अघोरेश्वर भगवान राम महाविभूति स्थल स्थापना दिवस पर नारायणपुर-चिटकवाईन आश्रम में भक्ति का महासंगम, सुबह से शुरू हुआ विशेष पूजन और अखण्ड अष्टयाम संकीर्तन, देश-प्रदेश से पहुंचे श्रद्धालु, अंतिम दिन महाआरती के साथ होगा भव्य समापन

निरंजन मोहन्ती-नारायणपुर
नारायणपुर, 15 फरवरी 2026। नारायणपुर के चिटकवाईन स्थित अघोर परिषद् ट्रस्ट एवं अघोर पीठ जनसेवा अभेद आश्रम में अघोर परंपरा के महान संत अघोरेश्वर भगवान राम महाविभूति स्थल स्थापना दिवस का छठवां वार्षिकोत्सव श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर दो दिवसीय धार्मिक आयोजन के तहत महाशिवरात्रि पूजन, अखण्ड अष्टयाम संकीर्तन, सद्ग्रंथ पाठ, आध्यात्मिक गोष्ठी और विशेष आरती का आयोजन किया जा रहा है।
रविवार सुबह लगभग 7:30 बजे बाबा उत्साही राम जी के द्वारा महाशिवरात्रि का विशेष पूजन संपन्न कराया गया। इसके पश्चात सुबह 9:30 बजे आश्रम स्थित मंदिर एवं महाविभूति स्थल पर विधिवत पूजा-अर्चना कर अखण्ड अष्टयाम संकीर्तन की शुरुआत हुई। संकीर्तन के दौरान श्रद्धालु “अघोरानाम परो मंत्रः नास्ति तत्वम गुरौ : परम” मंत्र का जाप करते हुए भक्ति में लीन दिखाई दिए। आश्रम परिसर में भजन, कीर्तन और मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।
आयोजन के दौरान श्रद्धालु 24 घंटे सर्वेश्वरी मंदिर एवं समाधि स्थल की परिक्रमा करते हुए निरंतर संकीर्तन में शामिल हो रहे हैं। आयोजन समिति के अनुसार अघोरेश्वर भगवान राम के महानिर्वाण दिवस के पुण्य स्मरण में अखण्ड संकीर्तन का आयोजन किया गया है, जिससे श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक साधना का अवसर मिल रहा है।
सोमवार 16 फरवरी को सुबह महाविभूति स्थल पर विशेष पूजन एवं आरती के साथ अष्टयाम संकीर्तन का समापन किया जाएगा। इसके बाद “सफलयोनि” सद्ग्रंथ का पाठ एवं आध्यात्मिक गोष्ठी का आयोजन होगा, जिसमें अघोरेश्वर भगवान राम के जीवन, उनके सिद्धांतों और समाज के प्रति उनके योगदान पर प्रकाश डाला जाएगा।
वार्षिकोत्सव के समापन अवसर पर अंतिम पूजन और महाआरती का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। आयोजन में प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु पहुंचे हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आश्रम परिसर में पेयजल, प्रसाद वितरण और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी की गई हैं।
पूरे आयोजन के दौरान आश्रम परिसर में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष वातावरण बना हुआ है, जिससे नारायणपुर क्षेत्र एक बार फिर धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया है।
