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Recipe : हर बार कुरकुरी और टेस्टी बनेगी भिंडी की सब्जी, बस फॉलो करें ये 5 टिप्स

Lifestyle Desk : भिंडी बनाते समय उसमें से म्यूकिलेज नामक पदार्थ निकलता है, जिस वजह से भिंडी काफी चिपचिपी सी हो जाती है। यहां हम आपके लिए कुछ ऐसी टिप्स ले कर आए हैं, जिन्हें फॉलो कर के आप हर बार कुरकुरी भिंडी बना सकती हैं।

भिंडी उन सब्जियों में से एक है, जिसका स्वाद भी सभी को पसंद आता है और इसमें भरपूर पोषण भी होता है। भिंडी से स्वादिष्ट सूखी सब्जी, भरवां भिंडी, भिंडी दो प्याजा जैसी कई डिशेज बनाई जाती हैं। हालांकि इन सबमें एक कॉमन समस्या आती है, वो हैं भिंडी की चिपचिपाहट। भिंडी बनाते समय उसमें से म्यूकिलेज नामक पदार्थ निकलता है, जिस वजह से भिंडी काफी चिपचिपी सी हो जाती है। ये खाने में भी अच्छी नहीं लगती। भिंडी का मजा तो तब है, जब इसमें हल्का कुरकुरापन बरकरार रहे। यहां हम आपके लिए कुछ ऐसी ही सिंपल टिप्स ले कर आए हैं, जिन्हें फॉलो कर के आप हर बार कुरकुरी भिंडी बना सकती हैं।

भिंडी हमेशा बनेगी कुरकुरी

1) भिंडी में म्यूकिलेज नाम का एक प्राकृतिक पदार्थ होता है, जो इसे चिपचिपा बनाता है। भिंडी बनाते समय चिपचिपी न हो, इसके लिए साबुत भिंडी को अच्छी तरह से धोकर पहले पानी सुखा लें। पानी को सुखाने के लिए टिश्यू पेपर की मदद लें। कभी भी भिंडी को काटने के बाद धोने की गलती न करें।

2) जब भी आप सब्जी बनाने के लिए भिंडी काटें, तो उन्हें छोटे आकार में काटने की बजाय लंबे टुकड़ों में काटें। लंबे टुकड़ों में काटने से भिंडी अधिक क्रिस्‍पी बनेगी। बेहतर होगा कि आप भिंडी की एक फली को अधिकतम दो-तीन टुकड़ों में ही काटें।

3) भिंडी को अच्छी तरह से भूनकर भी आप इसकी चिपचिपाहट दूर कर सकती हैं। यह एक असरदार तरीका है। इसके लिए कड़ाही में तेल गर्म करने के बाद भिंडी के बड़े टुकड़ों को आठ से दस मिनट तक भूनें। इसके बाद ही किसी भी तरह की अन्य सामग्री को कड़ाही में डालें।

4) भिंडी की सब्जी बनाते वक्त उसमें शुरुआत में नमक डालने की गलती न करें। जब सब्जी पूरी तरह से तैयार हो जाए, तब उसमें स्वादानुसार नमक डालकर मिलाएं। मध्यम आंच पर तीन से चार मिनट तक सब्जी को पकाएं और गैस ऑफ कर दें।

5) भिंडी की सब्जी बनाएं तो अंत में इसमें थोड़ा नीबू का रस मिला दें। दही भी चिपचिपेपन की इस समस्या से छुटकारा देगा। इमली के जूस या अमचूर पाउडर का भी इस्तेमाल कर सकती हैं। सूखी सब्जी में अमचूर पाउडर या नीबू का रस डालें और गीली सब्‍जी में इमली का जूस या दही डालें।

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History of 15 September : एक्सपेरिमेंटल टीवी से शुरू हुआ दूरदर्शन रामायण-महाभारत से घर-घर पहुंचा..आज देश का सबसे बड़ा ब्रॉडकास्टर

History of 15 September; आज आप जब भी टीवी चालू करेंगे, कोई न कोई प्रोग्राम आपको जरूर मिल जाएगा। सैकड़ों टीवी चैनलों पर दिनभर अलग-अलग तरह के प्रोग्राम आते रहते हैं, लेकिन आज से कुछ दशकों पहले स्थिति ऐसी नहीं थी। भारत में आज ही के दिन 1959 में दूरदर्शन शुरू हुआ था। शुरुआत में दूरदर्शन पर हफ्ते में केवल 3 दिन ही प्रोग्राम ब्रॉडकास्ट किए जाते थे, वो भी केवल आधा घंटे के लिए।

भारत में दूरदर्शन की शुरुआत एक्सपेरिमेंट के तौर पर हुई थी और इसे नाम दिया गया था - टेलीविजन इंडिया। शुरुआत में स्कूली बच्चों और किसानों के लिए शैक्षणिक कार्यक्रम प्रसारित किए जाते थे और इसका संचालन ऑल इंडिया रेडियो करता था। 1965 से रोजाना कार्यक्रम प्रसारित किए जाने लगे।

1975 में देश के 6 राज्यों में सैटेलाइट इन्स्ट्रक्शनल टेलीविजन एक्सपेरिमेंट (SITE) शुरू किया गया। इन राज्यों में सामुदायिक टेलीविजन सेट लगाए गए। 1976 में दूरदर्शन ऑल इंडिया रेडियो से अलग हो गया।

1982 का साल भारत में टीवी के लिए महत्वपूर्ण था। इसी साल दूरदर्शन ने इनसैट-1 के जरिए पहली बार नेशनल ब्रॉडकास्ट किया। एशियाई खेलों के प्रसारण ने तो दूरदर्शन की लोकप्रियता को कई गुना बढ़ा दिया था। यहीं से टीवी का कायापलट हुआ। नए-नए प्रोग्राम बनने लगे। धीरे-धीरे सुबह और फिर दोपहर को प्रोग्राम प्रसारित होने लगे। शाम को रोज प्रसारित होने वाला कृषि दर्शन, हफ्ते में दो बार चित्रहार और रविवार को आने वाली रंगोली की लोकप्रियता की बराबरी आज का कोई प्रोग्राम नहीं कर सकता। 1966 में शुरू हुए कृषि दर्शन का योगदान देश में हरित क्रांति लाने में भी रहा है।

अप्रैल 2020 में रामायण का दूरदर्शन पर दोबारा ब्रॉडकास्ट किया गया। 16 अप्रैल 2020 को रामायण को 7.7 करोड़ लोगों ने देखा था, जो किसी भी इंटरटेनमेंट शो को एक दिन में मिली सबसे ज्यादा व्यूअरशिप है।

एक्सपेरिमेंटल टीवी के तौर पर शुरू हुए दूरदर्शन के आज 34 सैटेलाइट चैनल हैं। दूरदर्शन के पास देशभर में 66 स्टूडियो हैं, जिनमें से 17 राज्यों की राजधानियों में हैं और बाकी 49 अलग-अलग शहरों में हैं। दूरदर्शन देश का सबसे बड़ा ब्रॉडकास्टर है।

आज इंजीनियर्स डे आज इंजीनियर्स डे है, जिसे मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया के जन्मदिन पर मनाया जाता है। उनका जन्म 15 सितंबर 1861 को कर्नाटक में कोलार जिले के चिक्काबल्लापुर तालुका में हुआ था। उनके पिता श्रीनिवास शास्त्री संस्कृत के विद्वान और आयुर्वेद चिकित्सक थे। वर्ष 1883 में इंजीनियरिंग की परीक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण करने वाले एम. विश्वेश्वरैया का पसंदीदा विषय सिविल इंजीनियरिंग था। करियर के आरंभिक दौर में ही एम. विश्वेश्वरैया ने कोल्हापुर, बेलगाम, धारवाड़, बीजापुर, अहमदाबाद एवं पूना समेत कई शहरों में जल आपूर्ति परियोजनाओं पर खूब काम किया था।

1960 में भारत सरकार ने विश्वेश्वरैया पर डाक टिकट जारी किया था।

1909 में उन्हें मैसूर राज्य का मुख्य अभियंता नियुक्त किया गया। वे रेलवे सचिव भी थे। कृष्णराज सागर बांध के निर्माण के कारण मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का नाम पूरे विश्व में सबसे अधिक चर्चा में रहा था। बांध के स्वचलित दरवाजों की जिस तकनीक का इस्तेमाल किया, उसे यूरोप सहित विश्व के अन्य देशों ने भी अपनाया। विश्वेश्वरैया औद्योगिक विकास के समर्थक थे। वे उन शुरुआती लोगों में से एक थे, जिन्होंने बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान में धातुकर्म विभाग, वैमानिकी, औद्योगिक दहन एवं इंजीनियरिंग जैसे अनेक नए विभागों को आरंभ करने का स्वप्न देखा था। 1955 में उन्हें भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

1894: चीन और जापान के बीच शुरू हुआ था पहला युद्ध

1894-95 में चीन-जापान युद्ध कोरिया पर प्रशासनिक तथा सैन्य नियंत्रण को लेकर लड़ा गया था। जापान की मेइजी सेना इसमें विजयी हुई थी जिसके चलते कोरिया और ताइवान का नियंत्रण जापान के हाथ में चला गया। इस युद्ध में हार के कारण चीन को जापान के आधुनिकीकरण का लाभ समझ में आया और बाद में चिंग राजवंश के खिलाफ 1911 में क्रांति हुई। जापान ने अपने साम्राज्यवाद का मुख्य लक्ष्य चीन को बनाया और सर्वप्रथम कोरिया में उसने चीन के साथ अपनी शक्ति का प्रयोग किया।

कोरिया अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से जापान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण था। इसलिए कोरिया प्रायद्वीप में जापान की बहुत रुचि थी। चीन के मंचू सम्राटों ने 17वीं शताब्दी में कोरिया पर अधिकार कर लिया था और तभी से कोरिया चीन का अधीन प्रदेश माना जाता था। कोरिया का स्वतंत्र राजा चीन के सम्राट को अपना सबकुछ मानता था। इस तरह कोरिया का राज्य चीन के एक संरक्षित राज्य के समान था। कोरिया प्रायद्वीप में जापान का परंपरागत स्वार्थ था जो इस युद्ध का कारण बना।

15 सितंबर के दिन को इतिहास में और किन-किन महत्वपूर्ण घटनाओं की वजह से याद किया जाता है...

2004ः ब्रिटिश नागरिक गुरिंदर चड्ढा को 'वुमन आफ द ईयर' सम्मान।

2003ः सिंगापुर के मुद्दे पर विकासशील देशों के भड़क उठने से डब्ल्यूटीओ वार्ता विफल।

2002ः न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के अवसर पर भारत, चीन एवं रूस के विदेश मंत्रियों की बैठक आयोजित।

2001ः अमेरिकी सीनेट ने राष्ट्रपति को अफगानिस्तान पर सैनिक कार्यवाही की मंजूरी दी।

1981ः वानुअतु संयुक्त राष्ट्र संघ का सदस्य बना।

1982 : लेबनान के निर्वाचित राष्ट्रपति बशीर गेमायेल की पदासीन होने से पहले ही बम विस्फोट में हत्या।

1971ः हरी-भरी और शांति पूर्ण दुनिया के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध ग्रीन पीस की स्थापना की गई।

1948ः स्वतंत्र भारत का पहला ध्वजपोत आईएनएस दिल्ली बंबई (अब मुंबई) के बंदरगाह पर पहुंचा।

1927 : प्रसिद्ध कवि एवं साहित्यकार सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का जन्म हुआ।

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Recipe : हर कोई करेगा आपके पराठों की तारीफ, सॉफ्ट और परतदार बनाने के लिए फॉलो करें ये 6 टिप्स

Recipe ; हर कोई करेगा आपके पराठों की तारीफ, सॉफ्ट और परतदार बनाने के लिए फॉलो करें ये 6 टिप्स.....

1

ऐसे बनाएं टेस्टी पराठे

रोटी के अलावा सबसे ज्यादा बनने वाली चीज है पराठा। खासतौर से टिफिन में देने के लिए या फिर सुबह नाश्ते के लिए ज्यादातर पराठे ही बनते हैं। सबसे अच्छी बात है कि इन्हें खाने के लिए सब्जी ना भी हो तो चलता है, क्योंकि अचार और दही के साथ ही ये बड़े स्वाद लगते हैं। हालांकि अच्छे पराठे बनाना भी एक आर्ट है। पराठे ऐसे होने चाहिए जो सॉफ्ट हों और परतदार हो, जिन्हें खा कर मजा आ जाए। आज हम आपको कुछ बड़ी सिंपल टिप्स बता रहे हैं, जो बढ़िया पराठे बनाने में काम आएंगी। अगर आप ज्यादा कुकिंग नहीं करते हैं, तो आपको ये जरूर जाननी चाहिए।

2

ऐसे लगाएं आटा

प्लेन पराठे बनाने के लिए गेहूं का आटा लें और उसमें थोड़ा सा नमक जरूर मिलाएं। इसके अलावा दो चम्मच तेल या देसी घी डालें, फिर थोड़ा-थोड़ा पानी मिलाकर आटा गूंथ लें। तेल डालने से आटा सॉफ्ट लगता है और पराठे खूब फ्लैकी और सॉफ्ट बनते हैं।

3

आटे को रेस्ट करने दें

ज्यादातर लोग आटा लगाने के तुरंत बाद पराठे बनाना शुरू कर देते हैं, जो गलत है। आपको आटा लगाने के बाद उसे कम से कम 10-15 मिनट के लिए रेस्ट करने देना चाहिए। इससे आटा अच्छी तरह सेट हो जाता है और पराठे टेस्टी बनते हैं।

4

सूखा आटा इस्तेमाल करें

पराठा बनाने के लिए छोटी-छोटी लोइयां बनाएं और उन्हें सूखा आटा लगाकर बेल लें। इससे बेलने में भी आसानी होगी। ध्यान रहे ज्यादा प्रेशर लगाकर पराठा ना बेलें, इससे वो कहीं से मोटे रहेंगे तो कहीं से बहुत पतले हो जाएंगे।

5

पराठे में तेल और आटा लगाएं

अब जब आप गोल पराठा बेल लें, तो उसपर थोड़ा सा तेल और सूखा आटा लगाएं। इसके बाद पराठे को बीच से मोड़ दें, दोबारा तेल और सूखा आटा लगाएं और फिर मोड़ दें। कुल मिलाकर आपको पराठे को ट्राएंगल यानी तिकोने शेप में बेल लेना है। लास्ट में दोबारा पराठे पर सूखा आटा लगा लें।

6

मसाला लगाकर भी बना सकती हैं

अगर आप पराठे को थोड़ा चटपटा स्वाद देना चाहती हैं, तो सूखा आटा और तेल के अलावा पराठे पर लाल मिर्च, चाट मसाला, अजवाइन, धनिया पाउडर, सौंफ पाउडर और कसूरी मेथी लगाकर भी बना सकती हैं। इससे खूब स्वादिष्ट मसाला पराठा बनता है।

7

ऐसे सेंके पराठा

पराठे को हमेशा मीडियम आंच पर सेंके। सबसे पहले दोनों तरफ से हल्का-हल्का सेंक लें। अब एक तरह तेल लगाएं और सेंके। दूसरी तरफ भी ऐसा ही करें। दोनों तरफ से जब पराठे पर ब्राउन स्पॉट्स आ जाएं, तो हो गए आपके पराठे रेडी।

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History 14 September : आज पूरा देश मना रहा है 'हिंदी दिवस'..पढ़ें इससे जुड़ा इतिहास..जाने और प्रमुख घटनाएं

History 14 September: इतिहास के पन्नो में आज का दिन (aaj ka itihas) बेहद खास है. आज यानी 14 सितंबर (14 september ka itihas) ही वो तारीख है जब साल 1949 में 'हिंदी' (Hindi diwas) को भारत की राजभाषा का दर्जा मिला. आइये जानते हैं कैसे बनी हिंदी हमारी राजभाषा. आजादी के बाद भारत की राजभाषा का मुद्दा सबसे अहम और विवादित था. विवादित इसलिए क्योंकि भारत में सैकड़ों भाषाएं और बोलियां बोली जाती हैं, ऐसे में राजभाषा का दर्जा किसे दिया जाए ये सवाल अहम था. काफी सोच- विचार के बाद संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखी 'हिंदी' को राष्ट्रभाषा के रूप में स्वीकारा. 14 सितंबर 1949 को सर्वसम्मति से संविधान सभा ने इसपर मुहर लगा दी. तब प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इस दिन के महत्व को देखते हुए 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाए जाने सलाह दी. पहला हिंदी दिवस साल 1953 में मनाया गया.

अंतरिक्ष विज्ञान की नजर से भी आज का दिन खास है. आज यानी 14 सितंबर साल 1959 को रुसी अंतरिक्ष मिशन 'लूना-2' चांद की सतह से टकराया (first moon mission) था. बता दें ये दुनिया का पहला अंतरिक्ष यान था जिसने चांद की सतह को छूने में कामयाबी हासिल की थी. आपको बता दें इस मिशन को सोवियत संघ ने पूरी तरह गुप्त रखा था. दुनिया को इसकी भनक तक नहीं थी. 14 सितंबर को लूनिक -2, 12 हजार किलोमीटर की रफ़्तार से जब चांद से टकराया तो तहस-नहस हो गया. ये वो दौर था जब अमेरिका और सोवियत संघ के बीच कोल्ड वॉर चल रहा था. दोनों एक दूसरे को नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ते थे. ऐसे समय में इस मिशन का फेल होना सोवियत रूस के लिए बड़ा झटका था लेकिन इससे इतर ये पहला मौक़ा था जब किसी स्पेसक्राफ्ट ने चन्द्रमा की सतह को छुआ था. ये कामयाबी इससे बड़ी थी.

आज का इतिहास भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से भी अहम है. आज ही के दिन साल 2000 में तब के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई (Atal Bihari Vajpayee) ने अमेरिकी संसद में को सम्बोधित किया था. उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा था कि “भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने के लिए व्यापक-आधारित द्विदलीय समर्थन का यह प्रदर्शन उत्साहजनक है. यह राष्ट्रपति क्लिंटन और मेरे लिए प्रोत्साहन का स्रोत है, क्योंकि हम अपने संबंधों में एक नई गुणवत्ता लाने के लिए मिलकर काम करते हैं.

देश-दुनिया में 14 सितंबर का इतिहास

1770 : डेनमार्क में प्रेस की स्वतंत्रता को मान्यता मिली।

1833 : विलियम वेंटिक, पहले गवर्नर जनरल के तौर पर भारत आए।

1901 : अमेरिकी राष्ट्रपति विलियम मैकेंजी की गोली मारकर हत्या।

1917 : रूस को आधिकारिक तौर पर गणतंत्र घोषित किया गया।

1949 : संविधान सभा ने हिंदी को भारत की आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया।

1959 : सोवियत संघ का अंतरिक्ष यान पहली बार चंद्रमा की सतह पर उतरा।

1960 : खनिज तेल उत्पादक देशों ने मिलकर ओपेक की स्थापना की।

1998 : माइक्रोसॉफ्ट, जनरल इलेक्ट्रिक को पीछे छोड़कर दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी बनी।

2000 : माइक्रोसॉफ्ट ने विंडोज एम.ई. लांच किया।

2001 : अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को पकड़ने के अभियान के लिए अमेरिका में 40 अरब डॉलर मंजूर किए गए।

2000 : प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अमेरिकी सीनेट के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को सम्बोधित किया।

2007 : जापान ने तानेगाशिया स्थित प्रक्षेपण केन्द्र से पहला चन्द्र उपग्रह एच-2ए प्रक्षेपित किया ।

2008 : रूस के पेर्म हवाई अड्डे पर एअरोफ़्लोत का विमान दुर्घटनाग्रस्त। विमान में सवार सभी 88 लोगों की मौत।

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Sabudana Chaat Recipe : तेल के बिना बनाएं साबूदाना चाट, पोषण का भंडार ये है रेसिपी, वेट लॉस में भी फायदेमंद

Sabudana Chaat Recipe: क्या आपने कभी साबूदाना चाट की हेल्दी रेसिपी को ट्राई किया है? आपको बता दें कि इस रेसिपी को बनाने के लिए आपको न तो ज्यादा फैंसी सामग्री चाहिए और न ही ज्यादा समय।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साबूदाना चाट बनाने के लिए आपको एक कप भीगा हुआ साबूदाना (कम से कम 4-5 घंटे के लिए या फिर रात भर के लिए), हाफ कप भुनी हुई मूंगफली, 2 बॉइल्ड कटे हुए आलू, एक बारीक कटा हुआ टमाटर, एक बारीक कटा हुआ खीरा, 2 बारीक कटी हुई हरी मिर्च, 2 स्पून बारीक कटा हुआ हरा धनिया, 2 स्पून नींबू का रस, सेंधा नमक, हाफ स्पून काली मिर्च पाउडर और हाफ स्पून जीरा पाउडर चाहिए होगा।

पहला स्टेप- सबसे पहले साबूदाने को अच्छी तरह से धो लीजिए। अब साबूदाने को पानी में भिगोकर रख दीजिए। पानी ज्यादा नहीं होना चाहिए, बस साबूदाना डूब जाए, इतने ही पानी का इस्तेमाल करें।

दूसरा स्टेप- साबूदाने के फूल जाने के बाद आप एक्स्ट्रा पानी को निकाल दीजिए। इसके बाद एक कड़ाही में मूंगफली को हल्की आंच पर गोल्डन और क्रंची होने तक भून लीजिए।

तीसरा स्टेप- जब मूंगफली ठंडी हो जाए, तब मूंगफली को छीलकर थोड़ा सा क्रश कर लीजिए।

चौथा स्टेप- एक कटोरे में भीगा हुआ साबूदाना, बॉइल्ड आलू, बारीक कटा हुआ टमाटर, खीरा, हरी मिर्च और हरा धनिया निकाल लीजिए।

पांचवां स्टेप- इसी कटोरे में भुनी हुई और क्रश्ड मूंगफली, सेंधा नमक, काली मिर्च पाउडर और जीरा पाउडर एड कर सभी चीजों को अच्छी तरह से मिला लीजिए।

छठा स्टेप- आखिर में आप इस मिक्सचर में नींबू का रस भी मिक्स कर सकते हैं। बस साबूदाना चाट सर्व करने के लिए तैयार है।

बच्चों से लेकर बड़ों तक, सभी को साबूदाना चाट का टेस्ट काफी ज्यादा पसंद आने वाला है। सबसे अच्छी बात ये है कि आप इस रेसिपी को व्रत के दिन भी ट्राई कर सकते हैं। साबूदाना में मौजूद तत्व न केवल आपको इंस्टैंट एनर्जी प्रदान कर सकते हैं बल्कि आपकी वेट लॉस जर्नी को बूस्ट करने में भी कारगर साबित हो सकते हैं।

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History of 13 September : पाकिस्तान की हरकत से नाराज हुए सरदार पटेल ने तय किया था- कश्मीर भारत का हिस्सा बनेगा..जाने और प्रमुख घटनाएं

History of 13 September; 1947 में भारत को आजादी के साथ-साथ कई समस्याएं भी मिली थीं। इनमें से एक बड़ी समस्या रियासतों के विलय की थी। ज्यादातर रियासतें भारत में आसानी से शामिल हो गई थीं, लेकिन कुछ रियासतें ऐसी थीं जो आजादी की घोषणा कर चुकी थीं। इनमें से एक रियासत थी कश्मीर, जो आज भी भारत-पाकिस्तान के टकराव का मुद्दा बना हुआ है।

इन रियासतों को भारत में शामिल कराने की जिम्मेदारी मिली थी सरदार पटेल को। कश्मीर के राजा हरीसिंह ने अपनी रियासत जम्मू-कश्मीर को स्वतंत्र रखने का फैसला लिया। हरीसिंह का मानना था कि कश्मीर यदि पाकिस्तान में मिलता है तो जम्मू की हिन्दू जनता के साथ अन्याय होगा और अगर भारत में मिलता है तो मुस्लिम जनता के साथ अन्याय होगा।

भारत की आजादी से दो महीने पहले तक लॉर्ड माउंटबेटन ने कश्मीर के राजा महाराजा हरीसिंह से कहा था कि यदि वे पाकिस्तान के साथ जाने का फैसला करते हैं, तो भारत कोई दखल नहीं देगा। ये बात लॉर्ड माउंटबेटन के राजनीतिक सलाहकार रहे वीपी मेनन की किताब 'इंटिग्रेशन ऑफ द इंडिया स्टेट्स' में लिखी है।

सरदार पटेल के साथ कश्मीर के राजा हरी सिंह।

सरदार पटेल भी हैदराबाद के बदले पाकिस्तान को कश्मीर देने के लिए राजी थे। 13 सितंबर 1947 की सुबह पटेल ने रक्षा मंत्री बलदेव सिंह को चिट्ठी लिखी कि कश्मीर चाहे तो पाकिस्तान में शामिल हो सकता है। इसी दिन पटेल को जब पता चला कि पाकिस्तान ने जूनागढ़ के विलय का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है, तो वे भड़क गए।

उनका कहना था कि यदि पाकिस्तान, हिंदू बहुल आबादी वाले मुस्लिम शासक के जूनागढ़ को अपना हिस्सा बना सकता है तो भारत, मुस्लिम बहुल आबादी वाले हिंदू शासक के कश्मीर को क्यों नहीं ले सकता? उस दिन से कश्मीर पटेल की प्राथमिकता बन गया था।

1948: सरदार पटेल के आदेश पर हैदराबाद में सेना घुसी थी

आजादी के बाद हैदराबाद के नवाब मीर उस्मान अली ने अपनी रियासत को आजाद रखने का फैसला लिया था। वो चाहता था कि हैदराबाद का संबंध सिर्फ ब्रिटिश सम्राट से ही रहे।

हैदराबाद कांग्रेस चाह रही थी कि हैदराबाद का विलय भारत में हो, लेकिन दूसरी तरफ इत्तेहादुल मुस्लिमीन नाम का संगठन निजाम का समर्थन कर रहा था।

हैदराबाद में रजाकारों ने अपनी अलग सेना तैयार कर ली थी।

पटेल ने 13 सितंबर 1948 को भारतीय सेना को हैदराबाद पर चढ़ाई करने का आदेश दे दिया। इसे ऑपरेशन पोलो कहा गया। 3 दिनों के भीतर ही भारतीय सेना ने हैदराबाद पर कब्जा कर लिया। इस ऑपरेशन में 42 भारतीय सैनिक शहीद हुए और 2 हजार रजाकार मारे गए। हालांकि, अलग-अलग लोग इस आंकड़े को काफी ज्यादा बताते हैं। 17 सितंबर 1948 को निजाम ने हैदराबाद के भारत में विलय की घोषणा की।

1929: जतिंद्र नाथ दास की शहादत

भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की शहादत को हम शहीद दिवस के तौर पर याद करते हैं, लेकिन उनके ही साथी थे- जतिंद्र नाथ दास, जिन्हें जतिन दा भी कहा जाता था। 27 अक्टूबर 1904 को जन्मे जतिंद्र नाथ 16 साल की उम्र में ही आजादी के आंदोलन से जुड़ गए थे। दक्षिणेश्वर बम कांड और काकोरी कांड के सिलसिले में 1925 में उन्हें गिरफ्तार किया गया था।

जतिंद्र नाथ दास की शहादत के 50 साल पूरे होने पर भारत सरकार ने उनके सम्मान में डाक टिकट जारी किया था।

सबूत नहीं थे, इस वजह से मुकदमा नहीं चला, पर उन्हें नजरबंद रखा गया। लाहौर असेंबली में बम फेंकने के मामले में भगत सिंह के साथियों के साथ ही जतिन दा भी पकड़े गए थे। जेल में अव्यवस्था के खिलाफ क्रांतिकारियों ने जतिन दा के नेतृत्व में 13 जुलाई 1929 को अनशन शुरू किया। उनका अनशन खत्म करने की हर कोशिश की गई, लेकिन वे टस से मस नहीं हुए।

हड़ताल के 63वें दिन जतिन दास के कहने पर एक साथी ने ‘एकला चलो रे’ और फिर ‘वन्दे मातरम्’ गाया। यह गीत पूरा होते ही जतिन दा ने 13 सितंबर 1929 को सिर्फ 24 साल की उम्र में दुनिया से विदाई ले ली।

13 सितंबर के दिन को इतिहास में किन-किन महत्वपूर्ण घटनाओं की वजह से याद किया जाता है...

2013: तालिबान आतंकवादियों ने अफगानिस्तान के हेरात में अमेरिका के वाणिज्य दूतावास पर हमला किया।

2009: चन्द्रमा पर बर्फ खोजने का इसरो-नासा का अभियान असफल हुआ।

2008: दिल्ली में तीन स्थानों पर 30 मिनट के अंतराल में चार बम विस्फोट हुए। इनमें 19 लोगों की मौत हुई और 90 से अधिक घायल हुए।

2007: नासा के वैज्ञानिकों ने बृहस्पति से तीन गुना बड़े ग्रह का पता लगाया।

2002: इजराइल ने फिलिस्तीन अधिकृत गाजा पट्टी पर हमला किया।

2000: भारत के विश्वनाथन आनंद ने शेनयांन में पहला फ़िडे शतरंज विश्व कप जीता।

1947: भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 40 लाख हिंदुओं और मुसलमानों के पारस्परिक स्थानांतरण का सुझाव दिया।

1933: एलिजाबेथ मेकॉम्ब्स न्यूजीलैंड की संसद में पहुंचने वाली पहली महिला बनीं। उन्होंने लिटिलटन से चुनाव जीता। इससे पहले ये सीट उनके पति के पास थी।

1923: स्पेन में सैन्य तख्ता पलट हुआ। मिगेल डे प्रिमो रिवेरा ने सत्ता संभाली और तानाशाह सरकार की स्थापना की। ट्रेड यूनियनों को 10 साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया।

1922: लीबिया के एल अजिजिया में धरती पर उच्चतम तापमान दर्ज किया गया। उस समय छाया में नापा गया तापमान 58 डिग्री सेल्सियस था।

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History 12 september : आज ही के दिन चांद पर पहुंचा था लूना-2 रॉकेट..पूर्व PM इंदिरा गांधी के पति फिरोज गांधी का हुआ था जन्म..जाने और प्रमुख घटनाएं

History of 12 September; देश दुनिया के इतिहास में 12 सितंबर की तारीख तमाम अहम वजह से दर्ज है. ये तारीख सारागढ़ी युद्ध में सिख सैनिकों के शौर्य और पराक्रम की गवाह है. 1897 में हुए सारागढ़ी के युद्ध की आज 126वीं वर्षगांठ है.

यूं तो सिख सैनिकों को उनके अदम्य साहस और निडरता के लिए दुनिया भर में जाना जाता है, लेकिन 126 साल पहले, 10 हजार अफगान हमलावरों को सिख सैनिकों के साहसी और निडर रूप की जबर्दस्त झलक देखने को मिली. सारागढ़ी की लड़ाई वर्ष 1897 में समाना रिज पर लड़ी गई थी, जो अब पाकिस्तान में है.

सारागढ़ी एक सुरक्षा चौकी थी, जिसे यह सुनिश्चित करने के लिए स्थापित किया गया था कि लॉकहार्ट किले और गुलिस्तान किले के बीच संचार बिना किसी बाधा के जारी रहे. इस दिन 14 हजार पठानों को सिर्फ 21 सिखों ने हराया था. इन मुट्ठी भर सैनिकों की अतुलनीय वीरता के कारण सारागढ़ी की लड़ाई को दुनिया की सबसे बड़ी लड़ाइयों में से एक माना जाता है.

इसके अलावा साल 1959 में आज ही के दिन तत्कालीन सोवियत संघ का रॉकेट ‘लूना 2’चांद पर पहुंचा था. ये एक बड़ी कामयाबी थी, जिससे अमेरिका बेचैन हो गया था और दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष में एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ यानी स्पेस रेस शुरू हो गई थी.

हजारों-लाखों साल के मानव इतिहास में यह पहला मौका था, जब इंसान की बनाई कोई चीज चांद पर पहुंची थी. इसके साथ ही सोवियत संघ ने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में एक और झंडा गाड़ दिया था.

आज का दिन गांधी परिवार के लिए भी खास है. पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पति और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के दामाद फिरोज गांधी का जन्म आज ही के दिन 1912 में हुआ था. फिरोज गांधी पत्रकार होने के साथ-साथ स्वतंत्रता सेनानी भी थे. उन्होंने देश की आजादी की लड़ाई में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया था.

इसी बीच 1928 में फिरोज गांधी ने साइमन कमीशन के मुखर विरोधी रहे. इसके बाद 1930-32 के आंदोलन में उन्हें जेल की सजा भी हुई थी. 

देश-दुनिया में 12 सितंबर का इतिहास-

1966: भारतीय तैराक मिहिर सेन ने डार्डानेलेस जलडमरूमध्य को तैरकर पार किया.

1962 : प्रसिद्ध रचनाकार रांगेय राघव का निधन हुआ था.

1968 : अल्बानिया ने खुद को वारसा संधि से अलग करने की घोषणा की.

1983 : भारतीय अभिनेता, गायक, पत्रकार और लेखक रंजन का निधन हुआ था.

1990 : पूर्व और पश्चिम जर्मनी को एकीकृत करने के लिए अमेरिका, इंग्लैण्ड, फ्रांस, सोवियत संघ, पूर्व और पश्चिम जर्मनी ने समझौते पर हस्ताक्षर किये.

1398 : तैमूर लंग सिंधु नदी के तट पर पहुंचा.

1928 : फ्लोरिका में भीषण तूफाने से 6 हजार लोगों की मौत.

2001 : अमेरा ने आतंकवाद के खिलाफ जंग का ऐलान किया.

1873 : पहला व्यवहारिक टाइपराइटर ग्राहकों को बेचा गया.

2007: रूस ने नॉन न्‍यूक्‍लियर वैक्‍यूम बम (इको फ़्रेंडली बम) का परीक्षण किया।

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Recipe : इस पेशावरी खीर के दुनियाभर में हैं लाखों दीवाने..खाने में रबड़ी से भी स्वादिष्ट..पेशावर की खीर, रेसिपी

Lifestyle Desk; त्योहारों पर मीठे में खीर बनाने का चलना सालों पुराना है। जब मिठाइयां नहीं हुआ करती थीं तो मीठे में हलवा और खीर ही ज्यादातर घरों में बनती थी। खारी का स्वाद बच्चों और बड़ों सभी को पसंद आता है। चावल और दूध से तैयार खीर खाने में बहुत टेस्टी लगती है। अगर आपको खीर खाना पसंद है तो एक बार पेशावर की फेमस खीर जरूर ट्राई करें। इस खीर के दीवाने दुनियाभर में है। फटाफट नोट कर लें रेसिपी।

पेशावर की फेमस खीर, नोट करें रेसिपी

पहला स्टेप- खीर को बनाने के लिए पके हुए उबले चावल करीब 1 कटोरी लें। चावल को मिक्सर में डालें और इसमें 4 रस्क यानि टोस्ट डाल दें। आधा कटोरी मिक्स पाउडर और आधा कप गाढ़ा दूध डालें। सारी चीजों को मिलाकर पीस लें। बिना गांठ वाला स्मूद पेस्ट जैसा तैयार करना है।

दूसरा स्टेप- एक गहरा और भारी तली का बर्तन लें और उसमें करीब 1 लीटर दूध डालें। दूध में थोड़ी चीनी, भीगे हुए केसर के धागे, इलायची पाउडर और बारीक कटे हुए मेवा डालकर दूध को पकाएं। दूध को मीडियम और लो फ्लेम पर करीब 10 मिनट के लिए उबाल लें।

तीसरा स्टेप- अब आपको दूध में चावल और रस्क से तैयार किया हुआ पेस्ट डालना है। इसे डालते हुए लगातार चलाते रहें जिससे गांठ न पड़ें। अब चावल के मिक्सचर के साथ करीब 10-15 मिनट के लिए खीर को मीडियम फ्लेम पर और पकन दें। खीर को थोड़ा गाढ़ा होने तक पकाना है।

चौथा स्टेप- अब आपको खीर में केरेमल सीरप बनाकर डालना है। इसके लिए एक पैन में 2 बड़े चम्मच चीनी डालें। चीनी को बिना हिलाए धीमी आंच पर पिघलने तक पकाएं। चीनी गोल्डन ब्राउन होकर सीरप बन जाएगी। इस तुरंत खीर में डाल दें और खीर को चलाते रहें। 

पांचवां स्टेप- पेशावर की फेमस खीर बनकर तैयार है। इसके ऊपर थोड़े कटे हुए नट्स और गुलाब की सूखी पत्तियां डालकर फ्रिज में ठंडा होने के लिए रख दें। 4-5 घंटे के बाद खीर को ठंडा होने पर सर्व करें। एक बार ये खीर खाएंगे तो रबड़ी से भी स्वाद लगेगी।

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History of 11 September : 1893 का शिकागो धर्म सम्मेलन और स्वामी विवेकानंद का ओजस्वी भाषण..जाने और प्रमुख घटनाएं

History of 11 September : आज से 132 वर्ष पूर्व आज ही के दिन अमेरिका के शिकागो नगर में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन में भारत के महान दार्शनिक और संत स्वामी विवेकानंद ने अपने ऐतिहासिक भाषण से पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया।

स्वामी विवेकानंद ने संबोधन की शुरुआत “अमेरिका की बहनों और भाइयों” कहकर की, जिसे सुनकर सभा तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठी। यह संबोधन केवल श्रोताओं के हृदय को ही नहीं छू गया, बल्कि भारतीय अध्यात्म और सनातन संस्कृति के आदर्शों को भी विश्व पटल पर उजागर कर गया।

विवेकानंद ने अपने वक्तव्य में सभी धर्मों की एकता, सहिष्णुता और मानवता के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत प्राचीन काल से ही विभिन्न आस्थाओं और संस्कृतियों को अपनाकर उन्हें समान सम्मान देता आया है। उनके शब्दों ने न केवल भारत की आध्यात्मिक विरासत को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई, बल्कि यह संदेश भी दिया कि धर्म विभाजन का नहीं, बल्कि मानवता को जोड़ने का माध्यम है। यह भाषण आज भी विश्व इतिहास की अमूल्य धरोहर माना जाता है, जिसने भारत की छवि को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई ऊंचाई प्रदान की।

महत्वपूर्ण घटनाचक्र

1730 - अमृता देवी के नेतृत्व में खेजड़ली गांव के 363 लोगों ने पेड़ों को बचाने के लिए अपना बलिदान दिया था। उनकी याद में 11 सितंबर को 'राष्ट्रीय वन शहीद दिवस' मनाया जाता है।

1893 - स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में हुए विश्व धर्म सम्मेलन में भाषण दिया, जिसमें उन्होंने सभी धर्मों की एकता और सहिष्णुता का संदेश दिया।

1906 - महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ़्रीका में सत्याग्रह आन्दोलन आरंभ किया।

1919 - अमेरिकी नौसेना ने होंडुरास पर आक्रमण किया।

1939 - इराक और सऊदी अरब ने जर्मनी के खिलाफ युद्ध की घोषणा की।

1941 - अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन का निर्माण शुरू हुआ।

1948 - मोहम्मद अली जिन्ना, पाकिस्तान के संस्थापक और पहले गवर्नर-जनरल का निधन हुआ।

1951 - इंग्लिश चैनल तैरकर पार करने वाली पहली महिला बनी फ्लोरेंस चैडविक। उन्हें इंग्लैंड से फ्रांस पहुंचने में 16 घंटे और 19 मिनट लगे।

1961 - विश्व वन्यजीव कोष (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) की स्थापना हुई।

1965 - भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान भारतीय सेना ने दक्षिण पूर्वी लाहौर के निकट बुर्की शहर पर कब्ज़ा किया।

1968 - एयर फ्रांस का विमान संख्या 1611 नाइस के निकट दुर्घटनाग्रस्त। हादसे में 89 यात्रियों और चालक दल के छह सदस्यों की मौत।

1971 - मिस्र में संविधान को अंगीकार किया गया।

1973 - चिली के राष्ट्रपति साल्वाडोर अलांदे का सैन्य तख्तापलट।

1996 - राष्ट्रमंडल संसदीय संघ में पहली बार एक महिला अध्यक्ष निर्वाचित।

2001 - अल-कायदा ने अमेरिकी वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और पेंटागन पर आतंकवादी हमले किए, जिसमें लगभग 3,000 लोग मारे गए थे।

2006 - रोजर फेडर ने लगातार तीसरी बार अमेरिकी ओपन टेनिस टूर्नामेंट का खिताब जीता।

2006 - पेस और डेम की जोड़ी ने अमेरिकी ओपन का युगल खिताब जीता।

2006 - भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश पी.एन. भगवती संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति में चौथी बार पुनर्निर्वाचित।

2006 - प्रख्यात बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने भारतीय नागरिकता की मांग की।

2006 - अमेरिकी अंतरिक्ष यान अटलांटिस अंतरिक्ष के साथ जुड़ा।

2007 - येरूशलम से सटे डेविड शहर में लगभग 2000 साल पुरानी सुरंग का पता लगा।

2009 - नोएडा के निठारी काण्ड के आरोपी मोनिन्दर सिंह पंढेर को इलाहाबाद के उच्च न्यायालय ने 19 मामलों में एक रिपा हलदर मामले में बरी किया।

2009 - उच्चतम न्यायालय ने कांशीराम स्मारक स्थल के निर्माण पर रोक लगाई।

2011- रक्षा वैज्ञानिकों ने बनायी 'ल्यूकोडर्मा' की अचूक हर्बल औषधि।

2009 - 9/11 की घटना के बाद एशियाई लोगों को संदेह की नजर से देखा जा रहा था, लेकिन भारतीय मूल के लोगों के बारे में अमेरिकियों की सोच बिल्कुल बदल गई है। इसका कारण भारतीयों की प्रतिभा और परिश्रम है।

2012 - सोमालिया की सेना के साथ संघर्ष में अल शबाब के 50 आतंकवादी मारे गए।

जन्म

1895 - विनोबा भावे- भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रसिद्ध गांधीवादी नेता।

1901 - आत्माराम रावजी देशपांडे - प्रसिद्ध मराठी साहित्यकार।

1911 - लाला अमरनाथ- अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत की ओर से पहला शतक जमाने वाले क्रिकेटर।

1919 - कन्हैयालाल सेठिया - आधुनिक काल के प्रसिद्ध हिन्दी व राजस्थानी लेखक।

1962 - प्रह्लाद जोशी - भारतीय जनता पार्टी के राजनीतिज्ञ।

1982 - श्रेया सारन- दक्षिण भारतीय अभिनेत्री।

निधन:

1921 - सुब्रह्मण्य भारती - तमिल भाषा के महान् कवि।

1948 - मुहम्मद अली जिन्ना - ब्रिटिशकालीन भारत के प्रमुख नेता और 'मुस्लिम लीग' के अध्यक्ष।

1964 - मुक्तिबोध गजानन माधव- प्रगतिशील भारतीय कवि।

1968 - बाबा हरभजन सिंह - भारतीय सेना का एक सैनिक।

1973 - नीम करोली बाबा- भारतीय गुरु।

1987 - महादेवी वर्मा- हिन्दी कवयित्री और हिन्दी साहित्य में छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक।

1987 - नरेशचंद्र सिंह - मध्य प्रदेश के भूतपूर्व छठे मुख्यमंत्री।

2020 - स्वामी अग्निवेश - भारत के सामाजिक कार्यकर्ता, सुधारक, राजनेता व आर्य समाजी।

महत्वपूर्ण दिवस

-राष्ट्रीय वन शहीद दिवस

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Recipe : पके केले से बनाएं मालपुए, एकदम रूई जैसे नरम बनेंगे और खाने में लाजवाब, जानें विधि

Lifestyle Desk : इंडियन थाली में जब तक मीठा न हो स्वाद अधूरा सा लगता है। अगर आप रोज-रोज बाजार की मिठाई खाना पसंद नहीं करते हैं तो घर में हेल्दी तरीके से कुछ मिठाई तैयार की जा सकती हैं। इसके लिए आपको ज्यादा मेहनत करने की भी जरूरत नहीं है। आप पके हुए केले से आसानी से मालपुए बनाकर खा सकते हैं। कई बार घर में केले ज्यादा आ जाते हैं और बहुत जल्दी गलने लगते हैं। ऐसे में आप पके हुए केले से मालपुआ बनाकर खा सकते हैं। खासबात ये है कि आप इन मालपुआ को अपनी पसंद के हिसाब से बेहद हेल्दी भी बना सकते हैं। आप इसमें मैदा की जगह आटा इस्तेमाल करें और मीठे में चीनी की जगह गुड़ का उपयोग करें। तो चलिए फटाफट से जान लीजिए केले से मालपुए (Banana Malpua) बनाने की रेसिपी।

केले से मालपुए की रेसिपी (Banana Malpua Recipe)

पहला स्टेप- मालपुआ बनाने के लिए 2 पके हुए केले लें और उन्हें अच्छी तरह से मैश कर लें। अब किसी बाउल में मसले हुए केले और उसमें 1 गिलास दूध डाल दें। इसमें आधा कप सूजी और आधा कप गेंहू का आटा मिला दें। अब इसमें थोड़े केसर के धागे, आधा चम्मच इलाइची पाउडर, आधा चम्मच सौंफ का पाउडर, आधा चम्मच साबुत सौंफ, एक चुटकी नमक और 3 चम्मच कंडेंस मिल्क यानि मिल्कमेड मिला दें।

दूसरा स्टेप- अब इन सभी को अच्छी तरह से मिक्स कर लें और स्मूद घोल तैयार कर लें। घोल गाढ़ा लगे तो दूध या पानी मिला सकते हैं। तैयार किए बैटर को करीब 2 घंटे के लिए रख दें। जिससे ये अच्छी तरह से फूल जाए।

तीसरा स्टेप- अब पैन में रिफाइंट या देसी घी डालें और घोल को चम्मच की मदद से गर्म किए गए घी में डालें। मालपुए को हल्का सुनहरा होने तक तलें। ध्यान रखें आपको फ्लेम मीडियम ही रखनी है। सारे मालपुए ऐसे ही एक एक करके सेंक लें।

चौथा स्टेप- एक बर्तन में चाशनी बनाने के लिए एक कप कुटा हुआ गुड़ या गुड़ का पाउडर जिसे शक्कर कहते हैं वो लें और इसमें 2 कप पानी डालकर पतली चाशनी बना लें। इस चाशनी में तले हुए मालपुए डाल दें और 5 मिनट बाद निकाल लें। 

तैयार हैं सुपर टेस्टी और हेल्दी केले के मालपुए। 

फिलहाल, आप इन्हें कटे हुए बादाम और पिस्ता से सजाकर सर्व करें। मालपुआ को चीनी की चाशनी में भी डालकर बना सकते हैं। ये मालपुए बहुत नरम और रसीले बनेंगे।

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History 10 September : आज मनाया जाता है ʼविश्व आत्महत्या रोकथाम दिवसʼ.भारत के मशहूर फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप का जन्म..जाने और प्रमुख घटनाएं

History of 10 September; आज देश भर में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस (World Suicide Prevention Day) मनाया जा रहा है. सुसाइड के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए इस दिन की शुरुआत की गई. इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर सुसाइड प्रिवेंशन ने साल 2003 में पहली बार 10 सितंबर के दिन विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाने की शुरुआत की थी. इस इवेंट को वर्ल्ड फेडरेशन फॉर मेंटल हेल्थ और वर्ल्ड ऑर्गेनाइजेशन ने स्पॉन्सर किया था.

वैश्विक मंच पर इस पहल को काफी सराहना मिली थी. जिसके बाद अगले साल 2004 में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने औपचारिक रूप से विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस को स्पॉन्सर किया था. तभी से हर साल 10 सितंबर को वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे मनाया जाता है.

इसके अलावा आज ही के दिन सिलाई मशीन का पेटेंट कराया गया था. संयुक्त राज्य अमेरिका में, अमेरिकी आविष्कारक एलियास होवे ने 1846 में लॉकस्टिच सिलाई मशीन का पेटेंट कराया था. हावे के डिजाइन में सुई के नुकीले सिरे पर एक आंख और दूसरा धागा ले जाने के लिए एक शटल था, जबकि उनका आविष्कार आधुनिक सिलाई मशीनों का आधार था. शुरुआत में इसे व्यापक स्वीकृति प्राप्त करने के लिए संघर्ष करना पड़ा. 1851 में इसहाक मेरिट सिंगर ने होवे की सिलाई मशीन के एक बेहतर संस्करण का पेटेंट कराया, जिसका उपयोग करना आसान था. साथ ही इसमें फुट ट्रेडल और क्षैतिज तालिका भी शामिल थी. 

आज के दिन 1926 में जर्मनी को मित्र राष्ट्र संघ में शामिल किया गया था. इसके बाद अक्टूबर 1933 में एडॉल्फ हिटलर को जर्मनी का चांसलर नियुक्त किए जाने के लगभग नौ महीने बाद जर्मन सरकार ने राष्ट्र संघ से अपनी वापसी की घोषणा की. बताया जाता है कि इसका मुख्य कारण पश्चिमी शक्तियों द्वारा जर्मनी की सैन्य समानता की मांगों को मानने से इंकार करना था.

मित्र राष्ट्र संघ के सदस्यों में शुरुआत में वर्साय सन्धि पर हस्ताक्षर करने वाले ये देश थे, जिनमें ब्रिटेन, इटली,जापान,चीन,फ्रांस आदि थे. अमेरिका इस राष्ट्र संघ का सदस्य नहीं बन सका था. 1940 में फिनलैण्ड पर आक्रमण के कारण उसे सदस्यता से वंचित कर दिया गया. जापान ने 1933 में और इटली ने 1937 में इसकी सदस्यता त्याग दी. 1938 में संघ के सदस्यों की कुल संख्या 62 तक पहुंच गई थी, लेकिन अप्रैल 1946 में संघ की अन्तिम बैठक के समय यह घटकर 43 रह गई थी. इनमें से 34 राज्यों के प्रतिनिधियों ने ही बैठक में भाग लिया.

देश और दुनिया के इतिहास में 10 सितंबर कई कारणों से महत्वपूर्ण है, जिनमें से ये सभी प्रमुख हैं- 

1785: प्रशिया ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किया.

1966: भारतीय संसद ने पंजाब और हरियाणा राज्य के निर्माण पर स्वीकृति प्रदान की.

1972: भारत के जाने-माने फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप का जन्म हुआ.

1973: सेंट्रल लंदन में बम धमाके हुए.

1974 : पश्चिम अफ्रीका में स्थित देश गिनी गणराज्य ने पुर्तगाल से स्वतंत्रता प्राप्त की.

2002: स्विटजरलैंड संयुक्त राष्ट्र में शामिल हुआ.

2008: स्विटजरलैंड की सर्न प्रयोगशाला के लार्ज हेड्रॉन कोलाइडर में सबसे बड़ा वैज्ञानिक प्रयोग शुरू हुआ.

1955: टीवी शो गनस्मोक का प्रसारण CBS पर शुरू हुआ. 1975 में शो समाप्त हुआ, तब तक यह श्रृंखला अमेरिकी टेलीविजन पर सबसे लंबे समय तक चलने वाली पश्चिमी श्रृंखला थी.

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Healthy Chilla Recipe : नाश्ते में ट्राई करें ये 5 चीला रेसिपी, स्वाद के साथ मिलेगा भरपूर प्रोटीन

लाइफस्टाइल डेस्क ; नाश्ते में चीला खाना बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आता है। ऐसे में अगर आप हाईप्रोटीन हेल्दी ब्रेकफास्ट के ऑप्शन तलाश कर रहे हैं तो आपको ये 5 तरह के चीला ट्राई करने चाहिए।

Healthy Chilla Recipe: सुबह के नाश्ते को लेकर लोगों का विचार होता है कि कुछ ऐसा खाया जाए को स्वादिष्ट भी हो और हेल्दी भी। ऐसे में आप नाश्ते में एक-दो नहीं बल्कि 5 तरीके से चीला बना सकते हैं। इससे आपको भरपूर प्रोटीन मिलेगा। साथ ही जिन चीजों का आप इस्तेमाल करेंगे उनसे आपको फाइबर, विटामिन भी मिलेंगे। यूं तो घरों में अक्सर बेसन का चीला बनाया जाता है। लेकिन आप इसमें में विविधता ला सकते हैं। साथ ही इन्हें खाने से आपका पेट लंबे समय तक भरा रहेगा। साथ ही आपको वजन घटाने में भी मदद मिलेगी।

रागी चीला

अगर आप नाश्ते में ग्लूटेन फ्री आहार चाहते हैं, तो रागी चीला ट्राई करना चाहिए। यह एक हल्का और पौष्टिक नाश्ता आपको जरूर पसंद आएगा।

सूजी, टमाटर और प्याज चीला

सूजी चीले में स्वाद बढ़ाने के लिए, आप कटे हुए टमाटर और प्याज को बैटर में मिलाकर पका सकते हैं। यह खाने में हल्का रहेगा और पेट लंबे समय तक भरा महसूस होगा।

मूंग दाल चीला

हाई प्रोटीन ब्रेकफास्ट के लिए आप नाश्ते में मूंग दाल का चीला बना सकते हैं। यह आपके पेट को लंबे समय तक भरा हुआ रखता है। साथ ही सेहत के लिए पोष्टिक होता है।

ओट्स चीला

नाश्ते में अगर आप सिंपल ओट्स खाकर बोर हो गए हैं तो आप ओट्स से चीला भी बना सकते हैं। इससे आपको फाइबर और पोषक तत्व मिलेंगे।

बाजरा चीला

ग्लूटेन-फ्री चीला के लिए आप मोती बाजरा या फॉक्सटेल बाजरा आज़माएं। इससे आप झटपट नाश्ता तैयार कर सकते हैं।

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History 9 September : आज ही के दिन जन्मे थे 'कारगिल' के हीरो 'शेरशाह' कैप्टन विक्रम बत्रा..जानें और प्रमुख घटनाएं

09 सितंबर का इतिहास; 'शेरशाह ऑफ कारगिल' के नाम से मशहूर भारतीय थलसेना के जांबाज, कैप्टन विक्रम बत्रा का जन्म आज ही के दिन साल यानी 9 सितंबर 1974 में हुआ था. कैप्टन विक्रम बत्रा मई से जुलाई 1999 में चले कारगिल युद्ध में 19 जून को शामिल हुए थे. कैपटन ने जब इस युद्ध में एंट्री मारी तब कारगिल की चोटी 5140 पर पाकिस्तानी कब्जा कर चुके थे. इसी को छुड़ाने का टास्क बत्रा को दिया गया था. अपनी बहादुरी का सबूत देते हुए कैप्टन इस अहम छोटी को जीत कर वहां तिरंगा लगाने में कामयाब हुए. कैप्टन यहीं नहीं रुके. बाद में जब उनके अधिकारियों ने उन्हें और उनकी टीम को आराम देना चाहा तो विक्रम ने कहा 'ये दिल मांगे मोर' यही कहते हुए विक्रम ने चोटी 4875 पर फतह का फैसला किया. अपनी जान की पहवाह किये बिना विक्रम चल पड़े इस मिशन पर लेकिन पाकिस्तानियों को उनकी आने की खबर लग गई थी. 7 जुलाई 1999 को अपनी आखिरी सांस तक लड़ाई लड़ते हुए कैप्टन ने देश के लिए बलिदान दिया और इतिहास में अमर हो गए. 8 जुलाई की सुबह भारत ने चोटी 4875 पर भारतीय कर तीरंगा फहराया लेकिन विक्रम बत्रा को खो दिया. बत्रा को मरणोपरांत भारत का सर्वोच्च सम्मान 'परमवीर चक्र' से सम्मानित किया गया. कैप्टन विक्रम बत्रा के जीवन पर साल 2021 में एक फिल्म भी बनी थी. जिसमे बत्रा का किरदार सिद्धार्थ मल्होत्रा ने निभाया था. 69वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में कियारा-सिद्धार्थ की फिल्म शेरशाह को स्पेशल जूरी अवॉर्ड दिया गया.

भारत से आगे बढ़कर अब विश्व इतिहास पर एक नजर डालते हैं. आज का दिन तकनीकि क्षेत्र में एक अहम खोज के लिए जाना जाता है. 9 सितंबर 1947 में अमेरिका में पहली बार कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर में बग पाया गया था. बता दें ये बग अमेरिका की हॉवर्ड युनिवेर्सिटी की कम्प्यूटेशन लैबोरेटरी में ऑपरेटर्स ट्रांसमिशन के दौरान मार्क सेकंड कम्प्यूटर में नजर आया था. बाद में इसे आसानी से हटा लिया गया था. बग कम्यूटर प्रोग्रामिंग के समय छूट गई वो गलती है जिससे पूरे प्रोग्राम या सॉफ्टवेयर को नुकसान पहुंचता है.

आज यानी 9 सितंबर साल 1850 को कैलिफ़ोर्निया अमेरिका का 31वां राज्य बना था.बता दें कैलिफोर्निया अमेरिका का तीसरा सबसे बड़ा राज्य है. यह प्रशांत महासागर के साथ 800 मील (1,290 किलोमीटर) से अधिक तक फैला है और अपने सबसे चौड़े बिंदु पर 365 मील (587 किलोमीटर) चौड़ा है.इसकी राजधानी सैक्रामेंटो है.

देश- दुनिया में 9 सितंबर का इतिहास

फ्रांस के राजा फिलिप चतुर्थ ने 1303 में पोप बोनिफेस अष्टम को

इटली के अनाग्नि शहर में बंधक बनाया.

टुमु किले की लड़ाई में मंगोलियाई सेनाओं ने 1449 में चीन के सम्राट को बंधक बनाया.

माइकल एंजिलियो द्यारा बनाई गई डेविड की मूर्ति को 1504 में लोगों के सामने प्रदर्शित किया गया.

ब्रिटेन के लिचफिल्ड शहर की स्थापना 1553 में की गई.

अमेरिकी संसद कांग्रेस ने 1776 में आधिकारिक तौर पर देश का नाम ‘यूनाइटेट कॉलोनीज़’ से बदलकर संयुक्त राज्य अमेरिका किया.

कैलीफोर्निया 1850 में अमेरिका का 31वां राज्य बना.

यूरोपीयीय देश लक्जमबर्ग ने 1867 में स्वतंत्रता हासिल की.

अमेरिका की राजधानी का नामकरण 1791 में राष्ट्रपति जॉर्ज वाशिंगटन के नाम पर वाशिंगटन रखा गया.

यूनाइटिड स्टेट्स की राजधानी का नाम वॉशिंगटन डी.सी. 1791 में आज के दिन ही राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन के नाम पर रखा गया.

कैलीफोर्निया 1850 में अमेरिका का 31वां राज्य बना.

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Recipe : बेसन का दानेदार हलवा जिसके सामने मूंगदाल का हलवा भी लगेगा फीका..मिनटों में तैयार..जाने बनाने की विधि

Lifestyle Desk ; मिठाइयों में हलवा बनाना काफी आसान है। हालांकि मूंगदाल का हलवा और गाजर का हलवा बनाने में काफी समय लगता है, लेकिन बेसन का हलवा फटाफट बनकर तैयार हो जाता है। बेसन का हलवा बनाने के लिए न तो घंटों भूनने की जरूरत पड़ती और न ही इसे लंबे समय तक पकाना पड़ता है। जब भी मीठा खाने का मन करे या घर में मेहमान आएं आप बेसन का हलवा बना सकते हैं। राजस्थानी बेसन का हलवा एकदम दानेदार और टेस्टी बनता है। आपको एक बार इस तरह से बेसन का हलवा बनाकर जरूर खाना चाहिए।

बेसन का दानेदार हलवा कैसे बनाएं

बेसन का हलवा बनाने के लिए सामग्री

हलवा बनाने के लिए बेसन 200 ग्राम, घी 2 चम्मच, दूध 2 चम्मच, चीनी 180 ग्राम, पानी 2.5 गिलास, पीला फूड कलर ऑप्शन है। केसर के धागे, घी 3 बड़े चम्मच, सूजी आधा कप, सजाने के लिए बादाम और पिस्ता और इलायची स्वाद के लिए चाहिए।

बेसन का हलवा बनाने की विधि

पहला स्टेप- सबसे पहले एक बड़ी प्लेट में बेसन लें और उसमें 2 चम्मच देसी घी डालें और दूध डाल दें। अब बेसन को हाथ से मलते हुए अच्छी तरह से मिक्स कर लें। इससे बेसन का हलवा एकदम दानेदार बनेगा। अब बेसन को किसी मोटे छेद वाली छन्नी के छान लें।

दूसरा स्टेप- एक पैन में चीनी और 2 गिलास पानी डालकर चाशनी बनने के लिए रख दें। चाशनी में ही केसर के धागे और फूड कलर मिला दें। अब कड़ाही में घी डालें और उसमें सूजी को हल्का भूने और फिर बेसन मिलाकर दोनों को चलाते हुए भून लें।

तीसरा स्टेप- जब बेसन और सूजी का रंग हल्का लाल सा होने लगे और भुनने की खुशबू आने लगे तो इसमें 2-3 चम्मच दूध डालकर लगातार चलाते हुए भूनते रहें। इससे बेसन का हलवा बहुत ही स्वादिष्ट बनता है।

चौथा स्टेप- अब बेसन और सूजी के मिक्स को चलाते हुए साइड में तैयार की गई चाशनी को धीरे धीरे डालकर मिलाते रहें और लगातार चलाते भी रहें। सारा चीनी वाला घोल बेसन में डालकर मिलाएं और गाढ़ा होने तक पकाएं। ऊपर से 2-3 बड़े चम्मच घी और डालें। इलायची पाउडर डालें और कटे हुए मेवा डालकर गर्मागरम हलवा सर्व करें।

पांचवां स्टेप- एक बार इस तरह बेसन का बना हलवा खाएंगे तो फिर मूंगदाल का हलवा भी पसंद नहीं आएगा। ये हलवा खाने में सुपर टेस्टी और दानेदार बनता है। मेहमान भी पता नहीं लगा पाएंगे कि ये बेसन का हलवा बना है।

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History 8 September : आज पूरा विश्व मना रहा है ʼअंतराष्ट्रीय साक्षरता दिवसʼ.भारत की पूर्व PM इंदिरा गांधी के पति फिरोज गांधी का निधन

On This Day in History 8 September: एक सभ्य घर जैसा कोई विद्यालय नहीं है और एक भद्र अभिभावक जैसा कोई अध्यापक नहीं है - महात्मा गांधी के इन सुन्दर वचनों से शुरू करते हैं आज का इतिहास... आज विश्व भर में अंतराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जा रहा है. जहां तक इसके इतिहास की बात है तो साल 1965 में यूनेस्को ने इसे विश्वभर में मनाये जाने का प्रस्ताव दिया था. इसका उद्देश्य हर व्यक्ति को शिक्षा के प्रति जागरूक करना था. 8 सितंबर साल 1966 में पहली बार अंतराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया गया.

आज का दिन अमेरिकी इतिहास में एक दिलचस्प किस्से के लिए याद की जाती है. आज यानी 8 सितंबर साल 1974 को तब के अमेरिकी राष्ट्रपति गेराल्ड आर फोर्ड ने प्रोक्लेमेशन 4331 जारी किया था. ये वही विवादित प्रोक्लेमेशन था जिसके तहत पूर्व राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन को आपराधिक मामलों में संलिप्त होने के बावजूद माफ़ी दी गई थी. निस्कन ने उसी साल अगस्त में राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया था. बता दें निक्सन इकलौते अमेरिकी राष्ट्रपति हैं जिन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था. निक्सन की 'वाटरगेट स्कैंडल' में भूमिका को देखते हुए इनपर महाभियोग चलाया गया था. इतिहास के कई जानकारों के मुताबिक ये माफ़ी भी विवादित थी. जिसकी कीमत 2 साल बाद फोर्ड को चुकानी पड़ी और वो आगामी चुनाव हार गए.

8 सितंबर 1960 ये वो दिन है जब फिरोज गांधी ने अस्पताल में आखिरी साँसे ली थी. 7 सितंबर 1960 को फिरोज गांधी को दिल का दौरा पड़ा था जिसके बाद उन्हें अस्पताल में एडमिट कराया गया. 8 तारीख की सुबह 7 बजकर 45 मिनट पर फिरोज गांधी ने आखिरी सांस ली. उनके आखिरी समय में इंदिरा गांधी उनके साथ मौजूद थी. बीबीसी की एक रिपोर्ट में बर्टिल फाक की किताब फ़िरोज़- द फॉरगॉटेन गांधी के हवाले से कहा गया था, उनके शव को तीन मूर्ति भवन में रखा गया था. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि उस समय वहां सभी धर्मग्रंथों का पाठ किया जा रहा था. इसके बाद उनका हिन्दू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार किया गया था. उस वक्त राजीव गांधी 16 साल के थे और उन्हें फिरोज़ गांधी के शव की चिता को मुखाग्नि दी गई थी. उनका अंतिम संस्कार हिंदू रीतिरिवाजों से किया गया. ऐसा कहा जाता है कि उन्हें पारसी तरीके से अपना अंतिम संस्कार करवाना पसंद नहीं था.

देश-दुनिया में आज का इतिहास

1926 : महान संगीतकार एवं गायक भूपेन हज़ारिका का जन्म.

1943 : द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान इटली ने मित्र सेना के साथ बिना शर्त युद्धविराम संधि पर हस्ताक्षर किए.

1960 : भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पति फिरोज गांधी का निधन.

1962 : चीन ने भारत की पूर्वी सीमा में घुसपैठ की.

1966 : लोगों को पढ़ाई के प्रति जागरूक करने के लिए यूनेस्को ने ‘साक्षरता दिवस’ मनाने की शुरुआत की.

1988 : जाने-माने व्यवसायी विजयपत सिंघानिया अपने ‘माइक्रो लाइट सिंगल इंजन एयरक्राफ्ट’ से लंदन से अहमदाबाद पहुंचे.

2002 : नेपाल में माओवादियों ने 119 पुलिसकर्मियों को मार डाला.

2008 : अमेरिकी पत्रिका फोर्ब्स ने भारतीय अरब पति लक्ष्मी मित्तल को ‘लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड’ से सम्मानित करने की घोषणा की.

2019 : प्रख्यात न्यायविद्, कानून के ज्ञाता एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री राम जेठमलानी का निधन.

2020: हिंदुजा समूह की प्रमुख कंपनी अशोक लीलैंड के मानद चेयरमैन आर. जे.साहनी का निधन.

2020: तेलुगु रंगमंच एवं फिल्मों के जाने-माने अभिनेता जयप्रकाश रेड्डी का निधन.

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Boondi Raita Recipe : दही, बूंदी और मसालों का कमाल.! जाने रीवा का वो देसी रायता रेसिपी, जिसे खाकर कहेंगे - वाह मजा आ गया

Boondi Raita Recipe: बारिश के मौसम रीवा में लजीज व्यंजन बनना आम बात है, लेकिन इन पकवनों के साथ बनने वाला रीवा का देसी ताजे दही का ठंडा-ठंडा रायता खाने का मजा ही कुछ और होता है, जब बात हो रायते की, तो बूंदी रायता हर किसी की पसंद बन जाता है. यह एक आसान, झटपट बनने वाली और बहुत ही स्वादिष्ट डिश है जो किसी भी खाने के स्वाद को दोगुना कर देती है. मसालेदार दही में भीगी हुई मुलायम बूंदी, ऊपर से धनिया या पुदीने की ताजगी, हर एक चम्मच में ठंडक और स्वाद का अनोखा अनुभव मिलता है. चाहे आप इसे बिरयानी, पुलाव या पराठों के साथ परोसें, यह हर बार वाहवाही बटोरता है. ऐसे में आज हम आपको बता रहे हैं घर पर आसान तरीके से बूंदी रायता बनाने की रेसिपी.

 

सामग्री

1/2 कप बूंदी – सादी या नमकीन

1 कप दही – ताजा

1/4 से 1/2 छोटी चम्मच चाट मसाला

1/2 छोटी चम्मच सौंफ पाउडर – ऑप्शनल

1/2 छोटी चम्मच भुना हुआ जीरा पाउडर

1/4 छोटी चम्मच लाल मिर्च पाउडर या कयेन पेपर

1/4 छोटी चम्मच काली मिर्च पाउडर – ऑप्शनल

1 से 2 बड़े चम्मच बारीक कटी धनिया पत्ती या 1 बड़ा चम्मच पुदीना पत्ती

स्वाद अनुसार काला नमक, सेंधा नमक.

 

विधि

सबसे पहले दही तैयार कर लें. एक बाउल में ताजा दही लें और उसे अच्छे से फेंट लें ताकि वह एकदम चिकनी और मुलायम हो जाए. खट्टा दही इस्तेमाल न करें, और कोशिश करें कि घर का ताजा दही हो. बूंदी को फेंटी हुई दही में डालें और एक चम्मच की मदद से धीरे-धीरे मिलाएं, सबकुछ अच्छे से मिक्स हो जाए, दस से पंद्रह मिनट के लिए ढककर रख दें. अब इसमें स्वाद के अनुसार मसाले मिलाएं. इसमें आप चम्मच चाट मसाला.भुना हुआ जीरा पाउडर, लाल मिर्च पाउडर. काली मिर्च पाउडर (अगर चाहें तो).सौंफ पाउडर भी डाल सकते हैं. (ऑप्शनल है). साथ ही स्वाद अनुसार काला नमक, सफेद नमक या सेंधा नमक भी मिलाएं. अब इन सभी मसालों को अच्छी तरह दही और बूंदी में मिला दें और स्वाद चखकर जरूरत हो तो थोड़ा और मसाला या नमक डाल लें.लास्ट में, ऊपर से धनिया पत्ती या पुदीना पत्ती डालें. आप चाहें तो दोनों को भी मिक्स कर सकते हैं.

 

अब आपका बूंदी रायता तैयार है. यह रायता बिरयानी, पुलाव, जीरा राइस, केसर राइस या स्टफ्ड पराठों जैसे आलू पराठा, गोभी पराठा या मूली पराठा के साथ बहुत स्वादिष्ट लगता है.आप चाहे तो सबसे पहले ही 1.5 कप पानी गर्म करें और उसे बाउल में डालकर उसमें बूंदी भिगो दें. ढककर 9 से 12 मिनट तक भिंगोएं. ध्यान रखें, ज्यादा देर भिगोने से बूंदी चिपचिपी हो सकती है, या मेश हो सकती है ऐसे में दही में बूंदी को फूलाना नहीं पड़गा मसाले मिलाकर परोस सकती हैं. लेकिन दही में फूली बूंदी रायता का स्वाद ज्यादा अच्छा होता है.

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History 7 September : चंद्रयान-2 की विफलता ने ही लिखी थी चंद्रयान-3 के सफलता की कहानी..जाने और प्रमुख घटनाएं

Today History : 7 सितंबर 2019, ये वो तारीख है (Aaj ka itihas) जिसने सवा सौ करोड़ भारतियों का दिल तोड़ दिया था. ये वही दिन था जब इसरो का चंद्र मिशन चंद्रयान -2 लैंडिंग (Chandrayaan-2 landing day) के वक्त दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. टीवी पर टकटकी लगाए बैठे लोग अचानक निराशा के सागर में डूब गए थे. इसरो (ISRO) कॉम्प्लेक्स में सन्नाटा पसर गया. तब के इसरो चीफ के शिवान (ISRO ex Chief K Sivan) फूट-फूट कर रोने लगे. उन्हें सांत्वना देने के लिए PM मोदी खुद आगे आए. लेकिन कहते हैं हर फेलियर हमें हजारों सीख दे जाता है. चंद्रयान-2 की असफलता ने ही चंद्रयान-3 की सफलता के रास्ते खोले थे. चंद्रयान-2 से सीख लेकर ही चंद्रयान-3 ने 23 अगस्त 2023 की शाम 6 बजकर 4 मिनट पर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट (Soft on the Moon's South Pole) लैंडिंग की.

 

चंद्रयान से हटकर आइये बात करते हैं अब भारत एक ऐसे बैंक की, जिसे शुरू तो निजी स्वामित्व पर किया गया था. लेकिन आगे चलकर इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया गया. जी हां हम बात कर रहे हैं बैंक ऑफ़ इंडिया की जिसकी स्थापना (Establishment of Bank of India) आज ही के दिन साल 1907 में मुंबई में कुछ प्रतिष्ठित व्यापारियों के समूह द्वारा की गई थी. बाद में जब इंदिरा सरकार ने जुलाई 1969 में 13 राष्ट्रीय बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया तो बैंक ऑफ इंडिया भी उसमें शामिल था.विश्व

 

इतिहास में देखे तो पाएंगे आज यानी 7 सितंबर का दिन प्रद्योगिकी और तकनिकी के लिहाज़ से भी अहम है. आज ही के दिन साल 1927 में पहला पूर्णतः इलेक्ट्रॉनिक टेलीविजन बनाया गया (first fully electronic television created) था. इस टीवी को बनाने का श्रेय फिलियो टेलर को दिया जाता है. वहीं, अगर बात दुनिया के पहली टेलीविजन की करें, तो उसे साल 1925 में बनाया गया था लेकिन ये एक मकैनिकल टेलीविजन था जिसे John Logie Baird ने बनाया था.

 

देश- दुनिया में 7 सितंबर का इतिहास

 

1812: नेपोलियन ने रूसी सेना को हराया.

1822: ब्राजील ने पुर्तगाल से अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की.

1921: मिस अमेरिका प्रतियोगिता की शुरुआत की गई.

1923 : विएना में इंटरपोल की स्थापना.

1927: फिलियो टेलर ने पूर्णतः इलेक्ट्रॉनिक टीवी बनाने में सफलता हासिल की.

1931: लंदन में गोलमेज सम्मेलन का दूसरा सत्र शुरू.

1940: दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी ने अपनी वायुसेना के जरिए ब्रिटेन के शहरों पर बमबारी शुरू की.

1963 : अशोक चक्र विजेता विमान परिचारिका नीरजा भनोट का जन्म। नीरजा ने एक अपहृत विमान के यात्रियों को बचाने के दौरान अपनी जान गंवा दी थी.

1986 : बिशप डेसमंड टूटू केपटाउन के पहले अश्वेत आर्कबिशप बने.

2008 : भारत-अमेरिका परमाणु करार के तहत एनएसजी के 45 सदस्यों ने भारत को अन्तरराष्ट्रीय बिरादरी से परमाणु व्यापार की छूट दी.

2009 : भारत के पंकज आडवाणी ने विश्व पेशेवर बिलियडर्स का ख़िताब जीता.

2011 : दिल्ली उच्च न्यायालय के गेट नंबर पांच के बाहर बम विस्फोट में 17 लोगों की मौत, 76 अन्य घायल.

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Recipe : परवल की मिठाई कैसे बनाते हैं, इसमें क्या चीज भरी जाती है, नोट कर लें सबसे आसान विधि परवल की मिठाई रेसिपी

लाइफस्टाइल डेस्क ; परवल की सब्जी तो लोग खूब खाते हैं लेकिन परवल की मिठाई लोगों ने कम ही खाई है। जहीं हा परवल से बहुत स्वादिष्ट मिठाई बनती है। हरे रंग की ये दिखने में जितनी सुंदर लगती है खाने में उससे कहीं ज्यादा टेस्टी लगती है। यूपी बिहार में परवल की मिठाई लोग स्वाद लेकर खाते हैं। खासतौर से बिहार में परवल की मिठाई काफी बनती है। चूंकि परवल अपने आप में पौष्टिक तत्वों से भरपूर सब्जी है तो सोचिए इसकी मिठाई भी हेल्दी ही होगी। आप इसे घर पर आसानी से बना सकते हैं। तो चलिए बिना देरी किए फटाफट से जान लें परवल की मिठाई बनाने की ये आसान रेसिपी।

 

परवल की मिठाई बनाने की रेसिपी

पहला स्टेप- आपको इसके लिए 7-8 पहले मीडियम साइज के परवल लेने होंगे। परवल को धोकर अच्छी तरह छील लें, जिससे कड़ा छिलका निकल जाए। अब बीच से एक कट लंबाई में लगाएं और परवल के अंदर के बीज निकाल लें। एक पैन में पानी को उबलने के लिए रख दें और उसमें परवल डाल दें। आप चाहें तो सिर्फ कट लगाकर ही परवल को उबाल सकते हैं। उबलने के बाद आसानी से बीज निकाल सकते हैं। परवल का रंग हरा ही बना रहे इसके लिए पानी में 1 चम्मच चीनी और आधा टी स्पून सोडा डाल दें। परवल करीब 5-7 मिनट में उबल जाएंगे और उन्हें निकालकर किसी छन्नी पर रख दें जिससे पानी निकल जाए। अब एक बाउल में ठंडा बर्फ वाला पानी लें और उसमें उबले हुए परवल डालकर रख दें।

 

दूसरा स्टेप- एक पैन में करीब आधा कप चीनी लें और उसमें आधा कप से थोड़ा ज्यादा पानी मिलाकर चाशनी बना लें। चाशनी में पिसी इलाइची पाउडर डालें और हल्की गाढ़ी चाशनी बनने पर परवल डाल दें। परवल को चाशनी में डालकर 3-4 मिनट के लिए पका लें ताकि अंदर तक चाशनी चली जाए।

 

तीसरा स्टेप- अब स्टफिंग के लिए 200 ग्राम मावा घर में बना लें या खरीदकर ले आएं। मावा में स्वादानुसार चीनी, ड्राई फ्रूट्स और इलाइची मिला दें। परवल के अंदर मावा की स्टफिंग करें और ऊपर से पिसा हुआ नारियल का बुरादा डाल दें। सजाने के लिए ऊपर से कटी हुई चेरी और चांदी की वर्क लगाएं और फ्रिज में रख दें। तैयार है स्वादिष्ट और ठंडी-ठंडी परवल की मिठाई।

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