*नदी नाले पर पुल नही होने से गावों को टापू बनते सुना होगा....यदि सड़क की वजह से टापू बनते नही सुना है तो अब जान लीजिए....बादलखोल अभ्यारण्य में बसे यह तीन पंचयात.....पढ़ें पूरी खबर विस्तार से:-*
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*नदी नाले पर पुल नही होने से गावों को टापू बनते सुना होगा....यदि सड़क की वजह से टापू बनते नही सुना है तो अब जान लीजिए....बादलखोल अभ्यारण्य में बसे यह तीन पंचयात.....पढ़ें पूरी खबर विस्तार से:-*

नारायणपुर : नदी पर पुल नहीं होने के कारण गांवों को टापू बनते सुना होगा। लेकिन क्या कभी यह सुना है कि सड़क के कारण गांव बरसात में टापू बन जाता है। यदि नहीं सुना है तो जान लिजिए कि बगीचा ब्लाक में स्थित बुटूंगा,कलिया,गायलुंगा ग्राम पंचयात को। इन तीनो पंचयात की बड़ी समस्या सड़क का जर्जर होना है। स्टेट हाइवे पर स्थित साहीडाँड़ से अगर इन तीनो पंचयात में जाना है तो दोनों सड़कें पर नाला है, पर पुल नही है। आवागमन भी होता है। लेकिन नदी को पार करने के पहले और बाद कीचड़ भरी सड़क को पार करना किसी चुनौती से कम नहीं होता है। इस सड़क पर  बड़े-बड़े गड्ढे बने हुए हैं।  कच्ची सड़क होने के कारण यह पूरा रास्ता कीचड़ में तब्दील हो जाता है। आने-जाने वाले बाइक या आटो कीचड़ में फंस कर कई बार पलट चुके हैं। इस रास्ते से गुजरना खतरा मोल लेने के बराबर है।  बरसात में यदि गांव में कोई बीमार पड़ता है तो यंहा निवासरत ग्रामीणों को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बरसात में साइकिल से भी चलना मुश्किल भरा होता है। इस गांव के लोगों को कच्ची सड़क होने से काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।  बादलखोल अभ्यारण्य के बीच बसे यह तीनों पंचायत  चारो ओर जंगल और पहाड़ घिरा हुआ है।जिला मुख्यालय जाने के लिए दो ही रास्ता है वह भी जर्जर है। ऐसे में लोगों का जीवन टापू जैसा हो जाता है। ऐसा भी नहीं है कि ग्रामीणों ने सड़क के लिए गिड़गिड़ाए नहीं हो। लेकिन नतीजा कुछ भी नहीं।

ग्रामीणों की पीड़ा ऐसा क्या गुनाह हुआ जो .....

सरपंच हीरा लाल प्रधान,उप सरपंच शिव यादव सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्रवासीयों ने ऐसा क्या गुनाह कर दिया है कि न तो संबधित विभाग सड़क बनवाने में रुचि रखता है और न ही क्षेत्र के जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान देते है।बादलखोल अभ्यारण्य अधिकारी और कर्मचारियों की प्रतिवर्ष की लाफ़रवाही के कारण बरसात आने पर हमारी तीनो पंचयात के हजारों ग्रामीणों की परेशानी बढ़ जाती है। डर लगा रहता है कि गांव में कोई इन्शान बीमार न पड़ जाए। अगर कोई बीमार पड़ जाता है तो अस्पताल तक पहुचाने में बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

ज्ञात है कि यह तीन पंचायत के ग्रामीण बरसों से कच्ची सड़क पर चलने को विवश हैं। खासकर बरसात के मौसम में इस सड़क की बदहाली चरम पर होती है। बरसात के मौसम में गांव से मुख्य सड़क पर आने-जाने में ग्रामीणों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस बदहाल सड़क की सुध नहीं ली है। सड़क के बदहाल होने के कारण क्षेत्र की बड़ी आबादी पूरी तरह प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को यंहा के ग्रामीणों को तकलीफ जानने की भी उन्हें फुर्सत नहीं मिलती है। ग्रामीण जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का दंभ भरने को विवश हैं। उन्होंने जिला प्रशासन का इस ओर ध्यान आकृष्ट कराया है और साहीडाँड़ से बुटूंगा एवं बच्छरांव से गायलुंगा गांव को जोड़ने वाली बदहाल सड़क की व्यवस्था सुदृढ़ करने की मांग की है। ग्रामीणों ने कहा कि हर दिन कीचड़ भरी सड़कों से गुजरना पड़ रहा है, लेकिन बादलखोल अभ्यारण्य के अधिकारियों ने अब तक इन सड़को को मरम्मत कराना मुनासिब नही समझा है सड़कें मरम्मत नहीं करने से स्थानीय छात्र छात्राओं को  स्कूल जाने में कठिनाइयां का सामना करना पड़ रहा हैं। और साथ ही लोगों के  दैनिक जीवन और कार्यों पर प्रभाव पड़ रहा है

ग्रामीणों ने बताया कि गांव में सड़क नहीं होने से उनके गांव को पिछड़ा गांव कहकर रिश्तेदार भी यहां आने से कतराते हैं। यहां तक कि बच्चे इस गड्ढे वाली सड़क से ही प्रतिदिन स्कूल जाते हैं। और कई बार गिरकर चोटिल हो चुके है

बादलखोल अभ्यारण्य की यह दोनों सड़के जगह जगह इतने ज्यादा गहरे और चौड़े गड्ढे हो चुके हैं और उनमें बारिश का पानी भरे होने से सड़क तालाब का रूप ले चुकी हैं प्रशासन को क्षेत्र की जनता की समस्या को समझते हुए सड़क मरम्मत का कार्य बादलखोल अभ्यारण्य को निर्देशित करे ताकि लोगो की आवागमन की समस्या से निजात मिल सके।

सड़क को लेकर ग्रामीणों और गेम रेन्जर में हो चुकी है नोक झोंक

बुटूंगा, कलिया,गायलुंगा पंचयात पहुचने के लिए साहीडाँड़  और बच्छरांव से बादलखोल अभ्यारण्य की  सड़क से होकर गुजरना होता है,यह सड़क पूरी तरह से कच्ची सड़क है, इसे प्रधानमंत्री सड़क से जोड़ने का सभी ने प्रयास किया परन्तु विभाग से कई वर्षों के बाद भी आज पर्यंत तक एनओसी नही दिया गया। इस सड़क की मरम्मत को लेकर तीनो पंचयात के ग्रामीण सुशासन तिहार के लगे साहीडाँड़ समाधान शिविर में गेम रेन्जर नारायणपुर से निवेदन किया गया परन्तु उनके द्वारा सटीक जवाब न देने से ग्रामीणों रेन्जर के बीच जमकर नोक झोंक हुई,जनपद सीईओ के पहल से मामला को शांत कराया गया था, ओर जल्द सड़क में बने बड़े बड़े गड्ढे को मरम्मत करने की सहमति बनी थी परन्तु डेढ़ माह   बीतने के वावजूद भी मरम्मत कार्य नही किया गया।

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