बांस-बल्लियों के सहारे बिजली आपूर्ति,शिकायतों के बाद भी दशकों से नहीं लगे पोल,क्या हादसे का इंतजार कर रहा विभाग?
जशपुर/नारायणपुर : 11 जनवरी 2026
बगीचा विकासखंड के सरबकोम्बो गांव में बिजली आपूर्ति की स्थिति किसी भी दृष्टि से सुरक्षित नहीं कही जा सकती। यहां ग्रामीणों को बिजली कनेक्शन तो दे दिया गया है, लेकिन उन्हें सुरक्षित बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना बिजली विभाग पूरी तरह भूल चुका है। गांव के मुख्य मार्ग और स्टेट हाईवे से सटे इलाकों में आज भी बिजली के पोल नहीं लगाए गए हैं। परिणामस्वरूप, मैन रोड पर लगे खंभों से सीधे बांस-बल्लियों के सहारे तार खींचकर घरों तक बिजली पहुंचाई जा रही है।
यह अस्थायी व्यवस्था न केवल विभागीय नियमों का खुला उल्लंघन है, बल्कि ग्रामीणों की जान को लगातार खतरे में डाल रही है। इस रास्ते से रोजाना सैकड़ों ग्रामीणों के साथ-साथ स्कूली बच्चे भी गुजरते हैं, जिनके सिर के ऊपर से जर्जर और झूलते तार लटकते रहते हैं।
बारिश, आंधी और अंधेरे में और बढ़ जाता है खतरा
स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में तारों से चिंगारी निकलने की घटनाएं आम हो चुकी हैं। कई बार रात के समय अंधेरे में तार दिखाई नहीं देते और लोग डर के साए में सड़क पार करते हैं। आंधी-तूफान में बांस-बल्लियां हिलने लगती हैं, जिससे तार टूटकर गिरने की पूरी आशंका बनी रहती है। यदि कभी तार टूटकर सड़क पर गिर गया, तो यह किसी बड़े हादसे को जन्म दे सकता है।
दशकों से कायम लापरवाही
सरबकोम्बो निवासी मूंगा लाल गुप्ता बताते हैं कि उनके घर के सामने स्टेट हाईवे पार कर बिजली कनेक्शन दिया गया है, लेकिन आज तक वहां स्थायी पोल नहीं लगाए गए। सड़क के दोनों ओर बांस-बल्ली गाड़कर तार खींचे गए हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने और गांव के अन्य लोगों ने कई बार बिजली विभाग को इस गंभीर समस्या से अवगत कराया, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला, समाधान नहीं। उन्होंने आगे बताया कि “दशकों से यही हाल है। तार पुराने हो चुके हैं, इंसुलेशन घिस चुका है और अक्सर स्पार्किंग होती है। कभी भी तार टूट सकता है और बड़ा हादसा हो सकता है।”
ग्रामीण विद्युतीकरण की सच्चाई
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्रामीण विद्युतीकरण योजना केवल कागजों में सफल दिखाई देती है, जबकि जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। विभाग ने केवल कनेक्शन देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली, लेकिन सुरक्षा, तकनीकी मानक और स्थायी संरचना पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी बड़े शहर या कस्बे में इस तरह बांस-बल्लियों के सहारे बिजली दी जाती, तो तुरंत कार्रवाई होती, लेकिन ग्रामीण इलाकों में लापरवाही को नजरअंदाज कर दिया जाता है।
बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा खतरा
गांव का यह मार्ग स्टेट हाइवे सड़क है स्कूल, बाजार जैसे कई स्थानों को जोड़ता है। रोजाना इस सड़क से सैकड़ो वाहनों सहित छोटे बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं इसी रास्ते से गुजरते हैं। बच्चों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक है,
शिकायतों का लंबा इतिहास
ग्रामीणों ने बताया कि पिछले कई वर्षों में उन्होंने बिजली विभाग के स्थानीय कार्यालय, अधिकारियों और कर्मचारियों से कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें कीं, लेकिन न तो मौके का निरीक्षण किया गया और न ही किसी प्रकार का सुधार हुआ। इससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
किसी बड़े हादसे का इंतजार ?
ग्रामीणों का सवाल है कि क्या विभाग किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा? क्या किसी की जान जाने के बाद ही खंभे लगाए जाएंगे? ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी बिजली विभाग और प्रशासन की होगी।
सरबकोम्बो गांव की यह स्थिति केवल एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो यह लापरवाही कभी भी एक बड़ी त्रासदी में बदल सकती है।
नारायणपुर के बिजली विभाग के लाइन मेन को पूछने पर बताया कि मैं मौके पर जाकर देख लूंगा अगर वँहा पोल की आवश्यकता होगी तो उच्च अधिकारी को अवगत कराया जाएगा, जो भी निर्देश मिलेगा उस अनुरूप आगे की कार्यवाही की जाएगी।
