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मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन पर एक दिवसीय व्याख्यान का हुआ आयोजन

*जशपुरनगर 09 अक्टूबर 2025/* विश्व मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह 2025 के अवसर पर राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन पर एक दिवसीय व्याख्यान का आयोजन  09 अक्टूबर 2025 को स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेज़ी माध्यम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जशपुर में किया गया। 
          स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस व्याख्यान में  डॉ. खान अबरार उज़ ज़मान खान साइकोलॉजिस्ट जिला चिकित्सालय जशपुर द्वारा विद्यार्थियों को संबोधित कर व्याख्यान के उद्देश्य के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य के महत्व के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना मानसिक समस्याओं की प्रारंभिक पहचान करना और तनाव प्रबंधन हेतु सकारात्मक उपायों की जानकारी देना था। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया एवं चर्चा सत्र में अपनी जिज्ञासाएँ प्रस्तुत कीं। व्याख्यान के माध्यम से बताया गया कि मानसिक स्वास्थ्य विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन एवं व्यक्तित्व विकास दोनों के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह कार्यक्रम जिला मानसिक स्वास्थ्य इकाईए जशपुर द्वारा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जशपुर के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम के सफल संचालन में जिला कार्यक्रम प्रबंधक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने अहम भूमिका निभाई। इस कार्यक्रम के दौरान सहायक संचालक शिक्षा विभाग श्रीमती सरोज खलखो एवं विद्यालय के समस्त शिक्षक गण उपस्थित रहे। 
           मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रखने हेतु अच्छे मानसिक स्वास्थ्य के लिए सुझाव  दिए गए। जिसमें पर्याप्त नींद और पौष्टिक आहार, नियमित व्यायाम करने और नशे से दूर रहने के लिए कहा गया। इसके साथ ही परिवार व मित्रों से जुड़ाव बनाए रखने, तनाव प्रबंधन के लिए ध्यान करने, सकारात्मक सोच और हर दिन कुछ अच्छा सोचने सहित ज़रूरत पड़ने पर विशेषज्ञ से मदद लेने की सलाह दी गई। मानसिक समस्या होने पर अपने निकटतम चिकित्सा केंद्र में चिकित्सक से संपर्क  या टेली मानस टोल फ्री नंबर 14416 में कॉल करने के लिए कहा गया।

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कलेक्टर श्री रोहित व्यास की अध्यक्षता में जिला स्तरीय परामर्शदात्री समिति की त्रैमासिक बैठक संपन्न

जशपुरनगर 09 अक्टूबर 2025/ कलेक्टर श्री रोहित व्यास की अध्यक्षता में बुधवार को जिला स्तरीय परामर्शदात्री समिति की त्रैमासिक बैठक कलेक्टोरेट सभाकक्ष में संपन्न हुआ। बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक कुमार सहित विभिन्न विभागों और बैंकों के अधिकारी उपस्थित रहे। इस दौरान विभिन्न शासकीय विभागों के द्वारा संचालित हितग्राहीमूलक योजनाएं जिनका बैंक के माध्यम से जमा और भुगतान की कार्यवाही की जाती है उन पर होने वाली व्यवहारिक दिक्कतों के समाधान पर विस्तृत चर्चा हुई। कलेक्टर श्री व्यास ने किसानों, स्व-सहायता समूहों एवं आम नागरिकों को बैंकिंग सेवाओं का लाभ सरलता से दिलाने हेतु बैंकों से उदार व सहयोगात्मक रुख अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जो भी व्यवहारिक दिक्कतें आती हैं उनका समाधान जल्द किया जाना चाहिए, ताकि बैंकिंग सेवा के लाभ से कोई वंचित न हो और शासकीय योजनाओं और कार्यक्रमों के संचालन सरलता से हो सके। 
   कलेक्टर श्री व्यास ने कहा कि यदि किसी हितग्राही का ऋण आवेदन अस्वीकृत किया जाता है तो उसका उचित कारण बताने के साथ ही समाधान के तरीके से भी अवगत कराएं। उन्होंने दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में बैंकिंग जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर देते हुए कहा कि जिन लोगों के बैंक खाते अब तक नहीं खुल पाए हैं, उन्हें शीघ्र बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा जाए ताकि वे भी शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें। बैठक में कलेक्टर ने बैंक अधिकारियों से सीएसआर मद का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जनकल्याणकारी कार्यों में करने की अपील की। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाने को कहा, ताकि अधिक से अधिक लोग इस योजना से लाभान्वित हो सकें। 
    कलेक्टर ने बिहान समूहों के बैंक लिंकेज को तीव्रता से करने के साथ मुद्रा योजनांतर्गत  अधिक से अधिक लोगों को लाभान्वित करने हेतु निर्देशित किया। उन्होंने जिला अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति को कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशीलता बरतने और स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने का कार्य प्राथमिकता के साथ करने के निर्देश दिए। कलेक्टर श्री व्यास ने  किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत दिए जाने वाले ऋण में उदारता बरतते हुए अधिक से अधिक किसानों को लाभान्वित करने के निर्देश भी दिए। साथ ही उन्होंने क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात को संतुलित रखते हुए पात्र हितग्राहियों को समय पर ऋण उपलब्ध कराने पर बल दिया। कलेक्टर ने स्वनिधि योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, बिहान योजना और अन्य योजनाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशीलता और तत्परता से कार्य किया जाए। उन्होंने बैंकों द्वारा संचालित ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान में  रोजगारपरक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर लीड बैंक मैनेजर वाल्टर वेंगरा, आरबीआई एलडीओ श्री नवीन तिवारी, सहायक महाप्रबंधक नाबार्ड श्री मिलयोर बड़ा सहित सहित बैंकों के मैनेजर तथा सभी संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जशपुर के परम्परागत दशहरा उत्सव के लिए 12 लाख रुपए की अनुदान राशि दिया गया 

जशपुर 9 अक्टूबर 25/ संबंधित विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जिला जशपुर के परम्परागत दशहरा उत्सव 2025 हेतु राशि रू. 12 लाख (रू. बारह लाख मात्र) अनुदान राशि जारी किया गया है।


इनमें दशहरा उत्सव समिति जशपुर को  700000.00
दशहरा उत्सव समिति आरा 166660.00

 दशहरा उत्सव समिति केराडीह 166680.00

 दशहरा उत्सव समिति हर्राडीपा 166660.00

 मेडिकल एसोसिएशन के द्वारा महिषासुर झांकी का दशहरा उत्सव में प्रदर्शन किया गया है। जनसहयोग से।

 जशपुर गायत्री परिवार के द्वारा शंखनाद का कार्यक्रम किया गया।

 खनिज व्यवसायियों के द्वारा आपसी सहयोग से शिव गर्जना का कार्यक्रम दशहरा उत्सव में करवाया गया हैं।

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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन हेतु विशेष रूप से हैं प्रयासरत

जशपुरनगर, 08 अक्टूबर 2025/ छत्तीसगढ़ जनजातीय कला, संस्कृति और परंपराओं से परिपूर्ण राज्य है। यहां की आदिवासी संस्कृति, लोक नृत्य, लोकगीत और पारंपरिक पर्व न केवल देश में, बल्कि विदेशों में भी प्रसिद्ध हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन हेतु निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी में पूरे राज्य में भव्य करमा महोत्सव 2025 का आयोजन किया जा रहा है। करीब डेढ़ माह तक चलने वाला यह कार्यक्रम 04 चरणों में आयोजित होगी। ग्राम स्तर पर इसकी शुरूआत 01 अक्टूबर से हो चुकी है। समापन राज्य स्तर पर 15 नवंबर को होगा। इसमें राज्य के अनुसूचित क्षेत्र, माडा पाकेट क्षेत्र एवं विशेष रूप से सरगुजा एवं बिलासपुर संभाग के ग्राम शामिल होंगे।

*चार चरणों में आयोजित होगी करमा महोत्सव, बिखरेगी सांस्कृतिक छटा* 

करमा महोत्सव ग्राम पंचायत स्तर, विकासखंड, जिला और राज्य स्तर परं आयोजित की जाएगी। ग्राम स्तर पर 01 अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक, विकासखंड स्तर पर 16 से 31 अक्टूबर तक, जिला स्तर पर 01 नवंबर से 07 नवंबर तक और राज्य स्तर पर 08 नवंबर से 15 नंवबर तक मनाया जाएगा। करमा महोत्सव में करमा नृत्य, करमा गीत, जनजातीय लोक गायकों का प्रतिनिधित्व एवं जनजातीय समुदायों में प्रचलित परम्परागत वाद्य यंत्रों का प्रदर्शन किया जाएगा। विकासखण्डों के अंतर्गत आने वाले चयनित ग्राम पंचायत में करमा त्यौहार कार्यकम आयोजन प्रति ग्राम 02 हजार रूपए के मान से तथा विकास खंड स्तरीय कार्यक्रम हेतु प्रति वि.ख. 01 लाख तथा जिला स्तर में कार्यक्रम हेतु राशि 5  लाख रूपए तथा राज्य स्तरीय कार्यक्रम हेतु क्षेत्र एवं बजट उपलब्धता के आधार पर उपलब्ध करायी जायेगी। विकासखण्ड स्तर पर चयनित 02 करम नर्तक दलों को चिन्हांकित करते हुए जिलों में कार्यक्रम के प्रस्तुतीकरण हेतु भेजा जाएगा। जिला स्तर से चयनित 01 करम नर्तक दलों को राज्य स्तर में प्रस्तुतीकरण हेतु भेजा जायेगा।

*राज्य स्तर पर प्रथम आने वाले करम नर्तक दल को मिलेंगे 02 लाख रूपए की पुरस्कार राशि*

जिला स्तर पर आयोजित जनजातीय करम महोत्सव में प्रथम आने वाले को 50 हजार द्वितीय को 25 हजार एवं तृतीय आने वाले दल को 15 हजार रूपए की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त जिला स्तरीय समिति द्वारा अनुशंसित नर्तक दल को 10,000 रूपए के मान से सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। इसी तरह राज्य स्तर पर आयोजित जनजातीय करम महोत्सव में प्रथम आने वाले दल को 02 लाख रूपए, द्वितीय को 01 लाख रूपए एवं तृतीय आने वाले दल को 50 हजार रूपए की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त राज्य स्तरीय समिति द्वारा अनुशंसित नर्तक दल को 25 हजार रूपए के मान से सांत्वना पुरस्कार भी प्रदान किया जाएगा।

    करम महोत्सव 2025 का आयोजन संचालक, आदिम जाति अनुसंधान तथा प्रशिक्षण संस्थाना नवा रायपुर के समन्वय एवं मार्गदर्शन में आयोजित किया जाएगा। मुख्य कार्यक्रम के साथ-साथ विभिन्न चरणों में जनजातीय लोक गायकों का प्रतिनिधित्व एवं जनजातीय समुदायों में प्रचलित परम्परागत वाद्य यंत्रों आदि की प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जाएगा।
प्रत्येक ग्राम की करम नृत्य दल का चयन ग्राम स्तर पर किया जाएगा। प्रत्येक ग्राम पंचायत केवल एक ही दल को विकासखण्ड स्तर के महोत्सव के लिए चयनित करेंगें। विकासखण्ड मुख्यालय में होने वाले प्रदर्शन के आधार पर प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले करम नृत्य दल जिला स्तर में आयोजित होने वाले महोत्सव में अपनी प्रस्तुतीकरण देंगें। जिला स्तर के प्रस्तुतीकरण में अपने जिले से प्रथम स्थान पाने वाला दल प्रदेश स्तरीय नृत्य महोत्सव में अपना प्रस्तुतीकरण देंगें। सरगुजा संभाग अंतर्गत जिले सरगुजा, जशपुर, बलरामपुर, सूरजपुर, कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और बिलासपुर संभाग अंतर्गत बिलासपुर, कोरबा, रायगढ जिले में होगा।
  जिला एवं राज्य स्तर में प्रदर्शन करने वाली प्रत्येक करम नृत्य दल को प्रदर्शन हेतु अधिकतम 15 मिनट की समय-सीमा निर्धारित है। राज्य स्तर पर प्रदर्शन करने वाले प्रत्येक करम नृत्य दल अपने पारंपरिक वेशभूषा एवं वाद्ययंत्रों के साथ प्रस्तुतीकरण करेंगें। करम महोत्सव आयोजन में सम्मिलित होने वाले जिले एवं प्रदेश स्तर के प्रतिभागी महिला एवं पुरुषों के लिए परिवहन, भोजन और आवास की समूचित व्यवस्था की जाएगी। मुख्य कार्यकम के साथ-साथ विभिन्न चरणों में जनजाति लोक गायकों का प्रतिनिधित्व एवं जनजाति समुदायों में प्रचलित परम्परागत वाद्ययंत्रों आदि की प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जाएगा।

*करम विशेष प्रकार का पूजनीय और मनोकामना पूर्ण करने वाला वृक्ष*

करमा महोत्सव मनाए जाने का उद्देश्य जनजातीय समुदायों द्वारा मनाये जाने वाले त्यौहारों में करम उत्सव एक महत्वपूर्ण उत्सव है। इसके साथ ही सेंदों दो नृत्य एवं अन्य स्थानीय नृत्यों को भी महोत्सव के माध्यम से जनजातीय संस्कृति एव परम्परा को संरक्षित करना तथा मूल स्वरूप में आगामी पीढी को हस्तांतरण तथा सांस्कृतिक परम्पराओं को अभिलेख करना है। करम अर्थात विशेष प्रकार का पूजनीय और मनोकामना पूर्ण करने वाला वृक्ष माना जाता है। करमा डाल को करम राजा, करम सेनी के नाम से पुकारा जाता है। करम राजा अर्थात् देवता एवं करम सेनी अर्थात् देवी। सरगुजा संभाग के सभी जिलों में देवता के रूप में तथा जिला रायगढ में देवी के रूप में करम सेनी की सेवा की जाती है। इस त्यौहार के माध्यम से जनजातीय संस्कृति, उनके पारंपरिक रीति-रिवाज और कला संस्कृति का बढावा देना और संरक्षित करना है। राज्य में करम उत्सव को चार भिन्न-भिन्न उद्देश्यों के साथ अगस्त सितम्बर माह (भादो) से अक्टूबर- नवम्बर माह (कार्तिक) तक संपूर्ण सरगुजा संभाग के जिले एवं रायगढ, महासमुंद, कोरबा बिलासपुर एवं गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिलों में स्थानीय जनजातीय समूहों के द्वारा हर्षाेल्लास के साथ मनाया जाता है।

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वन विभाग के सन्ना परिक्षेत्र से हटाये गये अवैध अतिक्रमण पर किया गया पौध रोपण 

जशपुर 8 अक्टूबर 25/ वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जशपुर वनमण्डल अन्तर्गत परिक्षेत्र सन्ना के कक्ष क्रमांक पी 99 रकबा 0.900 हे., वनखंड सारंगपाठ के तावापानी नामक स्थन पर श्री शंकर यादव वल्द साधूचरण, जाति, अहीर, साकिन जोकारी के द्वारा अवैध रूप से अतिक्रमण किया गया था। उक्त अतिक्रमण स्थान पर दिनांक 05.10.2025 को पौध रोपण कर अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। पौध रोपण कार्य उपरांत समस्त ग्रामीणों द्वारा संकल्प लिया गया कि उपरोक्त अतिक्रमण स्थल में लगे पौधों की सुरक्षा एवं देखभाल सभी के आपसी सहयोग से किया जायेगा। यदि लगाये गये पौधों को अभियुक्त द्वारा नुकसान पहुंचाया जाता है तो उसे विरूद्ध अपराध प्रकरण दर्ज कर सख्त कार्यवाही की जावेगी।

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जशपुर वनमण्डल में मनाया जा रहा  वन्यजीव संरक्षण सप्ताह...75 स्कूलों में 8 हजार से अधिक विघार्थियों को हाथी के व्यवहार और गतिविधियों की दी गई जानकारी 

 

जशपुर 8 अक्टूबर 25/ प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी  02 अक्टूबर से अक्टूबर 2025 तक वन्यप्राणी संरक्षण सप्ताह का आयोजन जशपुर वनमण्डल के समस्त परिक्षेत्रों में किया जा रहा है। इसी परिपेक्ष्य में इस वर्ष 2025 में वन्यजीव सप्ताह मनाये जाने हेतु ‘‘मानव-पशु सह अस्तित्व’’ विषय चुना गया है। साथ ही वन्यजीव सप्ताह के दौरान मानव-हाथी संघर्ष को ध्यान में रखते हुए जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है इसी तारतम्य में हाथी मानव द्वंद को न्यूनतम करने उद्देश्य से जशपुर वनमण्डल द्वारा गजरथ यात्रा 2025 का शुभारंभ किया गया है।

  गजरथ यात्रा फरसाबहार एवं कुनकुरी तथा बगीचा विकासखण्ड अन्तर्गत आने वाले 75 स्कूलों में पहुंचकर हाथी के व्यवहार एवं गतिविधि की जानकारी लगभग 8205 छात्र/छात्राओं को अब तक दिया जा चुका है और वर्तमान में पत्थलगांव विकासखंड में निरंतर जागरूकता कार्यक्रम किया जा रहा है।

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कलेक्टर ने कहा भोजन की गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं....भोजन का ठेका लेने हेतू फर्जी अनुभव प्रमाण जमा करने वाले समूह पर कार्रवाई करने के दिए निर्देश 

जशपुर, 8 अक्टूबर 2025/कलेक्टर  श्री रोहित व्यास ने मंगलवार को
 कलेक्टोरेट सभाकक्ष में साप्ताहिक समय सीमा की बैठक ली उन्होंने मुख्यमंत्री जनदर्शन , मुख्यमंत्री की घोषणा और कलेक्टर जनदर्शन के आवेदनों का गंभीरता से निराकरण करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी के घोषणा के तहत स्वीकृति कार्यों को समय सीमा में पूर्ण करें इसके साथ ही गुणवत्ता का भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं।
 
समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी से जिला अस्पताल में मरीजों को दी जा रही भोजन की गुणवत्ता की जानकारी ली।
उन्होंने कहा कि जिला अस्पताल में जिस अधि श्री स्व सहायता समूह द्वारा भोजन का ठेका दिया गया है। उसकी शिकायत प्राप्त हुई और शिकायत में समूह द्वारा गलत अनुभव प्रमाण पत्र बनाकर ठेका प्राप्त किया गया है। जिस पर कलेक्टर ने गहरी नाराजगी व्यक्त की और अधि श्री स्व सहायता समूह पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि भोजन की गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

कलेक्टर ने अधिकारियो को निर्देश देते हुए कहा कि लम्बे समय से अनुपस्थित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करके विभागीय जांच के माध्यम से शासकीय सेवा से पृथक करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का लाभ हितग्राहियों को देने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि बिजली बिल के बोझ से मुक्ति एवं पर्यावरण संरक्षण संवर्धन के लिए इस योजना का लाभ अधिक से अधिक उठाएं योजना के तहत उपभोक्ताओं को आकर्षक सब्सिडी का प्रावधान किया गया है।
केन्द्र सरकार द्वारा एक किलोवाट सोलर सिस्टम पर 30 हजार रुपए और दो किलोवाट पर 60 हजार की सब्सिडी इसी प्रकार तीन किलोवाट से दस किलोवाट तक के संयंत्र पर अधिकतम 78  हजार रुपए की सब्सिडी दी जा रही है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ शासन ने भी उपभोक्ताओं को अतिरिक्त 30 हजार रुपए की सब्सिडी देने का निर्णय लिया गया है।

कलेक्टर ने धरती आबा योजनान्तर्गत चलाये जा रहे आदि कर्मयोगी अभियान अंतर्गत संचालित विशेष कार्यक्रम के तहत विज़न 2030 के अंतर्गत ग्राम के विकास के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर योजना का निर्माण जल्द से जल्द पूर्ण कराने एवं सभी नोडल अधिकारियों को  निर्देश दिए। उन्होंने पीएम जनमन योजनांतर्गत कार्यों की समीक्षा करते हुए सभी योजनाओं का लाभ सभी हितग्राहियों तक पहुंचाना सुनिश्चित करने को कहा। 
          उन्होंने अधिकारियों को सभी विभागीय कार्यों को केवल ई-आफिस में माध्यम से निष्पादित करने हेतु निर्देश दिए। इसके साथ ही सभी विभागों का जीएसटी रिटर्न फाइल करने एवं सभी कर्मचारियों का ई-केवायसी पूर्ण करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने छोटे बच्चों के स्वास्थ्य की उचित देखभाल के लिए बनाए गए एनआरसी केंद्रों में लगातार बच्चों को सुविधा उपलब्ध कराने को कहा।
 इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार, अपर कलेक्टर प्रदीप कुमार साहू सहित सभी एसडीएम, डिप्टी कलेक्टर एवं विभागीय अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे।

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कुतुल से नीलांगुर महाराष्ट्र बॉर्डर तक एनएच-130-डी का होगा निर्माण

रायपुर, 9 अक्टूबर 2026/ बस्तर अंचल को महाराष्ट्र से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 130-डी के निर्माण को नई गति मिली है। छत्तीसगढ़ शासन ने कुतुल से नीलांगुर (महाराष्ट्र सीमा) तक 21.5 किलोमीटर हिस्से के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है। इस सड़क के निर्माण के लिए न्यूनतम टेंडर देने वाले ठेकेदार से अनुबंध की प्रक्रिया शर्तों सहित पूरी करने के निर्देश लोक निर्माण विभाग मंत्रालय द्वारा प्रमुख अभियंता, राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र रायपुर को दिए गए हैं। कुल तीन खंडों में निर्मित होने वाले 21.5 किलोमीटर सड़क के निर्माण हेतु लगभग 152 करोड़ रुपए न्यूनतम टेंडर दर प्राप्त हुई है, जिसे छत्तीसगढ़ शासन ने मंजूरी प्रदान कर दी है।

यह उल्लेखनीय है कि कुतुल, नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में स्थित है और कुतुल से महाराष्ट्र सीमा पर स्थित नीलांगुर की दूरी 21.5 किलोमीटर है। यह नेशनल हाईवे 130-डी का हिस्सा है। इस सड़क का निर्माण टू-लेन पेव्ड शोल्डर सहित किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि एनएच-130डी राष्ट्रीय राजमार्ग है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 195 किलोमीटर है। यह एनएच-30 का शाखा मार्ग (स्पर रूट) है। यह कोण्डागांव से शुरू होकर नारायणपुर, कुतुल होते हुए नीलांगुर (महाराष्ट्र सीमा) तक जाता है। आगे महाराष्ट्र में यह बिंगुंडा, लहरे, धोदराज, भमरगढ़, हेमा, लकासा होते हुए आलापल्ली तक पहुँचता है, जहाँ यह एनएच-353डी से जुड़ जाता है। इस मार्ग के विकसित होने से बस्तर क्षेत्र सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जुड़ जाएगा और व्यापार, पर्यटन एवं सुरक्षा को बड़ी मजबूती प्राप्त होगी।

नेशनल हाईवे 130-डी का कोण्डागांव से नारायणपुर तक का लगभग 50 किमी हिस्सा निर्माणाधीन है। नारायणपुर से कुतुल की दूरी 50 किमी है और वहाँ से महाराष्ट्र सीमा स्थित नीलांगुर तक 21.5 किमी की दूरी है। इस राष्ट्रीय राजमार्ग की कुल लंबाई 195 किमी है, जिसमें से लगभग 122 किमी का हिस्सा कोण्डागांव-नारायणपुर से कुतुल होते हुए नीलांगुर तक छत्तीसगढ़ राज्य में आता है। इस सड़क के बन जाने से बस्तर अंचल को महाराष्ट्र से सीधा और मजबूत सड़क संपर्क मिलेगा तथा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित एवं सुगम यातायात सुविधा सुलभ हो सकेगी।

 प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के सहयोग से इस नेशनल हाईवे के अबूझमाड़ इलाके में स्थित हिस्से के लिए फॉरेस्ट क्लियरेंस और निर्माण की अनुमति प्राप्त हुई, जिससे इस महत्वाकांक्षी परियोजना के निर्माण का रास्ता खुल गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग 130-डी केवल सड़क नहीं बल्कि बस्तर अंचल की प्रगति का मार्ग है। हमारी सरकार ने इस परियोजना को तेजी देने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। इस सड़क से बस्तर के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। यह सड़क न केवल छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र को जोड़ेगी, बल्कि बस्तर अंचल के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में भी अहम भूमिका निभाएगी।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की गति तेज करने के लिए यह परियोजना मील का पत्थर साबित होगी।

 - मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

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बीजापुर के 32 पूर्व माओवादियों ने सीखा कुक्कुटपालन और बकरीपालन का गुर...समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए शासन की अभिनव पुनर्वास नीति से मिल रहा लाभ

 रायपुर, 08 अक्टूबर 2025/ माओवाद का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटे बीजापुर जिले के 32 आत्मसमर्पित माओवादियों ने अब विकास और स्वरोजगार की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। इन सभी ने जगदलपुर स्थित क्षेत्रीय स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान में एक महीने का कुक्कुटपालन और बकरीपालन का विशेष प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से पूर्व नक्सलियों ने न केवल पशुपालन के वैज्ञानिक तरीके सीखे, बल्कि एक सफल उद्यमी बनने की बारीकियों को भी जाना। एक माह की गहन ट्रेनिंग में आत्मसमर्पित माओवादियों को कुक्कुटपालन और बकरीपालन से संबंधित हर महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। यहां उन्होंने उन्नत नस्लों का चयन, चारा प्रबंधन और संतुलित आहार की जानकारी, टीकाकरण, रोगों की पहचान और उपचार के तरीके के साथ सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, ऋण प्राप्त करने और अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की रणनीति के संबंध में प्रशिक्षण लिया। 
          प्रशिक्षण लेने वाले एक आत्मसमर्पित माओवादी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि जंगल में जीवन बहुत मुश्किल और खाली था। प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल पर आत्मसमर्पित माओवादियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए जो पुनर्वास नीति बनाई गई है, वह एक अभिनव प्रयास है। जिससे अब हम अपने हाथों से काम करके परिवार के लिए एक स्थिर और सम्मानजनक जीवन-यापन कर सकते हैं। सरकार के इस कदम से हमें बहुत हिम्मत मिली है।

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नारायणपुर में 16 माओवादी ने आत्मसमर्पण कियाआत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति और ‘पूना मारगेम : पुनर्वास से पुनर्जीवन’ अभियान से बस्तर में लौटी शांति की उम्मीद

रायपुर 9 अक्टूबर 2025// मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि बस्तर बदल रहा है — अब यहां बंदूक और बारूद का धुआं नहीं, बल्कि विकास और विश्वास की बयार बह रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की “आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025” और “पूना मारगेम : पुनर्वास से पुनर्जीवन” जैसे मानवीय अभियानों ने उन लोगों के दिलों में आशा का दीप जलाया है, जो कभी भटककर लाल आतंक के रास्ते पर चले गए थे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज नारायणपुर जिले में 16 माओवादी कैडरों ने हिंसा का मार्ग त्यागकर मुख्यधारा में लौटने का साहसिक निर्णय लिया है। आत्मसमर्पण करने वाले इन कैडरों पर कुल ₹48 लाख का इनाम घोषित था। उन्होंने अब शांति, शिक्षा और सम्मानपूर्ण जीवन की नई राह चुनी है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि  राज्य सरकार की नीतियों पर जन-जन का विश्वास बढ़ा है और सुरक्षा बलों की दृढ़ता ने विकास और विश्वास का माहौल स्थापित किया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पिछले 20 महीनों में कुल 1,837 माओवादी हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हो चुके हैं। यह परिवर्तन इस बात का साक्षी है कि “डबल इंजन सरकार” की नीतियां न केवल शांति ला रही हैं, बल्कि बस्तर को एक नए युग की ओर अग्रसर कर रही हैं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल नक्सलवाद को समाप्त करना नहीं, बल्कि बस्तर के हर गांव तक विकास, शिक्षा और आत्मनिर्भरता की रोशनी पहुँचाना है।

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मुख्यमंत्री राज्य स्तरीय पारंपरिक वैद्य सम्मेलन में हुए शामिल...पारंपरिक चिकित्सा पद्धति हमारी सांस्कृतिक पहचान और जनसेवा की धरोहर है: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

रायपुर 8 अक्टूबर 2025// मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय परंपरागत वैद्य सम्मेलन में शामिल हुए।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार सभी पंजीकृत वैद्यों को प्रशिक्षण देकर उन्हें पंजीयन प्रमाण पत्र प्रदान करेगी, ताकि दस्तावेज़ों के अभाव में उन्हें किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े।

सम्मेलन में मुख्यमंत्री का स्वागत प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए वैद्यों ने पारंपरिक जड़ी-बूटी की माला पहनाकर किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर औषधीय पौधों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने पद्मश्री श्री हेमचंद मांझी का उल्लेख करते हुए कहा कि दूरस्थ क्षेत्र में रहकर भी मांझी जी गंभीर बीमारी का उपचार अपने पारंपरिक ज्ञान से करते हैं। अमेरिका से भी लोग उनके पास उपचार के लिए आते हैं — यह हम सबके लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि वैद्य परंपरा हमारे देश की प्राचीन और समृद्ध चिकित्सा पद्धति है। भारत में लगभग 60 से 70 हजार वैद्य हैं, जिनमें से लगभग 1500 वैद्य छत्तीसगढ़ में सक्रिय हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी मान्यता दी है। छत्तीसगढ़ पूरे देश में एक हर्बल स्टेट के रूप में पहचान बना चुका है। अकेले छत्तीसगढ़ में ही डेढ़ हजार से अधिक औषधीय पौधे पाए जाते हैं। दुर्ग जिले के पाटन स्थित जामगांव में औषधीय पौधों से अर्क निकालने के लिए एक कारखाना स्थापित किया गया है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने इस दिशा में कार्यों को गति देने के लिए पृथक आयुष मंत्रालय का गठन किया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में उच्च गुणवत्ता वाली जड़ी-बूटियां उपलब्ध हैं। राज्य सरकार क्लस्टर आधारित मॉडल विकसित कर रही है, ताकि स्थानीयता के आधार पर उपलब्ध जड़ी-बूटियों का अधिकतम उपयोग किया जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य स्थानीय वैद्यों को रोजगार से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इसके साथ ही औषधीय पौधों और वृक्षों के संरक्षण की दिशा में भी ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा कि वैद्यों का समाज में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने पद्मश्री श्री हेमचंद मांझी की तुलना रामायण काल के सुषेन वैद्य से करते हुए कहा कि जिस प्रकार सुषेन वैद्य ने लक्ष्मण जी का दुर्लभ उपचार किया था, उसी प्रकार छत्तीसगढ़ में श्री मांझी दुर्लभ से दुर्लभ रोगों का सफल उपचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि परंपरागत वैद्यों का योगदान न केवल मानव स्वास्थ्य बल्कि पशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी अमूल्य है।

छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने बताया कि इस सम्मेलन में 1300 से अधिक वैद्यों का पंजीयन हुआ है। उन्होंने कहा कि बोर्ड “नवरत्न योजना” के तहत प्रदेशभर में हर्रा, बहेड़ा, आंवला, मुनगा जैसे नौ प्रकार के औषधीय गुणों वाले पौधे लगाने की पहल करेगा।

पद्मश्री श्री हेमचंद मांझी ने एक वैद्य के रूप में अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वैद्यों के पास किसी भी रोग को जड़ से समाप्त करने की कला होती है। उन्होंने कहा कि सही जानकारी और औषधियों के संयोजन से वैद्य कई प्रकार के कैंसर का भी उपचार कर सकते हैं।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री व्ही. श्रीनिवास राव ने कहा कि राज्य के उन आंतरिक क्षेत्रों में, जहां आधुनिक चिकित्सा सेवाएं नहीं पहुंच पातीं, वहां परंपरागत वैद्य अपने पूर्वजों के ज्ञान के माध्यम से लोगों की सेवा करते हैं। इन वैद्यों को सशक्त बनाना और संरक्षण देना हम सभी की जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री की उपस्थिति में सम्मेलन में प्रदेशभर से आए वैद्यों ने अपने कर्तव्य के प्रति सत्यनिष्ठा और गोपनीयता की शपथ ली। इस अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा 25 वैद्यों को कच्ची औषधीय पिसाई मशीनें प्रदान की गईं। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा प्रकाशित डॉ. देवयानी शर्मा की पुस्तक का विमोचन भी किया गया। इस पुस्तक में दुर्ग वन वृत्त के परंपरागत वैद्यों द्वारा संरक्षित पारंपरिक उपचार पद्धतियों और औषधीय पौधों का संकलन किया गया है।

सम्मेलन को छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के सीईओ श्री जे. ए. सी. एस. राव ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड के अध्यक्ष श्री राकेश चतुर्वेदी, आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति श्री प्रदीप कुमार पात्रा, प्रदेशभर से आए वैद्य गण तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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भाजपा महिला मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष विभा अवस्थी का जशपुर में भव्य स्वागत — महिला सशक्तिकरण और संगठन मजबूती पर दिया बल

जशपुर 08 अक्टूबर 2025 : भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेशाध्यक्ष श्रीमती विभा अवस्थी के प्रथम जशपुर आगमन पर कार्यकर्ताओं ने किया जोरदार स्वागत, जिला कार्यालय में हुई बैठक में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर।

भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की नवनियुक्त प्रदेशाध्यक्ष श्रीमती विभा अवस्थी का बुधवार को जशपुर आगमन पर महिला मोर्चा कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी से स्वागत किया। फूलमालाओं, नारों और ढोल-नगाड़ों के बीच उनका स्वागत करते हुए कार्यकर्ताओं ने पूरे जिले में उत्साह का वातावरण बना दिया।

स्वागत कार्यक्रम के पश्चात जिला भाजपा कार्यालय जशपुर में एक जिला स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रदेशाध्यक्ष श्रीमती विभा अवस्थी, पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय, जशपुर विधायक श्रीमती रायमुनी भगत, तथा महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष श्रीमती ममता कश्यप ने उपस्थित कार्यकर्ताओं को संबोधित किया।

प्रदेशाध्यक्ष श्रीमती विभा अवस्थी ने अपने उद्बोधन में कहा “भाजपा महिला मोर्चा आज देशभर में महिलाओं की आवाज़ बन चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश नेतृत्व के मार्गदर्शन में हमें यह सुनिश्चित करना है कि हर महिला राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बने। जशपुर की महिलाएं हमेशा संगठन की रीढ़ रही हैं, और अब हमारा लक्ष्य है कि बूथ स्तर तक महिला कार्यकर्ता सक्रिय हों। हमें समाज के हर वर्ग तक पहुँचकर भाजपा की नीतियों और योजनाओं को बताना है। महिला मोर्चा केवल संगठन नहीं, बल्कि सेवा और संकल्प की भावना का प्रतीक है।”

उन्होंने आगे कहा कि आगामी चुनावों में महिला कार्यकर्ताओं की भूमिका निर्णायक होगी और हर जिले में प्रशिक्षण शिविरों तथा जनसंपर्क अभियानों को गति दी जाएगी।

पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय ने कहा “महिलाएं अब केवल सहभागी नहीं, बल्कि नेतृत्वकर्ता बन चुकी हैं। भाजपा ने हमेशा महिला शक्ति को सम्मान दिया है। हमें अपने बूथों को सशक्त करना है और हर घर तक सरकार की योजनाएं पहुँचानी हैं। प्रदेशाध्यक्ष विभा अवस्थी जी के नेतृत्व में महिला मोर्चा नई ऊँचाइयाँ प्राप्त करेगा।”

उन्होंने कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे गांव-गांव जाकर महिलाओं को आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित करें।

जशपुर विधायक श्रीमती रायमुनी भगत ने कहा “हमारे जिले की महिलाएं मेहनती, समर्पित और सजग हैं। भाजपा संगठन ने हमेशा हमारे प्रयासों को सराहा है। अब समय है कि हम इस विश्वास को और मजबूत करें। महिला मोर्चा की हर कार्यकर्ता समाज में परिवर्तन की वाहक बने।”

उन्होंने कहा कि मातृशक्ति की एकजुटता ही भाजपा की सबसे बड़ी ताकत है।

महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष श्रीमती ममता कश्यप ने कहा  “हमारे लिए गर्व का विषय है कि प्रदेशाध्यक्ष विभा अवस्थी जी का प्रथम जशपुर आगमन हुआ है। यह हम सबके लिए प्रेरणादायी क्षण है। महिला मोर्चा जशपुर पूरी निष्ठा और एकजुटता के साथ संगठन को और सशक्त बनाएगा।”

उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं को संगठनात्मक अनुशासन, सेवा कार्यों और जनसंपर्क में सक्रिय रहने का आह्वान किया।

बैठक के अंत में कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में “सेवा ही संगठन” के संकल्प को दोहराया और महिला मोर्चा को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का प्रण लिया।

उक्त जानकारी देते हुए जिला भाजपा मीडिया प्रभारी फैज़ान सरवर खान ने बताया कि बैठक में मुख्य रूप से पूर्व जिलाध्यक्ष सुनील गुप्ता, जिला महामंत्री  मुकेश शर्मा, गणेश जैन, अनिता सिंह, शारदा प्रधान, उमा देवी, कमला निराला, रीना बरला, कंचन बैरागी, प्रभा शर्मा, प्रियंका गिरी सहित सैकड़ों की संख्या में महिला मोर्चा के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री श्री साय ने उच्च शिक्षा विभाग में प्रयोगशाला तकनीशियन के पद पर चयनित 233 अभ्यर्थियों को प्रदान किए नियुक्ति पत्र

रायपुर 8 अक्टूबर 2025// मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के सभागार में उच्च शिक्षा विभाग अंतर्गत प्रयोगशाला तकनीशियन के पद पर चयनित 233 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पारदर्शी और विश्वसनीय भर्ती प्रक्रियाओं से प्रदेश के युवाओं का भविष्य सुरक्षित हुआ है। उन्होंने बताया कि विगत 20 महीनों में विभिन्न विभागों में 10 हजार से अधिक सरकारी नौकरियां प्रदान की जा चुकी हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को पुलिस विभाग, विद्युत विभाग, सहकारिता विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, आदिम जाति विकास विभाग सहित कई अन्य विभागों में नियुक्तियाँ दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में उच्च शिक्षा विभाग में 700 सहायक प्राध्यापकों और स्कूल शिक्षा विभाग में 5000 शिक्षकों की भर्ती की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि आज का यह अवसर ऐतिहासिक और अत्यंत हर्ष का विषय है — पहली बार इतनी बड़ी संख्या में नियुक्ति पत्र एक साथ प्रदान किए जा रहे हैं। यह निश्चित रूप से विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में एक मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने सभी नवनियुक्त प्रयोगशाला तकनीशियनों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए अपने कर्तव्यों का शत-प्रतिशत निष्ठा और ईमानदारी के साथ निर्वहन करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने नई औद्योगिक नीति को अपनाया है, जिसके माध्यम से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस नई उद्योग नीति के तहत अब तक लगभग ₹7 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं, और इनमें से कई प्रस्तावों के अंतर्गत औद्योगिक इकाइयों की स्थापना का कार्य प्रारंभ भी हो गया है। इन उद्योगों से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से राज्य की जनता को व्यापक लाभ प्राप्त होगा।

उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में पिछले 20 महीनों में छत्तीसगढ़ के प्रत्येक क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन हुए हैं। पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ प्रत्येक विभाग की भर्ती प्रक्रिया पूर्ण की जा रही है। उच्च शिक्षा मंत्री श्री वर्मा ने नवचयनित प्रयोगशाला तकनीशियनों को बधाई देते हुए कहा कि आप सभी निश्चित रूप से अपने महाविद्यालयों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में योगदान देंगे। उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों की भी सराहना की और कहा कि मात्र तीन माह की अवधि में बिना किसी विवाद के तीन चरणों में संपूर्ण काउंसलिंग प्रक्रिया को पारदर्शी एवं निष्पक्ष रूप से पूर्ण करना अत्यंत सराहनीय उपलब्धि है।

इस अवसर पर तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री श्री खुशवंत साहेब, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद शुक्ला, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन सहित विभागीय अधिकारी एवं नवनियुक्त प्रयोगशाला तकनीशियन बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जनजातीय गौरव दिवस पर आयोजित कार्यशाला में हुए शामिल

रायपुर 8 अक्टूबर 2025// मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर स्थित सिविल लाइन के कन्वेंशन हॉल में आयोजित जनजातीय गौरव दिवस कार्यशाला में शामिल हुए और इसका शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गत वर्ष भी इसी सभागार में जनजातीय गौरव दिवस की कार्यशाला सफलतापूर्वक आयोजित हुई थी, जिसे पूरे प्रदेश में उत्साहपूर्वक मनाया गया। जशपुर में आयोजित 10 किलोमीटर लंबी पदयात्रा में केंद्रीय मंत्री श्री मनसुख मांडविया शामिल हुए थे, जिसमें जनजातीय समाज की पारंपरिक वेशभूषा, व्यंजन, आभूषण और संस्कृति का आकर्षक प्रदर्शन किया गया था। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा था कि ऐसे आयोजन देशभर में प्रतिवर्ष आयोजित किए जाने चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर जनजातीय गौरव दिवस मनाने का निर्णय लेकर जनजातीय नायकों की गौरवशाली विरासत को सम्मानित किया है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने पहली बार आदिवासी कल्याण मंत्रालय का गठन कर जनजातीय समाज के सम्मान और उत्थान की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया था।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में पीएम जनमन योजना और प्रधानमंत्री धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में तीव्र गति से विकास कार्य हो रहे हैं। जनमन योजना के अंतर्गत प्रदेश में 2,500 किलोमीटर सड़कों का निर्माण और 32,000 प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ के 14 जनजातीय विद्रोहों और अमर शहीद वीर नारायण सिंह के जीवन पर आधारित ट्राइबल म्यूजियम का निर्माण किया गया है, जो आदिवासी इतिहास और गौरव की धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में हमारी सरकार की एक बड़ी पहल है। मुख्यमंत्री ने शिक्षाविदों और प्रबुद्धजनों से आग्रह किया कि जनजातीय गौरव और इतिहास को शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाए, ताकि नई पीढ़ी अपने पूर्वजों की समृद्ध विरासत से प्रेरणा ले सके।

उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने कहा कि यह कार्यशाला हमारे जनजातीय समाज की समृद्ध परंपराओं और इतिहास को रेखांकित करने के साथ-साथ आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए मील का पत्थर साबित होगी। इसका उद्देश्य जनजातीय समाज के उत्थान के लिए ठोस रणनीति बनाना तथा उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और रोजगार से जोड़ना है।

आदिम जाति विकास एवं कृषि मंत्री श्री राम विचार नेताम ने कहा कि इस कार्यशाला की रूपरेखा आप सभी प्रबुद्धजनों द्वारा तैयार की जाएगी और राज्य सरकार उसी दिशा में ठोस कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि गत वर्ष प्रदेश के लगभग सभी जिलों में जनजातीय गौरव दिवस का सफल आयोजन हुआ था, इस वर्ष इसे और अधिक प्रभावी और भव्य रूप से मनाने का प्रयास किया जाएगा।

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि पिछले वर्ष आयोजित जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम में 70,000 से अधिक लोगों ने भाग लिया था। इस आयोजन से यह संदेश पूरे देश में गया कि छत्तीसगढ़ ने जनजातीय समाज के उत्थान को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया है। हमारे महान जनजातीय नायकों की बदौलत हमें यह समृद्ध विरासत प्राप्त हुई है, जिसे सहेजकर रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।

अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के महामंत्री श्री योगेश बापट ने कहा कि जनजातीय समाज आत्मनिर्भर समाज है और उसके गौरव को पुनः स्थापित करना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जनजातीय समाज के उत्थान के लिए विशेष रूप से समर्पित हैं। उन्होंने आग्रह किया कि इस कार्यशाला के माध्यम से ऐसी ठोस योजनाएं तैयार की जाएं जो जनजातीय समाज के गौरव और आत्मसम्मान को और ऊंचा उठाने में सहायक बनें।

इस अवसर पर उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, आयुक्त आदिम जाति विकास विभाग डॉ. सारांश मित्तर, संचालक रोजगार एवं प्रशिक्षण श्री विजय दयाराम के., विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, अग्रणी महाविद्यालयों के प्राचार्य तथा विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री श्री साय से इसरो के वैज्ञानिकों ने की सौजन्य भेंट...इसरो की उपलब्धियाँ प्रत्येक भारतवासी के लिए गर्व का विषय

रायपुर 08 अक्टूबर 2025// मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में इसरो अहमदाबाद केंद्र के निदेशक डॉ. एन. एम. देसाई के नेतृत्व में अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य भेंट की।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय और वैज्ञानिकों के बीच इसरो की यात्रा में छत्तीसगढ़ की भागीदारी को बढ़ाने, राज्य के युवाओं के लिए नए अवसर सृजित करने, शासन के कामकाज में पारदर्शिता और दक्षता लाने के लिए इसरो की तकनीक के उपयोग तथा स्कूल–कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए इसरो द्वारा संचालित गतिविधियों पर विस्तारपूर्वक चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इसरो की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि भारत ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में जो ऊँचाइयाँ प्राप्त की हैं, वह प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार नवाचार और तकनीकी शिक्षा को प्रोत्साहित कर रही है, ताकि प्रदेश के युवा स्पेस साइंस के प्रति रुचि लेकर देश के अंतरिक्ष अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभा सकें।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इसरो द्वारा प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएँ, जिससे उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि इसरो की तकनीक का उपयोग कृषि, खनन नियंत्रण, भू-अतिक्रमण की निगरानी तथा धान खरीदी के दौरान अवैध गतिविधियों की पहचान जैसे कार्यों में प्रभावी रूप से किया जा सकता है।

इस अवसर पर इसरो अहमदाबाद केंद्र के निदेशक डॉ. एन. एम. देसाई ने मुख्यमंत्री को इसरो द्वारा संचालित विभिन्न परियोजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि युवाओं को अंतरिक्ष विज्ञान से जोड़ने के लिए इसरो कई अभिनव कार्यक्रम चला रहा है, जिन्हें छत्तीसगढ़ में भी विस्तारित किया जाएगा। इस दौरान प्रदेश में एक ‘स्पेस गैलरी’ की स्थापना को लेकर भी सकारात्मक चर्चा हुई।

डॉ. देसाई ने मुख्यमंत्री श्री साय को इसरो अहमदाबाद केंद्र के भ्रमण हेतु आमंत्रित किया और उन्हें इसरो द्वारा हाल ही में लॉन्च किए गए उपग्रहों तथा मिशन चंद्रयान की प्रतिकृतियाँ स्मृति स्वरूप भेंट कीं।

*इसरो के वैज्ञानिक भगवान मधेश्वर की तस्वीर देखकर हुए अभिभूत*

मुख्यमंत्री निवास में आयोजित  बैठक के दौरान इसरो के वैज्ञानिकों की नजर जब भगवान मधेश्वर की तस्वीर पर पड़ी, तो वे उसे देखकर अभिभूत हो गए। जिज्ञासावश उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से इसके बारे में जानकारी प्राप्त की।

मुख्यमंत्री ने बताया कि मधेश्वर पहाड़ जशपुर जिले में स्थित है, जहाँ भगवान शिव विशाल प्राकृतिक शिवलिंग स्वरूप में पूजे जाते हैं। स्थानीय लोग भगवान शिव के इस स्वरूप की अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा-अर्चना करते हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थल न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है। मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी वैज्ञानिकों को भगवान मधेश्वर के छायाचित्र भेंटस्वरूप प्रदान किए।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, राजस्व विभाग की सचिव श्रीमती रीना बाबा साहब कंगाले, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, संचालक रोजगार एवं प्रशिक्षण श्री विजय दयाराम के., संचालक भू-अभिलेख श्री विनीत नंदनवार, इसरो के ग्रुप डायरेक्टर डॉ. डी. के. पटेल, डॉ. दीपक कुमार सिंह, कलेक्टर श्री गौरव कुमार सिंह सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

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संतों के आशीर्वाद और जनसहयोग से छत्तीसगढ़ आगे बढ़ रहा है विकास और आस्था के मार्ग पर - मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

रायपुर 7 अक्टूबर 2025/छत्तीसगढ़ की पुण्यभूमि माता कौशल्या की जन्मस्थली होने के साथ-साथ प्रभु श्रीराम का ननिहाल भी है — यह हमारे लिए परम सौभाग्य और गर्व का विषय है। प्रभु श्रीराम ने अपने चौदह वर्षों के वनवास काल का अधिकांश समय इसी पावन छत्तीसगढ़ की धरती पर व्यतीत किया, जिससे यह भूमि भक्ति, त्याग और मर्यादा की दिव्यता से आलोकित हुई। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज बालोद जिले के डौंडीलोहारा विकासखंड के ग्राम बड़े जुंगेरा स्थित माँ कौशल्या धाम, जामड़ी पाटेश्वर आश्रम में आयोजित श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने संत श्री रामकृष्णदास महात्यागी एवं संत श्री रामजानकीदास महात्यागी के समाधि स्थल पहुँचकर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने दोनों संत महापुरुषों के राष्ट्र, समाज और अध्यात्म के प्रति योगदान को नमन करते हुए कहा कि उनके त्याग, तप और सेवा से छत्तीसगढ़ की यह भूमि आज भी आलोकित है। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बाबाजी तेजस्वी साधक और त्याग, सेवा व अध्यात्म के प्रतीक रहे हैं। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन लोककल्याण और मानवता की सेवा को समर्पित किया। 
उन्होंने कहा कि ऐसे संतों की प्रेरणा ही हमारे समाज की आत्मा और राज्य के सांस्कृतिक गौरव की आधारशिला है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भगवान श्रीराम के ननिहाल में आकार ले रहा यह दिव्य धाम छत्तीसगढ़ की आस्था, संस्कृति और गौरव का प्रतीक बनेगा। उन्होंने संत बालक दास महात्यागी जी से भेंट कर निर्माण कार्य की प्रगति की विस्तृत जानकारी ली।

इस अवसर पर कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, सांसद श्री भोजराज नाग, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

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धान खरीदी के लिए एग्रीस्टैक पोर्टल में किसान पंजीयन अनिवार्य : किसान 31 अक्टूबर तक करा सकेंगे पंजीयन

रायपुर 7 अक्टूबर 2025/ खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी हेतु किसानों का एग्रीस्टैक पोर्टल में पंजीयन अनिवार्य किया गया है। एग्रीस्टैक पोर्टल से संबंधित किसी भी जानकारी या सहायता के लिए टोल फ्री नंबर 1800-233-1030 पर संपर्क किया जा सकता है।

एग्रीस्टैक पोर्टल भारत सरकार द्वारा विकसित एक यूनिफाइड एग्रीकल्चर डेटाबेस है, जिसमें किसानों का भूमि एवं आधार लिंक्ड पंजीयन किया जाता है। पंजीकरण उपरांत किसानों को एक यूनिक फार्मर आईडी (Unique Farmer ID) प्राप्त होती है। यह आधार लिंक्ड डेटाबेस शासन की विभिन्न योजनाओं के लाभ केवल वास्तविक पात्र किसानों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के तहत किसानों को सीधे भुगतान किया जाता है। अतः शासन की मंशा है कि सभी पात्र किसान सुशासन एवं पारदर्शिता के साथ इस योजना का वास्तविक लाभ प्राप्त करें। एग्रीस्टैक में आधार-आधारित पंजीयन और ई-केवाईसी की व्यवस्था से संपूर्ण प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता, सटीकता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित होगा।

गत वर्ष राज्य के 25.49 लाख किसानों ने धान विक्रय किया था। वर्तमान वर्ष में अब तक 21.47 लाख किसानों ने एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीकरण कर लिया है। शेष किसान अपने निकटतम सहकारी समिति या निर्धारित केंद्र में जाकर 31 अक्टूबर 2025 तक अपना पंजीयन करा सकते हैं। इस संबंध में सभी समितियों और जिला कलेक्टरों को पूर्व में आवश्यक निर्देश जारी किए जा चुके हैं।

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि एग्रीस्टैक पोर्टल डिजिटल क्रांति की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा, जो छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी, सटीक और किसान हितैषी बनाएगा।

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष राज्य के 20 हजार ग्रामों में से 13 हजार 879 ग्रामों में डिजिटल क्रॉप सर्वे किया गया है। इस डिजिटल क्रॉप सर्वे और मैनुअल गिरदावरी की रिपोर्टों का 2 से 14 अक्टूबर 2025 तक ग्राम सभाओं में पठन किया जा रहा है। इसके लिए प्रत्येक पंचायत में मुनादी कर सूचना दी गई है और सर्वे सूची का पंचायत भवनों में प्रदर्शन (चस्पा) भी किया गया है।

इस कार्यवाही की सतत निगरानी जिला कलेक्टर, खाद्य अधिकारियों तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा की जा रही है। यह पहल “डिजिटल एग्रीकल्चर और गुड गवर्नेंस” की दिशा में राज्य का एक सशक्त और दूरदर्शी कदम है।

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छत्तीसगढ़ की बेटी, देश का गौरव — लखनी साहू को मिला “MY Bharat NSS राष्ट्रीय पुरस्कार

रायपुर 7 अक्टूबर 2025/छत्तीसगढ़ की माटी ने एक बार फिर पूरे देश में अपनी प्रतिभा का परचम लहराया है। कोरबा जिले की सुश्री लखनी साहू, ई. विश्वेश्वरैया इंजीनियरिंग कॉलेज की एनएसएस स्वयंसेविका ने अपने समर्पण, सेवा और कर्मनिष्ठा से प्रदेश का नाम रोशन किया है।

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें “MY Bharat NSS राष्ट्रीय पुरस्कार (2022-23)” से सम्मानित किया है। यह उपलब्धि न केवल लखनी साहू के अथक प्रयासों की पहचान है, बल्कि हर छत्तीसगढ़वासी के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस सम्मान पर लखनी साहू को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने समाजसेवा के क्षेत्र में अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के माध्यम से समाजहित में किए गए उनके योगदान ने यह सिद्ध किया है कि जब युवा संकल्प लेकर आगे बढ़ते हैं, तो परिवर्तन निश्चित होता है। उनकी यह उपलब्धि प्रदेश के युवाओं को देश सेवा और जनकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि राज्य सरकार युवाओं की ऊर्जा को रचनात्मक दिशा देकर उन्हें समाज निर्माण और राज्य के नवोदय में सहभागी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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