रानीकोम्बो में भटके हाथी का आतंक,वन विभाग बेखबर, खेतों में हाथी बेखौफ—एक 15 दिन से किसान परेशान — फसलें तबाह, जान पर खतरा
नारायणपुर : 25 दिसम्बर 2025
कुनकुरी वन परिक्षेत्र के नारायणपुर सर्किल अंतर्गत रानीकोम्बो क्षेत्र के किसान इन दिनों झुंड से बिछड़े एक जंगली हाथी के कारण गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। बीते करीब 15 दिनों से यह हाथी लगातार किसानों के खेतों में घुसकर अरहर एवं सब्जियों की फसलों को भारी नुकसान पहुँचा रहा है। हाथी की गतिविधियों से न केवल किसानों की मेहनत पर पानी फिर रहा है, बल्कि उनकी जान पर भी खतरा मंडरा रहा है।
किसानों के अनुसार हाथी का स्थायी आश्रय स्थल रानीकोम्बो के कुम्हारतला जंगल में है। प्रतिदिन शाम ढलते ही हाथी जंगल से निकलकर आसपास के गांवों के खेतों की ओर रुख करता है और रात के अंधेरे में फसलों को रौंद देता है। खेतों में लगी अरहर, सब्जी एवं अन्य फसलों को हाथी लगातार नुकसान पहुँचा रहा है, जिससे किसानों को आर्थिक रूप से भारी क्षति उठानी पड़ रही है।

बीती रात हाथी ने किसान गोविंद भगत,सुधीर भगत,सुनील भगत,दिनेश भगत के खेत में लगी अरहर की पूरी फसल को बर्बाद कर दिया। वन्ही गजेन्द्र नायक की बाड़ी में घुस कर आलू की लगी फसल को पूरी तरह बरबाद कर दिया। पीड़ित किसानो ने बताया कि खेतों में हाथी के प्रवेश से महीनों की मेहनत और लागत एक ही रात में समाप्त हो जाती है। क्षेत्र के अन्य किसानों का भी कहना है कि हाथी कई बार खेतों में मौजूद लोगों पर आक्रामक होकर जानलेवा हमला करने की कोशिश कर चुका है, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है।
ग्रामीणों का आरोप है कि इस समस्या की जानकारी वन कर्मचारी को दी जा चुकी है, लेकिन विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। किसानों का कहना है कि रात के समय हाथी की मौजूदगी की सूचना देने के बावजूद वन विभाग के कर्मचारी गश्त करने नहीं पहुँचते। मजबूरन किसानों को स्वयं ही रातभर जागकर खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है।
लगातार कई दिनों से रतजगा करने के कारण किसान शारीरिक और मानसिक रूप से थक चुके हैं। खेतों की सुरक्षा के दौरान कभी भी हाथी के हमले का खतरा बना रहता है, जिससे जान-माल की सुरक्षा को लेकर किसानों में चिंता बढ़ती जा रही है।प्रभावित किसानों का कहना है कि वन विभाग की ओर से अब तक केवल आश्वासन ही दिया गया हैं, लेकिन निगरानी दल तैनात करने या नियमित रात्रि गश्त जैसी कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। किसानों ने प्रशासन और वन विभाग से जल्द से जल्द हस्तक्षेप कर हाथी को सुरक्षित तरीके से उसके प्राकृतिक आवास में भेजने तथा प्रभावित किसानों को राहत और मुआवजा देने की मांग की है।

