छठ पूजा का आज तीसरा दिन है, व्रतियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर सुख-शांति की कामना की
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छठ पूजा का आज तीसरा दिन है, व्रतियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर सुख-शांति की कामना की


जशपुर/नारायणपुर 27 अक्टूबर 25 : सनातन धर्म में छठ पूजा का बहुत महत्व है। यह पर्व सूर्य देव और छठी मैया की पूजा और आराधना का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि जो भी भक्त इस व्रत को श्रद्धा और शुद्धता के साथ करते हैं, तो उन पर सूर्य देव की विशेष कृपा बरसती है।

सूर्योपासना का महान पर्व छठ का आज तीसरा दिन है। आज शाम नारायणपुर के कपरी नदी में व्रतियों ने अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया और सुख-शांति की कामना की। छठ पूजा के चौथे दिन यानी कल उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही छठ पूजा संपन्न हो जाएगी।

गांव में छठ पूजा पूरी आस्था एवं विश्वास के कपरी नदी की तट में किया गया। सोमवार की शाम को बड़ी संख्या में आस्थावान श्रद्धालु नदी पुल के नीचे जुटे।  श्रद्धालुओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर धूमधाम से पूजा किया। छठ व्रती महिलाएं 36 घंटे व्रत कर माता के व्रत का पालन की, शाम के समय डूबते सूर्य को अर्घ्य दी l व्रतियों ने बताया कि चार दिवसीय छठ पूजा की शुरुआत नहाय खाय के साथ हुई ,इसके बाद व्रती महिलाओं ने खरना किया ,तत्पश्चात छठी मैया और भगवान सूर्य को छठ पर्व के तीसरे दिन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दी। अर्घ्य के लिए घरों से नंगे पांव पूजन स्थल तक पहुंची। भगवान सूर्य को नमन कर अर्घ्य देने के लिए बडी संख्या में श्रद्धालु तालाब में कतारबद्ध होकर जल में खड़े होकर भगवान सूर्य को जल अर्पित कर छठ मइया का पूजन कर व्रतियों ने संतान की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य का वरदान मांगा। उन्होंने छठ मइया की महिमा का गुणगान करते हुए लोक आस्था का महापर्व उल्लास के साथ मनाया। व्रतियों ने घाट पर छठ मइया के मंगलगीत गाई। सुहागिनों ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर पति की दीर्घायु की कामना करते हुए सुख संवृद्धि की कामना की l

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