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मुख्यमंत्री श्री साय सनातन समाज के अनुष्ठान कार्यक्रम में हुए शामिल,मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना की 

जशपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय कांसाबेल विकास खंड के ग्राम टाटीडांड में होली के पावन अवसर पर  सनातन समाज के दुर्गा देवी संत समाज द्वारा आयोजित अनुष्ठान में अपनी धर्म पत्नी श्रीमती कौशल्या साय के साथ शामिल हुए उन्होंने भगवान राधा कृष्ण की पूजा अर्चना कर प्रदेश की सुख समृद्धि और खुशहाली की  कामना की इस अवसर पर गुरु महाराज स्व श्री धनपति पंडा के पुत्र श्री सहदेव पंडा उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि हर साल फागुन माह में होली के पावन पर्व पर सनातन समाज द्वारा अनुष्ठान का आयोजन किया जाता है। और मुख्यमंत्री वर्षों से होली के पावन अवसर में शामिल होते हैं। 
उन्होंने सभी को होली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि होली रंगों और खुशियों का त्यौहार है सभी शान्ति और भाईचारे के साथ होली का पर्व मनाया।
उन्होंने कहा कि ग्राम टाटीडांड में होली के पावन पर्व पर सनातन समाज द्वारा अनुष्ठान का आयोजन किया जाता है। वे वर्षों से इस अनुष्ठान में शामिल होते हैं। उन्होंने सभी लोगों को छत्तीसगढ़ शासन की योजना का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 14 लाख लोगों को आवास बनाने के लिए स्वीकृत दी गई है। किसानों से धान खरीदी की जा रही है। और महतारी वंदन योजना के तहत 70 लाख महिलाओं को हर माह 1 हजार रूपए की राशि दी जा रही है। उन्होंने कहा कि आगामी 21 मार्च से 27 मार्च तक कुनकुरी विकास खंड में सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग मधेश्वर पहाड़ के पास महाशिवपुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है। देश के प्रसिद्ध कथा वाचक पंडित श्री प्रदीप मिश्रा कथा सुनाएंगे उन्होंने सभी को कथा सुनने के लिए आमंत्रित किया।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की धर्म पत्नी श्रीमती कौशल्या साय ने सभी को होली की शुभकामनाएं दी और अपने अनुभव साझा किए इस अवसर पर सनातन समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को होली की दी शुभकामनाएं  बगिया में सरल सहज मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे लोगों और होली की दी शुभकामनाएं 

जशपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय बगिया में बड़ी संख्या में लोग होली की शुभकामनाएं देने पहुंचे। मुख्यमंत्री ने सभी को आत्मीयता से मुलाकात करके गुलाल लगाया और अपनी शुभकामनाएं दी इस अवसर पर कलेक्टर श्री रोहित व्यास एस एस पी श्री शशि मोहन सिंह, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार जनप्रतिनिधिगण,आम नागरिक पत्रकार बंधु उपस्थित थे

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गर्मी आते ही बिजली की आंख मिचौली से उपभोक्ताओं की बढ़ी परेशानी

 

नारायणपुर : क्षेत्र में गर्मी आते ही विद्युत व्यवस्था को लेकर आम जनता की परेशानी भी शुरू होते दिख रही है। आजकल नारायणपुर में  गर्मी के मौसम में बिजली की आंख मिचौली की समस्या के साथ-साथ ग्रामीण अंचल के लोग भी खासा परेशान व त्रस्त है।

 गर्मी के इस मौसम में नारायणपुर में आजकल कई बार बिजली के आंख मिचौली का सामना करना पड़ रहा हैं। लोगों का कहना है कि तेज धूप व गर्मी की शुरुआत होते ही बिजली की आंख मिचौली व अघोषित कटौती इस समय आग में घी डालने का काम करती है। किसी भी वक्त बिजली गुल हो जाती है, एक दिन में कई बार बिजली गुल होना आम बात हो गई है 

क्षेत्र में कब बिजली आएगी और कब कटेगी, इसका कोई समय-सारणी ही नहीं है। बिजली की आंख मिचौली ने लोगों का जीना हराम कर दिया है। बिजली विभाग द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बिजली की आंख मिचौली को लेकर सब स्टेशन में कारण पूछने पर जवाब भी सीधा न देकर यह कहा जाता है कि लाइन फाल्ट है जब लाइन पूरा बन्द हो जाएगा तब पता चलेगा फाल्ट का। फिर कहा जाता है कि हवा चलने से ऐसा हो रहा है।  कई तरह के जबाब देकर उपभोक्ताओं  को गुमराह में रखा जाता है।गर्मी के मौसम में लोगों को नियमित रूप से बिजली न रहने से परेशानी और भी बढ़ गई है. मौसम में परिवर्तन आने के बाद बिजली की आपूर्ति में भी परिवर्तन होने लगा है. जिसका सबसे अधिक असर छात्रों व किसानों पर पड़ रहा है।गर्मी के मौसम में लोगों को नियमित रूप से बिजली नहीं मिलने से परेशानी और भी बढ़ गई है।

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मिनीमाता जयंती पर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उन्हें किया नमन,नारी शिक्षा और मजदूरों के कल्याण के लिए उनके प्रयास ऐतिहासिक रहे


 रायपुर :मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने महान समाजसेविका एवं छत्तीसगढ़ की प्रथम महिला सांसद मिनीमाता की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने कहा कि मिनीमाता जी का संपूर्ण जीवन समाज में व्याप्त छुआछूत, गरीबी, अशिक्षा और पिछड़ेपन को दूर करने के लिए समर्पित था।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नारी शिक्षा और मजदूरों के कल्याण के लिए उनके प्रयास ऐतिहासिक रहे हैं। उन्होंने सामाजिक बुराइयों के खिलाफ न केवल आवाज उठाई, बल्कि उन्हें समाप्त करने के लिए संघर्ष भी किया। वंचितों, शोषितों और महिलाओं के सशक्तिकरण में उनका योगदान अमूल्य है। श्री साय ने कहा कि मिनीमाता जी का सेवाभावी, कर्मठ और प्रेरणादायी व्यक्तित्व सभी के लिए मार्गदर्शक है। उनके विचार और कार्य हमें समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए सदैव प्रेरित करते रहेंगे।

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छत्तीसगढ़ का पहला स्थल कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान विश्व धरोहर की सूची में हुआ शामिल,बस्तर को मिलेगी अंतर्राष्ट्रीय पहचान

रायपुर :छत्तीसगढ़ के  कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान (KVNP) को यूनेस्को की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची में प्राकृतिक श्रेणी के अंतर्गत शामिल किया गया है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि ये छत्तीसगढ़ के लिये बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि ये हर्ष का विषय है कि यूनेस्को द्वारा कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान को विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया गया है । कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान न केवल जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, बल्कि यह स्थानीय जनजातीय संस्कृति और इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा देता है। इस सूची में शामिल होने से बस्तर क्षेत्र को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी एवं पर्यटन को और भी बढ़ावा मिलेगा । यह उपलब्धि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है ।
उल्लखेनीय है कि यह उद्यान तीन महत्वपूर्ण मापदंडों—प्राकृतिक सौंदर्य, भूवैज्ञानिक विशेषताएँ, और जैव विविधता पर खरा उतरता है।  कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान प्रबंधन द्वारा उद्यान को  यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार को प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था,  जिसे यूनेस्को द्वारा अपने अस्थाई सूची में चयन किया गया है।
कांगेर घाटी में प्राकृतिक सौंदर्य और अनूठी संरचनाएँ
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान अपने मनमोहक प्राकृतिक दृश्यों, हरी-भरी घाटियों, गहरी खाइयों और झरनों के लिए प्रसिद्ध है। तीरथगढ़ जलप्रपात, जो कांगेर नदी से निकलता है, 150 फीट की ऊंचाई से गिरता हुआ एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है। कांगेर नदी अपने स्वच्छ जल और अनूठी चट्टानी संरचनाओं के कारण महत्वपूर्ण पर्यटन  स्थल है। इसके अलावा, कोटमसर, कैलाश, दंडक और ऐसी १५ से अधिक गुफाएँ अपने अद्वितीय प्राकृतिक स्वरूप और ऐतिहासिक महत्व के कारण देश और विदेश के पर्यटकों और वैज्ञानिकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं।
भूवैज्ञानिक विशेषताएँ और जैव विविधता
यह उद्यान अपनी भूवैज्ञानिक विविधता के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ की कार्स्ट संरचनाएँ, चूना पत्थर की गुफाएँ, जल संरचनाएँ और चट्टानी परतें वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए अध्ययन का एक महत्वपूर्ण केंद्र हैं। इस क्षेत्र में भूवैज्ञानिक परिवर्तन देखे जाते हैं।  चूना पत्थर की गुफाएँ पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है |
 जैवविविधता से भरपूर यह उद्यान में विभिन्न वनस्पति, वन्यजीव और विशेष प्रजाति के प्रजातीय पाए जाते है| 963 प्रकार की वनस्पतियाँ, जिनमें 120 फ़ैमिली  और 574 प्रजातियाँ शामिल हैं। यहाँ दुर्लभ ऑर्किड की 30 प्रजातियाँ दर्ज की गई हैं। 49 स्तनपायी, 210 पक्षी, 37 सरीसृप, 16 उभयचर, 57 मछलियाँ और 141 तितली प्रजातियाँ है । बस्तर हिल मैना (छत्तीसगढ़ का राज्य पक्षी), ट्रैवणकोर वुल्फ स्नेक, ग्रीन पिट वाइपर, मोंटेन ट्रिंकेट स्नेक जैसी दुर्लभ प्रजातियाँ है ।
बस्तर क्षेत्र में पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति को संरक्षित करता है। यहाँ गोंड और धुरवा जनजातियाँ रहती हैं, जो अपनी पारंपरिक रीति-रिवाजों, नृत्य, लोकगीतों और त्योहारों के लिए प्रसिद्ध हैं। इस क्षेत्र में स्थानीय आदिवासियों द्वारा हस्तशिल्प कला जैसे  बांस शिल्प कलाकृतियाँ विशेष रूप से लोकप्रिय हैं।  यहाँ के आदिवासी समुदाय प्रकृति से गहराई से जुड़े हुए हैं और जंगलों से जुड़ी अनेक कहानियाँ और मान्यताएँ पीढ़ियों से चली आ रही हैं। इको-टूरिज्म और साहसिक पर्यटन गतिविधियों में  जंगल सफारी, बर्ड वॉचिंग, ट्रेकिंग ,कयाकिंग बम्बू राफ्टिंग , कैम्पिंग , होमस्टे , गुफा भ्रमण और फोटोग्राफी के  बेहतरीन अवसर मिलते हैं, जिससे यह रोमांचक पर्यटन स्थल बनता है। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक गुफाएँ, वन्यजीव, और सांस्कृतिक विरासत इसे छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल करते हैं। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान  के विशेषता को देखते हुए इसे यूनेस्को ने अस्थायी सूची में शामिल किया गया है । उद्यान को यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल किया जाने से बस्तर क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल से जोरा नाला कंट्रोल स्ट्रक्चर से इंद्रावती नदी की मुख्य धारा में पानी छोड़ा गया


 रायपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर जोरा नाला कंट्रोल स्ट्रक्चर में जल प्रवाह को नियंत्रित कर इंद्रावती नदी की मुख्य धारा में पानी छोड़ा गया है। ओडिशा सरकार की सहमति के बाद स्ट्रक्चर में रेत की बोरियां डालकर पानी का प्रवाह सुनिश्चित किया गया, जिससे इंद्रावती नदी में जल स्तर में वृद्धि हुई है।
मुख्यमंत्री श्री साय के निर्देश पर जल संसाधन मंत्री श्री केदार कश्यप ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल से इंद्रावती नदी के जल संकट के समाधान हेतु चर्चा की। इस पर केंद्रीय मंत्री ने छत्तीसगढ़ एवं ओडिशा के मुख्यमंत्रियों को समस्या के निराकरण हेतु आवश्यक निर्देश दिए। जिसके परिणामस्वरूप उड़ीसा राज्य की सहमति से जोरा नाला कंट्रोल स्ट्रक्चर को अस्थायी रूप से एक फीट ऊंचा किया गया, जिससे इंद्रावती नदी के जल प्रवाह में सुधार हुआ।
इसके अतिरिक्त, इंद्रावती नदी के अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम में जमा रेत को हटाने का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है, जिसे अप्रैल के पहले सप्ताह तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस संबंध में कलेक्टर श्री हरिस एस के मार्गदर्शन में अपर कलेक्टर श्री सी.पी. बघेल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री महेश्वर नाग और जल संसाधन विभाग के ईई श्री वेद पांडेय ने स्थानीय किसानों को जिला कार्यालय के प्रेरणा सभा कक्ष में पूरी जानकारी दी।
इंद्रावती नदी और जोरा नाला की समस्या
इंद्रावती नदी का उद्गम ओडिशा राज्य के कालाहांडी जिले के रामपुर धुमाल गांव से हुआ है। यह नदी 534 किलोमीटर की यात्रा के बाद गोदावरी नदी में मिलती है। नदी का कैचमेंट एरिया 41,665 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें ओडिशा में 7,435 वर्ग किमी, छत्तीसगढ़ में 33,735 वर्ग किमी और महाराष्ट्र में 495 वर्ग किमी शामिल हैं।
ओडिशा राज्य की सीमा पर ग्राम सूतपदर में इंद्रावती नदी दो भागों में बंट जाती है। एक भाग इंद्रावती नदी के रूप में 5 किमी बहकर ग्राम भेजापदर के पास छत्तीसगढ़ में प्रवेश करता है, जबकि दूसरा भाग जोरा नाला के रूप में 12 किमी बहते हुए शबरी (कोलाब) नदी में मिल जाता है। पहले जोरा नाला का पानी इंद्रावती में आता था, लेकिन धीरे-धीरे इसका बहाव बढ़ने से इंद्रावती का जल प्रवाह कम हो गया।
समस्या गंभीर होने पर दिसंबर 2003 में ओडिशा और छत्तीसगढ़ के प्रमुख अभियंताओं की बैठक में जोरा नाला के मुहाने पर जल विभाजन के लिए कंट्रोल स्ट्रक्चर बनाने का निर्णय लिया गया। यह स्ट्रक्चर ओडिशा सरकार द्वारा बनाया गया, जिसकी डिज़ाइन केंद्रीय जल आयोग (CWC) ने तैयार की। निर्माण के बाद भी जोरा नाला में अधिक पानी जाने से छत्तीसगढ़ को ग्रीष्म ऋतु में औसतन 40.71% और ओडिशा को 59.29% जल प्रवाह मिला।
राज्य सरकार की पहल से समाधान की दिशा में प्रगति
इंद्रावती नदी में न्यूनतम जल प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने कई प्रयास किए। 6 जनवरी 2021 को ओडिशा और छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने संयुक्त निरीक्षण किया। इस निरीक्षण में कंट्रोल स्ट्रक्चर के अपस्ट्रीम में जलभराव रोकने के लिए रेत और बोल्डर हटाने तथा जोरा नाला के घुमाव को सीधा करने का अनुरोध किया गया।
वर्ष 2018 के बाद इंद्रावती नदी में सतत जल प्रवाह कम होने की समस्या बनी हुई थी। अब राज्य सरकार के प्रयासों से ओडिशा सरकार का सहयोग प्राप्त हुआ है, जिससे नदी के जल प्रवाह को संतुलित करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इससे इंद्रावती नदी में जल प्रवाह बढ़ेगा और किसानों को सिंचाई के लिए पानी की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

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वाहन चेकिंग के दौरान इनोवा कार में बनाये गए लाकर से निकले डेढ़ करोड़ से अधिक की नगदी नोट, रुपये के साथ दो अन्तर्राजीय आरोपी गिरप्तार

रायपुर पुलिस द्वारा प्रतिदिवस वाहन चेकिंग का विशेष अभियान चलाया जा रहा है,इसी तारतम्य में आज थाना आमानाका के द्वारा टाटीबंध थाना के पास वाहन चेकिंग की जा रही थी वाहन के दौरान सभी वाहन के डिक्की को चेक किया जा रहा था वाहन इनोवा क्रिस्टा क्रमाक 23-BH-8886J को रोका गया जिसमे दो व्यक्ति बैठे हुये थे जिन्से पुछताछ पर नागपुर जाना बताये एंव और पुछता करने पर घबराने लगे वाहन के पीछे डिक्की को चेक करवाने से मना करने लगे तब शंका होने वाहन के पीछे डिक्की को अच्छी तरीके से चेक किया गया जिसमे सीट के नीचे एक पृथक से लॉकर बनाया गया था जिसे खुलवाने पर लॉकर मे भारी मात्रा मे पैसा रखा हुआ मिला जिस सबंध मे थाना प्रभारी आमानाका द्वारा तत्काल जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दिया गया दोनो व्यक्तियों से उक्त रूपये के सबंध पुछताछ किया गया जो सही जवाब नही दे पाये वाहन एंव आरोपी तथा पैसो को समक्ष गवाहन के जप्त किया पैसो की गिनती की गई जो 1,66,99,900/- रूपये होना पाया गया आरोपियो के विरूद्ध धारा 106 बीएनएस के तहत कार्यवाही की गई है।स्रोत एजेंसी

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर होली के अवसर पर अम्बेडकर अस्पताल में 24 घंटे जारी रहेगी आपात चिकित्सा सेवा  


रायपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल और स्वास्थ्य मंत्री श्री श्यामबिहारी जायसवाल के दिशानिर्देश पर होली के त्योहार को ध्यान में रखते हुए अम्बेडकर अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने की व्यवस्था की गई है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य संबंधित विभागों को अलर्ट मोड में रहने के लिए निर्देशित किया है।
होली के दौरान किसी भी प्रकार की दुर्घटना या आपातकालीन चिकित्सा स्थिति के संभावित मामलों को देखते हुए आपात चिकित्सा सेवाओं को चौबीसों घंटे चालू रखने के निर्देश दिए गए हैं। होली के दिन 14 मार्च को शासकीय अवकाश होने के कारण ओपीडी (बाह्य रोगी विभाग) बंद रहेगा, लेकिन इमरजेंसी सेवाएं पूर्ववत 24 घंटे उपलब्ध रहेंगी।
आपात चिकित्सा सेवाओं को लेकर विशेष प्रबंध
आपातकालीन वार्डों में जीवन रक्षक दवाओं और आवश्यक संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। मेडिकल स्टाफ को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल सहायता दी जा सके। सभी डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को इमरजेंसी ड्यूटी के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया गया है। मरीजों को समय पर इलाज मिल सके, इसके लिए ट्रॉमा और इमरजेंसी यूनिट को विशेष रूप से सशक्त किया गया है।
सुरक्षा व्यवस्था भी होगी चाक-चौबंद
अस्पताल परिसर में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा गार्ड और बंदूकधारी गार्ड तैनात किए गए हैं।  सिक्योरिटी सुपरवाइजर को विशेष सतर्कता बरतने और सुरक्षा स्टाफ को चौकसी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। आपात स्थिति में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय पुलिस से समन्वय किया गया है।
डीकेएस अस्पताल तक एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध
गंभीर मरीजों को आवश्यकतानुसार  चिकित्सा सुविधा प्रदान करने के लिए डीकेएस अस्पताल स्थित सुपर स्पेश्यलिटी विभाग में भेजने की  प्रक्रिया को तेज और सुगम बनाने के लिए अम्बेडकर अस्पताल से डीकेएस अस्पताल तक एम्बुलेंस सेवा 24 घंटे सक्रिय रहेगी। अस्पताल प्रशासन ने सभी नागरिकों से आग्रह किया है कि होली का त्योहार सावधानीपूर्वक मनाएं और किसी भी आकस्मिक चिकित्सा स्थिति में घबराए बिना अस्पताल की आपातकालीन सेवाओं का लाभ उठाएं।

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छत्तीसगढ़ व्यवसायिक परीक्षा मंडल द्वारा मत्स्य निरीक्षक भर्ती परीक्षा 23 मार्च को  


रायपुर : छत्तीसगढ़ व्यवसायिक परीक्षा मंडल द्वारा 23 मार्च 2025 को संचालनालय मछली पालन विभाग के अंतर्गत मत्स्य निरीक्षक भर्ती परीक्षा (FF124) का आयोजन 23 मार्च 2025 को किया जाएगा। अभ्यर्थी 13 मार्च 2025 से छत्तीसगढ़ व्यवसायिक परीक्षा मंडल की आधिकारिक वेबसाइट से अपने प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त अभ्यर्थी पंजीकृत मोबाईल नंबर पर प्राप्त एसएमएस के यूआरएल को क्लिक कर सीधे अपने मोबाईल से प्रवेश पत्र प्राप्त कर प्रिंट आउट ले सकते है। प्रवेश पत्र के बिना किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी। परीक्षा केंद्र में मूल फोटो पहचान पत्र अनिवार्य रूप से लाना होगा। अधिक जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर 0771-2972780 एवं मो. नं. +91-82698-01982 पर संपर्क किया जा सकता है।

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आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग द्वारा राज्य में मृत्यु के कारणों के चिकित्सकीय प्रमाणीकरण पर कार्यशाला हुआ आयोजित


 रायपुर :आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग द्वारा राज्य में मृत्यु के कारणों के चिकित्सकीय प्रमाणीकरण (एमसीसीडी) विषय पर राजधानी रायपुर में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में राज्यभर के चिकित्सकों, जनगणना निदेशालय, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया।
कार्यशाला में आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के अपर संचालक ने एमसीसीडी की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए अस्पतालों से अधिक संख्या में एमसीसीडी प्रपत्र प्राप्त करने और आंकड़ों की गुणवत्ता सुधारने करने, एमसीसीडी की प्रक्रिया को बेहतर बनाने और विभिन्न विभागों में समन्वय पर जोर दिया। जनगणना कार्य निदेशालय छत्तीसगढ़ के उप निदेशक ने एमसीसीडी में अब तक किए गए प्रयासों की जानकारी दी और राज्यभर के अस्पतालों से एमसीसीडी प्रपत्रों के संग्रहण की आवश्यकता पर जोर दिया।
एम्स रायपुर के विशेषज्ञों का तकनीकी सत्र
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायपुर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. स्वप्निल अखाड़े ने एमसीसीडी एवं आईसीडी-10 (International Classification of Diseases&10) के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने फॉर्म-4 को सही तरीके से भरने, मृत्यु के कारणों को क्रमबद्ध लिखने और अंग्रेजी में स्पष्ट एवं बोल्ड अक्षरों में दर्ज करने की तकनीकी जानकारी दी। साथ ही एमसीसीडी आंकड़ों के आधार पर स्वास्थ्य नीतियों के निर्माण में सरकार को होने वाले लाभ पर भी चर्चा की।

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विधानसभा परिसर में आज होली मिलन समारोह में हुआ रंग-गुलाल से सराबोर,विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष सहित सभी विधायकों ने खेली होलीमंत्री-विधायकों ने फाग गीतों पर जमकर झूमे

रायपुर : विधानसभा परिसर में आज होली मिलन समारोह का रंगारंग आयोजन हुआ, जिसमें विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत सहित तमाम विधायकों ने एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएँ दीं। आयोजन का पूरा माहौल होली के उल्लास में सराबोर रहा। मंत्रियों और विधायकों ने पारंपरिक फाग गीतों की मनमोहक प्रस्तुति दी, जिस पर विधानसभा सदस्य झूमते नजर आए।
मंत्री-विधायकों के फाग गीतों से गूंजा विधानसभा परिसर
होली मिलन समारोह में लोक परंपरा का विशेष रंग देखने को मिला। मंत्री-विधायकों द्वारा गाए गए फाग गीतों से विधानसभा परिसर में सांस्कृतिक समृद्धि की झलक दिखी।
  राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने मुख मुरली बजाए, छोटे से श्याम कन्हैया गीत की मधुर प्रस्तुति दी।विधायक श्री अनुज शर्मा ने का तैं मोला मोहिनी डाल दिये रे और रंग बरसे गीत गाकर समां बांध दिया। विधायक श्री कुंवर सिंह निषाद ने फागुन मस्त महीना और चना के डार राजा गीत गुनगुनाया। विधायक श्री दिलीप लहरिया ने नदिया के पार म, कदली कछार म गीत सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
विधायक श्री रामकुमार यादव और श्रीमती चातुरी नंद ने भी फाग गीतों से समां बांधा।
डॉ. सुरेंद्र दुबे की कविताओं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बढ़ाया रंग
    लोकप्रिय कवि डॉ. सुरेंद्र दुबे ने अपनी हास्य और होली की रंगीन कविताओं से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके अलावा श्री राकेश तिवारी और उनकी टीम ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने डॉ. सुरेंद्र दुबे, श्री राकेश तिवारी व उनकी टीम को सम्मानित किया।
    इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव, वनमंत्री श्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, खाद्य मंत्री श्री दयालदास बघेल, श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन, विधायक श्री अजय चंद्राकर, श्री धर्मलाल कौशिक, श्री पुरंदर मिश्रा, श्री धर्मजीत सिंह, श्री मोतीलाल साहू, श्री सुशांत शुक्ला, श्री संदीप साहू, गुरु खुशवंत साहेब, श्री भैयालाल राजवाड़े, श्री ईश्वर साहू, श्री कुंवर सिंह निषाद, श्री रिकेश सेन, श्री रामकुमार यादव, श्रीमती भावना बोहरा, श्री योगेश्वर राजू सिन्हा, श्री अटल श्रीवास्तव, श्री ललित चंद्राकर सहित विधानसभा के अधिकारी, कर्मचारी एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

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बस्तर पंडुम 2025: लोकसंस्कृति और परंपराओं का भव्य उत्सव,बस्तर पंडुम का लोगो मुख्यमंत्री ने किया अनावरण,बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने की अनूठी पहल 

रायपुर : बस्तर के लोग जीवन का हर पल उत्सव की तरह जीते हैं और अपनी खुशी की अभिव्यक्ति के लिए उनके पास समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है। बस्तर में शांति स्थापना के लिए हम तेजी से अपने कदम बढ़ा रहे हैं और बस्तर पंडुम के माध्यम से बस्तर के लोकजीवन और लोकसंस्कृति को सहेजने के साथ ही उनकी उत्सवधर्मिता में हम सहभागी बनेंगे। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज विधानसभा परिसर स्थित समिति कक्ष में मांदर की थाप पर नाचते कलाकारों की मौजूदगी में बस्तर पंडुम 2025 के लोगो का अनावरण किया और यह बातें कही। उन्होंने बस्तर पंडुम के सफल आयोजन के लिए अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह आयोजन सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ ही बस्तर के प्रतिभाशाली कलाकारों को सशक्त मंच प्रदान करेगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने बस्तर पंडुम के बुकलेट का विमोचन किया।
 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि हमारी सरकार बनने के बाद बस्तर का विकास और वहां के लोगों को मुख्य धारा से जोड़ना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल रहा है। बस्तर को माओवाद से मुक्त करने की दिशा में हमने तेजी से अपने कदम बढ़ाए हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर ओलंपिक और हाल ही में आयोजित अबूझमाड़ पीस हॉफ मैराथन में भी बस्तर वासियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। यह दर्शाता है कि बस्तर वासियों का विश्वास लगातार शासन के प्रति बढ़ा है और वे क्षेत्र में शांति और अमन-चैन चाहते हैं।
        मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमने बजट में नक्सली हिंसा से ग्रसित रहे पुवर्ती गांव में भी अस्पताल खोलने का बड़ा निर्णय लिया है। नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से हम बस्तर वासियों के मूलभूत जरूरत को तेजी से पूरा कर रहें हैं।
        मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के लोग अपनी सादगी के लिए जाने जाते हैं और हर मौके को अपने खास अंदाज में सेलिब्रेट करते हैं । बस्तर पंडुम के माध्यम से बस्तर के असल जीवन को और करीब से देखा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम में नृत्य, गीत, लोककला, लोकसंस्कृति, नाट्य, शिल्प, रीति- रिवाज, परंपरा और व्यंजन सहित विभिन्न 7 विधाओं में प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएगी। श्री साय ने कहा कि बस्तर में खुशहाली हो, लोग भयमुक्त होकर अपने अंदाज में जिये और उन्हें शासन की सभी सुविधाओं का लाभ मिले।
       इस मौके पर उप मुख्यमंत्री श्री अरूण साव, उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, विधायक श्री किरण देव, विधायक सुश्री लता उसेंडी, विधायक श्री विनायक गोयल, संस्कृति विभाग के सचिव श्री अन्बलगन पी. और संचालक संस्कृति श्री विवेक आचार्य मौजूद रहे।
बस्तर की पहचान को दर्शा रहा है बस्तर पंडुम का लोगो
     बस्तर पंडुम के लोगो में बस्तर के लोकजीवन को जीवंत रूप में प्रदर्शित किया गया है और यह उनकी सांस्कृतिक पहचान से गहरे से जुड़ा हुआ है। बस्तर के विरासत को बहुत ही कलात्मक ढंग से दिखाने का प्रयास इसमें किया गया है।  "बस्तर पंडुम" गोंडी का शब्द है जिसका अर्थ है बस्तर का उत्सव। प्रतीक चिन्ह में बस्तर की जीवनरेखा इंद्रावती नदी, चित्रकूट जलप्रपात, छत्तीसगढ़ का राजकीय पशु वनभैंसा, राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना, बायसन हॉर्न मुकुट, तुरही, ढोल, सल्फी और ताड़ी के पेड़ को शामिल गया है। इस प्रतीक चिन्ह के माध्यम से सरल, सहज और उम्मीदों से भरे अद्वितीय बस्तर को आसानी से जाना और समझा जा सकता है।
नृत्य, गीत समेत 07 प्रमुख विधाओं पर केंद्रित होगा आयोजन
‘‘बस्तर पंडुम 2025’’ में जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, पारंपरिक वेशभूषा एवं आभूषण, शिल्प-चित्रकला और जनजातीय व्यंजन एवं पारंपरिक पेय से जुड़ी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। ये स्पर्धाएं तीन चरणों में संपन्न होंगी। जनपद स्तरीय प्रतियोगिता 12 से 20 मार्च, जिला स्तरीय प्रतियोगिता 21 से 23 मार्च, संभाग स्तरीय प्रतियोगिता दंतेवाड़ा में 1 से 3 अप्रैल तक सम्पन्न होगी। प्रत्येक स्तर पर प्रतिभागियों को विशेष पुरस्कार और प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे।
बस्तर के लोकजीवन और परंपराओं पर आधारित आयोजन होंगे प्रमुख आकर्षण
    बस्तर पंडुम में बस्तर की पारंपरिक नृत्य-शैली, गीत, रीति-रिवाज, वेशभूषा, आभूषण और पारंपरिक व्यंजनों का शानदार प्रदर्शन होगा। प्रतियोगियों के प्रदर्शन को मौलिकता, पारंपरिकता और प्रस्तुति के आधार पर अंक दिए जाएंगे। आयोजन में समाज प्रमुखों, जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ नागरिकों को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाएगा। प्रतियोगिता के विजेताओं के चयन के लिए एक विशेष समिति बनाई गई है, जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ आदिवासी समाज के वरिष्ठ मुखिया, पुजारी और अनुभवी कलाकार शामिल रहेंगे। इससे प्रतियोगिता में पारदर्शिता बनी रहेगी और पारंपरिक लोककला को न्याय मिलेगा।

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स्कूलों में चढ़ा होली का रंग : माय छोटा स्कूल जशपुर ने मना होली महोत्सव,नन्हे मुन्हे हुए रंग से सराबोर,गाने में थिरकते रहे बच्चे और शिक्षिकाएं

जशपुर : आज स्कूल की छुट्टी होते ही छात्र छात्राओं ने एक दूसरे को खूब रंग गुलाल लगाया। इस मामले में शिक्षक भी पीछे नहीं रहे। उन्होंने भी होली खेली और एक दूसरे को होली की बधाई दी।
माय छोटा स्कूल जशपुर (प्ले स्कूल) बिजली टोली में बुधवार को छोटे छोटे बच्चो ने स्कूल में खूब होली खेली। छात्र-छात्राओं ने एक दूसरे को जमकर गुलाल लगाया। वहीं शिक्षकों ने भी बच्चों के साथ इस होली मिलन कार्यक्रम को उत्सुकता के साथ इस कार्यक्रम को मनाया। स्कूल के संचालक मनीष गुप्ता ने बताया कि होली प्रेम और सौहार्द तथा आपसी भाईचारे का त्योहार है। उन्होंने सभी बच्चों को होली का त्योहार सावधानी पूर्वक मनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा की प्राकृतिक रंगों से ही होली खेलें। छुट्टी के बाद घर जाने वाले छात्र छात्राएं अबीर व गुलाल से सराबोर दिखाई दिए।
*होली के गानों में थिरके बच्चे*

शहर के माय छोटा स्कूल जशपुर (प्ले स्कूल) बिजली टोली में बुधवार को होली सेलिब्रेशन हुआ। जिसमें बच्चों ने खूब मस्ती की। साथ ही कई शिक्षाप्रद बातें भी सीखी। नीला रंग आकाश और समुद्र का रंग है। इसे अक्सर गहराई और स्थिरता से जोड़ा जाता है। नीला रंग विश्वान ज्ञान, आत्मविश्वास, बुद्धि और सच्चाई का प्रती अवसर पर नन्हे मुन्ने बच्चो ने होली के गानों पर थिरकते हुए नजर आए।
इस अवसर पर संस्था की प्राचार्या  मनीषा गुप्ता , शिक्षिका अर्चना मुखर्जी, वर्षा पांडे, कल्पना खेस, जयंती गुप्ता, सरोजनी यादव, किरण बेक, रेणु बेक सहित स्कूल के नंन्हे मुन्ने बच्चे शामिल थे।

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चुनाव प्रक्रिया को विधिक ढांचे के भीतर और सुदृढ़ करने आयोग ने पार्टी अध्यक्षों और वरिष्ठ नेताओं को किया आमंत्रित साथ ही किसी भी अनसुलझे मुद्दों पर सुझाव मांगे 


 
रायपुर : भारतीय निर्वाचन आयोग ने सभी राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों से 30 अप्रैल 2025 तक उन किसी भी अनसुलझे मुद्दों पर सुझाव मांगे हैं, जो संबंधित निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO), जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) या मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) के स्तर पर लंबित हैं। राजनीतिक दलों को आज जारी एक व्यक्तिगत पत्र में, आयोग ने यह भी प्रस्ताव रखा है कि पार्टी अध्यक्षों और वरिष्ठ नेताओं के साथ परस्पर सहमति से सुविधाजनक समय पर बातचीत की जाएगी, जिससे स्थापित विधिक प्रावधानों के अनुरूप चुनावी प्रक्रियाओं को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।
इससे पहले, गत सप्ताह आयोजित निर्वाचन आयोग के एक सम्मेलन में, मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO), जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO) को निर्देश दिया था कि वे राजनीतिक दलों के साथ नियमित संवाद करें, उन बैठकों में प्राप्त सुझावों का समाधान पूर्व निर्धारित विधिक ढांचे के तहत करें और 31 मार्च 2025 तक आयोग को कार्यवाही रिपोर्ट प्रस्तुत करें। आयोग ने राजनीतिक दलों से इस विकेंद्रीकृत संवाद प्रक्रिया का सक्रिय रूप से उपयोग करने का भी आग्रह किया।
राजनीतिक दल, 28 प्रमुख हितधारकों में से एक हैं, जिन्हें संविधान और वैधानिक ढांचे के तहत आयोग द्वारा चुनावी प्रक्रियाओं के सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए चिह्नित किया गया है।
आयोग ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और 1951; निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण  नियम, 1960; निर्वाचन संचालन नियम, 1961; माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश; तथा भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा समय-समय पर जारी किए गए दिशा-निर्देश, नियमावली और हैंडबुक (जो निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं) एक विकेंद्रीकृत, मजबूत और पारदर्शी विधिक ढांचे की स्थापना करते हैं, जिससे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों का सफल आयोजन सुनिश्चित हो सके।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुख्यमंत्री निवास में आध्यात्मिक गुरु एवं द आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने सौजन्य मुलाकात कर प्रदेशवासियों के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया

रायपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से आज मुख्यमंत्री निवास में आध्यात्मिक गुरु एवं द आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों की सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना करते हुए श्री श्री रविशंकर का आशीर्वाद प्राप्त किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीकस्वरूप, जशपुर जिले में स्थित विश्व के सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग - मधेश्वर पहाड़ का छायाचित्र एवं बस्तर आर्ट शैली में निर्मित नंदी की प्रतिकृति भेंट कर श्री श्री रविशंकर का अभिनंदन किया।
श्री श्री रविशंकर ने मुख्यमंत्री श्री साय को अवगत कराया कि इस बार वे अपने साथ 1000 वर्ष पुराने सोमनाथ मंदिर के खंडित शिवलिंग के अवशेष लेकर आए हैं। उन्होंने बताया कि इस ऐतिहासिक शिवलिंग के अवशेष को सदियों से एक अग्निहोत्री परिवार द्वारा सुरक्षित रखा गया था। अब वे इसे पूरे देश में दर्शनार्थ श्रद्धालुओं तक पहुंचाने का पावन कार्य कर रहे हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री सहित उपस्थित गणमान्य लोगों ने खंडित शिवलिंग के दर्शन किए और आस्था प्रकट की।
पूर्व में केबिनेट में लिए गए निर्णय अनुरूप मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और श्री श्री रविशंकर के मध्य छत्तीसगढ़ सरकार एवं व्यक्ति विकास केंद्र इंडिया (द आर्ट ऑफ लिविंग) के बीच हुए एमओयू को लेकर भी चर्चा हुई।  एमओयू का उद्देश्य आजीविका सृजन और ग्रामीण छत्तीसगढ़ के समग्र कल्याण सहित ग्रामीण विकास के विविध  पहलुओं से जुड़ा है, जिसके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर दोनों पक्षों ने विचार-विमर्श किया।
शंखनाद महासत्संग का न्योता
श्री श्री रविशंकर ने मुख्यमंत्री श्री साय को राजधानी रायपुर स्थित पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित 'शंखनाद महासत्संग' कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री ने इस आमंत्रण के लिए श्री श्री रविशंकर जी का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, विधायक श्री योगेश्वर राजू सिन्हा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, सचिव डॉ. बसवराजू एस., श्री पी. दयानंद, श्री राहुल भगत, जनसंपर्क आयुक्त श्री रवि मित्तल, मुख्यमंत्री श्री साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या देवी साय सहित परिवार के अन्य सदस्यगण उपस्थित थे।

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जनजातीय समाज के विकास को नई दिशा – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में जनजातीय समुदाय के सशक्तिकरण, शिक्षा, सामाजिक-आर्थिक और संस्कृति से जुड़े मुद्दों पर किया गया विचार-विमर्श 


रायपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज छत्तीसगढ़ जनजाति सलाहकार परिषद की पुनर्गठन पश्चात पहली बैठक विधानसभा परिसर स्थित समिति कक्ष में संपन्न हुई। बैठक में जनजातीय समुदाय के सशक्तिकरण, शिक्षा, सामाजिक-आर्थिक उन्नयन, प्रशासनिक सुधार और संस्कृति संरक्षण से जुड़े अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।  
बैठक में कैबिनेट मंत्री एवं जनजाति सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष श्री रामविचार नेताम सहित प्रदेश के वरिष्ठ मंत्रीगण, विधायक, प्रशासनिक अधिकारी एवं परिषद के सभी सदस्य उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने परिषद की पहली बैठक में सभी सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में जनजाति समुदाय की जनसंख्या 32% है, और उनका समग्र विकास हमारे राज्य की प्राथमिकता है। यह परिषद केवल विचार-विमर्श का मंच नहीं, बल्कि नीति-निर्माण और निर्णय-क्रियान्वयन की महत्वपूर्ण संवैधानिक इकाई है।उन्होंने बैठक में रखे गए सभी बहुमूल्य सुझावों पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए और अधिकारियों से कहा कि जनजातीय समुदाय के जाति प्रमाण पत्र से जुड़ी त्रुटियों के निवारण हेतु विस्तृत अध्ययन कर समाधान सुनिश्चित किया जाए। जनजातीय आस्था स्थलों के संरक्षण एवं विकास हेतु देवगुड़ी के साथ-साथ सरना स्थलों को भी शामिल करने की व्यवस्था की जाए। शिक्षा में सुधार हेतु आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षक विहीन और एकल शिक्षक स्कूलों की समस्या को शीघ्रता से हल किया जाए। जनजातीय समुदाय की आर्थिक सशक्तिकरण योजनाओं पर प्रभावी अमल किया जाए, जिससे उनकी प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि हो।
कैबिनेट मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा कि छत्तीसगढ़ जनजाति सलाहकार परिषद, सरकार और जनजातीय समाज के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करती है। हम सभी सदस्य प्रदेश के एक-तिहाई जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए हमारी जिम्मेदारी है कि हम शासन की योजनाओं को प्रभावी रूप से समुदाय तक पहुँचाएँ।उन्होंने परिषद द्वारा लिए गए निर्णयों को नीति-निर्माण में प्रभावी रूप से शामिल करने का आश्वासन दिया।
बैठक में सभी उपस्थित सदस्यों ने जनजातीय समुदाय की शिक्षा, आजीविका, सामाजिक-आर्थिक विकास और प्रशासनिक सुधार को लेकर ठोस सुझाव दिए। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सभी प्रस्तावों पर त्वरित और प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए एवं अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा कि नीतिगत सुधारों का वास्तविक लाभ जनजातीय समुदाय तक पहुँचे। यह बैठक जनजातीय समाज के विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।
बैठक में परिषद के सदस्यों ने जनजातीय समुदाय के सामाजिक-आर्थिक विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर अपने सुझाव प्रस्तुत किए, जिनमें जनजातीय बालिकाओं के लिए छात्रावासों की संख्या एवं सुविधाओं में वृद्धि, जनजातीय बहुल क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं भर्ती प्रक्रिया को प्रोत्साहित करना, स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर उपलब्धता एवं जनजातीय क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार, आदिवासियों की पारंपरिक आजीविका को सशक्त करने हेतु विशेष योजनाएँ लागू करना,जनजातीय कला, संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए विशेष योजनाएँ लागू करना शामिल है।
बैठक में आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने विभिन्न एजेंडा बिंदुओं पर प्रेजेंटेशन दिया और परिषद के समक्ष विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। इस अवसर पर वन मंत्री श्री केदार कश्यप, विधायक सुश्री लता उसेण्डी, श्रीमती शंकुतला सिंह पोर्ते, श्रीमती उद्देश्वरी पैंकरा, श्रीमती रायमुनी भगत, श्रीमती गोमती साय, विधायक श्री रामकुमार टोप्पो, श्री प्रणव कुमार मरपच्ची, श्री विक्रम उसेण्डी, श्री आशाराम नेताम, श्री नीलकंठ टेकाम, श्री विनायक गोयल, श्री चैतराम अटामी सहित मनोनित सदस्य श्री रघुराज सिंह उईके एवं श्री कृष्ण कुमार वैष्णव उपस्थित थे। बैठक में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की महत्वपूर्ण उपस्थिति रही, जिनमें मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, पुलिस महानिदेशक श्री अरूण देव गौतम, अपर मुख्य सचिव श्री मनोज कुमार पिंगुआ, श्रीमती ऋचा शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह, पंचायत विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया , सचिव  श्री राजेश सुकुमार टोप्पो, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी, आयुक्त श्री पदुम सिंह एल्मा सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

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बघेल संविधान का सम्मान करें, संवैधानिक पद्धति से चुनकर आए मुख्यमंत्री का अपमान करने का भूपेश बघेल को कोई अधिकार नहीं है,चोरी पकड़ी जाने पर बौखलाहट से काम नहीं चलता : केदार कश्यप

रायपुर : छत्तीसगढ़ के वन व सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री बघेल को प्रदेश के पहले आदिवासी सौम्य और सरल मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के बारे में कुछ भी बोलने से पहले हजार बार सोचना चाहिए। श्री कश्यप ने कहा कि भूपेश हमेशा से आदिवासी विरोधी रहे हैं। उन्हें यह पच ही नहीं रहा है कि कोई आदिवासी भी प्रदेश की कमान सम्भाल सकता है।

प्रदेश के वन मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय प्रदेश ही नहीं, बल्कि समूचे देश के सबसे अनुभवी आदिवासी नेता हैं। उनका अनुभव और राजनीतिक करियर भी भूपेश बघेल से कई गुना बड़ा है। एक बार केंद्रीय मंत्री, दो बार विधायक, तीन बार प्रदेश अध्यक्ष, चार बार सांसद और अब प्रदेश के चौथे मुख्यमंत्री के रूप मेंश्री साय के कार्यकाल की देशभर में सराहना हो रही है। श्री कश्यप ने कहा कि श्री साय के नेतृत्व में आज नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों में कांग्रेस का सफाया हो गया। लोकसभा चुनाव में मोदी गारंटी पूरे करने का असर दिखा, समूचे देश में सौम्य सरल लेकिन कड़े निर्णय लेने वाले नेता के रूप में विष्णुदेव साय की पहचान है। 

प्रदेश के वन मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि भूपेश बघेल को यह समझना चाहिये कि बड़बोलेपन से राजनीति नहीं चलती। अनावश्यक बयानबाजी को छत्तीसगढ़ की सहज-सरल जनता कितना नापसंद करती है, वह भूपेश बघेल ने स्वयं अनुभव किया होगा। श्री कश्यप ने कहा कि जिस तरह एक सरल आदिवासी कवासी लखमा के कंधे पर बन्दूक रखकर भूपेश बघेल ने अपने घोटालों की गोली चलाई, जैसे सारी मलाई चट कर आदिवासी विधायक लखमा के सिर पर सारा ठीकरा फोड़ दिया है, यह भूपेश बघेल की आदिवासी विरोधी मानसिकता को दिखाता है। 

प्रदेश के वन मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री से आग्रह है कि वे घोटालों के आरोपों का सामना न्यायिक प्रक्रिया द्वारा करें। जिस संविधान को बचाने की बड़ी-बड़ी बात कांग्रेस करती है, उसी संविधान के तहत संवैधानिक संस्थाएँ जाँच कर रही है। इसी संविधान ने देश के वंचितों और आदिवासियों को अधिकार दिए हैं, भूपेश बघेल का संवैधानिक संस्थाओं का मजाक उड़ाना संविधान विरोधी कृत्य भी है। श्री कश्यप ने कहा कि बघेल संविधान का सम्मान करें, संवैधानिक पद्धति से चुनकर आए प्रतिनिधियों का भी अपमान करने का भूपेश बघेल को कोई अधिकार नहीं है। चोरी पकड़ी जाने पर बौखलाहट से काम नहीं चलता है।

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जशपुर में पहली बार आगडीह हवाई अड्डे में एयर एनसीसी का चल रही है फ्लाइंग ट्रेनिंग,प्रदेश के युवा यहां के खुले आसमान में भर रहे हैं उड़ान,

रायपुर :  जशपुर के आगडीह हवाई अड्डे में वर्तमान  में  एयर एनसीसी का फ्लाइंग ट्रेनिंग  चल  रही है। एनसीसी  कैडेट  को छोटे हवाई जहाज से उड़ान भरने और रनवे पर लैंड करने से लेकर, विमान के कॉकपिट से लेकर हर हिस्से और विमान के नियंत्रण को लेकर सभी बेसिक जानकारी दी जा रही है।
  विंग कमांडर वी  के  साहू  के  अनुसार इस महीने के 7 तारीख से संचालित की जा रही इस प्रशिक्षण में फिलहाल 35 प्रशिक्षु कैडेट्स हिस्सा ले रहे हैं और इस माह के अंत तक 3 सीजी एयर स्क्वाड्रन रायपुर के बैनर के तले प्रदेश के युवा जशपुर के खुले आसमान में हवा में उड़ान सीख रहे हैं। एयर एनसीसी के द्वारा 2 सीटर माइ‌को लाइट एयरक्राफ्ट के जरिए जशपुर के आगडीह हवाई पट्टी पर एनसीसी सीनियर डिवीजन के कैडेट्स जिनमें लड़के और लड़कियां दोनों शामिल हैं।

*मील का पत्थर साबित होगा यह प्रशिक्षण*
विंग कमांडर वीके साहू ने बताया की एयर फोर्स और एविएशन के क्षेत्र में करियर के रूप में इसे चुनने वाले युवाओं के लिए यह प्रशिक्षण बेहद कारगर है। उन्होंने बताया की वो खुद बसना क्षेत्र के लाखौली के निवासी है और सबसे पहले उन्होंने भी एनसीसी कैडेट्स के रूप में उड़ान भरी थी जो आगे चलकर उनके करियर के लिए मील के लिए एयरफोर्स या एविएशन क्षेत्र में जाने वाले युवा के लिए यह प्रशिक्षण फ्लाइंग स्कूल में प्रवेश के लिए सहायक सिद्ध होता है। उन्होंने
बताया कि रायपुर के माना एयरपोर्ट पर उड़ान के सीमित अवसर के कारण इस ट्रेनिंग को जशपुर शिफ्ट किया गया है।  उन्होंने इस पूरे प्रशिक्षण अभियान के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, प्रदेश के शिक्षा सचिव और कलेक्टर जशपुर रोहित व्यास का आभार प्रकट किया, जिनके प्रयासों से जशपुर हवाई पट्टी पर चिकित्सा स्टाफ के साथ एम्बुलेंस और फायर फाईटिंग दस्ते के साथ तमाम तरह गई है, जिससे पूरी टीम और कैडेट्स के रुकने रहने, खाने और प्रशिक्षण का सारा काम सुचारू रूप से चल रहा है।

विंग कमांडर वीके साहू ने बताया की रायपुर के माना स्थित स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डे पर इस प्रशिक्षण का संचालन किया जा रहा था लेकिन माना एयरपोर्ट में एयर ट्रैफिक के दबाव और उसके बीच 100 कैडेट्स को एयरक्राफ्ट उड़ान का प्रशिक्षण देने में कई प्रकार की दिक्कतें आ रही थी। इसके बाद इस प्रशिक्षण को प्रदेश के किसी और छोटे हवाई अड्डे या रनवे पर शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद जशपुर के आगडीह हवाई अड्डे का चयन किया गया, यहां का शांत वातावरण और रनवे इस प्रशिक्षण के लिए बहुत अच्छा साबित हुआ है, यह पूरा प्रशिक्षण और एयर एनसीसी के कैडेट्स के साथ जशपुर के लिए भी मील का पत्थर साबित होगा। जशपुर के उपर उड़ने का अनुभव अनूठा माइक्रो लाइट एयरक्राफ्ट के उड़ान के प्रशिक्षण में शामिल एयर कुछ ऐसा है ट्रेनी एयरक्राफ्ट है जिसमें 2 सीटर माइक्रो लाइट एयरक्राफ्ट से एयर एनसीसी के कैडेट्स को उड़ान का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह एक घंटे की उड़ान में 13 लीटर ईंधन खर्च करता है और इसमें 50 लीटर एवियशन फ्यूल भरने की क्षमता है। इसे 20000 फुट की ऊंचाई पर उड़ाया जा सकता है, लेकिन फिलहाल लगभग 1000 फुट की ऊंचाई पर प्रशिक्षु कैडेट्स को इसे उड़ाना सिखाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार रायपुर से जशपुर तक उड़कर आने में इस विमान को 2 घंटे 5 मिनट का समय लगा।

एनसीसी कैडेट्स वंश कुमार, एसआर साहू, अंजू सिन्हा, बिपाशा परिहार और सिमरन साहू ने बताया की उन्होंने रायपुर के माना एयरपोर्ट पर भी इससे पहले एयर एनसीसी का प्रशिक्षण लिया है, लेकिन जशपुर की शांत फिजा यहां का एयरनॉट, एनवायरनमेंट में पायलट के बगल में को पायलट के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त करना एक अनूठा अनुभव है।

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