नारायणपुर में विशाल हिन्दू सम्मेलन का हुआ आयोजन,हिन्दू एकता और राष्ट्र प्रेम पर दिया गया जोर

नारायणपुर : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर नारायणपुर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में हिंदू सम्मेलन समिति के तत्वावधान में एक भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में बड़ी संख्या में नगर एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं, समाजसेवियों, युवाओं और महिलाओं की सहभागिता रही।

कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी आयोजित की गईं, जिनमें भारतीय परंपरा, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति से जुड़ी झलक देखने को मिली। आयोजकों ने बताया कि इस प्रकार के आयोजनों का उद्देश्य समाज को सकारात्मक दिशा देना और आने वाली पीढ़ी में नैतिक मूल्यों का विकास करना है।
इस सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथि जन सेवा अभेद आश्रम के परम पूज्य उत्साही बाबा जी द्वारा भारत माता के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष शम्भू नाथ चक्रवती,मुख्य वक्ता प्रांत सेवा प्रमुख तुलसी दास सहित भारी संख्या में श्रद्धालु, सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए पूज्य उत्साही बाबा ने हिंदू समाज की एकता और संगठन को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा की जड़ें ऋषि परंपरा में निहित हैं, जो संस्कार, आदर्श और मूल्यों के माध्यम से व्यक्ति को रूढ़ियों से मुक्त कर राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनाती है। उन्होंने समाज में फैली अज्ञानता और अशिक्षा को दूर करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि धर्म के मार्ग पर चलना और राष्ट्रप्रेम की भावना को मजबूत करना समय की मांग है।उन्होंने कहा कि जिस धरती पर व्यक्ति जन्म लेता है, खेलता-कूदता है, उसके प्रति प्रेम स्वाभाविक होता है। राष्ट्रप्रेम समाज की एकजुटता से ही विकसित होता है और यही भारत के गौरव व विकास की दिशा तय करता है। उन्होंने हिंदू समाज को संगठित रहने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना का उल्लेख करते हुए बताया कि इसकी स्थापना 27 सितंबर 1925 को हुई थी। उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य हिंदू समाज में अनुशासन, एकता और सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करना है। उन्होंने चेतावनी दी कि आपसी संघर्ष समाज को कमजोर करता है, जिससे विघटनकारी शक्तियों को लाभ मिलता है। संगठन और एकता को उन्होंने सनातन संस्कृति की आत्मा बताया। रामचरितमानस का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह ग्रंथ पारिवारिक मर्यादा, सामाजिक दायित्व और समरसता का वैज्ञानिक दृष्टिकोण देता है। उन्होंने भारतीय नारी की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि नारी शक्ति ने ही राम और कृष्ण जैसी परंपराओं को जीवंत रखा है।
शम्भू नाथ चक्रवती ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदू और भारत एक-दूसरे से अभिन्न अंग हैं। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक परंपरा, के माध्यम से विश्व को शांति का संदेश देने की बात कही। साथ ही यह भी कहा गया कि भारत की एकता को तोड़ने वाली शक्तियां कभी सफल नहीं होंगी, क्योंकि हिंदू समाज ने सदैव जोड़ने का कार्य किया है।
इस अवसर पर कार्यक्रम के अध्यक्ष सी आर भगत,विशिष्ट अतिथि देवराज यादव, खण्ड संघचालक इन्दर हेडा, शंकर यादव , गोविन्द यादव, उदय शर्मा,अशोक चौहान,बिहारी नायक, राहुल कश्यप, राजकुमार चौहान, संतु राम, बीर सिंह, रामकृत नायक,अरुण महन्ती,गोपाल यादव संजय कुमार बंग,श्रीमती अनिता सिंह श्रीमती शोभा देवी बंग, उमेश यादव, श्रीमती संतोषी वन्दे,बालेश्वर यादव,शंकर यादव ,राहुल बंग, प्रताप सिंह, टिकेश्वर।यादव, शशि सिंह एंव सभी ग्रामवासी उपस्थित रहे ।
