गौ तस्करी का नया खेल, किसानों के भेष में मवेशी पार करा रहे तस्कर,जंगल, नदी और सुनसान रास्तों से झारखंड पहुंचाए जा रहे  मवेशी, नारायणपुर पुलिस की चुप्पी पर उठे सवाल
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गौ तस्करी का नया खेल, किसानों के भेष में मवेशी पार करा रहे तस्कर,जंगल, नदी और सुनसान रास्तों से झारखंड पहुंचाए जा रहे  मवेशी, नारायणपुर पुलिस की चुप्पी पर उठे सवाल

 

जशपुर/नारायणपुर 11 जनवरी2026
नारायणपुर क्षेत्र में गौ तस्करी का एक बेहद चौंकाने वाला और संगठित तरीका सामने आया है, जिसने पुलिस और प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गौ तस्कर अब खुले तौर पर नहीं बल्कि किसानों के भेष में, दिन दहाड़े मवेशियों को चराने के बहाने छोटे-छोटे समूहों में झारखंड सीमा की ओर हांक रहे हैं और बाद में उन्हें एक स्थान पर एकत्र कर राज्य सीमा पार करा रहे हैं।

ग्रामीणों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, तस्कर मजदूरी पर स्थानीय लोगों को लगाकर दो से चार मवेशियों को अलग-अलग समय पर रवाना करते हैं। हर आधे घंटे में नए लोग उतनी ही संख्या में मवेशी लेकर निकलते हैं। यह प्रक्रिया लगातार कई घंटों तक चलती रहती है। लगभग 10 से 15 किलोमीटर दूर किसी सुनसान इलाके में जब 20 से 25 मवेशी इकट्ठा हो जाते हैं, तब उन्हें एक साथ जंगल और नदी किनारे के रास्तों से झारखंड की ओर रवाना कर दिया जाता है।

संगठित नेटवर्क, तय रूट और समयबद्ध योजना

ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क पूरी योजना के साथ संचालित किया जा रहा है। तस्करों ने अपने लिए ऐसे मार्ग चुन रखे हैं, जहां पुलिस की आवाजाही बेहद कम रहती है। एक ओर बादलखोल अभ्यारण्य के घने जंगलों के रास्ते बच्छरांव, झरगांव, अलोरी और मनोरा होते हुए मवेशियों को झारखंड पहुंचाया जाता है। दूसरी ओर रानीकोम्बो, बनकोम्बो, ईब नदी के किनारे-किनारे चलते हुए बेलजोरा नदी पार कर बेलटोली, घाघरा और मनोरा होते हुए तस्करी की जा रही है।इन मार्गों पर जंगल, पहाड़ी और नदी होने के कारण न तो वाहनों की जरूरत पड़ती है और न ही आसानी से पुलिस की नजर पहुंच पाती है। तस्कर मवेशियों को पैदल हांकते हुए  सीमा पार करवा देते हैं।

चरवाहों की तरह दिखते हैं तस्कर

ग्रामीणों ने बताया कि तस्कर साधारण कपड़ों में किसानों और चरवाहों की तरह दिखाई देते हैं, जिससे किसी को शक भी नहीं होता। देखने में ऐसा लगता है मानो लोग अपने मवेशियों को चराने ले जा रहे हों, लेकिन हकीकत में वे एक बड़े तस्करी नेटवर्क का हिस्सा होते हैं।

स्थानीय किसानों को हो रहा भारी नुकसान

गौ तस्करी के कारण स्थानीय किसानों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई ग्रामीणों का कहना है कि उनके मवेशी रात के समय गायब हो जाते हैं और बाद में उनके झारखंड ले जाए जाने की जानकारी मिलती है। गरीब किसान, जिनकी खेती और आजीविका मवेशियों पर निर्भर है, उनके लिए यह स्थिति बेहद पीड़ादायक बनती जा रही है।

       ग्रामीणों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि इतनी बड़ी मात्रा में तस्करी होने के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई। ग्रामीणों का सवाल है कि जब रोजाना जंगल और नदी मार्ग से मवेशी पार कराए जा रहे हैं, तो क्या पुलिस को इसकी भनक नहीं है? और यदि जानकारी है, तो फिर तस्करों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

ग्रामीणों की मांग – हो सख्त कार्रवाई

क्षेत्र के ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गौ तस्करी में लिप्त पूरे गिरोह को चिन्हित कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।  रात्री गश्त बढ़ाई जाए और जंगल व नदी मार्गों पर विशेष निगरानी दल तैनात किए जाएं। यदि समय रहते तस्करों पर नकेल नहीं कसी गई, तो यह अवैध कारोबार और अधिक फैल जाएगा ।

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