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History of 06 September : नेताजी के आदर्श शरतचंद्र बोस का जन्मदिन..समलैंगिकता को मिली थी 'सहमति'..जाने और प्रमुख घटनाएं

On This Day in History 6 September: 6 सितंबर का दिन (6 september ka itihas) भारत और विश्व इतिहास (aaj ka itihas) की नजरों से देखें तो काफी अहम है.आज ही के दिन 6 सितंबर 1889 को शरतचंद्र बोस का जन्म हुआ था. दरअसल शरतचंद्र बोस (Sarat chandra Bose), नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बड़े भाई थे. ऐसा कहा जाता है कि जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Subhash Chandra Bose) को अंग्रेजों ने उनके घर पर नजरबन्द कर दिया था उस समय वो शरतचंद्र ही थे जिन्होंने चक्रव्यूह को भेदने की पूरी कला शिशिर बोस (Sisir Bose) को सिखाई थी. इस घटना को भारतीय इतिहास में 'दी ग्रेट एस्केप' ('The Great Escape') के नाम से जाना जाता है. शरतचंद्र से नेताजी का एक और किस्सा जुड़ा हुआ है जब साल 1921 में सुभाषचन्द्र बोस ने सिविल सेवा पद से इस्तीफा दिया था उस समय उन्होने शरत चंद्र को खत लिख कर माफ़ी मांगी थी. इस खत में लिखा था मुझे आपके आदर्शों पर भरोसा है. मेरा फैसला आखिरी है और ये अटल है लेकिन मेरा मौजूदा कदम आपके हाथ में है. क्या आप मुझे नए और हिम्मत से भरे रास्ते को चुनने के लिए शुभकामनाएं नहीं देंगे?

6 सितंबर का दिन भारतीय न्याय व्यवस्था के लिए भी अहम फैसले का दिन था. आज ही के दिन यानी 6 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध के दायरे से बाहर (decriminalize homosexuality) कर दिया. उस समय मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा (former Chief Justice Deepak Mishra) की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने एकमत से फैसला सुनाया था. इस ऐतिहासिक मामले पर फैसला सुनाते वक़्त पीठ ने कहा था कि 'परस्पर सहमति से वयस्कों के बीच समलैंगिक यौन संबंध अपराध नहीं हैं और ऐसे यौन संबंधों को अपराध के दायरे में रखने की धारा 377 के प्रावधान से संविधान से मिले समता और गरिमा के अधिकार का हनन होता है.'

जब कभी भी फिल्म जगत के बड़े चेहरों का नाम लिया जाएगा जापान के फिल्म निदेशक अकीरा कुरासोवा (Akira Kurasova death anniversary) का नाम बड़े अदब और सम्मान के साथ लिया जाता है. 1943 से अपनी पहली फ़िल्म 'सांसिरो सुगाता' से अपने करियर की शुरुआत करने वाले कुरासोवा को शायद तब ये बात नहीं पता होगी कि एक वक़्त के बाद उनकी निर्देशन और स्क्रीन राइटर की कला को दुनिया इस तरह सराहेगी. द सेवन समुराई, राशोमोन और ब्लड ऑन द थ्रोन अकीरा की आल टाइम क्लासिक कल्ट शाबित हुई थी. आज ही वो दिन हैं जब साल 1998 में दुनिया के इस महान निर्देशक ने आखिरी साँसे ली थी.

देश-दुनिया में 6 सितंबर का इतिहास 

1522 : समंदर के रास्तेू पृथ्वीच का पूरा चक्कवर लगाने वाला पहला जहाज विक्टो:रिया स्पेसन लौटा.

1657 : मुगल शासक शाहजहां के अचानक बीमार पड़ने से उनके राज्य में कई जगह अलगाववादी आंदोलन शुरू हो गए.

1889 : शरत् चंद्र बोस का जन्म.

1901 : अमेरिका के 25वें राष्ट्रपति विलियम मैककिनले को न्यूयॉर्क में एक व्यक्ति ने गोली मारी. आठ दिन तक जीवन-मृत्यु के बीच संघर्ष करने के बाद उन्होंने दम तोड़ दिया.

1929 : जाने-माने भारतीय फिल्मकार यश जौहर का जन्म अविभाजित भारत के लाहौर में हुआ.

1970 : पॉपुलर फ्रंट फॉर द लिबरेशन ऑफ फलस्तीन ने यूरोप के हवाई अड्डों से चार विमानों का अपहरण किया. अपहरणकर्ता इन विमानों को जॉर्डन और मिस्र के हवाईअड्डों पर ले गए. बंधक बनाए गए 382 यात्रियों के बदले में उन्होंने स्विस जेल में बंद तीन लोगों को छोड़ने की मांग की.

1972 : हिंदुस्तांनी शास्त्री य संगीत के दिग्गमज एवं प्रसिद्ध सरोद वादक उस्तानद अलाउद्दीन खान का निधन.

1990 : संसद से पारित हुआ प्रसार भारती विधेयक.

1991 : रूस के दूसरे सबसे बड़े शहर को कभी सेंट पीटर्सबर्ग, कभी पेत्रोग्राद तो कभी लेनिनग्राद नाम से पुकारे जाने के बाद उसका पुराना नाम सेंट पीटर्सबर्ग वापस मिला.

1997 : एक हफ़्ते तक शोक मनाने के बाद वेल्स की राजकुमारी डायना को ब्रिटेन और दुनिया ने अंतिम विदाई दी.

1998 : मशहूर जापानी फिल्मत निर्देशक अकीरा कुरासोवा का निधन.

2008 : भारत और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते को परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह ने मंजूरी दी.

2018 : उच्चतम न्यायालय ने परस्पर सहमति से वयस्कों के बीच समलैंगिक यौन संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया और इससे जुड़े ब्रिटिश काल के कानून को समानता के अधिकार का उल्लंघन बताया.

2020: संविधान के मूल ढांचे का सिद्धांत दिलाने वाले केशवानंद भारती का निधन. भारती ने केरल भूमि सुधार कानून को चुनौती दी थी जिसपर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने संविधान के मूल ढांचे का सिद्धांत दिया .

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Recipe : टेस्ट से लेकर हेल्थ तक क्रिस्पी राइस डोसा, जो फिट होता है हर मील में, जानिए कैसे बनाएं

Lifestyle Desk : टेस्ट के साथ-साथ हेल्थ के लिए बेस्ट ऑप्शन राइस डोसा है. यह डोसा खासतौर पर चावल और उड़द दाल से बनाया जाता है. यह बाहर से क्रिस्पी और अंदर से सॉफ्ट होता है.

टेस्ट से लेकर हेल्थ तक क्रिस्पी राइस डोसा, जो फिट होता है हर मील में जानिए कैसे बनाएं

राइस डोसा रेसिपी

डोसा एक ऐसी डिश है जो नाश्ते से लेकर लंच या डिनर में भी उतने ही चाव से खाई जाती है. यह हल्की, कुरकुरी और पेट भरने वाली डिश न सिर्फ टेस्ट में कमाल होती है, बल्कि सेहत के लिए भी अच्छी मानी जाती है. खास बात यह है कि इसे बनाना बहुत आसान है और इसमें ज्यादा तेल-घी की जरूरत भी नहीं पड़ती. यह टेस्ट के साथ-साथ हेल्थ के लिए बेस्ट ऑप्शन राइस डोसा है.

यह डोसा खासतौर पर चावल और उड़द दाल से बनाया जाता है. बाहर से क्रिस्पी और अंदर से सॉफ्ट यह डोसा नारियल की चटनी और गरमा-गरम सांभर के साथ जब इसे परोसा जाता है, तो इसका टेस्ट दोगुना हो जाता है. तो आइए जानते हैं कि क्रिस्पी राइस डोसा घर पर कैसे बनाया जा सकता है. 

क्रिस्पी राइस डोसा बनाने की रेसिपी 

1. घर पर क्रिस्पी राइस डोसा बनाने के लिए चावल और उड़द दाल को साफ पानी में अच्छे से धो लें. 2-3 बार धोने से उनका गंद और एक्स्ट्रा स्टार्च निकल जाता है. 

2. अब दोनों को अलग-अलग बर्तन में कम से कम 5-6 घंटे के लिए भिगो दें. अगर आप चाहें तो थोड़ा-सा मेथी दाना भी उड़द दाल में भिगो सकते हैं, इससे डोसा और भी क्रिस्पी बनता है और फर्मेंटेशन अच्छा होता है. 

3. जब चावल और दाल अच्छे से फूल जाए, तब उन्हें मिक्सी या ग्राइंडर में अलग-अलग पीस लें. ध्यान रखें कि बैटर न तो बहुत गाढ़ा हो और न ही बहुत पतला हो. चिकना और बहने लायक होना चाहिए. 

4. अब दोनों घोल को एक बड़े बर्तन में मिलाएं और उसे ढककर गर्म जगह पर रातभर या कम से कम 8 घंटे के लिए रख दें. इस दौरान घोल हल्का फूल जाएगा और उसमें हल्की खटास आ जाएगी. 

5. इसके बाद फॉर्मेट हो चुके बैटर में अब स्वादानुसार नमक मिला लें. अब आपका डोसा बैटर तैयार है. 

6. अब डोसा सेंकने के लिए नॉन-स्टिक तवा या कास्ट आयरन तवा लें और उसे मीडियम आंच पर गरम करें. तवे को थोड़ा सा तेल लगाकर कपड़े से साफ कर लें ताकि डोसा चिपके नहीं. 

7. इसके बाद चम्मच बैटर लें और तवे के बीच में डालें, फिर उसे गोल-गोल फैलाते हुए पतला कर दें. कोशिश करें कि डोसा एकसार फैले ताकि वो हर जगह से क्रिस्पी हो. 

8. डोसे के किनारों पर थोड़ा सा तेल या घी डालें. इससे वो और कुरकुरा बनता है. डोसा जब नीचे से सुनहरा और ऊपर से पक जाए, तो उसे मोड़कर प्लेट में निकाल लें. अगर आप चाहें तो इसे पलटने की जरूरत नहीं है सिर्फ एक तरफ से सेंकना काफी होता है. और इसी तरह बाकी बैटर से सारे डोसे तैयार कर लें. 

9. राइस डोसे को आप नारियल की चटनी, टमाटर की चटनी और गर्म गर्म सांभर के साथ परोस सकते हैं. कुछ लोग आलू की मसाले वाली स्टफिंग डालकर इसे मसाला डोसा भी बना लेते हैं.

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05 September History : शिक्षक दिवस के अलावा और भी कई ऐतिहासिक घटनाएं अपने अंदर समेटे हुए है 5 सितंबर

Teachers Day 2022: भारत आज देश के दूसरे राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन की याद में ‘शिक्षक दिवस’ मना रहा है. शिक्षक दिवस के अलावा 5 सितंबर के दिन और भी कई ऐतिहासिक घटनाएं हो चुकी हैं.

Teachers Day: आज 5 सितंबर है. भारत में इस दिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है. इसके शिक्षक दिवस के रूप में मनाए जाने की वजह भी खास है. 5 सितंबर को देश के दूसरे राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म हुआ था और उन्हीं के सम्मान में इस दिन को ‘शिक्षक दिवस’ के रूप में मनाया जाता है.

5 सितंबर 1888 को तमिलनाडु में पैदा हुए डॉ राधाकृष्णन को भारतीय संस्कृति के संवाहक, प्रख्यात शिक्षाविद् और महान दार्शनिक के रूप में जाना जाता है. डॉ राधाकृष्णन को देश का सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ भी मिल चुका है. वहीं शिक्षक दिवस से अलग इस दिन के इतिहास की बात करें तो आपको और भी बहुत कुछ मिलेगा. देश-दुनिया के इतिहास में 5 सितंबर की तारीख में दर्ज अन्य महत्वपूर्ण घटनाएं कुछ इस प्रकार हैं.

1698 : 5 सितंबर को ही इंग्लैंड में एक प्रतिद्वंद्वी ईस्ट इंडिया कंपनी खोली गई.

1763 : मीर कासिम को राजमहल के निकट उदयनाला में ब्रिटिश फौजों के खिलाफ युद्ध में हार स्वीकार करनी पड़ी.

1914 : ब्रिटेन, फ्रांस, बेल्जियम और रूस के बीच लंदन समझौता.

1986 : आतंकवादियों द्वारा अपह्रत भारतीय विमान के यात्रियों को बचाने के लिए फ्लाइट अटेंडेंट नीरजा भनोट ने अपनी जान दी.

1991 : नेल्सन मंडेला अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए.

2009 : नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने 10 कंपनियों पर शेयर बाज़ार में कारोबार करने पर प्रतिबंध लगाया.

2011 : भारतीय बैंक संघ और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम द्वारा तैयार एटीएम के जरिए चेक निर्गम (क्लियर) करने की तकनीकी प्रणाली को अंतिम रूप दिया गया.

2014 : विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक अनुमान के मुताबिक, गिनी, लाइबेरिया, नाइजीरिया, सेनेगल और सिएरा लियोन में इबोला वायरस से संक्रमित 3500 लोगों में से 1900 लोगों की मौत.

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Lauki Chilla Recipe : सुबह के नाश्ते में ट्राई करें लौकी का चीला..स्वाद में डोसे को देगा टक्कर..जाने बनाने की विधि

Lauki Chilla Recipe: सुबह के नाश्ते में ट्राई करें लौकी का चीला, स्वाद में डोसे को देगा टक्कर

सुबह के नाश्ते में आप आसानी से लौकी का चीला बना सकते हैं। इसे बनाना काफी आसान है। इसे खाने से पूरे दिन शरीर में ऊर्जा बनी रहती है।

आज के समय लोग नाश्ते में कुछ हेल्दी खाना चाहते हैं, लेकिन समय की कमी के कारण कई लोग इसे स्किप कर देते हैं। दरअसल, सुबह का नाश्ता दिन की शुरुआत का सबसे अहम मील माना जाता है। अगर आप अपने दिन की शुरुआत हेल्दी नाश्ते से करते हैं, तो पूरे दिन आपकी बॉडी में एनर्जी बनी रहती है।

अक्सर लोग भागदौड़ और समय की कमी के कारण नाश्ता छोड़ देते हैं। ऐसे में हम आपके लिए एक ऐसा हेल्दी और क्विक नाश्ता लेकर आए हैं, जिसे आप कम समय में आसानी से बना सकते हैं। इस लेख में हम आपको लौकी का चीला बनाने का आसान तरीका बताएंगे, जिसे आप बिना किसी परेशानी के तैयार भी कर सकते हैं।

लौकी का चीला बनाने की सामग्री

500-700 ग्राम लौकी

250 ग्राम गाजर

250 ग्राम पालक

2 बड़ा प्याज

अदरक

हरी मिर्च

5 लहसुन की कलियां

आधा कप आटा

आधा कप बेसन

नमक

दो चम्मच घी

लौकी का चीला कैसे बनाएं?

लौकी का चीला बनाने के लिए सबसे पहले एक लौकी लेकर उसे कद्दूकस कर लें और हल्का सा नमक मिलाकर थोड़ी देर के लिए एक थाली में रख दें। इसके बाद अदरक और हरी मिर्च का पेस्ट तैयार कर लें। अब एक बड़े बाउल में कद्दूकस की हुई लौकी, बारीक कटी पालक, गाजर, प्याज, आटा और बेसन डालकर अच्छे से मिक्स करें। फिर इसमें नमक डालकर एक बैटर तैयार करें।

चीला बनाने के लिए तवा गरम करें और उस पर हल्का तेल या घी डालें। अब इस पर लौकी का बैटर फैलाएं और धीमी आंच पर पकने दें। कुछ समय बाद यह क्रिस्पी और सुनहरा हो जाएगा। फिर इसे पलटकर दूसरी ओर भी सेक लें। इस तरह स्वादिष्ट और हेल्दी लौकी का चीला तैयार हो जाएगा। आप इसे दही या अपनी पसंद की चटनी के साथ परोस सकते हैं।

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History 4 September : आज ही के दिन हुई थी GOOGLE की शुरुआत..मशहूर अभिनेता ऋषि कपूर का जन्म..जाने और प्रमुख घटनाएं

On This Day in History 4 September: आप जो बात-बात पर अपने फ़ोन में गूगल (search engine) पर सर्च करते हैं न क्या आप जानते हैं दुनिया में गूगल आया कैसे? तो चलिए बात करते हैं आज के एक ऐसे इतिहास की जिसने मॉडर्न साइंस की दशा और दिशा दोनों बदल के रख दी. आज ही के दिन साल 1998 में सर्च इंजन 'GOOGLE' की शुरुआत की गई थी. मजे की बात ये हैं इसका नाम 'GOOGLE' भी एक गलती की वजह से पड़ा. दरअसल इसे पहले 

BackRub के नाम से जाना जाता था लेकिन बाद में इसका नाम बदलकर GOOGOL रखा जाना था लेकिन एक स्पेलिंग की गलती की वजह से 'GOOGLE' को यह नाम मिला. 'GOOGLE के संस्थापक स्टैनफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के दो पीएचडी के स्कॉलर सर्गेई ब्रिन और लैरी पेज (Sergey Brin and Larry Page) थें. बता दें कंपनी की शुरुआत से 7 सालों तक 4 सितंबर को ही गूगल के फाउंडेशन डे (Google's Foundation Day) के रूप में मनाया गया लेकिन बाद में गूगल ने अपना फाउंडेशन डे 27 सितंबर को घोषित कर दिया. 

आज ही के दिन टाइटेनिक के मलबे की तस्वीर आई थी सामने 

आज का दिन विश्व इतिहास की एक और बड़ी और दुखद घटना की गवाह है. आज ही के दिन साल 1985 में पूरे 73 सालों के बाद टाइटेनिक की डूबने के बाद की पहली तस्वीर सामने आयी है. टाइटेनिक (Titanic) दुनिया का सबसे बड़ा वाष्प आधारित यात्री जहाज था. जिसने 10 अप्रैल 1912 को 

इंग्लैंड के साउथहैंप्टन से अपनी यात्रा शुरू की लेकिन मंजिल तक कभी नहीं पंहुचा. 14 अप्रैल 1912 में एक हिमशिला के टकराने से ये जहाज डूब गया था. इस दुर्घटना में करीब 1500 लोग मारे गए थे. 

कोयना बांध आया था भूकंप की चपेट में 

आज का दिन भारतीय इतिहास में भी एक दुखद घटना के लिए याद किया जाता है आज ही के दिन साल 1967 को महाराष्ट्र का कोयना बांध (Koyna Dam) भूकंप की चपेट में आकर ध्वस्त हो गया था जिसमे 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी. 

देश-दुनिया में 4 सितंबर का इतिहास

2005: लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शन करते नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला गिरफ्तार हो गए.

2006: आस्ट्रेलिया के मशहूर टीवी पर्सनैलिटी और पर्यावरणविद स्टीव इरविन का एक समुद्री मछली के काटने से निधन हो गया. 

1825: भारत के जाने-माने राजनीतिज्ञ दादा भाई नौरोजी का जन्म हुआ.

1952: भारत के मशहूर अभिनेता ऋषि कपूर का जन्म हुआ.

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Tea Recipe : दूध पहले डालें या पानी उबलने के बाद? सही तरीका जान लीजिए..चाय का स्वाद और खुशबू पड़ोसियों तक जाएगी

How to make perfect milk tea: दूध वाली चाय का असली स्वाद तभी आता है जब इसे सही तरीके से बनाया जाए. एक्सपर्ट्स के मुताबिक दूध हमेशा पानी में मसाले अच्छे से उबलने के बाद ही डालना चाहिए. इससे चाय का कलर, खुशबू और फ्लेवर लाजवाब हो जाता है. सही तरीके से बनी चाय न सिर्फ एनर्जी देती है बल्कि सर्दी-जुकाम जैसी परेशानी में भी राहत पहुंचाती है.

Perfect chai banane ka tarika: आजकल चाय सिर्फ एक ड्रिंक नहीं बल्कि लोगों की रोजमर्रा की लाइफ का सबसे इम्पॉर्टेन्ट हिस्सा बन चुकी है. खासकर दूध वाली चाय तो ऐसे लोगों के लिए सुबह की एनर्जी का डोज है जिनका दिन बिना चाय शुरू ही नहीं होता. सुबह उठते ही अगर चाय का कप हाथ में न हो तो कई लोगों का मूड खराब हो जाता है, सिर दर्द शुरू हो जाता है और दिनभर चिड़चिड़ापन बना रहता है. यही वजह है कि चाय बनाने का तरीका हर किसी के लिए बेहद मायने रखता है. लेकिन बड़ा सवाल यही है कि दूध पहले डालना चाहिए या पानी उबालने के बाद? बहुत से लोग कंफ्यूज रहते हैं और ज्यादातर लोग सही तरीका नहीं जानते. दरअसल चाय का टेस्ट और खुशबू दोनों ही इस बात पर डिपेंड करते हैं कि आप उसे किस तरीके से बनाते हैं. अगर तरीका सही हो तो आपकी चाय का फ्लेवर इतना शानदार होगा कि पड़ोसियों तक उसकी खुशबू पहुंच जाएगी और सब पूछेंगे कि चाय कहां से बनवाई.

दूध वाली चाय बनाने का तरीका

दूध वाली चाय का सही बेस

चाय बनाने के लिए सबसे जरूरी है सही बेस तैयार करना. इसके लिए सबसे पहले एक पैन में थोड़ा सा पानी डालकर उबाल लें. पानी में हल्की-सी मसाले वाली चीजें डाल सकते हैं जैसे काली मिर्च का पाउडर, हरी इलायची, दालचीनी, तेजपत्ता और चीनी. इन सबको अच्छे से पानी में उबालने से फ्लेवर गहराई तक निकल आता है और चाय का टेस्ट डबल हो जाता है.

दूध कब डालें?

अब आती है सबसे इम्पॉर्टेन्ट बात दूध कब डालें? एक्सपर्ट्स कहते हैं कि दूध को पानी उबलने के बाद ही डालना चाहिए. अगर आप सीधे दूध डालकर चाय उबालेंगे तो मसालों का असली स्वाद उसमें ठीक से नहीं आएगा. जब पानी में सारे फ्लेवर अच्छे से घुल जाएं, तब उसमें दूध मिलाएं और थोड़ी देर धीमी आंच पर उबालें. इससे चाय का कलर परफेक्ट आएगा, स्वाद लाजवाब होगा और खुशबू भी बेहद स्ट्रॉन्ग होगी.

चाय को ढककर रखना क्यों जरूरी?

जब चाय बन जाए तो तुरंत गैस बंद करके उसे छानने से पहले एक-दो मिनट किसी ढक्कन से ढककर रख दें. ऐसा करने से चाय का फ्लेवर और भी रिच हो जाता है और ऊपर उठने वाली भाप पूरे कप में अच्छी तरह से समा जाती है. यह छोटा-सा स्टेप आपकी चाय को और भी स्पेशल बना देगा.

चाय के फायदे

दूध वाली चाय सिर्फ स्वाद के लिए ही नहीं बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद है. इसमें मौजूद कैफीन आपको दिनभर की एनर्जी देता है और थकान दूर करता है. ठंडी हवा या सर्दी-जुकाम के समय दूध की कड़क चाय गले की खराश को भी आराम पहुंचाती है. अदरक, इलायची और दालचीनी वाली चाय तो इम्युनिटी बढ़ाने के लिए भी बेस्ट मानी जाती है.

लोग क्यों पसंद करते हैं दूध वाली चाय

दूध वाली चाय का असली मजा इसी में है कि यह लोगों को जोड़ती है. आपने भी देखा होगा कि लोग अक्सर चलो चाय पर मिलते हैं कहकर बातें शेयर करते हैं. दोस्तों के साथ गपशप से लेकर ऑफिस ब्रेक तक, हर जगह चाय ही कनेक्शन का सबसे बड़ा जरिया है. यही वजह है कि दूध वाली चाय को सिर्फ ड्रिंक नहीं बल्कि एक इमोशन कहा जाता है.

परफेक्ट चाय बनाने के टिप्स

हमेशा ताजा दूध और साफ पानी का इस्तेमाल करें.

मसाले जैसे इलायची, दालचीनी और अदरक को हल्का क्रश करके डालें ताकि उनका स्वाद और खुशबू ज्यादा आए.

चीनी अपनी पसंद और जरूरत के हिसाब से डालें, हेल्दी ऑप्शन के लिए शुगर की जगह गुड़ भी ट्राई कर सकते हैं.

ज्यादा देर तक चाय को उबालें नहीं, वरना इसका स्वाद कड़वा हो सकता है.

तो अब आपको समझ आ गया होगा कि चाय का स्वाद असल में इस बात पर डिपेंड करता है कि आप दूध कब डालते हैं. सही तरीका यही है कि पहले पानी में मसाले डालकर अच्छे से उबालें और उसके बाद दूध मिलाएं. थोड़ी देर ढककर रखने से चाय का स्वाद और भी बढ़ जाएगा.

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History 3 September : आज ही के दिन गुम हो गया था CM वाईएसआर रेड्डी का हेलीकाप्टर..एक साथ आई भारत-पाकिस्तान बाढ़ में दो सौ से ज्यादा लोगों की मौत..जाने और प्रमुख घटनाएं

On This Day in History 3 September: आज का इतिहास भारतीय और विश्व राजनीति में दो अहम (aaj ka itihas) घटनाओं की गवाह है. आज यानी 3 सितंबर 2009 को आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री येदुगुड़ी संदिंती राजशेखर रेड्डी यानी वाईएसआर रेड्डी (YSR Reddy's dead body found in the forest) का शव जंगल से बरामद हुआ था. वो दो सितम्बर का दिन था जब मुख्यमंत्री का हेलीकाप्टर नल्लामल्ला के जंगलों में गुम हो गया. 24 घंटों की पड़ताल, 5000 सैनिको के जवान और इसरो के सैटेलाइट ने इस हेलीकाप्टर को खोजने के दिन दिन- रात एक कर दिया था. बाद में वायुसेना के MI -8 ने दुर्घटनाग्रस्त हेलीकाप्टर के मलबे का पता लगाया. 

 

आज का इतिहास विश्व राजनीति में भी एक अहम घटना को समेटे हुए है. आज यानी 3 सितम्बर 2006 को भारतीय मूल के भरत जगदेव (Bharat Jagdev) ने गुयाना के राष्ट्रपति (President of Guyana) पद शपथ ली थी. बता दें भारत जगदेव 1997 से 1999 और 2020 से वर्तमान समय के उपराष्ट्रपति पद पर बने हुए हैं. जगदेव महज 13 साल की उम्र में ही गुयाना की पीपुल्स प्रोग्रेसिव पार्टी की यूथ विंग से जुड़ गए थे और 16 की उम्र तक उसके नेता बन गए थें. 

 

3 सितंबर का दिन द्वितीय विश्वयुद्ध (second World War) के दौरान एक अहम घटना का गवाह है. आज ही दिन साल 1943 में मित्र राष्ट्रों ने इटली पर हमला (the allies invaded italy) किया था.  

 

देश-दुनिया में 3 सितंबर का इतिहास 

 

1767 : कर्नल स्मिथ की सेना ने चंगमा की लड़ाई में निजाम और हैदर अली की संयुक्त सेना को हराया.  

 

1833 : अमेरिका में बेंजामिन एचडे ने पहला अखबार ‘न्यूयार्क सन’ शुरू किया.  

 

1971 : कतर स्वतंत्र राष्ट्र बना.  

 

1984 : दक्षिण फिलीपीन में भयानक तूफान में तकरीबन 1300 लोगों की मौत, सैकड़ों घायल.  

 

1998 : नेल्सन मंडेला ने गुट निरपेक्ष आंदोलन शिखर सम्मेलन में कश्मीर का मुद्दा उठाया, प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कड़ी आपत्ति जताई.   

 

2003 : पाकिस्तान सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो पर देशद्रोह का मुकदमा चलाने का फैसला किया.  

 

2007 : बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री ख़ालिदा जिया और उनके पुत्र अराफ़ात रहमान भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ़्तार.  

 

2007 : चीन के झिंगजियांग प्रान्त में चीनी और जर्मन विशेषज्ञों ने लगभग 16 करोड़ साल पुराने एक जीव के 17 दांत खोजने का दावा किया.  

 

2008 : राजेन्द्र कुमार पचौरी संयुक्त राष्ट्र की संस्था जलवायु परिवर्तन के अन्तर सरकारी पैनल (आईपीसीसी) के दोबारा प्रमुख चुने गए.  

 

2014: भारत और पाकिस्तान में एक साथ आई बाढ़ में दो सौ से ज्यादा लोगों की मौत.  

 

2020: भारत और रूस ने अत्याधुनिक एके-203 रायफल भारत में बनाने के लिये एक बड़े समझौते को अंतिम रूप दिया.

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Recipe : घंटों में नहीं मिनटों में बनकर तैयार होगा मूंग दाल हलवा..मिलेगा हलवाई जैसा स्वाद..नोट कर लें रेसिपी

लाइफस्टाइल डेस्क ; अगर आप मूंग दाल का हलवा बनाने के लिए यह ट्रिक आज़माएंगे तो इसे बनाने में घंटों नहीं लगेंगे। तो चलिए जानते हैं कैसे झटपट बनाएं मूंग दाल का हलवा

 

मूंग दाल का हलवा नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है। यह एक ऐसी भारतीय मिठाई है जिसे अक्सर खास मौकों पर बनाया जाता है। लेकिन इसे बनाने का तरीका इतना लंबा और थका देने वाला होता है कि लोग इसे बनाने से कतराते हैं। घंटों तक दाल भिगोना, फिर उसे पीसना और फिर उसे धीमी आंच पर लगातार भूनते रहना। यह सब सोचकर ही हिम्मत जवाब दे जाती है। लेकिन अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। हम आपके लिए लेकर आए हैं एक ऐसी जादुई रेसिपी जिससे आप मिनटों में बिल्कुल वैसा ही दानेदार और स्वादिष्ट मूंग दाल हलवा बना सकते हैं। चलिए, जानते हैं इस खास रेसिपी के बारे में

 

मूंग दाल हलवा के लिए सामग्री:

मूंग दाल 1 कप, देसी घी आधा कप, चीनी आधा कप, दूध: आधा कप, इलायची पाउडर आधा चम्मच, बारीक कटे हुए मेवे (बादाम, पिस्ता), केसर के धागे 4-5

 

मूंग दाल हलवा बनाने की विधि:

पहला स्टेप: मूंग दाल को अच्छी तरह धोकर किसी कपड़े पर फैलाकर सुखा लें ताकि उसका सारा पानी निकल जाए। अब एक नॉन-स्टिक पैन में दाल को धीमी आंच पर हल्का सुनहरा होने तक भूनें। भुनी हुई दाल को ठंडा करके मिक्सी में दरदरा पीस लें। इसे बिल्कुल पाउडर जैसा न बनाएं, थोड़ा दानेदार रखें।

 

दूसरा स्टेप: एक कड़ाही में घी गरम करें। अब इसमें पीसी हुई मूंग दाल डालकर धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए भूनें। इसे तब तक भूनें जब तक इसमें से अच्छी खुशबू न आने लगे और इसका रंग सुनहरा न हो जाए। इसमें 5-7 मिनट लग सकते हैं।

 

तीसरा स्टेप: एक दूसरे बर्तन में दूध को हल्का गरम कर लें। भुनी हुई दाल में गरम दूध और चीनी डालकर अच्छी तरह मिलाएं। ध्यान रखें कि गांठें न पड़ें। अब इसे लगातार चलाते हुए तब तक पकाएं जब तक यह गाढ़ा न हो जाए और कड़ाही के किनारे छोड़ने लगे। इलायची पाउडर और केसर के धागे डालकर अच्छी तरह मिला लें। कटे हुए मेवे डालकर गार्निश करें।

 

आपका गर्मा-गर्म और स्वादिष्ट मूंग दाल हलवा परोसने के लिए तैयार है। यह विधि पारंपरिक तरीके की तुलना में बहुत कम समय लेती है और स्वाद में कोई समझौता नहीं होता।

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History of 02 September : आज ही के दिन शुरू हुआ था कभी न बंद होने वाला बैंक..हैदराबाद में पुल गिरने से 125 लोगों की हुई थी मौत.

On This Day in History 2 September: 2 सितंबर (2 september ka itihas) वो तारीख जिसने भारतीय और विश्व इतिहास में कई अहम बदलाव अपने पन्नो में दर्ज किए हैं. ये वहीं दिन था जब साल 1945 में 6 साल से चले आ रहे नरसंहार का खात्मा हुआ था. 14 अगस्त 1945 में जापान के आत्मसमर्पण के बाद 2 सितंबर 1945 को विनाशकारी द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति (end of world war ii) हुई थी. कहा जाता है कि इस नरसंहार में करीब 7 से 8 करोड़ लोग मारे गए थे करोड़ों लोग बेघर हुए और न ही कितनों ने अपना सब कुछ खो दिया. इस भीषण युद्ध ने आर्थिक व्यवस्था की जड़ें हिला कर रख दी. 

 

इतिहास में अब थोड़ा आगे बढ़ते है. और पहुंचते है साल 1969 में. 2 सितंबर वह तारीख है जिसने दुनिया के बैंकिंग क्षेत्र क्रांति ला दी. आज ही के दिन 1969 को एटीएम पहली बार दुनिया के सामने पेश किया गया था. Automated Teller Machine (ATM) को पहली बार संयुक्त राष्ट्र अमेरिका की वित्तीय राजधानी न्यूयॉर्क (Who invented ATM) में आम जनता के लिए पेश किया गया था. एटीएम मशीन की स्थापना सबसे पहले केमिकल बैंक (Chemical Bank) ने न्यूयॉर्क में की थी. बैंक ने इस मशीन को लॉन्च करने से पहले इसका विज्ञापन दिया था, 'हमारा बैंक 2 सितंबर को सुबह 9:00 बजे से खुलेगा और कभी बंद नहीं होगा'.

 

आज का इतिहास भारतीय परिदृश्यों में भी अहम भूमिका रखता है. आज ही के दिन यानी 2 सितम्बर साल 1999 में 'जल पारी' के नाम से विख्यात बुला चौधरी (bula chaudhary) ने इंग्लिश चैनल (english channel) को दूसरी बार तैर कर पार किया था. बता दें बुला चौधरी को इस अद्भुत कारनामे के लिए अर्जुन पुरूस्कार से सम्मानित किया था. इसी के साथ साल 2003 में उन्हें ‘ध्यानचंद लाइफटाइम एचीवमेंट’ से भी नवाजा गया. बता दें बुला ने पांचों महाद्वीपों के सातों सागर को तैरकर पार किया था. 

 

देश दुनिया में 2 सितंबर का इतिहास 

1573 : अकबर ने अहमदाबाद के निकट एक निर्णायक युद्ध में विजय हासिल की और गुजरात पर कब्जा कर लिया। इस जीत की खुशी में बुलंद दरवाजा बनवाया गया. 

 

 

1775 : पहले अमेरिकी युद्ध पोत ‘हाना’ का जनरल जॉर्ज वाशिंगटन ने जलावतरण किया.

 

1789 : अमेरिका में राजस्व विभाग बनाया गया। एलेक्सजेंडर हेमिल्टन पहले मंत्री बने.

 

1806 : भूस्खलन के कारण स्विटजरलैंड का एक पूरा शहर बर्बाद, 457 लोगों की मौत.

 

1926 : इटली और यमन में एक समझौता, जिससे लाल सागर तट पर इटली का वर्चस्व.

 

1930 : यूरोप से अमेरिका के लिए पहली सीधी उड़ान भरी गई.

 

1946 : जवाहर लाल नेहरू के उप सभापतित्व में अंतरिम भारत सरकार का गठन.

 

1956 : हैदराबाद से सौ किलोमीटर दूर जडचेराला और महबूब नगर के बीच एक पुल गिरने से 125 लोगों की मौत.

 

1962 : सोवियत संघ क्यूबा को हथियार देने को राजी हुआ.

 

1990 : काला सागर में सोवियत यात्री जहाज के डूबने से 79 यात्रियों की मौत.

 

1992 : अमेरिका और रूस अंतरिक्ष स्टेशन के निर्माण के लिए संयुक्त उपक्रम बनाने पर सहमत हुए.

 

1996 : मुस्लिम विद्रोहियों और फिलिपीन सरकार ने 26 वर्ष के गृह युद्ध के बाद एक समझौते पर हस्ताक्षर किए.

 

1998 : पायलटरहित प्रशिक्षण विमान निशांत ने सफलतापूर्वक उड़ान भरी.

 

2001 : 1967 में विश्व में पहला हृदय प्रत्यारोपण करने वाले दक्षिण अफ़्रीका के अग्रणी हृदय विशेषज्ञ क्रिश्चियन बर्नार्ड का निधन.

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Recipe : उज्जैन का फेमस पोहा बनाने की रेसिपी..मुंह में जाते ही घुल जाएगा इतना बनता है मुलायम..जाने पूरी जानकारी

लाइफस्टाइल डेस्क ; नाश्ते में पोहा खाना लोगों को खूब पसंद होता है। पोहा मध्यप्रदेश की फेमस डिश है। महाकाल की नगरी उज्जैन में तो पोहा जलेबी का नाश्ता पूरे दिन आपको खाने को मिल जाएगा। उज्जैन के पोहा का स्वाद ही अलग होता है। ये बहुत ही सॉफ्ट होता है और तेल नाम मात्र के लिए भी नहीं होता। पोहा का हल्का खट्टा मीठा स्वाद इसे और भी मजेदार बना देता है। अगर आप घर पर उज्जैन जैसा पोहा बनाना चाहते हैं तो इस रेसिपी से एक बार पोहा जरूर बनाकर खाएं। आपको वही स्वाद मिलेगा जो उज्जैन के पोहा में आता है।

 

उज्जैन के पोहा की रेसिपी

 

पहला स्टेप- आपको इसके लिए पतला वाला पोहा लेना है। सबसे पहले पोहा को पानी में भिगो दें। पोहा जितना अच्छी तरह पानी में फूलेगा उतना ही मिलायम भी बनेगा। अब पोहा का थोड़ा पानी निकाल दें और उसे साइड में रख दें।

 

दूसरा स्टेप- पोहा के लिए 1 प्याज काट लें। 2 थोड़ी मोटी वाली हरी मिर्च को मोटा काट लें। करी पत्ता, धनिया पत्ता ले लें। राई, सौंफ और खड़ा धनिया लें। अब एक कड़ाही या पैन में 1 चम्मच तेल डालें। 

 

तीसरा स्टेप- तेल में सरसों, सौंफ और खड़ा धनिया डालें। ऊपर से करी पत्ता, हरी मिर्च, नमक और थोड़ी हल्दी डाल दें। अब इन्हें थोड़ा फ्राई करें। पोहा फूल गया होगा तो उसमें आधा चम्मच नमक और आधा चम्मच चीनी डाल दें।

 

चौथा स्टेप- अब फूले हुए पोहा को इस मसाले में मिला दें और सारी चीजों को अच्छी तरह से मिक्स कर लें। पोहा को थोड़ी देर के लिए किसी प्लेट से कवर कर दें। ऊपर से बारीक कटा हरा धनिया, नींबू का रस, भुनी मूंगफली और सेव डालकर सर्व करें।

 

पांचवा स्टेप- स्ट्रीट वाले लोग पोहा को मसाले में मिलाने के बाद एक गर्म पानी के भगोने के ऊपर किसी प्लेट पर रखते हैं। इससे पोहा भाप से गर्म रहता है और उसमें नमी भी बनी रहती है। इस पोहा को ऊपर से कच्चा प्याज, धनिया और सेव डालकर दिया जाता है।

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History of 01 September : ‘जिंदगी के साथ भी, जिंदगी के बाद भी’, आज ही के दिन हुई थी भारतीय जीवन बीमा निगम की स्थापना

नई दिल्ली। ‘जिंदगी के साथ भी, जिंदगी के बाद भी’ की असरदार टैगलाइन के साथ देश के लाखों लोगों को बीमा की सेवाएं देने वाले भारतीय जीवन बीमा निगम की स्थापना आजादी के नौ साल बाद एक सितंबर के दिन ही की गई थी। यह दिन एक और कारण से भी इतिहास में दर्ज है।

 

आज भले शब्दकोश के नाम पर ढेरों ऑनलाइन सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन एक समय पढ़ने लिखने वाले लोगों के लिए शब्दकोश या डिक्शनरी के नाम पर मोटी-मोटी किताबे हुआ करती थीं और शब्दकोश को तैयार करना बहुत मुश्किल काम माना जाता था। भारत में शब्दकोश का जिक्र आते ही फादर कामिल बुल्के का नाम जहन में आता है। बुल्के का जन्म भी एक सितंबर को ही हुआ था। 

 

देश दुनिया के इतिहास में एक सितंबर की तारीख पर दर्ज कुछ अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं का सिलसिलेवार ब्योरा इस प्रकार है:-

 

1858 : ईस्ट इंडिया कंपनी के निदेशकों की अंतिम बैठक लंदन के ईस्ट इंडिया हाउस में आयोजित की गई। 

 

1878 : एम्मा एम नट्ट अमेरिका में पहली महिला टेलीफोन ऑपरेटर बनी। 

 

1909 : प्रसिद्ध साहित्यकार और शब्दकोश तैयार करने वाले फ़ादर कामिल बुल्के का जन्म। 

 

1923 : ग्रेट कैंटो भूकंप ने जापान के तोक्यो और योकोहामा शहरों में भारी तबाही मचायी। 

 

1942 : रास बिहारी बोस ने इंडियन नेशनल आर्मी की स्थापना की। 

 

1947 : भारतीय मानक समय की शुरूआत की गई।

 

1956 : भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की स्थापना। 

 

1964 : इंडियन ऑयल रिफ़ाइनरी और इंडियन ऑयल कम्पनी को विलय करके इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन बनाई गयी। 

 

1965 : पाकिस्तानी फौज ने कश्मीर में संघर्षविराम रेखा को पार किया। 

 

2000 : चीन ने तिब्बत होते हुए नेपाल जाने वाले अपने एकमात्र रास्ते को बंद किया। 

 

2018 : जकार्ता एशियाई खेलों में मुक्केबाज अमित पंघाल ने 49 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। वह एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले ओवरऑल आठवें भारतीय मुक्केबाज बने।

 

2018 : प्रणब बर्धन और शिबनाथ सरकार ने जकार्ता एशियाई खेलों की पुरुषों की ब्रिज प्रतियोगिता की युगल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। 

 

2020 : भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का दिल्ली में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। कई दिन तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद 31 अगस्त की शाम उनका निधन हो गया था।

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Recipe : कैसे बनाएं दही वाले मसालेदार आलू.! पसंद है तीखा खाना तो कम तेल वाली इस रेसिपी को जरूर करें ट्राई

लाइफस्टाइल डेस्क : क्या आपको भी तीखा-मसालेदार खाना पसंद है? अगर हां, तो आपको एक बार इस रेसिपी को फॉलो कर दही वाले आलू को जरूर बनाकर देखना चाहिए।

क्या आपने कभी दही वाले आलू बनाए हैं? अगर नहीं, तो यकीन मानिए आपको इस डिश का टेस्ट काफी ज्यादा पसंद आने वाला है। दही वाले आलू बनाने के लिए आपको 4 मीडियम साइज्ड बॉइल्ड और कटे हुए आलू, एक कप दही या फिर मट्ठा, 2 बारीक कटी हुई हरी मिर्च, एक छोटी स्पून कद्दूकस की हुई अदरक, हाफ स्पून हल्दी पाउडर, हाफ स्पून लाल मिर्च पाउडर, एक स्पून धनिया पाउडर, नमक, बारीक कटा हुआ हरा धनिया और एक छोटा स्पून तेल चाहिए होगा।

पहला स्टेप- सबसे पहले एक पैन में एक छोटी स्पून तेल डालकर गर्म कर लीजिए। अब आपको इसी पैन में हरी मिर्च और अदरक को थोड़ा सा भून लेना है।

दूसरा स्टेप- इसके बाद पैन में बॉइल्ड आलू एड कर इन्हें भी हल्का सा भून लीजिए। अब आप इस मिक्सचर में दही को भी मिला सकते हैं।

तीसरा स्टेप- अब पैन में हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर और नमक को एड कर अच्छी तरह से मिला लीजिए।

चौथा स्टेप- आपको पैन को लगभग 5 मिनट के लिए ढक देना है और फिर सब्जी को धीमी आंच पर पकने देना है।

पांचवां स्टेप- आखिर में आप इस सब्जी के टेस्ट को बढ़ाने के लिए बारीक कटे हुए हरे धनिए का इस्तेमाल कर सकते हैं।

फिलहाल, आप गर्मागर्म दही वाले आलू को रोटी-पराठे के साथ सर्व कर सकते हैं। अगर आप इस रेसिपी को फॉलो कर दही वाले आलू बनाते हैं, तो बच्चों से लेकर बड़ों तक, सभी को इस सब्जी का स्वाद काफी ज्यादा अच्छा लगेगा। अगली बार आपका जब भी आलू की सब्जी खाने का मन हो, तो आप दही वाले आलू की इस रेसिपी को ट्राई करके देख सकते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एक-दो स्पून तेल में बनने वाली ये सब्जी आपकी सेहत के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकती है।

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31 Agust Ka Etihas : आज के दिन जवागल श्रीनाथ -पूर्व भारतीय़ क्रिकेटर का जन्म..भारत के 13वें राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का निधन..जाने और प्रमुख घटनाएं

इतिहास के पन्नों में 31 अगस्त : क्रिकेट में पहली बार दिग्गज खिलाड़ी सर गैरी सोबर्स ने जड़े एक ओवर में 6 छक्के

क्रिकेट इतिहास में कुछ ही ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने एक ओवर में छह छक्के लगाए हैं। उन्हीं खिलाड़ियों में एक हैं वेस्टइंडीज के पूर्व दिग्गज खिलाड़ी सर गैरी सोबर्स, जिन्होंने क्रिकेट के इतिहास में पहली बार एक ओवर में छह छक्के जड़े थे। उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में यह कारनामा किया था। दिग्गज खिलाड़ी ने आज ही के दिन यानी 31 अगस्त 1968 को इंग्लिश काउंटी चैंपियनशिप में नॉटिंघमशायर की ओर से खेलते हुए ग्लेमोर्गन के खिलाफ मैच में एक ओवर में 6 छक्के लगाए थे। उस दिन सोबर्स ने यह छक्के ग्लैमरगन के गेंदबाज मैल्कम नैश के ओवर में जड़े थे। उनके इस रिकॉर्ड को कभी भुलाया नहीं जा सकता। वहीं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका के हर्शल गिब्स ने नीदरलैंड्स के खिलाफ 2007 वनडे वर्ल्ड कप में एक ओवर में छह छक्के मारे थे। इन खिलाड़ियों के अलावा इस लिस्ट में युवराज सिंह, कीरोन पोलार्ड समेत अन्य कई बल्लेबाजों ने नाम शामिल हैं।

अन्य अहम घटनाएंः

1881 - अमेरिका में पहली बार टेनिस चैंपियनशिप खेला गया।1920 - अमेरिकी शहर डेट्रॉइट में रेडियो पर पहली बार समाचार प्रसारित किया गया।1956 - भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने राज्य पुनर्गठन विधेयक को मंजूरी दी।1962 - कैरेबियाई देश टोबैगो एवं त्रिनिदाद ब्रिटेन से स्वतंत्र हुए।1991 - उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान ने सोवियत संघ से अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की।1997 - ब्रिटेन की राजकुमारी और राजकुमार चार्ल्स की पूर्व पत्नी डायना की पेरिस में कार दुर्घटना में मृत्यु।2005 - ईराक की राजधानी बगदाद में धार्मिक अवसर पर फिदायीन हमले के भय से मची भगदड़ में 816 लोग मारे गये।2008- सरकार ने अमरनाथ भूमि विवाद सुलझाया।2009- जनता दल (यूनाइटेड) की राष्ट्रीय परिषद के नई दिल्ली में आयोजिय सम्मेलन में शरद यादव को पुनः सार्वसम्मति से पार्टी का अध्यक्ष चुन लिया गया।2016 - ब्राजील की राष्ट्रपति दिल्मा रुसेफ को पद से हटा दिया गया।

जन्म

1919 - अमृता प्रीतम, प्रसिद्ध कवयित्री, उपन्यासकार और निबंधकार।1962 - पल्लम राजू, एक प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ।1963 - ऋतुपर्णो घोष - प्रसिद्ध बंगाली फिल्मनिर्माता, लेखक और अभिनेता।1940 - शिवाजी सावंत - मराठी भाषा के प्रसिद्ध साहित्यकार।1984 - भारतीय फिल्म अभिनेता राजकुमार राव1969 - जवागल श्रीनाथ -पूर्व भारतीय़ क्रिकेटर।

निधन

1995 - बेअंत सिंह - पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री।2002 - फरहाद मेहराद लोकप्रिय ईरानी गायक, गीतकार।2016 - कश्मीरी लाल ज़ाकिर- पद्मश्री से सम्मानित प्रख्यात उर्दू कवि, उपन्यासकार।2020 - प्रणब मुखर्जी - भारत के 13वें राष्ट्रपति, जो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेता रहे थे।

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Recipe : भूल जाएंगे पनीर की सब्जी का स्वाद, जब चखेंगे ये पहाड़ी चौंसा दाल.! जानें स्वाद और सेहत से भरपूर ये रेसिपी कैसे बनाएं?

Lifestyle Desk : गढ़वाल में लोग चौंसा दाल बेहद चाव से खाते हैं। इसका स्वाद भी बेहद लाजवाब लगता है। चलिए, जानते हैं इस दाल की रेसिपी कैसे बनाएं?

रोज-रोज एक जैसा दाल खाकर अक्सर बोरियत होने लगती हैं। ऐसे में आज हम आपके लिए पहाड़ी दाल की रेसिपी लेकर आए हैं। उत्तराखंड में लोग चौंसा दाल खूब चवा से बनाते हैं। यह दाल स्वाद के साथ टेस्टी भी बहुत लगती है। चलिए जानते हैं कैसे बनाएं ये पहाड़ी चौसा दाल?

पहाड़ी चौसा दाल बनाने की आवश्यक सामग्री

चौंसा दाल - 1 कप, प्याज - 1, लहसुन 6-7 कली, अदरक 1 इंच, टमाटर 1, घी - 2-3 बड़े चम्मच, जीरा - 1 चम्मच, हल्दी पाउडर - आधा चम्मच, धनिया पाउडर - 1 चम्मच, लाल मिर्च पाउडर - आधा चम्मच, गरम मसाला - आधा चम्मच, नमक - स्वादानुसार, पानी - 2-3 कप, हरी धनिया कटी हुई 

पहाड़ी चौसा दाल बनाने की विधि:

 पहला स्टेप: सबसे पहले रात भर 1 कप भीगी हुई चौंसा दाल को अच्छी तरह धोकर साफ कर लें। अगले दिन एक प्रेशर कुकर में भीगी हुई दाल, थोड़ा नमक और 2 कप पानी डालकर 4-5 सीटी आने तक या दाल के नरम होने तक पकाएं। दाल को बहुत ज़्यादा गलाने की ज़रूरत नहीं है, इसे थोड़ा खड़ा रखना ही सही होता है।

दूसरा स्टेप: अब, एक पैन में घी गरम करें। जब घी गरम हो जाए तो उसमें जीरा डालें। जीरा चटकने के बाद बारीक कटा हुआ लहसुन और अदरक डालकर हल्का सुनहरा होने तक भूनें।अब कटा हुआ प्याज डालकर सुनहरा होने तक भूनें। इसके बाद कटा हुआ टमाटर डालकर नरम होने तक पकाएं। हल्दी, धनिया और लाल मिर्च पाउडर डालकर अच्छे से मिलाएं और कुछ देर तक भूनें।

तीसरा स्टेप: अब इस मसाले में उबली हुई दाल और उसका पानी भी मिला दें। अगर दाल बहुत गाढ़ी लग रही हो तो थोड़ा गरम पानी मिला सकते हैं। दाल को धीमी आंच पर पकाएं ताकि मसाले दाल में अच्छे से मिल जाएं। आखिर में गरम मसाला और कटी हुई हरी धनिया डालकर मिलाएं। गरमा गरम चौसा दाल को चावल के साथ परोसें।

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Aaj Ka Itihas 30 August : आज ही के दिन मनाया जाता है लघु उद्योग दिवस..गीतकार शैलेन्द्र का जन्म..जाने और प्रमुख घटनाएं

Aaj Ka Itihas 30 August 2025 : आज का इतिहास में आज हम जानेंगे 30 अगस्त से जुडी घटनाओं के बारे में। बता दें कि इतिहास के पन्नों में 30 अगस्त के दिन भारत और विश्व में घटी ऐसी बहुत सी महत्वपूर्ण घटनायों का जिक्र है जिनके बारे में जानना बेहद दिलचस्प है। कई बार आपने भी इतिहास के विषय में बहुत सी ऐसी ऐतिहासिक घटनाओं के बारे में पढ़ा और सुना होगा जिसका संबंध 30 अगस्त के इतिहास से संबधित रहा होगा।

तो आइए कुछ इतिहास के पन्नों को पलट कर जानने की कोशिश करते हैं कि आज के दिन 30 अगस्त को देश और दुनिया में कौन -कौन सी मुख्य घटनाएं घटी थीं।

अक्सर हम सुनते हैं कि हमारा इतिहास बहुत पुराना हैं, लेकिन हमें हमारे देश और दुनिया के इतिहास की पूरी जानकारी नहीं इसलिए हम यहाँ हमारा एक छोटा सा प्रयास कर रहे हैं जो आपको पूरे देश और दुनिया की इतिहास की और आज के इतिहास की जानकारी मिल सके जिससे आपका ज्ञान और बढ़ सके।

तो आइए जानते हैं कि 30 अगस्त को देश और दुनिया के इतिहास में आज के दिन कौन -कौन सी खास घटनाएं हुईं थी

30 अगस्त की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ ( Important events of August 30 )

1659 - दारा शिकोह को औरंगजेब द्वारा दी गयी थी फाँसी ।

1682 - विलियम पेन इंग्लैंड से रवाना होने के बाद में अमेरिका में पेनसिल्वेनिया कॉलोनी की थी स्थापना ।

1780 - जनरल बेनेडिक्ट अर्नोल्ड ने वेस्ट प्वाइंट फोर्ट में ब्रिटिश सेना के सामने आत्मसमर्पण करने का किया था वादा ।

1806 - न्यूयॉर्क शहर का दूसरा दैनिक समाचार पत्र ‘डेली एडवर्टाइजर’ आखिरी बार किया गया था प्रकाशित ।

1928 - द इंडिपेंडेंस ऑफ़ इंडिया लीग की भारत में हुई थी स्थापना।

1947- भारतीय संविधान का प्रारूप तैयार करने के लिए डॉ भीमराव आम्बेडकर के नेतृत्व में एक समिति का किया गया था गठन ।

1951 - फिलीपींस और अमेरिका ने एक रक्षा संधि पर किये थे हस्ताक्षर ।

1984 - अंतरिक्ष यान ‘डिस्कवरी’ ने पहली बार भरी थी उड़ान ।

1991 - अजरबैजान ने सोवियत संघ से अपनी स्वतंत्रता की थी घोषणा ।

1999 - पूर्वी तिमोर के निवासियों ने इंडोनेशिया से आजादी के लिए किया था भारी मतदान ।

2002 - ताइवान में भूकम्प के झटके किये गए थे महसूस ।

2002 - कोनोको इंक और फिलिप्स पेट्रोलियम ने विलय कर बनायी थी कोनोकोफिलिप्स ।

2003- रूसी पनडुब्बी बेरेंट्स सागर में डूबी, नौ मरे, आस्ट्रेलिया ने विश्व नौकायन में जीता था स्वर्ण पदक ।

30 अगस्त को जन्मे व्यक्ति (Famous Birthdays 30 August)

2001 - भारत की महिला मुक्केबाज़ जैस्मिन लंबोरिया का जन्म हुआ।

1954 - वकील और राजनीतिज्ञ रवि शंकर प्रसाद का जन्म हुआ।

1923 - शैलेन्द्र गीतकार का जन्म हुआ।

1918 - ओडिशा के 9वें मुख्यमंत्री रहे बिनायक आचार्य का जन्म हुआ।

1912 - दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान प्रसिद्ध महिला लड़ाकों में से एक नैंसी वेक का जन्म हुआ।

1903 - भगवतीचरण वर्मा, हिन्दी जगत् के प्रमुख साहित्यकार का जन्म हुआ।

1900 - भारतीय चिकित्सक बीर भान भाटिया का जन्म हुआ।

1895 - भारतीय राजनीतिज्ञ और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सरदार हुकम सिंह का जन्म हुआ।

1888 - भारत की आज़ादी के लिए फाँसी के फंदे पर झूलने वाले अमर शहीदों में से एक कनाईलाल दत्त का जन्म हुआ।

1559 - अकबर का पुत्र एवं मुग़ल वंश का शासक जहाँगीर (सलीम) का जन्म हुआ।

30 अगस्त को हुए निधन ( Famous Deaths 30 August)

2014 - प्रसिद्ध इतिहासकार बिपिन चन्द्र का निधन हुआ।

2008- प्रख्यात उद्योगपति कृष्ण कुमार बिड़ला का निधन हुआ।

1659 - मुग़ल बादशाह शाहजहाँ और मुमताज़ महल का सबसे बड़ा पुत्र दारा शिकोह का निधन हुआ।

1952 - - भारतीय रिज़र्व बैंक के पहले गवर्नर ओसबोर्न स्मिथ का निधन हुआ।

1976 - हिन्दी साहित्यकार जी.पी. श्रीवास्तव का निधन हुआ।

30 अगस्त के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव ( Important events and festivities of 30 August)

लघु उद्योग दिवस

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Kadhi Recipe : कढ़ी बार-बार फटती है? ये आसान तरीका अपनाएं और घर पर बनाएं रेस्टोरेंट जैसी परफेक्ट कढ़ी

Perfect Kadhi Recipe: भारतीय व्यंजनों में कढ़ी का नाम एक लोकप्रिय और पारंपरिक डिश के रूप में लिया जाता है. चावल के साथ कढ़ी खाने का अपना ही स्वाद और मज़ा है. लेकिन अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि उनकी कढ़ी अच्छी नहीं बनती या दही फट जाता है और स्वाद बिगड़ जाता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कढ़ी बनाने की सही विधि और कुछ ज़रूरी बातों का ध्यान नहीं रखा जाता.

कढ़ी एक ऐसी डिश है जिसमें बैलेंस्ड फ्लेवर, स्मूद टेक्सचर और परफेक्ट कंसिस्टेंसी बहुत मायने रखती है. कढ़ी बनाने में सबसे बड़ी समस्या तब आती है जब दही फट जाता है. यह ज़्यादातर इसलिए होता है क्योंकि दही और बेसन का सही मिश्रण नहीं बनता या दही को तेज़ आंच पर सीधे गर्म कर दिया जाता है. कढ़ी बनाने की प्रक्रिया को समझना इसलिए बेहद ज़रूरी है.

दही और बेसन का सही घोल तैयार करना

सबसे पहले दही और बेसन को अच्छे से मिलाना चाहिए. एक बाउल में दही लें और उसमें बेसन डालकर अच्छी तरह फेंटें, ताकि उसमें कोई गांठ न रहे. इसमें स्वादानुसार हल्दी और लाल मिर्च पाउडर डाल सकते हैं. इसके बाद धीरे-धीरे पानी मिलाकर स्मूद और पतला घोल तैयार करें. ध्यान रखें कि घोल एकदम चिकना होना चाहिए, तभी कढ़ी का स्वाद अच्छा आएगा.

कढ़ी में नमक डालने का सही समय

ज़्यादातर लोग दही और बेसन के घोल में ही नमक डाल देते हैं, जिसकी वजह से उबालते समय दही फटने लगता है. सही तरीका यह है कि नमक तब डालें जब कढ़ी अच्छी तरह से उबलकर गाढ़ी हो जाए और लगभग तैयार हो जाए. नमक हमेशा आखिर में या बीच में डालें. शुरुआत में डालने से कढ़ी का टेक्सचर बिगड़ सकता है.

धीमी आंच पर पकाना

कढ़ी को तेज़ आंच पर पकाने से दही के फटने का डर बढ़ जाता है. इसे हमेशा मध्यम या धीमी आंच पर पकाना चाहिए और बीच-बीच में हिलाते रहना चाहिए. लगातार हिलाने से कढ़ी नीचे से लगती नहीं है और उसका स्वाद और टेक्सचर दोनों अच्छे रहते हैं.

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History of 29 Agust : आज के दिन अमेरिकी पॉप सिंगर माइकल जैक्सन का जन्म..भारतीय हॉकी प्लेयर मेजर ध्यानचंद का जन्म..जाने और प्रमुख घटनाएं

आज का इतिहास : 29 अगस्त 1965। इस दिन को कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी के इतिहास में यादगार दिन माना जाता है। दरअसल इस दिन एक एस्ट्रोनॉट ने एक्वानॉट से बात की थी। यानी अंतरिक्ष की ऊंचाई से समुद्र की गहराई में पहली बार बात की गई।

21 अगस्त 1965 को अमेरिका ने जेमिनी-5 स्पेसक्राफ्ट लॉन्च किया था। इसमें गॉर्डन कूपर और पीट कॉनरेड अंतरिक्ष में गए थे। दोनों ने 8 दिन अंतरिक्ष में बिताए जो उस समय अंतरिक्ष में सबसे ज्यादा देर तक रहने का रिकॉर्ड था। दरअसल किसी भी स्पेसक्राफ्ट को धरती से चांद तक जाने और वापस आने में करीब 8 दिन का समय लगता है। नासा टेस्ट करना चाहता था कि नई बनाई बैटरी स्पेसक्राफ्ट को 8 दिन तक इलेक्ट्रिसिटी सप्लाय कर पाती है या नहीं।

एक तरफ ये दोनों अंतरिक्ष में रिकॉर्ड बना रहे थे, दूसरी तरफ कूपर के ही एक दोस्त स्कॉट कारपेंटर अमेरिका के एक समुद्री मिशन का हिस्सा थे। स्कॉट समुद्र की गहराई मापने से पहले एक अंतरिक्षयात्री थे और कूपर के साथ नासा के एक मिशन का हिस्सा रहे थे। इसलिए दोनों एक-दूसरे को पहले से जानते थे। अंतरिक्ष की यात्रा करने के बाद स्कॉट ने फैसला लिया कि वो समुद्र की गहराइयों को भी मापेंगे। 1965 में स्कॉट अमेरिकी नेवी के सीलैब-II मिशन का हिस्सा बन गए। इस मिशन का उद्देश्य डीप सी डाइविंग और समुद्र की गहराइयों में इंसानों पर हो रहे फिजियोलॉजिकल और साइकोलॉजिकल प्रभावों का अध्ययन करना था।

सीलैब- II की लॉन्च से पहले स्कॉट कारपेंटर (आगे वाली पंक्ति में बाएं से दूसरे)

28 अगस्त को एक कैप्सूलनुमा ट्यूब के जरिए स्कॉट और उनकी टीम के लोग समुद्र में उतारे गए। 29 अगस्त 1965 को उन्होंने समुद्री सतह से 205 फीट की गहराई से अंतरिक्ष में अपने दोस्त कूपर से रेडियोटेलीफोन के जरिए बातचीत की। इतनी लंबी दूरी की ये पहली कॉल थी।

अगले ही दिन गॉर्डन कूपर और चार्ल्स पीट अंतरिक्ष से लौटे। उनका पैराशूट प्रशांत महासागर में लैंड हुआ, इसी महासागर में 205 फीट नीचे स्कॉट अपने मिशन पर थे।

स्कॉट 30 दिन तक समुद्र में रहे। उस समय सबसे ज्यादा दिनों तक समुद्र में रहने का ये भी एक रिकॉर्ड था।

1831: माइकल फैराडे ने इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंडक्शन की खोज की

साल 1819 में हैंड्स ओसर्टेड ने ये बताया था कि इलेक्ट्रिक करंट से मैग्नेटिक फील्ड बनाई जा सकती है। जब इस बारे में फैराडे को पता चला तो उन्होंने सोचा कि अगर इलेक्ट्रिक करंट से मैग्नेटिक फील्ड बनाई जा सकती है, तो मैग्नेटिक फील्ड से भी इलेक्ट्रिक करंट फ्लो हो सकता है।

फैराडे अपने इस आइडिया पर काम करने लगे। 29 अगस्त 1831 को उन्होंने एक मोटी लोहे की रिंग पर 2 इंसुलेटेड वायर की क्वाइल को लपेट दिया। एक क्वाइल को बैटरी से और दूसरी को गेल्वेनोमीटर से जोड़ा गया। जब बैटरी से इलेक्ट्रिसिटी फ्लो की गई तो पास वाली क्वाइल के गेल्वेनोमीटर में हलचल होने लगी। जब सर्किट बंद किया गया तो गेल्वेनोमीटर की सुई उल्टी दिशा में हलचल करने लगी।

ये पेंटिंग 27 दिसंबर 1855 के दिन की है, जब फैराडे रॉयल इंस्टीट्यूशन में व्याख्यान दे रहे थे।

फैराडे ने इस एक्सपेरिमेंट के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड में बदलाव होने से इलेक्ट्रोमोटिव फोर्स सर्किट में इलेक्ट्रिसिटी पैदा करता है। इसे ही इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंडक्शन कहा जाता है और इसी की मैथेमेटिकल इक्वेशन को फैराडे के नियम के नाम से जाना जाता है।

फैराडे की ये खोज इलेक्ट्रिसिटी के क्षेत्र में बहुत महत्वपूर्ण थी। फैराडे की थ्योरी पर ही वर्तमान के इलेक्ट्रिक मोटर और डायनेमो काम करते हैं।

29 अगस्त के दिन को इतिहास में और किन-किन महत्वपूर्ण घटनाओं की वजह से याद किया जाता है...

1997: अमेरिकन आन्त्रप्रेन्योर रीड हेस्टिंग्स और मार्क रेंडोल्फ ने स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म नेटफ्लिकस की स्थापना की।

1958: अमेरिकी पॉप सिंगर माइकल जैक्सन का जन्म हुआ।

1949: सोवियत संघ ने अपने पहले परमाणु बम का परीक्षण किया।

1947: बाबासाहेब अंबेडकर संविधान की ड्रॉफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष नियुक्त किए गए।

1905: भारतीय हॉकी के स्टार प्लेयर मेजर ध्यानचंद का इलाहाबाद में जन्म हुआ।

1612: सूरत की लड़ाई में अंग्रेजों के हाथ पुर्तगालियों को हार का सामना करना पड़ा।

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Recipe : नाश्ते में एक बार गांव देहात स्टाइल में पोहा बनाकर खाएं, जीभ पर चढ़ जाएगा ये स्वाद

Recipe : गांव वाली पोहा की रेसिपी- पोहा सुपर हेल्दी नाश्ता है। अगर आप इसे कुछ सब्जियां डालकर पकाते हैं तो इसके गुण और भी बढ़ जाते हैं। मध्यप्रदेश का पोहा बहुत फेमस है, लेकिन अब पोहा ज्यादातर सभी के घरों में बनता है। पोहा बनाने की अलग-अलग कई रेसिपी हैं। आज हम आपको एकदम गांव देहात स्टाइल वाला पोहा बनाने का तरीका बता रहे हैं। इसमें आपको देसी स्वाद मिलेगा। अगर आप पोहा का वही एक जैसा स्वाद खाकर बोर हो गए हैं तो एक बार ये रेसिपी जरूर ट्राई करें। ये पोहा काफी मजेदार बनता है और एकदम मुलायम रहता है। 

गांव देहात स्टाइल पोहा की रेसिपी

पहला स्टेप- इस पोहा को बनाने के लिए आपको 4-5 लहसुन की कली लेनी हैं उन्हें छील लें। अब 1 हरी मिर्च, एक छोटा अदरक का टुकड़ा, एक छोटा प्याज कटा हुआ और जीरा लेकर सारी चीजों को अच्छी तरह से कूट लें। इसमें कश्मीरी लाल मिर्च पाउडर, नमक और कटा हुआ हरा धनिया डालकर एक बार सारी चीजों को फिर से कूटते हुए मिक्स कर लें। पोहा का मसाला बनकर तैयार है।

दूसरा स्टेप- अब कड़ाही में तेल डालें। उसमें राई और मूंगफली डालकर भून लें। 7-8 करी पत्ता डाल दें और तैयार किया हुआ मसाला तेल में डाल दें। मसाले को पकाने के बाद इसमें एक कटा हुआ टमाटर और एक उबला हुआ आलू काटकर मिला दें। 

तीसरा स्टेप- पोहा को अच्छी तरह पहले पानी से 1-2 बार भिगोकर धो लें। अब सारा पानी निकाल दें और पोहा को फूलने के लिए 5 मिनट के लिए छोड़ दें। 5-7 मिनट में पोहा एकदम फूल जाएगा और सॉफ्ट भी होगा। अगर पोहा थोड़ा कड़ा हो तो इसमें ऊपर से पानी के छींटे लगा दें। 2 मिनट के बाद भीगा हुआ पोहा मसालें में डालकर मिला दें।

चौथा स्टेप- आखिर में पोहा में आधे नींबू का रस और बारीक कटा हुआ हरा धनिया मिला दें। ढ़ककर धीमी आंच पर पोहा को 2 मिनट के लिए पका लें। तैयार है एकदम गांव देहात स्टाइल में पोहे का नाश्ता। आप इस रेसिपी से एक बार पोहा जरूर ट्राई करें।

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