अग्निकाल की चुनौती से निपटने जशपुर वनमण्डल ने कसी कमर, आयोजित हुई वनमण्डलस्तरीय अग्नि सुरक्षा कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम
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अग्निकाल की चुनौती से निपटने जशपुर वनमण्डल ने कसी कमर, आयोजित हुई वनमण्डलस्तरीय अग्नि सुरक्षा कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम

जशपुरनगर 18 जनवरी 26
वनों को अग्नि से सुरक्षित रखने की दिशा में जशपुर वनमण्डल द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए दिनांक 16 जनवरी 2026 को वनमण्डलस्तरीय अग्नि सुरक्षा कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आगामी अग्निकाल (16 फरवरी से 15 जून) को देखते हुए यह कार्यशाला विशेष रूप से आयोजित की गई, ताकि वनों में आग की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके और प्राकृतिक संपदा को होने वाली क्षति से बचाया जा सके।

कार्यक्रम में वनमण्डलाधिकारी जशपुर ने उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों, अग्नि प्रहरियों एवं संयुक्त वन प्रबंधन समिति के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि अग्निकाल के दौरान वनों में लगने वाली आग पर्यावरण, जैव विविधता और ग्रामीण आजीविका के लिए गंभीर खतरा है। इससे न केवल पेड़-पौधे नष्ट होते हैं, बल्कि वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास भी प्रभावित होता है। साथ ही, वनों के प्राकृतिक पुनरुत्पादन की प्रक्रिया बाधित हो जाती है, जिससे आने वाले वर्षों में हरियाली पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि आग लगने की सूचना मिलते ही संबंधित बीट, परिक्षेत्र एवं अनुभाग स्तर के अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचें और अग्नि प्रहरी तथा ग्रामीणों के सहयोग से आग को नियंत्रित करने की त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित करें। प्रारंभिक स्तर पर आग पर काबू पाने से बड़े क्षेत्र में फैलने से रोका जा सकता है।

वनमण्डलाधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि जानबूझकर आग लगाने वालों के प्रति विभाग किसी प्रकार की नरमी नहीं बरतेगा। ऐसे मामलों में भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 26 एवं 79 तथा वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 9 के तहत वन अपराध प्रकरण दर्ज कर कठोर वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।

कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा अग्नि रोकथाम के व्यावहारिक उपायों पर प्रशिक्षण दिया गया। फायर लाइन निर्माण, पुराने फायर लाइन का रख-रखाव, संवेदनशील क्षेत्रों का मानचित्रण, अग्नि निगरानी दल की तैनाती, त्वरित सूचना तंत्र की व्यवस्था, तथा आधुनिक संचार माध्यमों के उपयोग पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही, सामुदायिक सहभागिता को अग्नि प्रबंधन की सबसे मजबूत कड़ी बताया गया।

संयुक्त वन प्रबंधन समिति के सदस्यों को वन मित्र के रूप में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया। अधिकारियों ने कहा कि ग्रामीणों की जागरूकता और सहयोग से ही आग की घटनाओं पर समय रहते नियंत्रण पाया जा सकता है। इसके लिए गांव-गांव में जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने पर भी सहमति बनी।

कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि आग से केवल वन संपदा ही नहीं, बल्कि जल स्रोत, मिट्टी की उर्वरता और स्थानीय जलवायु पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। लंबे समय तक इसका असर कृषि उत्पादन और मानव जीवन पर भी दिखाई देता है।

कार्यशाला के समापन अवसर पर जशपुर वनमण्डल द्वारा जिलेवासियों से अपील की गई कि अग्निकाल के दौरान जंगलों में आग न लगाएं, खेतों की सफाई के दौरान आग का प्रयोग न करें, जलती बीड़ी-सिगरेट या माचिस जंगल में न फेंकें और किसी भी प्रकार की आग या संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत वन विभाग को दें।

वन अधिकारियों ने कहा कि वनों की रक्षा केवल विभागीय जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। जागरूकता, सतर्कता और सहयोग से ही हम जशपुर के वनों को सुरक्षित रख सकते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित विरासत बचा सकते हैं।

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