जब विभाग के लोग ही बन गए भक्षक तो कैसे होगी हरियाली,पर्यावरण संरक्षण बढ़ाने की बजाए पेड़ पर चलाई कुल्हाड़ी.....इसी तरह हरे-भरे पेड़ पर चलती रही कुल्हाड़ी तो मानव जीवन के लिए पड़ेगा भारी

फोटो को जूम कर के हरे निशान गोलाकार में देखें इलेक्ट्रॉनिक आरा मशीन से कटाई होते दिख रही है
नारायणपुर 20 नवम्बर 2025 : विभाग ही जब भक्षक बन जाए तो अंजाम क्या होगा, सोचा जा सकता है। नारायणपुर क्षेत्र में जिन सरकारी एजेंसियों के जिम्मे हरियाली बढ़ाने व पेड़-पौधों की रक्षा करने की जिम्मेदारी है, वही उसे एक झटके में नुकसान पहुंचाने से बाज नहीं आते। हाँ हम बात कर है बादलखोल अभ्यारण्य की जंहा एक ओर जंगल में पेड़ों को लगाकर हरियाली लाने के लिए वन विभाग से लेकर अन्य विभाग भी लगातार कार्य कर रहे हैं लेकिन इनकी कवायद को अगर कोई पलीता लगाता है तो वह उन्हीं के विभाग के लोग ही होते हैं। यहां वन विभाग ही पेड़ो के भक्षक बनकर हरयाली का सफाया कराने पर तुले हैं। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में आये दिन कटते हरे पेड़ इसके जीते-जागते प्रमाण भी हैं। प्रतिदिन हरे पेड़ों पर होते कुल्हाड़ी के प्रहार में कहीं न कहीं वन विभाग की भी मौन सहमति प्रतीत होती है।
नारायणपुर बादलखोल अभ्यारण्य रेन्ज कार्यलय के परिसर में एक रेस्ट हाउस स्थित जंहा लगे दशकों पुराने फलदार पेड़ है जिसे यंहा के निवासी अपने परिवार का अभिन्न अंग मानते है, मगर बुधवार की सुबह साढ़े 10 बजे दिन दहाड़े बिना ख़ौफ़ के विभाग के कुछ लोगों ने एक फलदार पेड़ को काट डाला। मगर रेंज ऑफिस के किसी भी जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारियों ने इस कृत्य के विरुद्ध रोकथाम की पहल नही की,इस संबंध में कलम की आवाज की टीम ने नारायणपुर सर्किल में पदस्त वनपाल को पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस संबंध में कुछ नही मालूम ओर न ही मैंने कोई अनुमति दी।एस डी ओ से इसके बारे में पूछने से बताया कि मैं विभाग के कार्यशाला में हु ओर इसकी जानकारी मुझे नही है, वन्ही डीएफओ सरगुजा श्री श्रीनिवास तैनेटी से पूछने पर जवाब दिया गया कि मुझे इस संबंध में आपके द्वारा जानकारी मिल रही है मैं पूछ कर बताता हूं पर उनके बाद उनका जवाब 24 घण्टे बीतने के बाद भी नही मिल पाया है जबकि पेड़ की कटाई का फोटो और वीडियो दोनों भेजा जा चुका है।
ज्ञात हो कि तीन माह पूर्व बादलखोल अभ्यारण नारायणपुर रेंज के साहीडाँड़ सर्किल में अज्ञात तस्करों द्वारा लाखो रुपये के बड़े बड़े साल के 12 वृक्ष काटे गए ,विभाग के द्वारा इसकी जांच भी अपने स्तर पर कराई जा चुकी है परन्तु तीन माह बीत जाने के बाद भी आज पर्यन्त तक इस मामले में सम्बंधित रेन्जर सहित अन्य कर्मचारियों की लाफ़रवाही सामने आने के वावजूद भी उनके ऊपर कोई निलंबन की कार्यवाही नही किया गया है। आज जब नारायणपुर रेस्ट हाउस का यह मामला सामने आया तो हर कोई कहने लगा जब जंगल के रक्षक ही भक्षक बन गए तो हरियाली कैसे आएगी ।
क्या होगी कोई जांच या मामले को ठंडे बस्ते में डाला जाएगा
एक तरफ जहाँ "एक पेड़ माँ के नाम" जैसे अभियानों से पेड़ लगाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वन विभाग के भीतर पेड़ों की कटाई होने पर हरियाली बनाए रखना मुश्किल ही नही नामुकिन हो जाता है। वृक्षारोपण अभियान और वन संरक्षण कानूनों की यंहा खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है। इनके ऊपर किसी तरह की कार्यवाही न होना यह अपने आप मे एक सवाल खड़ा होता है।यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि किसी भी निर्माण या विकास कार्य के लिए पेड़ काटे जाने से पहले उचित अनुमति ली जाती और काटे गए पेड़ों की जगह नए पेड़ लगाए जाते है।
दोषियों पर क्या होगी कोई कार्यवाही ?
बादलखोल अभ्यारण्य के कार्यालय परिसर रेस्ट हाउस के बगल में इलेक्ट्रॉनिक आरा मशीन से दशकों पुराने फलदार वृक्ष की बिना अनुमति से कटाई कर दी गई । अगर इस पेड़ से परिसर में बने रेस्ट हाउस को नुकसान था तो इसकी डगाल की छंटनी करनी थी न कि पूरा तना से काटना था । इस कटाई को लेकर उच्च अधिकारी मौन है,सर्किल दरोगा से पूछने पर कहना है कि हमने अनुमति नही दिया है आखिर अनुमति किसने दिया,इसकी जांच बहुत जरूरी है,जांच उपरांत जिसने भी अनुमति दिया उस पर क्या कोई कार्यवाही होगी? पेड़ की कटाई में प्रयोग में लाया गया इलेक्ट्रॉनिक आरा मशीन वन विभाग ने अब तक जप्त क्यों नही किया । सवाल तो खड़ा होना स्वाभाविक है। वन संसाधनों की सुरक्षा वन विभाग की प्राथमिकता है। ऐसे प्रकरणों पर त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए जाते है और दोषियों की पहचान कर उनके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाती है परन्तु यंहा तो 24 घण्टे के बाद भी कोई कार्यवाही होते दिख नही रही है
