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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर की ग्रामीण महिलाओं ने रची आत्मनिर्भरता की नई कहानी, 5.22 करोड़ की लागत से बनेंगे 18 महतारी सदन, महतारी वंदन योजना और ई-रिक्शा से बदली महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक पहचान

जशपुरनगर 02 जनवरी 2026 :-मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले की ग्रामीण महिलाएँ आज आत्मनिर्भरता की सशक्त मिसाल बनकर उभर रही हैं। कभी सीमित संसाधनों में जीवन यापन करने वाली महिलाएँ अब आर्थिक, सामाजिक और सामुदायिक रूप से मजबूत होकर अपने परिवार और समाज में निर्णायक भूमिका निभा रही हैं। इसके पीछे महतारी वंदन योजना, महतारी सदन और ई-रिक्शा वितरण जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं का बड़ा योगदान है।जिले की दो लाख से अधिक महिलाओं के खातों में महतारी वंदन योजना के तहत अब तक 448 करोड़ रुपये की राशि सीधे हस्तांतरित की जा चुकी है। इस आर्थिक सहयोग से महिलाओं को न केवल आय का संबल मिला है, बल्कि उनके आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कई महिलाएँ स्वरोजगार से जुड़कर परिवार की आय बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

महतारी सदन’ बना महिलाओं के संगठन और प्रशिक्षण का केंद्र"


ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में महतारी सदन एक महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आया है। महिलाओं को सुरक्षित, सुविधायुक्त और संगठित मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से साय सरकार ने जशपुर जिले में 18 महतारी सदन भवनों की स्वीकृति दी है। प्रत्येक भवन के लिए 29 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।कुल 5 करोड़ 22 लाख रुपये की लागत से बनने वाले ये भवन महिला स्व-सहायता समूहों के लिए प्रशिक्षण, बैठक, कौशल विकास और आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र बनेंगे।इन महतारी सदनों में महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई, बुनाई, हस्तशिल्प, मशरूम उत्पादन, घरेलू उद्योग, पैकेजिंग और विपणन जैसी गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे महिलाओं में सामूहिक निर्णय क्षमता, नेतृत्व गुण और सामाजिक एकता को मजबूती मिल रही है।
जिले के बगीचा विकासखंड के कुर्रोग और रंगले, पत्थलगांव के लुड़ेग, बागबहार और सुरंगपानी, मनोरा के सोनक्यारी और मनोरा, जशपुर के लोखंडी और आरा, कुनकुरी के ढोढ़ीबहार, केराडीह और नारायणपुर, कांसाबेल के बगिया, दोकड़ा और बटईकला, तथा फरसाबहार के केरसई, पंडरीपानी और गारीघाट पंचायतों में इन भवनों का निर्माण किया जा रहा है।महिलाओंबकी जुबानी—बदली जिंदगी की कहानी

कुर्रोग (बगीचा) की सावित्री भगत बताती हैं कि पहले प्रशिक्षण के लिए दूर जाना पड़ता था, लेकिन अब गांव में ही सुविधाएँ उपलब्ध होंगी।सोनक्यारी (मनोरा) की रजनी पैंकरा कहती हैं कि महतारी सदन महिलाओं के लिए सिर्फ भवन नहीं, बल्कि सशक्तिकरण की नींव है।

महिलाओं ई-रिक्शा वितरण से महिलाओं को मिला नया आत्मसम्मान

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने रक्षा बंधन के अवसर पर 12 स्व-सहायता समूहों की दीदियों को ई-रिक्शा प्रदान किए। आज ये महिलाएँ ई-रिक्शा चलाकर न केवल नियमित आय अर्जित कर रही हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधा भी सुलभ करा रही हैं।
तपकरा की राजकुमारी पैंकरा कहती हैं कि ई-रिक्शा से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।छेरडांड की संगीता देवी बताती हैं कि अब वे आत्मविश्वास के साथ काम कर रही हैं।

ग्रामीण समाज में महिला सशक्तिकरण की नई कहानी

महतारी सदन और ई-रिक्शा जैसी योजनाएँ मिलकर जशपुर जिले में महिला सशक्तिकरण की नई कहानी लिख रही हैं। महिलाएँ आज आर्थिक रूप से सक्षम, सामाजिक रूप से सम्मानित और आत्मनिर्भर बनकर उभर रही हैं। साय सरकार की ये पहलें न केवल वर्तमान, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणास्रोत सिद्ध हो रही हैं।

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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने रायपुर साहित्य उत्सव की वेबसाइट का किया लोकार्पण

रायपुर 1 जनवरी 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने मंत्रालय महानदी भवन में  रायपुर साहित्य उत्सव की वेबसाइट का लोकार्पण किया। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, कौशल विकास मंत्री श्री खुशवंत साहेब तथा छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा उपस्थित थे।

उल्लखेनीय है कि रायपुर साहित्य उत्सव 23 से 25 जनवरी तक आयोजित किया जाएगा। साहित्य उत्सव में देशभर के प्रख्यात साहित्यकारों, लेखकों, कवियों, पत्रकारों, समीक्षकों एवं पाठकों की सहभागिता होगी। कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति, सृजनात्मक लेखन, प्रकाशन जगत, युवा साहित्य तथा नई पीढ़ी के रचनाकारों से जुड़े विषयों पर विविध सत्र आयोजित किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने वेबसाइट लॉन्च करते हुए कहा कि रायपुर साहित्य उत्सव छत्तीसगढ़ की साहित्यिक और सांस्कृतिक पहचान को नई ऊँचाई प्रदान करेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह उत्सव लेखक और पाठक के बीच नए संवाद का सशक्त मंच बनेगा तथा युवा पीढ़ी में पढ़ने और लिखने की प्रेरणा जागृत करेगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती लोकसाहित्य, लोककथाओं और समृद्ध मौखिक परंपराओं की धरोहर रही है। ऐसे में रायपुर साहित्य उत्सव राज्य की इस सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करने का सुअवसर बनेगा।

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गिद्ध संरक्षण में छत्तीसगढ़ की नई उड़ान,इंद्रावती टाइगर रिजर्व बना देश का मॉडल

रायपुर, 01जनवरी 2026/  छत्तीसगढ़ के इंद्रावती टाइगर रिजर्व ने गिद्ध संरक्षण के क्षेत्र में देशभर के लिए एक नया उदाहरण प्रस्तुत किया है। मध्य भारत के सबसे स्वच्छ नदी-वन पारिस्थितिकी तंत्रों में शामिल यह रिजर्व अब केवल बाघों और जंगली भैंसों का ही नहीं, बल्कि विलुप्तप्राय गिद्धों के संरक्षण का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है।

गिद्ध पर्यावरण के 'सफाईकर्मी' हैं और इनके बिना बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है

        मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार इंद्रावती के टाइगर रिजर्व क्षेत्र में  गिद्धों सुरक्षित क्षेत्रों (Vulture Safe Zones) का निर्माण कर इनकी घटती आबादी को बचाना और बढ़ाना है, क्योंकि गिद्ध पर्यावरण के 'सफाईकर्मी' हैं और इनके बिना बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है l गिद्धों के अस्तित्व पर जहरीली दवाओं (NSAID), असुरक्षित शव निपटान और मानव हस्तक्षेप जैसे गंभीर खतरे मंडरा रहे हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए इंद्रावती टाइगर रिजर्व में उपग्रह (सैटेलाइट) टेलीमेट्री आधारित निगरानी कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। 

गिद्ध लगभग 10,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में रहते हैं  सक्रिय

      छत्तीसगढ़ में यह अपनी तरह का पहला प्रयास है, जिसमें उच्च-रिज़ॉल्यूशन गिद्ध गतिविधि डेटा का उपयोग संरक्षण कार्यों की दिशा तय करने के लिए किया जा रहा है। अब तक के आंकड़ों से पता चला है कि गिद्ध लगभग 10,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में सक्रिय रहते हैं और घने जंगलों व मानव बस्तियों के बीच लगातार आवाजाही करते हैं।

वन्यजीव प्रबंधन को मिली नई वैज्ञानिक दिशा

       गौरतलब है कि वर्ष 2022 से 2025 के बीच गिद्ध संरक्षण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की गई हैं। राज्य में पहली बार दो गिद्धों की सैटेलाइट ट्रैकिंग के माध्यम से 18,000 से अधिक उच्च गुणवत्ता वाले GPS डेटा पॉइंट्स प्राप्त किए गए हैं, जिससे वन्यजीव प्रबंधन को नई वैज्ञानिक दिशा मिली है। इस सफलता में क्षेत्रीय जीवविज्ञानी श्री सूरज कुमार के नेतृत्व में “गिद्ध मित्र दल” (गिद्ध संरक्षण स्वयंसेवक दल) की अहम भूमिका रही है। यह दल घोंसलों की निगरानी, शवों के सुरक्षित प्रबंधन और स्थानीय समुदायों को संरक्षण से जोड़ने का कार्य कर रहा है। इसी सामुदायिक सहयोग का परिणाम है कि “गुड्डा सारी गुट्टा” जैसे दुर्गम क्षेत्रों में पहली बार निर्बाध प्रजनन सुनिश्चित हो सका है।

वुल्चर रेस्टोरेंट” की स्थापना

         संरक्षण प्रयासों के तहत उप-निदेशक श्री संदीप बलागा के पर्यवेक्षण में “वुल्चर रेस्टोरेंट” की स्थापना भी की गई है। यह नियंत्रित भोजन स्थल हैं, जहां केवल पशु चिकित्सा परीक्षण के बाद NSAID-मुक्त शव ही रखे जाते हैं। इससे गिद्धों को सुरक्षित भोजन मिल रहा है। साथ ही ये केंद्र सामुदायिक शिक्षा के केंद्र के रूप में भी कार्य कर रहे हैं, जहां स्कूलों और स्थानीय युवाओं को पारिस्थितिकी तंत्र में गिद्धों के महत्व के बारे में जानकारी दी जा रही है।

गिद्ध सुरक्षित क्षेत्र”  (Vulture Safe Zone) की स्थापना

       भविष्य की रणनीति के तहत कार्यक्रम के तीसरे चरण का नेतृत्व भी उप-निदेशक श्री संदीप बलागा करेंगे। इस चरण में तीन अतिरिक्त गिद्धों की सैटेलाइट टैगिंग, 50 से अधिक जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन, पंचायतों की भागीदारी से 100 किलोमीटर क्षेत्र में “गिद्ध सुरक्षित क्षेत्र” (Vulture Safe Zone) की स्थापना तथा छत्तीसगढ़ की पहली गिद्ध पुनर्वास कार्ययोजना के प्रकाशन का लक्ष्य रखा गया है l तकनीक, पारंपरिक ज्ञान और सामुदायिक सहभागिता को एक सूत्र में पिरोते हुए इंद्रावती टाइगर रिजर्व यह संदेश दे रहा है कि दूरदर्शी नेतृत्व में जंगल और लोग साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं।

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भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन वर्ष 2026 की शुभ शुरुआत: छत्तीसगढ़ की प्राचीन धरोहर को मिलेगी नई पहचान – मुख्यमंत्री श्री साय

रायपुर 1 जनवरी 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज कबीरधाम ज़िले के भोरमदेव धाम में आयोजित कार्यक्रम में भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने नववर्ष 2026 की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि नए वर्ष की शुरुआत ऐसे ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण कार्य से होना छत्तीसगढ़ के लिए सौभाग्य की बात है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज का दिन छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण है। भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना राज्य की प्राचीन धरोहर को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का प्रतीक है। कबीरधाम जिले के इस भोरमदेव धाम में महादेव शिव की आराधना, अतुलनीय प्राकृतिक सौंदर्य और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एक साथ 
दिखाई देती है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन किया जा रहा है। यह परियोजना लगभग 146 करोड़ रुपये की लागत से वाराणसी के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे बेहतर शुरुआत नए वर्ष की नहीं हो सकती थी और इस परियोजना के लिए उन्होंने समस्त छत्तीसगढ़वासियों को बधाई दी। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भोरमदेव की महत्ता को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इस पहल के लिए केंद्रीय मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के प्रति आभार व्यक्त किया।

भोरमदेव मंदिर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हरे-भरे वनांचल के बीच स्थित इस मंदिर को “छत्तीसगढ़ का खजुराहो” कहा जाता है। यह केवल मंदिर ही नहीं, बल्कि हजार वर्षों की साधना, स्थापत्य कला और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रतीक है। यहाँ भगवान शिव की पूजा भोरमदेव के रूप में की जाती है, जहाँ शैव दर्शन, लोक आस्था और आदिवासी परंपराएँ एक साथ मिलकर भारतीय संस्कृति की विविधता में एकता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।

उन्होंने कहा कि सावन के महीने में निकलने वाली कांवड़ यात्रा यहाँ की एक महत्वपूर्ण परंपरा है और उन्हें स्वयं कांवड़ियों का स्वागत करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक सौंदर्य के मध्य स्थित भोरमदेव मंदिर, मड़वा महल और छेरकी महल ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व रखते हैं। मंदिर की दीवारों पर उत्कीर्ण भव्य शिल्पाकृतियाँ खजुराहो की कला से तुलना योग्य हैं। नागवंशी शासनकाल में निर्मित नागर शैली की यह अद्वितीय वास्तुकला अपने आप में अद्भुत है। यह स्थल न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि क्षेत्रीय इतिहास, कला और सामाजिक जीवन का सशक्त साक्ष्य भी है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महाशिवरात्रि पर यह स्थान प्रमुख तीर्थ के रूप में हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है, जहाँ आदिवासी परंपराओं और शैव प्रथाओं का अनोखा संगम दिखाई देता है। मड़वा महल, जिसका संबंध विवाह मंडप से माना जाता है, तथा छेरकी महल की दीवारों पर अंकित वन और नदी से जुड़ी आकृतियाँ प्रकृति-निष्ठ जीवनदर्शन को दर्शाती हैं।

उन्होंने कहा कि भोरमदेव का यह संपूर्ण क्षेत्र धर्म और अध्यात्म के साथ-साथ पर्यटन का भी बड़ा केंद्र है, जिसे वर्तमान सरकार व्यापक रूप से विकसित करने जा रही है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने पर्यटन को उद्योग का दर्जा प्रदान किया है, जिससे पर्यटन क्षेत्र को संरचनात्मक मजबूती मिली है। नई पर्यटन नीति एवं होम-स्टे पॉलिसी के माध्यम से सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के साथ रोजगार और निवेश के अवसर बढ़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर दशहरा सहित छत्तीसगढ़ के अनेक स्थानीय उत्सवों ने प्रदेश को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। हमारी सांस्कृतिक परंपराएँ केवल मंदिरों और स्थापत्य तक सीमित नहीं हैं; बल्कि नाचा परंपरा, 13 पारंपरिक वाद्ययंत्र, लोकनृत्य और गीत हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के दर्पण हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि धार्मिक आस्थाओं में यहाँ भगवान राम को ‘भाँचा राम’ या ‘वनवासी राम’ के रूप में पूजा जाता है क्योंकि उनके वनवास के लगभग 10 वर्ष दंडकारण्य क्षेत्र में व्यतीत हुए थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा युवाओं को पर्यटन क्षेत्र में प्रशिक्षण देकर रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पूरे छत्तीसगढ़ में सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है तथा रेल और हवाई सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुँचना सरल होगा और पर्यटन को नई गति मिलेगी। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था भी मज़बूत होगी। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में 7.83 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे पर्यटन सहित विभिन्न क्षेत्रों को नई दिशा मिलेगी।

 केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने भोरमदेव महोत्सव स्थल पर काॅरिडोर के भूमिपूजन के बाद सभा को संबोधित करते हुए कबीरधाम जिले सहित पूरे प्रदेश के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है। उन्होंने नववर्ष की बधाई देते हुए कहा कि बीते दो वर्षों में छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संकल्पों को धरातल पर उतारते हुए विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार करने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद प्रदेश के विकास में सबसे बड़ी बाधा थी, जिसे समाप्त करने का बीड़ा राज्य सरकार ने उठाया है और आज प्रदेश नक्सलवाद की समाप्ति की दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश के नागरिकों में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि भारत को कमजोर करने वाली किसी भी ताकत या षड्यंत्र को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में आतंकवाद के विरुद्ध लिए गए कठोर निर्णयों ने देश की सुरक्षा नीति को नई मजबूती प्रदान की है।

 केंद्रीय मंत्री श्री शेखावत ने कहा कि सुशासन का प्रभाव आज देश-दुनिया में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। भारत तेजी से विकसित राष्ट्र की ओर अग्रसर है। सड़कों, पुल-पुलियों एवं अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण के साथ-साथ प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, जल, बिजली, बैंक खाता और रोजगार जैसी सुविधाएं गरीबों के घर-घर तक पहुंच रही हैं। 

 केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने कहा कि भोरमदेव मंदिर लगभग एक हजार वर्ष पुरानी ऐतिहासिक धरोहर है और इस कॉरिडोर निर्माण के माध्यम से आने वाले हजार वर्षों तक इसे संरक्षित रखने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भोरमदेव मंदिर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की भी विशेष आस्था का केंद्र रहा है और यह परियोजना उनके कार्यकाल की स्मृति के रूप में कबीरधाम जिले को एक नई पहचान देगी।  केंद्रीय मंत्री श्री शेखावत ने कहा कि यह वर्ष परिवर्तन का वर्ष है और भारत को विश्व का सबसे शक्तिशाली राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री श्री मोदी के संकल्प में 140 करोड़ देशवासी सहभागी बनें।  

 उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा लगातार क्षेत्र का दौरा कर यहां के विकास के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। चैत्र माह के तेरहवीं तिथि को भोरमदेव महोत्सव का आयोजन किया जाता है, पिछले वर्ष जब स्वदेश दर्शन योजना में शामिल करने के लिए हमने केंद्रीय मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत से निवेदन किया था और भोरमदेव महोत्सव के दिन  हमें स्वीकृति प्राप्त हो गयी थी और आज भूमिपूजन भी सम्पन्न हो गया है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में भोरमदेव की तरह ही आस्था का केंद्र माने जाने वाले पंचमुखी श्री बूढ़ा महादेव मंदिर का भी अब विकास किया जा रहा है। 

 कार्यक्रम मे उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव, केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्यमंत्री श्री तोखन साहू, सांसद श्री संतोष पाण्डेय, पंडरिया विधायक श्रीमती भावना बोहरा, पर्यटन मंडल के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा, गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्री विशेषर पटेल, राज्य कृषक कल्याण परिषद् के अध्यक्ष श्री सुरेश चंद्रवंशी सहित अन्य गणमान्य नागरिक एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

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दशकों से लंबित परियोजनाएँ अब समयबद्ध रूप से हो रही पूरी : प्रगति प्लेटफ़ॉर्म प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की निर्णायक कार्यशैली का सशक्त प्रमाण - मुख्यमंत्री श्री साय

रायपुर 1 जनवरी 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में विकास की गति नई ऊँचाइयों पर पहुँची है। दशकों से लंबित महत्वपूर्ण अधोसंरचना एवं ऊर्जा परियोजनाएँ अब “प्रगति” प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से समयबद्ध ढंग से पूरी हो रही हैं। यह केंद्र सरकार की परिणामोन्मुख, जवाबदेह तथा निर्णायक कार्यशैली का सशक्त प्रमाण है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में “प्रगति” प्लेटफ़ॉर्म का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। भिलाई इस्पात संयंत्र के आधुनिकीकरण से न केवल देश में रेल उत्पादन को नई गति मिली है, बल्कि इससे हजारों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित हुए हैं। इससे आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूती मिली है और औद्योगिक विकास को नई दिशा प्राप्त हुई है।

इसी प्रकार एनटीपीसी की लारा सुपर थर्मल पावर परियोजना (1600 मेगावाट) से छत्तीसगढ़ सहित छह राज्यों को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई है तथा औद्योगिक और कृषि गतिविधियों को नई ऊर्जा प्राप्त हुई है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि “प्रगति” प्लेटफ़ॉर्म ने परियोजनाओं की निगरानी, निरंतर समीक्षा और बाधाओं के त्वरित समाधान की एक सशक्त प्रणाली विकसित की है। स्पष्ट लक्ष्य, तेज़ क्रियान्वयन और ठोस परिणाम—यही नए भारत की कार्यसंस्कृति है और यही “विकसित भारत @ 2047” के लक्ष्य को साकार करने का मार्ग है।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित प्रगति (PRAGATI) की 50वीं बैठक ने न केवल राष्ट्रीय स्तर पर, बल्कि छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा को भी नई गति प्रदान की है। प्रगति सक्रिय शासन और समयबद्ध कार्यान्वयन के लिए विकसित एक आईसीटी आधारित प्लेटफॉर्म है, जिसने परियोजनाओं की निगरानी और समाधान की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया है। पिछले दशक में प्रगति प्लेटफॉर्म के माध्यम से 85 लाख करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की परियोजनाओं की रफ्तार तेज हुई है। इससे देशभर में अवसंरचना, ऊर्जा, रेल, सड़क, कोयला और अन्य क्षेत्रों से जुड़े अनेक कार्यों को समयबद्ध प्रगति मिली है। इन परियोजनाओं में छत्तीसगढ़ से संबंधित कई महत्वपूर्ण परियोजनाएँ भी शामिल हैं।

बैठक में भिलाई इस्पात संयंत्र के आधुनिकीकरण और विस्तार कार्य का विशेष रूप से उल्लेख किया गया। इस परियोजना को वर्ष 2007 में स्वीकृति मिली थी। प्रगति बैठकों में नियमित समीक्षा और अंतर-एजेंसी समन्वय के कारण इस परियोजना को नई गति मिली, जिसके परिणामस्वरूप इसका कार्य तेज़ी से आगे बढ़ा और लक्षित प्रगति सुनिश्चित हुई।

भिलाई इस्पात संयंत्र के आधुनिकीकरण से उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन, सहायक उद्योगों के विस्तार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा प्राप्त हुई है। इससे राज्य को देश के प्रमुख इस्पात उत्पादन केंद्र के रूप में और अधिक मजबूती मिली है।

इसी प्रकार रायगढ़ में वर्ष 2009 में स्वीकृत लारा सुपर थर्मल पावर परियोजना  की प्रगति प्लेटफॉर्म के अंतर्गत उच्च स्तरीय समीक्षाओं, समय-समय पर दिए गए आवश्यक दिशा-निर्देशों और निरंतर मॉनिटरिंग से तेज गति मिली और इसके क्रियान्वयन में ठोस प्रगति दर्ज की गई।

आज लारा सुपर थर्मल पावर परियोजना राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने वाली प्रमुख परियोजनाओं में से एक बन चुकी है। इस परियोजना ने न केवल बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाई है, बल्कि छत्तीसगढ़ की पहचान को “पावर हब ऑफ इंडिया” के रूप में और अधिक मजबूत किया है। इससे राज्य और देश दोनों के ऊर्जा तंत्र को नई स्थिरता प्राप्त हुई है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने यह रेखांकित किया कि प्रगति प्लेटफॉर्म ने सहयोगी संघवाद को नई शक्ति दी है और केंद्र तथा राज्यों के संयुक्त प्रयासों से विकास कार्यों में गति और विश्वास दोनों बढ़ा है।

*प्रगति से तेज़ होती छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा - मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय*

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रगति की 50वीं बैठक को देश और छत्तीसगढ़ के लिए दूरगामी महत्व का बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकास परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से पूरा करने की जो व्यवस्था स्थापित की गई है, उसका सीधा लाभ छत्तीसगढ़ को भी मिला है। उन्होंने कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र के आधुनिकीकरण तथा लारा सुपर थर्मल पावर परियोजना जैसी बड़ी परियोजनाओं को नई गति मिलना इस बात का प्रमाण है कि प्रगति प्लेटफॉर्म ने वास्तविक अर्थों में समाधान-उन्मुख शासन का मॉडल प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से प्रदेश के औद्योगिक विकास, ऊर्जा क्षमता, निवेश, रोज़गार और सहायक अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रगति के माध्यम से परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग और जवाबदेही सुनिश्चित होने से छत्तीसगढ़ विकसित भारत @ 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य में अपनी निर्णायक भूमिका और मजबूती के साथ निभाता रहेगा।

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प्राकृतिक छटा और सांस्कृतिक रंगों से सजा नववर्ष का जश्न:बेने डेम, गुल्लू फॉल और मयाली डैम में नववर्ष पर उमड़ी भीड़, परिवार और युवाओं ने वनभोज, संगीत और नृत्य के संग मनाया भव्य जश्न"

नववर्ष पर ग्रामीण पिकनिक स्थलों में उमड़ा सैलानियों का सैलाब, प्रकृति की गोद में मनाया जश्न

निरंजन मोहन्ती- नारायणपुर

जशपुर/नारायणपुर 01 जनवरी 2026 : जिले में नववर्ष के पहले दिन गुरुवार को ग्रामीण अंचलों के प्रमुख पिकनिक स्थलों में भारी चहल-पहल देखने को मिली। नववर्ष के आगमन के साथ ही जिले के प्राकृतिक पर्यटन स्थलों पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित बेने डेम, गुल्लू फॉल और छुरी फाल जैसे प्रसिद्ध पिकनिक स्पॉट दिनभर सैलानियों से गुलजार रहे।

सुबह से ही फेसबुक, व्हाट्सएप और मैसेंजर के माध्यम से एक-दूसरे को नववर्ष की शुभकामनाएं देने का सिलसिला चलता रहा। वहीं ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में लोग अपने परिवार, रिश्तेदारों और मित्रों के साथ पिकनिक मनाने घरों से निकले। सुबह होते ही बादलखोल अभ्यारण्य से होकर बहने वाली ईब नदी के दोनों किनारों पर सैलानियों की चहल-पहल शुरू हो गई।

ग्रामीण परिवेश में बसे इन पर्यटन स्थलों पर लोगों ने प्रकृति की गोद में नए साल का स्वागत किया। कहीं परिवार के साथ भोजन बनता नजर आया तो कहीं युवाओं के समूह होटल व ढाबों से मंगाए गए भोजन के साथ वनभोज का आनंद लेते दिखे। महिलाएं पारंपरिक व्यंजनों की तैयारी में जुटी रहीं, जबकि बच्चे नदी किनारे और खुले मैदानों में खेलते नजर आए।

पिकनिक स्थलों पर पहुंचे सैलानी नाचते-गाते हुए उत्साह के साथ नववर्ष का जश्न मनाते दिखे। आधुनिक गीतों के साथ-साथ नागपुरी गीत-संगीत ने माहौल को और भी खुशनुमा बना दिया। ढोलक और मोबाइल स्पीकर की धुनों पर युवा देर तक थिरकते रहे, जिससे पूरा इलाका उत्सवमय वातावरण में डूबा रहा।

बेने डेम के आसपास पूरे दिन लोगों की भीड़ लगी रही। वहीं गुल्लू फॉल और छुरी फाल के पास पहाड़, जंगल और झरनों का नजारा देखने के लिए सैलानियों में खासा उत्साह देखा गया। ग्रामीण क्षेत्रों के लोग खासकर घने जंगल, पर्वतीय दृश्य और स्वच्छ वातावरण का आनंद उठाते नजर आए।

देर शाम तक ईब नदी के किनारे लोग बैठे प्रकृति का आनंद लेते रहे। युवाओं के समूह अपने पसंदीदा स्थानों पर पहुंचकर दिनभर वनभोज और मनोरंजन में व्यस्त रहे। नववर्ष के अवसर पर ग्रामीण अंचलों में इस तरह की चहल-पहल से स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिला है।

नववर्ष पर सैलानियों को लुभा रहा हैं मयाली का पिकनिक स्पॉट

नए साल के आगमन के साथ ही जशपुर जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मयाली डैम में पर्यटकों की भारी भीड़ देखने को मिली। गुरुवार को सैकड़ों की संख्या में सैलानी पिकनिक मनाने मयाली डैम पहुंचे। कुनकुरी से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित यह डैम अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के कारण इन दिनों पर्यटकों की पहली पसंद बना हुआ है।

मयाली डैम की खूबसूरत वादियां इन दिनों पर्यटकों से गुलजार नजर आ रही हैं। जिले के विभिन्न हिस्सों से आए लोग यहां पहुंचकर प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले रहे हैं। साफ पानी, हरियाली और पहाड़ों से घिरा यह डैम सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।

पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए डैम में नौका विहार की बेहतर व्यवस्था की गई है। नाव के माध्यम से पर्यटक झील के बीच पहुंचकर आसपास के मनमोहक नजारों का आनंद ले रहे हैं। नए साल के मौके पर मयाली डैम पर्यटन गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

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रोजगार, कौशल और बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में बड़ा कदम: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में हेल्थ केयर में कौशल विकास हेतु सत्य साईं हेल्थ एंड एजुकेशन ट्रस्ट के साथ एमओयू


 
रायपुर 1 जनवरी 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में नवा रायपुर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में छत्तीसगढ़ राज्य कौशल विकास प्राधिकरण एवं श्री सत्य साईं हेल्थ एंड एजुकेशन ट्रस्ट के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

यह एमओयू राज्य में हेल्थकेयर क्षेत्र का दायरा बढ़ाने, गुणवत्तापूर्ण मानव संसाधन तैयार करने तथा युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर सृजित करने की दिशा में एक अहम कदम है। इसके माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विभिन्न व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे।

समझौते का मुख्य उद्देश्य हेल्थकेयर प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना, युवाओं का कौशल उन्नयन तथा आधुनिक चिकित्सा सेवाओं की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित जनशक्ति तैयार करना है। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से आवासीय एवं गैर-आवासीय दोनों प्रकार के निःशुल्क प्रशिक्षण प्रदान किए जाएंगे।

एमओयू के तहत चार प्रकार के कोर्स संचालित किए जाएंगे, जिनमें मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी, कार्डियोलॉजी तकनीशियन, ईसीजी तकनीशियन, कार्डियक केयर तकनीशियन तथा इमरजेंसी मेडिकल तकनीशियन के प्रशिक्षण शामिल हैं। ये कोर्स युवाओं को विशेषज्ञता के साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में करियर निर्माण का अवसर उपलब्ध कराएंगे।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार कौशल विकास को विकास की रीढ़ मानती है और विशेष रूप से हेल्थकेयर सेक्टर की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशलयुक्त कार्यबल तैयार करने पर बल दे रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के साथ-साथ युवाओं के लिए व्यापक रोजगार संभावनाएँ भी उत्पन्न करेगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कौशल विकास पर केंद्रित यह साझेदारी राज्य के दूरस्थ अंचलों तक स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार में सहायक सिद्ध होगी। प्रशिक्षित युवा अस्पतालों, स्वास्थ्य संस्थानों और आपातकालीन सेवाओं में प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, कैबिनेट मंत्री श्री गजेन्द्र यादव, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह, श्री सत्य साईं हेल्थ एंड एजुकेशन ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री सी. श्रीनिवास सहित ट्रस्ट के प्रतिनिधि एवं कौशल विकास विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

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बन्दरचुआँ में ऐतिहासिक हिंदू सम्मेलन, सनातन एकता का हुआ शंखनाद,संगठित हिंदू समाज ही राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति - प्रबल प्रताप सिंह जूदेव

हिंदू एकता, संस्कृति और राष्ट्रभाव पर केंद्रित रहा बन्दरचुआँ का विशाल सम्मेलन

नारायणपुर 1 जनवरी 2026 : कुनकुरी मंडल के बन्दरचुआँ ग्राम में रविवार को विशाल हिंदू सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। सम्मेलन में क्षेत्र के बड़ी संख्या में ग्रामीणजन, सामाजिक कार्यकर्ता एवं संगठन से जुड़े पदाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित करना, सनातन संस्कृति के मूल्यों का संरक्षण तथा सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देना रहा।
सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश उपाध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी आदरणीय श्री प्रबल प्रताप सिंह जूदेव जी शामिल हुए। मुख्य वक्ता विभाग प्रचारक सरगुजा श्री हेमन्त नाग जी रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री नारायण गुप्ता जी ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री शंभूनाथ जी चक्रवर्ती (पर्यावरण संरक्षण गतिविधि, धार्मिक प्रांत प्रमुख एवं अध्यक्ष माटीकला बोर्ड छत्तीसगढ़) की उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ विधिवत दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इसके पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति हुई, जिसने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। अतिथियों का पारंपरिक रूप से स्वागत एवं परिचय कराते हुए उन्हें मंचासीन कराया गया। इसके बाद वक्ताओं ने क्रमशः अपने विचार रखे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री नारायण गुप्ता जी ने अपने संबोधन में हिंदू सनातन संस्कृति एवं परंपराओं की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म केवल आस्था नहीं, बल्कि जीवन पद्धति है, जो समाज को संस्कार, एकता और नैतिकता का मार्ग दिखाती है।
मुख्य अतिथि श्री प्रबल प्रताप सिंह जूदेव जी ने अपने उद्बोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विशाल हिंदू सम्मेलन का उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित करना और सभी को एकजुट कर सनातन संस्कृति को सशक्त बनाना है। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि देश, धर्म और संस्कृति के प्रति समर्पण भाव बनाए रखें तथा किसी भी प्रकार के विरोध या भटकाव से सतर्क रहें।
उन्होंने स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव जी के कार्यों को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने जीवनभर सनातन धर्म की रक्षा एवं सामाजिक चेतना के लिए कार्य किया, जिसके कारण उन्हें “हिंदू सम्राट” के नाम से भी जाना गया। वर्तमान में स्वयं भी समाज हित में कार्य करते हुए घर वापसी जैसे अभियानों से सनातन संस्कृति को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
मुख्य वक्ता श्री हेमन्त नाग जी ने कहा संघ की स्थापना हिंदू समाज में व्याप्त विखराव, मतभेद और संगठन की कमी को दूर करने के उद्देश्य से की गई थी। आज समाज को संगठित रहकर अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए रखने की आवश्यकता है।
उन्होंने पंच परिवर्तन के पांच बिंदुओं—सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्व का बोध और नागरिक कर्तव्य—पर विशेष जोर देते हुए मातृशक्तियों से अपील की कि वे इन मूल्यों को अपने घर-परिवार से अपनाने की शुरुआत करें।
कार्यक्रम के अंत में भारत माता की सामूहिक आरती की गई, जिसके बाद प्रसाद वितरण किया गया। सम्मेलन में विशिष्ट रूप से सरपंच श्री विकास साय जी (बन्दरचुआँ), श्री पंचु माली नागवंशी (प्रांत सह घोष प्रमुख), श्री राजकुमार सिंह (जिला कार्यवाह), श्री ऋषिकेश चक्रधारी (जिला प्रचारक), श्री शंकर यादव (मंडल पालक), श्री जगतपाल (जिला घोष प्रमुख), श्री पुरूषोत्तम (सह घोष प्रमुख), श्री गोविंद यादव, श्री विनय चक्रधारी, श्री अशोक चौहान (खण्ड कार्यवाह), श्री बिहारी नायक, श्री राजकुमार चौहान, श्री देवचरण, श्री कमलेश सिंह, श्री विनय गुप्ता (मंडल कार्यवाह), श्री रवि यादव (मंडल संयोजक), श्री जयदीप गुप्ता (सह संयोजक), श्री अनूप नारायण, श्री सुखचंद राम, श्री सोनसाय राम, श्री खिरोधर यादव, श्री गजेन्द्र यादव, श्री अंकित गुप्ता, श्री अयोध किशोर गुप्ता, श्री प्रेम साय सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।

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केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से की सौजन्य भेंट

रायपुर 1 जनवरी 2025/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज नवा रायपुर, सेक्टर-24 स्थित मुख्यमंत्री निवास में केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने सौजन्य भेंट की। मुलाकात के दौरान छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास, सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण एवं सुदृढ़ीकरण से संबंधित विषयों पर सौहार्दपूर्ण एवं रचनात्मक चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री श्री साय ने केंद्रीय मंत्री श्री शेखावत का आत्मीय स्वागत करते हुए उन्हें राजकीय गमछा, बस्तर दशहरा पर आधारित कॉफी टेबल बुक तथा बेल मेटल से निर्मित स्मृति-चिन्ह भेंट किया। 

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव, उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा एवं पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल उपस्थित थे।

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शांति, समृद्धि और सफलता की कामना के साथ कलेक्टर ने दी नववर्ष की बधाई

जशपुर 1 जनवरी 2026/ कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने सभी लोगों को नव वर्ष की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी उन्होंने अपने शुभकामना संदेश में कहा की नया साल आपके लिए खुशियों, सफलता लाए अपना  लक्ष्य निर्धारित करके निरंतर आगे बढ़े।
यह नया साल नई शुरुआत नई संभावनाएं से भरा हो आने वाला वर्ष आपके के जीवन में शांति और आनंद लाए।

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आधुनिक दौर में भी परंपरा की मजबूत पकड़ :जब डांटा (डांडिया) नृत्य बनता है उत्सव और परंपरा बनती है पहचान..... मिट्टी की खुशबू और मांदर की गूंज के साथ ग्रामीण आज भी गांवों की पहचान को रखे है जीवित,

मांदर की थाप पर धड़कती परंपरा,डांटा खेल में आज भी जीवित है गांवों की आत्मा

निरंजन मोहन्ती - जशपुर/नारायणपुर

नारायणपुर 01 जनवरी 2026 : जब शहरों में आधुनिकता की चकाचौंध तेज होती जा रही है, उसी समय ग्रामीण अंचलों में आज भी मिट्टी की खुशबू, लोकसंगीत की गूंज और सामूहिक जीवन की गरिमा पूरी मजबूती से जीवित है। इन्हीं परंपराओं में से एक है डांडिया नृत्य, जिसे स्थानीय भाषा में डांटा खेल भी कहा जाता है। यह खेल केवल नृत्य या मनोरंजन नहीं, बल्कि गांव के सामाजिक ताने-बाने, एकता और आपसी सहयोग की मजबूत डोर है।

हर वर्ष धान कटाई–मिसाई के बाद, जब खेतों में लहलहाती फसल घरों तक पहुंच जाती है और किसान की मेहनत रंग लाती है, तब गांव में उत्सव का माहौल बनने लगता है। इसी खुशी को साझा करने के लिए शुरू होता है डांटा खेल। गांव के पुरुष वर्ग अपनी दिनभर की थकान भूलकर, पारंपरिक वेशभूषा में मांदर की थाप पर थिरकने लगते हैं।

15 से 20 लोगों का एक दल बनता है। मांदर जैसे ही बोल उठता है, उसकी गूंज पूरे गांव में फैल जाती है। ढोल की हर थाप मानो धरती की धड़कन बन जाती है। गीतों में खेत-खलिहान, प्रकृति, देवता और समाज की झलक मिलती है। यह दल गांव के हर घर, हर आंगन तक पहुंचता है। जैसे ही नृत्य दल किसी घर के सामने पहुंचता है, वहां के बच्चे उत्साह से दौड़ पड़ते हैं, बुजुर्ग मुस्कुराते हुए आशीर्वाद देते हैं और महिलाएं आंगन से इस लोकनृत्य को निहारती हैं।

नृत्य के बाद घर के स्वामी या सदस्य अपनी श्रद्धा, प्रेम और सामर्थ्य के अनुसार धान या धन प्रदान करते हैं। इसे स्थानीय भाषा में “जाली मांगना” कहा जाता है, लेकिन यह मांगना नहीं बल्कि आपसी सहयोग और सामाजिक सहभागिता का प्रतीक है। कोई मुट्ठी भर धान देता है, तो कोई अपनी खुशी के अनुसार राशि—हर योगदान बराबर सम्मान के साथ स्वीकार किया जाता है।

डांटा खेल की यह यात्रा लगातार 15 से 20 दिनों तक चलती है। इस दौरान पूरा गांव एक परिवार की तरह जुड़ जाता है। हर दिन मांदर की आवाज के साथ गांव की गलियां जीवंत हो उठती हैं। हंसी-मजाक, गीत-संगीत और नृत्य के बीच ग्रामीण जीवन की सादगी और अपनापन साफ झलकता है।

जब 15 से 20 दिन बाद पूरे गांव में डांटा खेल का समापन होता है, तब एकत्रित धान और धन से समस्त ग्रामवासियों के लिए सामूहिक पिकनिक का आयोजन किया जाता है। यह पिकनिक केवल भोजन का आयोजन नहीं, बल्कि गांव की सामूहिक खुशी का उत्सव होता है। एक साथ बैठकर खाना, गीत गाना, बच्चों की किलकारियां और बुजुर्गों की बातें—यह दृश्य किसी पर्व से कम नहीं होता।

इसी जीवंत परंपरा का नज़ारा कल ग्राम साहीडाँड़ में देखने को मिला। धान मंडी में मांदर की थाप पर डांटा दल ने पूरे जोश और उमंग के साथ नृत्य किया। थिरकते कदम, ताल से ताल मिलाते नृत्य दल और चारों ओर उमड़ती भीड़—हर पल ग्रामीण संस्कृति की सुंदर तस्वीर पेश कर रहा था। इसके बाद यह दल गांव की गलियों से गुजरता हुआ घर-घर पहुंचा, जहां ग्रामीणों ने खुले दिल से स्वागत किया।

आज के बदलते दौर में, जब कई परंपराएं धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही हैं, ऐसे में डांटा खेल यह संदेश देता है कि गांव आज भी अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं। यह परंपरा न केवल संस्कृति को जीवित रखती है, बल्कि नई पीढ़ी को भी अपनी मिट्टी, अपने समाज और अपने संस्कारों से जोड़ती है।

डांटा खेल सचमुच ग्रामीण जीवन की आत्मा है—जहां संगीत है, मेहनत का सम्मान है, और सबसे बढ़कर है साथ मिलकर खुशियां बांटने की भावना।

आज जब बहुत सी परंपराएं धीरे-धीरे खत्म होती जा रही हैं, ऐसे समय में डांटा खेल यह बताता है कि गांव आज भी अपनी संस्कृति और जड़ों से जुड़े हुए हैं। यह खेल सिखाता है कि खुशी अकेले नहीं, बल्कि मिलकर मनाई जाती है।डांटा खेल आज भी गांव की शान है, पहचान है और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अनमोल विरासत है।

देखें गांव का डांटा नृत्य

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BIG breking:– नई साल में बड़ी सौगात, CM विष्णुदेव साय ने जिले को 77 सड़कों की दी मंजूरी, ग्रामीणों की बहुप्रतीक्षित मांग हुई पूरी, मुख्यमंत्री का जताया आभार..


जशपुरनगर। प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले को सड़क अधोसंरचना के क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी सौगात मिली है।नए साल में जिले के विभिन्न विकासखंडों में 77 सड़क निर्माण एवं उन्नयन कार्यों को स्वीकृति प्रदान कर बड़ी सौगात दी है। इन सभी कार्यों के लिए कुल ₹192 करोड़ से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। इससे जिले के ग्रामीण, दूरस्थ एवं आदिवासी अंचलों में आवागमन सुगम होगा और विकास को नई गति मिलेगी।जिले के बगीचा विकासखंड अंतर्गत गायबुड़ा–खालपारा मार्ग के लिए ₹3 करोड़ 24 लाख, टोरा–परसुरा ₹4 करोड़ 33 लाख, समदुरा–तेतरटोली ₹63 लाख, टीआर-02 से अक्रिकोना ₹2 करोड़ 21 लाख, बगडोल–गायरटोली ₹1 करोड़ 90 लाख, छिछली–सन्ना से चीवराडांड ₹2 करोड़ 33 लाख तथा सरईपानी–रागरा मार्ग के लिए ₹2 करोड़ 02 लाख की मंजूरी दी गई है।दुलदुला विकासखंड दुलदुला विकासखंड में कोरना–डोभ (कदमटोली होकर) मार्ग के लिए ₹4 करोड़ 18 लाख, कस्तुरा–सरईटोली ₹2 करोड़ 92 लाख, फरसा–सुनकाडंड कादोबहर ₹2 करोड़ 66 लाख, कंटासारू–तुर्री ₹2 करोड़ 77 लाख, एनएच से कोरकोटटोली ₹4 करोड़ 40 लाख, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी–आसनबहार (नोनियाताला) ₹2 करोड़ 57 लाख, चटकपुर–सुकबासुटोली–खुंटीटोली–नगेराटुकु ₹3 करोड़ 19 लाख, खुंटीटोली–डंडाडीह ₹2 करोड़ 45 लाख एवं चराईडांड–गिधासांड मार्ग के लिए ₹2 करोड़ 45 लाख स्वीकृत किए गए हैं।जिले के फरसाबहार विकासखंड अंतर्गत तेलाइन–मोहांटोली मार्ग ₹6 करोड़ 88 लाख, खुटगांव–केंदुटोली ₹3 करोड़ 03 लाख, नवाटोली–सहसपुर ₹4 करोड़ 25 लाख, बनखेता–जुनाडीह ₹3 करोड़ 09 लाख, सागजोर–सोनाजोरी ₹3 करोड़ 34 लाख, घुमरा–बुरुशापार ₹2 करोड़ 50 लाख, बलुआबहार–करमटोली ₹1 करोड़ 68 लाख, बेलडीपा–रेगरमुंडा ₹2 करोड़ 56 लाख, घुमरा रोड–छकलपुर ₹1 करोड़ 64 लाख एवं कुनकुरी–लावकेरा से मयूरटोली मार्ग के लिए ₹1 करोड़ 49 लाख की स्वीकृति दी गई है।जिले के कुनकुरी विकासखंड में एमडीआर से रेमते ₹3 करोड़ 80 लाख, खुटगांव से बतानटोली (धान खरीदी केंद्र तक) ₹1 करोड़ 87 लाख, महुवाटोली–पुटुकेला नदी तक ₹1 करोड़ 30 लाख, कुनकुरी–मज्हाटोली ₹2 करोड़ 11 लाख, धुमाडांड–बुधीडेरा ₹1 करोड़ 31 लाख, दमगड़ा–डडगांव ₹2 करोड़ 87 लाख, रानीकोम्बो–छातापारा ₹4 करोड़ 11 लाख, प्रधानमंत्री सड़क से लोढ़ाम्बा ₹2 करोड़ 40 लाख, एनएच-43 से परसाकानी ₹1 करोड़ 96 लाख, बरडांड–सेंदरीमुंडा ₹1 करोड़ 92 लाख, कुनकुरी–राजाडांड ₹2 करोड़ 06 लाख, रजौटी–कोटिया ₹3 करोड़ 84 लाख एवं करमटोली–बोडाटोंगरी मार्ग के लिए ₹5 करोड़ 57 लाख स्वीकृत किए गए हैं।जिले के मनोरा विकासखंड
मनोरा विकासखंड अंतर्गत करडीह–सरईटोली (केराकोना) ₹4 करोड़ 78 लाख, रांझाडीपा–पियारटोली ₹4 करोड़ 86 लाख, टीआर-05–रुकुरमा ₹1 करोड़ 84 लाख, टीआर-07–घटगांव ₹1 करोड़ 42 लाख, बोरोकोना–वनग्राम ₹2 करोड़ 11 लाख, जरहापाठ ₹4 करोड़ 03 लाख एवं मतरलौंगा मार्ग के लिए ₹1 करोड़ 77 लाख की मंजूरी दी गई है।जिले के पत्थलगांव विकासखंड में लखझार–मुडापारा ₹2 करोड़ 28 लाख, चंदागढ़–डूमरमुड़ा ₹1 करोड़ 13 लाख, डूमरबहार–पकरीढाप ₹2 करोड़ 53 लाख, लुडेग–सुरंगपानी (जोरामा) ₹2 करोड़ 94 लाख, सावाटोली–बिछीटोला ₹2 करोड़ 53 लाख, तिरशोथ–मुदापारा ₹1 करोड़ 50 लाख, सरगुजा सीमा–चिमटापानी ₹98 लाख, धवईपारा–दर्रापारा ₹1 करोड़ 20 लाख, बुढ़ाडांड–बरपारा ₹2 करोड़ 07 लाख, लुड़ेग–सुरंगपानी–खगेश्वरपारा ₹2 करोड़ 06 लाख, कदमपारा–लोटापारा ₹1 करोड़ 17 लाख, खरकट्टा–पंडरीपारा ₹1 करोड़ 70 लाख, किलकिला–केराकछार–लाइनपारा ₹1 करोड़ 31 लाख, बंधनपुर–घोटमुड़ा ₹2 करोड़ 19 लाख, लुड़ेग–सुरंगपानी–बरपानी ₹3 करोड़ 31 लाख, पकपानी–घुटारीपारा ₹1 करोड़ 09 लाख तथापतराटोली–पकरीपारा मार्ग के लिए ₹80 लाख स्वीकृत किए गए हैं।जशपुर विकासखंड में जशपुर कॉलेज रोड–ग्रनचटोली (लक्ष्मी नगर) ₹2 करोड़, सिटोंगा–छेंनगोंटोली ₹2 करोड़ 57 लाख, बरगांव–हर्राकोना ₹2 करोड़ 88 लाख, बडबनाई–खुंटीटोली ₹6 करोड़ 57 लाख एवं लोखंडी–बस्ता (घुमलू होकर) मार्ग के लिए ₹4 करोड़ 28 लाख की स्वीकृति दी गई है।वहीं जिले के कांसाबेल विकासखंड अंतर्गत फरसाजुनवाइन–रेनकुटोली ₹1 करोड़ 56 लाख, नक्तिमुंडा–बिहाबल–पतरापाली ₹3 करोड़ 72 लाख, कोडलिया–गतीमहुवा ₹1 करोड़ 93 लाख, सोनारपहरी–मुख्य मार्ग ₹3 करोड़ 20 लाख, खुंटेरे–करमटोली ₹2 करोड़ 72 लाख, एनएच-43–महादेवमुड़ा ₹1 करोड़ 78 लाख, पालीडीह–कटंगजोर–डूमरकोना ₹3 करोड़ 05 लाख, बंधनपुर रोड–बरडांडपरा ₹1 करोड़ 48 लाख तथा लुड़ेग–सुरंगपानी–फिटिंगपारा मार्ग के लिए ₹1 करोड़ 27 लाख स्वीकृत किए गए हैं।इन सड़क कार्यों की स्वीकृति से जशपुर जिले में आवागमन सुलभ होगा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। वर्षों से लंबित मांगें पूरी होने पर क्षेत्रवासियों में हर्ष का माहौल है।

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1 जनवरी 2026 का 12 राशियों का  राशिफल — सोच, व्यवहार, अवसर और सावधानियों के साथ


♈ मेष (Aries)

नया साल – नई ऊर्जा
आज आप भीतर से बहुत सक्रिय और प्रेरित महसूस करेंगे। कुछ नया शुरू करने की इच्छा होगी।
करियर/पढ़ाई: लक्ष्य स्पष्ट होंगे, लेकिन जल्दबाज़ी से बचें। योजना बनाकर आगे बढ़ना बेहतर रहेगा।
धन: शुरुआत में खर्च अधिक हो सकता है, इसलिए बजट बनाना जरूरी है।
रिश्ते: आपकी स्पष्ट बातों से कुछ लोग प्रभावित होंगे, कुछ असहज भी। विनम्रता रखें।
स्वास्थ्य: ऊर्जा अधिक रहेगी, लेकिन नींद की कमी थकान दे सकती है।


♉ वृषभ (Taurus)

स्थिर और सकारात्मक शुरुआत
आज मन शांत रहेगा और आप भविष्य को लेकर व्यावहारिक सोच रखेंगे।
करियर/पढ़ाई: धीरे लेकिन ठोस प्रगति होगी। जो काम अधूरे थे, उन्हें पूरा करने का अच्छा समय है।
धन: धन से जुड़ा कोई पुराना निर्णय सही साबित हो सकता है।
रिश्ते: परिवार के साथ भावनात्मक जुड़ाव बढ़ेगा।
स्वास्थ्य: आराम और संतुलित भोजन से लाभ मिलेगा।


♊ मिथुन (Gemini)

विचारों की तेजी
दिमाग बहुत सक्रिय रहेगा, कई योजनाएँ एक साथ आएँगी।
करियर/पढ़ाई: लेखन, बोलने या सीखने से जुड़े कार्यों में सफलता मिल सकती है।
धन: छोटी-छोटी बचत भविष्य में लाभ देगी।
रिश्ते: बातचीत आपकी सबसे बड़ी ताकत रहेगी।
स्वास्थ्य: स्क्रीन टाइम कम रखें।


♋ कर्क (Cancer)

भावनात्मक लेकिन समझदार दिन
आप अपने भीतर की आवाज़ को अधिक सुनेंगे।
करियर/पढ़ाई: धैर्य से किए गए प्रयास आगे चलकर फल देंगे।
धन: खर्च परिवार या घर से जुड़ा हो सकता है।
रिश्ते: माता-पिता या किसी बड़े से मार्गदर्शन मिलेगा।
स्वास्थ्य: भावनात्मक तनाव से बचने के लिए खुद को समय दें।


♌ सिंह (Leo)

आत्मविश्वास से भरा दिन
आपकी उपस्थिति लोगों को प्रभावित करेगी।
करियर/पढ़ाई: नेतृत्व करने का अवसर मिल सकता है।
धन: मान-सम्मान के साथ आर्थिक लाभ के संकेत हैं।
रिश्ते: लोग आपकी बातों को ध्यान से सुनेंगे।
स्वास्थ्य: ऊर्जा अच्छी रहेगी, लेकिन अहंकार से बचें।


♍ कन्या (Virgo)

योजना और अनुशासन का दिन
आप चीज़ों को व्यवस्थित करना चाहेंगे।
करियर/पढ़ाई: पढ़ाई या विश्लेषण वाले कार्यों में सफलता मिलेगी।
धन: फालतू खर्च परेशान कर सकता है।
रिश्ते: छोटी बातों पर आलोचना से बचें।
स्वास्थ्य: मानसिक तनाव को हल्के व्यायाम से कम करें।


♎ तुला (Libra)

संतुलन की परीक्षा
आज आपको निर्णय लेते समय दिल और दिमाग में तालमेल बैठाना होगा।
करियर/पढ़ाई: सहयोग से काम करने पर सफलता मिलेगी।
धन: आय-व्यय संतुलित रहेगा।
रिश्ते: दोस्ती मजबूत होगी।
स्वास्थ्य: शरीर को हल्का रखने वाले भोजन लें।


♏ वृश्चिक (Scorpio)

गहराई और आत्मचिंतन
आप अपने भविष्य को लेकर गंभीर सोच में रहेंगे।
करियर/पढ़ाई: गुप्त रूप से की गई मेहनत रंग लाएगी।
धन: निवेश से पहले पूरी जानकारी लें।
रिश्ते: भावनाएँ दबाने के बजाय सही तरीके से व्यक्त करें।
स्वास्थ्य: ध्यान और शांति जरूरी है।


♐ धनु (Sagittarius)

उत्साह और आशा
नया साल आपके लिए उम्मीद लेकर आया है।
करियर/पढ़ाई: नई दिशा या नई सीख मिल सकती है।
धन: यात्रा या शिक्षा पर खर्च संभव है।
रिश्ते: सकारात्मक सोच लोगों को आकर्षित करेगी।
स्वास्थ्य: शारीरिक गतिविधि आपको अच्छा महसूस कराएगी।


♑ मकर (Capricorn)

जिम्मेदारी और लक्ष्य
आप साल की शुरुआत ही लक्ष्य तय करके करेंगे।
करियर/पढ़ाई: मेहनत का सही परिणाम मिलने लगेगा।
धन: बचत बढ़ाने का अवसर है।
रिश्ते: परिवार आपकी गंभीरता को समझेगा।
स्वास्थ्य: शरीर को जरूरत से ज्यादा न थकाएँ।


♒ कुंभ (Aquarius)

नवाचार और अलग सोच
आप कुछ नया करने की सोचेंगे।
करियर/पढ़ाई: टेक्नोलॉजी, विज्ञान या रचनात्मक क्षेत्रों में लाभ।
धन: नए अवसर मिल सकते हैं।
रिश्ते: दोस्त आपके विचारों से प्रेरित होंगे।
स्वास्थ्य: पानी और आराम पर ध्यान दें।


♓ मीन (Pisces)

संवेदनशील और आध्यात्मिक दिन
आपका मन शांत लेकिन गहरा रहेगा।
करियर/पढ़ाई: रचनात्मक कार्यों में मन लगेगा।
धन: भावनाओं में आकर खर्च न करें।
रिश्ते: दूसरों की भावनाएँ अच्छे से समझेंगे।
स्वास्थ्य: योग, ध्यान या संगीत लाभ देगा।


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औद्योगिक विकास नीति 2024–30 में संशोधन : छत्तीसगढ़ को और अधिक निवेश-अनुकूल एवं प्रतिस्पर्धी बनाने की बड़ी पहल

रायपुर 31 दिसंबर 2025 / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य की औद्योगिक विकास नीति 2024–30 में महत्वपूर्ण संशोधनों को स्वीकृति प्रदान की गई है। इन संशोधनों के माध्यम से नीति को अन्य राज्यों की तुलना में और अधिक प्रतिस्पर्धात्मक, स्पष्ट एवं निवेश-अनुकूल बनाया गया है। इससे राज्य में औद्योगिक एवं सेवा क्षेत्र के साथ-साथ रोजगार के नए अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावनाएँ सुदृढ़ हुई हैं।

मंत्रिपरिषद द्वारा लिए गए निर्णयों का मुख्य उद्देश्य राज्य के मूल निवासियों के लिए स्थायी एवं गुणवत्तापूर्ण रोजगार का सृजन सुनिश्चित करना है। इसी दृष्टि से ईपीएफ प्रतिपूर्ति तथा रोजगार सृजन अनुदान से संबंधित नए प्रावधान जोड़े गए हैं। अब 50 से अधिक रोजगार उपलब्ध कराने वाले विशेष सेक्टर के उद्यम — जैसे फार्मा, टेक्सटाइल, खाद्य प्रसंस्करण, इलेक्ट्रॉनिक्स, एआई, आईटी आदि के एमएसएमई इकाइयों को भी छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को दिए जाने वाले वेतन पर अनुदान प्राप्त होगा।

सेवा क्षेत्र के दायरे का विस्तार करते हुए, मंत्रिमंडल ने कंप्यूटर-आधारित टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, ई-कॉमर्स एवं ऐप-आधारित एग्रीगेटर, तथा NABL मान्यता प्राप्त डायग्नोस्टिक लैब को भी नीति के अंतर्गत सम्मिलित किया है। इन संस्थाओं को अब औद्योगिक विकास नीति के तहत निर्धारित प्रोत्साहन एवं अनुदान का लाभ मिलेगा।

पर्यटन एवं स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास को गति देने के उद्देश्य से रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर में पाँच सितारा होटलों तथा अन्य जिलों में तीन सितारा होटलों की स्थापना के लिए प्रोत्साहनात्मक संशोधन किए गए हैं। इसी प्रकार राज्य में बड़े निजी मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की स्थापना को भी बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया है।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता संवर्धन के लिए यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है कि NIRF Ranking में शीर्ष 100 में शामिल शिक्षण संस्थानों द्वारा राज्य में परिसर स्थापित किए जाने पर उन्हें नीति के अंतर्गत विशेष अनुदान प्रदान किया जाएगा। इससे छत्तीसगढ़ में उच्च स्तरीय शिक्षण संस्थानों की स्थापना को बढ़ावा मिलेगा और राज्य के युवाओं को विश्व-स्तरीय शिक्षा एवं बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।

मंत्रिपरिषद द्वारा स्वीकृत ये संशोधन छत्तीसगढ़ को उद्योग एवं सेवा क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ निवेश गंतव्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। इन निर्णयों से राज्य में निवेश बढ़ने, व्यापक रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास की गति को और अधिक तेज एवं संतुलित बनाने में सहायता मिलेगी।

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पारंपरिक हस्तशिल्प से आजीविका की नई राह:‘जशक्राफ्ट’ ब्रांड के तहत तीन माह का विशेष डिजाइन एवं विकास प्रशिक्षण प्रारंभ

जशपुर 30 दिसम्बर 2025/ जशपुर जिले में पारंपरिक हस्तशिल्प को नई पहचान और बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से “जशक्राफ्ट” ब्रांड के अंतर्गत कालीन उत्पादन में उत्कृष्टता लाने हेतु विकास आयुक्त हस्तशिल्प, भारत सरकार, वस्त्र मंत्रालय, नई दिल्ली की CHCDS परियोजना के तहत “डिजाइन एंड डेवलपमेंट वर्कशॉप ऑन कारपेट क्राफ्ट” का आयोजन किया जा रहा है।

यह कार्यशाला जशपुर विकासखंड के बालाछापर ग्राम पंचायत स्थित रीपा परिसर में आयोजित की जा रही है। कार्यक्रम का आयोजन छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड द्वारा जिला प्रशासन जशपुर एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के समन्वय से किया जा रहा है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम 19 दिसंबर 2025 से 18 मार्च 2026 तक कुल तीन माह की अवधि का होगा।

उल्लेखनीय है कि जशपुर जिले के पारंपरिक हस्तशिल्प उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए ‘जशक्राफ्ट ब्रांड’ के अंतर्गत विभिन्न गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं। इसका उद्देश्य कालीन, छिंद-कांसा, बांस एवं काष्ठ शिल्प से जुड़ी स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं एवं कारीगरों को तकनीकी दक्षता प्रदान करने के साथ-साथ स्थायी बाजार से जोड़ना है।

यह संपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम जिला कलेक्टर श्री रोहित व्यास एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत श्री अभिषेक कुमार के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड के क्षेत्रीय प्रबंधक श्री राजेंद्र राजवाड़े ने बताया कि प्रशिक्षण में भाग ले रही 30 महिलाओं को प्रति दिवस ₹300 की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा रही है। साथ ही, तैयार उत्पादों के विपणन की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड द्वारा स्वयं वहन की जाएगी।

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि भारत सरकार द्वारा जशपुर जिले में कालीन उद्योग के अतिरिक्त ‘काष्ठ हस्तशिल्प’ का दो माह का प्रशिक्षण मनोरा विकासखंड के अलोरी ग्राम पंचायत में तथा ‘गोदना शिल्प’ पर एक माह का प्रशिक्षण दुलदुला विकासखंड में आयोजित किया जा रहा है।

बालाछापर में संचालित कालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम में दिल्ली से डिजाइनिंग प्रशिक्षक सुश्री कौशिकी सौम्या तथा स्थानीय प्रशिक्षक श्री चिंतामणि भगत (अंबिकापुर) द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

 इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय संविदा भर्ती : अंतिम मेरिट सूची जारी, जिले की वेबसाइट पर उपलब्ध

जशपुरनगर 31 दिसम्बर 2025/ स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय संचालन एवं प्रबंधन समिति जशपुर द्वारा संविदा भर्ती सत्र 2025-26 के अंतर्गत दावा-आपत्ति निराकरण के उपरांत अंतिम एकीकृत मेरिट सूची का प्रकाशन कर दिया गया है। यह सूची जिले के वेबसाइट www.jashpur.nic.in पर प्रकाशित की गई है। अभ्यर्थी इसका अवलोकन कर सकते है। प्राप्त जानकारी के अनुसार  संविदा भर्ती के लिए विभिन्न पदों हेतु आवेदन आमंत्रित किए गए थे। इसके पश्चात प्रारंभिक दावा-आपत्ति सूची 25 जुलाई 2025 को प्रकाशित की गई थी, जिस पर प्राप्त आपत्तियों के निराकरण के उपरांत 04 सितम्बर 2025 को प्रवर्गवार एवं विषयवार 30 गुनांक अभ्यर्थियों की एकीकृत मेरिट सूची जिले की वेबसाइट www.jashpur.nic.in पर प्रकाशित की गई थी। 30 गुनांक अभ्यर्थियों की अंतिम दावा-आपत्ति के निराकरण के पश्चात विज्ञापन की चयन प्रक्रिया के अंतर्गत अब प्रत्येक पद के विरुद्ध 25 गुनांक अभ्यर्थियों की एकीकृत मेरिट सूची प्रकाशित की गई है। भृत्य एवं चौकीदार पदों के लिए 25 गुनांक की पृथक मेरिट सूची जारी की जाएगी।

      जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि 25 गुनांक अभ्यर्थियों के मूल दस्तावेज सत्यापन, साक्षात्कार एवं कौशल परीक्षा की तिथि पृथक से निर्धारित कर शीघ्र ही जिले की वेबसाइट के माध्यम से सूचना दी जाएगी। सभी अभ्यर्थियों से अपील की गई है कि वे नियमित रूप से जिले की वेबसाइट www.jashpur.nic.in का अवलोकन करते रहें, ताकि आगामी प्रक्रिया से संबंधित जानकारी समय पर प्राप्त हो सके।

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दूरस्थ आदिवासी अंचलों को स्वास्थ्य की नई राह — मुख्यमंत्री साय ने 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट वाहनों को दिखाई हरी झंडी

*प्रदेश के 18 जिलों के 2100 से अधिक गाँवों और बसाहटों तक पहुँचाई जाएंगी नियमित स्वास्थ्य सेवाएँ*

रायपुर 31 दिसंबर 2025/ दूरस्थ और घने वनांचल वाले आदिवासी क्षेत्रों में अब स्वास्थ्य सेवाएँ लोगों के दरवाज़े तक पहुँचेंगी। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान “पीएम जनमन” के तहत बुधवार को नवा रायपुर में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल सहित मंत्रिमंडल के सदस्य, जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

मोबाइल मेडिकल यूनिटों के संचालन से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) तक नियमित स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। सरकार का मानना है कि दुर्गम अंचलों में रहने वाले समुदायों को अस्पताल तक पहुँचने में आने वाली कठिनाइयों को देखते हुए यह व्यवस्था स्वास्थ्य सुविधाओं को सीधे उनके गाँवों व बसाहटों तक पहुँचाएगी।

मोबाइल मेडिकल यूनिटों की तैनाती से प्रदेश के 18 जिलों के 2100 से अधिक गाँवों और बसाहटों तक नियमित स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाई जाएँगी। इससे दो लाख से अधिक विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) आबादी को प्रत्यक्ष लाभ मिल सकेगा।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए अब इलाज और जाँच की सुविधा गाँव में ही उपलब्ध होगी। उन्होंने इस पहल को आदिवासी समुदायों की “सर्वांगीण भागीदारी और स्वास्थ्य सुरक्षा का ठोस आधार” बताया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए यह गौरव का दिन है। समाज में आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक प्रत्येक दृष्टिकोण से पिछड़े लोग विशेष पिछड़ी जनजाति के लोग हैं। छत्तीसगढ़ में निवासरत 3 करोड़ की आबादी में विशेष पिछड़ी जनजाति के 2 लाख 30 हजार लोग 18 जिलों के 21 सौ बसाहटों में निवासरत हैं। यह मोबाइल मेडिकल यूनिट उनके लिए वरदान साबित होगा। इन सर्वसुविधा-संपन्न 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से यह कार्य आसान होगा। इस यूनिट में डॉक्टर, नर्स, लैब टेक्निशियन और स्थानीय वालंटियर उपस्थित होंगे। इस यूनिट में 25 तरह की जाँच सुविधाएँ तथा 106 तरह की दवाइयाँ निःशुल्क उपलब्ध होंगी। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस नवीन योजना के लिए स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, सीजीएमएससी के अध्यक्ष श्री दीपक म्हस्के सहित सभी अधिकारियों-कर्मचारियों को बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।

इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि विशेष पिछड़ी जाति के उत्थान के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय प्रयासरत हैं। यह मोबाइल मेडिकल यूनिट ऐसे सुदूर वनांचलों के लिए हैं जहाँ स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुँच कम है। आज 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट पूरे प्रदेश के लिए समर्पित कर रहे हैं, जो प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सपने को पूर्ण करेगा। मंत्री श्री जायसवाल ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने इस पुनीत कार्य में छत्तीसगढ़ को सहभागी बनकर योगदान देने का अवसर प्रदान किया।

स्वास्थ्य सचिव श्री अमित कटारिया ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 15 नवंबर 2023 को विशेष पिछड़ी जनजातियों के सामाजिक, आर्थिक उत्थान के लिए पीएम जनमन योजना की शुरुआत की। इसका उद्देश्य बुनियादी सुविधाओं को सीधे बसाहटों तक पहुँचाना है। उन्होंने कहा कि आपातकालीन स्थिति में मरीज को इन यूनिट के माध्यम से निकट स्वास्थ्य केंद्रों में पहुँचाना आसान होगा। हमारा उद्देश्य सिर्फ मशीनें ही नहीं, अपितु कुशल एवं संवेदनशील कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी है। प्रत्येक मोबाइल मेडिकल यूनिट में चिकित्सक, नर्स, लैब तकनीशियन, फार्मासिस्ट और स्थानीय स्वास्थ्य स्वयंसेवक तैनात किए गए हैं। ये यूनिटें हर 15 दिन में स्वास्थ्य शिविर आयोजित करेंगी, जिनमें 25 से अधिक प्रकार की जाँच और रोगों  का उपचार किया जाएगा और आवश्यक दवाइयों का वितरण किया जाएगा। गंभीर मरीजों को आवश्यकता अनुसार निकटतम स्वास्थ्य संस्थानों में भेजा जाएगा।

उल्लेखनीय है कि पूर्व में संसाधनों की कमी के कारण दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएँ नियमित रूप से नहीं पहुँच पाती थीं। अब नए वाहन और प्रशिक्षित कर्मियों की उपलब्धता के साथ यह व्यवस्था लगातार संचालित की जा सकेगी। इस पहल से टीबी, मलेरिया, एनीमिया और कुपोषण जैसी समस्याओं की समय पर पहचान व रोकथाम में मदद मिलेगी।

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ के समग्र विकास, किसानों एवं वनवासी परिवारों के हित, औद्योगिक निवेश को बढ़ावा तथा प्रशासनिक सुधारों की दिशा में मंत्रिपरिषद द्वारा लिए गए कई महत्वपूर्ण फैसले”

रायपुर 31 दिसम्बर 2025
*मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए -*

1. मंत्रिपरिषद की बैठक में तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों से 5500 रुपये प्रति मानक बोरा की दर से तेंदूपत्ता खरीदने के लिए वर्ष 2026 हेतु ऋण लेने के लिए राज्य शासन की गारंटी देने की अनुमति दी गई।

2. मंत्रिपरिषद ने कोदो, कुटकी और रागी की खरीद, प्रसंस्करण और बिक्री के लिए छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ को कार्यशील पूंजी प्रदाय किये जाने की अनुमति दी गई।

3. मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ को अराष्ट्रीयकृत लघु वनोपज के क्रय, भंडारण, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन के लिए एक बार के लिए 30 करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त ऋण देने का निर्णय लिया है।

4. मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ राज्य अंत्यावसायी सहकारी वित्त एवं विकास निगम द्वारा राज्य शासन की प्रत्याभूति (गारंटी) पर लिए गए ऋणों के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिया। इसके अंतर्गत राज्य शासन द्वारा 55.69 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान कर पांच राष्ट्रीय निगमों से लिए गए ऋणों की पूर्ण राशि वापस करने का अनुमोदन किया गया। ये राष्ट्रीय निगम हैं- राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम, पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम, अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम और दिव्यांग वित्त एवं विकास निगम।

वर्तमान में इन ऋणों पर राज्य शासन द्वारा प्रतिवर्ष लगभग 2.40 करोड़ रुपये ब्याज का भुगतान किया जा रहा है। ऋण की पूरी अदायगी होने पर यह ब्याज व्यय पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। साथ ही राष्ट्रीय निगमों से एनओसी (अदेय प्रमाण पत्र) प्राप्त होने पर शासन की ओर से दी गई 229.91 करोड़ रुपये की लंबित गारंटी देनदारी भी समाप्त हो जाएगी। इस निर्णय से राज्य शासन पर वित्तीय बोझ कम होगा और भविष्य में होने वाले अनावश्यक व्यय से बचत सुनिश्चित होगी।

5. मंत्रिपरिषद ने निर्णय लिया है कि - 
 उसना मिलिंग पर प्रोत्साहन राशि 20 रू. प्रति क्विंटल से बढ़ाकर की गई 40 रू. प्रति क्विंटल

 सभी मिलरों के लिए प्रोत्साहन राशि की पात्रता हेतु अब न्यूनतम 03 माह की जगह न्यूनतम 02 माह की मिलिंग करनी होगी
   
6. मंत्रिपरिषद ने औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में संशोधन का निर्णय लिया। इससे नीति के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रचार-प्रसार, विशेषज्ञों की नियुक्ति और सेवा गतिविधि प्रमाणपत्र जारी करने के संबंध में विसंगतियां दूर होंगी। इन संशोधनों से राज्य में निवेश की गुणवत्ता बढ़ेगी, स्थायी रोजगार सृजन होगा और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।

7. मंत्रिपरिषद ने राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज ग्राउंड में 20 जनवरी से 5 फरवरी तक आयोजित 9वें ऑटो एक्सपो के दौरान बिकने वाले वाहनों पर लाइफ टाइम रोड टैक्स में 50 प्रतिशत छूट प्रदान करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।  यह छूट एक्सपो में वाहन बिक्री के बाद पंजीकरण के समय लागू होगी, जिससे मोटरयान कर में एकमुश्त 50 प्रतिशत की राहत मिलेगी। पूरे प्रदेश के वाहन विक्रेताओं को इसका लाभ मिलेगा, इस संबंध में निर्देशित किया गया है।

8. मंत्रिपरिषद द्वारा प्रदेश में कस्टम मिलिंग के लिए धान उपार्जन एवं परिवहन से संबंधित गतिविधियों के लिए राइस मिलर्स द्वारा दी जाने वाली बैंक गारंटी पर देय स्टाम्प शुल्क को 0.25 से घटाकर 0.05 प्रतिशत करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। 

9. मंत्रिपरिषद द्वारा पुलिस मुख्यालय छत्तीसगढ़ नवा रायपुर अटल नगर में विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी का एक नवीन पद वेतन मेट्रिक्स लेवल-14 एक वर्ष की अवधि के लिए स्थायी रूप से निर्मित किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है।

10. मंत्रिपरिषद द्वारा रायपुर महानगरीय पुलिस जिला में पुलिस आयुक्त प्रणाली को 23 जनवरी से लागू किए जाने के संबंध में निर्णय लिया गया है।

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