रेंज की बड़ी लापरवाही उजागर: बादलखोल अभ्यारण्य के जंगल में रातोंरात काट दिए गए साल प्रजाति के 8 पुराने पेड़....तस्करों को पकड़ना विभाग के लिए बड़ी चुनौती...क्या दोषियों पर कोई कार्रवाई करेगा विभाग...जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर!
ताजा खबरें

बड़ी खबर

रेंज की बड़ी लापरवाही उजागर: बादलखोल अभ्यारण्य के जंगल में रातोंरात काट दिए गए साल प्रजाति के 8 पुराने पेड़....तस्करों को पकड़ना विभाग के लिए बड़ी चुनौती...क्या दोषियों पर कोई कार्रवाई करेगा विभाग...जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर!

बादलखोल अभयारण्य में पेड़ों की चोरी 50 साल से अधिक पुराने साल के 8 पेड़ काट दिए गए

आरोपियों का नहीं मिला कोई सुराग, पेड़ों को काटने वाली चेनसाँ मशीन का किया उपयोग

जशपुर / नारायणपुर 16 अगस्त 2025 :-बादलखोल अभ्यारण्य वन क्षेत्र में इन दिनों वन माफियाओ ने आतंक मंचा रखा है या यह कहे की वन विभाग के अधिकारियो या कर्मचारियों की लाफ़रवाही के चलते यंहा के हरे-भरे पेड़ों के अवैध कटान हो रहा है, क्योंकि इस तरह के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। यंहा छोटे बड़े पेड़ पौधे के टूंट देखने को मिलते रहें है और अब साहीडाँड़ बिट क्षेत्र के जंगल में बीती रात फिर से साल के पेड़ों पर आरी चला दी गयी।

जानकारी के मुताबिक, जैसे ही सर्किल अधिकारी को सूचना मिली, वह मौके पर पहुंचे और तत्काल एक फॉरेस्ट गार्ड को भी बुलाया। कटे हुए पेड़ों को पेवार कर डिपो भेजने की तैयारी जुट गए है, ताकि मीडिया को इनकी भनक न लगे। परन्तु इस घटना ने वन विभाग के रेन्ज के जिम्मेदार अधिकारी की कार्यशैली और सतर्कता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

ज्ञात हो कि जिले के एकमात्र अभयारण्य बादलखोल में पुराने विकसित पेड़ों की चोरी धड़ल्ले से हो रही है। 13 अगस्त की रात को साहीडांड़ बीट में आरा मशीन का उपयोग कर करीब 50 साल से अधिक पुराने 8 पेड़ काट दिए गए हैं। पेड़ों को गिराने के क्रम में करीब 5 अर्धविकसित पेड़ भी दब कर धाराशायी हो गए हैं।

13 अगस्त को विशालकाय आठ पेड़ जो काटे गए हैं, उसकी सूचना ग्रामीणों के माध्यम से अभयारण्य अमले को मिली। 14 अगस्त को चुपचाप अभयारण्य के कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर कटे हुए पेड़ों की जब्ती बनाई और आनन-फानन में पेड़ों को डीपो भेजने की तैयारी करने लगे। 15 अगस्त की तैयारी की वजह से जब डीपो भेजने की व्यवस्था नहीं हो पाई तो कटे हुए पेड़ यहीं पड़े रह गए। रिपोर्टर को जब इसकी सूचना मिली तो मौके पर पहुंचे। यहां उपस्थित अभ्यारण्य के रेंजर से जब हमने सवाल पूछा तो वह अपनी जिम्मेदारी से भागते हुए इस संबंध में  उन्होंने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। बता दें कि अभयारण्य जंगल के दुश्मनों का साफ्ट टारगेट बन चुका है।

बादलखोल अभ्यारण्य में वन घनत्व तेजी से कम हो रहा है। अभ्यारण्य के कई इलाके ऐसे हैं, जहां बीस से पच्चीस साल पहले इतने घने जंगल थे, कि दोपहर के वक्त भी सूरज की किरणें धरती पर नहीं पड़ती थी। पर अब पूरे अभ्यारण्य में ऐसा एक भी इलाका नहीं बचा है जहां इतने घने जंगल हों। इसके जगहों पर जंगल में पेड़ इतने कम हो चुके हैं कि आसानी से 500 मीटर से अधिक दूरी तक की चीजें नजर आ जाती है।

स्थानीयों ने कहा- बाहरी गिरोह होने की आशंका

स्थानीय लोगों का कहना है कि स्थानीय ग्रामीण भोजन इंधन के लिए लकड़ियां काटते हैं। इतने बड़े पेड़ों को काटने की हिम्मत स्थानीय लोग नहीं करेंगे। इन पेड़ों को काटने के लिए चेनसों मशीन का उपयोग किया गया है। इसलिए यह प्रतीत होता है कि इसमें किसी बाहरी तत्व का हाथ है। रेंज अधिकारी की लाफ़रवाही के कारण यह संभव हो रहा है।

तस्करों पर कार्रवाई नहीं की जा रही

लंबे समय से अभयारण्य में बीच बीच मे इस तरह की गतिविधियां जारी है। इधर अभयारण्य अमले द्वारा ना तो अवैध कटाई पर कोई कार्रवाई की जा रही है और न ही तस्करों तक पहुंच पा रही है, बड़ी बटनाओं के सामने आने के बाद कोई विशेष कार्रवाई नही की जाती है। यहां पेड़ों की बेतहाशा कटाई हो रही है। बहुत कम बार विभाग को कटे हुए पेड़ जब्त होते हैं। अक्सर लकड़ी तस्करी करने वाले बेशकीमती पेड़ों को काटकर ले जाते हैं। जिसे लेकर ना तो कोई प्रकरण बनाया जाता है और ना ही कोई जांच होती है।


गश्ती वाहन का  उपयोग सिर्फ एक के हाथों में

अभ्यारण्य प्रशासन ने अभ्यारण्य क्षेत्र में गश्ती के लिए वाहन दिया है। पर इस वाहन का उपयोग सिर्फ एक  अधिकारी कर रहे हैं। अभ्यारण्य कर्मचारियों ने बताया कि कभी भी गश्ती के लिए वाहन ले जाने को नहीं बोला जाता हैं। बरसात में भी बाइक में गश्ती करने को मजबूर हैं। जो शासकीय वाहन मिला है, उसका उपयोग रेंज  अधिकारी स्वयं करते हैं। इस संबंध में जब हमने रेंजर से बातचीत करनी चाही तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

          अब देखना यह है कि वन विभाग के उच्च अधिकारी इस मामले की गहराई से जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेंगे या फिर इसे भी बाकी मामलों की तरह फाइलों में दबा दिया जाएगा।
       प्राकृतिक संसाधनों की इस खुली लूट पर रोक लगाने के लिए ज़मीनी स्तर पर सक्रिय निगरानी की सख्त ज़रूरत है। वरना बादलखोल अभ्यारण्य बचे हुए हरित क्षेत्र जल्द ही बंजर में तब्दील हो सकते हैं। हमारी इस खबर पर वन विभाग के उच्चधिकारी संज्ञान लेकर अधिकारियो की मॉनिटरिंग जरूर कराये! अन्यथा आने वाले समय मे जंगल को बचा पाना मुश्किल हो जाएगा।

13 अगस्त की रात को अज्ञात तस्करों द्वारा 8 पेड़ काटे गए और साथ ही भारी पेड़ के गिरने से 5 से 6 पेड़ टूट गए है कटे हुए पेड़ों को बोंगी कर डिपो भेजने की तैयारी कर रहे है।
सुरेन्द्र प्रधान - डिप्टी रेंजर-बादलखोल अभ्यारण्य

पेड़ काटने वालों की पतासाजी की जा रही

पेड़ काटे जाने की सूचना स्टाफ से मिली थी। किसने पेड़ काटे हैं, इसकी पतासाजी के लिए गुप्तचर लगाए गए हैं। कटे हुए पेड़ों को डीपो भेजने के निर्देश दिए गए हैं।गश्ती वाहन की शिकायत मिलने के बाद वाहन को अभ्यारण्य के सर्किल साहीडांड़ में रखने के निर्देश रेंजर को दिए हैं।
-बीबी केरकेट्टा - अधीक्षक,
बादलखोल अभ्यारण्य

देखें वीडियो :- किस तरह से पेड़ों को काटा गया और क्या कहते है ग्रामीण ओर विभाग के कर्मचारी

Leave Your Comment

Click to reload image