अधिवक्ता कक्ष में हुए खूनी विवाद के बाद वकीलों पर दर्ज हुई एफआईआर पर हाईकोर्ट का बड़ा हस्तक्षेप — प्रथम दृष्टया बचाव में दर्ज मामला मानते हुए पूरी कार्रवाई पर लगाया स्टे
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अधिवक्ता कक्ष में हुए खूनी विवाद के बाद वकीलों पर दर्ज हुई एफआईआर पर हाईकोर्ट का बड़ा हस्तक्षेप — प्रथम दृष्टया बचाव में दर्ज मामला मानते हुए पूरी कार्रवाई पर लगाया स्टे

जशपुर, 19 फरवरी 2026। फरसाबहार न्यायालय परिसर में हुए मारपीट और धारदार हथियार से हमले के मामले में महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। उच्च न्यायालय बिलासपुर ने अधिवक्ताओं के खिलाफ दर्ज एफआईआर और आपराधिक प्रकरण पर अंतरिम रोक (स्टे) लगा दी है। साथ ही थाना फरसाबहार और शिकायतकर्ता को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

कुनकुरी अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष विष्णु कुलदीप से मिली जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पूर्व फरसाबहार न्यायालय के अधिवक्ता कक्ष में तपकरा निवासी आयुष चौधरी और अधिवक्ता चुन्नू राम चौहान के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया था। विवाद इतना बढ़ गया कि आयुष चौधरी ने कथित रूप से धारदार सुजा से अधिवक्ता चुन्नू राम चौहान पर हमला कर दिया, जिससे वे घायल हो गए। इस घटना के बाद उसी दिन आरोपी आयुष चौधरी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।

बताया जा रहा है कि घटना के लगभग तीन दिन बाद आयुष चौधरी ने फरसाबहार थाने में अधिवक्ता कलेश जायसवाल, चुन्नू राम चौहान, शनैश्वर चौहान और ओमप्रकाश दास के खिलाफ मारपीट और गाली-गलौज की शिकायत दर्ज कराई। फरसाबहार पुलिस ने मामले की जांच करते हुए लगभग एक सप्ताह के भीतर न्यायालय कुनकुरी में चालान पेश कर दिया।

इसके बाद चारों अधिवक्ताओं ने उच्च न्यायालय बिलासपुर में अधिवक्ता मनोज चौहान के माध्यम से याचिका दायर कर अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर और आपराधिक प्रकरण को निरस्त करने की मांग की। इस याचिका पर 19 फरवरी 2026 को सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने प्रथम दृष्टया अधिवक्ताओं के खिलाफ दर्ज एफआईआर को बचाव में दर्ज कराया गया मामला मानते हुए एफआईआर और संबंधित आपराधिक प्रकरण पर अंतरिम रोक लगा दी। साथ ही थाना फरसाबहार और शिकायतकर्ता को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

इधर, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अधिवक्ता समुदाय में नाराजगी देखी जा रही है। कुनकुरी अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष विष्णु कुलदीप ने कहा कि अधिवक्ता पर धारदार हथियार से हमला होने के बावजूद आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की गई, बल्कि उल्टा अधिवक्ताओं पर ही मामला दर्ज कर दिया गया। उन्होंने इसे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करने वाला बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं पर हमले के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर अधिवक्ता संघ जल्द ही आंदोलन की रणनीति तैयार करेगा।

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