जागरूकता और जीवनशैली में सुधार की आवश्यकता -बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम जी-जनसेवा अभेद आश्रम नारायणपुर में महाशिवरात्रि पूजन एवं अघोरेश्वर महाविभूति स्थल का वार्षिकोत्सव सोल्लास संपन्न
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जागरूकता और जीवनशैली में सुधार की आवश्यकता -बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम जी-जनसेवा अभेद आश्रम नारायणपुर में महाशिवरात्रि पूजन एवं अघोरेश्वर महाविभूति स्थल का वार्षिकोत्सव सोल्लास संपन्न


नारायणपुर :- गुरुवार, 27 फरवरी को, जनसेवा अभेद आश्रम में महाशिवरात्रि पूजन और अघोरेश्वर महाप्रभु के महाविभूति स्थल पर आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम के दूसरे दिन, पूज्यपाद बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम जी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम हमारे जीवन में जागरूकता और सुधार लाने के लिए होते हैं। उन्होंने बताया कि हम जिस उद्देश्य से यहाँ आते हैं, वह शक्ति को प्राप्त करना है और हमारे कार्य, विचार और विश्वास में सच्चाई और सद्गुण होना चाहिए।
बाबा जी ने आगे कहा कि हम जो भी अच्छे कार्य करते हैं, उनका प्रभाव हमारे मानसिकता पर पड़ता है और हमारी मानसिकता को शुद्ध करने से हम ईश्वरत्व को प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हम स्वयं अपने कर्मों के फल भुगतते हैं और हमारी मानसिकता के अनुसार हमारे जीवन में बदलाव आता है। उन्होंने शिष्यों से कहा कि वे एकजुट होकर, अच्छे कार्यों को बढ़ावा दें और विश्वास और श्रद्धा के साथ ईश्वर की पूजा करें।
इसके अलावा, बाबा जी ने  बताया कि जीवन में प्रेम, सौहार्द और दया का महत्व है और हमें अपने आचार-व्यवहार को समय और परिस्थितियों के अनुसार संतुलित करना चाहिए। अंत में, उन्होंने अपने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे इस पर ध्यान दें और अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करें।
गोष्ठी के अन्य वक्ताओं में समूह शाखा बगीचा के उपाध्यक्ष श्री शंकर गुप्ता जी, श्री अर्जुन यादव जी, श्री विपिन सीना,वरिष्ठ पत्रकार श्री प्रबल प्रताप सिंह जी, समूह शाखा जमशेदपुर के श्री इन्द्रजीत सिंह उपस्थित रहे। गोष्ठी में धान्यवाद ज्ञापन श्री गणेश यादव जी ने तथा गोष्ठी का सञ्चालन श्री मानवेन्द्र प्रताप सिंह जी ने किया।
गोष्ठी का शुभारम्भ शिवम नायक, पल्लव, अदिति, जयचंदऔर साकेत द्वारा प्रस्तुत गुरु पदुकापंचकम के पथ से हुआ। इससे पूर्व अखंड संकीर्तन का समापन पूज्यपाद बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम जी द्वारा परमपूज्य अघोरेश्वर महाप्रभु की समाधि स्थल में आरती पूजन के साथ हुआ। इसके पश्चात कर्नल रामचन्द्र नाथ शाहदेव जी द्वारा गुरु समर्पित पद का गायन किया गया उसके उपरांत श्री उदय नारायण पाण्डेय जी द्वारा सफल्योनी का पाठ किया गया।
       

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