सेवा, समर्पण और संस्कारों की स्वर्णिम यात्रा को मिला सम्मान : गेम रेंज नारायणपुर में गरिमामयी आयोजन,उप वन क्षेत्रपाल महेन्द्र कुमार कुशवाहा को बादलखोल अभ्यारण्य के अधीक्षक सहित समस्त वनकर्मियों ने दी भावभीनी विदाई

नारायणपुर, 09 जनवरी 2026।
गेमरेंज नारायणपुर स्थित वन कैंपस में उपवनक्षेत्रपाल श्री महेन्द्र कुमार कुशवाहा जी के सेवानिवृत्त होने के उपलक्ष्य में एक भव्य, भावनात्मक एवं गरिमामयी सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम उनके 31 दिसंबर 2025 को शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त होने के अवसर पर वन विभाग परिवार द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें बादलखोल अभ्यारण्य के अधीक्षक, गेमरेंज नारायणपुर के अधिकारी, कर्मचारी एवं चौकीदारों की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।
“सेवा केवल दायित्व नहीं, संस्कार है” — अधीक्षक बादलखोल अभ्यारण्य
समारोह को संबोधित करते हुए बादलखोल अभ्यारण्य के अधीक्षक ने कहा कि श्री महेन्द्र कुमार कुशवाहा जी का कार्यकाल वन विभाग के इतिहास में सदैव स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा। उन्होंने कहा— “आज हम एक ऐसे अधिकारी को विदाई दे रहे हैं, जिन्होंने अपने कर्तव्य को केवल नौकरी नहीं, बल्कि सेवा, संस्कार और समर्पण का माध्यम बनाया। उनकी कार्यशैली आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगी।उन्होंने आगे कहा कि श्री कुशवाहा जी ने अनुशासन, पारदर्शिता और मानवीय संवेदनाओं के साथ कार्य करते हुए विभाग में सकारात्मक कार्यसंस्कृति स्थापित की।
सरलता, मृदुभाषिता और नेतृत्व का अद्भुत संगम
महेन्द्र कुमार कुशवाहा जी केवल एक कुशल उपवनक्षेत्रपाल ही नहीं, बल्कि एक प्रेरणास्रोत व्यक्तित्व के रूप में जाने जाते रहे। उनकी सरलता, मृदुभाषिता, अनुशासनप्रियता और नेतृत्व क्षमता ने उन्हें सभी कर्मचारियों के हृदय में विशिष्ट स्थान दिलाया।उन्होंने प्रत्येक कर्मचारी का मार्गदर्शन पिता तुल्य भाव से किया तथा व्यक्तिगत और विभागीय समस्याओं में सदैव साथ खड़े रहकर संगठनात्मक परिवार की भावना को सुदृढ़ किया।
वनों की सुरक्षा से लेकर संगठनात्मक एकता तक अमिट योगदान
श्री कुशवाहा जी का योगदान विशेष रूप से—
वनों की सुरक्षा एवं संरक्षण,
वन्यजीवों की रक्षा,
कर्मचारियों के अधिकारों एवं हितों की रक्षा,
विभागीय अनुशासन एवं संगठनात्मक एकता को मजबूत करने,तथा प्रशासनिक दक्षता—इन सभी क्षेत्रों में सदैव स्मरणीय रहेगा। उनकी कार्यशैली ने विभाग को नई दिशा और नई ऊर्जा प्रदान की।उपस्थित कर्मचारियों ने कहा कि “सेवानिवृत्ति सेवा का अंत नहीं, बल्कि जीवन अनुभवों की नई यात्रा का प्रारंभ है। श्री कुशवाहा जी के विचार, संस्कार और मार्गदर्शन सदैव हम सभी के साथ रहेंगे।”
कुशवाहा जी “ मंच पर आए, पूरा परिसर तालियों से गूंज उठा - अपने चिर-परिचित मुस्कान भरे अंदाज़ में उन्होंने कहा—
“अब रजिस्टर में हाजिरी नहीं, पोते-पोतियों की क्लास में उपस्थिति लगेगी !” इस पर पूरा सभागार ठहाकों से भर गया, लेकिन साथ ही सबकी आंखों में अपनापन झलक उठा।।
इस अवसर पर श्री कुशवाहा जी को स्मृति चिन्ह, शॉल एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया। समारोह के दौरान कई कर्मचारियों की आँखें नम हो गईं। सभी ने उनके उज्ज्वल, स्वस्थ, शांत एवं आनंदमय भविष्य की मंगलकामनाएँ कीं।
कार्यक्रम के अंत में वन कर्मचारी परिवार, गेमरेंज नारायणपुर एवं बादलखोल अभ्यारण्य की ओर से श्री महेन्द्र कुमार कुशवाहा जी को सम्मानपूर्वक विदाई दी गई और कहा गया कि —“आप हमारे लिए केवल अधिकारी नहीं, बल्कि परिवार के वरिष्ठ सदस्य के रूप में सदैव स्मरणीय रहेंगे।”
