दुर्लभ वन्यजीव के अंगों की खरीद-फरोख्त में शामिल नेटवर्क पर कसा शिकंजा, जशपुर–गुमला वन विभाग की संयुक्त दबिश, तीसरा आरोपी रनपुर से गिरफ्तार,वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई 
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दुर्लभ वन्यजीव के अंगों की खरीद-फरोख्त में शामिल नेटवर्क पर कसा शिकंजा, जशपुर–गुमला वन विभाग की संयुक्त दबिश, तीसरा आरोपी रनपुर से गिरफ्तार,वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई 

जशपुरनगर, 13 फरवरी 2026।
वन्यजीवों की अवैध तस्करी पर लगाम कसने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत वनमंडल जशपुर की टीम को बड़ी सफलता मिली है। जशपुर और गुमला (झारखंड) वन विभाग की संयुक्त टीम ने योजनाबद्ध कार्रवाई करते हुए पैंगोलिन शल्क की अवैध खरीदी-बिक्री में संलिप्त एक आरोपी को रनपुर क्षेत्र से गिरफ्तार किया है।

यह कार्रवाई 11 फरवरी को की गई, जब पहले से मिले सुराग के आधार पर संयुक्त टीम ने रनपुर में घेराबंदी कर आरोपी राजू विश्वकर्मा को उसके घर से दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को विधिवत वन विभाग के सुपुर्द कर दिया गया है।

 पहले दो आरोपी झारखंड में हुए थे गिरफ्तार, पूछताछ में खुला तीसरे का नाम

वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 21 दिसंबर 2025 को गुमला वन प्रमंडल की टीम ने चैनपुर–मांझटोली मुख्य मार्ग स्थित ग्राम मरयम टोली से दो आरोपियों — मंसूर अंसारी (ग्राम सिसई) और रामेश्वर (ग्राम खोक्सो बेंजोरा, पोस्ट खरसोता, जशपुर) — को पैंगोलिन की शल्क की तस्करी करते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।

पूछताछ के दौरान आरोपी रामेश्वर ने खुलासा किया कि उसे यह शल्क नारायणपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत रनपुर निवासी राजू विश्वकर्मा नामक व्यक्ति से प्राप्त हुई थी। इसी खुलासे के बाद से गुमला वन विभाग की टीम तीसरे आरोपी की तलाश में जुटी हुई थी।

 जशपुर–गुमला वन विभाग और नारायणपुर पुलिस की संयुक्त रणनीति

गुमला वन विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जशपुर वनमंडलाधिकारी से संपर्क किया। इस पर जशपुर डीएफओ शशि कुमार के निर्देश पर कुनकुरी वन परिक्षेत्र के रेन्जर सुरेन्द्र होता के नेतृत्व में टीम गठित की गई। जशपुर वन विभाग, गुमला वन विभाग एवं नारायणपुर थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने रनपुर में योजनाबद्ध तरीके से दबिश दी और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

वन अधिकारियों के अनुसार, आरोपी लंबे समय से पैंगोलिन शल्क की अवैध खरीद-फरोख्त में सक्रिय था और अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़ा होने की आशंका है।

अनुसूची-1 में संरक्षित है पैंगोलिन, कठोर दंड का प्रावधान

ज्ञात हो कि पैंगोलिन एक अत्यंत दुर्लभ और संरक्षित वन्यजीव है, जिसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में शामिल किया गया है। इस श्रेणी में शामिल वन्यजीवों के शिकार, व्यापार या अवैध परिवहन पर कठोर दंड का प्रावधान है।

आरोपी के विरुद्ध संबंधित धाराओं के तहत वन अपराध प्रकरण दर्ज कर विधिवत गिरफ्तारी की गई है तथा उसे न्यायालय में प्रस्तुत करने की प्रक्रिया जारी है।

   वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और इस अवैध तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि वन्यजीवों की तस्करी रोकने के लिए सीमावर्ती जिलों में लगातार निगरानी बढ़ाई जा रही है।

 आमजन से सहयोग की अपील

वन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे वन्यजीव संरक्षण में सहयोग करें तथा किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि की सूचना तत्काल निकटतम वन कार्यालय को दें।

वन्यजीवों का संरक्षण केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

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