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राज्यस्तरीय पैरा दिव्यांग तैराकी प्रतियोगिता में जिले के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन कर तीन गोल्ड और दो सिल्वर मैडल किए हासिल

जशपुरनगर, 29 अक्टूबर 2025/ बिलासपुर में मंगलवार को आयोजित 12 वीं छत्तीसगढ़ राज्यस्तरीय पैरा दिव्यांग तैराकी प्रतियोगिता में जिले के तैराकों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन गोल्ड एवं दो सिल्वर मैडल प्राप्त कर जिले को गौरवान्वित किया है। प्रतियोगिता में तैराक सतेंद्र राम ने अपने प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया और तीन गोल्ड मैडल हासिल किए। 
    वहीं गोस्वामी पैंकरा ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर दो सिल्वर मैडल प्राप्त किए। सतेंद्र राम हैदराबाद में 15 अक्टूबर से 18 अक्टूबर 2025 तक आयोजित होने वाली राष्ट्रीय दिव्यांग तैराकी प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करेंगे।

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आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान फरसाबहार में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का स्वदेशी उपयोग को बढ़ावा देने का किया आग्रह

जशपुरनगर, 28 अक्टूबर 2025/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने मंगलवार को फरसाबहार में आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित कुनकुरी विधानसभा सम्मेलन में स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के प्रति जनमानस को प्रेरित किया।मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकल फिर वोकल केवल एक नारा नहीं, बल्कि भारत में निर्मित उत्पादों के उपयोग का दृढ़ संकल्प है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग से देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है, रोजगार के अवसर बढ़ते हैं, और देश की पूंजी देश में ही रहती है। व्यापारियों से उन्होंने आग्रह किया कि अधिक से अधिक स्वदेशी वस्तुओं का विक्रय करें। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। प्रधानमंत्री मोदी दिन-रात कार्य करते हुए भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को साकार कर रहे हैं।
   उन्होंने कहा कि आज का भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए सक्षम है। पाकिस्तान के दुस्साहस का जवाब सर्जिकल स्ट्राइक के रूप में दिया गया। अमेरिका द्वारा उच्च टैरिफ लगाए जाने पर भी आत्मनिर्भरता के पथ पर चलकर भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को दृढ़ बनाए रखा। मुख्यमंत्री ने बताया कि जीएसटी 2.0 लागू होने से वस्तुओं के मूल्य में गिरावट आई है, जिसका लाभ आम नागरिकों को मिल रहा है। वाहनों और घरेलू सामानों के दाम कम होने से किसानों और उपभोक्ताओं के बजट को राहत मिली है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने 22 माह में प्रधानमंत्री की अधिकांश गारंटियों को पूरा किया है। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए महतारी वंदन योजना के तहत 70 लाख महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपए की सहायता दी जा रही है। तेंदूपत्ता संग्राहकों के हित में प्रति मानक बोरा दर 5500 रुपए कर दी गई है। खाद्य एवं कृषि विकास की दिशा में 2800 करोड़ रुपए की सिंचाई परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करने हेतु मेडिकल कॉलेज, प्राकृतिक चिकित्सा एवं फिजियोथेरेपी केंद्र, शासकीय नर्सिंग कॉलेज तथा शासकीय फिजियोथेरेपी कॉलेज की स्थापना की जाएगी। गिनाबहार में 50 बिस्तर वाले मातृ-शिशु अस्पताल का निर्माण कार्य जारी है। रायपुर के सत्य साईं संजीवनी अस्पताल के सहयोग से जिले में मदर-चाइल्ड अस्पताल स्थापित किया जाएगा।
    मुख्यमंत्री ने बताया कि जशपुर जिले में लगभग 2000 करोड़ रुपए के विकासकार्यों की स्वीकृति दी गई है। सुशासन के लिए ई-ऑफिस प्रणाली लागू की गई है और सुशासन और अभिसरण विभाग के गठन से प्रशासनिक कार्यों में तेजी आई है। पीएससी की जांच सीबीआई के माध्यम से करवाई जा रही है तथा दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है। नई उद्योग नीति के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ में 7 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में नक्सलवाद समाप्ति की कगार पर है और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई है। इस अवसर पर सांसद श्री राधेश्याम राठिया ने कहा कि स्वदेशी एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वदेशी हथियारों के बल पर पाकिस्तान को जवाब दिया गया। उन्होंने लोगों से स्वदेशी उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की। विधायक श्रीमती गोमती साय ने कहा कि महात्मा गांधी के स्वदेशी संदेश को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी वास्तविक रूप दे रहे हैं। दीपावली के दौरान स्वदेशी वस्तुओं की रिकॉर्ड बिक्री इसका प्रमाण है। उन्होंने जन-जन तक जागरूकता पहुंचाने का आह्वान किया।

*मुख्यमंत्री ने की मंच से घोषणा*
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर तामामुड़ा सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 20 लाख की घोषणा की। इसके साथ ही बरहाटुकू से घोनघोषा‌ पहुंच मार्ग पर पुल निर्माण, पंडरीपानी परहाटोली में सामुदायिक भवन निर्माण, गारीघाट में मिनी स्टेडियम निर्माण, मुंडाडीह में 25 लाख की लागत के सामुदायिक भवन निर्माण, सुन्दरू में शिव मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य की घोषणा की। इसके अलावा उन्होंने कहा कि कोतेबीरा में कपाटद्वार तक लक्ष्मण झुला बना कर उसका विस्तार किया जाएगा। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने पंडरीपानी, बनगांव, फरसाबहार और लकराघरा के करमा नर्तक दलों को 25–25 हजार देने की घोषणा की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या विष्णुदेव साय, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, भाजपा प्रदेश कोषाध्यक्ष राम गर्ग, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगर पालिका जशपुर के उपाध्यक्ष श्री यश प्रताप सिंह जूदेव, पूर्व संसदीय सचिव श्री भरत साय, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष सुनील गुप्ता, पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष उपेंद्र यादव, भाजपा महामंत्री मुकेश शर्मा, मनीष अग्रवाल, जिला पंचायत सदस्य वेदप्रकाश भगत, श्रीमती दुलारी सिंह, श्रीमतीअनिता सिंह, कुनकुरी जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सुशीला साय, फरसाबहार जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती हेमंती भरत साय, दुलदुला जनपद पंचायत अध्यक्ष राजकुमार सिंह, पंडरीपानी भाजपा मंडल अध्यक्ष मुक्तेश्वर साय, तपकरा भाजपा मंडल अध्यक्ष दिलीप साहू, कपिलेश्वर सिंह, तेजस्वरी सिंह, राजकुमार गुप्ता, सरोजनी सिंह, उमेश यादव सहित बड़ी संख्या में भाजपा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद थे।

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छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में भव्य राज्योत्सव कार्यक्रम का किया जाएगा आयेाजन 

रायपुर, 28 अक्टूबर 2025/ राज्य स्थापना दिवस 2025 के अवसर पर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में भव्य राज्योत्सव कार्यक्रम का आयेाजन किया जाएगा। जिला मुख्यालयों में आयोजित कार्यक्रमों में राज्य के मंत्रीगण, सांसद तथा विधायक मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। राज्य शासन ने प्रत्येक जिले के लिए मुख्य अतिथि के नामों की घोषणा की है।

           राज्य शासन द्वारा जारी सूची के अनुसार राजनांदगांव जिला मुख्यालय में आयेाजित राज्योत्सव कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. रमन सिंह विधानसभा अध्यक्ष और सरगुजा में मुख्य अतिथि कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम होंगे। इसी प्रकार बिलासपुर जिला मुख्यालय में श्री तोखन साहू  केन्द्रीय राज्य मंत्री, बस्तर में उप मुख्यमंत्री श्री अरूण साव तथा दुर्ग में उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा जिला मुख्यालय में आयोजित राज्योत्सव कार्यक्रम में मुख्य अतिथि होंगे।

          इसी प्रकार गरियाबंद में मंत्री श्री दयालदास बघेल, दंतेवाड़ा में मंत्री श्री केदार कश्यप, कोरबा में मंत्री श्री लखन लाल देवांगन, जशपुर में मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल तथा रायगढ़ में मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। सूरजपुर में मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, जांजगीर-चांपा में मंत्री श्री टंकराम राम वर्मा, बालोद में मंत्री श्री गजेन्द्र यादव, कोरिया में मंत्री श्री राजेश अग्रवाल और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में मंत्री श्री गुरू खुशवंत साहेब जिला मुख्यालय में आयोजित राज्योत्सव कार्यक्रम में मुख्य अतिथि होंगे।

         बलौदाबाजार-भाटापारा में सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, बेमेतरा में सांसद श्री विजय बघेल, कबीरधाम में सांसदश्री संतोष पाण्डेय, बलरामपुर-रामानुजगंज में सांसदश्री चिंतामणी महाराज, महासमुंद में सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में सांसद श्री राधेश्याम राठिया, सक्ति में सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े, बीजापुर में सांसद श्री महेश कश्यप, कांकेर में सांसद श्री भोजराज नाग तथा खैरागढ़-गंडई-छुईखदान में सांसद श्री देवेन्द्र प्रताप सिंह जिला मुख्यालय में आयोजित राज्योत्सव कार्यक्रम में मुख्य अतिथि होंगे।

        वहीं मुंगेली जिले में विधायक श्री पुन्नू लाल मोहले, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में विधायक श्री धरमलाल कौशिक, धमतरी में विधायक श्री अजय चन्द्राकर, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में विधायक श्रीमती रेणुका सिंह, कोण्डागांव में विधायक सुश्री लता उसेंडी, नारायणपुर में विधायक श्री विक्रम उसेंडी तथा सुकमा जिले में विधायक श्री किरण देव जिला मुख्यालय में आयोजित राज्योत्सव कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे।

       राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर सभी जिलों में सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोकनृत्य, हस्तशिल्प प्रदर्शनी, स्थानीय उत्पादों की झांकी एवं विकासपरक योजनाओं से संबंधित स्टॉल लगाए जाएंगे। राज्योत्सव कार्यक्रमों का आयोजन जनभागीदारी और पारंपरिक गौरव के साथ गरिमामय ढंग से किया जाएगा ताकि प्रदेश की संस्कृति, विकास और एकता का संदेश पूरे राज्य में प्रसारित हो सके।

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जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र अब पूरी तरह ऑनलाइन,अक्टूबर 2023 के पूर्व जन्मे बच्चों के आधार कार्ड हेतु ऑनलाइन जन्म प्रमाण पत्र की कोई बाध्यता नहीं

रायपुर, 28 अक्टूबर 2025/ भारत के महारजिस्ट्रार कार्यालय, नई दिल्ली द्वारा वर्ष 2023 में संशोधित ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया गया है, जिसके माध्यम से राज्य में जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र ऑनलाइन बनाए जा रहे हैं। इस प्रकार, छत्तीसगढ़ राज्य में प्रत्येक जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र का ऑनलाइन बनाया जाना अनिवार्य किया गया है।

उल्लेखनीय है कि जन्म-मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में वर्ष 2023 में संशोधन किया गया है। संशोधन के अनुसार अक्टूबर 2023 के बाद जन्मे बच्चों की जन्म तिथि प्रमाणित करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र ही एकमात्र वैध आधार होगा। अर्थात, इस तिथि के पूर्व जन्मे बच्चों के मामलों में अन्य वैकल्पिक दस्तावेज भी जन्म तिथि के प्रमाण के रूप में मान्य रहेंगे। परंतु अक्टूबर 2023 के बाद जन्मे बच्चों के लिए केवल जन्म प्रमाण पत्र ही तिथि प्रमाण का एकमात्र स्रोत होगा। राज्य में अप्रैल 2023 के बाद से जन्मे प्रत्येक बच्चे के लिए ऑनलाइन जारी जन्म प्रमाण पत्र को ही मान्य किया गया है।

इस प्रकार स्पष्ट है कि अक्टूबर 2023 के पूर्व जन्मे बच्चों के जन्म तिथि प्रमाणन के लिए जन्म प्रमाण पत्र अनिवार्य नहीं है। उनके लिए अन्य दस्तावेज भी मान्य हैं। लेकिन अक्टूबर 2023 के बाद जन्मे बच्चों के लिए जन्म प्रमाण पत्र ही जन्म प्रमाण का एकमात्र आधार होगा।

पूर्व में जिन बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र मैन्युअल पद्धति से जारी किया गया था, उनके लिए भी अब पोर्टल में ऑनलाइन प्रमाण पत्र बनाने का प्रावधान उपलब्ध है। इससे पुराने प्रमाण पत्र भी डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित किए जा सकेंगे।

यह संज्ञान में आया है कि कुछ जिलों में केवल उन्हीं जन्म प्रमाण पत्रों के आधार पर आधार कार्ड बनाए जा रहे हैं जिनमें क्यूआर कोड (QR Code) है। यह विषय संज्ञान में आने पर इस विषय में राज्य सरकार द्वारा सहायक प्रबंधक, UIDAI हैदराबाद से अनुरोध किया गया है कि वे राज्य के सभी आधार केंद्रों को उचित दिशा-निर्देश जारी करें। 

यह भी उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 में संशोधित पोर्टल के लॉन्च के बाद प्रारंभिक चरण में कुछ तकनीकी कठिनाइयाँ आई थीं, जिन्हें भारत के महारजिस्ट्रार कार्यालय, नई दिल्ली द्वारा समाधान कर दिया गया। साथ ही राज्य के सभी रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) को नए पोर्टल के संबंध में आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। आवश्यकता अनुसार जिला स्तर पर भी नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे ऑनलाइन प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया सुचारू रूप से संचालित हो रही है।

राज्य में अप्रैल 2023 के बाद से सभी जन्म प्रमाण पत्र केवल ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से बनाए जा रहे हैं, और वर्तमान में पोर्टल पूरी तरह से तकनीकी रूप से सुचारू रूप से संचालित है।

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ब्रम्हनिष्ठालय सोगड़ा आश्रम में दो दिवसीय निःशुल्क चिकित्सा शिविर  का हुआ आयोजन,शिविर में 1833 मरीजों की मुफ्त में जांच कर दी गईं दवाईयां


जशपुर 28 अक्टूबर 2025 : ब्रम्हनिष्ठालय सोगड़ा आश्रम,जशपुर में बाबा भगवान राम ट्रस्ट,जशपुर द्वारा अघोरेश्वर महाविभूति स्थल के स्थापना दिवस के वार्षिकोत्सव के अवसर पर जनकल्याणार्थ दो दिवसीय निःशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन सोगड़ा आश्रम के परिसर में विगत 26 एवं 27 अक्टूबर को सम्पन्न हुआ। इस शिविर में 1833 मरीजो को जांचोपरांत ट्रस्ट द्वारा निःशुल्क दवाईयां प्रदान की गयी।
ट्रस्ट के अध्यक्ष पूज्यपाद गुरूपद संभव राम बाबा के निर्देशन में प्रतिवर्ष इस शुभ अवसर पर यह शिविर आयोजित किया जाता है जिसमें आस-पास के अनेक ग्रामों से बड़ी संख्या में ग्रामीण बन्धु लाभ उठाते हैं।
दिनांक 26.10.2025 को प्रातः अघोरेश्वर महाविभूति स्थल पर पूजन आरती उपरांत 24 घंटे के अष्टयाम संकीर्तन प्रारंभ कर 10 बजे पूज्यपाद संभव राम बाबा जी द्वारा शिविर का उदघाटन परम पूज्य अघोरेश्वर महाप्रभु के चित्र पर पूजन,आरती उपरांत नारियल फोड़कर किया गया। तत्पश्चात दो दिवसीय चिकित्सा शिविर प्रारंभ हुआ। इस शिविर में अनेक राज्यो के सुविख्यात चिकित्सक गणों को ट्रस्ट द्वारा आमत्रिंत किया गया था।

शिविर में दंत रोग,हृदय रोग,जनरल फिजिशियन,शिशु रोग,स्त्री रोग, आयुर्वेद ,होम्यिोपैथ, इलेक्ट्रोहोम्यिोपैथ,एक्यूपंचर,फिजियोथेरेपी,आस्टिपपैथी आदि के स्पेशलिस्ट चिकित्सक मौजूद थे। प्रमुख रूप से दंत चिकित्सा हेतु डॉ.  एस.पी.सिंह,प्रयागराज, डॉ. वैभव,वाराणसी, डॉ. अविनाश,गुमला,शिशु रोग हेतु डॉ.हरिशंकर सिंह,वाराणसी, डॉ. यू.पी.सिंह,प्रयागराज, डॉ. रूद्रप्रताप,गुमला,हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. रंजन नारायण,रांची,सर्जन डॉ. आर.के.सिंह,जशपुर एवं डॉ.  रोहित सिंह,रांची तथा स्त्री रोग चिकित्सा हेतु डॉ. कमला मिश्रा,प्रतापगढ़ (उ.प्र.) आयुर्वेदाचार्य व नाड़ी विशेषज्ञ वैद्य श्री वैकुण्ड नाथ पाण्डेय,वाराणसी, डायबिटीज विशेषज्ञ डॉ.अर्पण सिंह, अम्बिकापुर, इलेक्ट्रोहोम्यिोपैथ एवं एक्यूपंचर विशेषज्ञ डॉ.अशोक अग्रवाल,नई दिल्ली,नेत्र रोग चिकित्सा हेतु डॉ.वी.एन.सिंह, अम्बिकापुर, डॉ. अभय कुमार राय,डिहरी ओनसोन,बिहार एवं श्री टी.पी.कुशवाहा ,जशपुर, डॉ. नेहा ठाकुर फिजियोथेरेपी एक्सपर्ट दुर्ग, डॉ.विजय प्रताप सिंह आस्टियोपैथ,वाराणसी, होम्यिोपैथी में डॉ. उत्पल सहाय,रांची डॉ.उपेन्द्र सिंह,सासाराम, डॉ.ए.एन.द्विवेदी,अम्बिकापुर, डॉ.राजेश कुमार पाण्डेय,कोलकाता, डॉ.के.के.सिंह वाराणसी ने अपनी सेवाएँ प्रदान की। दवा वितरण में डॉ. बी.एन.द्विवेदी,राजपुर ने सक्रिय योगदान प्रदान किया।

  शिविर में डॉ. शिवकुमार,घाघरा द्वारा रक्त शर्करा आदि की जांच की गयी।आगामी माह से ग्रामीण जनता के सेवार्थ ट्रस्ट द्वारा विगत कई वर्षो से आयोजित किये जा रहे चक्षु अभियान का प्रारंभ करने की योजना है।

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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने फरसाबहार के विकास के लिए 4.16 करोड़ लागत के 4 कार्यों का लोकार्पण और 36.72 करोड़ लागत के 9 विकासकार्यों का हुआ भूमिपूजन

जशपुरनगर, 28 अक्टूबर 2025/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज फरसाबहार क्षेत्र के व्यापक विकास को नए आयाम देते हुए  जनपद पंचायत मैदान में आयोजित एक कार्यक्रम में 40 करोड़ 89 लाख 26 हजार रुपए की लागत के 13 विकासकार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। इनमें 4 करोड़ 16 लाख 41 हजार रुपए लागत के 4 विकासकार्यों का लोकार्पण और 36 करोड़ 72 लाख 85 हजार रुपए लागत के 9 विकासकार्यों का भूमिपूजन शामिल हैं। इस अवसर पर श्रीमती कौशल्या साय भी मौजूद रही।
        मुख्यमंत्री ने जिन विकासकार्यों का लोकार्पण किया उनमें 01 करोड़ 81 लाख 32 हजार रुपए लागत के मस्कामारा से होते हुए लवाकेरा मेन रोड तक मार्ग लं. 1.70 कि.मी., 01 करोड़ 29 लाख 56 हजार रुपए लागत के जिला जशपुर के अम्बाकछार पहुंच मार्ग लं. 1.00 कि.मी., 10 लाख रुपए लागत के आर सी.सी. पुलिया निर्माण, सिंहटोला दीपक घर से मेन रोड़ पहुंच मार्ग पर, ग्राम लावाकेरा और 95 लाख 53 हजार रूपए लागत के  जशपुर के मुण्डाडीह पहुच मार्ग लं. 0.90 कि.मी. का  निर्माण कार्य शामिल है।
        इसी तरह उन्होंने 36 करोड़ 72 लाख 85 हजार रुपए लागत के जिन 9 विकासकार्यों का भूमिपूजन किया उनमें 31 लाख 38 हजार रूपए लागत के फिकल स्लज ट्रिटमेंट प्लांट, 23 करोड़ 96 लाख 94 हजार रूपए लागत के पमशाला में सरईटोला पहुंच मार्ग लं. 11.50 कि.मी. का निर्माण कार्य, 01 करोड़ 72 लाख 55 हजार रुपए लागत के फरसाबहार में विश्रामगृह भवन का निर्माण कार्य, 01 करोड़ 91 लाख 51 हजार रुपए लागत के प्रो.मै. आदिवासी बालक छात्रावास कोल्हेनझरिया का भवन निर्माण, 01 करोड़ 91 लाख 51 हजार रुपए लागत के प्रो.मै. आदिवासी बालक छात्रावास फरसाबहार का भवन निर्माण, 01 करोड़ 52  लाख 97 हजार रुपए लागत के प्री.मै. आदिवासी बालक छात्रावास लवाकेरा का भवन निर्माण, 01 करोड़ 52 लाख 97  हजार रुपए लागत के प्री.मै. आदिवासी बालक छात्रावास पण्डरीपानी का भवन निर्माण, 01 करोड़ 91 लाख 51 हजार रुपए लागत के प्रो.मै. आदिवासी बालक छात्रावास पंडरीपानी का भवन निर्माण कार्य और 01 करोड़ 91 लाख 51 हजार रुपए लागत के प्री.मै. आदिवासी बालक छात्रावास तपकरा का भवन निर्माण कार्य शामिल है।
      इस अवसर पर सांसद श्री राधेश्याम राठिया, विधायक श्रीमती गोमती साय, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगर पालिका जशपुर के उपाध्यक्ष श्री यश प्रताप सिंह जूदेव,पूर्व संसदीय सचिव श्री भरत साय, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, पुलिस अधीक्षक श्री शशिमोहन सिंह, श्री विजय आदित्य सिंह जूदेव सहित जनप्रतिनिधिगण, अधिकारी और ग्रामीण मौजूद रहे।

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पंडरापाठ में तीरंदाजी अकादमी 20 करोड़ 53 लाख रुपए की लागत से स्थापित,क्षेत्र के युवाओं को आगे बढ़ने का मिलेगा लाभ

जशपुरनगर 28 अक्टूबर 2025/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कैम्प कार्यालय बगिया जशपुर में बगीचा विकास खंड के तहसील सन्ना पंडरा पाठ में  तीरंदाजी अकादमी बनाने के लिए एनटीपीसी के साथ एग्रीमेंट किया। सीएसआर फंड से 20 करोड़ 53 लाख की लागत से तीरंदाजी अकादमी बनाया जाएगा।
इस अवसर पर कलेक्टर श्री रोहित व्यास एनटीपीसी के अपर महाप्रबंधक मानव संसाधन श्री बिलाश मोहंती उप महाप्रबंधक श्री निशांत बंसल, वरिष्ठ प्रबंधक विधी गैरिक गुरु डिप्टी कलेक्टर समीर बड़ा उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज एनटीपीसी द्वारा आर्चरी सेंटर स्थापित किये जाने के लिए 20 करोड़ 53 लाख रुपए की राशि सीएसआर के माध्यम से दी जा रही है मुझे इस बात की खुशी है। 
       
उन्होंने कहा की  जशपुर क्षेत्र के युवाओं में तीरंदाजी के लिए बड़ी संभावनाएं हैं। इसके लिए सेंटर आरंभ होने से युवाओं को काफी सुविधा होगी। वर्ष 2036 में भारत ने ओलंपिक खेलों के लिए दावेदारी प्रस्तुत की है। हमारी कोशिश होगी कि छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी भी अधिकतम संख्या में राष्ट्रीय टीम में हिस्सा लेकर पदक जीतें।  यह तब संभव होगा जब हम आर्चरी सेंटर की तरह ही नये प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करेंगे, यहां प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को चिन्हांकित कर उन्हें हर संभव सहायता दी जाएगी।
      उन्होंने कहा कि हमने यह भी घोषणा की है कि जो खिलाड़ी ओलंपिक में स्वर्ण पदक प्राप्त करेंगे, उन्हें तीन करोड़ रुपए दिये जाएंगे। ऐसे ही रजत पदक प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों को 2 करोड़ रुपए एवं कांस्य पदक प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों को एक करोड़ रुपए दिया जाएगा।
      
मुख्यमंत्री ने लंबित राज्य खेल अलंकरण समारोह पुनः आयोजित कराए और इसके माध्यम से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को सम्मानित करने की बात कही।
       
उन्होंने कहा कि हमने खेलो इंडिया के नये सेंटर प्रदेश में आरंभ किये हैं। हमारी कोशिश है कि जनजातीय क्षेत्रों में खेलों की अधोसंरचना का विशेष रूप से विकास हो।
हमारा देश हमेशा से तीरंदाजी में अग्रणी स्थिति में रहा है। महाभारत और रामायण जैसे हमारे पवित्र ग्रंथों के नायक भी इस विधा में कुशल रहे हैं इसी परंपरा में आगे बढ़ते हुए प्रशिक्षित खिलाड़ी तैयार करें।
       उल्लेखनीय है कि सन्ना पंडरापाठ में 10.27 एकड़ भूमि में अकादमी बनाया जाएगा जहां आउटडोर तीरंदाजी रेंज, खिलाड़ियों के लिए छात्रावास, स्टाफ क्वार्टर खिलाड़ियों की सुविधा के लिए भवन, जैविक खेती के लिए छायादार नर्सरी, पुस्तकालय, चिकित्सा केंद्र,कौशल विकास केन्द्र, हर्बल वृक्षारोपण, मैदान आदि शामिल हैं। आर्चरी एक खेल और कला है जिसमें धनुष और बाण का उपयोग करके लक्ष्य पर निशाना लगाया जाता है। यह एक प्राचीन गतिविधि है। धनुष यह एक लचीली वस्तु होती है जिससे बाण को छोड़ा जाता है। बाण नुकीला तीर जिसे लक्ष्य पर छोड़ा जाता है।
 लक्ष्य  जिस पर निशाना लगाया जाता है, आमतौर पर एक गोल आकृति होती है जिसमें अलग-अलग रंग और स्कोर क्षेत्र होते हैं। निशाना लगाने की तकनीक इसमें एकाग्रता, संतुलन और शरीर की स्थिरता बहुत ज़रूरी होती है। भारत में आरचेरी का गहरा इतिहास है। महाभारत और रामायण में भी धनुर्विद्या का उल्लेख है। आधुनिक खेलों में भारत के खिलाड़ी जैसे दीपिका कुमारी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन किया है।

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जशपुर के युवाओं ने 5350 मीटर की ऊंचाई पर ट्रैकिंग, रॉक क्लाइंबिंग, आइस क्लाइंबिंग का लिया अद्भुत अनुभव,मुख्यमंत्री ने प्रशस्ति पत्र देकर किया सम्मानित

जशपुरनगर 28 अक्टूबर 2025/ जशपुर जिले के युवाओं ने अपने साहस, अनुशासन और अदम्य इच्छाशक्ति के बल पर हिमालय की ऊंचाइयों को छू लिया। हिमाचल प्रदेश में ट्राइबल अल्पाइन एक्सपीडिशन हिमालय 2025 में जशपुर जिले के पर्वतारोहियों ने दुहांगन वैली में 5350 मीटर की ऊंचाई तक सफलतापूर्वक चढ़ाई कर न केवल जिले का, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ राज्य का नाम गौरवान्वित किया। अभियान के दौरान दल के सदस्यों ने ट्रैकिंग, रॉक क्लाइंबिंग और आइस क्लाइंबिंग जैसी चुनौतीपूर्ण गतिविधियों में अपनी दक्षता और साहस का प्रदर्शन किया। यह दल जिला प्रशासन जशपुर के सहयोग से पर्वतारोहण के लिए सितम्बर माह में रवाना हुआ था। अभियान का नेतृत्व टीम लीडर श्री स्वप्निल राचिलवाल ने किया, जबकि दल के अन्य सदस्य रवि कुमार सिंह, रूसनाथ भगत, तेजल भगत, सचिन कुजूर और प्रतीक नायक रहे। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अभियान में सफलता प्राप्त करने वाले पर्वतारोहियों को आज सीएम कैंप कार्यालय बगिया में प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया और उनके जज्बे की सराहना की। उन्होंने कहा कि जशपुर के युवाओं ने यह साबित किया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, लगन और आत्मविश्वास से हर ऊंचाई को हासिल किया जा सकता है। युवाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि शासन के सहयोग से आदिवासी वनांचल क्षेत्र जशपुर से हिमालय जाने का अवसर मिला। साथ ही वहां विभिन्न प्रकार के एडवेंचर एक्टिविटी में भागीदारी करने का मौका मिला। इस दौरान कलेक्टर श्री रोहित व्यास, डिप्टी कलेक्टर श्री समीर बड़ा सहित अन्य अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे। 

  इस दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस उपलब्धि से जिले के आदिवासी युवा एडवेंचर स्पोर्ट्स के प्रति जागरूक होंगे और साहसिक खेलों में भागीदारी के लिए प्रेरित होंगे। दल के सदस्यों ने मुख्यमंत्री श्री साय  के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शासन एवं प्रशासन के सहयोग और प्रोत्साहन से ही उन्हें हिमालय अभियान का हिस्सा बनने और इस उपलब्धि को हासिल करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि इस अभियान से प्राप्त अनुभव और साहस जिले के युवाओं को एडवेंचर स्पोर्ट्स के प्रति प्रेरित करने में सहयोगी होगा। जनजातीय हिमालय पर्वतारोहण अभियान 2025 की शुरुआत एक स्थानीय प्रशिक्षण पहल के रूप में शुरू हुई थी, जो सामूहिक विश्वास, सहयोग और समर्थन से एक सशक्त अभियान के रूप में विकसित हुआ। इस पहल ने न केवल युवाओं में आत्मविश्वास और रोमांच की भावना जागृत की, बल्कि जशपुर जिले की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया। यह पर्वतारोहण सिर्फ कुछ युवाओं की यात्रा नहीं थी यह पूरे जशपुर की सामूहिक उपलब्धि थी।

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कुनकुरी में मुख्यमंत्री ने विसर्जन तालाब का किया औचक निरीक्षण,व्यवस्थित और सुविधापूर्ण रूप से विकसित करने के दिए निर्देश

जशपुरनगर 28 अक्टूबर 2025/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज कुनकुरी स्थित विसर्जन तालाब का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने छठ महापर्व के अवसर पर तालाब में श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया तथा तालाब क्षेत्र का विस्तारपूर्वक अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि तालाब को सुसज्जित, व्यवस्थित, आकर्षक और सुविधापूर्ण रूप से विकसित किया जाए, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर कहा कि छठ पर्व जन आस्था का प्रतीक और लोक संस्कृति के संवर्धन का उत्सव है, अतः इससे जुड़े स्थलों का विकास श्रद्धा, स्वच्छता और सौंदर्य के साथ किया जाना चाहिए। योजना के तहत तालाब के चारों ओर सौंदर्यीकरण के तहत विभिन्न सुविधाएं विकसित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सभी कार्य समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरे हों, ताकि श्रद्धालुओं और नागरिकों को स्थायी सुविधा मिल सके। मुख्यमंत्री श्री साय ने तालाब परिसर की स्वच्छता, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और यातायात नियंत्रण की तैयारियों की भी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि यह स्थान न केवल धार्मिक श्रद्धा का केन्द्र है, बल्कि कुनकुरी की लोक संस्कृति और पर्यटन दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नगर पंचायत अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर इसे स्वच्छ, हरित और आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का आह्वान किया। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय, स्थानीय जनप्रतिनिधिगण, कलेक्टर श्री रोहित व्यास सहित नागरिकगण एवं अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय  महाप्रभु श्री जगन्नाथ का दर्शन कर 51 हजार तुलसी अर्पित कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की

जशपुरनगर 28 अक्टूबर 2025/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज अल सुबह कुनकुरी स्थित  भगवान जगन्नाथ मंदिर पहुंचकर महाप्रभु श्री जगन्नाथ, माता सुभद्रा और भगवान बलराम जी के दर्शन किए। मुख्यमंत्री ने अपनी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय के साथ विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, शांति और कल्याण की मंगल कामना की। उन्होंने मंदिर परिसर में श्री जगन्नाथ सेवा समिति कुनकुरी द्वारा आज से 5 नवम्बर तक चलने वाले तुलसी अर्चन कार्यक्रम में भी भाग लिया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने भगवान जगन्नाथ को 51 हजार तुलसी दल अर्पित कर विशेष पूजन किया। साथ ही वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच प्रदेश की प्रगति, समरसता और जनकल्याण के लिए आशीर्वाद मांगा।

      मुख्यमंत्री श्री साय ने मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं से भेंट कर उनकी कुशलक्षेम पूछी और आयोजन में शामिल श्री जगन्नाथ सेवा समिति कुनकुरी के सदस्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान में ऐसे धार्मिक आयोजन समाज को एकता और भक्ति के सूत्र में बांधते हैं। उन्होंने समिति को इस पावन आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। कार्यक्रम में जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, अन्य जनप्रतिनिधियों, स्थानीय नागरिकों, पुजारीगण एवं प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान पूरा वातावरण जय जगन्नाथ के उद्घोष से गूंज उठा।

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मुख्यमंत्री श्री साय और उनकी धर्मपत्नी ने कुनकुरी छठ घाट में उगते सूर्य को दिए अर्घ्य

जशपुरनगर 28 अक्टूबर 2025/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय ने आज छठ महापर्व त्यौहार के अवसर पर जशपुर के कुनकुरी छठ घाट में उगते सूर्य को अर्घ्य देकर प्रदेश के सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
        मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को छठ पूजा की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि आज बड़े ही सौभाग्य का दिन है कि मुझे अपने विधानसभा क्षेत्र में छठ पर्व में शामिल होने का अवसर मिला।
        मुख्यमंत्री ने कहा कहा कि कुनकुरी छठ घाट के लिए  लगभग 5 करोड़ 17 लाख की राशि से छठ का घाट का  सौन्दर्यकरण किया जाएगा इस वर्ष के छठ महापर्व में व्रती महिलाएं छठ घाट में पूरे श्रद्धा भाव से पूजा अर्चना भी कर रही है।
        
इस अवसर पर  कलेक्टर श्री रोहित व्यास, पुलिस अधीक्षक श्री शशिमोहन सिंह सहित छठ पूजा करने वाली व्रती महिलाएं और जनप्रतिनिधीगण  
 और ग्रामीणजन बड़ी संख्या में मौजूद थे। 
        
छठ पर्व का धार्मिक महत्व सूर्य उपासना:
सूर्य देव को जीवन, ऊर्जा, और स्वास्थ्य का स्रोत माना गया है। छठ पूजा में सूर्य की आराधना करके श्रद्धालु उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। छठ महापर्व में व्रती (उपासक) पूरी तरह शुद्धता, और आस्था के साथ चार दिनों तक उपवास, स्नान, और पूजा करती है।छठ पूजा में समाज के सभी लोग मिलकर घाट  सजाते हैं, प्रसाद बनाते हैं और एक साथ पूजा करते हैं।

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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने स्वर्गीय मथुरा साव को दी श्रद्धांजलि

   जशपुरनगर, 27 अक्टूबर 2025/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज शाम दुलदुला पहुंचे, जहां उन्होंने पूर्व जिला पंचायत सदस्य श्री जगदीश गुप्ता के पिताश्री स्वर्गीय मथुरा साव के श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल होकर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।
     मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और  शोकसंतप्त परिजनों से मुलाकात कर उनका ढांढस बंधाया। इस दौरान उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय भी मौजूद रही।

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संस्कृति, इतिहास और अध्यात्म का संगम है सिरपुर जहां इतिहास बोलता है, संस्कृति मुस्कुराती है और अध्यात्म सांस लेता है  


 
 रायपुर, 27 अक्टूबर 2025

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्थित सिरपुर (श्रीपुर) केवल एक पुरातात्त्विक स्थल ही नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों का जीवंत प्रतीक है। यह नगर महान सम्राट महाशिवगुप्त बालार्जुन की राजधानी रहा है और अपनी स्थापत्य कला, बौद्ध धरोहरों तथा प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है।

    सिरपुर का उल्लेख प्राचीन भारतीय ग्रंथों और अभिलेखों में मिलता है। यहाँ भगवान शिव, विष्णु, बुद्ध और जैन धर्म के उपासना स्थलों के अवशेष मिले हैं। 7वीं शताब्दी में चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी सिरपुर का उल्लेख अपनी यात्राओं में किया है, जिससे इसकी अंर्तराष्ट्रीय ख्याति सिद्ध होती है। यह नगर धार्मिक सहिष्णुता और कला का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है। यहाँ 22 शिव मंदिर, 5 विष्णु मंदिर, 3 जैन विहार और एक विशाल बौद्ध विहार के अवशेष प्राप्त हुए हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा सिरपुर में लगातार संरक्षण और मरम्मत का कार्य किया जा रहा है जिससे इसकी ऐतिहासिक गरिमा बनी रहे। डिजिटल टूर, क्यूआर कोड आधारित जानकारी और थ्रीडी गाइडेंस सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग हो रहा है।

    सिरपुर बौद्ध, जैन और हिन्दू स्थापत्य कला का त्रिवेणी संगम है। यहां स्थित लक्ष्मण मंदिर भारत का पहला ईंटों से निर्मित मंदिर है जो वास्तुकला का अनुपम उदाहरण है। आनंदप्रभु कुटीर विहार बौद्ध भिक्षुओं का प्रमुख केंद्र है, जहाँ चीन से आए भिक्षु रह चुके हैं। गंधेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित मंदिर है, जिसमें अनेक मूर्तियाँ और सांस्कृतिक प्रतीक हैं। 1872 में अलेक्जेंडर कनिंघम द्वारा सिरपुर के अवशेषों की खोज की गई थी। इसके बाद यहाँ अनेक उत्खनन कार्य हुए, जिनमें बुद्ध, विष्णु, शिव और जैन परंपराओं के असंख्य साक्ष्य मिले। चीन, जापान और दक्षिण कोरिया के विद्वान भी सिरपुर को एशिया की बौद्ध धरोहरों में महत्वपूर्ण स्थान मानते हैं।


    हर वर्ष आयोजित होने वाला सिरपुर महोत्सव छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। इसमें देश-विदेश के कलाकार शास्त्रीय नृत्य, संगीत और नाट्य प्रस्तुतियाँ देते हैं। यहाँ ईको-ट्रेल, हस्तशिल्प बिक्री केंद्र और स्थानीय भोजनालयों की योजनाएँ चलाई जा रही हैं, ताकि स्थानीय समुदाय को रोजगार मिले और पर्यटन को बढ़ावा मिले। विद्यार्थियों के लिए सिरपुर की ऐतिहासिक धरोहरों पर आधारित पाठ्यक्रम भी प्रारंभ किया गया है।
    साय सरकार ने सिरपुर को विश्व पर्यटन मानचित्र पर लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। विजन 2047 के तहत आधुनिक बुनियादी ढांचा, सड़क, प्रकाश व्यवस्था और अंर्तराष्ट्रीय स्तर का पर्यटक कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। सिरपुर की पुरातात्त्विक संरचनाओं को संरक्षित रखने के लिए अत्याधुनिक तकनीकें अपनाई जा रही हैं। सिरपुर केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक है। यहाँ के मंदिर, विहार, मूर्तियाँ और जीवंत परंपराएँ हमें यह सिखाती हैं कि भारत की संस्कृति, सहिष्णुता, कला और ज्ञान का संगम है। सिरपुर सचमुच वह स्थान है जहाँ इतिहास बोलता है, संस्कृति मुस्कुराती है और अध्यात्म सांस लेता है।

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष स्वर्गीय श्री बनवारी लाल अग्रवाल को दी श्रद्धांजलि

रायपुर, 27 अक्टूबर 2025/  मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज कोरबा के अग्रसेन भवन में आयोजित छत्तीसगढ़ के पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष स्वर्गीय श्री बनवारी लाल अग्रवाल की पगड़ी रस्म कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने स्वर्गीय अग्रवाल के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय श्री बनवारी लाल अग्रवाल की धर्मपत्नी श्रीमती पुष्पा अग्रवाल एवं उनके परिवार के लोगों से भेंट कर उन्हें ढाढस बंधाया और अपनी गहरी संवेदना प्रकट की।

श्री साय ने कहा कि स्वर्गीय श्री बनवारी लाल अग्रवाल का जीवन जनसेवा और समर्पण का प्रतीक था। उन्होंने सदैव कोरबा जिले के विकास और जनता की भलाई के लिए कार्य किया। उनकी सादगी, विनम्रता और सामाजिक संवेदनशीलता हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत रहेगी।

कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। सभी ने स्वर्गीय अग्रवाल के योगदान को स्मरण करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। इस दौरान विधायक कटघोरा श्री प्रेमचंद पटेल,  विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष श्री गौरीशंकर अग्रवाल, श्री महावीर अग्रवाल, श्री बजरंग लाल अग्रवाल, बिहारी लाल अग्रवाल, सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण आदि मौजूद रहे।

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मुख्यमंत्री श्री साय और उनकी धर्मपत्नी ने दुलदुला छठ घाट में डूबते सूर्य को दिए अर्घ्य,प्रदेश के सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना,,, छठ घाट के सौन्दर्यकरण की गई घोषणा

जशपुरनगर 27 अक्टूबर 2025/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय ने आज छठ महापर्व त्यौहार के अवसर पर दुलदुला छठ घाट में डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर प्रदेश के सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
        मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को छठ पूजा की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि आज बड़े ही सौभाग्य का दिन है कि मुझे अपने विधानसभा क्षेत्र में छठ पर्व में शामिल होने का अवसर मिला।
       मुख्यमंत्री ने दुलदुला क्षेत्र वासियों की मांग पर छठ घाट के सौन्दर्य करण की घोषणा की उन्होंने कहा कि अगले छठ पूजा तक दुलदुला छठ घाट का सौन्दर्य करण कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षेत्र लोगों के आशीर्वाद से ही विधायक, सांसद और मुख्यमंत्री बना हूं। क्षेत्र की जनता की समस्याओं को अच्छी तरह से समझता हूं और समाधान भी करते जा रहा हूं। उन्होंने कहा कि कुनकुरी छठ घाट के लिए  लगभग 5 करोड़ 17  लाख की राशि से छठ का घाट का  सौन्दर्यकरण किया गया। इस वर्ष के छठ महापर्व में व्रती महिलाएं छठ घाट में पूरे श्रद्धा भाव से पूजा अर्चना भी कर रही है।
        
इस अवसर पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, जनपद पंचायत दुलदुला अध्यक्ष रामकुमार सिंह, आईजी श्री दीपक कुमार झा, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, पुलिस अधीक्षक श्री शशिमोहन सिंह सहित छठ पूजा करने वाली व्रती महिलाएं और जनप्रतिनिधीगण  
 और ग्रामीणजन बड़ी संख्या में मौजूद थे। 

छठ पर्व का महत्व
        
छठ पर्व हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और लोक आस्था से जुड़ा पर्व है, मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, नेपाल सहित सभी राज्यों में आस्था श्रद्धा और उत्साह से मनाया जाता है। यह पर्व सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित है।
छठ पर्व का धार्मिक महत्व सूर्य उपासना:
सूर्य देव को जीवन, ऊर्जा, और स्वास्थ्य का स्रोत माना गया है। छठ पूजा में सूर्य की आराधना करके श्रद्धालु उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।

छठी मैया की पूजा को संतान की रक्षा करने वाली और सुख-समृद्धि देने वाली देवी माना जाता है। महिलाएँ अपनी संतान की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं।

पवित्रता और संयम
यह व्रत अत्यंत कठोर होता है — इसमें व्रती (उपासक) पूरी तरह शुद्धता, आत्मसंयम और आस्था के साथ चार दिनों तक उपवास, स्नान, और पूजा करता है।

छठ पर्व का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
सामूहिकता और एकता का प्रतीक छठ पूजा में समाज के सभी लोग मिलकर घाट  सजाते हैं, प्रसाद बनाते हैं और एक साथ पूजा करते हैं।

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छठ पूजा का आज तीसरा दिन है, व्रतियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर सुख-शांति की कामना की


जशपुर/नारायणपुर 27 अक्टूबर 25 : सनातन धर्म में छठ पूजा का बहुत महत्व है। यह पर्व सूर्य देव और छठी मैया की पूजा और आराधना का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि जो भी भक्त इस व्रत को श्रद्धा और शुद्धता के साथ करते हैं, तो उन पर सूर्य देव की विशेष कृपा बरसती है।

सूर्योपासना का महान पर्व छठ का आज तीसरा दिन है। आज शाम नारायणपुर के कपरी नदी में व्रतियों ने अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया और सुख-शांति की कामना की। छठ पूजा के चौथे दिन यानी कल उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही छठ पूजा संपन्न हो जाएगी।

गांव में छठ पूजा पूरी आस्था एवं विश्वास के कपरी नदी की तट में किया गया। सोमवार की शाम को बड़ी संख्या में आस्थावान श्रद्धालु नदी पुल के नीचे जुटे।  श्रद्धालुओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर धूमधाम से पूजा किया। छठ व्रती महिलाएं 36 घंटे व्रत कर माता के व्रत का पालन की, शाम के समय डूबते सूर्य को अर्घ्य दी l व्रतियों ने बताया कि चार दिवसीय छठ पूजा की शुरुआत नहाय खाय के साथ हुई ,इसके बाद व्रती महिलाओं ने खरना किया ,तत्पश्चात छठी मैया और भगवान सूर्य को छठ पर्व के तीसरे दिन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दी। अर्घ्य के लिए घरों से नंगे पांव पूजन स्थल तक पहुंची। भगवान सूर्य को नमन कर अर्घ्य देने के लिए बडी संख्या में श्रद्धालु तालाब में कतारबद्ध होकर जल में खड़े होकर भगवान सूर्य को जल अर्पित कर छठ मइया का पूजन कर व्रतियों ने संतान की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य का वरदान मांगा। उन्होंने छठ मइया की महिमा का गुणगान करते हुए लोक आस्था का महापर्व उल्लास के साथ मनाया। व्रतियों ने घाट पर छठ मइया के मंगलगीत गाई। सुहागिनों ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर पति की दीर्घायु की कामना करते हुए सुख संवृद्धि की कामना की l

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रायपुर : भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्यवाही : अवैध उगाही के आरोप में श्रम निरीक्षक निलंबित 


 
रायपुर, 27 अक्टूबर 2025
छत्तीसगढ़ शासन श्रम विभाग अंतर्गत  कार्यालय श्रम पदाधिकारी  बलौदाबाजार में कार्यरत श्रम निरीक्षक श्री रामचरन कौशिक को भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के चलते तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।  श्रम निरीक्षक व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से अवैध उगाही के आरोप लगाए गए थे।
    श्रम आयुक्त, छत्तीसगढ़ द्वारा 24 अक्टूबर को एक जांच समिति गठित की गई। समिति की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में पाया गया कि श्रम निरीक्षक कौशिक द्वारा कार्यक्षेत्र में भ्रमण के दौरान कथित रूप से अवैध वसूली और अनियमितताएँ की गई हैं। इसी के आधार पर उन्हें छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम-9 के तहत निलंबित किया गया है।
    निलंबन अवधि के दौरान श्री कौशिक को जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी तथा निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय श्रमायुक्त कार्यालय, नवा रायपुर, अटल नगर निर्धारित किया गया है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और जिला पदाधिकारियों को आदेश की सूचना प्रेषित कर अनुपालन कराने निर्देशित किया गया है।
   श्रमायुक्त कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार संबंधी किसी भी प्रकार की शिकायत पर कठोरतम कार्रवाई की जाएगी तथा जांच आगे भी जारी रहेगी।

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रॉक क्लाइम्बिंग के लिए बेहतरीन जगह हैं जशपुर,, देशदेखा ने बढ़ाई रोमांच की ऊँचाइयाँ

रॉक क्लाइम्बिंग एक रोमांचक साहसिक गतिविधि है, जिसमें व्यक्ति को रस्सी की मदद से पहाड़ की चोटी पर पहुंचना होता है। यह गतिविधि जशपुर में लोकप्रिय हो रही है और साहसिक गतिविधियों के शौकीनों के बीच इसका क्रेज बढ़ रहा है। यह एक ऐसी गतिविधि है, जिसे अजमाने के लिए धैर्य, ताकत और बहुत सारी हिम्मत की जरूरत होती है।

जशपुर 27 अक्टूबर 25/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय पर्यटन को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं।इसी कड़ी में जशपुर अब सिर्फ अपनी प्राकृतिक सुंदरता और जनजातीय संस्कृति के लिए ही नहीं, बल्कि रोमांचक पर्यटन के लिए भी पहचाना जाने लगा है। जशपुर के “देशदेखा क्लाइम्बिंग सेक्टर” ने इस दिशा में एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है। यह स्थान अब उन साहसिक यात्रियों का पसंदीदा गंतव्य बन रहा है जो रॉक क्लाइम्बिंग  के साथ प्रकृति की शांति को भी महसूस करना चाहते हैं।

देशदेखा क्लाइम्बिंग सेक्टर को इस तरह विकसित किया गया है कि यह शुरुआती पर्वतारोहियों से लेकर अनुभवी क्लाइंबर्स तक, सभी के लिए चुनौतीपूर्ण और रोमांचक अनुभव प्रदान करे। यहाँ प्राकृतिक चट्टानों पर विभिन्न प्रकार की क्लाइम्बिंग रूट्स तैयार किए गए हैं, जिनमें क्रैक क्लाइम्ब, स्लैब, वर्टिकल फेस और ओवरहैंग जैसी विविध चुनौतियाँ शामिल हैं। हर चढ़ाई के साथ पर्यटकों को घने जंगलों और जशपुर की हरी-भरी पहाड़ियों का मनमोहक दृश्य देखने को मिलता है, जो अनुभव को और भी यादगार बना देता है।

इस क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। प्रशिक्षित गाइड्स और प्रमाणित क्लाइम्बिंग इंस्ट्रक्टर्स की देखरेख में चढ़ाई करवाई जाती है। आधुनिक उपकरण, सेफ्टी रोप्स और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार बनाए गए सुरक्षा प्रोटोकॉल यहां की प्रमुख विशेषताएँ हैं। पर्यटकों को एक ऐसा अनुभव देने की कोशिश की गई है जो रोमांचक होने के साथ-साथ सुरक्षित भी हो।

देशदेखा क्लाइम्बिंग सेक्टर का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसका विकास स्थानीय समुदायों की भागीदारी से किया गया है। यहाँ के ग्रामीण और जनजातीय लोग इस परियोजना का हिस्सा बने हैं, जिससे उन्हें रोजगार और प्रशिक्षण के अवसर मिले हैं। यह पहल न केवल एडवेंचर पर्यटन को प्रोत्साहित करती है, बल्कि पर्यावरण और समुदाय-केंद्रित विकास का उदाहरण भी प्रस्तुत करती है।

प्राकृतिक रूप से समृद्ध यह क्षेत्र वन्यजीवों, झरनों और पहाड़ी दृश्यों से घिरा हुआ है। सुबह की धूप में चमकती चट्टानें और शाम के समय सुनहरी घाटियाँ यहाँ आने वाले हर यात्री को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। अक्टूबर से मार्च तक का मौसम रॉक क्लाइम्बिंग के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दौरान हवा ठंडी और साफ होती है, जिससे चढ़ाई का अनुभव और भी सुखद हो जाता है।

जशपुर प्रशासन और स्थानीय पर्यटन संगठनों की यह संयुक्त पहल न केवल राज्य के एडवेंचर पर्यटन मानचित्र पर जशपुर को विशेष स्थान दिला रही है, बल्कि यह दर्शा रही है कि अगर स्थानीय संसाधनों को संवेदनशीलता और दूरदर्शिता से विकसित किया जाए, तो छोटे-छोटे पहाड़ी इलाकों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई जा सकती है।

देशदेखा क्लाइम्बिंग सेक्टर सिर्फ एक एडवेंचर साइट नहीं, बल्कि यह जशपुर के उस आत्मविश्वास का प्रतीक है जो अपनी प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर को सम्मान देते हुए आधुनिक पर्यटन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यहाँ आकर पर्यटक न सिर्फ चढ़ाई का आनंद लेते हैं, बल्कि “प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व” के उस दर्शन को भी महसूस करते हैं, जो जशपुर की मिट्टी में गहराई से बसा है

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