Karela Tasty Recipe : कड़वा नहीं, करेला लगेगा लजीज-शानदार..बस फॉलो करें ये छत्तीसगढ़ी रेसिपी
Karela Tasty Recipe: छत्तीसगढ़ की रसोइयों में जब करेला पकता है, तो उसकी खुशबू दूर तक फैलती है, लेकिन यह कोई आम करेला नहीं होता. यह वह करेला है जिसे लोग कभी कड़वा कहकर छोड़ देते थे, लेकिन अब उसी से जुड़ रही है स्वाद की नई पहचान. देसी मसालों की खुशबू, धीमी आंच पर पकने वाली सब्ज़ी, और मिट्टी की महक, यही बनाता है भरवां करेला को खास. कड़वाहट अब इसमें नहीं, बल्कि बीते समय की बातों में रह गई है, क्योंकि आज यह सब्ज़ी बन चुकी है स्वाद और परंपरा का अद्भुत मेल.
करेले से डरने की ज़रूरत नहीं, उसे भरिए स्वाद से
भाग्यवती बताती हैं कि भरवां करेला को लोग कड़वाहट की वजह से पसंद नहीं करते, लेकिन अगर उसे हल्का नमक लगाकर पहले पानी निचोड़ लिया जाए और फिर खास देसी मसाले से भरा जाए, तो इसका स्वाद लाजवाब हो जाता है.
मसाले की बात ही कुछ और
इस रेसिपी में प्याज, सौंफ, लहसुन, अमचूर और गुड़ जैसे देसी तत्वों का मेल होता है. भाग्यवती कहती हैं कि मसाले को धीमी आंच पर भूनना सबसे जरूरी चरण है क्योंकि यही स्वाद की गहराई तय करता है. एक चुटकी गुड़ इस सब्जी को हल्की मिठास देता है जो कड़वाहट को संतुलित करता है.
धीमी आंच पर पकता है असली स्वाद
मसाला भरने के बाद करेलों को हल्के सरसों तेल में, राई के तड़के के साथ, धीमी आंच पर पकाया जाता है. भाग्यवती इसे ढंककर पकाती हैं ताकि मसाला अंदर ही अंदर रस छोड़ता रहे और करेला नरम व स्वादपूर्ण बन जाए.
बासी भात हो या गरम रोटी, दोनों के साथ झटपट खत्म
यह भरवां करेला दाल-चावल, गरम रोटी या छत्तीसगढ़ी बासी भात के साथ खासकर पसंद किया जाता है. भाग्यवती बताती हैं कि ये सब्जी जितनी पुरानी होती है, उतनी ज्यादा स्वादिष्ट लगती है.
घरेलू रसोई से छत्तीसगढ़ी संस्कृति का स्वाद
भाग्यवती जैसी महिलाएं अपने हाथों से न केवल स्वाद परोसती हैं, बल्कि छत्तीसगढ़ी खानपान की परंपराओं को जीवित भी रखती हैं. उनकी रेसिपी न सिर्फ स्वाद से जुड़ी है, बल्कि घर की खुशबू और संस्कृति से भी.
