विद्यालय की पोषण वाटिका बनी बच्चों की खुशियों और सीख का स्रोत,पोषण वाटिका से उत्पादित आलू घर ले जाने मिले तो बच्चों के चेहरे खिल उठे
कुनकुरी/नारायणपुर 05 फरवरी 2026 : । प्राथमिक विद्यालय डीपाटोली, कुनकुरी विकासखंड इन दिनों क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह विद्यालय न केवल बच्चों को किताबी शिक्षा दे रहा है, बल्कि उन्हें खेती और पर्यावरण से जुड़ा व्यवहारिक ज्ञान भी प्रदान कर रहा है। विद्यालय परिसर में विकसित की गई पोषण वाटिका हमेशा हरी-भरी रहती है, जिससे बच्चों को मिड डे मील में प्रतिदिन ताजी और पौष्टिक सब्जियां उपलब्ध कराई जा रही हैं।
विद्यालय में पोषण वाटिका का निर्माण एवं रख-रखाव प्रधान पाठक श्री लव कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन में शिक्षक श्री महेश तिर्की, इको क्लब के सदस्यों एवं विद्यालय के अन्य कर्मचारियों के सहयोग से किया जाता है। प्रत्येक मौसम के अनुसार यहां सब्जियों का उत्पादन किया जाता है। शरद ऋतु में इस बार पोषण वाटिका में विभिन्न सब्जियों के साथ-साथ आलू की खेती भी की गई थी।
विद्यालय की पोषण वाटिका से इस बार लगभग ढाई किंवटल आलू का उत्पादन हुआ है। उत्पादित आलू का अधिकांश हिस्सा विद्यालय के मिड डे मील के लिए सुरक्षित रखा गया है, जिससे बच्चों को पौष्टिक भोजन मिल सके। वहीं शेष बचे आलू को प्रति बच्चे 2.5 किलोग्राम की दर से वितरण किया गया। आलू पाकर बच्चों की खुशी देखते ही बन रही थी, बच्चे इसे उपहार स्वरूप पाकर बेहद उत्साहित नजर आए।
इस अवसर पर बच्चों को यह भी समझाया गया कि वे घर जाकर अपने पालकों से खेती-किसानी से होने वाले लाभों के बारे में चर्चा करें और कृषि कार्य के महत्व को समझें। विद्यालय प्रबंधन का उद्देश्य बच्चों को छोटी उम्र से ही आत्मनिर्भरता, श्रम के महत्व और कृषि से जुड़ाव का संदेश देना है।
प्रधान पाठक श्री लव कुमार गुप्ता ने बताया कि पोषण वाटिका का उपयोग केवल मिड डे मील तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे शैक्षणिक गतिविधियों से भी जोड़ा गया है। बच्चे यहां गणितीय संक्रियाएं, लाभ-हानि, मापन, अनुमान लगाना, आकृतियों की पहचान जैसे विषयों को प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से सीखते हैं। इसके साथ ही पर्यावरण विषय के अंतर्गत जड़, पत्ती, मिट्टी के प्रकार, उन्नत खेती एवं फसलों की जानकारी भी बच्चों को व्यवहारिक रूप से दी जा रही है।
उन्होंने बताया कि इस पहल से बच्चों में सीखने की रुचि बढ़ी है और वे पढ़ाई को बोझ नहीं बल्कि अनुभव के रूप में लेने लगे हैं। विद्यालय की यह पहल अन्य स्कूलों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रही है।
पोषण वाटिका से मिले आलू को घर ले जाते बच्चों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी। अभिभावकों ने भी विद्यालय की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे बच्चों में पढ़ाई के साथ-साथ जीवनोपयोगी ज्ञान भी विकसित हो रहा है।
