चराईमारा स्कूल में पंचायत का ‘अचानक एक्शन’, स्कूल में नशे में धुत मिला प्रधान पाठक, आंगनबाड़ी सूनी और उप स्वास्थ्य केंद्र में रात की ड्यूटी गायब — गांव ने देखी सिस्टम की असली तस्वीर
चराईमारा में पंचायत का छापा, स्कूल में नशे में शिक्षक, सिस्टम में हड़कंप!
चार आंगनबाड़ी – एक कमरा – एक बच्चा,
उप स्वास्थ्य केंद्र में रात को ताला, ग्रामीण बोले – इलाज भगवान भरोसे
सरपंच का एक फोन और हिल गया सिस्टम, अधिकारी पहुंचे दौड़ते हुए
जशपुर/नारायणपुर 12 जनवरी 2026
कहते हैं जब पंचायत जागती है, तब व्यवस्था हिलती है… और चराईमारा में आज कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। ग्राम पंचायत रानीकोम्बो के अंतर्गत आने वाले चराईमारा गांव में पंचायत प्रतिनिधियों ने जैसे ही औचक निरीक्षण किया, शासकीय व्यवस्थाओं की परत-दर-परत पोल खुलती चली गई।
लगातार मिल रही ग्रामीणों की शिकायतों से तंग आकर सरपंच श्री छक्कन राम भगत, उपसरपंच श्री लीलाम्बर यादव, पंचगण एवं ग्रामीणों की टीम ने आज आंगनबाड़ी, प्राथमिक शाला और उप स्वास्थ्य केंद्र का अचानक निरीक्षण किया। यह निरीक्षण गांव के लिए किसी जागृति अभियान से कम नहीं रहा।
स्कूल पहुंचते ही ‘नशे में मिला प्रधान पाठक
जैसे ही पंचायत टीम प्राथमिक शाला पहुंची, वहां का दृश्य देखकर सब सन्न रह गए। विद्यालय के प्रधान पाठक शराब के नशे की हालत में स्कूल में मौजूद पाए गए। बच्चों की पढ़ाई जहां अनुशासन और प्रेरणा मांगती है, वहां शिक्षक खुद लड़खड़ाते कदमों से शिक्षा का मजाक बनाते नजर आए।
सरपंच ने बिना देर किए उच्च अधिकारी को फोन कर पूरे मामले की जानकारी दी। अधिकारी ने तुरंत संकुल प्रभारी और समन्वयक को जांच के लिए भेजा। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने भी शिक्षक को नशे की हालत में पाया और पंचनामा तैयार कर मामले की रिपोर्ट उच्च स्तर पर भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
ग्रामीणों ने गुस्से में कहा —
“जब गुरु ही शराबी होगा, तो शिष्य कैसे संस्कारी बनेंगे?”
अब शिक्षक पर विभागीय कार्रवाई की तलवार लटकती नजर आ रही है।
आंगनबाड़ी में अव्यवस्था चरम पर, एक भवन में चार केंद्र, उपस्थिति शून्य के करीब
इसके बाद पंचायत टीम आंगनबाड़ी केंद्र पहुंची। यहां हालात और भी चिंताजनक पाए गए। भवन की कमी के कारण एक ही आंगनबाड़ी भवन में चार आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे थे। निरीक्षण के समय केवल एक बच्चा उपस्थित मिला, जिससे बच्चों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
सरपंच एवं उपसरपंच ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को स्पष्ट निर्देश दिए कि बच्चों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। पंचायत प्रतिनिधियों ने आंगनबाड़ी भवन निर्माण की मांग को प्राथमिकता से आगे बढ़ाने की बात भी कही।
ग्रामीणों का कहना था कि जब आंगनबाड़ी ही सूनी रहेगी, तो बच्चों का पोषण और भविष्य दोनों ही अधर में लटक जाएंगे।

हाथी प्रभावित क्षेत्र में रात को स्वास्थ्य सेवाएं ठप
पंचायत टीम ने उप स्वास्थ्य केंद्र का भी निरीक्षण किया। ग्रामीणों ने बताया कि रात के समय यहां कोई नर्स ड्यूटी पर नहीं रहती, जिससे आपात स्थिति में मरीजों को नारायणपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाना पड़ता है। यह रास्ता हाथी प्रभावित जंगल क्षेत्र से होकर गुजरता है, जिससे ग्रामीणों को हमेशा जान का खतरा बना रहता है।
इस गंभीर विषय पर सरपंच ने जिला स्वास्थ्य अधिकारी से फोन पर चर्चा कर उप स्वास्थ्य केंद्र में रात की ड्यूटी तत्काल लगाने की मांग की। अधिकारियों ने इस विषय पर शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया।
बिना कारण नर्स को अटैच करने पर उठे सवाल
चराईमारा में पदस्थ एक नर्स को बिना किसी ठोस कारण के नारायणपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में अटैच किए जाने का मामला भी निरीक्षण में सामने आया। सरपंच ने जिला स्वास्थ्य अधिकारी से इस विषय में आपत्ति जताते हुए नर्स को वापस चराईमारा में पदस्थ करने की मांग की, ताकि ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। जिस पर सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन मिला।
ग्रामीण बोले — अब तो सुधार होना ही चाहिए
औचक निरीक्षण के बाद गांव में चर्चा का माहौल गर्म रहा। ग्रामीणों ने पंचायत की इस कार्रवाई को “सिस्टम की नींद तोड़ने वाला कदम” बताया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस तरह नियमित निरीक्षण होते रहें, तो चराईमारा की तस्वीर जरूर बदलेगी।
ग्रामीणों की मौजूदगी में हुआ निरीक्षण, पंचायत की सख्ती से बढ़ी उम्मीद
इस आकस्मिक निरीक्षण के दौरान चन्द्रकिशोर यादव, लखन यादव, चक्रधर सिंह, दिलेश्वर यादव, समीर यादव, सहदेव यादव, संजय यादव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने पंचायत प्रतिनिधियों की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यदि इसी तरह लगातार निरीक्षण होते रहें तो गांव की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था में निश्चित रूप से सुधार आएगा।
व्यवस्था सुधार की ओर पहला मजबूत कदम
चराईमारा में हुए इस औचक निरीक्षण ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पंचायत अब लापरवाही और अनियमितता पर चुप नहीं बैठेगी। शिक्षा, महिला एवं बाल विकास और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कर्मचारियों को अब जवाबदेह होना पड़ेगा। यह कार्रवाई न केवल चेतावनी है, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक मजबूत संदेश भी है कि सरकारी सेवाओं में अनुशासन और जिम्मेदारी अनिवार्य है।
सरपंच छक्कन राम भगत ने स्पष्ट शब्दों में कहा —
“शिक्षा, स्वास्थ्य और आंगनबाड़ी जैसी बुनियादी सेवाओं में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषी चाहे कोई भी हो, कार्रवाई तय है।”
सरपंच - उप सरपंच का दो टूक संदेश
