डीलिस्टिंग धर्मांतरण के खिलाफ जनजाति सुरक्षा मंच का बगीचा में शक्ति प्रदर्शन.....विशाल जुलूस और सभा में उमड़ा जनसैलाब
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डीलिस्टिंग धर्मांतरण के खिलाफ जनजाति सुरक्षा मंच का बगीचा में शक्ति प्रदर्शन.....विशाल जुलूस और सभा में उमड़ा जनसैलाब

जशपुर, 09 सितंबर 2025 /
जशपुर जिले के बगीचा में मंगलवार को अखिल भारतीय जनजाति सुरक्षा मंच के बैनर तले डीलिस्टिंग धर्मांतरण के मुद्दे पर ऐतिहासिक जुलूस और विशाल सभा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जिले और आसपास के ग्रामीण अंचलों से हजारों की संख्या में कार्यकर्ता, सामाजिक कार्यकर्ता और ग्रामीण पहुंचे।
  यह रैली कल्याण आश्रम चौक से शुरू होकर नगर के मुख्य मार्गों से गुजरते हुए स्थानीय बस स्टैंड पहुंची, जहां यह आमसभा में परिवर्तित हो गई। इस दौरान अचानक तेज बारिश शुरू हो गई, लेकिन बारिश के बीच भी कार्यकर्ताओं और आमजन की मौजूदगी ने आंदोलन के प्रति प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया।

सभा को संबोधित करते हुए मंच के राष्ट्रीय संयोजक एवं पूर्व मंत्री गणेश राम भगत ने कहा कि “डीलिस्टिंग होकर रहेगा। धर्मांतरित लोग आदिवासी अधिकारों के हकदार नहीं हो सकते।” उन्होंने ईसाई मिशनरियों पर धर्मांतरण की आड़ में लोगों को भ्रमित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह सनातन संस्कृति पर प्रहार है, जिसे कभी भी सफल नहीं होने दिया जाएगा।

पूर्व मंत्री भगत ने आगे कहा “जंगल, जल, जमीन पर सबका अधिकार है। ईसाई मिशनरी यदि यहां कब्जा कर क्रूस गाड़ रहे हैं तो यह गलत है। शासन-प्रशासन और वन विभाग को इस पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।”

सभा में रोशन प्रताप ने कहा कि धर्मांतरण समाज को तोड़ने का प्रयास है, जिसे रोकने के लिए सरकार भी कानून बनाने की ओर बढ़ रही है। उन्होंने मांग की कि जो लोग परंपरा और रीतिरिवाजों का पालन नहीं करते और धर्मांतरण कर चुके हैं, उनका तत्काल डीलिस्टिंग होना चाहिए।

राकेश गुप्ता ने कहा कि यह लड़ाई सनातन संस्कृति की रक्षा की लड़ाई है और पूरे देश में गणेश राम भगत के नेतृत्व में आदिवासी परंपरा-संस्कृति के संरक्षण का आंदोलन चल रहा है।

विधिक सलाहकार रामप्रकाश पाण्डेय ने कहा कि “सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट किया है कि जो अपनी परंपरा का पालन नहीं करता, वह आदिवासी अधिकारों का लाभ नहीं ले सकता। इसी मांग को लेकर आंदोलन देशभर में जारी है।” उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले समय में ईसाई मिशनरियों की “दुकानदारी” बंद हो जाएगी।

सरकार से की ठोस कदम उठाने की मांग

सभी वक्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की कि धर्मांतरण कर चुके लोगों को अनुसूचित जनजातियों की सूची से बाहर करने की प्रक्रिया जल्द से जल्द लागू की जाए। उन्होंने कहा कि यह कदम जनजाति समाज की अस्मिता और भविष्य की रक्षा के लिए जरूरी है।

सभा में लिया गया संकल्प

सभा में मौजूद हजारों कार्यकर्ताओं ने हाथ उठाकर संकल्प लिया कि वे अपनी संस्कृति, परंपरा और पहचान की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करते रहेंगे। मंच से यह भी आह्वान किया गया कि समाज के युवा आगे आएं और डीलिस्टिंग आंदोलन को गांव-गांव तक पहुंचाएं।

      बगीचा नगर में हुए इस आयोजन ने साबित कर दिया कि जनजाति सुरक्षा मंच का आंदोलन अब जनआंदोलन का रूप ले चुका है। कार्यकर्ताओं के उत्साह और नारों से पूरा इलाका गूंज उठा।

कार्यक्रम में जशपुर, रायगढ़ और सरगुजा जिलों से बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता पहुंचे। मंच संचालन चंद्रदेव ग्वाला और राकेश गुप्ता ने किया। इस दौरान जनपद सदस्य सविता नागेश, पूर्व विधायक जगेश्वर राम भगत, मनिजर राम, लच्छू राम सरपंच, जीतराम भगत, मोतीराम यादव, टंकेश्वर राजवाड़े, रामजतन यादव, राजकुमार गुप्ता, जगमोहन राम, अनिल भगत, विमला भगत, आनंद प्रजापति, सुरेश नागवंशी, रामसुमेर भगत, संतन यादव, सुखलाल यादव, डमरूधर यादव, जयकुमार, उमाशंकर ठाकुर, जे.आर. नागवंशी, श्रीराम, वासुदेव, दिनेश यादव, गंगाराम भगत, गौतम, सतनारायण शर्मा समेत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे और आंदोलन का समर्थन किया।

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