अंतिम विदाई भी बेहाल हालात में ! ऐतिहासिक ग्राम पंचयात नारायणपुर का श्मशान घाट बदहाली की चरम पर, बारिश–गंदगी–अव्यवस्था के बीच मजबूर है ग्रामीण....
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अंतिम विदाई भी बेहाल हालात में ! ऐतिहासिक ग्राम पंचयात नारायणपुर का श्मशान घाट बदहाली की चरम पर, बारिश–गंदगी–अव्यवस्था के बीच मजबूर है ग्रामीण....

जशपुर /नारायणपुर 23 जनवरी 2026 : 
कुनकुरी विकासखंड के अंतर्गत आने वाला नारायणपुर क्षेत्र का एक ऐतिहासिक और अत्यंत पुराना ग्राम पंचायत है, लेकिन विकास के नाम पर यहां आज भी संवेदनशील बुनियादी सुविधाएं नदारद हैं। इसका सबसे ज्वलंत उदाहरण कपरी नदी तट पर स्थित श्मशान घाट है, जहां अंतिम संस्कार जैसी मानवीय प्रक्रिया भी कठिन और पीड़ादायक बन चुकी है।

यह श्मशान घाट केवल नारायणपुर का ही नहीं, बल्कि पड़ोसी ग्राम पंचायत मटासी का भी एकमात्र श्मशान घाट है। दो पंचायतों की हजारों की आबादी इसी घाट पर अपने परिजनों की अंतिम विदाई करती है, लेकिन हालात ऐसे हैं कि लोगों को मजबूरी में बारिश, धूप और गंदगी के बीच शवदाह करना पड़ता है।

नारायणपुर श्मशान घाट में मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव

ग्राम पंचायत की लापरवाही और प्रशासन की गंभीरता की कमी का सीधा असर नारायणपुर की जनता पर पड़ रहा है। गांव के श्मशान घाट की स्थिति अत्यंत दयनीय बनी हुई है, जहां अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील कार्य के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं।

 ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों और सचिव को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई,ग्रामीणों ने मांग की है कि ग्राम पंचायत और प्रशासन गंभीरता से विचार करते हुए श्मशान घाट में बिजली, पानी, सड़क, बाउंड्रीवाल, बैठने की व्यवस्था और साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाएं शीघ्र उपलब्ध कराए, ताकि अंतिम समय में परिजनों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।

 छत नहीं, बैठने की जगह नहीं—बारिश में शवदाह बन जाता है सबसे बड़ा संकट

श्मशान घाट परिसर में दाह संस्कार के लिए न तो कोई शेड है और न ही छत। बरसात के दिनों में चिता जलाना अत्यंत कठिन हो जाता है। तेज बारिश में लकड़ियां भीग जाती हैं, आग जलाना मुश्किल हो जाता है और परिजन घंटों तक परेशान रहते हैं।वहीं, बैठने की कोई व्यवस्था नहीं होने से बुजुर्ग, और बच्चे जमीन पर बैठने को मजबूर हैं।

 चारों ओर गंदगी, स्वास्थ्य के लिए खतरे की घंटी

श्मशान घाट की स्थिति देखकर कोई भी सिहर उठे। परिसर के चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ है।स्थानीय लोगों की अज्ञानता के चलते यहां कचरा फेंका जा रहा है। जगह-जगह—सैलून से लाए गए कटे बाल डॉक्टरों द्वारा उपयोग की गई इंजेक्शन की सिरिंज दवाइयों की खाली शीशियां खुलेआम पड़ी रहती हैं। इससे न केवल गंदगी फैल रही है, बल्कि संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है।

 न पानी, न बाउंड्रीवाल—अव्यवस्था का अड्डा बना श्मशान

श्मशान घाट में पेयजल की कोई सुविधा नहीं है। अंतिम संस्कार के दौरान लोगों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि यहां एक बोरिंग की अत्यंत आवश्यकता है।साथ ही, बाउंड्रीवाल न होने के कारण परिसर में आवारा मवेशियों की आवाजाही और असामाजिक तत्वों की गतिविधियां आम हो गई हैं।

 श्मशान घाट में आज तक नहीं बनी सड़क

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि श्मशान घाट तक पहुंचने के लिए आज तक कोई पक्की सड़क नहीं बनी है। शव को लेकर ग्रामीणों को पगडंडी के सहारे नदी किनारे पहुंचना पड़ता है।बरसात के दिनों में यह रास्ता कीचड़ से भर जाता है और फिसलन भरा हो जाता है। ग्रामीणों ने यहां सीसी रोड निर्माण की लंबे समय से मांग कर रखी है।

 ग्रामीणों की प्रशासन से दो टूक मांग

नारायणपुर और मटासी पंचायत के ग्रामीणों ने एक स्वर में शासन-प्रशासन से गंभीर हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि श्मशान घाट जैसी संवेदनशील जगह पर मूलभूत सुविधाएं देना सरकार की जिम्मेदारी है।ग्रामीणों की प्रमुख मांगे है कि दाह संस्कार हेतु स्थायी शेड/छत निर्माण,बैठने की व्यवस्था,श्मशान घाट तक सीसी सड़क निर्माण,पेयजल के लिए बोरिंग,बाउंड्रीवाल निर्माण,कचरा निष्कासन अति आवश्यक है।

❗ सवालों के घेरे में व्यवस्था

ग्रामीणों का सवाल है कि जब सरकार स्वच्छ भारत मिशन और ग्रामीण विकास की बात करती है, तो फिर स्थानीय प्रशासन द्वारा श्मशान घाट जैसी संवेदनशील जगह को उपेक्षित क्यों रखा गया है ? अब देखना यह है कि प्रशासन कब इस गंभीर मुद्दे पर संज्ञान लेता है और कब नारायणपुर–मटासी के लोगों को सम्मानजनक अंतिम संस्कार की सुविधा मिल पाती है।

नारायणपुर श्मशान घाट की बदहाली पर उप सरपंच ने जताई चिंता

ग्राम पंचायत नारायणपुर के उप सरपंच नवरतन बंग ने  श्मशान घाट की दुर्दशा पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि परिसर में अत्यधिक गंदगी फैल गई है। उन्होंने बताया कि लोग यहां आकर कचरा फेंक रहे हैं, जो अनुचित है और ऐसा नहीं किया जाना चाहिए।

उप सरपंच ने जानकारी दी कि आगामी तीन माह के भीतर श्मशान घाट परिसर में उगी घास-फूस एवं फैले कचरे की पूर्ण सफाई कराई जाएगी। साथ ही भविष्य में श्मशान परिसर की स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रत्येक वर्ष तीन-तीन माह के अंतराल में नियमित सफाई कराई जाएगी ।उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि श्मशान घाट की पवित्रता बनाए रखने में सहयोग करें और वहां कचरा न फैलाएं।

सुनिए क्या कहतें है ग्रामीण !

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