बन्दरचुआँ में ऐतिहासिक हिंदू सम्मेलन, सनातन एकता का हुआ शंखनाद,संगठित हिंदू समाज ही राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति - प्रबल प्रताप सिंह जूदेव
हिंदू एकता, संस्कृति और राष्ट्रभाव पर केंद्रित रहा बन्दरचुआँ का विशाल सम्मेलन
नारायणपुर 1 जनवरी 2026 : कुनकुरी मंडल के बन्दरचुआँ ग्राम में रविवार को विशाल हिंदू सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। सम्मेलन में क्षेत्र के बड़ी संख्या में ग्रामीणजन, सामाजिक कार्यकर्ता एवं संगठन से जुड़े पदाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित करना, सनातन संस्कृति के मूल्यों का संरक्षण तथा सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देना रहा।
सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश उपाध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी आदरणीय श्री प्रबल प्रताप सिंह जूदेव जी शामिल हुए। मुख्य वक्ता विभाग प्रचारक सरगुजा श्री हेमन्त नाग जी रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री नारायण गुप्ता जी ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री शंभूनाथ जी चक्रवर्ती (पर्यावरण संरक्षण गतिविधि, धार्मिक प्रांत प्रमुख एवं अध्यक्ष माटीकला बोर्ड छत्तीसगढ़) की उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ विधिवत दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इसके पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति हुई, जिसने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। अतिथियों का पारंपरिक रूप से स्वागत एवं परिचय कराते हुए उन्हें मंचासीन कराया गया। इसके बाद वक्ताओं ने क्रमशः अपने विचार रखे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री नारायण गुप्ता जी ने अपने संबोधन में हिंदू सनातन संस्कृति एवं परंपराओं की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म केवल आस्था नहीं, बल्कि जीवन पद्धति है, जो समाज को संस्कार, एकता और नैतिकता का मार्ग दिखाती है।
मुख्य अतिथि श्री प्रबल प्रताप सिंह जूदेव जी ने अपने उद्बोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विशाल हिंदू सम्मेलन का उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित करना और सभी को एकजुट कर सनातन संस्कृति को सशक्त बनाना है। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि देश, धर्म और संस्कृति के प्रति समर्पण भाव बनाए रखें तथा किसी भी प्रकार के विरोध या भटकाव से सतर्क रहें।
उन्होंने स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव जी के कार्यों को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने जीवनभर सनातन धर्म की रक्षा एवं सामाजिक चेतना के लिए कार्य किया, जिसके कारण उन्हें “हिंदू सम्राट” के नाम से भी जाना गया। वर्तमान में स्वयं भी समाज हित में कार्य करते हुए घर वापसी जैसे अभियानों से सनातन संस्कृति को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
मुख्य वक्ता श्री हेमन्त नाग जी ने कहा संघ की स्थापना हिंदू समाज में व्याप्त विखराव, मतभेद और संगठन की कमी को दूर करने के उद्देश्य से की गई थी। आज समाज को संगठित रहकर अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए रखने की आवश्यकता है।
उन्होंने पंच परिवर्तन के पांच बिंदुओं—सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्व का बोध और नागरिक कर्तव्य—पर विशेष जोर देते हुए मातृशक्तियों से अपील की कि वे इन मूल्यों को अपने घर-परिवार से अपनाने की शुरुआत करें।
कार्यक्रम के अंत में भारत माता की सामूहिक आरती की गई, जिसके बाद प्रसाद वितरण किया गया। सम्मेलन में विशिष्ट रूप से सरपंच श्री विकास साय जी (बन्दरचुआँ), श्री पंचु माली नागवंशी (प्रांत सह घोष प्रमुख), श्री राजकुमार सिंह (जिला कार्यवाह), श्री ऋषिकेश चक्रधारी (जिला प्रचारक), श्री शंकर यादव (मंडल पालक), श्री जगतपाल (जिला घोष प्रमुख), श्री पुरूषोत्तम (सह घोष प्रमुख), श्री गोविंद यादव, श्री विनय चक्रधारी, श्री अशोक चौहान (खण्ड कार्यवाह), श्री बिहारी नायक, श्री राजकुमार चौहान, श्री देवचरण, श्री कमलेश सिंह, श्री विनय गुप्ता (मंडल कार्यवाह), श्री रवि यादव (मंडल संयोजक), श्री जयदीप गुप्ता (सह संयोजक), श्री अनूप नारायण, श्री सुखचंद राम, श्री सोनसाय राम, श्री खिरोधर यादव, श्री गजेन्द्र यादव, श्री अंकित गुप्ता, श्री अयोध किशोर गुप्ता, श्री प्रेम साय सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।
