नई पाठ्य पुस्तकों से बदलेगा शिक्षा का स्वरूप — सीबीएसई पैटर्न पर आधारित ‘दीपकम’ और ‘पूर्वी’ पुस्तकों के प्रभावी शिक्षण हेतु मनोरा में शिक्षकों का पांच दिवसीय गहन प्रशिक्षण सम्पन्न, छात्रों के सर्वांगीण विकास पर विशेष जोर
जशपुर/नारायणपुर 19 फरवरी 2026 : जिला शिक्षा अधिकारी जशपुर एवं जिला प्रशिक्षण संस्थान जशपुर के मार्गदर्शन में उच्च प्राथमिक शालाओं में संचालित नई पाठ्य पुस्तकों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन विकासखंड स्त्रोत कार्यालय मनोरा के प्रशिक्षण कक्ष में किया गया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को नई गतिविधि-आधारित शिक्षण पद्धति से परिचित कराते हुए बच्चों में सीखने-सिखाने की क्षमता का समुचित विकास करना था।
प्रशिक्षण कार्यक्रम विकासखंड स्त्रोत समन्वयक श्री आशुतोष शर्मा के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ, जिसमें एनसीईआरटी द्वारा तैयार संस्कृत विषय की पुस्तक दीपकम एवं अंग्रेजी विषय की पुस्तक पूर्वी के विभिन्न पहलुओं पर विस्तारपूर्वक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को नई पुस्तकों के माध्यम से बच्चों में पठन कौशल, लेखन कौशल, श्रवण कौशल, सारांश निर्माण तथा कहानी निर्माण जैसी महत्वपूर्ण क्षमताओं के विकास हेतु विविध गतिविधियों की जानकारी दी गई।
समापन समारोह को संबोधित करते हुए विकासखंड शिक्षा अधिकारी तरुण पटेल ने कहा कि नई पाठ्य पुस्तकें लगभग सीबीएसई पैटर्न पर तैयार की गई हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य छात्रों को केंद्र में रखकर शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे विद्यालयों में छात्र-अनुकूल वातावरण तैयार कर गतिविधि-आधारित शिक्षण को बढ़ावा दें, जिससे विद्यार्थियों में आत्मविश्वास का विकास हो और वे भविष्य में देश का नाम रोशन कर सकें।
प्रशिक्षण के दौरान कक्षा छठवीं की अंग्रेजी पुस्तक पूर्वी पर सर्वश्री संतोष लकड़ा, श्रीमती मेरिस्तेला किसपोट्टा एवं अजय खलखो द्वारा विस्तार से मार्गदर्शन दिया गया, वहीं संस्कृत विषय की पुस्तक दीपकम पर किरण राम महारथी, श्रीमती प्रीतना तिर्की एवं अजमर सिंह द्वारा शिक्षकों को विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से प्रभावी शिक्षण के तरीके बताए गए।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल संचालन में श्री प्रेम लाल बर्मन एवं बीआरसी लेखापाल नरेंद्र बघेल का विशेष योगदान रहा। प्रशिक्षण के समापन पर शिक्षकों ने इसे अत्यंत उपयोगी बताते हुए नई पुस्तकों के माध्यम से शिक्षण प्रक्रिया को और अधिक रोचक एवं प्रभावी बनाने का संकल्प लिया।
