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कबीरधाम में सहकारी समिति प्रबंधकों और ऑपरेटर्स की हड़ताल स्थगित,कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा को संघ ने हड़ताल स्थगन का सौंपा पत्र, 21 नवंबर लौटेंगे काम पर

रायपुर, 20 नवंबर 2025/* कबीरधाम जिले में बीते 3 नवंबर से चल रही जिला सहकारी संघ की अनिश्चितकालीन हड़ताल स्थगित हो गई है।  संघ के पदाधिकारियों ने कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा से मुलाकात कर हड़ताल स्थगन का पत्र सौंपा। जिला सहकारी संघ की ओर से कहा गया कि शासन द्वारा 15 नवंबर से धान खरीदी प्रारंभ कर दी गई है। किसानों के हित को देखते हुए जिला सहकारी संघ के समस्त कर्मचारी अपनी अनिश्चितकालीन हड़ताल को स्थगित करते हैं और 21 नवंबर, शुक्रवार से अपने कार्य पर लौट जाएंगे। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू, संयुक्त कलेक्टर श्री आर बी देवांगन, उप पंजीयक सहकारिता श्री जी एस शर्मा, खाद्य अधिकारी श्री सचिन मरकाम, डीएमओ श्री अभिषेक मिश्रा, सीसीबी नोडल श्री आर पी मिश्रा सहित अन्य अधिकारी व जिला सहकारी संघ के सदस्य उपस्थित रहे।

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राष्ट्रपति ने जनजातीय संस्कृति व शिल्प को दर्शाते स्टॉलों का किया अवलोकन ,पारंपरिक अखरा एवं देवगुड़ी के मॉडल में देवताओं की आराधना भी की

20 नवम्बर 2025/ राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जनजातीय गौरव दिवस 2025 के उपलक्ष्य में सरगुजा जिले में 20 नवम्बर को पीजी कॉलेज ग्राउण्ड में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। कार्यक्रम में राज्यपाल श्री रमेन डेका, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, राज्यमंत्री जनजातीय कार्य मंत्रालय भारत सरकार श्री दुर्गा दास उईके, राज्यमंत्री आवास एवं शहरी मंत्रालय भारत सरकार श्री तोखन साहू, आदिम जाति विकास विभाग कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग मंत्री श्री रामविचार नेताम, प्रभारी मंत्री जिला सरगुजा एवं वित्त वाणिज्यिक कर विभाग मंत्री श्री ओमप्रकाश चौधरी, पर्यटन संस्कृति एवं धर्मस्व विभाग मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, वन एवं जलवायु परिवर्तन परिवहन सहकारिता एवं संसदीय कार्य मंत्री श्री केदार कश्यप, लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण चिकित्सा शिक्षा पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास 20 सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, महिला एवं बाल विकास समाज कल्याण विभाग मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, सरगुजा सांसद श्री चिंतामणी महाराज, उत्तर रायपुर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, जगदलपुर विधायक श्री किरण सिंह देव, महापौर अम्बिकापुर श्रीमती मंजुषा भगत भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम स्थल में जनजातीय संस्कृति, लोक कला एवं शिल्प, आभूषण एवं वस्त्र, पूजा-पाठ, संस्कार, व्यंजन, वाद्ययंत्रों, जड़ी-बूटियों आदि को प्रदर्शित करने हेतु प्रदर्शनियां लगाई गई। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने प्रदर्शनियों का अवलोकन किया। 

*पारम्परिक अखरा स्थल एवं जनजातियों के धार्मिक आस्था के केंद्र देवगुड़ी में देवताओं की आराधना की*

कार्यक्रम में सांकेतिक रूप से बनाए गए जनजातियों के पारंपरिक अखरा स्थल एवं जनजाति निवासरत ग्रामों के प्रमुख धार्मिक आस्था के केन्द्र देवगुड़ी के मॉडल का अवलोकन कर यहां देवताओं की आराधना की।
अखरा छत्तीसगढ़ राज्य के सरगुजा अंचल में निवासरत जनजातियों का सांस्कृतिक स्थल है, जो गाँवों के मध्य या चौराहे में स्थित होते हैं, जहाँ छायादार पेड़ों के झुण्ड भी होते हैं। ग्रामीणजन विभिन्न लोक पर्वों जैसे करमा, महादेव बायर, तीजा आठे, जीवतिया, सोहराई, दसई, फगवा के अवसरों में महिला एवं पुरूष सामुहिक रूप से इकट्ठा होकर लोकगीत गाकर पारम्परिक वाद्ययंत्रों की थाप में लोकनृत्य करके उत्साह मनाते हैं। प्रदर्शनी में जनजातीय समुदाय के लोगों ने पारंपरिक नृत्य का प्रदर्शन किया। जनजाति निवासरत ग्रामों के प्रमुख धार्मिक आस्था के केन्द्र  देवगुड़ी को राज्य में क्षेत्रवार विभिन्न नामों जैसे देवाला देववल्ला, मन्दर, शीतला, सरना आदि नामों से भी जानते हैं। देवगुड़ी में ग्रामीण देवी-देवता जैसे बुढ़ादेव, बुढ़ीदाई, शीतला, सरनादेव, डीहवारीन, महादेव आदि विराजमान होते हैं। जनजातीय विभिन्न लोकपर्वों के अवसरों में सामूहिक रूप से इकट्ठा होकर ग्रामीण बैगा की अगुवाई में पूजा-पाठ कर ग्राम की सुख, शांति, समृद्धि हेतु कामना करते हैं। 

*मिट्टी, लकड़ी से बने आवास मॉडल का किया अवलोकन*

कार्यक्रम स्थल में छत्तीसगढ़ में निवासरत जनजातियों के पारंपरिक आवास का मॉडल बनाया गया था। राष्ट्रपति ने आवास मॉडल का भी अवलोकन किया। जनजातियों का आवास मिट्टी, लकड़ी से निर्मित होते हैं, जिसमें एक या दो कमरे व मुख्य कमरे के सामने की ओर परछी (बराम्दा) बने होते हैं। घर के छप्पर में ढालनुमा खपरैल लगे होते हैं। एक कमरे को रसोई कक्ष के रूप में उपयोग करते हैं, जिसमें रसोई उपकरण व घरेलू सामान रखते हैं, दूसरे कक्ष को शयन कक्ष के रूप में उपयोग करते हैं। परछी (बराम्दा) में अन्य घरेलू सामान जैसे ढ़ेकी, मूसल, सील-बट्टा, जांता आदि उपकरण होते हैं। 

*जनजातियों द्वारा विभिन्न लोकपर्वों एवं आयोजनों में पहने जाने वाले आभूषणों की लगी प्रदर्शनी, कलिंदर राम ने राष्ट्रपति को पैरी और गमछा किया भेंट*

इस दौरान राज्य के पारंपरिक आभूषणों की प्रदर्शनी लगाई गई। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर आभूषणों के संबंध में जानकारी ली। श्री कलिंदर राम ने राष्ट्रपति को पैरी और गमछा भेंट किया, जिसे राष्ट्रपति ने आत्मीयता के साथ स्वीकार किया। श्री कलिंदर राम ने राष्ट्रपति को बताया कि पारम्परिक आभूषण गिलट, तांबे, चांदी, सोना आदि धातु से निर्मित  हैं, जिसे विभिन्न लोकपर्वों के अवसर में धारण करते हैं। इस दौरान गले में पहने जाने वाले हसुली, बांह में बहुटा, कलाई में ऐंठी, गले में रूपया वाला चंदवा, कमर में कमरबंध, पैर में पैरी एवं पैर की अंगुलियों में बिछिया, कान में ठोठा तथा नाक में पहने जाने वाले छुछिया (फूली) का प्रदर्शन किया गया।

*वाद्ययंत्रों की लगी प्रदर्शनी*

प्रदर्शनी में जनजातियों द्वारा लोकपर्वों में मनोरंजन के लिए बजाए जाने वाले वाद्ययंत्रों का प्रदर्शन किया गया। राष्ट्रपति ने इन वाद्ययंत्रों को देखा। राज्य में निवासरत जनजातियां उत्साह के लिए तत, अवनद्ध, घन और सुषिर वाद्ययंत्रों का वादन करते हैं, जिनकी मधुर ध्वनियाँ उत्सव के अवसर में देखते ही बनते हैं। कई ऐसे वाद्ययंत्र है, जिनकी आवाजें मीलों दूर तक गुंजती है और लोगों को स्वतः नृत्य करने हेतु प्रेरित करती है। सरगुजा व बस्तर अंचल में तो कई महिनों तक निरंतर वाद्ययंत्र की आवाजें सुनाई पड़ती है। इन वाद्ययंत्रों के कारण ही जनजातियों के समृद्ध सांस्कृतिक विरासत आज भी जीवंत है। सरगुजा अंचल के जनजातियों द्वारा विभिन्न लोकपर्वां में वादन किया जाने वाले वाद्ययंत्र मांदर, ढोल, झांझ, मजीरा, तम्बूरा, सरंगी, खंजरी, बांसुरी, चौरासी, एवं पैजन आदि का प्रदर्शन किया गया है। 

*जनजातीय समुदायों द्वारा इलाज में इस्तेमाल होने वाली जड़ी-बूटियां की गई प्रदर्शित*

कार्यक्रम स्थल में आयोजित प्रदर्शनी में राज्य में निवासरत जनजातियों द्वारा शारीरिक विकार के उपचार हेतु प्रयोग की जाने वाली जड़ी-बूटियां प्रदर्शित की गई। प्रदर्शनी में अष्वगंधा, कुलंजन, मुलेठी, सफेद मूसली, गिलोय, लाल झीमटी, अर्जून छाल, पिसीया, भुईचम्पा, गोखरू, कुटज की छाल, गुडमान की पत्ति, विरैता, रोहिने की छाल, बालमखिरा, हर्रा एवं बेहड़ा बड़ी ईमली की बीज, हड़सिंगार, अकरकरा, चिरईगोड़ी, शिलाजीत एवं बलराज आदि रखे गए हैं। वनांचल, पहाड़ी, घाटी, तराई में निवास करती हैं। इनके निवास क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के औषधियाँ पेड़-पौधे कन्दमूल बेल, आदि पाए जाते हैं। जनजाति समाज के लोग शारीरिक विकार होने पर इन्हीं जंगली-जडी बूटियों से अपना उपचार कराते हैं। जनजाति समाज के वैद्य, बैगा, गुनिया, हथजोड़ वंशानुगत रूप से लोगों का उपचार करते हैं। 

*पारम्परिक व्यंजन एवं कंदमूल*
तीज-त्यौहारों, अन्य अवसरों में जनजातीय समुदायों द्वारा बनाए जाने वाले व्यंजनों की प्रदर्शनी लगाई गई। यहां विभिन्न प्रकार के रोटी, चटनी, कोहरी (बरी), लड्डू आदि रखे गए हैं। जनजातीय महिलाएं प्रकृति प्रदत्त वस्तुओं से व्यंजन तैयार करते हैं तथा जंगलों से विभिन्न प्रकार के कंदमूल, फल-फूल आदि एकत्र कर खाद्य के रूप में उपयोग करते हैं। इस दौरान कांदा-पीठारू कांदा, डांग कांदा, नकवा (चूरका) कांदा, सखईन कांदा आदि प्रदर्शित किए गए हैं।

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राष्ट्रपति ने अंबिकापुर, सरगुजा में आयोजित 'जनजातीय गौरव दिवस' समारोह में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई

रायपुर 20 नवंबर 2025/राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर, सरगुजा में आयोजित 'जनजातीय गौरव दिवस' समारोह में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।

इस अवसर पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय समुदायों का योगदान भारत के इतिहास में एक गौरवशाली अध्याय है, जो लोकतंत्र की जननी है। इसके उदाहरण प्राचीन गणराज्यों के साथ-साथ कई जनजातीय परंपराओं में भी देखे जा सकते हैं, जैसे कि बस्तर में 'मुरिया दरबार' – जो आदिम लोगों की संसद है।

राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय विरासत की जड़ें छत्तीसगढ़, ओडिशा और झारखंड सहित देश के विभिन्न हिस्सों में गहरी हैं। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि इस वर्ष छत्तीसगढ़ सरकार ने 1 नवंबर से 15 नवंबर तक जनजातीय गौरव पखवाड़े को बड़े स्तर पर मनाया।

राष्ट्रपति ने रेखांकित किया कि पिछले एक दशक में, जनजातीय समुदायों के विकास और कल्याण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर योजनाएँ विकसित और कार्यान्वित की गई हैं। पिछले वर्ष, गांधी जयंती के अवसर पर ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ शुरू किया गया था। इस अभियान का लाभ देश भर के 5 करोड़ से अधिक जनजातीय भाई-बहनों तक पहुँचेगा। वर्ष 2023 में, 75 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम-जनमन अभियान) शुरू किया गया। ये सभी योजनाएँ इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार जनजातीय समुदायों को कितनी प्राथमिकता देती है।

राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय समुदायों के विकास प्रयासों को नई ऊर्जा देने के लिए, भारत सरकार ने भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के वर्ष के दौरान ‘आदि कर्मयोगी अभियान’ शुरू किया है। उन्होंने उल्लेख किया कि इस अभियान के तहत देश भर में लगभग 20 लाख स्वयंसेवकों का एक नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये स्वयंसेवक जमीनी स्तर पर काम करके जनजातीय समुदायों का विकास सुनिश्चित करेंगे।

राष्ट्रपति ने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि छत्तीसगढ़ सहित देश भर में लोग वामपंथी उग्रवाद का रास्ता छोड़कर विकास की मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के सुविचारित और सुसंगठित प्रयासों से निकट भविष्य में वामपंथी उग्रवाद का उन्मूलन संभव हो पाएगा। उन्होंने इस बात पर खुशी व्यक्त की कि हाल ही में आयोजित 'बस्तर ओलंपिक्स' में 1,65,000 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनजातीय महापुरुषों के आदर्शों का पालन करते हुए, छत्तीसगढ़ के लोग एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण में अमूल्य योगदान देंगे।

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केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने किया छत्तीसकला ब्राण्ड एवं डिजिटल फाइनेंस बुकलेट का किया विमोचन

रायपुर, 19 नवम्बर 2025/ छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में बुधवार का दिन ग्रामीण आजीविका, महिला उद्यमिता और वित्तीय समावेशन को नई ऊर्जा देने वाला दिन रहा। जहां प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 21वीं किश्त के राज्य स्तरीय वितरण कार्यक्रम के अवसर पर केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधियों और हजारों ग्रामीण महिलाओं की उपस्थिति में बहुप्रतीक्षित एकीकृत राज्य ब्राण्ड छत्तीसकला तथा डिजिटल फाइनेंस बुकलेट का विमोचन किया।

*ग्रामीण महिला उत्पादों को मिला राज्य का पहला एकीकृत ब्राण्ड ‘छत्तीसकला’*

      राज्य की ग्रामीण गरीब महिलाओं द्वारा निर्मित गुणवत्तापूर्ण उत्पादों को एक ही पहचान और एकीकृत बाजार मंच प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य सरकार और छत्तीसगढ़ ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) ने 'छत्तीसकला' ब्राण्ड की शुरुआत की है। इस ब्रांड के अंतर्गत वर्तमान में मिलेट्स आधारित खाद्य उत्पाद, चाय, अचार, स्नैक्स, हैंडलूम एवं हस्तशिल्प निर्मित ढोकरा आर्ट, बांस शिल्प, मिट्टी एवं लकड़ी उत्पाद, अगरबत्ती एवं पूजा सामग्री जैसे विविध उत्पादों पर मानकीकरण, पैकेजिंग और ब्रांडिंग के साथ व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की योजना है। केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि छत्तीसकला ब्रांड ग्रामीण महिलाओं की मेहनत, हुनर और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनेगा। यह ब्राण्ड उनके उत्पादों को राज्य से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक ले जाएगा।


*48 बीसी सखियों की सफलता की गाथा का डिजिटल फाइनान्स बुकलेट का हुआ विमोचन*

         कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने डिजिटल फायनान्स बुकलेट का भी विमोचन किया गया,  जिसमें राज्यभर की 48 बैंकिंग कोरेस्पोंडेंट सखियों (बीसी सखियों) की प्रेरणादायक सफलताओं को दर्ज किया गया है। 

*3775 बीसी सखियाँ सक्रिय रूप  बैंकिंग सेवाएँ दे रही*

       वर्तमान छत्तीसगढ़ में कुल 3775 बीसी सखियाँ सक्रिय रूप से घर-घर बैंकिंग सेवाएँ दे रही हैं और पिछले चार वर्षों में 3033.48 करोड़ से अधिक का वित्तीय लेन-देन कर चुकी हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जो महिलाएँ कभी घरों से बाहर निकलने में संकोच करती थीं, आज वही महिलाएँ गाँव-गाँव वित्तीय सेवाएँ पहुँचाकर सामाजिक व आर्थिक परिवर्तन की राह बना रही हैं।

*हजारों स्व-सहायता समूह को मिला वित्तीय सशक्तिकरण*

     इस भव्य कार्यक्रम से ग्रामीण महिला समूहों को बड़ी वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। जिसके अंतर्गत 1080 स्व-सहायता समूहों को 1.62 करोड़ रुपए की रिवॉल्विंग निधि एवं 8340 स्व-सहायता समूहों को 50.04 करोड़ रूपए की सामुदायिक निवेश निधि, बैंक लिंकेज के रूप में 229.74 करोड़ रूपये प्रदान किये गए। इसके साथ ही 1533 महिला उद्यमियों को 6.23 करोड़ रुपए का उद्यमिता ऋण भी प्रदान किया गया है। इन वित्तीय प्रावधानों से ग्रामीण महिलाओं की आय में वृद्धि एवं नए उद्यमों की स्थापना और आर्थिक स्वावलंबन को मजबूती मिलेगी।

*ग्रामीण समृद्धि, महिला नेतृत्व और आत्मनिर्भरता की नई दिशा*

        धमतरी में हुआ यह आयोजन न केवल आर्थिक सहायता का वितरण था, बल्कि ‘आत्मनिर्भर ग्रामीण छत्तीसगढ़’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। 'छत्तीसकला' ब्राण्ड, बीसी सखी मॉडल और व्यापक वित्तीय समर्थन तीनों मिलकर ग्रामीण आजीविका की दशा और दिशा बदलने वाले साबित होंगे।

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अवैध धान भंडारण पर जिला प्रशासन का बड़ा अभियान, 06 प्रकरणों में 218 क्विंटल धान जप्त

रायपुर,20 नवंबर 2025/

खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के तहत समर्थन मूल्य पर संचालित धान खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन द्वारा अवैध धान भंडारण और परिवहन के विरुद्ध निरंतर कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में कृषि उपज मंडी बालोद की उड़न दस्ता टीम ने आज विभिन्न गांवों में सघन जांच कर बड़ी मात्रा में अवैध धान जब्त किया।

तहसीलदार श्री आशुतोष शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि उड़न दस्ता दल द्वारा मंडी अधिनियम के तहत अब तक कुल 06 प्रकरण दर्ज कर 218 क्विंटल धान जप्त किया गया है। आज की कार्रवाई में बालोद तहसील अंतर्गत ग्राम लिमोरा से 22 क्विंटल, लोण्डी से 40 क्विंटल, पोण्डी से 99 क्विंटल, भेड़िया नवागांव से 32 क्विंटल तथा बेलमांड़ से 24 क्विंटल धान अवैध भंडारण की स्थिति में पकड़ा गया।

जिला प्रशासन की यह सख्त और निरंतर निगरानी दर्शाती है कि अवैध धान के परिवहन एवं संग्रहण पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए प्रभावी कार्रवाई जारी रहेगी।

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वन विभाग की योजनाओं ने बदली ग्रामीणों की जीवनशैली,कृषकों ने 710 एकड़ राजस्व भूमि पर लगाया 4 लाख 48 हजार 220 पौधा, मिला अतिरिक्त आय का अवसर

      रायपुर, 20 नवंबर 2025/ प्रदेश में हरियाली पर्यावरण एवं ग्रामीणों के जीवन के लिए कितना महत्वपूर्ण हैं, इसका अंदाजा ग्रामीणों के जीवन के आए बदलाव से लगाया जा सकता है। वन विभाग और ग्रामीण समुदाय के लिए विकास, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सशक्तिकरण की दृष्टि से वर्ष 2024 एवं 2025 कई मायनों में काफी महत्वपूर्ण रहे है। 

   इन दो वर्षों में मोहला-मानपुर- अम्बागढ चौकी जिले में विभागीय योजनाओं ने न केवल हरियाली का विस्तार किया, बल्कि ग्रामीण अंचलों में खुशहाली और आत्मनिर्भरता के नए आयाम भी स्थापित किए।

 *वृक्षारोपण से किसानों को अतिरिक्त आय*

    किसान वृक्ष मित्र योजना के अंतर्गत 642 कृषकों ने अपनी 710 एकड़ राजस्व भूमि पर कुल 4 लाख 48 हजार 220 पौधों का रोपण किया। इस योजना ने किसानों को वृक्षारोपण के माध्यम से अतिरिक्त आय का अवसर दिया और खेतों में हरियाली का विस्तार भी किया। इसी प्रकार एक पेड़ माँ के नाम पहल के तहत मातृत्व के सम्मान में 1 लाख 55 हजार 44 पौधों का वितरण किया गया, जिसने समाज में पर्यावरण संरक्षण के साथ भावनात्मक जुड़ाव का नया संदेश दिया।

*1 लाख 16 हजार 133 मानक बोरे तेंदूपत्ता का संग्रहण*

         वन प्रबंधन समितियों को सशक्त बनाने हेतु विदोहन से प्राप्त लाभांश राशि का 20 प्रतिशत यानी 38 लाख 59 हजार 100 रुपए विकास कार्यों के लिए 34 समितियों को प्रदान किया गया। यह कदम ग्राम स्तर पर सामुदायिक विकास और वन प्रबंधन में जनभागीदारी को प्रोत्साहित कर रहा है। वहीं तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य में 76 हजार 105 संग्राहक परिवारों ने अपनी मेहनत से 1 लाख 16 हजार 133 मानक बोरे तेंदूपत्ता का संग्रहण किया और इसके बदले 63 करोड़ 87 लाख 31 हजार 500 रुपए की राशि प्राप्त की। यह न केवल उनकी आजीविका का प्रमुख साधन बनाए बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सुदृढ़ बनाया।

*लघु धान्य के संग्रहण से आदिवासी समुदाय की आय में वृद्धि*

       लघु धान्य जैसे कोदो, कुटकी और रागी के संग्रहण में 502 संग्राहकों को 3 हजार 41 क्विंटल उपज के बदले 97 लाख रुपए की राशि का भुगतान किया गया। इस योजना ने पारंपरिक फसलों के पुनर्जीवन के साथ-साथ आदिवासी समुदाय की आय में वृद्धि की है।

*38 हजार 94 महिलाओं को चरण पादुका वितरित*

      महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में वर्ष 2025 में 38 हजार 94 महिलाओं को चरण पादुका वितरित की गईं, जिससे वन क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सका।

*484 वनवासी बच्चों के सपनों को मिली नई उड़ान*

       राजमोहनी देवी तेंदूपत्ता संग्राहक योजना एवं सामुदायिक सुरक्षा योजना के अंतर्गत 574 संग्राहकों को 5 करोड़ 21लाख 72 हजार रुपए  की राशि प्रदान की गई। जिसने वनवासियों के लिए सामाजिक सुरक्षा कवच का कार्य किया। शिक्षा के क्षेत्र में भी वन विभाग ने उत्कृष्ट कार्य किया हैं। जिसके अंतर्गत 484 छात्र-छात्राओं को 58 लाख 33 हजार 500 की छात्रवृत्ति प्रदान की गई, जिससे वनवासी बच्चों के सपनों को नई उड़ान मिली।

*पहुँच विहीन गांवों को मुख्यधारा से जोडऩे के लिए 4 रपटा, 4 पुलिया एवं 3 सीसी रोड का निर्माण*

      विकास के मार्ग पर आगे बढ़ते हुए, वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र (एलडब्ल्यूई)मद के अंतर्गत पहुंच विहीन गांवों को मुख्यधारा से जोडऩे के लिए 4 रपटा, 4 पुलिया एवं 3 सीसी रोड का निर्माण किया गया। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन सुगम हुआ और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिली।

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जिला अस्पताल पंडरी बना देश का सबसे पहला और इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब (IPHL) जिला अस्पताल बलौदाबाजार बना देश का दूसरा क्वालिटी सर्टिफाइड लैब

रायपुर 20 नवंबर 2025/छत्तीसगढ़ ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। जिला अस्पताल पंडरी रायपुर और जिला अस्पताल बलौदाबाजार की इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब (IPHL) को भारत सरकार के नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस कार्यक्रम (NQAS) के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर का गुणवत्ता प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ है। इनमें पंडरी रायपुर की IPHL देश की प्रथम, जबकि बलौदाबाजार की IPHL देश एवं राज्य की द्वितीय प्रमाणित लैब बनी है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और वैज्ञानिक मानकों पर आधारित लैब सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण को प्रमाणित करती है।

राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा निरंतर किए जा रहे प्रयासों का यह सीधा परिणाम है कि जनवरी 2024 से नवंबर 2025 के बीच राज्य की कुल 832 स्वास्थ्य संस्थाओं का राष्ट्रीय मानकों के आधार पर मूल्यांकन और प्रमाणीकरण किया गया है। इनमें दंतेवाड़ा के दूरस्थ क्षेत्र चिंतागुफा जैसे दुर्गम इलाकों के स्वास्थ्य केंद्र भी शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि देश में पहली बार किसी राज्य में लैब्स की इतनी बड़ी और व्यवस्थित श्रृंखला का मूल्यांकन एवं प्रमाणीकरण हुआ है, जिसने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट स्थान दिलाया है।

दोनो लैब्स का मूल्यांकन भारत सरकार, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा नामित विशेषज्ञ मूल्यांकनकर्ताओं की टीमों ने किया। पंडरी रायपुर की IPHL का मूल्यांकन 10 सितंबर 2025, जबकि बलौदाबाजार की IPHL का मूल्यांकन 11 सितंबर 2025 को किया गया। दोनों टीमों ने लैब की कार्यप्रणाली, मरीज केंद्रित सेवाएँ, गुणवत्ता नियंत्रण, समयबद्ध रिपोर्टिंग और सुरक्षा प्रक्रियाओं की गहन समीक्षा की। मूल्यांकन उपरांत, पंडरी रायपुर IPHL को 90% और बलौदाबाजार IPHL को 88% स्कोर के साथ प्रमाणन प्राप्त हुआ। यह स्कोर स्वास्थ्य गुणवत्ता के राष्ट्रीय मानकों में उत्कृष्ट श्रेणी में आता है।

इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब की अवधारणा का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों को एक ही छत के नीचे पैथोलॉजी, बायोकैमिस्ट्री और माइक्रोबायोलॉजी से संबंधित सभी प्रकार की जांच सुविधाएं उपलब्ध हों। इससे न केवल जांच की गति और विश्वसनीयता बढ़ती है, बल्कि लोगों को महंगी निजी जांच लैब्स पर अनावश्यक निर्भरता से भी राहत मिलती है। एकीकृत मॉडल होने के कारण, मरीजों को एक ही स्थान पर किफायती और सटीक जांच रिपोर्ट उपलब्ध हो पाती है।

पंडरी रायपुर की IPHL पूरे राज्य का मॉडल लैब बन चुकी है। यहां प्रतिदिन 3,000 से अधिक जांचें की जाती हैं और 120 से अधिक प्रकार की जांच सेवाएं उपलब्ध हैं। यह लैब ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल पर कार्य करते हुए रायपुर जिले के विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से प्राप्त सैंपल की भी जांच करती है। कई बार आपातकालीन परिस्थितियों में यह लैब मेडिकल कॉलेज और अन्य जिलों से आए नमूनों की जांच भी करती रही है, जिससे इसकी क्षमता और उपयोगिता दोनों प्रमाणित होती हैं।

बलौदाबाजार की IPHL भी सेवा गुणवत्ता के मामले में तेजी से उभरती हुई लैब है। यहां प्रतिदिन 1,000 से 1,200 जांचें की जाती हैं और 100 से अधिक प्रकार की लैब टेस्टिंग उपलब्ध है। लैब में अत्याधुनिक उपकरणों, प्रशिक्षित तकनीशियनों और समयबद्ध रिपोर्टिंग की वजह से जिले के हजारों मरीजों को बड़ी राहत मिल रही है। ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों के मरीजों को अब जांच के लिए शहर या निजी लैब्स में जाने की जरूरत नहीं पड़ती।

स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा पूर्व में भी पंडरी रायपुर IPHL के मॉडल की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना की जा चुकी है। देश के 13 से अधिक राज्यों की टीमें उक्त लैब का निरीक्षण कर इसकी कार्यप्रणाली का अवलोकन कर चुकी हैं। इतना ही नहीं, भारत सरकार द्वारा इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब्स हेतु जारी की गई विस्तृत गाइडलाइन के मुख्य पृष्ठ पर रायपुर IPHL की फोटो प्रकाशित की गई है। इस मॉडल को PM–ABHIM के अंतर्गत पूरे देश में स्थापित किए जा रहे IPHL नेटवर्क के मार्गदर्शक स्वरूप में अपनाया गया है।

छत्तीसगढ़ में गुणवत्ता आधारित मूल्यांकन की यह प्रक्रिया केवल प्रमाणीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य प्रणाली में स्थायी सुधार की दिशा में एक ठोस कदम है। NQAS के मानकों में साफ-सफाई, सुरक्षा, रोगी संतुष्टि, रिकॉर्ड प्रबंधन, तकनीकी गुणवत्ता, उपकरण कैलिब्रेशन, बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट और स्टाफ क्षमता निर्माण जैसे बिंदुओं का कड़ाई से पालन अनिवार्य है। दोनों लैब्स ने इन सभी मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए यह उपलब्धि अर्जित की है।

आयुक्त सह संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला ने बताया कि NQAS कार्यक्रम भारत सरकार का एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रयास है, जिसके जरिए सरकारी अस्पतालों में गुणवत्ता सुधार को संस्थागत स्वरूप दिया जा रहा है। इस कार्यक्रम में निर्धारित चेकलिस्ट बेहद व्यापक है और प्रमाणन तभी मिलता है जब कोई संस्थान सभी मानकों पर सतत् उत्कृष्टता प्रदर्शित करे।छत्तीसगढ़ की दोनों IPHL लैब्स ने जिस दक्षता और अनुशासन के साथ सभी मापदंडों को पूरा किया है, वह राज्य के स्वास्थ्य तंत्र की मजबूती और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ गुणवत्ता सुधार पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस प्रक्रिया में लैब तकनीशियनों, चिकित्सकों और प्रबंधन टीमों ने बड़े समर्पण और परिश्रम के साथ कार्य किया है। पंडरी रायपुर और बलौदाबाजार IPHL की उपलब्धि पूरे राज्य के लिए प्रेरक है और आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों में भी इसी मॉडल को सुदृढ़ता से लागू किया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल द्वारा दोनों जिला अस्पतालों की IPHL टीमों—चिकित्सकों, तकनीशियनों और स्टाफ—को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दी गई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं छत्तीसगढ़ सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं, और IPHLs के राष्ट्रीय प्रमाणन से राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली को नई विश्वसनीयता और मजबूती मिली है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार प्राथमिक और द्वितीयक स्वास्थ्य सुविधाओं को आधुनिक उपकरणों और प्रशिक्षित मानव संसाधन से लैस कर रही है। IPHL जैसी उच्च गुणवत्ता वाली लैब्स ग्रामीण, आदिवासी और पिछड़े इलाकों में समय पर स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। आने वाले वर्षों में राज्य भर के जिला अस्पतालों और प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों को इसी मॉडल पर अपग्रेड किया जाएगा।

यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य प्रणाली के लिए केवल प्रमाणन नहीं, बल्कि यह संकेत भी है कि राज्य अब राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप गुणवत्ता केंद्रित स्वास्थ्य प्रबंधन की दिशा में अग्रसर है। IPHL मॉडल के विस्तार से रोगियों की जाँच सेवाएँ और अधिक सुलभ, तीव्र और विश्वसनीय होंगी। इसका सीधा लाभ लाखों नागरिकों को मिलेगा और राज्य के स्वास्थ्य सूचकांकों में भी उल्लेखनीय सुधार होगा। दोनों IPHL लैब्स की सफलता यह प्रमाणित करती है कि जब वैज्ञानिक मानकों, प्रशिक्षित मानव संसाधन, आधुनिक तकनीक और शासन की दृढ़ इच्छाशक्ति का संगम होता है, तब स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव संभव है। यह उपलब्धि न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरक मॉडल है और आने वाले समय में स्वास्थ्य गुणवत्ता सुधार की दिशा में नए मानक स्थापित करेगी।

*"पंडरी रायपुर और बलौदाबाजार जिलों की इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब्स को देश की प्रथम और द्वितीय क्वालिटी सर्टिफाइड IPHL बनने पर स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम को बधाई। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य तंत्र में आ रहे व्यापक, वैज्ञानिक और संरचनात्मक सुधारों का प्रमाण है। गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं, और राष्ट्रीय स्तर के इस प्रमाणन ने राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली को नई विश्वसनीयता और मजबूती प्रदान की है। IPHL मॉडल ने ग्रामीण, आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों तक विश्वसनीय जांच सेवाएँ पहुँचाने का मार्ग मजबूत किया है, और आने वाले समय में राज्य के सभी जिला अस्पतालों को आधुनिक, दक्ष और मानकीकृत मॉडल पर अपग्रेड किया जाएगा।"  - मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय*  

*"पंडरी रायपुर और बलौदाबाजार IPHL के देश की प्रथम और द्वितीय क्वालिटी सर्टिफाइड इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब बनने पर प्रदेशवासियों और पूरी स्वास्थ्य टीम को बधाई। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य प्रणाली में आए ऐतिहासिक बदलाव का परिणाम है। राज्य सरकार प्राथमिक से लेकर जिला स्तर तक सभी स्वास्थ्य संस्थानों को आधुनिक उपकरणों, प्रशिक्षित मानव संसाधन और सशक्त गुणवत्ता तंत्र से लैस कर रही है। IPHL मॉडल ने जांच सेवाओं को तेज, सटीक और किफायती बनाकर ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुँच को मजबूत किया है। आने वाले समय में इसी उच्च गुणवत्ता मॉडल का विस्तार पूरे प्रदेश में किया जाएगा, जिससे छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवा गुणवत्ता का अग्रणी राज्य बनेगा।" - स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल*

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धान खरीदी केंद्र में किसानों के लिए माइक्रो एटीएम की भी सुविधा,भीमचंद का धान बेचने के लिए कटा टोकन 

जशपुरनगर 20 नवम्बर 25/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार जशपुर जिले के सभी धान खरीदी केंद्रों में धान खरीदी कार्य सुचारू और व्यवस्थित रूप से संचालित हो रहा है। इसी क्रम में कुनकुरी धान खरीदी केंद्र पहुँचे ग्रामवासी किसान श्री भीमचंद लकड़ा ने केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं की सराहना की।

उन्होंने बताया कि वे प्रति वर्ष इसी केंद्र में धान बेचते हैं और इस वर्ष भी सभी व्यवस्थाएँ सुव्यवस्थित हैं। उन्होंने कहा कि “आज मैं ऑनलाइन टोकन कटाने आया था और मुझे बिना किसी कठिनाई के टोकन प्राप्त हो गया। अब निर्धारित तिथि को मैं धान लेकर आऊँगा।”

श्री लकड़ा ने यह भी बताया कि केंद्र में शासन द्वारा उपलब्ध कराई गई माइक्रो एटीएम सुविधा अत्यंत उपयोगी है। इससे किसान आवश्यकता अनुसार तुरंत राशि प्राप्त कर अपनी दैनिक आवश्यकताओं को पूरा कर सकते हैं। यह व्यवस्था किसानों, विशेषकर छोटे और मध्यम वर्ग के किसानों के लिए अत्यंत राहतकारी सिद्ध हो रही है।

धान खरीदी केंद्र के प्रबंधक श्री संतोष गुप्ता ने बताया कि केंद्र में शासन के सभी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित किए गए हैं। इसमें टोकन जारी करने की ऑनलाइन व्यवस्था, माइक्रो एटीएम सुविधा, बारदाना उपलब्धता, पेयजल सहित सभी आवश्यक सुविधाएँ किसानों के लिए उपलब्ध कराई गई हैं।

जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि प्रत्येक किसान को धान खरीदी प्रक्रिया सहज, पारदर्शी और समयबद्ध रूप से उपलब्ध हो, जिसके लिए प्रशासनिक अमला सतत निगरानी कर रहा है।


क्या है माइक्रो एटीएम सुविधा?
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों की सुविधा हेतु धान उपार्जन केंद्रों में माइक्रो एटीएम सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिसके माध्यम से किसान 2,000 रुपये से 10,000 रुपये तक की राशि तुरंत प्राप्त कर सकते हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की इस पहल से किसानों को बैंक शाखाओं में लंबी कतारों में लगने की आवश्यकता नहीं होगी तथा उन्हें धान बिक्री के तुरंत बाद आवश्यक राशि सहज रूप से उपलब्ध हो सकेगी। यह व्यवस्था किसानों की आर्थिक आवश्यकता को तत्परता से पूरा करने में अत्यंत सहायक सिद्ध हो रही है और धान खरीदी प्रक्रिया को और अधिक सुविधाजनक एवं सुगम बना रही है।

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कलेक्टर ने अपना गणना पत्र बीएलओ से कराया सत्यापन ,मतदाताओं से की अपील मतदाता सूची में अपने नाम का सत्यापन अनिवार्य रूप से कराए 

जशपुर 20 नवम्बर 25/  विशेष गहन पुनरीक्षण एस आई आर अभियान के तहत गुरुवार को कलेक्टर श्री रोहित व्यास को बूथ लेवल अधिकारी (#BLO) द्वारा उनके शासकीय आवास पहुँचकर उन्हें गणना प्रपत्र सौंपा गया। ततपश्चात कलेक्टर जशपुर ने गणना पत्र भरकर बीएलओ एप से सत्यापन कराया।
उन्होंने जिले के सभी मतदाताओं से अपील की है कि मतदाता सूची में अपने नाम का सत्यापन अवश्य कराएं।
उल्लेखनीय है कि जिले में बीएलओ द्वारा घर घर जाकर मतदाताओं से एसआईआर के तहत गणना पप्रत्र सौंप कर सत्यापन का कार्य निरंतर किया जा रहा है। यह कार्य 4 नवम्बर से 4 दिसम्बर 25 तक निरंतर किया जाएगा ।

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दामिनी एवं मेघदूत एप से आकाशीय बिजली एवं मौसम पूर्वानुमान की मिलेगी जानकारी

जशपुरनगर 20 नवम्बर 2025/ भारत सरकार द्वारा बाढ़, आकाशीय बिजली, वनीय आग, लू-ताप-घात आदि आपदाओं के बारे में जनसामान्य को पूर्व चेतावनी प्रदान करने हेतु सचेत, दामिनी एवं मेघदूत एप विकसित किये गए है, मोबाइल में सचेत, दामिनी एवं मेघदूत एप को गूगलप्ले स्टोर से डाउनलोड कर उपयोग करने तथा आपदा के समय जनसामान्य की सहायता एवं बचाव हेतु आपदा टोल फ्री नंबर 1070 जारी किया गया है।
             जिला प्रशासन द्वारा सभी आम नागरिकों को दामिनी एवं मेघदूत एप  को गूगलप्ले स्टोर से डाउनलोड करने हेतु सूचित किया जा रहा है। ऐप डाउनलोड कर  जानकारी प्राप्त किया जा सकता है तथा विशेष परिस्थिति में टोल फ्री नंबर 1070 पर कॉल कर संपर्क स्थापित कर सकते है।

*किसानों की फसलों का कवच बननेगा मेघदूत एप*
       मेघदूत ऐप डिजिटल इंडिया के तहत किसानों को तकनीक से जोड़ने के लिए भारत सरकार द्वारा लांच किया गया है। मौसम विभाग में मेघदूत नाम का एक ऐप विकसित किया गया है जो किसान की फसलों का सुरक्षा कवच साबित होगा। इसका उपयोग बेहद सरल है। इसके माध्यम से मौसम की जानकारी के आधार पर किसानों को फसल जोखिम प्रबंधन से संबंधित सलाह मिलती है। इस ऐप को गूगल प्ले स्टोर से किसानों को डाउनलोड करना होगा और फिर अपने मोबाइल नंबर से पंजीकरण करके मौसम की जानकारी का अलर्ट पा सकते हैं।

*दामिनी ऐप से किसानों को मिलेगी आकाशीय बिजली से सुरक्षा*
        दामिनी ऐप के माध्यम से किसानों को आकाशीय बिजली से बचाव के तरीकों के संबंध में आधे घंटे पहले ही सूचना उपलब्ध हो जाएगी। इस ऐप पर रजिस्ट्रेशन करने के उपरांत किसान की लोकेशन के अनुसार उस स्थान से 40 किलोमीटर के दायरे में आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी के बारे में ऑडियो संदेश एवं एसएमएस के माध्यम से अलर्ट मिलेगा।

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तंबाखू नही देने पर दोस्त ने की मारपीट, अस्पताल ले जाते समय, रास्ते में हो गई मौत, आरोपी गिरफ्तार,  


 जशपुर 20 नवम्बर 2025 : अशोक राम ने थाना नारायणपुर में रिपोर्ट दर्ज कराया कि दिनांक 18.11.25 की शाम करीबन 06.00 बजे, आरोपी संदीप एक्का व मृतक अशोक राम, दोनों गांव के ही एक व्यक्ति के घर के आंगन में आग तपा रहे थे, तभी आरोपी संदीप एक्का ने मृतक अशोक राम से खाने के लिए तंबाखू मांगा, जिस पर  मृतक अशोक राम के द्वारा , बोला गया कि मेरे पास इतना पैसा नहीं है कि रोज रोज तंबाखू खिलाऊं, जिस पर आरोपी संदीप एक्का व मृतक अशोक राम के मध्य विवाद होने लगा, विवाद के दौरान  मृतक अशोक राम अपने घर की ओर जाने लगा, जिसके पीछे आरोपी संदीप एक्का भी गया , आरोपी संदीप एक्का के विरुद्ध मृतक अशोक के घर जाकर, अशोक के साथ हाथ मुक्का से मारपीट करते हुए, उसे जमीन में गिरा दिया गया, व अशोक राम के सीने में लात से प्रहार किया गया था। फिर संदीप एक्का वहां से चला गया, ग्रामवासियों के द्वारा, घटना कि सूचना सरपंच को देने पर , सरपंच ने जब मृतक अशोक राम के घर जाकर देखा तो पाया कि मृतक अशोक राम दर्द से कराहते हुए, लेटा हुआ है, सरपंच के पूछने पर मृतक अशोक राम ने सरपंच को आरोपी संदीप एक्का के द्वारा, सीने में लात से मारपीट करना बताया, व दूसरे दिन सुबह ईलाज हेतु अस्पताल जाने की बात कहीं, घटना के दूसरे दिन दिनांक 19.11.25 को मृतक अशोक राम को ईलाज हेतु अस्पताल ले जाते वक्त रास्ते में ही अशोक राम ने अपना दम तोड़ दिया।
      रिपोर्ट पर पुलिस के द्वारा त्वरित कार्यवाही करते हुए आरोपी संदीप एक्का उम्र 36 वर्ष के विरुद्ध हत्या के लिए बी एन एस की धारा 103(1),332(A) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर जांच विवेचना में लिया गया।
     विवेचना के दौरान तत्काल पुलिस के द्वारा घटना स्थल पहुंच, घटना स्थल का निरीक्षण करते हुए, शव का पंचनामा किया गया व मृतक अशोक राम के शव का डॉक्टर से पोस्ट मार्डम कराया गया। डॉक्टर के शॉर्ट पी एम रिपोर्ट में डॉक्टर के द्वारा मृत्यु,मारपीट के कारण शरीर में आई चोट की वजह से होने के कारण हत्यात्मक बताया गया।
      पुलिस के द्वारा त्वरित कार्यवाही करते हुए आरोपी संदीप एक्का उम्र 36 वर्ष को, उसके घर से हिरासत में ले लिया गया। पूछताछ पर आरोपी संदीप एक्का के द्वारा अपराध स्वीकार करने व प्रयाप्त अपराध सबूत पाए जाने पर, उसे विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा जा रहा है।
    मामले की कार्यवाही व आरोपी की गिरफ्तारी में थाना प्रभारी नारायणपुर उप निरीक्षक राजकुमार कश्यप, प्रधान आरक्षक उमेश मिंज, पुरन चंद पटेल , आरक्षक इसदोर एक्का व नगर सैनिक ओम प्रकाश यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
     मामले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जशपुर शशि मोहन सिंह ने बताया, कि नारायणपुर क्षेत्र में एक गांव के दो व्यक्ति के मध्य तंबाखू मांगने के नाम पर विवाद हुआ था, मारपीट में घायल व्यक्ति की अस्पताल लेते वक्त मृत्यु हो गई, पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जिसे न्यायिक रिमांड पर भेजा जावेगा।*

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जब विभाग के लोग ही बन गए भक्षक तो कैसे होगी हरियाली,पर्यावरण संरक्षण बढ़ाने की बजाए पेड़ पर चलाई कुल्हाड़ी.....इसी तरह हरे-भरे पेड़ पर चलती रही कुल्हाड़ी तो मानव जीवन के लिए पड़ेगा भारी

फोटो को जूम कर के हरे निशान गोलाकार में देखें  इलेक्ट्रॉनिक आरा मशीन से कटाई होते दिख रही है

नारायणपुर 20 नवम्बर 2025 : विभाग  ही जब भक्षक बन जाए तो अंजाम क्या होगा, सोचा जा सकता है। नारायणपुर क्षेत्र में जिन सरकारी एजेंसियों के जिम्मे हरियाली बढ़ाने व पेड़-पौधों की रक्षा करने की जिम्मेदारी है, वही उसे एक झटके में नुकसान पहुंचाने से बाज नहीं आते। हाँ हम बात कर है बादलखोल अभ्यारण्य की  जंहा एक ओर जंगल में पेड़ों को लगाकर हरियाली लाने के लिए वन विभाग से लेकर अन्य विभाग भी लगातार कार्य कर रहे हैं लेकिन इनकी कवायद को अगर कोई पलीता लगाता है तो वह उन्हीं के विभाग के लोग ही होते हैं। यहां वन विभाग ही पेड़ो के भक्षक बनकर हरयाली का सफाया कराने पर तुले हैं। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में आये दिन कटते हरे पेड़ इसके जीते-जागते प्रमाण भी हैं। प्रतिदिन हरे पेड़ों पर होते कुल्हाड़ी के प्रहार में कहीं न कहीं वन विभाग की भी मौन सहमति प्रतीत होती है।

नारायणपुर बादलखोल अभ्यारण्य रेन्ज कार्यलय के परिसर में एक रेस्ट हाउस स्थित जंहा लगे दशकों पुराने फलदार पेड़ है जिसे यंहा के निवासी अपने परिवार का अभिन्न अंग मानते है, मगर बुधवार की सुबह साढ़े 10 बजे दिन दहाड़े बिना ख़ौफ़ के विभाग के कुछ लोगों ने एक फलदार पेड़ को काट डाला। मगर रेंज ऑफिस के किसी भी जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारियों ने इस कृत्य के विरुद्ध रोकथाम की पहल नही की,इस संबंध में कलम की आवाज की टीम ने नारायणपुर सर्किल में पदस्त वनपाल को पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस संबंध में कुछ नही मालूम ओर न ही मैंने कोई अनुमति दी।एस डी ओ से इसके बारे में पूछने से बताया कि मैं विभाग के कार्यशाला में हु ओर इसकी जानकारी मुझे नही है, वन्ही डीएफओ सरगुजा श्री श्रीनिवास तैनेटी से पूछने पर जवाब दिया गया कि मुझे इस संबंध में आपके द्वारा जानकारी मिल रही है मैं पूछ कर बताता हूं पर उनके बाद उनका जवाब 24 घण्टे बीतने के बाद भी नही मिल पाया है जबकि पेड़ की कटाई का फोटो और वीडियो दोनों भेजा जा चुका है।

 ज्ञात हो कि तीन माह पूर्व बादलखोल अभ्यारण नारायणपुर रेंज के साहीडाँड़ सर्किल में अज्ञात  तस्करों द्वारा लाखो रुपये के बड़े बड़े साल के 12 वृक्ष काटे गए ,विभाग के द्वारा इसकी जांच भी अपने स्तर पर कराई जा चुकी है परन्तु तीन माह बीत जाने के बाद भी आज पर्यन्त तक इस मामले में सम्बंधित रेन्जर सहित अन्य कर्मचारियों  की लाफ़रवाही सामने आने के वावजूद भी उनके  ऊपर कोई निलंबन की कार्यवाही नही किया गया है। आज जब नारायणपुर रेस्ट हाउस का यह मामला सामने आया तो हर कोई कहने लगा जब जंगल के रक्षक ही भक्षक बन गए तो हरियाली कैसे आएगी ।

क्या होगी कोई जांच या मामले को ठंडे बस्ते में डाला जाएगा

एक तरफ जहाँ "एक पेड़ माँ के नाम" जैसे अभियानों से पेड़ लगाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वन विभाग के भीतर पेड़ों की कटाई होने पर हरियाली बनाए रखना मुश्किल ही नही नामुकिन हो जाता है। वृक्षारोपण अभियान और वन संरक्षण कानूनों की यंहा खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है। इनके ऊपर किसी तरह की कार्यवाही न होना यह अपने आप मे एक सवाल खड़ा होता है।यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि किसी भी निर्माण या विकास कार्य के लिए पेड़ काटे जाने से पहले उचित अनुमति ली जाती और काटे गए पेड़ों की जगह नए पेड़ लगाए जाते है।

           दोषियों पर क्या होगी कोई कार्यवाही ?

बादलखोल अभ्यारण्य के कार्यालय परिसर रेस्ट हाउस के बगल में इलेक्ट्रॉनिक आरा मशीन से दशकों पुराने फलदार वृक्ष की बिना अनुमति से कटाई कर दी गई । अगर इस पेड़ से परिसर में बने रेस्ट हाउस को नुकसान था तो इसकी डगाल की छंटनी करनी थी न कि पूरा तना से काटना था । इस कटाई को लेकर  उच्च अधिकारी मौन है,सर्किल दरोगा से पूछने पर  कहना है कि हमने अनुमति नही दिया है आखिर अनुमति किसने दिया,इसकी जांच बहुत जरूरी है,जांच उपरांत जिसने भी अनुमति दिया उस पर क्या कोई कार्यवाही होगी? पेड़ की कटाई में प्रयोग में लाया गया इलेक्ट्रॉनिक आरा मशीन वन विभाग ने अब तक जप्त क्यों नही किया । सवाल तो खड़ा होना स्वाभाविक है। वन संसाधनों की सुरक्षा वन विभाग की प्राथमिकता है। ऐसे प्रकरणों पर त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए जाते है और दोषियों की पहचान कर उनके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाती है परन्तु यंहा तो 24 घण्टे के बाद भी कोई कार्यवाही होते दिख नही रही है

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शिक्षा विभाग में कसावट लाने जिला शिक्षा अधिकारी ने मनोरा में प्रधान पाठकों एवं संकुल समन्वयकों की ली बैठक,दिए सख्त निर्देश

जशपुर 20 नवम्बर 2025 :  मनोरा शिक्षा विभाग के विभिन्न योजनाओं के सुव्यवस्थित संचालन एवं कसावट के लिए जिला शिक्षा अधिकारी श्री प्रमोद भटनागर ने ज्योति कन्या उच्चतर माध्यमिक शाला घाघरा  मनोरा के सभा कक्ष में प्रधान पाठकों प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक शाला तथा सभी संकुल समन्वयकों की बैठक ले कर शासकीय योजना के अनुरूप अपार आईडी बनाने हेतु शाला में अध्ययनरत छात्रों का दिनांक 30 नवंबर तक पूर्ण करने के निर्देश दिए गए, शालाओं में अध्ययनरत पात्र छात्रों का जाति प्रमाण पत्र शत-प्रतिशत पूर्ण करने हेतु आवश्यक कार्यवाही तथा दिशा निर्देश दिया गया,एवं प्रधान मंत्री पोषण योजना के तहत विकास खंड मनोरा में समस्त शालाओं में मध्यान्ह भोजन का सुव्यवस्थित संचालन हेतू बैठक में उपस्थित विकास खंड के सभी स्व सहायता समूहों को निर्देश तथा मार्गदर्शन प्रदान किया गया। साथ ही बैठक में छात्रवृत्ति CG VSK मोबाइल ऐप के माध्यम से ऑनलाइन पंजीयन तथा ऑनलाइन उपस्थिति किए जाने के निर्देश दिए गए।

      उन्होंने बच्चों को नियमित रूप से अच्छा भोजन मिले इसलिए सभी शालाओं में अनिवार्यत:किचन गार्डन बनाने एवं अधिक से अधिक  न्यौता भोज करवाने  हेतू निर्देश दिए।अंत में विकास खंड शिक्षा अधिकारी मनोरा तरूण कुमार पटेल ने जिला शिक्षाधिकारी को धन्यवाद देते हुए उनके मार्गदर्शन का अक्षरशः पालन करने की बातें कह सभी शिक्षकों को उपरोक्तानुसार कार्य करते की बातें कहे।

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रायगढ़ : एसडीएम घरघोड़ा के नेतृत्व में राजस्व एवं खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई-ग्राम बिजना में 951 बोरी अवैध धान जब्त


रायगढ़, 19 नवम्बर 2025/मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मंशानुरूप समर्थन मूल्य पर धान खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने तथा अवैध भंडारण पर प्रभावी रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन लगातार अभियान चला रहा है। इसी क्रम में कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में आज एसडीएम घरघोड़ा श्री दुर्गा प्रसाद अधिकारी के नेतृत्व में राजस्व एवं खाद्य विभाग की संयुक्त टीम ने तहसील तमनार के ग्राम बिजना में औचक निरीक्षण किया।
          निरीक्षण के दौरान टीम को माखन गुप्ता, पिता भुनेश्वर गुप्ता के घर में बड़ी मात्रा में धान का अवैध भंडारण मिलने की जानकारी मिली। मौके पर की गई विस्तृत जांच में कुल 951 बोरी धान अवैध रूप से संग्रहित पाया गया, जिसे नियमानुसार तत्काल जब्त किया गया। इस दौरान एसडीएम ने कहा कि शासन की धान खरीदी नीति को प्रभावित करने वाली किसी भी तरह की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अवैध भंडारण और नियम विरुद्ध गतिविधियों पर प्रशासन की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पर तुरंत नियंत्रण स्थापित किया जा सके। उन्होंने किसानों और व्यापारियों से अपील की है कि वे शासन की धान खरीदी नीति का पूर्ण पालन करें और अवैध भंडारण जैसी गतिविधियों से दूर रहें। नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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दुलदुला क्षेत्र के विकास के लिए प्रतिबद्व: शौर्य प्रताप सिंह जूदेव सामुदायिक भवन निर्माण के लिए किया भूमिपूजा

जशपुर 19 नवम्बर 2025 । मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार दुलदुला क्षेत्र के विकास के लिए प्रतिबद्व है। सड़क,पानी,बिजली,शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विकास किया जाएगा। उक्त बातें डीडीसी शौर्य प्रताप सिंह जूदेव ने कही। उन्होनें कहा कि दुलदुला क्षेत्र से उनके दादा दिलीप सिंह जूदेव सहित पूरे राज परिवार का विशेष लगाव रहा है। इसलिए यहां के रहवासियों के हर सुख-दुख में राज परिवार शामिल है। डीडीसी जूदेव दुलदुला ब्लाक के झरगांव में सामुदायिक भवन निर्माण कार्य के लिए भूमि पूजा कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। झरगांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने शौर्य प्रताप का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। उन्होनें ग्रामीणों को बताया कि त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव के दौरान उन्होनें झरगांव के साथ दुलदुला,जामटोली,छेरडांड़ और केंदपानी में सामुदायिक भवन निर्माण का वायदा किया था। इन सभी स्थानों पर सामुदायिक भवन निर्माण की स्वीकृति सरकार से मिल चुकी है। इसके लिए जूदेव ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार जताया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जूदेव ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के दो साल के सुशासन में दुलदुला सहित जशपुर जिला विकास की एक नई इबारत रच रहा है। इस छोटे से समय में जिले को मेडिकल कालेज,नर्सिंग कालेज,फिजियोथेरेपी कालेज की सौगात मिल चुकी है। जिले में सड़कों का तेजी से विकास हो रहा है। आने वाले दिनों में जशपुर जिला,छत्तीसगढ़ के सबसे विकसीत जिलों में शामिल होगा।

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प्रशासनिक कार्यकुशलता और समय की पाबंदी को सुदृढ़ करने की दिशा में बड़ा कदम : मंत्रालय में अब अनिवार्य होगी आधार-आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति

रायपुर 19 नवंबर 2025/ पारदर्शिता, समयपालन और प्रशासनिक कार्यकुशलता को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने महानदी भवन और इन्द्रावती भवन में कार्यरत सभी विभागों में आधार-आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली (AEBAS) लागू करने की घोषणा की है।

आज वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में मुख्य सचिव श्री विकास शील की उपस्थिति में नए सिस्टम का लाइव प्रदर्शन किया गया, जिसमें फेसियल ऑथेंटिकेशन आधारित उपस्थिति प्रणाली तथा दीवार पर लगाए गए आधार-सक्षम बायोमेट्रिक उपकरणों का डेमो प्रस्तुत किया गया। इस प्रणाली का परीक्षण कल से प्रारंभ होगा और 01 दिसंबर 2025 से मंत्रालय में AEBAS के माध्यम से उपस्थिति अनिवार्य होगी।

मुख्य सचिव श्री विकास शील ने निर्देशित किया  है कि 01 जनवरी 2026 से यह प्रणाली सभी संचालनालयों/ विभागाध्यक्ष कार्यालयों में भी लागू कर दी जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समय पालन प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी अधिकारियों-कर्मचारियों को कड़ाई से इसका पालन करना होगा।

*कर्मचारियों के लिए उपस्थिति दर्ज करने के तरीके*

नए प्रोटोकॉल के अनुसार, प्रत्येक कर्मचारी को रोज़ाना दो बार—प्रवेश के समय “IN” और प्रस्थान के समय “OUT”—उपस्थिति दर्ज करनी होगी। इसके लिए दो विकल्प उपलब्ध किए गए हैं:

*1. मोबाइल ऐप के माध्यम से फेसियल ऑथेंटिकेशन*

कर्मचारी अपने स्मार्टफोन पर आधार-आधारित फेसियल वेरिफिकेशन के माध्यम से IN/OUT उपस्थिति दर्ज कर सकेंगे। यह प्रणाली सुविधा और बायोमेट्रिक सुरक्षा—दोनों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।

*2. प्रवेश द्वारों पर लगे आधार-सक्षम बायोमेट्रिक उपकरण*

मंत्रालय भवनों के प्रमुख प्रवेश द्वारों पर दीवार पर लगे थम्ब-बेस्ड आधार-सक्षम बायोमेट्रिक डिवाइसेज़ स्थापित किए गए हैं, जिनके माध्यम से कर्मचारी उपस्थिति दर्ज कर सकेंगे।

दोनों प्रणालियाँ समानांतर रूप से संचालित होंगी और कर्मचारी अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी विकल्प का उपयोग कर सकते हैं।

सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने सभी निर्धारित प्रवेश द्वारों पर आधार-सक्षम बायोमेट्रिक उपकरण स्थापित कर दिए हैं और नोडल अधिकारियों का प्रशिक्षण भी पूरा कर लिया है, जिससे व्यवस्थित और निर्बाध क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। सभी कर्मचारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि उनके आधार और सेवा संबंधी विवरण उपस्थिति पोर्टल में सही ढंग से अपडेट हों।नई उपस्थिति व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही, ढिलाई या अनुपालन न करने को गंभीरता से लिया जाएगा।

आधार-आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली (AEBAS) की शुरुआत राज्य सरकार की प्रशासनिक जवाबदेही, कार्यकुशलता और सेवा प्रदायगी की गुणवत्ता में सुधार लाने की प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है। यह प्रणाली न केवल विभागीय संचालन को सरल बनाएगी, बल्कि प्रशासनिक तंत्र में अनुशासन और पारदर्शिता की संस्कृति को भी स्थापित करेगी।

*“महानदी और इन्द्रावती भवन के सभी विभागों में आधार-आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली (AEBAS) का क्रियान्वयन पारदर्शिता, समयपालन और प्रशासनिक दक्षता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आज मुख्य सचिव और सभी सचिवों की उपस्थिति में फेसियल ऑथेंटिकेशन आधारित उपस्थिति प्रणाली और दीवार पर लगे आधार-सक्षम बायोमेट्रिक उपकरणों का विस्तृत प्रदर्शन किया गया। 1 दिसंबर 2025 से मंत्रालय में AEBAS आधारित उपस्थिति अनिवार्य होगी और 01 जनवरी 2026 से यह प्रणाली सभी संचालनालयों में लागू कर दी जाएगी। मैं अपेक्षा करता हूँ कि हर अधिकारी और कर्मचारी समयपालन और पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करेंगे, ताकि हम आधुनिक, तकनीक-आधारित और जवाबदेह शासन व्यवस्था की ओर निरंतर अग्रसर हो सकें।”*

*– मुख्यमंत्री विष्णु देव साय*

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रायगढ़ की महिला किसान गायत्री पैंकरा को मिला ‘फसल विविधीकरण चैम्पियन अवॉर्ड,केन्द्रीय कृषि मंत्री ने किया सम्मानित

रायगढ़, 19 नवम्बर 2025/ लैलूंगा विकासखण्ड के ग्राम गमेकेला की प्रगतिशील महिला किसान श्रीमती गायत्री पैंकरा ने टिकाऊ कृषि और बहुफसली खेती का उत्कृष्ट मॉडल प्रस्तुत करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। इसी उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए उन्हें वर्ष 2025 का ‘फसल विविधीकरण चैम्पियन अवॉर्ड’ प्रदान किया गया। यह सम्मान केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने दिल्ली में आयोजित विशेष कार्यक्रम में प्रदान किया।
             गौरतलब है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी नीति तथा प्रदेश के वित्त मंत्री श्री ओ.पी.चौधरी की पहल पर किसानों की आर्थिक तरक्की और उन्नति के लिए लगातार कार्य किए जा रहे है। कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के निर्देशानुसार एवं जिला पंचायत सीईओ श्री अभिजीत बबन पठारे के मार्गदर्शन में गायत्री पैंकरा का विशिष्ट कृषि मॉडल उनके 3 एकड़ के आम बागान को केंद्र में रखते हुए विकसित किया गया है, जिसमें एकीकृत खेती, मिट्टी संरक्षण तकनीक, जैविक उर्वरक उपयोग और फसल विविधीकरण के वैज्ञानिक तरीकों का प्रभावी समावेश है। इस अभिनव मॉडल ने उन्हें न केवल जिले में बल्कि प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर भी विशिष्ट पहचान दिलाई है। गायत्री पैंकरा सीएलएफ नारी शक्ति महिला उपसंघ मुकडेगा के अंतर्गत स्व-सहायता समूह से जुड़ीं और बिहान योजना के वित्तीय सहयोग एवं कृषि प्रशिक्षणों का लाभ उठाकर उन्नत कृषि की दिशा में निरंतर आगे बढ़ती रहीं। पौधरोपण, भूमि सुधार, मिट्टी संरक्षण और जैविक तरीके से फसल विविधीकरण जैसे कार्य उन्होंने सफलता के साथ पूरे किए, जिससे उनकी उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। उन्होंने खरीफ, रबी और जायद-तीनों मौसमों में विविध फसलें उगाकर लगभग 3.4 लाख रुपये वार्षिक आय अर्जित की। खरीफ मौसम में धान, मूंगफली, उड़द में 2.15 लाख रुपये, रबी मौसम में आलू, मटर, फूलगोभी, पत्तेदार सब्जियां में 75,000 रुपये और जायद मौसम में लोबिया, भिंडी, उड़द में 50,000 रुपये प्राप्त की। 
            गायत्री पैंकरा ने बिहान योजना के साथ-साथ नाबार्ड, उद्यानिकी विभाग और मनरेगा के सहयोग से विकसित बाड़ी मॉडल ने उनके टिकाऊ कृषि मॉडल को और मजबूती दी है। वह अब जिलेभर में महिलाओं और किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं। उन्होंने अपने अनुभवों और प्रशिक्षणों का उपयोग करते हुए न केवल अपनी खेती को उन्नत बनाया, बल्कि आसपास के किसानों को भी वैज्ञानिक खेती, फसल विविधिकरण और टिकाऊ कृषि मॉडल अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

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ऑल इंडिया फ़ॉरेस्ट स्पोर्ट्स मीट में लगातार 13वीं बार ओवरऑल चैंपियन बना छत्तीसगढ़,मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों से मुलाकात कर दी बधाई

रायपुर 19 नवंबर 2025// मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मेडिकल कॉलेज परिसर में ऑल इंडिया फ़ॉरेस्ट स्पोर्ट्स मीट में लगातार 13वीं बार ओवरऑल चैंपियन बनने वाले छत्तीसगढ़ के विजेता खिलाड़ियों से मुलाकात की। उन्होंने सभी खिलाड़ियों को इस शानदार उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से उन्होंने छत्तीसगढ़ का मान पूरे देश में ऊँचा किया है और उनकी यह उपलब्धि पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। 

उल्लेखनीय है कि देहरादून में 12 से 16 नवंबर तक आयोजित 28वीं ऑल इंडिया फ़ॉरेस्ट स्पोर्ट्स मीट में छत्तीसगढ़ ने अपना दबदबा कायम रखते हुए लगातार 13वीं बार ओवरऑल चैंपियनशिप ट्रॉफी जीती। यह विजय छत्तीसगढ़ की गौरवशाली परंपरा, अनुशासन, कठिन परिश्रम और टीम की अदम्य प्रतिबद्धता का प्रतीक है। भव्य समापन समारोह में उत्तराखंड के माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह और वन मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने संयुक्त रूप से ओवरऑल चैंपियनशिप ट्रॉफी प्रदान की, जिसे छत्तीसगढ़ की ओर से आईएफएस श्रीमती शालिनी रैना एवं दल की नोडल अधिकारी ने ग्रहण किया। उनके नेतृत्व में टीम की एकजुटता और उत्कृष्ट प्रदर्शन इस उपलब्धि की प्रमुख वजह रहा।

इस वर्ष 253 सदस्यों की मजबूत टीम के साथ छत्तीसगढ़ ने अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए कुल 150 पदक और 578 अंक हासिल किए, जो पहले रनर-अप से 221 अंकों की ऐतिहासिक बढ़त है। टीम ने 74 स्वर्ण, 34 रजत और 42 कांस्य पदक जीतकर प्रतियोगिता में अपना सर्वांगीण प्रभुत्व स्थापित किया। कई खिलाड़ियों ने व्यक्तिगत स्तर पर भी शानदार प्रदर्शन कर राज्य का गौरव बढ़ाया—जिनमें निखिल ज़ाल्को ने तैराकी में पाँच स्वर्ण जीतकर सर्वश्रेष्ठ पुरुष खिलाड़ी का खिताब प्राप्त किया। वहीं संगीता राजगोपालन ने बैडमिंटन और टेनिस में चार स्वर्ण एवं एक रजत जीतकर सर्वश्रेष्ठ महिला खिलाड़ी का सम्मान हासिल किया। इसी प्रकार थोटा संकीर्तन ने पाँच स्वर्ण जीतकर महिला ओपन वर्ग में सर्वश्रेष्ठ एथलीट बनीं। सुखनंदन लाल ध्रुव और चारुलता गजपाल ने वेटरन श्रेणी में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया।

यह ऐतिहासिक सफलता वन मंत्री श्री केदार कश्यप के दूरदर्शी मार्गदर्शन और वन बल प्रमुख श्री व्ही. श्रीनिवास राव के प्रेरक नेतृत्व का परिणाम है। उनके निरंतर सहयोग, दिशा और प्रोत्साहन ने टीम को हर बार नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। छत्तीसगढ़ वन विभाग की यह विजय केवल एक खेल उपलब्धि नहीं, बल्कि एक स्वर्णिम अध्याय है, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर खेल भावना और उत्कृष्टता का नया मानक स्थापित किया है। राज्य ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि उसकी खेल परंपरा, मेहनत और जज़्बा उसे लगातार चैंपियन बनाए रखते हैं।

इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, नान के चेयरमैन श्री संजय श्रीवास्तव, योग आयोग के अध्यक्ष श्री रूप नारायण सिन्हा, छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधीय पादप बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम, वक्फ बोर्ड के चेयरमैन डॉ. सलीम राज, वन बल प्रमुख श्री व्ही. श्रीनिवास राव सहित लघु वनोपज संघ के सदस्य तथा बड़ी संख्या में विजेता खिलाड़ी उपस्थित थे।

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