परंपरा, उत्साह और मनोरंजन का महापर्व: नारायणपुर में तीन दिवसीय पारंपरिक जतरा मेला की तैयारियां चरम पर, पंचायत ने संभाली सफाई और व्यवस्थाओं की पूरी कमान
नारायणपुर में तीन दिवसीय पारंपरिक जतरा मेला को लेकर तैयारियां जोरों पर, पंचायत ने संभाली व्यवस्थाओं की कमान
नारायणपुर 08 फरवरी 2026 :-
नारायणपुर में प्रतिवर्ष परंपरागत रूप से आयोजित होने वाले तीन दिवसीय जतरा मेला को लेकर गांव सहित आसपास के क्षेत्रों में उत्साह और चहल-पहल का माहौल बन गया है। मेला की तैयारियां जोरों पर हैं और अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। ग्राम पंचायत द्वारा मेला को सुव्यवस्थित और सफल बनाने के उद्देश्य से मेला परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर साफ-सफाई अभियान चलाया जा रहा है।
पंचायत कर्मियों एवं ग्रामीणों के सहयोग से मेला स्थल की झाड़ियों की कटाई कराई जा रही है, वर्षों से जमे कचरे को हटाया जा रहा है तथा पूरे परिसर को समतल किया जा रहा है। इसके साथ ही मेला स्थल तक आने-जाने वाले प्रवेश और निकास मार्गों को दुरुस्त किया जा रहा है, ताकि मेले के दौरान भीड़-भाड़ में किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
मेला परिसर में पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और बैठने जैसी मूलभूत सुविधाओं को लेकर भी पंचायत द्वारा विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मेला वालों एवं ग्रामीणों की सुविधा के लिए पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था की जा रही है, वहीं साफ पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हैंडपंप एवं अस्थायी जल व्यवस्था की जा रही है।
इस वर्ष जतरा मेला में मनोरंजन को लेकर भी खास इंतजाम किए गए हैं। बच्चों और युवाओं के लिए बड़ा झूला, ड्रैगन झूला सहित कई प्रकार के आकर्षक झूले और खेल सामग्री लगाए जाएंगे। झूला संचालकों द्वारा मेला स्थल पर पहुंचकर अपने-अपने उपकरणों को लगाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचाव के लिए झूलों की मजबूती और सुरक्षा मानकों की जांच भी की जा रही है।
यह पारंपरिक जतरा मेला 10 फरवरी से 12 फरवरी तक नारायणपुर में आयोजित होगा। मेले में नारायणपुर ही नहीं, बल्कि आसपास की दर्जनों पंचायतों से ग्रामीण परिवार सहित बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। तीनों दिन मेला स्थल पर सुबह से देर शाम तक रौनक बनी रहती है और ग्रामीण आपसी मेल-मिलाप के साथ मेले का आनंद लेते हैं।
जतरा मेला ग्रामीण जीवन में विशेष महत्व रखता है। यह मेला न केवल मनोरंजन का अवसर प्रदान करता है, बल्कि सामाजिक समरसता, आपसी भाईचारे और ग्रामीण परंपराओं को सहेजने का भी प्रमुख माध्यम है। मेला के दौरान खान-पान की दुकानों, मिठाइयों, खिलौनों, घरेलू उपयोग की वस्तुओं और स्थानीय उत्पादों की दुकानें सजेंगी, जिससे स्थानीय व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को भी अच्छा व्यवसाय मिलने की उम्मीद है।
पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि इस बार मेला को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों से भी अपील की गई है कि वे मेला के दौरान स्वच्छता बनाए रखें और आपसी सहयोग से इस पारंपरिक उत्सव को सफल बनाएं।
ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष की तरह इस बार भी जतरा मेला में बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे और सभी लोग पूरे उत्साह और उल्लास के साथ इस पारंपरिक आयोजन का आनंद उठाएंगे।
