History of 01 September : ‘जिंदगी के साथ भी, जिंदगी के बाद भी’, आज ही के दिन हुई थी भारतीय जीवन बीमा निगम की स्थापना
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History of 01 September : ‘जिंदगी के साथ भी, जिंदगी के बाद भी’, आज ही के दिन हुई थी भारतीय जीवन बीमा निगम की स्थापना

नई दिल्ली। ‘जिंदगी के साथ भी, जिंदगी के बाद भी’ की असरदार टैगलाइन के साथ देश के लाखों लोगों को बीमा की सेवाएं देने वाले भारतीय जीवन बीमा निगम की स्थापना आजादी के नौ साल बाद एक सितंबर के दिन ही की गई थी। यह दिन एक और कारण से भी इतिहास में दर्ज है।

 

आज भले शब्दकोश के नाम पर ढेरों ऑनलाइन सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन एक समय पढ़ने लिखने वाले लोगों के लिए शब्दकोश या डिक्शनरी के नाम पर मोटी-मोटी किताबे हुआ करती थीं और शब्दकोश को तैयार करना बहुत मुश्किल काम माना जाता था। भारत में शब्दकोश का जिक्र आते ही फादर कामिल बुल्के का नाम जहन में आता है। बुल्के का जन्म भी एक सितंबर को ही हुआ था। 

 

देश दुनिया के इतिहास में एक सितंबर की तारीख पर दर्ज कुछ अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं का सिलसिलेवार ब्योरा इस प्रकार है:-

 

1858 : ईस्ट इंडिया कंपनी के निदेशकों की अंतिम बैठक लंदन के ईस्ट इंडिया हाउस में आयोजित की गई। 

 

1878 : एम्मा एम नट्ट अमेरिका में पहली महिला टेलीफोन ऑपरेटर बनी। 

 

1909 : प्रसिद्ध साहित्यकार और शब्दकोश तैयार करने वाले फ़ादर कामिल बुल्के का जन्म। 

 

1923 : ग्रेट कैंटो भूकंप ने जापान के तोक्यो और योकोहामा शहरों में भारी तबाही मचायी। 

 

1942 : रास बिहारी बोस ने इंडियन नेशनल आर्मी की स्थापना की। 

 

1947 : भारतीय मानक समय की शुरूआत की गई।

 

1956 : भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की स्थापना। 

 

1964 : इंडियन ऑयल रिफ़ाइनरी और इंडियन ऑयल कम्पनी को विलय करके इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन बनाई गयी। 

 

1965 : पाकिस्तानी फौज ने कश्मीर में संघर्षविराम रेखा को पार किया। 

 

2000 : चीन ने तिब्बत होते हुए नेपाल जाने वाले अपने एकमात्र रास्ते को बंद किया। 

 

2018 : जकार्ता एशियाई खेलों में मुक्केबाज अमित पंघाल ने 49 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। वह एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले ओवरऑल आठवें भारतीय मुक्केबाज बने।

 

2018 : प्रणब बर्धन और शिबनाथ सरकार ने जकार्ता एशियाई खेलों की पुरुषों की ब्रिज प्रतियोगिता की युगल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। 

 

2020 : भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का दिल्ली में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। कई दिन तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद 31 अगस्त की शाम उनका निधन हो गया था।

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