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2025 की रजत महोत्सव की 25 वीं बैठक हुई आयोजित :खनन क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की बड़ी छलांग: वर्ष 2024-25 में 15 हजार करोड़ से अधिक का राजस्व, नए खनन प्रोजेक्ट से मिली विकास को नई गति*

रायपुर, 21 अगस्त 2025 / राज्य स्तरीय भू-वैज्ञानिक कार्यक्रम मंडल छत्तीसगढ़ की रजत महोत्सव के रूप में 25वी बैठक आज सिविल लाईन स्थित न्यू सर्किट हाऊस में श्री पी. दयानंद, सचिव, छत्तीसगढ़ शासन, खनिज साधन विभाग एवं अध्यक्ष छत्तीसगढ़ भू-वैज्ञानिक कार्यक्रम मंडल की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में श्री रजत बंसल, संचालक भौमिकी तथा खनिकर्म एवं केन्द्र सरकार तथा राज्य शासन के विभिन्न विभागो, उपक्रमों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में खनिज संसाधनों के बेहतर उपयोग, नए खनन परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार करना और गत वर्ष की उपलब्धियों की समीक्षा करना रहा।

बैठक में वर्ष 2024-25 के दौरान पूरे हुए खनन कार्यों और उनसे प्राप्त उपलब्धियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया। समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पिछले वित्तीय वर्ष में प्रदेश को खनिज राजस्व के रूप में लगभग 15 हजार करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई है। यह उपलब्धि वर्ष 2023-24 की तुलना में लगभग 34 प्रतिशत अधिक है। इस वृद्धि ने न केवल प्रदेश के आर्थिक ढांचे को मजबूती दी है, बल्कि खनन क्षेत्र में नए निवेश और अवसरों के द्वार खोले हैं। छत्तीसगढ़ राज्य में खनिज अन्वेषण एवं खनिज दोहन के क्षेत्र में कार्यरत भारत सरकार एवं राज्य सरकार के विभागों एवं संस्थानों के द्वारा वर्ष 2024-25 में किये गये भू-वैज्ञानिक कार्यों की समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान जहां वर्ष 2024-25 के सम्पादित कार्यों की उपलब्धियों पर चर्चा की गई वही प्रदेश में पाये जाने वाले खनिजों की खोज के लिए वर्ष 2025-26 में प्रस्तावित भू-वैज्ञानिक कार्यों को अंतिम रूप दिया गया।

मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद ने अपने उ‌द्बोधन में कहा कि खनिज किसी भी राज्य और देश के सर्वांगीण विकास की रीढ़ होती है। राज्य में स्ट्रेटजिक एवं क्रिटिकल मिनरल की खोज राज्य में विकास के एक नए युग की शुरूआत का संकेत देती है। उन्होने कहा कि छत्तीसगढ़ में खनिज अधारित नये उद्योगों की स्थापना के लिए राज्य में विद्यमान विभिन्न खनिजों का सतत् एवं व्यवस्थित तरीके से अन्वेषण किया जाना चाहिए। बैठक में उपस्थित अन्वेषण कार्यों से संबद्ध सभी विभागों एवं संस्थानों से यह आग्रह किया गया कि छत्तीसगढ़ के समग्र विकास हेतु वे अपनी कुशलता, संसाधन एवं उपलब्ध नवीनतम तकनीकियों का उपयोग कर प्रदेश में पाये जाने वाले महत्वपूर्ण खनिजों का अन्वेषण करे। मुख्यमंत्री के सचिव और खनिज सचिव श्री दयानंद ने छत्तीसगढ़ में खनिज के विकास के लिए कार्य करने वाली एजेंसियों के मध्य उत्पादित आंकड़ों के साझा किये जाने एवं समन्वय स्थापित किये जाने की सलाह दी।

बैठक में संचालक भौमिकी तथा खनिकर्म छत्तीसगढ़ श्री रजत बंसल के द्वारा क्षेत्रीय सत्र 2024-25 में सम्पन्न कार्यों की जानकारी देते हुए बताया गया कि वर्ष 2024-25 में लगभग 2500 मिलियन टन चूनापत्थर एवं लौह अयस्क के लगभग 93 मिलियन टन भण्डार आंकलित किये गये। आगामी क्षेत्रीय सत्र 2025-26 के अन्वेषण परियोजनाओं में विभाग द्वारा महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिजों को शामिल किया गया है। यह परियोजना देश के लिए आवश्यक खनिज संसाधनों की दिशा में एक निर्णायक कदम होगा। यह आत्मनिर्भर भारत मिशन को सशक्त करेगी और रणनीतिक क्षेत्रों में सतत् एवं आत्मनिर्भर विकास को प्रोत्साहित करेगी। उन्होने कहा कि "छत्तीसगढ़ शासन वैज्ञानिक एवं विस्तृत खनिज अन्वेषण तथा विकास को पूर्ण समर्थन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।"

खान मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ में एनएमइटी के तहत वर्ष 2024-25 में चूनापत्थर हेतु 01 एवं बाक्साइट हेतु 01 अन्वेषण परियोजना की स्वीकृति प्राप्त हुई है। अधिसूचित निजी अन्वेषण संस्थान को एनएमइटी के तहत् राज्य के अन्वेषण कार्य हेतु दो प्रस्ताव स्वीकृत किये गये थे। जिसमें एक लिथियम, नियोबियम, टेण्टेलम, टाईटेनियम दुर्लभ मृदा धातुएँ एवं एक लौहअयस्क के प्रस्ताव सम्मिलित है। विभाग द्वारा निजी संस्थानों के साथ सहयोग को बढ़ावा देकर अन्वेषण एवं खनिज संसाधनों के परिशोधन को सशक्त बनाने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

केन्द्र सरकार तथा राज्य शासन के विभिन्न विभागों, उपक्रमों के प्रतिनिधियों द्वारा भी छत्तीसगढ़ राज्य में किये गये खनिज अन्वेषण कार्यों की जानकारियों प्रस्तुत की गई। सर्व प्रथम भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग के उप महानिदेशक डॉ. अमित धारवारकर द्वारा बताया गया कि छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में बाक्साइट, गोल्ड, ग्लूकोनाईट, लिथियम, टाईटेनियम दुर्लभ मृदा धातुएँ, फास्फोराइट, फ्लोराईट, लेड एवं जिंक खनिज हेतु सर्वेक्षण कार्य किया गया है। वर्ष 2025-26 में विभिन्न खनिजों के कुल 29 परियोजनाओं पर कार्य लिया जा रहा है।

संचालनालय भौमिकी तथा खनिकर्म, छत्तीसगढ़ द्वारा वर्ष 2025-26 में कुल 11 अन्वेषण परियोजना को सर्वेक्षण / पूर्वेक्षण कार्य हेतु अनुमोदित किया गया। जिसमें स्ट्रेटजिक एवं किटिकल मिनरल पर 02, ग्लूकोनाईट पर 02, लेपिडोलाईट पर 01, चूनापत्थर पर 02, लौह अयस्क पर 02 एवं बॉक्साइट पर 02 परियोजना सम्मिलित है।

इस अवसर पर आईबीएम रायपुर के रीजनल कंट्रोलर श्री प्रेम प्रकाश, रीजनल माइनिंग जियोलॉजिस्ट श्री डी. दास, जीएसआई रायपुर के डिप्टी डायरेक्टर जनरल श्री अमित ए धारवाड़कर, एएमडी के सेंट्रल रीजन के क्षेत्रीय निदेशक श्री एस.आर. मंथनवार सहित एन.एम.डी. सी., सीआईएल, वेदांता, अल्ट्राटेक, डेक्कन गोल्ड के अधिकारी एवं अन्य संबंधित विभाग के अधिकारीगण उपस्थित थे।

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*स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी स्नेक वैनम एवं एंटी रेबिस दवाइयों की उपलब्धता करें सुनिश्चित- कलेक्टर*

जशपुर, 21 अगस्त 2025/ कलेक्टर रोहित व्यास की अध्यक्षता में जिला स्तरीय स्वास्थ्य समिति की बैठक का आयोजन गुरुवार को जिला कार्यालय सभाकक्ष में किया गया।इस अवसर पर कलेक्टर ने 108 एवं 102 के अंतर्गत संचालित वाहनों के कार्यों की समीक्षा करते हुए समय पर सुविधा उपलब्ध कराने को कहा। उन्होंने 102 महतारी एक्सप्रेस की सुविधाएं 24 घंटे उपलब्ध कराने हेतु दो ड्राइवरों द्वारा शिफ्ट वार कार्य करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने मुख्यमंत्री मेडिकल यूनिट (एमएमयू) को विशेष पिछड़ी जनजाति के निवास क्षेत्रों में पहुंचा कर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने को कहा। मुक्तांजली वाहनों की उपलब्धता की समीक्षा कर उन्होंने खराब वाहनों को जल्द से जल्द ठीक कराने और तब तक वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए।
         कलेक्टर ने स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए शिकायत निवारण तंत्र एवं आकस्मिक सुविधा हेतु हेल्पलाइन विकसित करने पर के निर्देश दिए, जिसके माध्यम से लोगों को सड़क दुर्घटना सहायता, दवाइयों की उपलब्धता, स्वास्थ्य सहायता आदि सुविधाओं के साथ फीडबैक की भी सुविधा प्राप्त हो। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की डायरेक्टरी निर्माण करने के भी निर्देश दिए।
         प्रत्येक गर्भवती महिला तक पहुंच हेतु चलाये जा रहे अभियान को कलेक्टर ने प्रभावी बनाने के लिए आउटरीच कार्यक्रम के तहत सीएचओ एवं मितानिन के माध्यम से समाज के बीच पहुंच कर लोगों में संस्थागत प्रसव, परिवार नियोजन, प्रसव पूर्व जांच के महत्व के प्रति जागरूकता लाने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रत्येक गर्भवती महिला के निर्धारित तीन एएनसी चेकअप करवाकर सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने को कहा।
        उन्होंने सभी स्वास्थ्य केंद्रों में योजनाबद्ध तरीके से राष्ट्रीय क्वालिटी एसुरेन्स स्टैंडर्ड (एनक्वास) के तहत सुविधा उपलब्ध कराकर सर्टिफिकेशन प्राप्त करने को कहा। उन्होंने गैर संचारी रोगों से पीड़ितों की पहचान के लिए अधिक से अधिक जांच करने को कहा। उन्होंने स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी स्नेक वैनम एवं एंटी रेबिस दवाइयों की उपलब्धता की जानकारी लेते हुए कलेक्टर ने सभी स्वास्थ्य केंद्रों में इसकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। किसी भी मरीज को दवाइयों के कारण असुविधा ना हो इसके लिए इन दवाइयों के स्टॉक की जांच कराकर किसी भी प्रकार दवाई उपलब्ध कराने को कहा। इसके उपरांत भी यदि मरीजों को स्वयं से दवाइयां निजी दुकानों से खरीदने के लिए कोई बाध्य करता है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त आईआईटी बॉम्बे के पोषण मिशन, गर्भावस्था में योग, मानव संसाधन भर्ती, सिकलसेल उन्मूलन अभियान, राष्ट्रीय अंधत्व निवारण कार्यक्रम, मातृत्व स्वास्थ्य कार्यक्रम, शिशु टीकाकरण, एसएनसीयू संचालन, गर्भवती माताओं के टीकाकरण, तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम, कोटपा एक्ट के तहत कार्रवाई आदि पर विस्तृत चर्चा की गई। इस बैठक में सहायक कलेक्टर अनिकेत अशोक, डिप्टी कलेक्टर हरिओम द्विवेदी, सीएमएचओ डॉ जीएस जात्रा, सिविल सर्जन डॉ विनीत नंदनवार सहित सभी बीएमओ एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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*बोडाटोंगरी और बंदरचुआ में तसर पालन के संबंध प्रशिक्षण हुआ आयोजित,वैज्ञानिक तकनीकों पर दी गई जानकारी*  


 
जशपुरनगर 21 अगस्त 2025/ विज्ञान से व्यवहार तक शीर्ष से ज़िले के बोडाटोंगरी और बंदरचुआ में तसर पालन हेतु किसानों के लिए प्रशिक्षण आयोजित किया गया। जिसमें 50 किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन केन्द्रीय तसर अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान रांची की वैज्ञानिक-बी डॉ. निधि सु्खिजा तथा सहायक निदेशक रेशम श्री श्याम कुमार द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
            कार्यक्रम की शुरुआत एमआरएमए मेरा रेशम मेरा अभियान पर चर्चा से हुई। विशेषज्ञों ने समझाया कि “मेरा” शब्द का तात्पर्य है “हम इसे अर्जित करते हैं”, जो किसानों में स्वामित्व और गर्व की भावना उत्पन्न करता है, जबकि “हमारा” केवल साझेदारी को दर्शाता है।
         तकनीकी सत्रों में तसर पालन की वैज्ञानिक तकनीकों पर व्यावहारिक जानकारी दी गई, जिसमें प्रारंभिक अवस्था से लेकर अंतिम अवस्था तक की पालन प्रक्रियाएँ शामिल थीं। किसानों ने सक्रिय रूप से चर्चा में भाग लिया और देर अवस्था में होने वाले वाइरोसिस, चींटियों के हमले तथा अन्य प्रबंधन संबंधी समस्याओं पर अपने प्रश्न रखे। विशेषज्ञों ने इन चुनौतियों के समाधान हेतु वैज्ञानिक उपाय और रोकथाम के तरीके बताए, जिससे कीटों की जीवितता तथा कोया उत्पादन में सुधार हो सके।
          कार्यक्रम की अध्यक्षता सहायक निदेशक हैंडलूम श्री युगेश्वर बंजारे  एवं ग्राम पंचायत सरपंच ने की। उन्होंने इस पहल की सराहना की और किसानों से वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने की अपील किए। ताकि क्षेत्र में सतत् रेशम कीट पालन को बढ़ावा मिल सके।

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10 साल पुराने जख्म पर मरहम बनेगा कृत्रिम पैर, रायपुर में होगा इलाज : मुख्यमंत्री की संवेदनशील पहल से दुर्योधन राम को मिलेगा नया सहारा

जशपुरनगर, 21 अगस्त 2025/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की संवेदनशील पहल से दुर्योधन राम की जिंदगी एक बार फिर नई मुस्कान से भर उठेगी। लगभग 10 वर्ष पूर्व हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में दुर्योधन का दायां पैर काटना पड़ा था। यह घटना उनके लिए किसी बड़े सदमे से कम नहीं थी। मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय ने उनकी पीड़ा को समझते हुए उन्हें रायपुर इलाज के लिए भेजने का निर्णय लिया है, जहां उनके लिए कृत्रिम पैर लगाया जाएगा।
   मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले ग्राम बोकी कारीताला निवासी दुर्योधन के लिए यह दुर्घटना मानो जीवन पर पहाड़ टूटने जैसा थी। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच अच्छे अस्पताल में इलाज कराना उनके लिए बेहद कठिन था। उनकी सबसे बड़ी इच्छा यही थी कि उन्हें कृत्रिम पैर मिल सके ताकि उसे अपने  कामकाज में आसानी हो। उन्होंने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत कर अपनी व्यथा साझा की और कृत्रिम पैर लगवाने का निवेदन किया। आवेदन पर संजीदगी से संज्ञान लेते हुए कैंप कार्यालय ने तुरंत पहल की और उन्हें इलाज हेतु रायपुर भेजने का प्रबंध किया। अपनी खुशी व्यक्त करते हुए दुर्योधन राम ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आम जनता की तकलीफों को अपना समझते हैं। कैंप कार्यालय हमेशा ही आम आदमी की मदद के लिए तत्पर रहता है।

कैंप कार्यालय में स्वास्थ्य संबंधी समस्या से जूझते लोगों को मिलती है तत्काल मदद
 
  मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निजी निवास बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय आमजन के लिए उम्मीद और सहारा का केंद्र बन चुका है। यहां स्वास्थ्य की समस्या से जुझते  बगिया पहुंचने वाले जरूरतमंद लोगों को  हर संभव मदद भी सुनिश्चित की जाती है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर जिला प्रशासन ने सुलभ, त्वरित और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से "स्वास्थ्य मितान हेल्पलाइन" की शुरुआत की है। यह हेल्पलाइन सेवा जिले के उन लोगों के लिए एक वरदान साबित हो रही है, जो लंबे समय से गंभीर बीमारियों या इलाज के अभाव में परेशान थे।सीएम कैंप कार्यालय बगिया में प्राप्त आवेदन अनुसार अब तक इस पहल के अंतर्गत 2856 मरीजों को इलाज के लिए आवश्यक चिकित्सकीय सलाह, दवाइयाँ, अस्पताल में भर्ती की सुविधा, रेफरल सेवा और आवश्यकतानुसार एंबुलेंस की व्यवस्था कराई जा चुकी है।

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जोगेन्द्र यादव ने 22 अगस्त की हड़ताल में छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन से सम्बद्ध सभी कर्मचारियों से सम्मिलित होने की अपील

जशपुर : छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन से सम्बद्ध जशपुर जिला के समस्त संगठनों के जशपुर जिले के समस्त जिला कार्यकारणी पदाधिकरी,समस्त जिलाध्यक्ष व जिला पदाधिकारी/ ब्लॉक अध्यक्ष/ ब्लॉक पदाधिकारी, कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन जशपुर अंतर्गत  तहसील संयोजक गण, महिला प्रकोष्ठ पदाधिकारी गण, पेंशनर प्रकोष्ठ पदाधिकारी गण व  समस्त अधिकारी कर्मचारी साथियो से छत्तीसगढ़ प्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ  के जिला अध्यक्ष  जोगेंद्र यादव ने 22  अगस्त को एक दिवसीय हड़ताल में सम्मिलित होने की अपील की है । 
*उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रांतीय आह्वान पर जिला जशपुर  के समस्त कर्मचारी अधिकारी कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के बैनर तले 11 सूत्रीय  मांगों को लेकर दिनांक 22 अगस्त को काम बंद कलम बंद हड़ताल  में रहेंगे । 
      22 अगस्त को  जिला मुख्यालय जशपुर मे व्यापक धरना रैली प्रदर्शन करते हुवे जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री, मुख्यसचिव छ ग शासन के नाम ज्ञापन सौपा जायेगा। 
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़  प्रदेश  लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ जिला कार्यकारणी जशपुर सभी कर्मचारियों से अपील करता है कि सभी  अधिकारी / कर्मचारी अवकाश का आवेदन  अपने कार्यालय में देकर धरना स्थल में अनिवार्य रूप से उपस्थिति होने का कष्ट करेंगे*

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छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव : मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय भू-वैज्ञानिक कार्यक्रम मण्डल की बैठक 21 अगस्त को

रायपुर 20 अगस्त 2025/ छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव के अंतर्गत राजधानी रायपुर में 21 अगस्त को खनिज संसाधन विभाग द्वारा राज्य स्तरीय भू-वैज्ञानिक कार्यक्रम मण्डल की 25वीं बैठक का आयोजन किया जा रहा है। इस बैठक की अध्यक्षता खनिज संसाधन विभाग तथा मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद करेंगे। बैठक का आयोजन नवीन विश्राम भवन के कान्वेन्शन हॉल, सिविल लाइन रायपुर में प्रातः 10:30 बजे से प्रारंभ होगा। इस अवसर पर राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों, तकनीकी संस्थानों तथा निजी संस्थानों के प्रतिनिधि भाग लेंगे।

खनिज संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बैठक का मुख्य उद्देश्य समन्वय स्थापित करते हुए खनिज नीतियों को नई दिशा प्रदान करना है, जिससे खनिजों का सतत और व्यवस्थित अन्वेषण किया जा सके। इससे निजी संस्थानों की भागीदारी से सरकारी संस्थाओं के साथ समन्वय और शोध को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा इस बैठक में प्रदेश में वर्ष 2024-25 के दौरान खनिजों की खोज हेतु किए गए कार्यों पर चर्चा की जाएगी तथा वर्ष 2025-26 में खनिजों की खोज से संबंधित कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया जाएगा, जिससे राजस्व में वृद्धि के साथ-साथ नए संसाधनों की पहचान सुनिश्चित की जा सके।

बैठक में संचालनालय भौमिकी तथा खनिकर्म द्वारा वर्ष 2025-26 में प्रस्तावित कुल 11 अन्वेषण परियोजनाओं तथा भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग की 29 अन्वेषण परियोजनाओं पर चर्चा की जाएगी। इन परियोजनाओं के अंतर्गत मुख्य रूप से लिथियम, गोल्ड, ग्लूकोनाइट, लेपिडोलाइट, स्ट्रैटेजिक एवं क्रिटिकल मिनरल्स, फॉस्फोराइट, फ्लोराइट, बॉक्साइट, चूना पत्थर तथा लौह अयस्क जैसे खनिजों के अन्वेषण कार्य शामिल हैं। बैठक में इन परियोजनाओं की प्रगति और भविष्य की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

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मुख्यमंत्री श्री साय ने किसान मेला सह जैविक मेला का किया शुभारम्भ, विभिन्न शासकीय योजनाओं के तहत हितग्राहियों को किया गया लाभान्वित....सूरजपुर जिले में 211 करोड़ के कार्यों का लोकार्पण-भूमिपूजन

रायपुर 20 अगस्त 2025/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सूरजपुर जिले के तिलसिवां में आयोजित छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव कार्यक्रम का वर्चुअल रूप से शुभारंभ किया और 211 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि पूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने सूरजपुर के नए बस स्टैंड स्थित अटल परिसर में भारत रत्न स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी की आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया तथा किसान मेला सह जैविक मेला का वर्चुअली शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर हम सभी रजत जयंती वर्ष मना रहे हैं। यह अवसर छत्तीसगढ़ की गौरवशाली यात्रा का प्रतीक है। बीते 25 वर्षों में राज्य ने विकास के अनेक आयामों को स्पर्श किया है और अब हमें नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ना है। उन्होंने सभी नागरिकों से एकजुट होकर प्रदेश को प्रगति की नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का आह्वान किया। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने स्व. अटल बिहारी वाजपेयी को स्मरण करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माता अटल जी को नमन करता हूँ। उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण कर यहां के लोगों को नई पहचान दी। वे देश और प्रदेश के युवाओं के लिए सदैव प्रेरणा स्रोत रहेंगे। मुख्यमंत्री ने वाजपेयी जी के राजनीतिक जीवन, काव्य प्रतिभा और राष्ट्रहित में किए गए कार्यों का भी स्मरण किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने राज्य सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि विगत 20 महीनों में मोदी की गारंटी के तहत अनेक जनकल्याणकारी कदम उठाए गए हैं। इनमें धान की खरीदी 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से, 70 लाख महिलाओं को महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रतिमाह 1000 रुपये की सहायता, तेंदूपत्ता संग्राहकों को पुनः चरण पादुका वितरण, किसानों को धान बोनस, 5 लाख 62 हजार भूमिहीन कृषि मजदूरों को 10 हजार रुपये की आर्थिक मदद, श्रद्धालुओं के लिए रामलला दर्शन योजना, बुजुर्गों के लिए 19 तीर्थ स्थलों की यात्रा और अटल डिजिटल सेवा केंद्रों की स्थापना शामिल है। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने नक्सल उन्मूलन पर बोलते हुए कहा कि देश के गृहमंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में प्रदेश से नक्सलवाद समाप्त करने के प्रयास तेज गति से चल रहे हैं और मार्च 2026 तक बस्तर से नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि कुख्यात नक्सली बसवराजू का सफाया किया गया है तथा बड़ी संख्या में सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए हैं।

कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने वर्चुअल माध्यम से सभा को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य ने स्थापना के 25 वर्षों में विकास की नई ऊँचाइयाँ हासिल की हैं। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा के अनावरण पर उपस्थित सभी लोगों को बधाई और शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की ही देन है। उन्हीं के द्वारा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की शुरुआत की गई, जिससे गांव-गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ा गया और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि  छत्तीसगढ़ सरकार निरंतर जनहित एवं बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है। सड़क, पुल-पुलियों, पेयजल आपूर्ति और शहरी विकास के क्षेत्र में हुए कार्यों से न केवल ग्रामीण अंचलों में कनेक्टिविटी बढ़ी है, बल्कि नगरीय निकायों में भी आधारभूत संरचना का तेजी से विस्तार हुआ है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने सूरजपुर जिले को 211 करोड़ 33 लाख रुपये के विकास कार्यों की सौगात दी। इसमें 78 करोड़ 78 लाख रुपये की लागत से पूर्ण हुए 37 कार्यों का लोकार्पण किया गया, जिनमें लोक निर्माण विभाग के 04, लोक निर्माण विभाग (सेतु) के 03, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के 20, नगरीय निकाय विभाग के 04, आदिवासी विकास विभाग के 03 तथा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के 03 कार्य शामिल हैं। इसके साथ ही 132 करोड़ 55 लाख रुपये की लागत से होने वाले 55 कार्यों का भूमि पूजन किया गया, जिनमें लोक निर्माण विभाग के 14, लोक निर्माण विभाग (सेतु) के 04, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के 22, जल संसाधन विभाग सूरजपुर के 07, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के 04, पुलिस विभाग का 01 तथा आदिवासी विकास विभाग के 03 कार्य सम्मिलित हैं।

समारोह में मुख्यमंत्री श्री साय ने किसान मेला सह जैविक मेला सह प्रदर्शनी सह प्रशिक्षण का भी शुभारंभ किया। आयोजित मेले में कृषि यंत्रों, जैविक खाद, कीटनाशक एवं बीज की नवीनतम किस्मों के साथ-साथ विभिन्न विभागों की प्रदर्शनी लगाई गई। किसानों को फसल चक्र परिवर्तन, फसल विविधीकरण, जैविक एवं प्राकृतिक खेती और जल संरक्षण जैसे विषयों पर जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार युवाओं को कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने रोजगार से जुड़े ऐसे आयोजनों को युवाओं के भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण बताते हुए सभी हितग्राहियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं।

इस अवसर पर विभिन्न विभागों की योजनाओं से हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया। मछली पालन विभाग से आइस बॉक्स व नाव-जाल, समाज कल्याण विभाग से मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल, स्वास्थ्य विभाग से वयवंदन, आयुष्मान एवं सिकल सेल कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास की चाबी और चेक, महिला एवं बाल विकास विभाग से एलआईसी बॉण्ड, महिला समूहों को ऋण चेक व बकरी पालन हेतु ऋण, कृषि विभाग से सिंचाई पंप, रामतिल बीज और नलकूप-पंप अनुदान प्रदान किए गए। साथ ही एसईसीएल भटगांव क्षेत्र के 25 हितग्राहियों को रोजगार स्वीकृति आदेश भी वितरित किए गए।

कार्यक्रम में पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष श्री राजा पाण्डेय, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती चन्द्रमणी पैकरा, श्रीमती रेखा राजवाड़े, श्री लवकेश पैकरा, सूरजपुर जिले के रेडक्रॉस सोसाइटी अध्यक्ष श्री बाबूलाल अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।

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वन भूमि पर अवैध कब्जा : शनि मन्दिर के नीचे वन विभाग, राजस्व व पुलिस द्वारा संयुक्त कार्रवाई कर राजस्व सहित वन भूमि से हटाया गया अतिक्रमण

नारायणपुर 20 अगस्त 2025 : कुनकुरी वन परिक्षेत्र  अंतर्गत बनकोम्बो ग्राम पंचायत शनि मंदिर के नीचे वन एवं राजस्व भूमि पर हुए कब्जे को बुधवार को वन, राजस्व और पुलिस विभाग ने हटाया। इस अतिक्रमण को हटाने आज बड़ी संख्या में महिला पुरुष वन विभाग राजस्व विभाग और पुलिस बल मौके पर पहुंचा और वन भूमि पर बने अस्थायी छोपडी को तोड़ा इसके साथ ही सरकारी भूमि से कब्जा हटाया। ज्ञात हो कि बन कोम्बो के ग्रामीणों द्वारा कई महोनो से कब्जा हटाने को लेकर पंचयात वन विभाग और राजस्व विभासग को आवेदन दी गई थी। विभाग के द्वारा अतिक्रमणकारी को कई बार नोटिस भी किया जा चुका था। इसके बावजूद अतिक्रमणकारी द्वारा अतिक्रमण नहीं हटाया जा रहा था। इसके चलते बुधवार को प्रशासन के द्वारा कब्जा हटाने की कार्रवाई की गई । बताया जा रहा है कि हरिमोहन पिता लोथगो एवं मुरलीधर यादव पिता गुरवारु भूमि पर कब्जा कर लिया था।

यह वन विभाग का जंगल पहाड़ ओर राजस्व का कुछ भूमि है। अवैध कब्जा हटाने कई बार अतिक्रमणकारी को वन विभाग और राजस्व द्वारा नोटिस भी जारी किया गया। इसके बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाया गया था । आज वन, राजस्व और पुलिस विभाग द्वारा संयुक्त रूप से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर वन भूमि को कब्जा मुक्त किया गया था।

उक्त भूमि पर हरि मोहन, मुरली सहित तीन व्यक्तियों द्वारा छोपडी बनाकर दुकान खोल कर   अवैध कब्जा किया गया था। अतिक्रमणकारियों को पूर्व में ही नोटिस दिया गया था,आज तहसीलदार श्रीमती रितु राज सिंह,वन विभाग की टीम, जनपद उपाध्यक्ष बालेश्वर यादव, सरपंच श्रीमती सरिता अंगिरा,तुलेश्वर यादव, वीरेंद्र कुमार यादव,राजस्व निरीक्षक, हल्का पटवारी, ने पुलिस बल की उपस्थिति में इस अतिक्रमण को हटा दिया।उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे और प्रशासन की यह मुहिम आगे भी जारी रहेगी।  वन्ही वन विभाग ने आज पुनः एक कब्जाधारी विमल सिंह पिता महावीर सिंह को भी  नोटिस जारी कर एक सप्ताह के अन्दर वन भूमि से कब्जा हटाने नोटिस जारी किया है।

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लंबे समय से ग्रामीणों की मांग को मिली मंजूरी : फोटकोसेमर–साजापानी सड़क मार्ग की स्वीकृति से आवागमन में होगी सुविधा....बगिया पहुंच मुख्यमंत्री को जताया आभार

जशपुरनगर 20 अगस्त 25/ लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग कर रहे ग्रामीणों को आखिरकार बड़ी सौगात मिली है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की संवेदनशीलता और पहल पर फोटकोसेमर–सजापानी–केंदापानी से कर्राडांड होते हुए दुलदुला पहुंच मार्ग के निर्माण के लिए 5 करोड़ 84 लाख रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस 5 किलोमीटर लंबे मार्ग के बन जाने से विकासखंड मुख्यालय दुलदुला तक ग्रामीणों की आवाजाही आसान होगी।

     ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के दिनों में कीचड़ और गड्ढों से गुजरना बेहद कठिन हो जाता था। स्कूल, अस्पताल और बाजार तक पहुंचने के लिए लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ती थी। सड़क निर्माण की इस स्वीकृति से न केवल राहगीरों को कीचड़ से निजात मिलेगी बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार जैसी बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच भी सहज होगी।स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि वर्षों से लंबित यह मांग अब पूरी हो गई है।

    ग्रामीणों ने बगिया स्थित मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा स्वीकृत यह परियोजना पूरे क्षेत्र के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगी।ग्रामवासियों ने बताया कि इस सड़क के बन जाने से कर्राडांड, केंदापानी और आसपास के कई गांव सीधे विकासखंड मुख्यालय दुलदुला से जुड़ जाएंगे। इससे न केवल आवागमन सुगम होगा बल्कि कृषि उपज के परिवहन में भी आसानी होगी। किसानों को अपनी फसल उचित दामों पर बेचने में सुविधा होगी।ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि निर्माण कार्य शीघ्र शुरू होगा और समय पर पूरा भी किया जाएगा ताकि लोगों को जल्द से जल्द बेहतर सड़क सुविधा मिल सके।

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विशेष पिछड़ी जनजाति गांव दर्रीपारा में बच्चों के लिए सर्व सुविधायुक्त पीएम जनमन आंगनबाड़ी बनकर तैयार 

जशपुर 20 अगस्त 25/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने जिले के विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवारों को केन्द्र शासन और राज्य शासन की सभी योजनाओं का लाभ देने के निर्देश दिए हैं।
इसी कड़ी में विकास खंड बगीचा के 
ग्राम दर्रीपारा पारा कुटमा में विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा बसाहटों में नन्हें मुन्ने बच्चों के लिए सर्व सुविधायुक्त पीएम जनमन आंगनबाड़ी केन्द्र बनकर तैयार हो गया है।

जहां विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवारों के बच्चें उत्साह से आंगनबाड़ी केंद्र पढ़ने पहुंच रहे हैं।
 
जिला प्रशासन की पहल से बच्चों के लिए सर्व सुविधा युक्त पीएम जनमन आंगनबाड़ी केन्द्रों का निर्माण कराया जा रहा है।

महिला बाल विकास विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में कुल पीएम जनमन योजना के तहत 17 आंगनबाड़ी केंद्रों की स्वीकृति दी गई है।
इनमें बगीचा विकास खंड में 16 आंगनबाड़ी केंद्र और मनोरा विकास खंड में 1 आंगनबाड़ी केन्द्र शामिल है।

इन आंगनबाड़ी केंद्रों में विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवारों के 0 से 6 वर्ष के बच्चों को प्रतिदिन गर्म भोजन, स्वास्थ्य जांच, बच्चों का बौद्धिक विकास और प्रारंभिक शिक्षा का लाभ मिल रहा है।

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*छत्तीसगढ़ की जनजातियों को मिलेगी नई पहचान......गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय और टी.आर.के.सी. के बीच हुआ एमओयू*

*छत्तीसगढ़ की

प्रदेश की जनजातियों पर शोध और अनुसंधान की राह खुली*

रायपुर, 20 अगस्त 2025/ छत्तीसगढ़ के बस्तर और सरगुजा क्षेत्र में निवास करने वाली जनजातियों पर विशेष शोध और अनुसंधान की राह खुल गई है। राज्य की जनजातियों की गौरवशाली परंपरा, उनकी संस्कृति और उनके आर्थिक-समाजिक ताने-बाने को लेकर अब विद्यार्थी उच्च स्तरीय शोध कर पाएंगे। राज्य के गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय और ट्रायबल रिसर्च एण्ड नॉलेज सेंटर नई दिल्ली के बीच इसके लिए महत्वपूर्ण एमओयू हुआ है। टीआरकेसी विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में भारतीय जनजातियों के बारे में शोध कार्याें के लिए महत्वपूर्ण संस्था है। विश्वविद्यालय के ओर से इस एमओयू पर कुलसचिव प्रो. अभय एस रणदिवे और टीआरकेसी की ओर से छतीसगढ़ प्रभारी श्री राजीव शर्मा ने हस्ताक्षर किए। इस एमओयू के तहत् संस्था द्वारा अगले तीन वर्षों तक छत्तीसगढ़ में निवासरत जनजातियों पर शोध कार्य किए जाएंगे। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कूलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल, सौराष्ट्र विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. नीलांबरी दवे, वनवासी कल्याण आश्रम के अखिल भारतीय युवा कार्यप्रमुख श्री वैभव सुरंगे सहित अनेक प्राध्यापक, शोधार्थी, विद्यार्थी और गणमान्य नागरिक भी मौजूद थे।

एमओयू के बारे में टीआरकेसी के राज्य प्रभारी श्री राजीव शर्मा ने बताया कि टीआरकेसी देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में जनजातीय विषयों पर शोध कार्यों को बढ़ावा देने की महत्वपूर्ण संस्था है। गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर से एमओयू के बाद छत्तीसगढ़ की विभिन्न जनजातीयों पर रिसर्च तेज होगी। उन्होंने बताया कि राज्य की पुरातन और गौरवशाली जनजातीय के कई अनछुए पहलुओं और उनकी सभ्यता और संस्कृति के बारे में इन शोधों से आम नागरिकों को भी महत्वपूर्ण जानकारियां मिलेंगी। इन शोध कार्यों से सरगुजा और बस्तर के क्षेत्रों की विभिन्न जनजातियों के आदिकालीन सामाजिक संगठन, उनके अर्थशास्त्र, सुशासन, ग्रामीण उद्यमिता, सतत् विकास और नवाचार के बारे में भी लोगों को जानकारियां मिलेंगी। श्री शर्मा ने बताया कि इससे खुद जनजातीय युवा अपने गौरवशाली अतीत और उसकी व्यवस्थाओं के बारे में जान पाएंगे। 

विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने बताया कि संपादित एमओयू के बाद जनजातीयों पर संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं शुरू होंगी। क्षेत्राधारित केस स्टडी और युवाओं, प्रशासकों, जनजातीय हितधारकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, नेतृत्व विकास कार्यशालाएं और प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम भी आयोजित होंगे। युवाओं के लिए सामाजिक प्रभाव आधारित र्स्टाटअप और नवाचारों पर मार्गदर्शन तथा परामर्श सत्र रखे जाएंगे। विशेषज्ञों और प्राघ्यापकों की भागीदारी से जनजातीय वर्ग में जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे। जनजातीय पर आधारित संगोष्ठीयों, व्याख्यानों, सम्मेलनों, गोलमेज चर्चाओं तथा सार्वजनिक संवादों का भी आयोजन होगा। उन्होंने बताया कि रिसर्च वर्क से मिले परिणामों को पुस्तकालयों, अनुसंधान प्रकाशनों तथा डेटाबेस के द्वारा विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों पर उपलब्ध कराया जाएगा। इससे राज्य के जनजातीय समुदाय के बारे में अधिक से अधिक जानकारी लोगों तक पहुंच सकेगी। स्वयं जनजातीय समुदायों को भी अपने गौरवशाली अतीत के बारे में पता चलेगा और भविष्य में यह रिसर्च वर्क जनजातीयों के विषयों को शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में शामिल करने का जरिया बनेंगे।

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*राज्यपाल श्री डेका ने दिलाई मंत्रियों को शपथ....राजभवन में शपथ ग्रहण समारोह सम्पन्न*

रायपुर, 20 अगस्त 2025/ राज्यपाल श्री रमेन डेका ने आज राजभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम् में सर्वश्री गजेन्द्र यादव, राजेश अग्रवाल एवं गुरू खुशवंत साहेब को मंत्री पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, उप मुख्यमंत्री द्वय श्री अरुण साव एवं श्री विजय शर्मा, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, मंत्रीपरिषद के सदस्यगण, विधायकगण, जनप्रतिनिधिगण, मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना सहित अन्य वरिष्ठ  अधिकारीगण उपस्थित थे।

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CG Big News : मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा.! जानें किसे मिला कौन सा विभाग..पढ़ें पूरी ख़बर

Chhattisgarh News/रायपुर. साय सरकार के मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा कर दिया गया है। पुराने मंत्रियों के विभाग में बड़ा फेरबदल किया गया है। नए मंत्री गजेंद्र यादव को स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग, विधि एवं विधायी कार्य विभाग सौंपा गया है। गुरु खुशवंत साहेब को कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, अनुसूचित जाति विकास विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं राजेश अग्रवाल को पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग सौंपा गया है।

 

दरअसल, मंत्री लखन लाल देवांगन को आबकारी विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। मंत्री केदार कश्यप को परिवहन विभाग का जिम्मा दिया गया है।

 

 

फिलहाल, सीएम विष्णुदेव साय ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा है कि मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा कर दिया गया है। सुस्पष्ट कार्य विभाजन एवं दायित्व के साथ मेरे कैबिनेट के सहयोगी नई ऊर्जा के साथ छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा करने तैयार हैं। सभी मंत्री प्रदेश की आकांक्षाओं को मूर्त रूप देने, हमारे संकल्पों की सिद्धि कर यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के सपने को साकार करने, विकसित छत्तीसगढ़ बनाने में अपना योगदान देने समूची प्रतिबद्धता के साथ तैयार हैं।

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CG Big News : खनन से खुल रही समृद्धि की राह.! छत्तीसगढ़ बन गया है खनिज संपदा का गढ़..पढ़ें पूरी ख़बर

Chhattisgarh News/रायपुर. छत्तीसगढ़ राज्य अपने खनिज संसाधनों, हरियाली और सांस्कृतिक विविधता के कारण पूरे देश में विशिष्ट पहचान रखता है। रजत जयंती वर्ष (2000–2025) के इस ऐतिहासिक पड़ाव पर जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं तो साफ दिखाई देता है कि खनन ने राज्य की अर्थव्यवस्था, उद्योग और जनकल्याण योजनाओं को गति देने में केंद्रीय भूमिका निभाई है। खनन सिर्फ़ खनिजों के दोहन का माध्यम नहीं, बल्कि यह राज्य की सामाजिक-आर्थिक संरचना को मजबूत करने का जरिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में खनन क्षेत्र ने न सिर्फ नई ऊंचाइयां छुई है बल्कि यह सुनिश्चित किया गया है कि विकास और पर्यावरणीय संतुलन साथ-साथ बने रहे।

 

छत्तीसगढ़ बन गया खनिज संपदा का गढ़

 

वहीं, छत्तीसगढ़ का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 1.35 करोड़ हेक्टेयर है, जिसमें से लगभग 59.82 लाख हेक्टेयर क्षेत्र घने और हरित वनों से आच्छादित है। इन वनों की गोद में कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट, चूना पत्थर, सोना, निकल, क्रोमियम, ग्रेफाइट और अब लिथियम जैसे 28 खनिजों के विशाल भंडार छिपे हैं। खनन की दृष्टि से राज्य का महत्व इतना है कि देश की कुल खनिज उत्पादन में छत्तीसगढ़ का योगदान लगभग 15% तक पहुँच चुका है। यही कारण है कि अब छत्तीसगढ़ को “भारत का मिनरल हब” भी कहा जाने लगा है।

 

 

बता दें कि, खनन और सकल घरेलू उत्पाद (एसजीडीपी) से मिल रहा छत्तीसगढ़ को बड़ा आर्थिक सहारा

खनन का छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में योगदान देश के अन्य राज्यों की तुलना में बहुत ज़्यादा है।राज्य के एसजीडीपी में योगदान 9.38% है । राज्य के कुल आय में खनिज राजस्व का योगदान लगभग 23% है। खनिज राजस्व में 2000 से 2025 के बीच 30 गुना वृद्धि हुई है। स्पष्ट है कि खनिज राजस्व ने न केवल राज्य की आय बढ़ाई, बल्कि महतारी वंदन योजना, कृषक उन्नत योजना, तेंदू पत्ता बोनस, जल जीवन मिशन और बोधघाट बहुउद्देशीय बाँध जैसी परियोजनाओं के सफलता पूर्वक क्रियान्वयन के लिए पूंजी उपलब्ध करा रही है।

 

वहीं, खनन और पर्यावरणीय संतुलन के साथ छत्तीसगढ़ का शानदार 25 वर्ष

यह आम धारणा है कि खनन से वन क्षेत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। लेकिन छत्तीसगढ़ के आँकड़े इस मिथक को तोड़ रहे हैं। 1980 से अब तक 28,700 हेक्टेयर वन क्षेत्र को खनन के लिए परिवर्तित किया जा चुका है जो राज्य के कुल वन क्षेत्र का मात्र 0.47% है। इनमें से 27 भूमिगत खदानों में 12,783 हेक्टेयर क्षेत्र ज़रूर प्रभावित हुआ है मगर वहाँ पेड़ों की कटाई नहीं की गई। वन क्षेत्र की वास्तविक कटाई मात्र 16,000 हेक्टेयर क्षेत्र (वन क्षेत्र का 0.26%) में हुई।
इसके बावजूद 2017 से 2023 के बीच वन आवरण में वृद्धि 294.75 वर्ग किमी दर्ज की गई है और वृक्ष आवरण में वृद्धि 1809.75 वर्ग किमी हुई।
छत्तीसगढ़ में दूरदर्शिता पूर्वक खनन और वनीकरण साथ-साथ चलाया जा रहा है।

 

 

प्रतिपूरक वनरोपण और संरक्षण योजनाएं

 

दरअसल, खनन क्षेत्र में चरणबद्ध कटाई (5–6% प्रति वर्ष) की नीति अपनाई गई है। साथ ही—कैम्पा कोष में प्रति हेक्टेयर ₹11 से 16 लाख जमा होते हैं।प्रतिपूरक वनरोपण, मृदा संरक्षण, वन्यजीव प्रबंधन (परियोजना लागत का 2%) पर खर्च किया जाता है।प्रभावी रूप से प्रति हेक्टेयर ₹40–50 लाख तक पर्यावरणीय मुआवजा दिया जाता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि खनन से प्रभावित क्षेत्र पुनः हरियाली से आच्छादित हो जाएं।

 

ई-नीलामी और नये खनिजों की खोज

 

वहीं, खनन ब्लॉकों की पारदर्शी ई-नीलामी से राज्य की राजस्व क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।अब तक 44 खनिज ब्लॉक की ई-नीलामी।खनिज : लौह अयस्क, बॉक्साइट, चूना पत्थर, सोना, निकल-क्रोमियम, ग्रेफाइट, ग्लूकोनाइट और लिथियम।भारत का पहला लिथियम ब्लॉक (कोरबा, कटघोरा) छत्तीसगढ़ को मिला।
भविष्य की दिशा
‘नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन’ के तहत 56 परियोजनाओं में से 31 छत्तीसगढ़ में हैं। इससे लिथियम, निकल, ग्रेफाइट और क्रोमियम की खोज और उत्पादन तेज होगा।

 

 

रोजगार सृजन में खनन की भूमिका

 

ज्ञात हो कि, खनन सिर्फ़ राजस्व नहीं बढ़ाता, यह लोगों के जीवन स्तर को भी बदलता है।प्रत्यक्ष रोजगार : 2 लाख लोग।अप्रत्यक्ष रोजगार : 20 लाख से अधिक। इससे जुड़े उद्योग – इस्पात, सीमेंट, एल्युमीनियम, बिजली, लॉजिस्टिक्स और आधारभूत संरचना।खनन ने ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे उद्योग, परिवहन सेवाएँ, होटलिंग और निर्माण क्षेत्र को भी बल दिया है।

 

ओडिशा बनाम छत्तीसगढ़ : सीख और चुनौतियां

 

वहीं, ओडिशा ने नीलाम किए गए ब्लॉकों का शीघ्र संचालन कर खनन राजस्व को 2018-19 के 10,499 करोड़ से 2024-25 में 45,000 करोड़ तक पहुँचा दिया। छत्तीसगढ़ भी इसी दिशा में अग्रसर है। यदि आवंटित ब्लॉकों का संचालन तेज़ी से शुरू हो, तो आने वाले वर्षों में खनन राजस्व ओडिशा के बराबर या उससे अधिक हो सकता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस दिशा में त्वरित निर्णय और नीति-सुधार शुरू किए हैं।

 

जनकल्याणकारी योजनाओं को बल

 

दरअसल, खनन से प्राप्त राजस्व ने राज्य की सामाजिक योजनाओं को आधार दिया है। महतारी वंदन योजना – महिलाओं के उत्थान के लिए आर्थिक सहायता।कृषक उन्नत योजना – किसानों को उन्नत बीज और खाद की उपलब्धता।जल जीवन मिशन – हर घर नल से जल।भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना – ग्रामीण गरीबों के लिए सहायता।बोधघाट बहुउद्देशीय बाँध – 8 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई।इन योजनाओं ने दिखाया कि खनन से मिली पूंजी सीधे जनता तक पहुँच रही है।

 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का दृष्टिकोण

 

फिलहाल, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कई बार ऐसा कहा है कि “खनन केवल उद्योग का नहीं, बल्कि समाज का आधार है।” उनके नेतृत्व में खनिज ब्लॉकों की नीलामी में पारदर्शिता आई। स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार दिया गया।खनन से प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं का विस्तार किया गया।“सतत विकास” की नीति अपनाते हुए वन संरक्षण और खनन को संतुलित किया गया।
रजत जयंती वर्ष में राज्य की उपलब्धियों और शानदार भविष्य को देखते हुए रजत जयंती वर्ष में गर्व से यह कहा जा सकता है कि
“खनिजों से भरे इस भूभाग ने अब समृद्धि और सतत विकास का संतुलित मार्ग चुन लिया है, और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ नये भारत की ऊर्जा राजधानी बनने की दिशा में अग्रसर है।” मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में खनन क्षेत्र न केवल आर्थिक प्रगति का वाहक है, बल्कि यह हर नागरिक की जीवन गुणवत्ता को सुधारने का साधन भी बन गया है। आने वाले वर्षों में जब लिथियम, निकल और क्रोमियम की परियोजनाएँ मूर्त रूप लेंगी, तब छत्तीसगढ़ “भारत के ऊर्जा संक्रमण” का केंद्र बनेगा।

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*मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने शपथ के बाद नए मंत्री गजेंद्र यादव, श्री गुरु खुशवंत साहेब तथा राजेश अग्रवाल को दी बधाई*

रायपुर, 20 अगस्त 2025/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज शपथ ग्रहण करने वाले कैबिनेट के नए सदस्य श्री गजेंद्र यादव, श्री गुरु खुशवंत साहेब तथा श्री राजेश अग्रवाल को बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि नवनियुक्त मंत्रीगण अपनी समर्पित निष्ठा और कार्यकुशलता के साथ जनसेवा के लिए पूर्ण तत्परता से कार्य करेंगे तथा छत्तीसगढ़ राज्य को विकास और सुशासन की दिशा में नए आयाम प्रदान करेंगे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी मंत्रियों के उज्ज्वल कार्यकाल की मंगलकामना करते हुए कहा कि राज्य सरकार सामूहिक सहयोग और प्रतिबद्धता के बल पर जनता की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगी।

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*एकादशी पर्व पर श्री जगन्नाथ मंदिर दोकड़ा में निभाई गई द्वीप प्रज्वलन परंपरा, भजन संध्या का हुआ आयोजन, जुटे श्रद्धालु....*

दोकड़ा। एकादशी पर्व के पावन अवसर पर ग्राम दोकड़ा स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर परिसर में श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ मंदिर में द्वीप प्रज्वलन की प्राचीन परंपरा का निर्वहन किया गया।भक्तों ने भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र एवं सुभद्रा माता की आराधना करते हुए मंदिर प्रांगण को दीपों की लौ से आलोकित कर दिया। सैकड़ों दीपक जलने से पूरा मंदिर प्रांगण आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर हो उठा।इस अवसर पर भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया,जिसमें स्थानीय कीर्तन मंडलियों ने भक्तिमय गीत प्रस्तुत किए। मधुर भजनों की स्वर लहरियों और "हरे कृष्ण, हरे राम" के जयघोष से पूरा वातावरण गूंज उठा।पर्व के समापन पर भक्तों को महाप्रसाद का वितरण किया गया।

   ग्रामीणों ने श्रद्धापूर्वक महाप्रसाद ग्रहण किया और इसे सामाजिक एवं धार्मिक एकता का प्रतीक बताया।ग्रामवासियों ने बताया कि श्री जगन्नाथ मंदिर दोकड़ा में एकादशी पर्व पर द्वीप प्रज्वलन की यह परंपरा रथ यात्रा के बाद से चली आ रही है, जिसे श्री जगन्नाथ मंदिर समिति के सदस्यों ने मिलकर आगे बढ़ा रहे हैं।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, श्रद्धालुओं और भजन मंडलियों की उपस्थिति रही।

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बीटीआई ग्राउण्ड शंकर नगर में लगी ग्रामोद्योग प्रदर्शनी..... काटन, कोसा की साड़िया और सूट की महिलाएं जमकर कर रही खरीदी

रायपुर, 19 अगस्त 2025/ शंकर नगर स्थित बीटीआई ग्राउंड में लगी ग्रामोद्योग प्रदर्शनी को लोगों का उत्साहजनक प्रतिसाद मिल रहा है। प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ के उत्कृष्ट बुनकरों, हस्तशिल्पियों, माटी शिल्पियों द्वारा निर्मित उत्पाद जैसे कोसा और काटन की साड़ियां, बेडशीट, ड्रेस मटेरियल, सूट, कॉटन बैग, कोसा शाल, जैकेट, बेलमेटल, काष्ठ-बॉस शिल्प, लौहशिल्प सामग्रियों को खरीदने के लिए प्रतिदिन लोग बड़ी संख्या में यहां पहुंच रहे हैं। हस्तशिल्प और सजावटी सामग्रियां लोगों के आकर्षण का केन्द्र बनी है। घरों सजावट के लिए लोग इन्हें खरीद रहे हैं। 

यहां यह उल्लेखनीय है कि ग्रामोद्योग की यह प्रदर्शनी 7 अगस्त राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस के अवसर पर शुरू हुई थी, जो 31 अगस्त तक चलेगी। हाथकरघा विभाग की ओर से इस प्रदर्शनी में विक्रय हेतु उपलब्ध सामग्रियों पर अधिकतम 60 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। प्रदर्शनी में राज्य के बुनकरों एवं शिल्पकारों द्वारा तैयार विविध उत्पाद प्रदर्शन एवं विक्रय हेतु उपलब्ध कराए गए हैं। 

ग्रामोद्योग विभाग के सचिव सह-संचालक श्री श्याम धावड़े ने बताया कि प्रदर्शनी में बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंचकर अपने पसंद के परिधान और वस्त्रों के साथ-साथ हस्तशिल्प सामग्रियों की खरीदी कर रही हैं। यहां गोदना शिल्प, शीसल शिल्प और हाथकरघा वस्त्रों में कोसा सिल्क, टसर सिल्क, कॉटन के ड्रेस मटेरियल, साडिय़ां, टुपट्टे, चादर, बेडशीट तथा खादी वस्त्रों और ग्रामोद्योग द्वारा निर्मित सामग्रियां ने लोगों को आकर्षित किया है। त्योहारों के सीजन में भारी छूट के साथ यह प्रदर्शनी लोगों के लिए एक सौगात है। छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा विपणन संघ के सचिव श्री एम.एम. जोशी ने बताया कि ग्रामोद्योग के उत्पादों की प्रदर्शनी में खूब बिक्री हो रही है। लोग यहां लगाए गए विभिन्न स्टॉलों में पहुंचकर किफायती दरों में मिलने वाले पारंपरिक वस्त्र और हस्तशिल्प और सजावटी सामग्रियों को खरीद रहे हैं।

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*प्रदेश में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के उन्नयन के लिए सरकार प्रतिबद्ध- मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय*

अम्बिकापुर में सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल और धरमजयगढ़ में 100 बिस्तर अस्पताल स्थापित करेगा अजीम प्रेमजी फाउंडेशन

बालिकाओं को उच्च शिक्षा के लिए स्कॉलरशिप और 2500 शिशुगृह संचालित करने फाउंडेशन की योजना


रायपुर 19 अगस्त 2025/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज मंत्रालय महानदी भवन में छत्तीसगढ़ में शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के विषय में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के पदाधिकारियों और विभागीय अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक में शामिल हुए। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं के उन्नयन के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। इस दिशा सरकार द्वारा लगातार प्रयास किया जा रहा है। कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत निजी क्षेत्र की सहभागिता से सरकार के कार्यों को बल मिलेगा। बैठक में राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए स्वास्थ्य विभाग और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के मध्य एमओयू सम्पादित किया गया। 

बैठक में मुख्यमंत्री श्री साय को अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने फाउंडेशन द्वारा छत्तीसगढ़ में शिक्षा,स्वास्थ्य, क्रेच(शिशुगृह),आजीविका विकास सहित अन्य क्षेत्रों में किये जा रहे कार्यों के विषय में पॉवरपॉइंट प्रेजेंटेशन द्वारा विस्तार से जानकारी दी। मुख्यमंत्री को अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अनुराग बेहार ने बताया कि फाउंडेशन द्वारा विगत 15 वर्षों से छत्तीसगढ़ में समाज सेवा के क्षेत्र में कार्य किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश के 9 जिलों में फाउंडेशन द्वारा विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। 

मुख्यमंत्री को अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के पदाधिकारियों  ने छत्तीसगढ़ में फाउंडेशन की भविष्य की कार्ययोजना से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि अजीम प्रेमजी फाउंडेशन द्वारा अम्बिकापुर में 200-300 बिस्तर का सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल और धर्मजयगढ़ में 100 बिस्तर का सर्व सुविधायुक्त अस्पताल की योजना है। इन अस्पतालों में अस्सी प्रतिशत प्रतिशत मरीजों को पूर्णतः निःशुल्क इलाज की सुविधा प्रदान की जाएगी, जिसका सीधा लाभ आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोगों को मिलेगा। 

मुख्यमंत्री श्री साय को फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने बताया कि फाउंडेशन द्वारा छत्तीसगढ़ में शासकीय विद्यालयों से दसवीं और बारहवीं की पढ़ाई करने वाली 20 हजार बालिकाओं को उच्च शिक्षा के लिए स्कॉलरशिप प्रदान की जाएगी। इसके तहत बालिकाओं की ट्यूशन फीस के साथ अन्य खर्चों के लिए प्रतिवर्ष 30 हजार रुपये की राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने फाउंडेशन द्वारा बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने स्कॉलरशिप देने की योजना की सराहना की। 

बैठक में मुख्यमंत्री श्री साय को फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने बताया कि फाउंडेशन द्वारा प्रदेश के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शिक्षकों के प्रशिक्षण सहित अन्य महत्वपूर्ण कार्य संस्थागत रूप से किये जा रहे हैं। इसी क्रम में 6 महीने से 3 साल तक के छोटे बच्चों के लिए राज्य में 400 क्रश (शिशुगृह) संचालित हैं। सभी क्रश में बच्चों को दिन में 3 बार भोजन भी उपलब्ध कराया जा रहा है। फाउंडेशन की योजना प्रदेश में क्रेच की संख्या को बढ़ाकर 2500 से 3000 क्रेच तक करने की है। मुख्यमंत्री श्री साय ने अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि क्रश के माध्यम से बच्चों को सुरक्षित परिवेश में शिक्षा और पोषण मिलेगा।

मुख्यमंत्री श्री साय को फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने आजीविका विकास के लिए किए जा रहे कार्यों से भी अवगत कराया। उन्होंने बताया कि फाउंडेशन धरमजयगढ़ के 42 गांवों में बागवानी,कृषि, पशुपालन सहित अन्य क्षेत्रों में कार्य द्वारा लोगों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए कार्य कर रहा है। भविष्य में इस कार्य को गति देते हुए फाउंडेशन अन्य जिलों में भी आजीविका विकास के कार्य करेगा। 

बैठक में मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारीक सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेसी, सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग श्री अमित कटारिया, सचिव उच्च शिक्षा विभाग डॉ एस भारतीदासन, सचिव महिला एवं बाल विकास विभाग श्रीमती शम्मी आबिदी, अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के स्टेट हेड श्री सुनील सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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