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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से की सौजन्य भेंट

नई दिल्ली, 6 अक्टूबर 2025/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू से सौजन्य भेंट की। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू को अवगत कराया कि वर्ष 2025 छत्तीसगढ़ राज्य के गठन की रजत जयंती वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने रजत जयंती वर्ष के विशेष अवसर पर राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे  विकास कार्यों, जनकल्याण और सांस्कृतिक गौरव से जुड़े कार्यक्रमों की जानकारी दी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू को छत्तीसगढ़ आगमन हेतु सादर आमंत्रित किया। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को छत्तीसगढ़ राज्य की रजत जयंती वर्षगांठ की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने राज्य के सर्वांगीण विकास और जनकल्याण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की तथा प्रदेश की निरंतर प्रगति और समृद्धि की कामना की।

इस अवसर पर केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्यमंत्री श्री तोखन साहू और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन से की सौजन्य भेंट....राज्योत्सव के समापन समारोह में होंगे शामिल 

नई दिल्ली, 06 अक्टूबर 2025/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज नई दिल्ली में भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन से सौजन्य भेंट की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर उपराष्ट्रपति श्री राधाकृष्णन को छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के रजत जयंती वर्ष के ऐतिहासिक अवसर पर 5 नवम्बर को नया रायपुर में आयोजित राज्योत्सव के समापन समारोह में सम्मिलित होने हेतु सादर आमंत्रित किया।उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन जी ने स्नेहपूर्वक छत्तीसगढ़ आगमन की सहमति प्रदान की।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए गौरव, सम्मान और अपार हर्ष का विषय है कि देश के माननीय उपराष्ट्रपति अपनी गरिमामयी उपस्थिति से राज्योत्सव के समापन समारोह को अविस्मरणीय बनाएंगे।

इस अवसर पर केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू एवं मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह भी उपस्थित थे।

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खेती में डिजिटल क्रांति की दिशा में बड़ा कदम : धान बेचने के लिए किसानों को एग्रीस्टैक पंजीयन कराना अनिवार्य  

रायपुर, 06 अक्टूबर 2025
छत्तीसगढ़ सरकार किसानों के जीवन में तकनीक के माध्यम से सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इसी कड़ी में अब राज्य में एग्रीस्टैक पोर्टल को तेजी से लागू किया जा रहा है। यह पोर्टल किसानों के लिए एक डिजिटल सार्वजनिक संरचना है, जो खेती से जुड़ी सभी प्रमुख जानकारियों को एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराता है।

क्या है एग्रीस्टैक पोर्टल
          एग्रीस्टैक एक सुरक्षित डिजिटल सिस्टम है, जिसमें किसान की पहचान, जमीन का रिकॉर्ड, फसल की जानकारी और कृषि संबंधी गतिविधियों का पूरा विवरण एकीकृत रूप से दर्ज किया जाता है। इस डेटा का उपयोग किसान की सहमति से ही साझा किया जाता है, जिससे उसकी निजी जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहती है।
धान विक्रय के लिए अनिवार्य पंजीयन
          इस वर्ष राज्य में सहकारी समितियों के माध्यम से धान विक्रय करने वाले किसानों के लिए एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। यह कदम पारदर्शिता लाने और किसानों को योजनाओं का लाभ सीधे उनके खाते तक पहुंचाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
किसानों को मिल रहे सीधे लाभ
        एग्रीस्टैक पोर्टल के माध्यम से किसानों को अब योजनाओं, सब्सिडियों और सहायता राशि की जानकारी सीधे मिल रही है। इससे न केवल बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी, बल्कि लाभ वितरण की प्रक्रिया भी तेज और पारदर्शिता आएगी।
पंजीकरण की प्रक्रिया सरल और निःशुल्क
        किसानों के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया बेहद आसान है। किसान अपने आधार कार्ड और ऋण पुस्तिका के साथ नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) या अपनी सहकारी सोसायटी में जाकर निःशुल्क पंजीकरण करवा सकते हैं। पूरी प्रक्रिया कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाती है और किसान को तुरंत डिजिटल पहचान प्रदान की जाती है।
24 लाख से अधिक किसान जुड़ चुके हैं
        राज्यभर में अब तक 24 लाख से अधिक किसानों ने एग्रीस्टैक पोर्टल से जुड़कर डिजिटल कृषि सेवाओं का लाभ उठाना शुरू कर दिया है। सरकार का लक्ष्य है कि आगामी रबी सत्र तक राज्य के सभी पात्र किसान इस प्लेटफॉर्म से जुड़कर लाभ उठाना सुनिश्चित करें।
डिजिटल खेती, समृद्ध किसान
       एग्रीस्टैक पोर्टल भविष्य में कृषि योजनाओं की रीढ़ साबित होगा। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि खेती को वैज्ञानिक, योजनाबद्ध बनाने में मदद मिलेगी।

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2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को खांसी की सिरप देना पूर्णतः प्रतिबंधित....छत्तीसगढ़ के सभी जिलों को निर्देश जारी

रायपुर, 6 अक्टूबर 2025
भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि दो वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी प्रकार की खांसी की सिरप या सर्दी-जुकाम की दवाएं नहीं दी जानी चाहिए। साथ ही, यह दवाएं सामान्यतः पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए भी अनुशंसित नहीं हैं। यह कदम शिशुओं को संभावित दुष्प्रभावों से बचाने और उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
एडवाइजरी जारी होते ही छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने तत्परता से कार्यवाही करते हुए सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO) तथा सिविल सर्जनों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं। सभी शासकीय और निजी स्वास्थ्य संस्थानों को निर्देशित किया गया है कि भारत सरकार की इस गाइडलाइन का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।
साथ ही आयुक्त स्वास्थ्य सेवाएं द्वारा इस संबंध में एक उच्चस्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित कर सभी जिलास्तरीय विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि खांसी या सर्दी की दवाओं का उपयोग केवल चिकित्सकीय परामर्श पर आधारित होना चाहिए, तथा इस संबंध में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।
विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश मामलों में बच्चों में खांसी-जुकाम जैसी सामान्य बीमारियाँ अपने आप ठीक हो जाती हैं और इसके लिए दवा देना आवश्यक नहीं होता। इसलिए आम जनता को भी डॉक्टर की सलाह के बिना बच्चों को दवाएं न देने के प्रति जागरूक किया जाएगा।
कड़ी निगरानी में है औषधि आपूर्ति प्रणाली
छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (सीजीएमएससी) से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिन दो कंपनियों के विरुद्ध अन्य राज्यों में कार्रवाई की गई है, उनकी राज्य में किसी भी प्रकार की सरकारी आपूर्ति नहीं रही है। ये कंपनियाँ सीजीएमएससी के डेटाबेस में पंजीकृत भी नहीं हैं।
यह तथ्य राज्य में सरकारी स्तर पर आपूर्ति शृंखला की पारदर्शिता और सतर्कता की पुष्टि करता है।
निर्माण इकाइयों और निजी औषधालयों का निरीक्षण तेज
भारत सरकार के स्वास्थ्य सचिव द्वारा 5 अक्टूबर को आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंस के पश्चात, छत्तीसगढ़ में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने भी निगरानी और कार्रवाई को तेज कर दिया है। राज्यभर में औषध निर्माण इकाइयों का जोखिम-आधारित निरीक्षण (Risk-Based Inspection) करने हेतु औषधि निरीक्षकों के दल गठित किए गए हैं।
प्रदेश के सभी सहायक औषधि नियंत्रकों और औषधि निरीक्षकों को पत्र जारी कर निर्देशित किया गया है कि वे सभी औषधि विक्रय संस्थानों का तत्काल निरीक्षण करें, ताकि एडवाइजरी के उल्लंघन की कोई संभावना न रहे। इसके साथ ही निजी फार्मेसियों का आकस्मिक निरीक्षण भी किया जा रहा है। इन कार्यवाहियों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों के संदर्भ में किसी भी प्रकार की दवाओं का अनुचित या असावधानीपूर्वक उपयोग पूर्णतः बंद हो। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा अभिभावकों से अनुरोध किया गया है कि वे बिना चिकित्सकीय परामर्श के अपने बच्चों को कोई भी दवा न दें।

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जशपुर में गूंजेगी नागपुरी धुनें – श्री हरि कीर्तन भवन में 10 अक्टूबर को होगी भव्य नागपुरी सांस्कृतिक संध्या का आयोजन.....नागपुरी कला, गीत-संगीत और लोकसंस्कृति की दिखेगी अद्भुत झलक 

जशपुर 06 अक्टूबर 2025 :  दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष चिंटू गुप्ता ने जानकारी दी कि श्री हरि कीर्तन भवन, जशपुर में आगामी 10 अक्टूबर (शुक्रवार) 2025 को एक भव्य नागपुरी सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम रात 8 बजे से शुरू होगा, जिसमें नागपुरी कला, गीत-संगीत और लोकसंस्कृति की अद्भुत झलक देखने को मिलेगी।

इस रंगारंग आयोजन में नागपुरी लोकसंगीत जगत के प्रसिद्ध कलाकार पवन, सुहाना देवी, बरखा बहादुर और पंकज अपनी शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लेंगे।
कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक नगाड़ा, ढोल, मांदर और नृत्य की थिरकन से पूरा वातावरण झूम उठेगा।

श्री हरि कीर्तन भवन समिति ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य स्थानीय संस्कृति और परंपरा को संजोना तथा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ना है।

भवन प्रबंधन ने सभी नगरवासियों से अपील की है कि वे परिवार सहित अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस धमाकेदार नागपुरी रात को सफल बनाएं और जशपुर की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करें।

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बादलखोल अभ्यारण्य : अंगद के पैर की तरह वर्षों से जमे कर्मचारी......कोई हिला नहीं सकता

जशपुर/नारायणपुर 07 अक्टूबर 2025 : बादलखोल अभ्यारण्य में कुछ कर्मचारियों ने अंगद की तरह पांव जमा दिया है। कई कर्मचारियों का सालों से तबादला नहीं हुआ है। कुछ अपनी पदस्थी दिनांक से लेकर आज तक एक ही स्थान पर अंगद के पैर की तरह जमे हुए हैं। कई बार प्रमोशन पाकर सेटिंग कर उसी जगह जमे हुए है। कर्मचारियों के पुराने होने की वजह से अधिकारियों से उनके संबंध अच्छे हो गए हैं। इस कारण बादलखोल अभ्यारण्य में इनकी इजाजत के बगैर एक पत्ता भी नहीं हिलता है। अधिकारी इन कर्मचारियों से ही सलाह लेते।
   यही कारण है कि इन कर्मचारियों के कालर हमेशा खड़े रहते हैं। उधर विभाग के नए कर्मचारियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। क्योंकि नए कर्मचारी दिन भर काम में लगे रहते हैं बाकी के पुराने कर्मचारी समय गुजारते दिखते हैं। वहीं उच्च अधिकारियों के दौरे की भनक सबसे पहले इनको लगती है। इस कारण यह पहले से ही वहां मौजूद हो जाते हैं। इसलिए अधिकारियों को लगता है, इनसे ज्यादा कर्मठ कर्मचारी कोई नहीं है।

  जो भी कर्मचारी यहां एक बार जम जाता है, वह यहां से जाने का नाम नहीं लेता है। ऐसे कर्मचारी अधिकारियों के आगे-पीछे उनकी जी हुजूरी करते कभी भी देखे जा सकते हैं। यंहा ऐसे कुछ कर्मचारी आज भी कार्यरत हैं, जो अपने अधिकारी तक पर भारी पड़ जाते हैं। किन्हीं कारणों से यदि कर्मचारी को स्थानांतरित कर भी दिया जाता है तो वह स्थानांतरण रुकवा कर नहले पर दहला जडऩे जैसा कार्य कर सभी को चौका देता है। ऐसे कर्मचारियों के कारण भी भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। ये कर्मचारी काम कम अपने अधिकारियों की दलाली करने में ज्यादा मशगूल रहते हैं। 

शासकीय नियम

 शासकीय अधिकारी व कर्मचारियों के एक स्थान पर तीन वर्ष पूर्ण होने पर उनका अन्यंत्र स्थान पर स्थानांतरण किया जाना आवश्यक है, लेकिन बादलखोल अभ्यारण्य में ऐसे कर्मचारी हैं, जो अपनी पदस्थापना से लेकर एक ही स्थान पर जमे हुए हैं, जिनके द्वारा शासकीय कार्य को दरकिनार कर अधिकारियों की चापलूसी अथवा दलाली का कार्य धड़ल्ले से किया जा रहा है। ऐसे कर्मचारियों को अधिकारियों द्वारा भी तबज्जो दी जाती है। कुछ ऐसे कर्मचारी भी हैं, जिन्हें अवैध रूप से हो रहे वन कटाई से कोई लेना-देना नहीं है। अगर विभाग में निर्माण कार्य जैसे तालाब,डेम,पुल पुलिया,सड़क निर्माण अगर इनके बिट सर्किल में काम हो तो पूरा समय देते दिखाई जरूर देंगे क्योंकि वँहा से अतिरिक्त फायदा जो मिलता है। निर्माण कार्य मे वाहन लगाना हो तो स्वयं का या अपने चेहतों का लगाना पसंद करते है। ऐसे विभिन्न राजनैतिक दलों तले नेतागीरी कर अपनी राजनैतिक पैठ बनाने की जुगत में भी लगे रहते हैं। ऐसे कर्मचारियों के भरोसे क्या शासकीय कार्यों का निपटारा समय पर होना संभव है? 

भ्रष्टाचार को मिल रहा बढ़ावा

शासकीय तबादला नीति को धता बताते हुए वर्षों से जमे शासकीय कर्मचारियों ने जन सामान्य में अपनी गहरी पैठ बना रखी है। शासकीय कार्यालयों से संबंधित कोई भी कार्य इनकी मर्जी के बिना कराना असंभव है। फिर चाहे वह कार्य वैध हो अथवा अवैध। इन कर्मचारियों के माध्यम से ही अधिकारियों की पौ बारह होती रहती है, जिससे ये कर्मचारी अपने अधिकारियों के भी चहेते बने रहते हैं, साथ ही अधिकारी अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के विरुद्ध कार्यवाही करने से कतराते रहते हैं। फिर मामला कितना ही संगीन ही क्यों न हो। 

  उच्च अधिकारियों की जानकारी में हैं ऐसे कर्मचारी

ऐसा भी नहीं है कि वरिष्ठ अधिकारियों को ऐसे कर्मचारियों के बारे में जानकारी न हो। उनके क्रिया कलापों के बारे में समूची जानकारी होने के बावजूद वरिष्ठ अधिकारी तक इन कर्मचारियों के विरुद्ध कार्यवाही करने के मामले में विवश नजर आ रहे हैं। ऐसे में भय भूख और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने का प्रदेश सरकार का सपना कैसे पूरा होगा

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मनोरा ब्लाक के समूह की महिलाएं मछली पालन कर 2 लाख 50 हजार रूपए की  कर रही है आमदनी 

जशपुरनगर 5 अक्टूबर 2025/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा मछली पालन अर्थात जलीय कृषि करने वाले किसानों को बढ़ावा देने के लिए राज्य में मत्स्य पालन को बढ़ावा दे रहे हैं। साथ ही महिलाओं को आर्थिक रूप से समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने हेतु खेती किसानी के साथ-साथ अन्य रोजगार से जोड़ा जा रहा है। 
 छत्तीसगढ़ शासन द्वारा विभिन्न प्रकार की योजनाओं का संचालन भी किया जा रहा है। मत्स्य विभाग द्वारा शासकीय तालाब को पट्टे पर देकर मछली पालन कार्य हेतु महिलाओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है। विभाग द्वारा 50 प्रतिशत अनुदान पर मत्स्य बीच के साथ ही विभागीय योजना अंतर्गत निःशुल्क जाल और आईस बॉक्स भी दिया जा रहा है। 
        इसी कड़ी में मनोरा विकासखण्ड में श्री गणेश महिला स्व सहायता समूह के द्वारा मनोरा के बथानडीपा शासकीय तालाब को पट्टे पर लेकर मछली पालन का कार्य किया जा रहा है। 
        समूह की अध्यक्ष गुड़िया साहू ने बताया कि गणेश महिला स्व सहायता समूह की 11 महिलाओं द्वारा मनोरा में शासकीय तालाब को पट्टे पर लेकर मछली पान का कार्य किया जा रहा है। तालाब 0.801 हेक्टर में निर्माण किया गया है। उक्त तालाब में मच्छली पालन के लिए विभागीय योजना के तहत् 50 प्रतिशत अनुदान पर मत्स्य बीज उपलब्ध कराया गया है। साथ ही योजना अंतर्गत् निःशुल्क जाल एवं आईस बॉक्स भी दिया गया है। मछली पालन से समूह की महिलाओं ने 2 लाख 50 हजार रूपए की आय अर्जित किया है। 
       समूह की सदस्यों ने बताया कि पहले से ही मछली पालन विभाग द्वारा वे लाभान्वित हो चुके हैं। मछली पालन के व्यवसाय से जुड़ने के बाद उनकी आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति मजबूत हुई है।

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खनन क्षेत्र में छत्तीसगढ़ बना देश का आदर्श राज्य....पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीकी नवाचार में हुए संरचनात्मक सुधार

रायपुर, 05 अक्टूबर 2025/खनिज संपदा से समृद्ध छत्तीसगढ़ राज्य ने हाल के वर्षों में खनन क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीकी नवाचार को केंद्र में रखकर राज्य ने खनिज प्रशासन में अनेक संरचनात्मक सुधार किए हैं, जिनके परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी खनन राज्यों में सम्मिलित हो गया है। राज्य में विश्वस्तरीय लौह अयस्क, कोयला, चूना पत्थर, बाक्साइट, टिन अयस्क सहित नवीन अन्वेषणों से क्रिटिकल, स्ट्रैटेजिक तथा रेयर अर्थ मिनरल्स की उपलब्धता प्रमाणित हुई है, जिससे राज्य की वैश्विक पहचान सुदृढ़ हुई है।

छत्तीसगढ़ का खनन क्षेत्र राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 10 प्रतिशत का योगदान दे रहा है, जबकि देश के कुल खनिज उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी लगभग 17 प्रतिशत है। राज्य के खनिज राजस्व में 25 सालों में 34 गुना की बढ़ोत्तरी हुई है। राज्य गठन के समय जहाँ खनिज राजस्व मात्र 429 करोड़ रुपये था, वहीं वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 14,592 करोड़ रुपये तक पहुँच गया। यह उपलब्धि राज्य की सुदृढ़ खनिज नीति और सतत प्रशासनिक सुधारों का परिणाम है।

वर्ष 2015 में संशोधित खनन एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 के अंतर्गत गठित खनिज नीलामी नियम 2015 के तहत अब तक राज्य में 60 खनिज ब्लॉकों की सफल नीलामी की जा चुकी है। इनमें 15 लौह अयस्क, 14 बाक्साइट, 18 चूना पत्थर तथा 13 क्रिटिकल व स्ट्रैटेजिक खनिज ब्लॉक सम्मिलित हैं। साथ ही, 05 नए ब्लॉकों (02 चूना पत्थर, 01 लौह अयस्क, 01 स्वर्ण और 01 बेस मेटल ब्लॉक) की नीलामी प्रक्रिया भी प्रारंभ की जा चुकी है।

संचालनालय भौमिकी एवं खनिकर्म, छत्तीसगढ़ ने खनन अनुसंधान एवं अन्वेषण के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग के लिए आईआईटी मुंबई, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद तथा कोल इंडिया लिमिटेड के साथ एमओयू संपादित किए हैं। इस साझेदारी के माध्यम से क्रिटिकल एवं स्ट्रैटेजिक मिनरल्स की खोज को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से गति प्राप्त हुई है।

प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के गाइडलाइन-2024 के अनुरूप राज्य में जिला खनिज संस्थान न्यास नियम, 2025 अधिसूचित किए गए हैं। राज्य में अब तक 16,119 करोड़ रूपए का अंशदान प्राप्त हुआ है, जिसके अंतर्गत 1,05,653 कार्यों को स्वीकृति दी गई, जिनमें से 74,454 कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं। वित्तीय स्वीकृति, निगरानी और प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु डीएमएफ पोर्टल 2.0 को क्रियान्वित किया गया है।

खनिज विभाग द्वारा विकसित खनिज ऑनलाइन 2.0 पोर्टल ने राज्य के खनिज प्रशासन को पूर्णतः डिजिटल स्वरूप प्रदान किया है। यह प्रणाली सुरक्षित, बहुआयामी और उपयोगकर्ता-मित्र है, जो पारदर्शिता और दक्षता को बढ़ावा देती है। यह पहल छत्तीसगढ़ को खनन प्रबंधन में एक राष्ट्रीय मॉडल राज्य के रूप में स्थापित कर रही है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के सिद्धांतों के अनुरूप राज्य में रेत खदानों का आबंटन अब पूर्णतः ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से किया जा रहा है। इस हेतु एमएसटीसी के साथ एमओयू किया गया है। नई व्यवस्था में मानव हस्तक्षेप समाप्त कर संपूर्ण प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष एवं सुरक्षित बनाई गई है।

गौण खनिज नियम, 2015 के अंतर्गत लागू की गई स्टार रेटिंग प्रणाली के तहत खनन, पर्यावरण प्रबंधन, सुरक्षा उपाय और सतत विकास के मानकों पर खदानों का मूल्यांकन किया जा रहा है। इस व्यवस्था के अंतर्गत 03 खदानों को 5-स्टार तथा 32 खदानों को 4-स्टार रेटिंग से सम्मानित किया गया है, जो वैज्ञानिक एवं जिम्मेदार खनन की दिशा में राज्य की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। 

 मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का कहना है कि खनिज संपदा केवल आर्थिक स्रोत नहीं, बल्कि राज्य के सर्वांगीण विकास का आधार है। छत्तीसगढ़ ने खनन क्षेत्र में नीतिगत सुधार, डिजिटल पारदर्शिता और सतत विकास के समन्वित प्रयासों से एक आदर्श प्रशासनिक मॉडल प्रस्तुत किया है। राज्य की यह प्रगति न केवल आर्थिक सुदृढ़ता का संकेत है, बल्कि यह जनहित आधारित विकास की दिशा में एक स्थायी कदम भी है।

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धार्मिक आयोजन में विघ्न एवं शांति भंग करने की कोशिश करने वाले दो भाइयों के खिलाफ दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष ने दी पुलिस थाने में लिखित शिकायत कर कि कार्यवाही मांग

कुनकुरी 05 अक्टूबर 2025 : व्यावसायी पंकज अग्रवाल पिता मुरारी लाल अग्रवाल के द्वारा दशहरा मैदान कुनकुरी में सनातन धर्म समिति के द्वारा बनाए गए रावण को मुख्य अतिथि के पहुंचने एवं राम लक्ष्मण के पहुंचने के पूर्व प्रथा का उल्लंघन करते हुए रावण समिति के अनुमति के बिना जलाने एवं विवाद उत्पन्न करने व सामाजिक सोहार्द बिगड़ने, लड़ाई झगड़ा गाली गलौज मारपीट एवं जान से मारने की धमकी देने के अपराध कार्य करने एवं जन सुरक्षा को ताक पर रखने की धाराओं के अंतर्गत थाना कुनकुरी में रावण समिति के सदस्यों की शिकायत पर अपराध पंजीकृत किया गया है पंकज अग्रवाल एवं उसके बड़े भाई नीरज अग्रवाल के ऊपर BNS 296 315 (2) 351 (2) 300,3(5) के अंतर्गत विभिन्न आपराधिक धाराओं में अपराध पंजीकृत कर दिया गया है l जैसे ही पंकज अग्रवाल एवं नीरज अग्रवाल को पता चला कि उसके ऊपर विभिन्न धाराओं में थाना कुनकुरी में एफआईआर दर्ज हो गई है तब से पंकज अग्रवाल एवं उसका भाई नीरज अग्रवाल दोनों फरार चल रहे हैं l

    थाना प्रभारी राकेश यादव ने बताया 2 अक्टूबर 2025 दशहरा के दिन खेल मैदान कुनकुरी में रावण दहन के कार्यक्रम में अव्यवस्था फैलाने एवं रावण को मुख्य अतिथि के निर्धारित समय से पहुंचने के पहले दबंगई दिखाते हुए समिति की अनुमति के बिना जला देने एवं मारपीट की घटना कि लिखित शिकायत समिति से प्राप्त हुई है lउस पर जांच करते हुए भारतीय न्याय संहिता कि विभिन्न धाराओं के अंतर्गत अपराध पंजीकृत कर लिया गया है और आरोपीयों की पता तलाशी एवं गिरफ्तारी की प्रक्रिया जा रही हैl

       सनातन धर्म दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष दीपक हेडा ने बताया कि रावण दहन में समिति के आयोजन को असफल करने एवं जन सुरक्षा को खतरे में डालने वाले पंकज अग्रवाल को मौके पर भी समझाया गया, परंतु उसके द्वारा मुझे भी गली गलोच एवं मारपीट धक्का मुखी की गईl तब भी समिति ने कोई कार्रवाई नहीं चाहिए थीl लेकिन पंकज अग्रवाल द्वारा सोशल मीडिया साइट इंस्टाग्राम पर खुद के द्वारा की गई गुंडागर्दी की रील बनाकर एक डायलॉग अपलोड किया गया है कि मुझे ना पैसे की परवाह है और ना पावर का खौफ इस बात से कुनकुरी नगर के युवा एवं समिति के सदस्यों में आक्रोश उत्पन्न हो गया,और सनातन धर्म दुर्गा पूजा समिति के रावण दशहरा समिति के सभी सदस्यों ने थाने कुनकुरी में जाकर पंकज अग्रवाल के खिलाफ लिखित आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की हैl हमारा उद्देश्य भविष्य में ऐसी घटनाएं न हो उसको रोकना है, एवं सनातन एवं धार्मिक कार्यों में बधा करित करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए यह संदेश पहुंचाना है कि भूल की माफी है,पर अपराध के लिए तो दंड ही मिलना चाहिए l

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मुख्यमंत्री श्री साय छत्तीसगढ़ माइनिंग कॉन्क्लेव 2025 में हुए शामिल....5 माइनिंग ब्लॉकों की एनआईटी जारी और 9 खदानों को दिए गए प्रिफर्ड बिडर आदेश

*वैज्ञानिक पद्धति और नवाचारी खनन के माध्यम से विकास और पारदर्शिता की नई कहानी लिख रहा है छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री श्री साय*

रायपुर 5 अक्टूबर 2025/छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है। यहां लौह अयस्क, कोयला, बॉक्साइट, सोना, हीरा और कॉपर जैसे बहुमूल्य खनिज प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। हाल की खोजों से राज्य क्रिटिकल और दुर्लभ खनिजों के क्षेत्र में और सशक्त हुआ है। मुख्यमंत्री श्री साय ने आज नवा रायपुर में आयोजित छत्तीसगढ़ माइनिंग कॉन्क्लेव 2025 को संबोधित करते हुए यह बात कही। इस दौरान मुख्यमंत्री की उपस्थिति में आईएसएम धनबाद और छत्तीसगढ़ भौमिकी एवं खनन संचालनालय, तथा कोल इंडिया और छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के मध्य महत्वपूर्ण एमओयू हस्ताक्षरित हुए। साथ ही 5 माइनिंग ब्लॉकों की एनआईटी जारी की गई और 9 खदानों को प्रिफर्ड बिडर आदेश प्रदान किए गए। मुख्यमंत्री श्री साय ने खनिज ऑनलाइन 2.0, डीएमएफ पोर्टल तथा रेत खदानों की ऑनलाइन नीलामी के लिए रिवर्स ऑक्शन पोर्टल का शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि खनिजों का विवेकपूर्ण उपयोग और उद्योगों का संतुलित विकास देश की प्रगति के लिए आवश्यक है। छत्तीसगढ़ में खनन और नए उद्योगों की अपार संभावनाओं को देखते हुए पारदर्शी खनन नीति, ई-नीलामी और डिजिटल निगरानी की व्यवस्था ने इस क्षेत्र को नई दिशा दी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष डीएमएफ से 1,673 करोड़ रुपये का अंशदान प्राप्त हुआ, जिससे 9,362 विकास कार्य स्वीकृत किए गए। वर्ष 2024-25 में राज्य को 14,195 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड राजस्व प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि यह गर्व का विषय है कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है जिसने लिथियम ब्लॉक की नीलामी की है। अब तक 60 खनिज ब्लॉकों की नीलामी पूरी हो चुकी है और पाँच नए ब्लॉकों की निविदा आज जारी की गई है। यह पारदर्शी प्रक्रिया राज्य के आर्थिक विकास में मील का पत्थर सिद्ध होगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के तहत जिला खनिज न्यास नियम-2025 लागू किए गए हैं। डीएमएफ पोर्टल 2.0 से निगरानी और प्रबंधन की प्रक्रिया को सशक्त किया गया है, जिसके लिए भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ को सम्मानित भी किया है।
उन्होंने कहा कि नई रेत नीति-2025 से पारदर्शिता बढ़ी है और जल्द ही 200 से अधिक रेत खदानों की ई-नीलामी की जाएगी। सतत खनन के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज क्रिटिकल मिनरल्स के लिए माइनिंग कॉर्पोरेशन और कोल इंडिया लिमिटेड के मध्य एमओयू हुआ है। वहीं क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने हेतु आईआईटी रुड़की और आईएसएम धनबाद के साथ भी एमओयू साइन किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वैज्ञानिक और सतत खनन के माध्यम से छत्तीसगढ़ विकास और पारदर्शिता की नई कहानी लिख रहा है। छत्तीसगढ़ निश्चित ही प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में अग्रणी भूमिका निभाएगा।

छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री सौरभ सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार माइनिंग क्षेत्र में उल्लेखनीय और नवाचारी कार्य कर रही है। खनन से राजस्व और रोजगार दोनों बढ़े हैं तथा सरकार युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देकर कुशल मानव संसाधन तैयार कर रही है। राज्य में अब टिन से निकलने वाले स्लज से दो नए तत्वों का उत्पादन शुरू हुआ है। साथ ही क्रिटिकल ओअर रिसाइक्लिंग और ई-वेस्ट मैनेजमेंट पर भी कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 28 प्रकार के खनिजों का खनन होता है, जिनमें टिन, बॉक्साइट, कोयला, लाइमस्टोन और आयरन ओर प्रमुख हैं।

 मुख्य सचिव श्री विकासशील ने कहा कि नौ वर्ष बाद माइनिंग कॉन्क्लेव का पुनः आयोजन सराहनीय है। उन्होंने कहा कि स्टेकहोल्डर्स के सुझावों को नीति निर्माण में शामिल करना और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को सशक्त बनाना सरकार की प्राथमिकता है। खनिज क्षेत्र प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत 2047 और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगा।

मुख्य सचिव ने पारदर्शिता, तकनीकी उपयोग, जल संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा, सौर ऊर्जा और ई-वेस्ट रिसाइक्लिंग को भविष्य की आवश्यकता बताया। उन्होंने राज्य की नई उद्योग नीति की सराहना करते हुए कहा कि इससे बड़ी संख्या में रोजगार सृजित होंगे।

खनिज विभाग के सचिव श्री पी. दयानंद ने छत्तीसगढ़ माइनिंग कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए प्रदेश में खनिज उपलब्धता, नीलामी की पारदर्शी व्यवस्था, उत्खनन में नवीन तकनीकों के उपयोग, विभाग की उपलब्धियों और गतिविधियों पर विस्तार से जानकारी दी। संचालक भौमिकी एवं खनिज साधन श्री रजत बंसल ने भी अपने विचार साझा किए।

*प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना की गाइडलाइन और डीएमएफ पोर्टल 2.0 का विमोचन*

छत्तीसगढ़ माइनिंग कॉन्क्लेव 2025 में मुख्यमंत्री श्री साय ने खनिज न्यास निधि का प्रभावित क्षेत्रों में उपयोग, कुशल प्रबंधन, पारदर्शिता, सुशासन, प्रभावी संचालन एवं निगरानी को और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से डीएमएफ पोर्टल 2.0 का विमोचन किया।
इस पोर्टल में प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (PMKKKY) की गाइडलाइनों के अनुरूप और छत्तीसगढ़ जिला खनिज संस्थान न्यास नियम, 2015 (संशोधित 2025) में किए गए संशोधनों को शामिल किया गया है।

*मुख्यमंत्री ने खनिज ऑनलाइन पोर्टल 2.0 का किया शुभारंभ*

खनिज विभाग ने खनिज ऑनलाइन पोर्टल 1.0 का उन्नयन कर 2.0 संस्करण तैयार किया, जिसका शुभारंभ मुख्यमंत्री श्री साय ने किया।
यह पोर्टल खनन प्रबंधन यात्रा में एक महत्त्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा। यह केवल तकनीकी उन्नयन नहीं, बल्कि राज्य की पारदर्शिता, जिम्मेदारी और विकास के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है। खनिज ऑनलाइन 2.0 छत्तीसगढ़ के खनन प्रबंधन को देश भर में एक मॉडल सिस्टम के रूप में स्थापित करेगा और आने वाले वर्षों में राज्य की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

*मुख्यमंत्री ने एमएसटीसी द्वारा निर्मित रेत खदानों के रिवर्स ऑक्शन पोर्टल का किया शुभारंभ*

राज्य सरकार ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की अवधारणा को साकार करते हुए रेत खदानों की पारदर्शी और निष्पक्ष नीलामी के लिए भारत सरकार के सार्वजनिक उपक्रम एमएसटीसी के साथ एमओयू किया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने आज एमएसटीसी द्वारा निर्मित रिवर्स ऑक्शन पोर्टल का शुभारंभ किया। इस पहल से रेत खदानों का आबंटन तेज गति से होगा और प्रधानमंत्री आवास के हितग्राहियों को पर्याप्त मात्रा में रेत उपलब्ध हो सकेगी। साथ ही राज्य की सरकारी एवं निजी अधोसंरचना परियोजनाओं के लिए रेत की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होगी।इसके अलावा, करोड़ों रुपये की रॉयल्टी एवं करों से राज्य के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

*मुख्यमंत्री ने गौण खनिज खदानों को दिए स्टार अवॉर्ड*

मुख्य खनिजों की तर्ज पर राज्य में गौण खनिज खदानों में भी स्टार रेटिंग प्रणाली के अंतर्गत समुचित एवं वैज्ञानिक पद्धति से खनन को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। पर्यावरण प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण और सुरक्षा मानकों का पालन कर बेहतर कार्य करने वाली 43 खदानों को स्टार अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने खदान संचालकों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया और उन्हें इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।इनमें 3 खदानों को 5 स्टार, 32 खदानों को 4 स्टार और 8 खदानों को 3 स्टार अवॉर्ड दिए गए।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, एसईसीएल बिलासपुर के मुख्य महाप्रबंधक श्री हरीश दुहन, तथा खनिज एवं उद्योग क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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सीएम श्री साय राष्ट्रीय मछुवारा जागरूकता सम्मेलन में हुए शामिल....सामाजिक विकास का मूलमंत्र है शिक्षा, शिक्षा के बिना है जीवन अधूरा – मुख्यमंत्री श्री साय

रायपुर 5 अक्टूबर 2025/शिक्षा के बिना जीवन अधूरा है। शिक्षा केवल नौकरी प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि सफल जीवन का मार्ग है। सामाजिक विकास का मूलमंत्र शिक्षा है। चाहे जीवन जीने की कला हो, व्यापार हो, कृषि हो या कोई अन्य क्षेत्र — हर क्षेत्र में सफलता के लिए शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित बलबीर सिंह जुनेजा इनडोर स्टेडियम में आयोजित राष्ट्रीय मछुवारा जागरूकता सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि  हमारी सरकार प्रारंभ से ही राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है। राज्य गठन के समय जहां केवल एक मेडिकल कॉलेज हुआ करता था, वहीं आज प्रदेश में लगभग 15 मेडिकल कॉलेज हो चुके हैं। इसी तरह हमने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक संस्थान जैसे आईआईटी, ट्रिपल-आईटी, आईआईएम, लॉ यूनिवर्सिटी, एम्स और सिपेट जैसे संस्थान छत्तीसगढ़ में स्थापित किए हैं, जिनका लाभ राज्य के स्थानीय विद्यार्थियों को मिल रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में नालंदा परिसर के निर्माण का कार्य चल रहा है, जिससे युवाओं को दिशा और अवसर दोनों मिल रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज समाज को संगठित होने की आवश्यकता है, क्योंकि संगठित समाज से ही राष्ट्र मजबूत होता है। उन्होंने कहा कि नशाखोरी समाज के विकास में बाधक है और इस बुराई से दूर रहना आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने समाज से नशा मुक्ति का संकल्प लेने की अपील की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार ने मत्स्य संपदा योजना प्रारंभ की, जो मछुआरों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने में एक क्रांतिकारी कदम सिद्ध हुई है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ सरकार ने हाल ही में गंगरेल बांध ठेका प्रथा को समाप्त कर पुनः डुबान क्षेत्रों के किसानों को मत्स्य पालन की अनुमति प्रदान की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार मछुआ समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत है। मत्स्य पालन के क्षेत्र में अनेक योजनाएँ प्रारंभ की गई हैं। प्रदेश का पहला एक्वा पार्क हसदेव बांगो जलाशय में लगभग ₹37 करोड़ की लागत से निर्मित किया जा रहा है। यह एक्वा पार्क मछली उत्पादन, प्रोसेसिंग, निर्यात और टूरिज़्म— इन चारों क्षेत्रों में नए अवसर सृजित करेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में यहाँ 800 केजों में मत्स्य पालन किया जा रहा है, जिससे अनेक पंचायतों को लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यह हमारे मछुआ भाइयों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने राष्ट्रीय मछुवारा संघ के सभी पदाधिकारियों और देशभर से पधारे मेहनतकश मछुआ भाइयों-बहनों को राष्ट्रीय सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।

केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. राजभूषण चौधरी निषाद ने कहा कि निषाद समाज का गौरवशाली इतिहास और परंपरा रही है। हमारे इतिहास और परंपरा के बारे में नई पीढ़ी को बताना और सिखाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने सदैव निषाद समाज को अग्रणी स्थान दिया है।
उन्होंने बताया कि जब अयोध्या में प्रभु श्री रामलला के भव्य मंदिर का निर्माण किया गया, तब उसी के सामने सरयू नदी के तट पर निषाद राज मंदिर का निर्माण कर समाज को उचित सम्मान दिलाने का कार्य प्रधानमंत्री श्री मोदी ने किया है। इस हेतु निषाद समाज सदैव उनका ऋणी रहेगा।

उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि निषाद समाज अत्यंत मेहनतकश और परिश्रमी समाज है। उन्होंने कहा कि समाज की प्रगति में निषाद समुदाय का योगदान अनुकरणीय है।

इस अवसर पर विधायक श्री सुनील सोनी, छत्तीसगढ़ मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष श्री भरत मटियारा, सहित प्रदेश और अन्य राज्यों से आए समाज के पदाधिकारी एवं जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान के प्रति मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जताया आभार

रायपुर 5 अक्टूबर 2025/केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक कार्य समिति ने रायपुर जिले के आरंग में नए केंद्रीय विद्यालय की स्थापना को स्वीकृति प्रदान की है। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल प्रदेश के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराएगी। 

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अवसरों के विस्तार की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि यह विद्यालय न केवल आरंग क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए वरदान साबित होगा, बल्कि आस-पास के ग्रामीण अंचलों में भी शिक्षा की नई चेतना जागृत करेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के सभी अंचलों में शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने, स्कूलों के बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने और विद्यार्थियों को समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ में शिक्षा का नया युग प्रारंभ हो रहा है।

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बारिश में भी नही थमी कदमताल, नारायणपुर में आर एस एस का भव्य पथ संचलन, शताब्दी वर्ष पर स्वयंसेवकों का अनुशासित प्रदर्शन

नारायणपुर 05 अक्टूबर 2025 : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी वर्ष पर अनुशासन और शौर्य का अद्भुत नजारा देखने को मिला। गांव की मुख्य सड़कों से होकर स्वयंसेवकों का भव्य पथ संचलन निकाला गया। घोष की धुन पर दंड कंधे पर रख कदमताल करते स्वयंसेवकों ने सभी को आकर्षित किया।

     नारायणपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विशाल पथ संचलन निकला। जिसमे सैकड़ो गणवेशधारी स्वयंसेवक घोष की धुन पर कदमताल करते हुए निकले। जिनका जगह-जगह नगरवासियों द्वारा पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इस कार्यक्रम में भव्य पथ संचलन और मुख्य अथिति देवराज यादव के द्वारा भारत माता के चित्र पर एवं शस्त्र पूजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व खण्ड संचालक इंद्र हेड़ा  ने किया।

       कार्यक्रम की शुरुआत स्वयं सेवकों ने भारत माता, संघ संस्थापक डॉ. केशव राव बलीराम हेडगेवार और माधव राव सदाशिव राव गोलवलकर के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन कर की। शस्त्र पूजन के बाद स्वयं सेवकों ने वाद्य यंत्रों के साथ पथ संचलन शुरू किया। पथ संचलन नारायणपुर स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ठ विद्यालय से प्रारंभ होकर रानीकोम्बो,कन्या छात्रवास,ग्रामीण बैंक,अटल चौक जय स्तम्भ चौक होते हुए पूरे गांव में भ्रमण किया और पुनः उसी स्थान पर समाप्त हुआ। रास्ते में गांव के लोगों ने स्वयं सेवकों का उत्साहवर्धक स्वागत किया और जगह-जगह पुष्प वर्षा की गई। 

स्वयंसेवकों ने बारिश में भीगते हुए अनुशासित पंक्तियों में कदमताल किया। तेज वर्षा और फुहारों के बावजूद स्वयंसेवकों के कदम थमे नहीं। घोष और गीत की गूंज के बीच जब स्वयंसेवक अनुशासन की धारा में प्रवाहित हुए तो वातावरण राष्ट्रभक्ति से सराबोर हो उठा।

संघ पदाधिकारियों ने बताया कि शताब्दी वर्ष का यह आयोजन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मकता और राष्ट्र सेवा की भावना को प्रोत्साहित करने का माध्यम है। स्वयंसेवकों ने समाज के हर वर्ग तक सेवा कार्य और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा पहुंचाने का संकल्प लिया।

इस कार्यक्रम में संघ के जिला प्रचारक ऋषिकेश चक्रधारी ने मार्गदर्शन करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना विजयादशमी के दिन वर्ष 1925 में डॉ. हेडगेवार ने की थी।भारतीय समाज के उत्थान और सशक्तिकरण में संघ ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। संघ राष्ट्र की एकता, अखंडता और समृद्धि के लिए निरंतर कार्य करता आ रहा है। नागपुर से प्रारंभ हुआ यह संगठन आज विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन बन चुका है। संघ ने समाज के हर वर्ग को संगठित करने और राष्ट्रहित में खड़ा करने का कार्य किया है। 1947 में देश की आज़ादी के बाद संघ ने राष्ट्र निर्माण के विभिन्न कार्यक्रम में योगदान दिया और समय-समय पर सेवा कार्यों के माध्यम से समाज के हर वर्ग को साथ लिया।संघ का मूल ध्येय है हिंदू समाज को संगठित करना और राष्ट्र को परम वैभव तक ले जाना। शाखाओं के माध्यम से शारीरिक, बौद्धिक और नैतिक प्रशिक्षण देकर संघ स्वयंसेवकों में अनुशासन, त्याग और सेवा की भावना का संचार करता है

  कार्यक्रम में शामिल लोगों ने आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने की उपलब्धियों और संगठन की राष्ट्रसेवा के कार्यों को याद किया।कार्यक्रम ने न केवल संघ की परंपरा और अनुशासन का संदेश दिया बल्कि ग्रामीणों में उत्साह और संगठन के प्रति सम्मान की भावना भी बढ़ाई।

इस अवसर पर संघ के कार्यक्रम के मुख्य अथिति देवराज यादव,जिला प्रचारक ऋषिकेश चक्रधारी,खंड संचालक इंद्र हेड़ा,खण्ड कार्यवाहक अशोक चौहान,सह खंड कार्यवाहक देवचरण चौहान,मंडल पालक राजकुमार चौहान,मंडल संयोजक रामकृत नायक,सह संयोजक टिकेश्वर यादव,खंड कार्यवाहक  सन्तु राम, सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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प्रभु श्रीराम के ननिहाल और माता शबरी की पावन भूमि पर हुआ राज्य स्तरीय युवा कवि सम्मेलन का आयोजन

छत्तीसगढ़ की धरती सदा से रही है साहित्य और संस्कृति की धरा : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर 5 अक्टूबर 2025/ छत्तीसगढ़ की साहित्यिक, सांस्कृतिक और कलात्मक परंपराओं को नई ऊर्जा देने के उद्देश्य से विगत रात्रि आयोजित राज्य स्तरीय युवा कवि सम्मेलन में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रभु श्रीराम के ननिहाल और माता शबरी की पावन भूमि को नमन करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती सदा से साहित्य और संस्कृति की धरा रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने उद्बोधन में कहा कि महाकवि कालिदास ने इसी धरती पर मेघदूत जैसे अमर काव्य की रचना की, वहीं गजानन माधव मुक्तिबोध और पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जैसे यशस्वी साहित्यकारों ने इसी मिट्टी से अपनी पहचान बनाई। उन्होंने अपने पूर्व संसदीय क्षेत्र रायगढ़ के सुप्रसिद्ध संगीत सम्राट राजा चक्रधर सिंह को भी श्रद्धापूर्वक स्मरण किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग तथा खेल एवं युवा कल्याण विभाग का यह अभिनव प्रयास प्रदेश की कला, साहित्य और रचनात्मक प्रतिभाओं को मंच प्रदान कर उन्हें प्रोत्साहन देने का उत्कृष्ट माध्यम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवा साहित्यकारों, रचनाकारों और कलाकारों को निरंतर आगे बढ़ने के अवसर प्रदान कर रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं से चयनित तीनों विजेताओं को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि इस मंच के माध्यम से युवा कवियों को देश के ख्यातिलब्ध कवियों से मार्गदर्शन प्राप्त होगा, जिससे उनके रचनात्मक विकास को नई दिशा मिलेगी।

*छत्तीसगढ़ की संस्कृति गीत, नृत्य और भावनाओं का जीवंत संगम है : उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव*

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि यह सम्मेलन केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि युवा कवियों के लिए सीखने और सृजन की प्रेरणा का अवसर है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की कला और संस्कृति आरंभ से ही समृद्ध रही है — यहाँ मनुष्य के जीवन से लेकर मृत्यु तक हर अवसर पर गीत गाए जाते हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब खेतों में बुआई का समय आता है, तो पूरे वातावरण में ददरिया की मधुर ध्वनि गूंजती है। यहाँ विविध वाद्य, गीत, नृत्य और लोककलाओं की अनूठी परंपरा रही है। श्री साव ने कहा कि यह प्रदेश संतों, महात्माओं और कवियों की कर्मभूमि रहा है, जहाँ से समाज को सदैव नई दिशा मिली है। उन्होंने प्रदेशभर से आए युवा कवियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का आह्वान किया।

      *प्रख्यात कवियों का मनमोहक काव्यपाठ*

सम्मेलन में देश के प्रतिष्ठित कवि श्री शशिकांत यादव, श्री दिनेश बावरा, श्री नीलोत्पल मृणाल, सुश्री कविता तिवारी और सुश्री मनु वैशाली ने अपनी ओजपूर्ण एवं भावनात्मक कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

         *प्रदेश की प्रतिभाओं को मिला सम्मान*

राज्य स्तरीय युवा कवि प्रतियोगिता में बिलासपुर जिले की निधि तिवारी ने प्रथम स्थान, मीरा मृदु ने द्वितीय स्थान तथा कोरिया जिले की अलीशा शेख ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी विजेता प्रतिभागियों को सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, विधायक श्री मोतीलाल साहू, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष श्री विश्व विजय सिंह तोमर सहित विभिन्न आयोग एवं मण्डल के अध्यक्ष, जनप्रतिनिधि, साहित्यकार, कवि एवं बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित थे।

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आरएसएस के शताब्दी वर्ष पर आज नारायणपुर में निकलेगा पथ संचलन

संघ का पथ संचलन कार्यक्रम आज नारायणपुर में

जशपुर/नारायणपुर 05 अक्टूबर 2025  : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आज रविवार सुबह 1 बजे स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय के ग्राउंड प्रांगण से भव्य पथ संचलन का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं सैकड़ो स्वयं सेवकों के शामिल होने का अनुमान है। पथ संचलन आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय ग्राउंड से शुरू होकर नगर के प्रमुख मार्गों व गली-मोहल्लों से गुजरते हुए पुनः स्कूल परिसर में समाप्त होगा। स्थानीय गणमान्य नागरिक एवं स्वयंसेवकों ने भागीदारी का आह्वान किया है।

 ज्ञात हो कि कल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में नारायणपुर मंडल में पथ संचलन की रूपरेखा तय करने के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में 5 अक्टूबर 2025 रविवार को आयोजित होने वाले पथ संचलन का विस्तृत मार्ग निर्धारित किया गया।

बैठक में तय किया गया कि स्वयंसेवक 5 अक्टूबर 2025 को दोपहर 1 बजे स्वामी आत्मानंद स्कूल प्रांगण में एकत्रित होंगे। पथ संचलन दोपहर 1:00 बजे इसी स्थान से प्रारंभ होगा।

स्वयं सेवक संघ के मण्डल इकाई के सदस्य गोपाल यादव ने बताया कि नारायणपुर मण्डल में 17 ग्राम है जिसमे सैकड़ो स्वयं सेवक  सदस्य उपस्थित रहेंगे।यह पथ संचलन स्कूल प्रांगण से ग्राम रानीकोम्बो, कन्या शाला,ग्रामीण बैंक,अटल चौक,मुख्य बस्ती,जय स्तम्भ चौक,थाना मार्ग से गुजरेगा। इसके बाद वापस स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय पर आकर समाप्त होगा।

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केन्द्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह मांझी-चालकी के साथ अभिनन्दन भोज में हुए शामिल

रायपुर 4 अक्टूबर 2025/केन्द्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज जगदलपुर के लालबाग मैदान में बस्तर दशहरा पर्व से जुड़े मांझी-चालकी, मेम्बर एवं मेम्बरीन के सम्मान में आयोजित अभिनंदन भोज में शामिल हुए।  केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने अभिनंदन भोज में परोसे गए आदिवासी समाज के पारम्परिक व्यंजनों की सराहना करते हुए कहा कि ये पारम्परिक व्यंजन बस्तर की संस्कृति, परंपरा और आदिवासी जीवन मूल्यों का अनूठा स्वाद प्रस्तुत करते हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर की आदिवासी परंपरा में मांझी-चालकी, मेंबर और मेंबरीन के साथ अभिनंदन भोज केवल एक सत्कार नहीं है, बल्कि यह भाईचारे, सामुदायिक मेल-जोल और सांस्कृतिक समरसता का जीवंत प्रतीक है। यह अवसर न केवल बस्तर की समृद्ध और जीवंत आदिवासी संस्कृति का उत्सव है, बल्कि हमारी सामाजिक एकता और स्थानीय परंपराओं के प्रति सम्मान की भी अभिव्यक्ति है।

अभिनंदन भोज में उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, सांसद श्री महेश कश्यप एवं श्री भोजराज नाग, विधायक सर्वश्री किरण सिंह देव, विनायक गोयल, चैतराम अटामी, नीलकंठ टेकाम, आशाराम नेताम तथा सुश्री लता उसेंडी सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह मुरिया दरबार मे शामिल होकर मांझी-चालकी से किया सीधा संवाद  

रायपुर 4 अक्टूबर 2025/ केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह और प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय बस्तर दशहरा पर्व के अवसर पर जगदलपुर के सिरहासार भवन में आयोजित मुरिया दरबार में शामिल हुए। बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के चित्र पर दीप प्रज्वलित करने के पश्चात केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने मांझी-चालकी से सीधा संवाद करते हुए बस्तर से माओवाद को समाप्त करने में सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि माओवाद से जुड़कर हथियार उठा चुके बच्चों को समझाएं कि वे मुख्यधारा में लौटें और शासन की योजनाओं का लाभ लें।

केंद्रीय गृह मंत्री श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी बस्तर के विकास और नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए दृढ़संकल्पित हैं। 

केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने मांझी-चालकी से संवाद करते हुए कहा कि मार्च 2026 तक बस्तर को नक्सलवाद से मुक्त कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि बस्तर के युवा डॉक्टर, इंजीनियर, डिप्टी कलेक्टर और कलेक्टर बनकर पूरे छत्तीसगढ़ की सेवा करें। यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि युवा नक्सलवाद से न जुड़ें और जो जुड़ चुके हैं, वे आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटें। जहां-जहां नक्सलवाद समाप्त हुआ है, वहां छत्तीसगढ़ सरकार तेजी से विकास कार्य कर रही है और लोगों को शासकीय योजनाओं से लाभान्वित कर रही है। 

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने मुरिया दरबार में मांझी-चालकी को संबोधित करते हुए कहा कि  सरकार बस्तर दशहरा पर्व को और भव्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। बस्तर दशहरा के लिए दी जाने वाली राशि 25 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये की जा रही है। साथ ही बस्तर दशहरा पर्व के परंपरागत स्थलों जिया डेरा, माडिया सराय इत्यादि के विकास और निर्माण कार्य भी सुनिश्चित किए जा रहे हैं।

इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और अन्य अतिथियों का बस्तर दशहरा समिति के परंपरागत सदस्य मांझी-चालकी, मेम्बर-मेम्बरिन और नाईक-पाईक ने पारंपरिक पगड़ी एवं माला पहनाकर आत्मीय स्वागत किया।

मुरिया दरबार को उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा और सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष श्री महेश कश्यप ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर वन मंत्री श्री केदार कश्यप, आदिम जाति कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम, पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, सांसद कांकेर श्री भोजराज नाग, विधायक जगदलपुर श्री किरण देव, विधायक कोण्डागांव सुश्री लता उसेण्डी, विधायक चित्रकोट श्री विनायक गोयल, विधायक दंतेवाड़ा श्री चैतराम अटामी, विधायक केशकाल श्री नीलकंठ टेकाम, विधायक कांकेर श्री आशाराम नेताम, बस्तर राजपरिवार के सदस्य श्री कमलचंद्र भंजदेव, बस्तर दशहरा समिति के उपाध्यक्ष श्री बलराम मांझी सहित बस्तर दशहरा समिति के पारंपरिक सदस्य मांझी-चालकी, मेम्बर-मेम्बरिन और नाईक-पाईक उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का केंद्रीय गृह मंत्री ने किया शुभारंभ....बस्तर और सरगुजा  संभाग के 11 जिलों के 250 गांवों तक पहली बार पहुंचेगी यात्री बस सेवा

विकास से विश्वास तक की यात्रा में अब सहभागी बनेंगे बस्तर और सरगुजा के सुदूर अंचलवासी – केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह

जनसुविधाओं को बढ़ाने के लिए तेजी से कार्य कर रही है हमारी सरकार – मुख्यमंत्री श्री साय

 

रायपुर 4 अक्टूबर 2025/ बस्तर से नक्सलवाद का अंत शीघ्र होगा और क्षेत्र में शांति स्थापित कर हम विकास के नए आयाम गढ़ेंगे। बस्तर और सरगुजा क्षेत्र के सुदूर अंचलवासी अब विकास से विश्वास तक की यात्रा में सहभागी बनकर विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएंगे। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने जगदलपुर से मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का शुभारंभ करते हुए यह बात कही। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने यात्री बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और क्षेत्रवासियों को इस विशेष पहल के लिए शुभकामनाएं दीं।

केंद्रीय गृह मंत्री श्री शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ के विकास के लिए डबल इंजन की सरकार प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। लाल आतंक की समाप्ति प्रदेश के सुदूर इलाकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ेगी। आज प्रारंभ हुई यात्री बस सेवा हमारे नागरिकों के जीवन में नई ऊर्जा का संचार करेगी। उन्होंने कहा कि अब 250 गांवों के लोग अपने निकटवर्ती शासकीय कार्यालयों, स्कूलों और अस्पतालों तक आसानी से पहुंच पाएंगे।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने क्षेत्रवासियों को बधाई देते हुए कहा कि हमारी सरकार जनसुविधाओं को बढ़ाने के लिए तेजी से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का उद्देश्य यात्री बस सुविधा से वंचित गांवों में बसों का परिचालन सुनिश्चित करना है। इससे लोग कम लागत में अपने गंतव्य तक समय पर पहुंच सकेंगे। रोज़मर्रा के कामकाज, शासकीय कार्यों और अन्य गतिविधियों में भी सहूलियत बढ़ेगी।

उल्लेखनीय है कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में परिवहन सुविधाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना शुरू की गई है। इस महत्वाकांक्षी योजना का लक्ष्य उन गांवों तक बस सेवा पहुँचाना है, जहाँ अब तक सार्वजनिक परिवहन की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। इस पहल से ग्रामीणों को सुरक्षित, समयबद्ध और सुविधाजनक यात्रा का अवसर मिलेगा, जो उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

योजना के पहले चरण में बस्तर और सरगुजा पर फोकस

योजना के पहले चरण में बस्तर और सरगुजा संभाग को प्राथमिकता दी गई है। इन क्षेत्रों में कुल 34 मार्गों पर 34 बसों का संचालन प्रारंभ होगा। इस पहल से 11 जिलों के 250 नए गांव बस सेवा से जुड़ेंगे। यह प्रयास विशेष रूप से उन ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वरदान साबित होगा, जहां सड़क संपर्क सीमित है और लोग जिला मुख्यालय या अन्य महत्वपूर्ण स्थानों तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी पैदल तय करते हैं।

ग्राम पंचायत से जिला मुख्यालय तक कनेक्टिविटी

मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायत से लेकर जिला मुख्यालय तक निर्बाध बस कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना है। इससे ग्रामीणों को स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और बाजार जैसी आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने में आसानी होगी। योजना के तहत संचालित बसें समयबद्ध और सुरक्षित यात्रा का भरोसा देंगी, जिससे ग्रामीणों का समय और संसाधन दोनों की बचत होगी।
योजना की दीर्घकालिक सफलता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने बस संचालकों को वायबिलिटी गैप फंडिंग प्रदान करने का प्रावधान किया है। यह वित्तीय सहयोग संचालकों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाएगा, ताकि वे इन दूरस्थ क्षेत्रों में निरंतर सेवा दे सकें। यह कदम न केवल परिवहन सुविधाओं को मजबूत करेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन में भी योगदान देगा।

250 गांवों को पहली बार बस सेवा से जोड़ने की उपलब्धि

इस योजना के तहत लगभग 250 गांव पहली बार बस सेवा से जुड़ रहे हैं। यह ग्रामीण छत्तीसगढ़ के लिए एक ऐतिहासिक कदम है, जो सामाजिक और आर्थिक विकास को गति देगा। ग्रामीणों को अब अपनी आवश्यकताओं के लिए लंबी दूरी पैदल तय करने या निजी वाहनों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होगी।

समावेशी विकास की दिशा में कदम

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस योजना की शुरुआत पर कहा कि हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ का कोई भी गांव विकास की मुख्यधारा से न छूटे। मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना ग्रामीणों के जीवन को आसान बनाने और उन्हें शहरों से जोड़ने का प्रयास है। यह योजना न केवल परिवहन की सुविधा देगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगी। यह योजना न केवल परिवहन की दृष्टि से, बल्कि सामाजिक और आर्थिक समानता की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित होगी।

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