सेवारत शिक्षकों के लिए टेट की अनिवार्यता खत्म करने अध्यादेश लाने की मांग तेज, प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षामंत्री को सौंपा गया ज्ञापन

रायपुर/, 16 फरवरी 2026।
देशभर में सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को समाप्त करने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। छत्तीसगढ़ जागरूक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष जाकेश साहू, बिरेन्द्र साहू प्रदेश उपाध्यक्ष,शिव कुमार साहू प्रदेश उपाध्यक्ष,राजेन्द्र लाडेकर प्रदेश सचिव,प्रदेश महासचिव भोजराम साहू सहित सभी सदस्यों के नेतृत्व में केंद्र सरकार से अध्यादेश लाकर इस अनिवार्यता को खत्म करने की मांग की गई है। इस संबंध में प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय शिक्षामंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया गया है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत देशभर में कार्यरत शिक्षकों के लिए टेट को अनिवार्य किया गया है। इस निर्णय से लगभग 25 लाख से अधिक सेवारत शिक्षकों की नौकरी पर संकट मंडराने लगा है। वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षक अब अपने भविष्य को लेकर असमंजस और चिंता की स्थिति में हैं।
संघ का कहना है कि जो शिक्षक लंबे समय से विद्यालयों में पढ़ा रहे हैं, विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास में योगदान दे रहे हैं और सरकार की विभिन्न योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू कर रहे हैं, उन्हें पुनः पात्रता परीक्षा की बाध्यता में बांधना न्यायोचित नहीं है। इससे शिक्षकों के मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
शिक्षकों के परिवार भी प्रभावित, व्यापक असंतोष की आशंका
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि टेट अनिवार्यता के कारण शिक्षकों की सेवा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, तो इससे लगभग ढाई करोड़ से अधिक पारिवारिक सदस्य भी प्रभावित होंगे। संघ ने चेतावनी दी है कि इस निर्णय से शिक्षकों में भय और असंतोष का वातावरण निर्मित हो गया है, जिसका व्यापक सामाजिक प्रभाव पड़ सकता है।
प्रदेश अध्यक्ष जाकेश साहू ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि सेवारत शिक्षकों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तत्काल अध्यादेश लाकर नियमों में संशोधन किया जाए तथा वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों को टेट की अनिवार्यता से छूट प्रदान की जाए।
अध्यादेश लाकर स्थायी समाधान की मांग
संघ का स्पष्ट मत है कि सरकार यदि अध्यादेश के माध्यम से इस नियम में संशोधन करती है तो लाखों शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित होगा और शिक्षा व्यवस्था में स्थिरता बनी रहेगी। साथ ही शिक्षकों में सरकार के प्रति विश्वास और सकारात्मकता भी मजबूत होगी।
