नारायणपुर में 10 फरवरी से तीन दिवसीय वार्षिक जतरा मेला, 61 हजार में हुई मेला बोली, बड़े-बड़े झूले, ड्रैगन झूला और मौत का कुआं बन सकेंगे ग्रामीण अंचल के आकर्षण का केंद्र
नारायणपुर 04 फरवरी 2026 :
नारायणपुर में आगामी मंगलवार 10 फरवरी 2026 से तीन दिवसीय वार्षिक जतरा मेला पारंपरिक उत्साह और ग्रामीण उल्लास के साथ आयोजित होने जा रहा है। यह मेला 10,11,और 12 फरवरी तक लगेगा।इस बहुप्रतीक्षित जतरा मेला को लेकर गांव सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों में जबरदस्त उत्साह का माहौल बना हुआ है। हर वर्ष लगने वाला यह मेला दिन के समय आयोजित किया जाएगा, जबकि शाम होते ही मेला बंद कर दिया जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्र की पारंपरिक परंपरा का निर्वहन किया जाएगा।
ग्रामीण क्षेत्र में कोरोना काल के बाद से जतरा मेला की रफ्तार प्रतिवर्ष कम होती गई थी, जिस कारण पहले जैसी भीड़ और चहल-पहल देखने को नहीं मिल पा रही थी। लेकिन इस वर्ष परिस्थितियां पूरी तरह सामान्य होने, मनोरंजन के साधनों की संख्या बढ़ने और पंचायत स्तर पर बेहतर प्रचार-प्रसार के चलते इस बार मेले में भारी भीड़ उमड़ने का अनुमान लगाया जा रहा है। खासकर नारायणपुर सहित आसपास के दर्जनों गांवों से लोग परिवार सहित मेले का आनंद लेने पहुंच सकते हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नारायणपुर जतरा मेला की बोली 61 हजार रुपये में संपन्न हुई है। बोली प्रक्रिया पूरी होने के बाद मेला समिति द्वारा आयोजन को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। मेला स्थल की साफ-सफाई, दुकानों के लिए स्थान चिन्हांकन, झूलों की व्यवस्था और सुरक्षा संबंधी इंतजामों को एक या दो दिन बाद शुरू कर दिया जाएगा ।
इस वर्ष के जतरा मेला में मनोरंजन की लगभग सभी प्रमुख वस्तुएं और साधन उपलब्ध रहने का अनुमान है। मेले में बड़े-बड़े झूले, ड्रैगन झूला, बच्चों के लिए अलग-अलग प्रकार के झूले, मौत का कुआं सहित कई रोमांचक खेल लगाए जाने की संभावना है । मौत का कुआं और ऊंचे झूले युवाओं के लिए खास आकर्षण होने का अनुमान है, वहीं बच्चों के झूले और खेल सामग्री से मेला परिसर गुलजार रहेगा।
इसके साथ ही जतरा मेला में खानपान की दुकानें, चाट-पकौड़ी, मिठाइयां, खिलौनों की दुकानें, घरेलू उपयोग की सामग्री और ग्रामीण जरूरतों से जुड़ी वस्तुएं भी बड़ी संख्या में सजेगी। दोपहर से लेकर शाम तक मेला परिसर में लोगों की आवाजाही बनी रहेगी और पारंपरिक ग्रामीण मेले की रौनक देखने को मिलेगी।
ज्ञात हो कि 3 फरवरी को नारायणपुर के साप्ताहिक बाजार में पंचायत की ओर से मेला लगने की मुनादी करा दी गई है, ताकि क्षेत्र के ग्रामीणों को समय रहते जानकारी मिल सके। मुनादी के बाद से ही ग्रामीणों में मेले को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है और लोग मेले की तैयारियों को लेकर चर्चा करते नजर आ रहे हैं।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जतरा मेला सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि ग्रामीण संस्कृति, सामाजिक एकता और पारंपरिक मेलजोल का महत्वपूर्ण माध्यम है। कोरोना काल के बाद एक बार फिर मेले में रौनक लौटने की उम्मीद से ग्रामीणों में खुशी का माहौल है।
नारायणपुर का तीन दिवसीय वार्षिक जतरा मेला इस वर्ष ग्रामीण अंचल के लिए उत्सव, मनोरंजन और सामाजिक समरसता का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है, जिसका सभी को बेसब्री से इंतजार है।
