21 साल से जारी परंपरा, हर साल बदलती पंडाल की सजावट, 22 सितम्बर से शुरू होगी नवरात्रि......इस वर्ष नारायणपुर में देखें मन्दिर का भव्य नजारा
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21 साल से जारी परंपरा, हर साल बदलती पंडाल की सजावट, 22 सितम्बर से शुरू होगी नवरात्रि......इस वर्ष नारायणपुर में देखें मन्दिर का भव्य नजारा

नारायणपुर 20 सितम्बर 2025 : प्रतिवर्ष की तरह इस साल भी नारायणपुर में दुर्गा पूजा पंडाल बनाने और प्रतिमाएं स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस वर्ष 22 सितंबर से नवरात्रि का पावन पर्व शुरू होने जा रहा है। नवरात्रि का यह पावन पर्व इस बार नौ दिनों का होगा, जिसके कारण इसे विशेष माना जा रहा है। 22 सितम्बर दिन सोमवार  सोमवार को अभिजीत मुहूर्त में पुरोहितों के मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा, कलश स्थापना के बाद आदि शक्ति मां जगदम्बा का पूजन अर्चन शुरू होगा।

नारायणपुर में दुर्गा पूजा की तैयारियां शुरू हो गई हैं। समिति सहित गांवों के लोग पंडाल सजाने के लिए साफ सफाई में जुट गए हैं। पांडाल तैयार होने पर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।दुर्गा पूजा के दौरान 9 दिनों तक पूरे गांव में भक्तिमय माहौल रहता है। सुबह-शाम मां दुर्गा, मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की आरती और भजन होते हैं। इस दौरान बाल कलाकारों द्वारा बीच बीच मे सांस्कृतिक कार्यक्रम भी किया जाता हैं।

    यंहा पिछले 21 वर्षों से दुर्गा पूजा का पंडाल सजाया जा रहा है। यह आयोजन ग्रामवासियों के सहयोग से संपन्न होता है। कार्यक्रम के अंत में मां दुर्गा का भंडारा होता है। क्षेत्र के लोग बड़ी संख्या में भंडारे में शामिल होकर प्रसाद ग्रहण करते हैं।भक्त गण बताते हैं कि यहां केवल पूजा ही नहीं, बल्कि कला, आस्था और एकता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

रावण निर्माण की तैयारी में जुटा पूजा समिति :

नारायणपुर के कन्या शाला मैदान पर रावण दहन कार्यक्रम प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता हैं।पूजा समिति सदस्यों के द्वारा रावण दहन की तैयारी को लेकर सभी प्रकार के निर्णय हो चुके हैं। 2 अक्टूबर को भव्य विसर्जन यात्रा के साथ शानदार आतिश बाजी  के साथ रावण दहन का कार्यक्रम करने का निर्णय लिया गया।सुरक्षा को लेकर विशेष इंतजाम किए जाएंगे। जिससे कि रावण दहन कार्यक्रम के दौरान किसी प्रकार की कोई दुर्घटना न हो। लोग सुरक्षित और निर्भय होकर रावण दहन कार्यक्रम देख सके। रावण दहन का उद्देश्य है कि शक्तिशाली राजा भी अगर असत्य और बुराई के मार्ग पर चलना शुरू कर दे तो उसका अंत निश्चित है। रावण दहन की शुरूआत  झांकी निकाल कर भगवान श्री राम का  अग्नि वाण रावण के ऊपर चलाया जाता है। इसके साथ ही प्रतिमा धू-धू कर जलने लगती है। चारो और जय श्री राम के नारे लगना शुरू हो जाता है।

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