शिक्षा के साथ संस्कारों की मजबूत नींव रखने वाला “शिशु नगरी” कार्यक्रम सरस्वती शिशु मंदिर जशपुर में भव्य रूप से संपन्न, बच्चों के सर्वांगीण विकास पर रहा विशेष फोकस,
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शिक्षा के साथ संस्कारों की मजबूत नींव रखने वाला “शिशु नगरी” कार्यक्रम सरस्वती शिशु मंदिर जशपुर में भव्य रूप से संपन्न, बच्चों के सर्वांगीण विकास पर रहा विशेष फोकस,

जशपुरनगर 20 जनवरी 26 : 
सरस्वती शिशु मंदिर जशपुर में आयोजित शिशु नगरी कार्यक्रम अत्यंत हर्षोल्लास, उत्साह एवं अनुशासित वातावरण के बीच भव्य रूप से संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों में शिक्षा के साथ-साथ संस्कार, व्यवहारिक ज्ञान, सामाजिक समझ तथा आत्मविश्वास का विकास करना रहा। विद्यालय प्रांगण में सजी शिशु नगरी ने उपस्थित अभिभावकों और अतिथियों को बाल शिक्षा की नवीन पद्धति से रू-बरू कराया।

कार्यक्रम का शुभारंभ कार्यक्रम की अध्यक्ष श्रीमती कल्पना टोप्पो, मुख्य अतिथि श्रीमती सविता मिश्रा, विद्यालय समिति के सामान्य व्यवस्थापक रामनिवास अग्रवाल एवं प्राचार्य संजय कुमार यादव द्वारा मां सरस्वती एवं भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। इसके पश्चात वंदना एवं स्वागत गीत के माध्यम से अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया गया।

प्रधानाचार्य रामानंद राम ने कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए शिशु नगरी कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम बच्चों को जीवनोपयोगी व्यवहारिक ज्ञान, अनुशासन, सहयोग भावना एवं आत्मनिर्भरता सिखाने की एक प्रभावी पहल है, जिससे बालकों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सके।

कार्यक्रम की अध्यक्ष श्रीमती कल्पना टोप्पो ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि प्रारंभिक शिक्षा में बच्चों पर किसी भी प्रकार का मानसिक दबाव नहीं डालना चाहिए, बल्कि खेल-खेल में सीखने के माध्यम से उनकी रचनात्मकता, कल्पनाशक्ति एवं सोचने-समझने की क्षमता को विकसित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा और संस्कार का समन्वय ही भावी पीढ़ी को सशक्त, संस्कारित और जिम्मेदार नागरिक बनाता है।

मुख्य अतिथि श्रीमती सविता मिश्रा ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा के साथ संस्कारों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। मोबाइल और डिजिटल माध्यमों के अत्यधिक उपयोग से बच्चों के चारित्रिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, ऐसे में अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों को सही दिशा दें, समय प्रबंधन सिखाएं और उन्हें सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ें।

कार्यक्रम के सांस्कृतिक सत्र में अरुणोदय प्रथम एवं द्वितीय के भैया-बहनों द्वारा प्रस्तुत मनमोहक नृत्य ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। बच्चों की सजीव प्रस्तुति, अनुशासन एवं आत्मविश्वास ने सभी अभिभावकों का दिल जीत लिया। वहीं अभिभावक माताओं द्वारा प्रस्तुत लोरी गीत एवं देशभक्ति नागपुरी गीत ने पूरे वातावरण को भावनात्मक और देशभक्ति से ओत-प्रोत कर दिया।

विद्यालय समिति के सामान्य व्यवस्थापक रामनिवास अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि बाल्यावस्था में दिया गया सही मार्गदर्शन ही जीवन की सफलता की नींव रखता है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के नियमित अध्ययन, नैतिक शिक्षा एवं संस्कारों पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया।

कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य संजय कुमार यादव ने समस्त अतिथियों, अभिभावकों एवं विद्यालय परिवार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शिशु नगरी जैसे कार्यक्रम बच्चों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और व्यवहारिक समझ को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इसके पश्चात अतिथियों एवं अभिभावकों ने शिशु वाटिका का निरीक्षण किया तथा बच्चों द्वारा तैयार की गई प्रदर्शनी का अवलोकन कर उनकी रचनात्मक प्रतिभा की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।

कार्यक्रम में लगभग 250 अभिभावकों की गरिमामयी उपस्थिति रही। आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय समिति के पदाधिकारियों, आचार्य-आचार्याओं एवं विद्यालय कर्मचारियों का सराहनीय योगदान रहा।

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