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तमनार : करेंट से हाथी की मौत प्रकरण में पांच और आरोपियों की गिरफ्तारी, अब तक कुल दस आरोपी गिरप्तार

रायगढ़, 8 नवम्बर 2025/ तमनार वन परिक्षेत्र में करंट की चपेट में आने से एक हाथी की मौत के प्रकरण में वन विभाग की कार्रवाई लगातार जारी है। विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आज पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही अब तक इस मामले में कुल 10 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में ग्राम नूनदरहा के लक्ष्मीराम पिता भगतराम, रामप्रसाद पिता दया और मोहन पिता पालिस राम तथा ग्राम केराखोल के महावीर पिता मालिकराम एवं घसियाराम पिता लछन यादव शामिल हैं।
            इससे पहले बसंत राठिया, वीर सिंह मांझी, रामनाथ राठिया, देवनारायण राठिया और जयलाल मांझी को वन विभाग ने गिरफ्तार किया था। वन विभाग की प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आया कि आरोपियों ने खेत की मेड़ पर जंगली सूअर के शिकार के उद्देश्य से बिजली का करंट प्रवाहित तार बिछाया था। उसी में फंसकर एक हाथी की मौत हो गई थी। आरोपियों के विरुद्ध वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम, 1972 की संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया है। गिरफ्तार सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीवों की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अपराध को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभाग दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
             यह संपूर्ण कार्रवाई वनमंडलाधिकारी श्री अरविंद पी. एम. एवं उप वनमंडलाधिकारी श्री मनमोहन मिश्रा के मार्गदर्शन व निर्देशन में तथा वन परिक्षेत्र अधिकारी श्री विक्रांत कुमार के नेतृत्व में की जा रही है। वन विभाग की टीम इस प्रकरण की जांच में सक्रिय है और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की गहनता से पड़ताल जारी है।

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गैर संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम के भौतिक प्रगति की समीक्षा बैठक सम्पन्न

जशपुरनगर 08नवम्बर 2025/स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग जशपुर अंतर्गत स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार व जिलें में संचालित विभिन्न राष्ट्रीय कार्यक्रमों के सुचारू रूप से संचालन व क्रियान्वयन हेतु कलेक्टर श्री रोहित व्यास के निर्देशानुसार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जी. एस. जात्रा एवं श्री राजीव रंजन मिश्रा जिला कार्यक्रम प्रबंधक की अध्यक्षता में जिलें में संचालित विभिन्न राष्ट्रीय कार्यक्रमों की समय-समय पर जिला एवं विकासखंड स्तर पर मॉनिटरिंग के साथ-साथ जिला स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की जा रही है। 
         इसी कड़ी में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जशपुर के सभाकक्ष में गैर संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम के भौतिक प्रगति के संबंध में विकासखंड स्तर पर संचालित समस्त सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं उप-स्वास्थ्य केंद्र, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों हेतु एक दिवसीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। 
      बैठक में एन.सी.डी. कार्यक्रम अंतर्गत समाहित सूचकांको, गैर संचारी रोग  जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप, कैंसर -ओरल, ब्रेस्ट व सरवाईकल से ग्रसित रोगियों के पंजीयन, स्क्रीनिंग, रि-स्क्रीनिंग, जॉच, परीक्षण एवं उपचार व फॉलोअप के साथ कार्ड निर्माण हेतु निर्धारित लक्ष्य अनुरूप न्यूनतम प्रगति प्राप्त स्वास्थ्य संस्थानों के आर.एच.ओ. व सी.एच.ओ. की समीक्षा की गई। तथा लक्ष्य अनुरूप प्रगति प्राप्त करने के लिए कार्ययोजना निमार्ण कर शेष लक्ष्य प्राप्ति हेतु प्रोत्साहित किया गया। समीक्षा बैठक में उत्कृष्ठ प्रर्दशन वाले स्वास्थ्य संस्थानों के जे.एस.ए., आर.एच.ओ., सी.एच.ओ. को निरंतर लक्ष्य अनुरूप प्रगति प्राप्त करने के लिए समस्त विकासखंड से एक-एक उत्कृष्ठ प्रर्दशन करने वाले कुल 08 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, दुलदुला मे कार्यक्रम के तहत् कार्यरत 01 कनिष्क सचिवीय सहायक को एन.सी.डी. पोर्टल में एंट्री सहित मॉनिटरिंग, रिर्पोटिंग में उत्कृष्ठ प्रर्दशन करने के लिए उत्कृष्ठता प्रमाण पत्र से सम्मानित किया गया।  
       एन.सी.डी. कार्यक्रम अंतर्गत आयोजित उक्त समीक्षा बैठक के सफल आयोजन में कार्यक्रम के जिला नोडल अधिकारी, जिला सलाहकार, एन.सी.डी., जिला डाटा प्रबंधक, एन.एच.एम. व अन्य सहयोगी कर्मचारी द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका निभाया गया।

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जिला स्तरीय राज्योत्सव पर आयुष विभाग द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी स्टाल,473 रोगियों का निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण कर दी की गई औषधि

जशपुरनगर 08 नवंबर 2025/ छ.ग. राज्य स्थापना दिवस की रजत जयंती पर पूरे प्रदेश में मनाए जा रहे राज्योत्सव के अंतर्गत जशपुर जिला मुख्यालय के रणजीता स्टेडियम में जिला स्तरीय राज्योत्सव समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर आयुष विभाग द्वारा जिला आयुष अधिकारी जशपुर के मार्गदर्शन में विभागीय प्रदर्शनी एवं स्टाल लगाया गया। 
           प्रदर्शनी में आयुष विभाग द्वारा विगत 25 वर्षों में की गयी उपलब्धियां, आयुष विभाग की विभिन्न योजनाएं एवं गतिविधियां तथा आयुष संस्थाओं में उपलब्ध पंचकर्म सुविधाएं, तथा शुष्क द्रव्यों को प्रदर्शित किया गया। इसके अतिरिक्त रोगियों का आयुष चिकित्सा पद्धति  से निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण कर औषधि प्रदान किया गया। जिसके अंतर्गत आयुर्वेद पध्दति से 315 होम्योपैथी पद्धति से 158 कुल 473 रोगियों का उपचार किया गया।
            आयुष विभाग द्वारा प्रदर्शनी के माध्यम से विभिन्न गतिविधियां एवं योजना जैसे सियान जतन क्लीनिक योजना, राष्ट्रीय कार्यक्रम वयोमित्र, राष्ट्रीय कार्यक्रम एनीमिया, राष्ट्रीय कार्यक्रम कुपोषण, राष्ट्रीय कार्यक्रम ऑस्टियो आर्थराइटिस एवं मस्कुलो स्क्लेटल डिसआर्डर, राष्ट्रीय कार्यक्रम आयुर्विद्या, हाट बाजार, आयुष मोबाइल मेडिकल यूनिट, जिला स्तरीय स्वास्थ्य शिविर एवं विभिन्न उपलब्धियां की जानकारी दी गयी। विभाग की ओर से आयुर्वेद एवं होम्योपैथिक सम्बन्धित ब्रोशर जैसे प्रचार प्रसार सामग्री का वितरण किया गया। इसके अतिरिक्त आयुष संस्थाओं में किये जा रहे पंचकर्म सुविधाएं जैसे कटिवस्ति, नस्य, सर्वांग स्वेद, शिरोधारा का लाईव डिमांसट्रेशन किया गया। जिसे माननीय स्वास्थ्य मंत्री श्रीश्याम बिहारी जायसवाल जी के द्वारा स्टाल का निरीक्षण के दौरान अत्यन्त सराहना दिया गया। राज्योत्सव में आयुष विभाग द्वारा लगाये प्रदर्शनी के कार्यसंपादन के प्रभारी डा. एल.आर. भगत आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी, सहायक प्रभारी डॉ. हरिकृष्ण श्रीवास आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी के द्वारा किया गया। इसके अतिरिक्त इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए डा. दीपक एक्का विशेषज्ञ चिकित्सक, डा. शशि भूषण सिंह होम्योपैथिक चिकित्सा अधिकारी, डा. निकिता मिंज, डा. ऋतम्भरा प्रज्ञा पैंकरा, डॉ. पूजा भगत, डॉ. रंजीत गुरू, डॉ. कपिल श्रीवास्तव, डॉ. अक्षय साहू, शरद साहू, सुशील भगत इत्यादि अधिकारी एवं कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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प्रकृति के बीच पर्यटकों ने नीमगांव,मयाली नेचर कैम्प, विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग मधेश्वर पहाड़,सारूडीह चाय बगान जिला संग्रहालय,सरना एथेनिक रिजॉर्ट का किया अवलोकन 


जशपुर 8 नवम्बर 25/ जशपुर जम्बुरी के दूसरे दिन सुबह सूरज उगने से पहले  ही 120 पर्यटकों ने अपना सफर नीमगाँव से शुरू किया जहाँ प्रतिभागी शांत और मनमोहक पक्षी-दर्शन सत्र में शामिल हुए। सुनहरी धुंध से ढकी वादियों में जब पक्षियों की चहचहाहट गूंजी, तो पूरा जंगल जीवन से भर उठा। यह एक सुकूनभरी शुरुआत थी, जिसने सभी को जशपुर की शांत और प्राकृतिक लय से जोड़ दिया।

नाश्ते के बाद प्रतिभागियों को दिनभर की रोमांचक यात्राओं के लिए दो समूहों में बाँटा गया।

पहला समूह रवाना हुआ मयाली की ओर, जो पवित्र मधेेश्वर पर्वत की तलहटी में बसा है —  जो  प्राकृतिक रूप से शिवलिंग का सबसे विशाल स्वरूप है। इस आध्यात्मिक वातावरण में दिनभर का रोमांच और भी खास बन गया। मयाली  के नीले पानी में प्रतिभागियों ने कयाकिंग, एक्वा साइक्लिंग, एटीवी राइड्स और जोशीले पेंटबॉल गेम जैसे कई साहसिक खेलों का आनंद लिया। आसमान में उड़ते पैरामोटर और हॉट एयर बलून से मधेेश्वर पर्वत और हरे-भरे जंगलों का विहंगम दृश्य सभी को मंत्रमुग्ध कर गया। रोमांच के बाद, स्थानीय व्यंजनों से सजे दोपहर के भोजन ने सबके दिन को और भी स्वादिष्ट बना दिया।

वहीं, दूसरा समूह देश देखा में रहा, जहाँ दिनभर के लिए खुला आसमान और पथरीला भूभाग रोमांच का नया अध्याय लिख रहा था। प्रतिभागियों ने यहाँ बोल्डरिंग, रॉक क्लाइम्बिंग, जुमारिंग और ज़िपलाइनिंग जैसी गतिविधियों में भाग लिया। हर चुनौती के साथ जोश, हौसला और टीम भावना की गूंज चारों ओर सुनाई दे रही थी। दोपहर के भोजन के बाद यह समूह , सारूडीह चाय बगान,रानीदाह और जशपुर संग्रहालय की सैर पर निकला, जहाँ उन्होंने जशपुर की कला, इतिहास और प्राकृतिक धरोहर को करीब से जाना।

शाम होते-होते यह समूह पहुँचा सरना एथनिक रिज़ॉर्ट, जहाँ रात की रौनक बढ़ी एक सुंदर आदिवासी सांस्कृतिक कार्यक्रम से। जशपुर की महिला स्वसहायता समूहों (SHG) ने अपने पारंपरिक नृत्य और लोकगीतों से सबका मन मोह लिया। उनके रंगीन परिधान, ताल और ऊर्जा ने जशपुर की असली आत्मा को मंच पर जीवंत कर दिया।

कार्यक्रम समाप्त होने के बाद दोनों समूह फिर से देश देखा में एकजुट हुए। सितारों से भरे आसमान के नीचे जलती कैम्पफायर की गर्माहट ने सबको एक साथ ला दिया। हंसी-मज़ाक, अनुभवों की बातें और शांत तारामंडल दर्शन ने इस रोमांचक दिन का समापन बेहद खूबसूरती से किया।

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मुख्यमंत्री ने दी जिले को बड़ी सौगात, चार नालों पर बनेगा पुल, 13 करोड़ 69 लाख की मिली मंजूरी, 

जशपुरनगर 8 नवम्बर 25/मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने जिले को विकास की नई सौगात दी है। मुख्यमंत्री ने जिले के चार अलग-अलग स्थानों पर पुल निर्माण के लिए कुल 13 करोड़ 69 लाख 21 हजार रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। इन पुलों के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन अब और अधिक सुगम हो जाएगा। मिली जानकारी के अनुसार दुलदुला एल-025 से बनगांव मार्ग में पुल निर्माण के लिए 3 करोड़ 60 लाख 88 हजार की मंजूरी दी गई है।चटकपुर से बकुना मार्ग पर पुल निर्माण के लिए 2 करोड़ 71 लाख 62 हजार की स्वीकृति प्राप्त हुई है। मुड़ाअम्बा मुड़ा नाला पर पुल निर्माण हेतु 2 करोड़ 69 लाख 44 हजार की मंजूरी मिली है।वहीं फरसाबहार क्षेत्र के रायअम्बा से मकरीबंधा कुसुमनाला पर पुल निर्माण के लिए 4 करोड़ 67 लाख 27 हजार स्वीकृत किए गए हैं।

   इन पुलों के निर्माण से न केवल ग्रामीणों के दैनिक आवागमन में सुविधा होगी, बल्कि वर्षा ऋतु के दौरान भी संपर्क मार्ग बाधित नहीं होंगे। इससे स्थानीय व्यापार, शिक्षा, कृषि व स्वास्थ्य सेवाओं में भी व्यापक सुधार की उम्मीद है।ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में जिले के विकास कार्यों को नई दिशा मिल रही है। सीएम साय के सुशासन में जशपुर जिले की तस्वीर लगातार बदल रही है।

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मुख्यमंत्री ने ली जल संसाधन विभाग की समीक्षा बैठक,निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाओं के कार्यों में गति लाने के दिए निर्देश 

रायपुर, 07 नवम्बर 2025/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में जल संसाधन विभाग की समीक्षा बैठक ली। उन्होंने प्रदेश में संचालित सभी निर्माणाधीन एवं प्रगतिरत सिंचाई परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की और निर्देश दिए कि सभी कार्य गुणवत्तापूर्ण ढंग से संपन्न हों तथा निर्माण कार्यों की गति में तेजी लाई जाए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशानिर्देश देते हुए कहा कि जल संसाधन परियोजनाएँ प्रदेश के सर्वांगीण विकास की धुरी हैं। उन्होंने कहा कि जनता को स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता और कृषि कार्यों के लिए पर्याप्त जलापूर्ति सुनिश्चित करने हेतु सिंचाई परियोजनाओं का निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण होना अत्यंत आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सभी निर्माणाधीन एवं प्रगतिरत सिंचाई परियोजनाओं के कार्यों में गति लाने के स्पष्ट निर्देश दिए।

बैठक में जल संसाधन विभाग के सचिव श्री राजेश सुकुमार टोप्पो ने मुख्यमंत्री को पावर पॉइंट प्रेज़ेंटेशन के माध्यम से प्रदेश की निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया।

बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद सहित जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री की घोषणा पर अमल : बैगा गुनिया हड़जोड़ सम्मान के लिए चिन्हित व्यक्तियों को मिलेगी प्रति वर्ष 5 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि

रायपुर, 07 नवम्बर 2025/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की घोषणा के अनुरूप अनुसूचित जनजाति वर्ग के बैगा, गुनिया एवं हड़जोड़ के चिन्हित व्यक्तियों को प्रति वर्ष 5,000 रुपए की सम्मान सह-प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इस योजना को ‘मुख्यमंत्री बैगा गुनिया हड़जोड़ सम्मान योजना (अनुसूचित जनजाति) वर्ष 2025’ के नाम से जाना जाएगा। योजना के संबंध में 6 नवम्बर को आदिम जाति विकास विभाग द्वारा विस्तृत अधिसूचना जारी की गई है।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय बाहुल्य ग्रामीण क्षेत्रों में परंपरागत रूप से वनौषधीय चिकित्सा संबंधी कार्यों में संलग्न बैगा, गुनिया एवं हड़जोड़ लोगों की परंपरागत वनौषधीय चिकित्सा पद्धति को प्रोत्साहित करने और उनके सेवा एवं योगदान को मान्यता देने के उद्देश्य से, जनजातीय गौरव दिवस 15 नवम्बर 2024 के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा प्रति चिन्हित व्यक्ति को प्रतिवर्ष 5,000 रुपए की सम्मान सह-प्रोत्साहन निधि प्रदान करने की घोषणा की गई थी।

आदिम जाति विकास विभाग द्वारा जारी अधिसूचना में उल्लेखित है कि ‘मुख्यमंत्री बैगा, गुनिया-हड़जोड़ सम्मान योजना’ का उद्देश्य जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के अंतर्गत परंपरागत रूप से वनौषधियों के ज्ञान में दक्ष बैगा, गुनिया और हड़जोड़ व्यक्तियों के पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करना, उसे आगामी पीढ़ियों तक हस्तांतरित करना और उनके वनौषधीय चिकित्सकीय अनुभवों का अभिलेखीकरण कर उनकी आजीविका एवं सेवा को सुदृढ़ बनाना है।

अधिसूचना में यह भी उल्लेख किया गया है कि जनजाति समाजों में वनौषधीय चिकित्सा संबंधी अनुभव परिवारों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होते हैं। अनुसूचित क्षेत्रों के ग्रामों में ऐसे बैगा, गुनिया एवं हड़जोड़ व्यक्ति जो विगत तीन वर्षों से वनौषधीय चिकित्सा सेवा कार्य में संलग्न हैं, उन्हें संरक्षित करने और सम्मानित करने के उद्देश्य से प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिवर्ष 5,000 रुपए की सम्मान राशि प्रदान की जाएगी।

छत्तीसगढ़ राज्य के अनुसूचित जनजाति वर्ग के स्त्री, पुरुष एवं तृतीय लिंग (ट्रांसजेंडर) व्यक्ति, जो बैगा, गुनिया या हड़जोड़ के रूप में कम से कम 30 वर्षों से अपने स्थानीय क्षेत्र में सेवाएँ दे रहे हैं तथा जिनके परिवार में कम से कम दो पीढ़ियों से वनौषधीय चिकित्सा का ज्ञान स्थानांतरित हुआ है, पात्र माने जाएंगे। साथ ही, जो व्यक्ति पादप औषधि बोर्ड, आयुष विभाग, वन विभाग या लघु वनोपज संघ जैसी पंजीकृत संस्थाओं से जुड़े हुए हैं, उनका चयन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ग्राम स्तर पर किया जाएगा।

ग्राम सभा एवं ग्राम पंचायत द्वारा प्रेषित नामों की अनुशंसा ग्राम स्तर पर ग्राम सचिव, सरपंच, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन तथा प्राथमिक अथवा माध्यमिक शाला के प्रधानपाठक द्वारा अनुमोदित की जाएगी। इस अनुशंसा के आधार पर संबंधित जिले के सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास स्तर पर गठित समिति — जिसमें संबंधित जनपद अध्यक्ष, अनुसूचित जनजाति वर्ग के एक जनपद सदस्य, मुख्य कार्यपालन अधिकारी (जनपद पंचायत) एवं मंडल संयोजक शामिल होंगे — द्वारा अनुशंसित नामों का परीक्षण और सत्यापन किया जाएगा। सत्यापित सूची आयुक्त, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास कार्यालय को प्रेषित की जाएगी। समिति द्वारा किसी मान्यता प्राप्त संस्था से प्रशिक्षण प्राप्त सदस्यों का विशेष रूप से उल्लेख किया जाएगा।

ग्राम सभा/ग्राम पंचायत से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर तथा जनपद स्तर पर गठित समिति की अनुशंसा के उपरांत सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास द्वारा कलेक्टर से अनुमोदन प्राप्त कर प्रस्ताव आयुक्त, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास को भेजा जाएगा। प्राप्त प्रस्तावों के अनुसार जिलों को आवश्यक धनराशि का आबंटन किया जाएगा। तत्पश्चात सहायता राशि का वितरण जिला कलेक्टर द्वारा किया जाएगा तथा सम्मान निधि प्राप्त व्यक्तियों की सूची संबंधित ग्राम सभा में सार्वजनिक रूप से पढ़ी जाएगी।

*"छत्तीसगढ़ की जनजातीय परंपराएं हमारे सांस्कृतिक वैभव और प्राचीन ज्ञान का जीवंत प्रतीक हैं। बैगा, गुनिया और हड़जोड़ हमारे समाज के वे सम्मानित जन हैं, जिन्होंने सदियों से वनौषधीय चिकित्सा की लोकपरंपरा को जीवित रखा है। उनकी इस अनमोल सेवा और ज्ञान को सम्मान देने के लिए राज्य सरकार ने “मुख्यमंत्री बैगा गुनिया हड़जोड़ सम्मान योजना” प्रारंभ की है। इस योजना के माध्यम से हम न केवल उनके योगदान को मान्यता दे रहे हैं, बल्कि उनकी परंपरागत चिकित्सा प्रणाली को संरक्षित करते हुए आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प भी निभा रहे हैं।" - मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय*

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धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर होंगे विशेष आयोजन

रायपुर, 7 नवम्बर 2025/ भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्देशानुसार इस वर्ष 15 नवम्बर 2025 को धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में समूचे देश में “जनजातीय गौरव दिवस” भव्य रूप से मनाया जाएगा। इस अवसर पर 1 नवम्बर से 15 नवम्बर 2025 तक “जनजातीय गौरव पखवाड़ा” का आयोजन किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में प्रदेश के सभी जिलों में प्रभारी मंत्री, सांसद, विधायक, जनप्रतिनिधि एवं प्रभारी सचिवों की उपस्थिति में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। जिला स्तरीय समारोह में जनजातीय संस्कृति, लोककला, व्यंजन, हस्तशिल्प और विकास प्रदर्शनी के साथ-साथ भारत सरकार एवं राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का भी प्रदर्शन किया जाएगा।

कार्यक्रमों में शहीद वीर नारायण सिंह लोक कला महोत्सव एवं उत्तर छत्तीसगढ़ जनजातीय लोक नृत्य महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही आश्रम-छात्रावासों, शासकीय संस्थानों और जनजातीय ग्रामों में प्रभातफेरी, जन-जागरूकता यात्राएँ, वृक्षारोपण, निबंध, वाद-विवाद एवं चित्रकला प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाएँगी। जनजातीय नायक-नायिकाओं के जीवन और योगदान पर संगोष्ठियाँ भी होंगी।

इस पखवाड़े के दौरान विशेष लाभार्थी संतृप्ति शिविरों का आयोजन किया जाएगा, जिनमें आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, जनधन खाता, सिकल सेल जांच, स्वास्थ्य परीक्षण, जाति प्रमाणपत्र वितरण, पीएम किसान सम्मान निधि एवं किसान क्रेडिट कार्ड जैसी सेवाएँ प्रदान की जाएँगी।

जिले के “आदि सेवा केन्द्रों” में भी गौरव दिवस का आयोजन किया जाएगा। जिला स्तरीय मुख्य कार्यक्रम में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों, जनजातीय समुदाय के प्रमुखों, प्रतिभावान बच्चों एवं उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों का सम्मान किया जाएगा। साथ ही पी.एम. जनमन, आदि कर्मयोगी तथा धरतीआबा योजनाओं से संबंधित लघु फिल्में प्रदर्शित की जाएँगी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का संदेश-पाठ (पाती वाचन) भी किया जाएगा।

जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर यह आयोजन प्रदेश के आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा, संघर्ष और गौरवगाथा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का अवसर बनेगा।

*"धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती हम सबके लिए गर्व और प्रेरणा का अवसर है। भगवान बिरसा मुंडा ने अपने अदम्य साहस, संघर्ष और त्याग से जनजातीय समाज को स्वाभिमान और स्वतंत्रता का संदेश दिया। जनजातीय गौरव पखवाड़ा न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत के उत्सव का प्रतीक है, बल्कि यह आदिवासी समाज के उत्थान, सम्मान और सशक्तिकरण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का भी प्रमाण है। मैं सभी प्रदेशवासियों  से आग्रह करता हूँ कि वे इस पखवाड़े में उत्साहपूर्वक भाग लें और हमारी जनजातीय संस्कृति, परंपरा एवं मूल्यों को आगे बढ़ाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएँ।"- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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मातृभूमि में जन्म,पालन-पोषण हुआ और पहचान दी, उसकी सेवा ही हमारे जीवन का सबसे बड़ा धर्म : मुख्यमंत्री श्री साय

रायपुर 7 नवम्बर 2025/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राष्ट्रगीत वन्देमातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि वाल्मीकि रामायण में मातृभूमि को स्वर्ग से भी श्रेष्ठ बताया गया है — “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी”। उन्होंने कहा कि जिस भूमि ने हमें जन्म दिया, पालन-पोषण किया और पहचान दी, उसकी सेवा ही हमारे जीवन का सबसे बड़ा धर्म है। भारत माता की आराधना केवल शब्दों में नहीं, अपने कर्तव्यों के सम्यक निर्वहन के माध्यम से होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जब हम भारत माता की पूजा करते हैं, तो पूजा में दक्षिणा देना भी आवश्यक होता है। इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए छत्तीसगढ़ के प्रत्येक अधिकारी, कर्मचारी और जनप्रतिनिधि को अपने-अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी से करना चाहिए। यही हमारी मातृभूमि के प्रति सच्ची देशभक्ति और सबसे महत्वपूर्ण दक्षिणा होगी।

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सरस मेला में महिला सशक्तिकरण का दिखा अनूठी झलक,उत्साहित स्व-सहायता समूह की महिलाएँ....बढ़ा आत्मविश्वास और आर्थिक समृद्धि


 
जशपुरनगर 07 नवम्बर 2025/ “महिलाओं का हुनर, जशपुर का गौरव” थीम पर आयोजित संभाग स्तरीय सरस मेला – 2025 में महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की अनूठी झलक देखने को मिल रही है। विकासखण्ड कुनकुरी के ग्राम मयाली में 06 से 09 नवम्बर तक आयोजित इस मेले में सरगुजा संभाग के सभी जिलों जशपुर, सरगुजा, बलरामपुर, सूरजपुर, कोरिया और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर से आई स्व-सहायता समूह की महिलाएँ अपने हुनर और मेहनत का प्रदर्शन कर रही हैं। मेले का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अंचलों की महिलाओं को उनके उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराना, पारंपरिक ज्ञान और कौशल को पहचान दिलाना तथा उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। यहाँ 15 से अधिक स्टॉलों के माध्यम से स्थानीय उत्पाद, हस्तशिल्प, वनोपज आधारित वस्तुएँ, बांस उत्पाद, मिलेट आइटम, वस्त्र निर्माण, मसाले और आचार-पापड़ जैसे अनेक घरेलू उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री की जा रही है। मेला स्थल पर स्वदेशी वस्तुओं की खरीदारी के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है और उपभोक्ता महिलाओं के परिश्रम की प्रशंसा कर रहे हैं।

      सरगुजा जिले के मेंड्रा क्लस्टर की गायत्री रजवाड़े और नगमा खातून सरस मेला में हल्दी, धनिया, मिर्च पाउडर, जीरा फुल, चावल, दाल, बाजरा, गेहूँ आटा और बेसन की बिक्री कर रही हैं। बलरामपुर जिले के शांति स्व-सहायता समूह की नीतू मंडल  ने बताया कि उनके समूह की महिलाएँ नाइटी, ब्लाउज, कुर्ती जैसे वस्त्र निर्माण का कार्य करती हैं, जिससे समूह को 60 से 70 हजार रुपये की आमदनी होती है। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले की ईशा रजक, सिद्धबाबा महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (एफपीओ) ग्राम नागपुर सेमरा से जुड़ी हैं। उन्होंने बताया कि जीरा फुल चावल, आचार, दाल और पापड़ की बिक्री से वे अब लखपति महिला उद्यमी बनने की ओर अग्रसर हैं। सूरजपुर जिले की बुद्धमनिया रजवाड़े ने बताया कि समूह में शामिल होने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और अब वे अपने परिवार का भरण-पोषण आत्मसम्मान के साथ कर रही हैं। जशपुर कांसाबेल की रानी मुस्कान स्व-सहायता समूह जीराफुल राइस, बांस टोकरी, सजावटी सामान, माला, ईयरिंग, पापड़ और आचार की बिक्री कर रही हैं। फरसाबहार खुटगांव की माधुरी निकुंज (निकुंज महिला समूह) हल्दी-मिर्च मसाला और सरसों तेल जैसे घरेलू उत्पाद बना रही हैं। वहीं, कोरिया जिले की यास्मीन ने बताया कि उनके समूह की महिलाएँ मिलेट लड्डू, रागी लड्डू, आचार और ज्वार उत्पादों के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं।

     सरस मेला न केवल महिलाओं को अपने उत्पादों के विपणन का अवसर प्रदान कर रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने वाला सशक्त मंच भी बन रहा है। इस आयोजन से महिलाओं को रोजगार, आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक आय का अवसर मिल रहा है। मेला के माध्यम से “बिहान” मिशन की परिकल्पना — सशक्त महिला, सशक्त ग्राम — साकार होती दिखाई दे रही है। यह मेला महिलाओं के आत्मविश्वास, मेहनत और कौशल का उत्सव है, जो जशपुर सहित पूरे सरगुजा संभाग में नारी शक्ति की नई पहचान बना रहा है।

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जशपुर जम्बूरी का दूसरा दिन मयाली नेचर कैंप में वाटर स्पोर्ट्स, एटीवी राइडिंग और बर्ड वॉचिंग ने बढ़ाया उत्सव का आकर्षण

जशपुरनगर 7 नवम्बर 2025/ ‘जशपुर जम्बूरी 2025’ के दूसरे दिन मयाली नेचर कैंप में रोमांच, उत्साह और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम देखने को मिला। मयाली डैम के जलाशय में आज दिनभर वाटर स्पोर्ट्स का रोमांच छाया रहा, जहां प्रतिभागियों ने वाटर साइकलिंग, कयाकिंग और बोटिंग का भरपूर आनंद लिया। जशपुर की शांत वादियों में पानी के साथ यह साहसिक अनुभव हर प्रतिभागी के लिए यादगार रहा। जंबूरी में जशपुर और अन्य जिलों से आए प्रतिभागियों ने उत्साह के साथ भाग लिया। जशपुर की हसीन वादियों में हो रहे जंबूरी में जिला प्रशासन द्वारा संचालित क्रीड़ा परिसर, नवसंकल्प एवं नवगुरुकुल के तहत चयनित मेधावी बच्चों ने भी उत्साह के साथ भाग लिया।

खेल और एडवेंचर गतिविधियों में झलका उत्साह-
जंबूरी के दूसरे दिन बॉक्स क्रिकेट, एटीवी राइडिंग और नेट बॉल जैसी गतिविधियों ने प्रतिभागियों को उत्साह से भर दिया। एटीवी बाइक राइडिंग के दौरान युवाओं ने जंगलों के बीच मिट्टी के रास्तों पर गति और संतुलन का रोमांच महसूस किया। नेट बॉल और क्रिकेट मुकाबलों में भी प्रतिभागियों ने पूरे जोश के साथ हिस्सा लिया।

सुबह की शुरुआत बर्ड वॉचिंग से, दिनभर रहा उत्सव का रंग - 

रायपुर से आई प्रतिभागी नीलिमा यादव ने बताया कि वे जंबूरी के दौरान होमस्टे में ठहरीं और सुबह 4 बजे से बर्ड वॉचिंग में शामिल हुईं, जिसमें 18 प्रजातियों के पक्षियों का अवलोकन किया गया। उन्होंने बताया कि इस आयोजन में चार तरह की साहसिक गतिविधियों में भाग लेने का अनुभव बेहद रोमांचक रहा और जिला प्रशासन की व्यवस्था उत्कृष्ट है।

प्रतिभागियों ने साझा किए अपने अनुभव
कबीरधाम जिला से आए राकेश जायसवाल और संजय यादव ने कहा कि वाटर एक्टिविटीज़ का अनुभव शानदार रहा। उन्होंने वाटर साइकलिंग, एटीवी बाइक राइडिंग और कल्चरल एक्टिविटीज़ का भरपूर आनंद लिया। उन्होंने कह कि कैंपिंग का अनुभव यादगार रहा और जिला प्रशासन की व्यवस्था अनुकरणीय है। इसी प्रकार बस्तर क्षेत्र के कोंडागांव जिला से आई रागिनी जायसवाल ने कहा कि “अब तक हमने बस्तर की खूबसूरती देखी थी, अब जशपुर की वादियों का अनुभव मिला है। यहां का प्राकृतिक सौंदर्य अद्भुत है, सभी को यहाँ आना चाहिए।” ‘जशपुर जम्बूरी 2025’ का यह दूसरा दिन रोमांच, साहस और प्राकृतिक सौंदर्य के संगम के रूप में प्रतिभागियों के दिलों में हमेशा के लिए बस गया। आने वाले दिनों में भी यह आयोजन जशपुर को छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर नई ऊँचाई देगा।

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वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ : जिले भर में हुआ भव्य आयोजन,चार चरणों में किया जाएगा आयोजन,प्रधानमंत्री ने दिया राष्ट्र के नाम संदेश

रायगढ़, 7 नवम्बर 2025/ शासन के निर्देशानुसार वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर जिले में देशभक्ति और उत्साह से ओतप्रोत विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में आज जिला कलेक्टोरेट, जिला पंचायत, नगर निगम रायगढ़ सहित सभी नगरीय निकायों, ग्राम पंचायतों, महाविद्यालयों, विद्यालयों एवं शासकीय संस्थानों में राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित वंदे मातरम् कार्यक्रम का सीधा प्रसारण दूरदर्शन के माध्यम से देखा गया। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संदेश दिया। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि “वंदे मातरम् एक शब्द नहीं, यह एक मंत्र है, जो ऊर्जा और संकल्प का प्रतीक है। यह शब्द हमें हमारे गौरवशाली इतिहास से जोड़ता है, वर्तमान को आत्मविश्वास से भरता है और भविष्य को नई दिशा देता है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् का सामूहिक गायन अद्भुत अनुभव प्रदान करता है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर स्मारक सिक्का, डाक टिकट तथा “वंदे मातरम् पोर्टल” का भी शुभारंभ किया।
            केंद्रीय संस्कृति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि “वंदे मातरम् का सामूहिक गायन आज पूरे देश में एकता और राष्ट्रीय भावना का प्रतीक बन गया है। यह गीत छोटी-छोटी घटनाओं से जन्म लेकर स्वतंत्रता आंदोलन में राष्ट्रभक्ति और चेतना का स्रोत बना। आज भी यही एकता भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का मूल मंत्र है।
           

इस अवसर पर जिला कलेक्टोरेट स्थित सभाकक्ष में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में श्री अरुण धर दीवान, श्री विकास केडिया, कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी, पुलिस अधीक्षक श्री दिव्यांग पटेल, अपर कलेक्टर श्री अपूर्व प्रियेश टोप्पो, संयुक्त कलेक्टर श्री राकेश गोलछा, श्रीमती पूजा बंसल, श्री रवि राही, डॉ. प्रियंका वर्मा, श्री धनराज मरकाम सहित विभिन्न प्रशासनिक अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इसी तरह नगर निगम रायगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में महापौर श्री जीवर्धन चौहान, सभापति श्री डिग्रीलाल साहू, नगर निगम आयुक्त श्री बृजेश सिंह क्षत्रिय एवं पार्षदगणों के साथ बड़ी संख्या में नागरिकों ने भी सहभागिता की। वहीं जिला पंचायत रायगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शिखा रवीन्द्र गभेल, सदस्य श्रीमती सुषमा खलखो, श्रीमती लक्ष्मी जीवन पटेल, श्रीमती भाग्यवती डोलनारायण नायक मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिजीत बबन पठारे सहित समाज कल्याण विभाग और जिला पंचायत के 70 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए। 
           कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के सामूहिक गायन से हुआ। उपस्थित जनों ने भारत माता के महान सपूतों को नमन करते हुए राष्ट्रगीत की भावनाओं को आत्मसात किया। कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ का आयोजन चार चरणों में किया जाएगा। प्रथम चरण 7 से 14 नवम्बर, द्वितीय चरण 19 से 26 जनवरी, तृतीय चरण 7 से 15 अगस्त (हर घर तिरंगा अभियान के साथ) और चतुर्थ चरण 1 से 7 नवम्बर  (समापन सप्ताह) तक आयोजित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि वर्षभर चलने वाले कार्यक्रम के अंतर्गत जिले में वंदे मातरम् की भावना को जन-जन तक पहुँचाने के लिए विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। शैक्षणिक संस्थानों में वंदे मातरम् को समर्पित विशेष सभाएं, निबंध लेखन, वाद-विवाद, प्रश्नोत्तरी, पोस्टर निर्माण एवं अन्य रचनात्मक प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी, ताकि विद्यार्थियों में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के प्रति भावनात्मक जुड़ाव और देशभक्ति की भावना को और अधिक सशक्त किया जा सके।

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मुख्यमंत्री ने किया ‘मेक इन सिलिकॉन’ संगोष्ठी का शुभारंभ...टेक्नोलॉजी और नवाचार हब बनेगा छत्तीसगढ़ : सी एम श्री साय

 

रायपुर, 07 नवम्बर 2025/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) नवा रायपुर के 10वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय ‘मेक इन सिलिकॉन’ संगोष्ठी का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि यह आयोजन भारत को सेमीकंडक्टर निर्माण और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपना रजत जयंती वर्ष मना रहा है और आज राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ का भी ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने इस अवसर पर प्रदेशवासियों और ट्रिपल आईटी परिवार को बधाई दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह संस्थान महान शिक्षाविद् डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर स्थापित है, जिन्होंने शिक्षा, एकता और औद्योगिक विकास को राष्ट्र की प्रगति से जोड़ा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत आज तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने सेमीकंडक्टर मिशन, इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप निर्माण के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल की हैं। यह मिशन न केवल बुनियादी ढांचा विकसित कर रहा है, बल्कि युवाओं को सशक्त बनाने और नवाचार को प्रोत्साहन देने का भी कार्य कर रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सेमीकंडक्टर आज आधुनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है— मोबाइल, सैटेलाइट, रक्षा प्रणाली और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सभी इससे जुड़े हैं। ऐसे में ‘मेक इन सिलिकॉन’ जैसी पहल भारत की चिप क्रांति को नई दिशा देने में सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ इस मिशन में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की नई औद्योगिक नीति में सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में कुशल मानव संसाधन, सुदृढ़ औद्योगिक ढांचा, निर्बाध बिजली आपूर्ति और तकनीकी विकास के लिए अनुकूल माहौल उपलब्ध है।  नवा रायपुर में सेमीकंडक्टर यूनिट की स्थापना का भूमिपूजन हो चुका है, जिससे युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि नवा रायपुर को आईटी और इनोवेशन हब के रूप में विकसित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य का ‘छत्तीसगढ़ अंजोर विजन डॉक्यूमेंट’ सतत विकास पर केंद्रित है, जिसमें सेमीकंडक्टर को प्रमुख क्षेत्र के रूप में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार  इज ऑफ डूइंग बिज़नेस के साथ अब स्पीड आफ डूइंग बिज़नेस पर भी बल दे रही है।

मुख्यमंत्री ने देशभर से आए विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस संगोष्ठी से न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश को लाभ मिलेगा। उन्होंने आह्वान किया कि “हम सब मिलकर छत्तीसगढ़ को मध्य भारत का ज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार का केंद्र बनाएं तथा भारत के सेमीकंडक्टर मिशन में सक्रिय योगदान दें।”

वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि जब मैं पढ़ाई कर रहा था, तब छत्तीसगढ़ में एक भी राष्ट्रीय स्तर का संस्थान नहीं था। किंतु पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की दूरदर्शी नेतृत्व क्षमता के कारण आज प्रदेश में आईआईटी, आईआईएम, एचएनएलयू, एम्स, एनआईटी और ट्रिपल आईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान स्थापित हुए हैं। इन संस्थानों ने राज्य को उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में नई पहचान दी है।

श्री चौधरी ने कहा कि वर्तमान समय में छत्तीसगढ़ में शिक्षा और तकनीकी विकास की अपार संभावनाएँ हैं। आज का युग टेक्नोलॉजी-ड्रिवन इकोनॉमी का है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हाल ही में माइक्रोसॉफ्ट के सर्वर डाउन होने से विश्वभर में जिस प्रकार कार्य प्रभावित हुए, उससे स्पष्ट है कि पावर टेक्नोलॉजी आज जीवन, अर्थव्यवस्था और वैश्विक प्रणाली को किस हद तक प्रभावित करती है। इसलिए हमें इन चुनौतियों का सामना करने के लिए अभी से तैयार रहना होगा।

उन्होंने कहा कि नवाचार, कौशल और काबिलियत ही भविष्य में आपकी वास्तविक उपयोगिता सिद्ध करेंगे। बड़ी उपलब्धियाँ वही व्यक्ति प्राप्त करता है, जो अपनी क्षमता को निरंतर तराशता है। युवाओं को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि परिवर्तन हमेशा दृष्टिकोण, संकल्प और निरंतर प्रयास से आता है। साउथ कोरिया के तकनीकी परिवर्तन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि “हमें भी उसी प्रकार शिक्षा, तकनीक और शोध में निवेश बढ़ाकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ना होगा।”

वित्त मंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे तकनीकी दक्षता, शोध और रचनात्मक सोच को अपने जीवन का आधार बनाएं, क्योंकि आने वाला समय उन्हीं का होगा जो ज्ञान और नवाचार को अपनी शक्ति बनाएंगे।

उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने कहा कि सेमीकंडक्टर और औद्योगिक क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ‘मेक इन सिलिकॉन’ संगोष्ठी एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप शैक्षणिक संस्थान सेमीकंडक्टर क्षेत्र में शोध और नवाचार को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार उच्च शिक्षा और तकनीकी क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने युवाओं से कहा कि “आपका नवाचार और आपका संकल्प भारत की तकनीकी पहचान को नई ऊँचाई देगा।”

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) नवा रायपुर के निदेशक प्रो. ओम प्रकाश व्यास ने अतिथियों को संस्थान की 10 वर्षों की उपलब्धियों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि संस्थान में विकसित भारत की अवधारणा के अनुरूप शिक्षण, अनुसंधान और नवाचार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। छात्रों के कौशल विकास और क्षमता निर्माण के लिए उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण एवं उद्योग आधारित परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है।

इस अवसर पर ट्रिपल आईटी इलाहाबाद के निदेशक प्रो. मुकुल सुतावणे, आईआईटी इंदौर के प्रो. संतोष विश्वकर्मा, श्री मनोज कुमार मजूमदार सहित शिक्षाविद् एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहीं।

उल्लखेनीय है कि ‘मेक इन सिलिकॉन’ - स्वदेशी सेमीकंडक्टर इंफ्रास्ट्रक्चर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी - ट्रिपल आईटी नया रायपुर के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार अभियांत्रिकी (ECE) विभाग के माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स और वीएलएसआई डिजाइन समूह द्वारा आयोजित की जा रही है। इस संगोष्ठी का उद्देश्य भारत की सेमीकंडक्टर क्षमताओं को सशक्त बनाना और आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण को प्रोत्साहित करना है। यह आयोजन शिक्षा जगत, उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच नवाचार, ज्ञान-विनिमय और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक सशक्त मंच है, जिससे भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा सके।
संगोष्ठी में वीएलएसआई डिजाइन और माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में उन्नत तकनीक, जैसे नैनोइलेक्ट्रॉनिक्स, एमईएमएस, क्वांटम डिवाइस, तथा उद्योग-शिक्षा सहयोग पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। इन क्षेत्रों में प्रगति न केवल तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहित करेगी बल्कि भारत के अनुसंधान और औद्योगिक विकास के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य भी करेगी।

राष्ट्रीय मिशन के तहत यह पहल सेमीकंडक्टर उपकरण, पैकेजिंग और फ्लेक्सिबल इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता एवं नवाचार को गति देने का प्रयास है। संगोष्ठी में नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स की सहभागिता से कौशल विकास, आपूर्ति श्रृंखला सुदृढ़ीकरण और सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग पर जोर दिया गया है। यह आयोजन आत्मनिर्भर भारत मिशन की भावना के अनुरूप भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर नवाचार और निर्माण का केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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मुख्यमंत्री ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ पर नई दिल्ली में आयोजित स्मरणोत्सव में वर्चुअली हुए शामिल,‘वंदे मातरम्’ स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशभक्ति की सबसे प्रबल प्रेरणा : मुख्यमंत्री श्री साय

वंदे मातरम् मां भारती की साधना और आराधना की प्रेरक अभिव्यक्ति : प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी

छत्तीसगढ़ की फिज़ा में गूंजा राष्ट्रगीत, वंदे मातरम् के 150वें स्मरणोत्सव का अवसर बना खास

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ किया ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन

‘वंदे मातरम्’ के उद्घोष से आज़ादी की राष्ट्रीय चेतना का किया गया स्मरण

पूरे उत्साह के साथ देशभर में मनाया गया ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ

रायपुर 7 नवम्बर 2025/  ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रगीत की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर आज देशभर में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक दिन को छत्तीसगढ़ में भी बड़े उत्साह और गर्व के साथ मनाया गया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने मंत्रालय महानदी भवन में वरिष्ठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया। इस अवसर पर सभी ने “वंदे मातरम्” के उद्घोष के साथ आज़ादी की राष्ट्रीय चेतना का पुण्य स्मरण किया और अमर बलिदानियों को नमन किया। 

मुख्यमंत्री श्री साय ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ पर नई दिल्ली में आयोजित स्मरणोत्सव में वर्चुअली शामिल हुए और प्रधानमंत्री का उद्बोधन भी सुना।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा कि वंदे मातरम् मां भारती की साधना और आराधना की प्रेरक अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गान का एक प्रवाह, एक लय और एक तारतम्य हृदय को स्पंदित कर देता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ का मूल भाव मां भारती है — यह भारत की शाश्वत संकल्पना, स्वतंत्र अस्तित्व-बोध और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ भारत की आज़ादी का उद्घोष था, जिसने गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने और स्वाधीन भारत के स्वप्न को साकार करने की प्रेरणा दी। स्वतंत्रता आंदोलन में यह गीत क्रांतिकारियों की आवाज़ बना और यह केवल प्रतिरोध का स्वर नहीं, बल्कि आत्मबल जगाने वाला मंत्र बन गया। श्री मोदी ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ में भारत की हजारों वर्षों पुरानी सभ्यता, संस्कृति और समृद्धि की कहानी समाहित है। विदेशी आक्रमणों और अंग्रेज़ों की शोषणकारी नीतियों के बीच  ‘वंदे मातरम्’ ने समृद्ध भारत के स्वप्न का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज दुनिया भारत के नए स्वरूप का उदय देख रही है, जो अपनी परंपरा, आध्यात्मिकता और आधुनिकता के समन्वय से आगे बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना स्वतंत्रता संग्राम के समय था, और यह गीत सदैव हमारे हृदयों में अमर रहेगा।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रगीत की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएँ दीं और कहा कि यह गीत मातृभूमि के प्रति अगाध प्रेम, कृतज्ञता और राष्ट्रधर्म की भावना का शाश्वत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरे देश ने एक स्वर में ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन कर मातृभूमि की वंदना की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के वर्षभर चलने वाले स्मरणोत्सव का आज माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा राष्ट्रव्यापी शुभारंभ इस कालातीत रचना के 150 वर्ष पूरे होने का गौरवपूर्ण अध्याय है। इस अवसर पर वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ ही माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा स्मारक सिक्के का जारी होना एक ऐतिहासिक स्मृति है। श्री बंकिमचंद्र चटर्जी द्वारा रचित वंदे मातरम् गीत भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा रहा है, जिसने सदैव राष्ट्रीय गौरव, एकता और आत्मसम्मान की ज्योति प्रज्वलित की है। यह मातृभूमि की शक्ति, समृद्धि और दिव्यता का प्रतीक है, साथ ही भारत की एकता और आत्मगौरव की काव्यात्मक अभिव्यक्ति है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि 7 नवम्बर 1875 को बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने इस कालजयी रचना की सृष्टि की थी, जिसे बाद में उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंद मठ’ में शामिल किया गया। मातृभूमि की स्तुति में रचा गया यह गीत स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशभक्ति की सबसे प्रबल प्रेरणा बना। अनेक क्रांतिकारियों ने “वंदे मातरम्” कहते हुए हँसते-हँसते अपने प्राण न्योछावर कर दिए। वंदे मातरम  भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतीक बन गया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि 1905 में बंगाल विभाजन के समय ‘वंदे मातरम्’ ने स्वदेशी आंदोलन को नई ऊर्जा दी। उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक यह गीत सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रभक्ति का मंत्र बन गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ सुनते ही हृदय में ऊर्जा, गर्व और देशभक्ति का संचार होता है। यह गीत हमें स्मरण कराता है कि हमारी भूमि, जल, अन्न और संस्कृति ही हमारी जीवनदायिनी शक्ति हैं। उन्होंने कहा, “यूरोप में भूमि को ‘फादरलैंड’ कहा जाता है, लेकिन भारत में हम अपनी भूमि को ‘मातृभूमि’ कहते हैं।” यह भाव रामायण के श्लोक “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” में  प्रकट होता है। ‘वंदे मातरम्’ भी इसी भाव से जन्मा हमारा ध्येय-वाक्य है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस पहल से भावी पीढ़ी को हमारे अतीत के संघर्षों और ‘वंदे मातरम्’ जैसी अमर रचनाओं की आज़ादी की लड़ाई में भूमिका के बारे में जानने का सुंदर अवसर मिलेगा। उन्होंने इस अवसर पर सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प लें और इसे भारत माता तथा छत्तीसगढ़ महतारी को समर्पित करें।

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ को समर्पित स्मारक सिक्का तथा डाक टिकट का विमोचन किया। साथ ही, इस अवसर पर ‘वंदे भारत पोर्टल’ (vandematram150.in) का शुभारंभ भी किया। इस पोर्टल के माध्यम से देशवासी अपनी आवाज़ में ‘वंदे मातरम्’ रिकॉर्ड कर इस ऐतिहासिक यात्रा से जुड़ सकते हैं। यह पहल लोगों को भारत की गौरवशाली विरासत का हिस्सा बनने का अवसर प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ पर छायाचित्र प्रदर्शनी का किया शुभारंभ

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित छायाचित्र प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदर्शनी का विस्तार से अवलोकन करते हुए ‘वंदे मातरम्’ के सृजन से लेकर इसके राष्ट्रीय चेतना के प्रतीक बनने तक की ऐतिहासिक यात्रा का अवलोकन किया। उन्होंने प्रदर्शनी को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह भारत के गौरवशाली इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम के दौर की अनेक अनकही कहानियों को उजागर करती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी प्रदर्शनी नई पीढ़ी को देश की आज़ादी के मूल भाव और ‘वंदे मातरम्’ की प्रेरक भूमिका से परिचित कराती है।

इस अवसर पर सांसद श्री चिंतामणि महाराज, मुख्य सचिव श्री विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, संस्कृति विभाग के सचिव श्री रोहित यादव, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, श्री मुकेश बंसल, श्री पी. दयानंद, डॉ. बसवराजू एस. सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

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यूनिसेफ और एसीई संस्था के सहयोग से स्वास्थ्य एम्बेसडरों का एकदिवसीय प्रशिक्षण संपन्न 

जशपुर 07 नवम्बर 2025 : स्वास्थ्य के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से जशपुर में एक दिवसीय स्वास्थ्य एम्बेसडरों का कार्यशाला होटल निरवाणा जशपुर में यूनिसेफ और एसीई संस्था के सहयोग से आयोजित किया गया कार्यशाला में जशपुर जिले के कल 48 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया कार्यक्रम में जल स्वच्छता साफ सफाई और पर्यावरण संरक्षण संबंधित मुद्दों पर कार्यशाला आयोजित की गई। श्रीमती सरोज खलखो सहायक संचालक जिला शिक्षा अधिकारी जशपुर के मुख्य आतिथ्य में यह कार्यक्रम संपन्न हुआ कार्यशाला में श्री आशीष राज्य समन्वयक रायपुर (यूनिसेफ) श्री महेश जी एससीई संस्थान रांची विशिष्ट अतिथि  व शास्त्री कुमार जिला प्रभारी जशपुर  मदन प्रेमी जिला समन्वयक एबीएम उपस्थित थे।

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प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी नेराष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम‘‘ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में वर्षभर चलने वाले समारोह का किया शुभारंभ

जशपुरनगर, 05 नवंबर 2025/ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली से राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम‘‘ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में वर्षभर चलने वाले समारोह का शुभारंभ किया। इस अवसर पर देशभर में एक साथ “वंदे मातरम्” का सामूहिक गायन किया गया, जिससे राष्ट्रभक्ति और एकता का अद्भुत वातावरण बना। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कार्यक्रम के दौरान “वंदे मातरम्” पर आधारित विशेष स्मारक सिक्का और डाक टिकट भी जारी किया। इस ऐतिहासिक अवसर का सीधा प्रसारण देशभर के सभी जिलों, शासकीय कार्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में किया गया, जहाँ अधिकारी, कर्मचारी, छात्र-छात्राएँ और जनप्रतिनिधि एक स्वर में राष्ट्रीय गीत के सामूहिक गायन में शामिल हुए।
   जशपुर जिले में कलेक्टरेट कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में कलेक्टर श्री रोहित व्यास, एसडीएम श्री विश्वास राव मस्के, डिप्टी कलेक्टर श्री हरिओम द्विवेदी सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। वहीं जिला पंचायत कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में विधायक श्रीमती रायमुनी भगत, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार, अपर कलेक्टर श्री प्रदीप कुमार साहू, नगर पालिका जशपुर के सीएमओ श्री योगेश्वर उपाध्याय, पार्षदगण और जनप्रतिनिधिगण एवं अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए। सभी ने प्रधानमंत्री के साथ “वंदे मातरम्” का सामूहिक गायन करते हुए राष्ट्रप्रेम, एकता और गौरव का संदेश दिया।
     प्रधानमंत्री श्री मोदी ने अपने उदबोधन में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का महत्व और आजादी में आंदोलन में इसकी भूमिका का विस्तार से बताया। उन्होंने माँ भारती के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले सभी वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित की और सभी नागरिकों को बधाई दी। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि “वंदे मातरम” केवल एक शब्द नहीं, यह एक मंत्र है, एक ऊर्जा है, एक स्वप्न है, और एक दृढ़ संकल्प है। जहाँ-जहाँ आज़ादी की लड़ाई लड़ी गई, वहाँ “वंदे मातरम” गूँजा। क्रांतिकारी वीर सावरकर से लेकर शहीदों तक, सबके होंठों पर यही शब्द थे। महात्मा गांधी ने 1927 में कहा था कि “वंदे मातरम् अखंड भारत की तस्वीर प्रस्तुत करता है। श्री अरविंदो ने इसे “मंत्र” बताया जो आंतरिक शक्ति को जगाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भले ही भारत का राष्ट्रीय ध्वज समय के साथ बदलता गया हो, लेकिन जब भी वह फहरता है, हमारे हृदय से एक ही स्वर निकलता है “भारत माता की जय! वंदे मातरम”।  उन्होंने कहा कि आज जब हम इस राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष मना रहे हैं, तो यह उन वीरों के प्रति श्रद्धांजलि है जिन्होंने “वंदे मातरम” कहते हुए प्राण न्यौछावर कर दिए।
    विधायक श्री रायमुनी भगत ने कहा कि भारत की आज़ादी के दीवानों के लिए “वंदे मातरम्” केवल एक गीत नहीं, बल्कि एक प्रेरणादायक मंत्र था। उन्होंने कहा कि गुलाम भारत के दौर में जब यह गीत गूंजता था, तो लोगों के भीतर आज़ादी के लिए मर-मिटने का उत्साह और जोश उमड़ पड़ता था। उन्होंने  कहा कि आने वाली पीढ़ियों को इस राष्ट्रीय गीत के महत्व और उसके ऐतिहासिक योगदान से अवगत कराना हम सभी का दायित्व है, ताकि उनमें भी राष्ट्रप्रेम और समर्पण की वही भावना जागृत हो सके।

           *चार चरणों में होगा वर्षभर आयोजन*

    भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के मार्गदर्शन में इस ऐतिहासिक पर्व को वर्षभर चलने वाले महाअभियान के रूप में मनाया जा रहा है। देश के साथ छत्तीसगढ़ में भी यह आयोजन जनभागीदारी के साथ चार चरणों में ग्राम पंचायत से लेकर राज्य स्तर तक भव्य रूप में संपन्न किया जाएगा। प्रथम चरण 7 से 14 नवम्बर 2025, द्वितीय चरण 19 से 26 जनवरी 2026, तृतीय चरण 7 से 15 अगस्त 2026 (हर घर तिरंगा अभियान के साथ), और चतुर्थ चरण 1 से 7 नवम्बर 2026 तक चलेगा। इस दौरान राज्य के सभी जिलों, जनपदों, ग्राम पंचायतों, शैक्षणिक संस्थानों, कार्यालयों एवं सामाजिक संगठनों में राष्ट्रगीत के सामूहिक गायन के साथ विविध कार्यक्रम आयोजित होंगे।
      राज्य के सभी जिलों में मंत्रीगण, सांसदगण, विधायकगण और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में विशेष कार्यक्रम आयोजित होंगे।प्रत्येक जिले में स्थानीय कलाकारों, छात्रों, सामाजिक संस्थाओं और नागरिक समूहों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी, ताकि यह अभियान एक जनआंदोलन का रूप ले सके। प्रदेश के सभी विद्यालयों, महाविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में “वंदे मातरम” विषय पर विशेष सभाएँ, निबंध, वाद-विवाद, प्रश्नोत्तरी, पोस्टर निर्माण, एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिताएँ होंगी। एनसीसी, एनएसएस, स्काउट-गाइड और स्कूल बैंड के माध्यम से वंदे मातरम से संबंधित संगीतमय प्रस्तुतियाँ दी जाएँगी। राज्य पुलिस बैंड भी सार्वजनिक स्थलों पर वंदे मातरम और देशभक्ति गीतों पर आधारित कार्यक्रमों से वातावरण को देशभक्ति के रंग में रंगेगा। 
       राज्यभर में सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत “वंदे मातरम् ऑडियो-वीडियो बूथ” स्थापित किए जाएंगे। इनमें नागरिक अपनी आवाज़ में वंदे मातरम् गाकर उसे पोर्टल पर अपलोड कर सकेंगे। पोर्टल पर गीत की मूल धुन और बोल की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। यह पहल लोगों को अपने तरीके से राष्ट्रप्रेम व्यक्त करने का अवसर देगी और आंदोलन को अधिक व्यक्तिगत और भावनात्मक बनाएगी।

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जिले के सड़को का हो रहा बी.टी. पेंच रिपेयर का कार्य ,इस कार्य हेतु 450.00 लाख की राशि स्वीकृत

जशपुरनगर 07 नवम्बर 2025/लोक निर्माण विभाग जशपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार जशपुर संभाग अंतर्गत् चल रहे बी.टी, पेच रिपेयर कार्य कुल लंबाई 220.70 कि.मी. हेतु राशि 450.00 लाख का स्वीकृति प्राप्त हुआ है। वर्तमान में बी.टी. पेच रिपेयर कार्य प्रगति पर है। जिनमें सरईपानी-बगीचा मार्ग में 17.00 कि.मी. एवं दोदरअम्बा-ढुलूकोना मार्ग 4.00 कि.मी. में कुल लंबाई 21.00 कि.मी. में बी.टी. पेच रिपेयर कार्य05 नवम्बर 2025 तक पूर्ण कराया जा चुका है तथा शेष कि.मी. को माह दिसम्बर 2025 तक पूर्ण करा लिया जायेगा।

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जशपुर जम्बूरी के आदर सत्कार से पर्यटक हुए खुश,चांदनी रात में आसमान में सितारों के नीचे पर्यटक स्टार ग्रेजिंग का लिया आनंद 

जशपुर 7 नवम्बर 25/ जशपुर जम्बुरी में पहले दिन 120 पर्यटकों का पंजीयन किया है। स्थानीय पाए जाने वाले शुद्ध दोना पत्तल में जशपुर भोजन परोसा गया है। पर्यटक जशपुर की लोक संस्कृति,लोक नृत्य, परंपरागत भोजन का मेहमानों ने आत्मीयता से लिया आनंद 

जशपुर में आए मेहमानों का आदर सत्कार देखकर पर्यटक बहुत खुश हुए।
 
संध्या बेला में चांदनी रात में आसमान के   सितारों के नीचे में जशपुर लोक संस्कृति लोक नृत्य और लोक कलाकारों के साथ जमकर झूमें और पर्यटकों ने लोक नृत्य का भरपूर आनंद लिया।
पर्यटकों के लिए जिला प्रशासन ने स्टार ग्रेजिंग सेशन का आयोजन किया गया था।

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