बिना मोबाइल और इंटरनेट के गाँव की शांति में बीता समय, जशपुर के सामुदायिक होमस्टे में तमिलनाडु से आए पहले अतिथि का अनोखा अनुभव
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बिना मोबाइल और इंटरनेट के गाँव की शांति में बीता समय, जशपुर के सामुदायिक होमस्टे में तमिलनाडु से आए पहले अतिथि का अनोखा अनुभव

होमस्टेज़ ऑफ इंडिया द्वारा विकसित सामुदायिक होमस्टे में तमिलनाडु से आए पहले मेहमान ने किया सुकून भरे ग्रामीण जीवन का अनुभव

जशपुर 27 जनवरी 2026/ होमस्टेज़ ऑफ इंडिया द्वारा जशपुर जिले में सामुदायिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के तहत, हाल ही में तमिलनाडु से आए पहले मेहमान का स्वागत जशपुर के एक होमस्टे में किया गया। यह प्रवास जशपुर को मॉडल कम्युनिटी टूरिज़्म गंतव्य के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

तमिलनाडु के महेश,जो सड़क मार्ग से भारत भ्रमण पर हैं, अपनी पूरी यात्रा के दौरान होमस्टे में ही ठहर रहे हैं। उनके अनुसार, इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं—स्वस्थ, सादा, घर का बना भोजन और भारत को उसकी वास्तविक संस्कृति और जीवनशैली के साथ देखने की इच्छा।

जशपुर में अपने प्रवास के दौरान महेश विपिन और उनके परिवार के होमस्टे में ठहरे। यह होमस्टे उस गाँव का हिस्सा है, जिसे होमस्टेज़ ऑफ इंडिया ने जिला प्रशासन के सहयोग से कम्युनिटी टूरिज़्म के मॉडल के रूप में अपनाया है। महेश ने परिवार की गर्मजोशी भरी मेहमाननवाज़ी, पारंपरिक तरीके से तैयार किए गए पौष्टिक भोजन, तथा गाँव और आसपास के शांत, प्राकृतिक वातावरण की विशेष रूप से सराहना की।

महेश ने बताया कि बिना इंटरनेट और मोबाइल फोन के, गाँव की शांति में समय बिताना उनके लिए पूरी तरह से खुद से जुड़ने और मानसिक रूप से तरोताज़ा होने का अवसर रहा।

इस प्रवास से होस्ट परिवार को अतिरिक्त आय प्राप्त हुई, जिससे उनकी आजीविका को मजबूती मिली। इसके साथ ही, देश के दूसरे हिस्से से आए मेहमान की मेज़बानी करने से परिवार को नए अनुभव, सांस्कृतिक संवाद और पर्यटन से जुड़े व्यावहारिक ज्ञान का लाभ मिला। यह अनुभव परिवार के आतिथ्य कौशल, आत्मविश्वास और उद्यमशील क्षमता को और सशक्त करता है।

होमस्टेज़ ऑफ इंडिया इस पहल के अंतर्गत न केवल होमस्टे विकास पर काम कर रहा है, बल्कि स्थानीय परिवारों की क्षमता निर्माण, आतिथ्य मानकों में सुधार, अतिथि अनुभव को बेहतर बनाने और जिम्मेदार पर्यटन प्रथाओं को अपनाने पर भी निरंतर सहयोग कर रहा है। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पर्यटन का लाभ सीधे समुदाय तक पहुँचे और स्थानीय संस्कृति, परंपराओं एवं प्राकृतिक विरासत का संरक्षण बना रहे।

महेश का यह अनुभव दर्शाता है कि आज के जागरूक यात्री स्लो ट्रैवल, सच्चे मानवीय संबंध, स्थानीय भोजन और प्रकृति के करीब रहने को प्राथमिकता दे रहे हैं। जशपुर जैसे क्षेत्र इस प्रकार के यात्रियों के लिए एक आदर्श गंतव्य बनकर उभर रहे हैं।

यह पहल जशपुर को न केवल एक उभरते हुए ईको-टूरिज़्म और कम्युनिटी टूरिज़्म गंतव्य के रूप में स्थापित कर रही है, बल्कि ग्रामीण परिवारों के लिए स्थायी आजीविका, सम्मानजनक आय और व्यापक पहचान का मार्ग भी प्रशस्त कर रही है।

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