भोजपुरी फिल्मों के अभिनेता रवि किशन।

1997ः भारतीय महिला फ्रीस्टाइल पहलवान पूजा सिहाग।

निधन

1928ः उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल, गवर्नर जनरल की गृह विभाग की समिति के सदस्य अलेक्जेन्डर मडीमैन।

1992ः प्रसिद्ध अभिनेत्री, गायिका और फिल्म निर्माता कानन देवी।

2005ः भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर आईजी पटेल।

2018ः जानीमानी अभिनेत्री रीता भादुड़ी।

2020ः प्रसिद्ध भारतीय फिल्म निर्देशक रजत मुखर्जी।

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16 जुलाई का इतिहास : अमेरिका ने चांद पर भेजा अपोलो-11, इसी में सवार होकर गए थे चांद पर पहला कदम रखने वाले नील आर्मस्ट्रांग

History of 16 July : 1950 के बाद से ही दुनिया की दो ताकतवर शक्तियों अमेरिका और सोवियत संघ के बीच स्पेस वॉर छिड़ चुकी थी। सोवियत संघ ने लूना मिशन के जरिए अंतरिक्ष में अपनी दखलअंदाजी बढ़ानी शुरू की। जनवरी 1966 में लूना-9 ने चांद की सतह पर सफलतापूर्वक लैंड किया। ये कारनामा करने वाला वो पहला स्पेसक्राफ्ट था।

उधर, अमेरिका भी अब तक स्पेस में कई स्पेसक्राफ्ट भेज चुका था। 1961 में अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी घोषणा कर चुके थे कि 60 के दशक के अंत तक अमेरिका चांद पर इंसान को भेजेगा। कैनेडी की इस घोषणा के बाद नासा मिशन की तैयारियों में लग गया। एक कठिन ट्रेनिंग के बाद नील आर्मस्ट्रांग, बज एल्ड्रिन और माइकल कॉलिंस को इस मिशन के लिए चुना गया।

5 साल बाद टेस्टिंग के लिए 1966 में नासा ने अनमैन्ड स्पेसक्राफ्ट को अंतरिक्ष में भेजा, लेकिन इसके अगले साल ही कैनेडी स्पेस सेंटर में भीषण आग लग गई और 3 एस्ट्रोनॉट की मौत हो गई। इसके बाद भी नासा अपने मिशन में जुटा रहा।

आखिरकार आज ही के दिन 1969 में अपोलो-11 स्पेसक्राफ्ट में नील आर्मस्ट्रांग, बज एल्ड्रिन और माइकल कॉलिंस को कैनेडी स्पेस सेंटर से चांद के सफर पर भेजा गया। अमेरिकी समयानुसार सुबह 9 बजकर 32 मिनट पर अमेरिका के कैनेडी स्पेस सेंटर से अपोलो-11 ने उड़ान भरी। लाखों लोगों ने इस नजारे को टीवी पर देखा।

76 घंटे में स्पेसक्राफ्ट 2 लाख 40 हजार किलोमीटर की दूरी तय कर चुका था। 19 जुलाई को स्पेसक्राफ्ट चांद की ऑर्बिट में पहुंच गया। अगले दिन नील आर्मस्ट्रांग और बज एल्ड्रिन ईगल मॉड्यूल के जरिए स्पेसक्राफ्ट से अलग हो गए और चांद की सतह पर जाने की तैयारी करने लगे।

उनके मॉड्यूल में केवल 30 सेकेंड का ईंधन ही बचा था और अभी भी दोनों चांद की सतह से दूर थे। दुनियाभर के लोगों की धड़कनें बढ़ने लगीं थीं। 20 जुलाई को शाम 4 बजकर 17 मिनट पर स्पेस सेंटर में वैज्ञानिकों को नील आर्मस्ट्रांग की तरफ से एक मैसेज मिला।

इस मैसेज में आर्मस्ट्रांग ने कहा, ‘हम लैंड कर चुके हैं।’ इसी के साथ पूरा अमेरिका खुशी से झूम उठा। चांद की सतह पर कदम रखते हुए आर्मस्ट्रांग ने कहा, 'एक इंसान के लिए यह एक छोटा कदम है, लेकिन सम्पूर्ण मानव जाति के लिए एक बड़ी छलांग है।'

चांद की सतह पर नील आर्मस्ट्रांग।

इसके कुछ देर बाद एल्ड्रिन भी चांद की सतह पर उतरे। दोनों वहां करीब ढाई घंटे रहे। उन्होंने चांद की सतह पर अमेरिका का झंडा भी लगाया, कुछ फोटो खींचे, सतह से मिट्टी इकट्ठी की और 24 जुलाई को धरती पर वापस लौट आए।

नील आर्मस्ट्रांग के चांद पर कदम रखने की 52वीं वर्षगांठ पर अमेजन के फाउंडर जेफ बेजोस भी अंतरिक्ष की उड़ान भरने वाले हैं।

1945: अमेरिका ने किया था दुनिया का पहला न्यूक्लियर टेस्ट

28 अक्टूबर 1942 को अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन रूजवेल्ट ने मैनहट्टन प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य एटॉमिक हथियार बनाना था। दरअसल अमेरिका को डर था कि जर्मनी गुपचुप तरीके से एटॉमिक हथियार बना रहा है। इसलिए अमेरिकी राष्ट्रपति ने 6000 से भी ज्यादा वैज्ञानिकों और आर्मी ऑफिसर की टीम को एटॉमिक वेपन बनाने के काम में लगाया और इस पूरे प्रोजेक्ट को प्रोजेक्ट मैनहट्टन नाम दिया गया। इस प्रोजेक्ट को लीड कर रहे थे वैज्ञानिक रॉबर्ट ओपनहाइमर। उन्हें ‘फादर ऑफ एटॉमिक बम’ भी कहा जाता है। सालों की मेहनत के बाद वैज्ञानिकों ने प्लूटोनियम आधारित एक बम बना लिया था जिसे गैजेट नाम दिया गया। अब इस बम को टेस्ट करने के लिए एक ऐसी जगह की तलाश थी, जहां धमाके और धमाके के बाद रेडियोएक्टिव पदार्थों के फैलने से कम से कम नुकसान हो।

बड़े सोच-विचार के बाद लॉस एलामोस से 210 मील दूर अलामोगोर्डो नामक एक रेतीली जगह को टेस्ट साइट के लिए चुना गया। बम को रखने के लिए एक 100 फीट ऊंचा फायरिंग टॉवर बनाया गया। वैज्ञानिकों और बाकी लोगों को विस्फोट सुरक्षित तरीके से दिखाने के लिए बड़े-बड़े बंकर बनाए गए और किसी तरह की अनहोनी होने पर आर्मी को भी रेडी रखा गया।

एटॉमिक बम 'गैजेट' को फायरिंग टॉवर पर चढ़ाते वैज्ञानिक।

12 जुलाई से बम के अलग-अलग हिस्सों को आर्मी वाहनों में टेस्ट साइट पर लाने का काम शुरू हुआ। 15 जुलाई तक बम को असेंबल कर दिया गया था। 16 जुलाई 1945 को सुबह 5.30 बजे धमाका हुआ। दुनिया ने इतना खतरनाक धमाका पहले कभी नहीं देखा था।

टेस्ट साइट पर 300 मीटर चौड़ा गड्ढा हो गया और 21 किलो टन ऊर्जा पैदा हुई। इस टेस्ट ने एक नए एटॉमिक युग की शुरुआत की। अमेरिका के लिए ये बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन अगले ही महीने अमेरिका ने जापान पर एटम बम गिराकर इस उपलब्धि की विनाशकता से भी दुनिया का परिचय करवाया।

16 जुलाई को इतिहास में इन महत्वपूर्ण घटनाओं की वजह से भी याद किया जाता है…

2018: जुपिटर ग्रह के 12 नए चांद खोजे गए, इसके बाद जुपिटर के कुल चांद की संख्या 79 हो गई।

1999: अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी के बेटे का एक विमान हादसे में निधन हो गया।

1979: सद्दाम हुसैन इराक के राष्ट्रपति बने। इस पद पर लगातार 24 साल तक काबिज रहे।

1965: फ्रांस और इटली को जोड़ने वाली 12 किलोमीटर लंबी सुरंग की औपचारिक शुरुआत हुई।

1909: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने वाली प्रमुख महिलाओं में से एक अरुणा आसफ अली का जन्‍म हुआ।

1856: हिंदू विधवाओं के पुनर्विवाह को कानूनी मान्यता मिली।

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15 जुलाई का इतिहास : भारत और विश्व में घटित घटनाएं, आज जन्मे चर्चित व्यक्ति, प्रसिद्ध व्यक्तियों के निधन..पढ़ें आज का इतिहास

History of 15 July : ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार जुलाई 15 किसी वर्ष में दिन संख्या 196 है और यदि लीप वर्ष है तो दिन संख्या 197 है। भारत और विश्व इतिहास में 15 जुलाई का अपना ही एक खास महत्व है, क्योंकि इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटी जो इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज होकर रह गईं हैं। आईये जानते हैं 15 जुलाई की ऐसी ही कुछ महत्त्वपूर्ण घटनाएँ जिन्हे जानकर आपका सामान्य ज्ञान बढ़ेगा। एकत्रित तथ्य ऐसे होंगे जैसे : आज के दिन जन्मे चर्चित व्यक्ति, प्रसिद्ध व्यक्तियों के निधन, युद्ध संधि, किसी देश के आजादी, नई तकनिकी का अविष्कार, सत्ता का बदलना, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवस इत्यादि।

15 जुलाई की महत्वपूर्ण घटनाएँ विश्व में

1240 स्वीडिश-नोवगोरोडियन वॉर्स-ए नोवगोरोडियन सेना ने अलेक्जेंडरनेवस्की के नेतृत्व में वर्तमान रूस के उस्त-इज़ोरा के पास नेवा नदी पर स्वेड्स को हराया।

1410 पोलैंड के साम्राज्य और लिथुआनिया के ग्रैंड डची ने पोलिश-लिथुआनियाई-ट्यूटनिक युद्ध की निर्णायक सगाई ग्रुनवल्ड की लड़ाई में ट्यूटनिक शूरवीरों के मठवासी राज्य को हराया।

1795 ‘मार्सिलेस फ्रांस का राष्ट्रगान बना।

1795 ‘ला मारसेइलेसी’ को फ्रांस का राष्ट्रीय गान घोषित किया गया।

1799 फ्रांसीसी सैनिकों ने मिस्र के बंदरगाह शहर राशिद के पास फोर्ट जुलिएन में रोसेटा स्टोन को खोल दिया।

1799 फ्रांसीसी सैनिकों ने मिस्र के बंदरगाह शहर राशिद के पास फोर्ट जुलिएन में रोसेटा स्टोन को खोल दिया।

1806 पाइक अभियान, एलबिसियाना क्षेत्र का पता लगाने के लिए जेबुलोन पाइक के नेतृत्व में सेंट लुइस, मिसौरी के पास शुरू हुआ।

1815 एक बोर्ड एचएमएस बेलेरोफ़न , नेपोलियन ने टॉरियन नेवी के कप्तान फ्रेडरिक लेविस मैटलैंड को अंततः नेपोलियन युद्धों को समाप्त करने के लिए आत्मसमर्पण कर दिया।

1815 एनबोर्ड HMS बेलरोफ़न, नेपोलियन ने नेपोलियन युद्धों को समाप्त करने के लिए रॉयल नेवी के कप्तान फ्रेडरिक लुईस मैटलैंड के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।

1864 अमेरिका में कैदियों से भरी हुई एक यात्री ट्रेन एक कोयला ट्रेन से टकरा गयी जिससे उसमें सवार 955 में से 65 लोग मारे गये और 109 घायल हो गये।

1867 सैन फ्रांसिस्को मर्चेंट एक्सचेंज खोला गया।

1870 रूपर्ट्स लैंड और कनाडा के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र हडसन की बे कंपनी के हस्तांतरण के बाद मैनिटोबा और उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र स्थापित किए गए थे।

1904 अमेरिका के लॉस एंजिल्स में पहला बौद्ध मंदिर बना।

1910 कार्लोस यूगेनिओ रेस्ट्रेपो को कोलंबिया का राष्ट्रपति चुना गया।

1910 एमिल क्रे​पलिन ने एलॉइस अल्जाइमर के नाम पर अल्जाइमर बीमारी का नाम दिया।

1910 अपनी पुस्तक क्लिनिकल साइकियाट्री में एमिल क्रैपेलिन ने अपने सहकर्मी अलोइस अल्जाइमर के नाम पर इसका नामकरण करते हुए इसेअल्जाइमर रोग बताया।

1916 दुनिया की सबसे बड़ी एयरोस्पेस कंपनी बोइंग शुरू हुई।

1916 विलियम बोइंग ने पेसिफिक एयरो प्रोडक्ट्स कंपनी को शामिल किया, जिसे बाद में बोइंग नाम दिया गया।

1918 मार्ने की दूसरी लड़ाई: युद्ध एक जर्मन हमले के साथ नदी मार्ने के पास शुरू हुआ।

1923 इटली की संसद ने नया संविधान स्वीकार किया।

1923 इतालियन संसद नया संविधान स्वीकार करता किया।

1940 शिकागो में 1940 लोकतांत्रिक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया।

1948 अमेरिका के राष्ट्रपति हैरी एस टूमैन दूसरे कार्यकाल के लिए निर्वाचित हुए।

1959 संयुक्त राज्य अमेरिका के इस्पात उद्योग के खिलाफ एक हड़ताल हुई।

1959 देश की लगभग हर स्टील मिल को बंद करते हुए पाँच सौ हज़ार अमेरिकी स्टीलकर्मी हड़ताल पर चले गए।

1961 स्पेन ने पुरुषों और महिलाओं के लिए समान अधिकारों को स्वीकार किया।

1966 वियतनाम युद्ध: संयुक्त राज्य अमेरिका और दक्षिण वियतनाम ने उत्तरी वियतनामी को वियतनामी विमुद्रीकृत क्षेत्र से बाहर करने के लिए ऑपरेशन हेस्टिंग्स शुरू किया।

1966 वियतनाम युद्ध: संयुक्त राज्य अमेरिका और दक्षिण वियतनाम ने उत्तरी वियतनामी को वियतनामी विमुद्रीकृत क्षेत्र से बाहर करने के लिए ऑपरेशन हेस्टिंग्स शुरू किया।

1967 एलए भेड़ियों ने ओटी में वाशिंगटन व्हिप्स को 6-5 से हराया। वह यूनाइटेड सॉकर एसोसिएशन के अध्यक्ष बन गए हैं। सफलता को सभी ने सराहा।

1967 U.S.S.R ने पूर्वी कजाखस्तान के सेमाईलिप्टिन्स्क में परमाणु परीक्षण किया है। इसने देश के अनुसंधान और वैज्ञानिक प्रगति के विकास में एक और लाभ जोड़ दिया है।

1967 पैलेस थिएटर न्यूयॉर्क सिटी में स्वीट चैरिटी बंद। 608 प्रदर्शनों के बाद इसे बंद कर दिया गया है। यह एक बहुत बडी सफ़लता थी।

1968 अमेरिका और तत्कालिन सोवियत संघ के बीच वाणिज्यिक विमान सेवा की शुरुआत हुई।

1970 डेनमार्क ने इटली को 2-0 से हराकर पहला महिला विश्व कप फुटबॉल जीता।

1971 अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने अपने चीन की यात्रा की घोषणा की।

1972 101 वां ब्रिटिश गोल्फ ओपन बंद घोषित किया गया है। ली ट्रेविनो ने मुइरफील्ड गुलेन में 278 की शूटिंग की। यह उसके लिए बहुत बड़ी सफलता थी।

1983 अर्मेनियाई चरमपंथी संगठन ASALA ने अपने अभियान पारे की मान्यता और आर्मेनियाई नरसंहार के लिए अभियान के हिस्से के रूप में ऑर्ली एयरपोर्ट पर टर्किशैट्स चेक-इन काउंटर पर बमबारी की।

1991 पुरुषों के प्रो बास्केटबॉल (USBL) गेम को अंजाम देने वाली पहली महिला सैंडि ऑर्टिज़-डेलविले है। खेल न्यू हेवन स्काईवॉक्स और फिलाडेल्फिया स्पिरिट के बीच खेला जाएगा।

1997 इटली के मशहूर फैशन डिजाइनर गिएनी वरसाचे की गोली मार कर हत्या हुई।

1997 अमेरिकी स्प्री किलर एंड्रयू क्यूननन ने फ्लोरिडा के मियामी में फैशन डिज़ाइनर गियान्नी वर्सासे को गोली मार दी।

2009 कैस्पियन एयरलाइंस की उड़ान 7908 उत्तर पश्चिमी ईरान में दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें सवार सभी 168 लोग मारे गए।

2010 कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में एक विनाशकारी बात हुई है। पूरे गाँव को जला दिया जाता है और 40,000 लोग अपने घरों से भाग जाते हैं।

2011 विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा दावा किए गए 5 मिलियन से अधिक इथियोपियाई को हैजा के विकास की संभावना है। यह तीव्र पानी के दस्त के ब्रेकआउट के कारण था।

2013 यू.के. गे विवाह के ऊपरी सदन द्वारा विवाह (सेम सेक्स जोड़े) विधेयक को मंजूरी दे दी गई है और 2014 से इंग्लैंड और वेल्स में विवाह की अनुमति दी जाएगी।

2014 Apple और IBM व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं के लिए ऐप्स विकसित करने के लिए सेना में शामिल हो गए हैं। हालिया समझौते से ऐप्पल को व्यापार बाजार का अधिक हिस्सा मिलेगा। यह एक मोबाइल कार्यबल को पूरा करेगा। आईबीएम को क्लाउड कंप्यूटिंग नीति पर सॉफ्टवेयर निगमन से लाभ मिलेगा।

2014 बोको हराम के इस्लामी आतंकवादी समूह के एक नेता, मोहम्मद ज़कारी को नाइजीरियाई पुलिस ने गिरफ्तार किया था। बोको हराम सैकड़ों मौत और अपहरण में चिंतित है। जकारी पर हाल ही में सात लोगों की हत्या का आरोप लगाया गया है।

15 जुलाई की महत्वपूर्ण घटनाएँ भारत में 

1857 1857 के भारतीय विद्रोह: कानपुर में दूसरा नरसंहार हुआ।

1926 भारत के शहर मुंबई में पहली बार बसों की शुरआत की गयी।

1955 प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु को सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न देने की घोषणा की।

15 जुलाई को मनाये जाने वाले राष्ट्रीय दिवस एवं अंतराष्ट्रीय दिवस 

श्री सनातन गोस्वामी का तिरोभाव दिवस राष्ट्रीय दिवस

विश्व युवा कौशल दिवस अंतरराष्ट्रीय दिवस

राष्ट्रीय प्लास्टिक सर्जरी दिवस राष्ट्रीय दिवस

15 जुलाई के दिन पैदा हुए प्रसिद्ध लोग 

1885 पैटोम ए. थानू पिल्लई / राजनीतिज्ञ / भारत

1902 कोका सुब्बा राव / वकील / भारत

1903 कुमारसामी कामराज / राजनीतिज्ञ / भारत

1903 के. कामराज / राजनीतिज्ञ / भारत

1906 आर.एस. मुगली / कवि / भारत

1925 बादल सरकार / नाटककार / भारत

1928 विमला देवी / सैनिक / भारत

1933 एम. टी. वासुदेवन नायर / लेखक / भारत

1936 कलानाथ शास्त्री / लेखक / भारत

1937 प्रभश जोशी / पत्रकार / भारत

1959 रमेश पोखरील निशंक / राजनीतिज्ञ / भारत

1985 अमी त्रिवेदी / अभिनेता / भारत

और भी

14 जुलाई का इतिहास : स्वीडन के अल्फ्रेड नोबेल ने डाइनामाइट से किए थे धमाके..आज इन्हीं के नाम पर है दुनिया का सबसे सम्मानित शांति पुरस्कार

History of 14 July : देश में आज नोबेल शांति पुरस्कार दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक है। पर यह पुरस्कार जिन अल्फ्रेड नोबेल के नाम पर स्थापित हुआ, उनका शांति से कोई लेना-देना नहीं था। बल्कि वे तो डाइनामाइट जैसे विस्फोटक बनाकर प्रसिद्ध हुए। आज ही के दिन यानी 14 जुलाई 1867 को पहली बार नोबेल ने डाइनामाइट का विस्फोट किया था।

अल्फ्रेड बर्नहार्ड नोबेल का जन्म 21 अक्टूबर 1833 को हुआ था। पिता इमानुएल नोबेल के दिवालिया होने के बाद 1842 में नोबेल 9 साल की उम्र में अपनी मां आंद्रिएता एहल्सेल के साथ नाना के घर सेंट पीट्सबर्ग चले गए। यहां उन्होंने रसायन विज्ञान और स्वीडिश, रूसी, अंग्रेजी, फ्रेंच और जर्मन भाषाएं सीखीं। पेरिस की एक निजी रिसर्च कंपनी में काम करने के दौरान अल्फ्रेड की मुलाकात इतावली केमिस्ट अस्कानियो सोब्रेरो से हुई। सोब्रेरो ने विस्फोटक लिक्विड ‘नाइट्रोग्लिसरीन’ का आविष्कार किया था। यह इस्तेमाल के लिए खतरनाक था। यहां से अल्फ्रेड की रुचि ‘नाइट्रोग्लिसरीन’ में हुई और उन्होंने निर्माण कार्यों में इसके इस्तेमाल का सोचा।

अल्फ्रेड नोबेल ।

1863 में स्वीडन लौटने पर अल्फ्रेड का फोकस ‘नाइट्रोग्लिसरीन’ को विस्फोटक के रूप में विकसित करने पर रहा। दुर्भाग्य से यह परीक्षण असफल रहा, जिसमें कई लोगों की मौत भी हो गई। मरने वालों में अल्फ्रेड का छोटा भाई एमिल भी शामिल था। इसके बाद स्वीडिश सरकार ने नाइट्रोग्लिसरीन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी। पर अल्फ्रेड नहीं रुके, उन्होंने झील में एक नाव को अपनी प्रयोगशाला बनाया। आखिरकार 1866 में उन्होंने नाइट्रोग्लिसरीन में सिलिका को मिलाकर एक ऐसा मिश्रण बनाया जो धमाकेदार तो था साथ ही इस्तेमाल करने के लिए सुरक्षित भी था।

1867 में 14 जुलाई को इस मिश्रण को नोबेल ने साउथ इंग्लैंड के सरे में पहाड़ी पर लोगों के सामने प्रदर्शित किया। उन्होंने विस्फोटकों को पहाड़ी से नीचे फेंका और धमाके की तीव्रता भी कंट्रोल कर दिखाई ताकि लोगों को इसके सुरक्षित होने का भी पता लग सके। अगले साल अल्फ्रेड नोबेल को इस आविष्कार को पेटेंट भी मिला। उनके इस आविष्कार को दुनिया आज डाइनामाइट के नाम से जानती है।

डाइनामाइट के आविष्कार के बाद कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री में इसका इतना ज्यादा इस्तेमाल होने लगा कि अल्फ्रेड ने 90 जगहों पर डाइनामाइट बनाने की फैक्ट्री खोली। 20 से ज्यादा देशों में ये फैक्ट्रियां थीं। वे लगातार फैक्ट्रियों में घूमते रहते थे। इस वजह से लोग उन्हें ‘यूरोप का सबसे अमीर आवारा’ कहते थे।

डाइनामाइट के अलावा अल्फ्रेड के नाम पर आज 355 पेटेंट हैं। उन्होंने अपनी वसीयत में मानवता को लाभ पहुंचाने वाले लोगों को अपनी संपत्ति में से पुरस्कार देने की इच्छा जताई थी, जो आज प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार नाम से जाना जाता है।

1850: पहली बार मशीन ने जमाकर दिखाई बर्फ

अमेरिका के फ्लोरिडा में एक डॉक्टर थे- जॉन गोरी। 1841 में फ्लोरिडा में यलो फीवर की वजह से हजारों लोगों की जान गई थी। जॉन का मानना था कि इस बीमारी के फैलने के पीछे गर्मी एक वजह है। इससे निपटने के लिए उन्होंने अपने क्लिनिक की खिड़की के पास एक बर्तन में बर्फ भरकर टांग दिया। इस बर्तन से हवा टकराकर कमरे में जाती और कमरा ठंडा रहता। उस समय बर्फ हासिल करना आसान नहीं था। ठंडी जगहों से बर्फ को जहाजों में भरकर सप्लाई किया जाता था। जॉन ने भी सोचा कि क्यों न बर्फ बनाई जाए? 1755 में विलियम क्लेन भी इथर को वैक्यूम में गर्म कर बर्फ बनाने का प्रयास कर चुके थे। तब गोरी ने मशीन पर काम शुरू किया और चार साल में उसे बना भी लिया।

जॉन गोरी द्वारा तैयार बर्फ बनाने की मशीन कुछ इस तरह दिखती थी।

गोरी को 14 जुलाई 1850 को एक काउंसिल मेंबर रोसन ने पार्टी दी थी। इस दौरान बर्फ खत्म हो गई। तब एक मेहमान ने कहा- अब हमें गर्म वाइन पीना पड़ेगी। इस पर रोसन ने खड़े होकर कहा - ‘फ्रांस की आजादी के मौके पर तो बिल्कुल नहीं”। उनके ऐसा बोलते ही वेटर बर्फ के साथ वाइन की बॉटल ले आए। इस बर्फ को गोरी ने ही बनाया था।

2013: भारत में भेजा गया था आखिरी टेलीग्राम

आज ही के दिन 2013 में भारत में आखिरी टेलीग्राम भेजा गया था। ये टेलीग्राम कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भेजा गया था। इसी के साथ 163 साल पुरानी टेलीग्राम सेवा को देश में बंद कर दिया गया।

भारत में 1851 में एक बतौर एक्सपेरिमेंट कलकत्ता से डायमंड हार्बर तक टेलीग्राम सेवा शुरू की गई थी। तब ईस्ट इंडिया कंपनी के लोग ही इसका इस्तेमाल करते थे। धीरे-धीरे पूरे देश में इसका इस्तेमाल शुरू हुआ और 1855 में आम लोगों के लिए भी टेलीग्राम भेजने की सुविधा शुरू हुई।

टेलीग्राम मशीन

मोर्स कोड के जरिए एक जगह से दूसरी जगह मैसेज भेजने की ये तकनीक एक जमाने में सबसे तेज संदेश भेजने का इकलौता जरिया थी। इंटरनेट, मोबाइल जैसी नई तकनीकों की वजह से यह अप्रासंगिक हो गई। नुकसान भी बढ़ता जा रहा था। भारत सरकार को टेलीग्राम सर्विस पर सालाना 100 करोड़ रुपए खर्च करना पड़ते थे, पर कमाई सिर्फ 75 लाख की थी। 12 जून 2013 को सरकार ने इस सर्विस को बंद करने का फैसला लिया और 14 जुलाई 2013 को आखिरी टेलीग्राम के बाद यह सेवा हमेशा के लिए बंद हो गई।

14 जुलाई को इतिहास में इन वजहों से भी याद किया जाता है...

2016: फ्रांस में बैस्टिल दिवस मना रहे लोगों पर एक आतंकवादी ने ट्रक चढ़ा दिया था, जिसमें 80 लोग मारे गए।

2015: नासा का न्यू होराइजन प्लूटो ग्रह पर जाने वाला पहला अंतरिक्ष यान बना।

1969: जयपुर में मालगाड़ी और यात्री गाड़ी की टक्कर में 85 लोगों की मौत।

1789: फ्रांस में क्रांति की शुरुआत। बैस्टिल की जेल पर पेरिस की जनता ने कब्जा कर बड़े हिस्से को तबाह कर दिया।

1636: शाहजहां ने औरंगजेब को दक्कन का वायसराय नियुक्त किया।

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Raigarh Elephants News : रायगढ़ के धरमजयगढ़ वन मंडल में 70 हाथियों का डेरा..यातायात हो रहा प्रभावित..पढ़ें पूरी ख़बर

Raigarh Elephants News/रायगढ़। जिले से एक वीडियो सामने आया है, जिसमें 70 से अधिक हाथियों का दल सड़क पार करते नजर आ रहा है. घटना धर्मजयगढ़ वन मंडल की है. क्षेत्र में बड़ी में विचरण कर रहे हाथियों को लेकर वन विभाग अलर्ट मोड पर है. हालांकि निगरानी में टीम को परेशानी हो रही है.

दरअसल, धर्मजयगढ़ वन मंडल में सीथरा से हाटी मार्ग को बड़ी संख्या में हाथियों का दल पार करते दिखा। 70 से अधिक हाथियों के झुंड में शावकों से लेकर विशालकाय हाथी नजर आए. हाथियों की मौजूदगी से इलाके में दहशत फैल गई है. हाथियों के सड़क पार करने सड़क पर काफी देर तक यातायात प्रभावित रहा.

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Karela Tasty Recipe : कड़वा नहीं, करेला लगेगा लजीज-शानदार..बस फॉलो करें ये छत्तीसगढ़ी रेसिपी

Karela Tasty Recipe: छत्तीसगढ़ की रसोइयों में जब करेला पकता है, तो उसकी खुशबू दूर तक फैलती है, लेकिन यह कोई आम करेला नहीं होता. यह वह करेला है जिसे लोग कभी कड़वा कहकर छोड़ देते थे, लेकिन अब उसी से जुड़ रही है स्वाद की नई पहचान. देसी मसालों की खुशबू, धीमी आंच पर पकने वाली सब्ज़ी, और मिट्टी की महक, यही बनाता है भरवां करेला को खास. कड़वाहट अब इसमें नहीं, बल्कि बीते समय की बातों में रह गई है, क्योंकि आज यह सब्ज़ी बन चुकी है स्वाद और परंपरा का अद्भुत मेल.

करेले से डरने की ज़रूरत नहीं, उसे भरिए स्वाद से

भाग्यवती बताती हैं कि भरवां करेला को लोग कड़वाहट की वजह से पसंद नहीं करते, लेकिन अगर उसे हल्का नमक लगाकर पहले पानी निचोड़ लिया जाए और फिर खास देसी मसाले से भरा जाए, तो इसका स्वाद लाजवाब हो जाता है.

मसाले की बात ही कुछ और

इस रेसिपी में प्याज, सौंफ, लहसुन, अमचूर और गुड़ जैसे देसी तत्वों का मेल होता है. भाग्यवती कहती हैं कि मसाले को धीमी आंच पर भूनना सबसे जरूरी चरण है क्योंकि यही स्वाद की गहराई तय करता है. एक चुटकी गुड़ इस सब्जी को हल्की मिठास देता है जो कड़वाहट को संतुलित करता है.

धीमी आंच पर पकता है असली स्वाद

मसाला भरने के बाद करेलों को हल्के सरसों तेल में, राई के तड़के के साथ, धीमी आंच पर पकाया जाता है. भाग्यवती इसे ढंककर पकाती हैं ताकि मसाला अंदर ही अंदर रस छोड़ता रहे और करेला नरम व स्वादपूर्ण बन जाए.

बासी भात हो या गरम रोटी, दोनों के साथ झटपट खत्म

यह भरवां करेला दाल-चावल, गरम रोटी या छत्तीसगढ़ी बासी भात के साथ खासकर पसंद किया जाता है. भाग्यवती बताती हैं कि ये सब्जी जितनी पुरानी होती है, उतनी ज्यादा स्वादिष्ट लगती है.

घरेलू रसोई से छत्तीसगढ़ी संस्कृति का स्वाद

भाग्यवती जैसी महिलाएं अपने हाथों से न केवल स्वाद परोसती हैं, बल्कि छत्तीसगढ़ी खानपान की परंपराओं को जीवित भी रखती हैं. उनकी रेसिपी न सिर्फ स्वाद से जुड़ी है, बल्कि घर की खुशबू और संस्कृति से भी.

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13 जुलाई का इतिहास : आतंक की काली छाया ने फिर मुंबई को घेरा..जाने देश दुनिया की प्रमुख घटनाएं

History of 13 July : इतिहास में 13 जुलाई का दिन भारत में एक दुखद घटना के साथ दर्ज है। दरअसल यह जुलाई महीने में तीन दिन में दूसरा दुखद दिन है। 2006 में 11 जुलाई को लोकल ट्रेन में बम धमाके हुए थे और वर्ष 2011 में 13 जुलाई के दिन मुंबई के तीन इलाकों झावेरी बाजार, ओपेरा हाउस और दादर में बम धमाके हुए। इन धमाकों की सिहरन ने एक बार फिर देश की आर्थिक राजधानी को घेर लिया। इस हादसे में 26 लोगों की जान चली गई और 130 से अधिक लोग घायल हुए।

देश-दुनिया के इतिहास में 13 जुलाई की तारीख पर दर्ज कुछ अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं का सिलसिलेवार ब्योरा इस प्रकार है:-

1645: अलेक्सेई रोमानोव अपने पिता माइकल की जगह रूस के शासक बने।

1803 : राजा राम मोहन राय और एलेग्जेंडर डफ ने पांच छात्रों के साथ स्कॉटिश चर्च कॉलेज शुरू किया।

1882: रूस में ट्रेन के पटरी से उतर जाने के कारण 200 लोगों की मौत हो गई।

1923: कैलिफोर्निया के शहर लॉस एंजिलिस में माउंट हिल्स के पास जमीन की कीमत बढ़ाने के लिए प्रचार के मकसद से ‘हॉलीवुड’ लिखा गया।

1977- देश की जनता पार्टी सरकार ने भारत रत्न सहित अन्य नागरिक सम्मान देना बंद कर दिया। इन्हें तीन साल के अंतराल के बाद दोबारा शुरू किया गया।

1998 – भारत के लिएंडर पेस ने ‘हॉल आफ़ फ़ेम’ टेनिस चैंपियनशिप में अपने जीवन का प्रथम ए.टी.पी. ख़िताब जीता।

2000 -फिजी में महेन्द्र चौधरी समेत 18 बंधक रिहा।

2004: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने साइबेरिया और देश के सुदूर पूर्ववर्ती इलाकों के विकास के लिए भारत से और मज़बूत संबंधों की इच्छा जताई।

2006 – परमाणु बम निर्माण संबंधी ईरान मसला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के हवाले।

2011: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई तिहरे बम धमाकों से दहल उठी।

2014 : जर्मनी ने एक्स्ट्रा टाइम के बाद अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर फुटबॉल विश्वकप जीता।

2016 : ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने पद से इस्तीफा दिया। थेरेसा मे बनीं प्रधानमंत्री।

2020 : पांच दिन की तलाश के बाद कैलिफॉर्निया में लेक पिरु से अमेरिकी अभिनेत्री व गायिका नाया रिवेरा का शव मिला।

2024: अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप पर पेनसिल्वेनिया के बटलर के निकट चुनावी रैली के दौरान हमला।

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CG Big News : शराब के नशे में धुत प्रधान पाठक ने खुद को कमरे में किया बंद..BEO ने निकलवाया बाहर..जांच के बाद DEO ने किया निलंबित..पढ़ें पूरी ख़बर

Chhattisgarh News/मुंगेली. छत्तीसगढ़ में नए शिक्षा सत्र की शुरुआत में ही कुछ शिक्षकों के नशे में धुत होकर स्कूल पहुंचने के मामले सामने आने लगे हैं. ऐसा ही एक मामला मुंगेली जिले के शासकीय प्राथमिक विद्यालय सिंघनपुरी में सामने आया, जहां प्रधानपाठक सतनाम दास दो दिन पहले शराब के नशे में स्कूल पहुंचे. इस दौरान प्रधानपाठक ने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया. सूचना पर बीईओ प्रतिभार मंडलोई मौके पर पहुंची थी. अब इस मामले में एक्शन लेते हुए सतनाम दास को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. 

दरअसल, 10 जुलाई को शासकीय प्राथमिक विद्यालय सिंघनपूरी में टल्ली टीचर प्रधान पाठक सतनाम दास ने खूब ड्रामा किया. खुद को एक कमरे में बंद कर लिया. घटना की जानकारी मिलते ही ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) प्रतिभा मंडलोई मौके पर पहुंची और दरवाजा खुलवाकर प्रधान पाठक को कमरे से बाहर निकलवाया. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. 

दरअसल, बीईओ ने तत्काल उच्च अधिकारियों को मामले की सूचना दी, जिसके बाद प्रधान पाठक का डॉक्टरी मुलाहिजा भी कराया गया. कलेक्टर कुंन्दन कुमार के निर्देश और बीईओ प्रतिभा मंडलोई के जांच प्रतिवेदन के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) सीके धृतलहरे ने सतनाम दास को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. 

फिलहाल, स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों में घटना को लेकर आक्रोश है. उनका कहना है कि जिस स्थान को शिक्षा का मंदिर कहा जाता है, वहां इस तरह की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. प्रशासन ने साफ किया है कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही या अनुशासनहीनता को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

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Recipe : बस मानसून में मिलती है यह सब्जी..जंगलों से बाजार पहुंचते हाथों-हाथ बिक जाती..स्वाद के सामने मटन फेल

Highlights-

▪️बांस करील सब्जी मानसून में ही मिलती है

▪️बांस करील की कीमत 200 रुपये प्रति किलो है

▪️बांस करील का स्वाद मटन से भी बेहतर माना जाता है

बोकारो : झारखंड वन संपदाओं से भरपूर राज्य है, जहां के जंगलों में विभिन्न प्रकार के फल, फूल और सब्जियां पाई जाती हैं. यहां के लोग इसे वर्षों से खानपान में इस्तेमाल कर रहे हैं. इन्हीं में से एक है ‘बांस करील’. इसे ‘बांस की कोपल’ भी कहते हैं. जिसे सब्जी के रूप में खाया जाता है. यह केवल बरसात के मौसम में बांस के जंगलों में उगता है. यह सब्जी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है और इन दिनों बोकारो में सड़क किनारे बिकने लगी है.

बोकारो के सेक्टर-1 स्थित सिटी पार्क के सामने बांस करील बेच रहे दुलाल महतो ने बताया कि वह 50 किमी दूर चंदनक्यारी प्रखंड के हरीयाल गोड़ा गांव से यह सब्जी लेकर यहां आते हैं. यह काफी यूनिक आइटम है और केवल मानसून के दौरान ही मिलता है. लोगों की भी काफी मांग रहती है. इसका उपयोग सब्जी के अलावा अचार और मुरब्बा के लिए भी किया जाता है, जिसका स्वाद में बेहद लाजवाब होता है. उन्होंने बताया कि इसकी कीमत 200 रुपये प्रति किलो हैं. रोजाना 15 से 20 किलो बेच बिक जाते हैं.

जानें सब्जी की रेसिपी

बांस करील की सब्जी की रेसिपी को लेकर दुलाल ने बताया कि सबसे पहले इसे अच्छी तरह धोकर और पतली-पतली स्लाइस काट लें. फिर हल्के पानी में हल्दी डालकर उबालें और दो बार पानी बदलकर साफ कर लें. इससे गंध (स्मेल) दूर हो जाती है. फिर कढ़ाई में सरसों का तेल गर्म करें और उसमें जीरा, बारीक कटी हरी मिर्च, लहसुन और प्याज डालकर भूनें. उबली हुई बांस करील डालें और हल्दी, नमक व अन्य मसाले डालकर अच्छी तरह भूनें. आखिर में कटे हुए टमाटर डालें, थोड़ा पानी मिलाएं और धीमी आंच पर पकाएं. इसके बाद चावल या रोटी के साथ गरमा-गरम खा सकते हैं.

वहीं, करील कि सब्जी खरीदने आए ग्राहक कपिल ने बताया कि उनके घर में सालों भर इस सब्जी का बेसब्री से इंतजार रहता है. इसका स्वाद चावल के साथ ऐसा लगता है मानो मटन भी फेल हो. साल में कुछ ही दिनों तक उपलब्ध होने के कारण इसकी मांग काफी रहती है.

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CG News : सड़कविहीन गांव.! खाट के सहारे मरीज को 7 किमी एम्बुलेंस तक ले जाने को मजबूर परिजन..पढ़ें पूरी ख़बर

Chhattisgarh News/कोरबा। जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति चिंताजनक है। पाली विकासखंड के ग्राम पंचायत बारीउमराव के जलहल गांव में एक बीमार महिला को एम्बुलेंस नहीं मिल पाई। परिजनों को मजबूरन उसे खाट पर लेकर 7 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। करसीला एक्का (37 साल) मौसमी बीमारी से पीड़ित थी। तेज बुखार के कारण उनकी हालत बिगड़ने लगी। पति रामधन एक्का ने एम्बुलेंस के लिए कॉल किया, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

दरअसल, उस समय तेज बारिश हो रही थी। परिजन मरीज को खाट पर लिटाकर लीमगांव की ओर चल पड़े। बारिश से बचाने के लिए खाट को तिरपाल से ढंका और मरीज को छाता ओढ़ाया गया।लीमगांव मुख्य मार्ग पहुंचने के बाद निजी वाहन से मरीज को पाली मुख्यालय के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। अब महिला की स्थिति सामान्य बताई जा रही है।

फिलहाल, ग्रामीणों का कहना है कि जलजल से लीमगांव तक सड़क निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है। इस मार्ग पर सड़क न होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने ब्लॉक और जिला प्रशासन से कई बार शिकायत की है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

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